मूल परिभाषाएं एवं तत्व
समांतर रेखाएं: एक ही तल में स्थित ऐसी रेखाएं जिन्हें दोनों दिशाओं में कितना भी बढ़ाया जाए, वे कभी नहीं मिलतीं ($AB \parallel CD$)। इनके बीच की लंबवत दूरी सदैव समान रहती है।
तिर्यक रेखा: जो रेखा दो या अधिक रेखाओं को भिन्न बिंदुओं पर काटती है, उसे तिर्यक रेखा कहते हैं। इससे कुल 8 कोण बनते हैं।
कोणों की स्थिति एवं नामकरण
- बाह्य कोण: $\angle 1, \angle 2, \angle 7, \angle 8$ (रेखाओं के बाहर)
- अंतः कोण: $\angle 3, \angle 4, \angle 5, \angle 6$ (रेखाओं के मध्य)
विस्तृत उदाहरण एवं हल
उदाहरण: दो रेखाओं के मध्य क्षेत्र में स्थित कोण ही अंतः कोण कहलाते हैं (3, 4, 5, 6)।
परीक्षक के जाल एवं सावधानियां
यदि रेखा एक ही बिंदु पर दोनों को काटे तो वह तिर्यक नहीं बल्कि संगमी रेखा होगी। दो भिन्न बिंदु अनिवार्य हैं।
वास्तविक जीवन में अनुप्रयोग
रेलवे ट्रैक: पटरियां एवं क्रॉस-ओवर लाइनें समांतर और तिर्यक रेखा का सटीक उदाहरण हैं।