दैनिक जीवन में किसी भी माप के लिए एक संदर्भ बिंदु ($0$) की आवश्यकता होती है। यदि समुद्र तल से ऊपर पर्वत की ऊंचाई $+100\text{ m}$ है, तो समुद्र तल के नीचे पनडुब्बी की गहराई $-100\text{ m}$ लिखी जाती है। इसी प्रकार लाभ $+₹50$ है, तो हानि $-₹50$ होगी। विपरीत दिशा और प्रवृत्तियों को व्यक्त करने के लिए ही ऋणात्मक संख्याओं का उद्भव हुआ।
सभी धनात्मक पूर्णांक ($+1, +2, +3, ...$), शून्य ($0$) और सभी ऋणात्मक पूर्णांक ($-1, -2, -3, ...$) मिलकर पूर्णांक (Integers, प्रतीक $\mathbb{Z}$) कहलाते हैं।
$$\mathbb{Z} = \{..., -4, -3, -2, -1, 0, 1, 2, 3, 4, ...\}$$
- शून्य ($0$): शून्य न तो धनात्मक है और न ही ऋणात्मक; यह संख्या रेखा का उदासीन मूलबिंदु है।
- संख्या रेखा का नियम: संख्या रेखा पर दाईं ओर स्थित संख्या सदैव बाईं ओर स्थित संख्या से बड़ी होती है। अतः: $-10 < -3 < 0 < +4$।
- निरपेक्ष मान (Absolute Value): मूलबिंदु ($0$) से किसी संख्या की वास्तविक दूरी को उसका निरपेक्ष मान कहते हैं। दूरी कभी ऋणात्मक नहीं होती, अतः निरपेक्ष मान सदैव अऋणात्मक होता है। इसे $|x|$ द्वारा दर्शाते हैं।
$$|+a| = a \quad \text{तथा} \quad |-a| = a$$ उदाहरण: $|+8| = 8$ तथा $|-8| = 8$।
उदाहरण: निम्नलिखित पूर्णांकों को आरोही क्रम (छोटे से बड़े) में लिखिए और निरपेक्ष मानों का योग ज्ञात कीजिए: $-16, +9, 0, -4, -21, +15$
चरण 1 (तुलना): ऋणात्मक पूर्णांकों में जिसका संख्यात्मक मान जितना बड़ा होता है, उसका वास्तविक मान उतना ही छोटा होता है।
अतः: $-21 < -16 < -4 < 0 < +9 < +15$
चरण 2 (आरोही क्रम): $\mathbf{-21, -16, -4, 0, +9, +15}$
चरण 3 (निरपेक्ष मानों का योग): $|-21| + |-16| + |-4| + |0| + |+9| + |+15| = 21 + 16 + 4 + 0 + 9 + 15 = \mathbf{65}$
उत्तर: आरोही क्रम: $-21, -16, -4, 0, 9, 15$; निरपेक्ष मानों का योग $= \mathbf{65}$।
छात्र प्रायः सोचते हैं कि चूंकि $18 > 7$, इसलिए $-18 > -7$ होगा। यह पूर्णतः त्रुटिपूर्ण है!
सत्य नियम: संख्या रेखा पर जो संख्या जितनी अधिक बाईं ओर होगी, उसका मान उतना ही कम होगा। अतः $\mathbf{-7 > -18}$।
मौसम विज्ञान में हिमांक से नीचे का तापमान ($-10^\circ\text{C}$), समुद्र विज्ञान में खाइयों की गहराई ($-8,000\text{ m}$), और बैंक खाते में नामे (डेबिट) शेष को ऋणात्मक संख्याओं से दर्शाया जाता है।