बहिष्कोण प्रमेय की उपपत्ति
त्रिभुज की किसी भुजा को बढ़ाने पर बना बहिष्कोण सम्मुख अंतः कोणों के योग के बराबर होता है: $\angle ACD = \angle A + \angle B$।
तीनों बहिष्कोणों का योग
एक ही क्रम में बढ़ाए गए तीनों बहिष्कोणों का योग सदैव $360^\circ$ (चार समकोण) होता है।
विस्तृत उदाहरण एवं हल
यदि बहिष्कोण $120^\circ$ और कोण अनुपात $1:2$ हो: $x + 2x = 120^\circ \implies x = 40^\circ$। कोण $= 40^\circ, 80^\circ$।
परीक्षक के जाल एवं सावधानियां
आसन्न कोण को न जोड़ें, केवल सुदूर सम्मुख अंतः कोणों को ही जोड़ें।
वास्तविक जीवन में अनुप्रयोग
समुद्री नौवहन: प्रकाशस्तंभ से दूरी नापने में बहिष्कोण ज्यामिति का उपयोग होता है।