उम्र का पड़ाव: लेखिका कहती हैं कि अब वे पिछली शताब्दी में पैदा हुई थीं और अब वे स्वयं को दादी या नानी की उम्र का महसूस करती हैं। उम्र बढ़ने के साथ उनके पहनावे में गहरा बदलाव आया है—बचपन में जहाँ वे फ्रॉक, निक्कर-वॉकर, गरारे और गहरे चटकीले रंगों (नीले, जामुनी, काले) के कपड़े पहनती थीं, वहीं अब वे हल्के, सफेद और सादे वस्त्र पहनना पसंद करती हैं।
शनिवार का कड़वा नियम: हर शनिवार की सुबह घर के सभी बच्चों को कैस्टर ऑयल (अरंडी का तेल) या ऑलिव ऑयल (जैतून का तेल) पीना अनिवार्य था। उस तेल की गंध से ही लेखिका का जी मिचलाने लगता था। उनका मानना है कि यदि वह कड़वी खुराक न भी पी जाती, तो सेहत पर कोई विशेष अंतर नहीं पड़ता!