Follow Us
माध्यम चुनें / Select Medium:
Eng (English) Beng (বাংলা) Hindi (हिन्दी)
WBB • कक्षा 7 • Mathematics (গণিত প্রভা) • अध्याय 9
अनुमानित समय: 50 मिनट
प्रगति: अध्ययनरत

सर्वांगसमता की अवधारणा

पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (WBBSE) कक्षा 7 गणित प्रभा पाठ्यक्रम के अध्याय 9 "सर्वांगसमता की संकल्पना" (Concept of Congruence) में आपका स्वागत है। TargetExams Gold-Standard 5-चरणीय शिक्षण प्रणाली पर आधारित यह अध्याय सर्वांगसमता के मूल सिद्धांतों, अध्यारोपण विधि (Superposition), सर्वांगसमता के प्रतीक ($\cong$), सर्वांगसमता के चारों प्रामाणिक मानदंडों (SSS, SAS, ASA/AAS, RHS), AAA तथा ASS क्यों सर्वांगसमता नियम नहीं हैं के तार्किक प्रमाण, और सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत भागों (CPCTC) की विस्तृत व्याख्या करता है।

🪙 सिक्के, बिस्कुट और कारखाने के उत्पाद: प्रकृति में सर्वांगसमता का क्या रहस्य है?

एक ही पैकेट से एक रुपये के दो नए सिक्के या दो पारले-जी बिस्कुट निकालकर एक के ऊपर एक रखने पर क्या होता है?

वे एक-दूसरे को पूरी तरह ढक लेते हैं—एक भी सिरा बाहर नहीं निकलता। ज्यामिति में इन्हें सर्वांगसम (Congruent) कहा जाता है, जिसका अर्थ है "सभी अंगों से समान" (Same Shape and Same Size)।

परंतु दो त्रिभुजों के सभी 6 भागों (3 भुजाएं और 3 कोण) को नापे बिना, केवल 3 अंगों की जांच से हम 100% कैसे निश्चित हो सकते हैं कि वे सर्वांगसम हैं? और किन 3 अंगों के ज्ञात होने पर भी सर्वांगसमता की गारंटी नहीं मिलती? इस रहस्य को इस अध्याय में सुलझाएं।

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (WBBSE) कक्षा 7 गणित प्रभा पाठ्यक्रम के अध्याय 9 "सर्वांगसमता की संकल्पना" (Concept of Congruence) में आपका स्वागत है। TargetExams Gold-Standard 5-चरणीय शिक्षण प्रणाली पर आधारित यह अध्याय सर्वांगसमता के मूल सिद्धांतों, अध्यारोपण विधि (Superposition), सर्वांगसमता के प्रतीक ($\cong$), सर्वांगसमता के चारों प्रामाणिक मानदंडों (SSS, SAS, ASA/AAS, RHS), AAA तथा ASS क्यों सर्वांगसमता नियम नहीं हैं के तार्किक प्रमाण, और सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत भागों (CPCTC) की विस्तृत व्याख्या करता है।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • ज्यामितीय आकृतियों के आकार एवं आमाप की समझ
  • त्रिभुज के 3 कोणों एवं 3 भुजाओं का ज्ञान
  • त्रिभुज के प्रकार

इस अध्याय के लक्ष्य

  • सर्वांगसमता की परिभाषा एवं अध्यारोपण विधि को समझना
  • त्रिभुज के 4 प्रामाणिक नियमों (SSS, SAS, ASA, RHS) का प्रयोग
  • AAA एवं ASS नियम क्यों अमान्य हैं का वैज्ञानिक कारण जानना
  • सर्वांगसम त्रिभुजों के शीर्षों की एकैकी संगति लिखना
  • CPCTC द्वारा अज्ञात कोणों व भुजाओं की समता सिद्ध करना

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 अवधारणा 1: सर्वांगसमता की परिभाषा,...
2 अवधारणा 2: भुजा-भुजा-भुजा या SSS सर...
3 अवधारणा 3: भुजा-कोण-भुजा या SAS निय...
4 अवधारणा 4: कोण-भुजा-कोण বা ASA एवं...
5 अवधारणा 5: समकोण-कर्ण-भुजा বা RHS न...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

अवधारणा 1: सर्वांगसमता की परिभाषा, अध्यारोपण विधि एवं प्रतीक

चरण 1
मूल सिद्धांत एवं परिभाषा (Core Definition)

सर्वांगसमता: जब दो आकृतियों का आकार (Shape) और आमाप (Size) दोनों पूर्णतः समान हों, तो वे सर्वांगसम (Congruent) कहलाती हैं।

अध्यारोपण विधि (Superposition): एक आकृति को उठाकर दूसरी पर रखने पर यदि वह उसे पूरी तरह ढक ले, तो वे सर्वांगसम होती हैं।

प्रतीक: $\cong$ ($\sim$ समान आकार दर्शाता है, $=$ समान माप दर्शाता है)।

चरण 2
संगत भाग एवं एकैकी संगति

यदि $\triangle ABC \cong \triangle DEF$ है, तो $A \leftrightarrow D, B \leftrightarrow E, C \leftrightarrow F$। संगत भुजाएं ($AB = DE, BC = EF, AC = DF$) और संगत कोण ($\angle A = \angle D, \angle B = \angle E, \angle C = \angle F$) बराबर होते हैं।

चरण 3
हल सहित उदाहरण (Worked Example)

उदाहरण: यदि $\triangle PQR \cong \triangle XYZ$ है, तो भुजा $QR$ के संगत भुजा $YZ$ होगी और कोण $\angle P$ के संगत कोण $\angle X$ होगा।

चरण 4
सावधानी (Common Mistake)

शीर्षों का क्रम बदलना: $\triangle ABC \cong \triangle DEF$ की जगह $\triangle ABC \cong \triangle EDF$ लिखना गलत होगा। क्रम संगत शीर्षों के अनुसार ही होना चाहिए।

चरण 5
व्यावहारिक अनुप्रयोग (Real-World Application)

औद्योगिक विनिर्माण: नट-बोल्ट और मोबाइल फोन के पार्ट्स सर्वांगसम बनाए जाते हैं ताकि वे किसी भी उपकरण में सटीक रूप से फिट बैठ सकें।

अवधारणा 2: भुजा-भुजा-भुजा या SSS सर्वांगसमता नियम (SSS Criterion)

चरण 1
मूल नियम (SSS Criterion)

यदि एक त्रिभुज की तीनों भुजाएं दूसरे त्रिभुज की संगत तीनों भुजाओं के बराबर हों, तो दोनों त्रिभुज सर्वांगसम होते हैं।

चरण 2
बिना कोण नापे सर्वांगसमता क्यों?

त्रिभुज की ज्यामितीय दृढ़ता के कारण, जब तीनों भुजाएं निश्चित होती हैं तो उनके बीच के कोण भी स्वतः निश्चित हो जाते हैं। अतः तीनों भुजाएं समान होने पर त्रिभुज सर्वांगसम हो जाते हैं।

चरण 3
हल सहित उदाहरण (Worked Example)

उदाहरण: यदि $\triangle ABC$ में $AB=5, BC=6, AC=7$ और $\triangle PQR$ में $PQ=7, QR=5, PR=6$ हो, तो $AB=QR, BC=PR, AC=PQ$ होने से $\triangle ABC \cong \triangle QRP$ (SSS नियम द्वारा)।

चरण 4
सावधानी (Common Mistake)

बराबर भुजाओं के सम्मुख शीर्षों का मिलान किए बिना सीधे $\triangle ABC \cong \triangle PQR$ लिख देना गलत है।

चरण 5
व्यावहारिक अनुप्रयोग (Real-World Application)

रेलवे पुलों के ट्रस: पुल के सभी त्रिकोणीय ट्रस की भुजाएं SSS नियम से बराबर बनाकर समान शक्ति सुनिश्चित की जाती है।

अवधारणा 3: भुजा-कोण-भुजा या SAS नियम बनाम अमान्य ASS नियम (SAS vs False ASS)

चरण 1
मूल नियम: अंतर्गत कोण की अनिवार्यता (SAS)

दो भुजाएं और उनके बीच का अंतर्गत कोण (Included Angle) बराबर होने पर ही त्रिभुज सर्वांगसम होते हैं।

चरण 2
ASS सर्वांगसमता नियम क्यों नहीं है?

यदि कोण अंतर्गत न हो (ASS/SSA), तो परकार का चाप आधार को दो अलग-अलग बिंदुओं पर काट सकता है, जिससे एक न्यूनकोण और एक अधिककोण त्रिभुज बन जाते हैं जो कभी सर्वांगसम नहीं होते। इसलिए ASS नियम अमान्य है।

चरण 3
हल सहित उदाहरण (Worked Example)

उदाहरण: $AB=4$ सेमी, $AC=5$ सेमी तथा कोण $\angle A = 50^\circ$। चूंकि $\angle A$ भुजा $AB$ और $AC$ का अंतर्गत कोण है, अतः यह SAS नियम से सर्वांगसमता सिद्ध करेगा।

चरण 4
सावधानी (Common Mistake)

कोण देखते ही SAS न लिखें; पहले जांचें कि वह दोनों भुजाओं के मिलन बिंदु पर बना अंतर्गत कोण है या नहीं।

चरण 5
व्यावहारिक अनुप्रयोग (Real-World Application)

3D कंप्यूटर गेमिंग ग्राफिक्स: पॉलीगॉन मेशिंग में सतहों के प्रतिरूपण के लिए SAS ज्यामिति का प्रयोग होता है।

अवधारणा 4: कोण-भुजा-कोण বা ASA एवं AAS नियम बनाम अमान्य AAA नियम (ASA, AAS vs False AAA)

चरण 1
मूल नियम: ASA एवं AAS

दो कोण और अंतर्गत भुजा बराबर होने पर ASA नियम से सर्वांगसम होते हैं। यदि भुजा अंतर्गत न हो (AAS), तो भी तीसरे कोण को $180^\circ$ से निकालकर ASA में बदलकर सर्वांगसमता सिद्ध होती है।

चरण 2
AAA सर्वांगसमता नियम क्यों नहीं है?

तीनों कोण बराबर होने से आकृतियों का आकार (Shape) समान होता है लेकिन उनका आमाप (Size) छोटा या बड़ा हो सकता है (जैसे 2 सेमी और 50 मीटर भुजा वाले समबाहु त्रिभुज दोनों 60°-60°-60° होते हैं)। वे समरूप (Similar) होते हैं, सर्वांगसम नहीं! अतः AAA अमान्य है।

चरण 3
हल सहित उदाहरण (Worked Example)

उदाहरण: $\angle B = 60^\circ, \angle C = 40^\circ, BC = 5$ सेमी। दूसरे त्रिभुज में भी $\angle Q = 60^\circ, \angle R = 40^\circ, QR = 5$ सेमी होने पर ASA नियम से त्रिभुज सर्वांगसम हैं।

चरण 4
सावधानी (Common Mistake)

AAS में संगत भुजा का ध्यान रखें—दी गई भुजा समान कोण के सामने वाली ही होनी चाहिए।

चरण 5
व्यावहारिक अनुप्रयोग (Real-World Application)

नदी की चौड़ाई मापना: किनारे पर दो कोण और आधार नापकर ASA से बिना नदी पार किए उसकी चौड़ाई निकाली जाती है।

अवधारणा 5: समकोण-कर्ण-भुजा বা RHS नियम एवं CPCTC सिद्धांत (RHS & CPCTC)

चरण 1
मूल नियम: RHS सर्वांगसमता

दो समकोण त्रिभुजों में, एक का कर्ण और एक भुजा दूसरे के कर्ण और संगत भुजा के बराबर हों, तो RHS नियम से वे सर्वांगसम होते हैं।

चरण 2
CPCTC का जादू (Corresponding Parts)

CPCTC: "सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत भाग बराबर होते हैं।" एक बार त्रिभुजों के सर्वांगसम सिद्ध हो जाने पर शेष सभी अज्ञात भुजाएं और कोण स्वतः बराबर हो जाते हैं।

चरण 3
हल सहित उदाहरण (Worked Example)

उदाहरण: समद्विबाहु त्रिभुज $ABC$ में शीर्ष $A$ से आधार $BC$ पर लंब $AD$ खींचने पर, $\triangle ABD \cong \triangle ACD$ (RHS द्वारा), जिससे $BD = CD$ (CPCTC द्वारा) सिद्ध होता है।

चरण 4
सावधानी (Common Mistake)

समकोण त्रिभुज देखते ही RHS न लिखें; यदि कर्ण नहीं दिया और केवल दो लंबवत भुजाएं दी हैं, तो वह SAS नियम होता है।

चरण 5
व्यावहारिक अनुप्रयोग (Real-World Application)

खगोलीय दूरबीन के दर्पण: अंतरिक्ष दूरबीन के षट्कोणीय दर्पणों को RHS एवं सर्वांगसमता नियमों से सटीक बनाया जाता है।

महत्वपूर्ण सूत्र, सर्वसमिकाएँ एवं प्रमेय

सर्वांगसमता का प्रतीक (Congruence Symbol)
$$\cong$$
समान आकार (~) तथा समान आमाप (=) का संयोजन।
SSS सर्वांगसमता नियम
$$AB = DE, \, BC = EF, \, AC = DF \implies \triangle ABC \cong \triangle DEF$$
तीनों संगत भुजाएं समान होती हैं।
SAS सर्वांगसमता नियम
$$AB = DE, \, \angle B = \angle E, \, BC = EF \implies \triangle ABC \cong \triangle DEF$$
कोण दोनों भुजाओं का अंतर्गत कोण होना अनिवार्य है।
CPCTC सिद्धांत
ABC DEF ⇒ सभी संगत अंग बराबर
Corresponding Parts of Congruent Triangles are Congruent.

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
यदि $\triangle ABC \cong \triangle PQR$ है और $AB=5$ सेमी, $\angle B=60^\circ$ है, तो $PQ$ और $\angle Q$ का मान क्या होगा?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
शीर्षों की संगति से $PQ = AB = 5$ सेमी और $\angle Q = \angle B = 60^\circ$ (CPCTC द्वारा)।
उदाहरण 2
क्या दो समबाहु त्रिभुज हमेशा सर्वांगसम होते हैं?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
नहीं, वे समरूप (Similar) होते हैं परंतु सर्वांगसम नहीं, क्योंकि उनकी भुजाओं की लंबाई अलग हो सकती है। AAA सर्वांगसमता नियम नहीं है।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

शीर्षों का सही क्रम न मिलाना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

बराबर कोणों और भुजाओं के अनुसार ही $\triangle ABC \cong \triangle DEF$ का क्रम लिखें।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

AAA को सर्वांगसमता नियम मानना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

AAA केवल रूप बताता है, माप नहीं। कम से कम एक भुजा समान होना आवश्यक है।

सर्वांगसमता ज्यामितीय मॉडल: अध्यारोपण एवं संगत भाग

त्रिभुजों की सर्वांगसमता: अध्यारोपण एवं संगत अंग (△ABC ≅ △DEF) B C A ≅ सर्वांगसम E F D संगत शीर्ष: A ↔ D, B ↔ E, C ↔ F | क्षेत्रफल और परिमाप पूर्णतः समान

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
सर्वांगसमता का अर्थ: समान आकार एवं समान आमाप (Same Shape and Same Size), प्रतीक $\cong$।
मुख्य बिंदु 2
अध्यारोपण विधि में एक आकृति दूसरी को पूर्णतः और अविकल ढक लेती है।
मुख्य बिंदु 3
त्रिभुजों की सर्वांगसमता के 4 प्रामाणिक नियम: SSS, SAS, ASA (या AAS), और RHS।
मुख्य बिंदु 4
SAS में कोण अनिवार्य रूप से दोनों भुजाओं के बीच का "अंतर्गत कोण" ही होना चाहिए।
मुख्य बिंदु 5
ASS या SSA कोई सर्वांगसमता नियम नहीं है (द्वैधता की संभावना होती है)।
मुख्य बिंदु 6
AAA कोई सर्वांगसमता नियम नहीं है (यह केवल समरूपता दर्शाता है, आमाप नहीं)।
मुख्य बिंदु 7
RHS नियम में समकोण त्रिभुज का कर्ण और एक भुजा बराबर होना अनिवार्य है।
मुख्य बिंदु 8
CPCTC: सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत कोण और संगत भुजाएं परस्पर बराबर होती हैं।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
दो समबाहु त्रिभुजों के सभी कोण 60° होते हुए भी वे सर्वांगसम क्यों नहीं हो सकते?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: क्योंकि उनकी भुजाओं की लंबाई भिन्न हो सकती है। वे समरूप (Similar) तो हैं परंतु सर्वांगसम नहीं, क्योंकि AAA सर्वांगसमता की कसौटी नहीं है।
आकार एवं आमाप पर विचार करें।
2
यदि △ABC ≅ △RPQ हो, तो BC भुजा के संगत भुजा और ∠A के संगत कोण कौन से होंगे?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: BC के संगत भुजा PQ होगी तथा ∠A के संगत कोण ∠R होगा।
शीर्षों का क्रम: A ↔ R, B ↔ P, C ↔ Q।
3
एक समकोण त्रिभुज में लंब 3 सेमी और आधार 4 सेमी है। दूसरे में भी 3 सेमी और 4 सेमी है। वे किस नियम से सर्वांगसम हैं?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: वे SAS नियम से सर्वांगसम हैं (क्योंकि समकोण दोनों ज्ञात भुजाओं के बीच का अंतर्गत कोण है)।
समकोण दोनों भुजाओं का अंतर्गत कोण है।
4
CPCTC का पूरा नाम और इसका ज्यामिति में क्या महत्व है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: CPCTC का अर्थ है "Corresponding Parts of Congruent Triangles are Congruent"। त्रिभुजों को सर्वांगसम सिद्ध करने के बाद उनके शेष अज्ञात अंगों को बराबर सिद्ध करने में इसका उपयोग होता है।
Corresponding Parts of Congruent Triangles are Congruent.
5
दो कोण और एक भुजा ज्ञात होने पर किन नियमों से सर्वांगसमता सिद्ध होती है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: यदि भुजा अंतर्गत हो तो ASA नियम से, और यदि भुजा अंतर्गत न हो तो AAS नियम से (या तीसरे कोण को 180° से घटाकर ASA बनाकर) सर्वांगसमता सिद्ध होती है।
ASA और AAS दोनों पर विचार करें।
अध्याय का अध्ययन पूर्ण हुआ?
अभ्यास के लिए तैयार?

ऑनलाइन CBT टेस्ट देकर तैयारी का मूल्यांकन करें

झारखण्ड बोर्ड परीक्षा पैटर्न पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्नों का ऑनलाइन टेस्ट दें। तुरंत परिणाम, समय विश्लेषण और प्रत्येक प्रश्न का विस्तृत हल प्राप्त करें।

कक्षा 7 Mathematics (গণিত প্রভা) के सभी अध्याय

अध्याय 1: पिछले पाठों की पुनरावृत्ति अध्याय 2: अनुपात अध्याय 3: समानुपात अध्याय 4: पूर्णांकों का जोड़, घटाव, गुणा एवं भाग अध्याय 5: घातांक की अवधारणा अध्याय 6: बीजीय संक्रियाएँ अध्याय 7: कम्पास की सहायता से विशिष्ट कोणों की रचना अध्याय 8: त्रिभुजों की रचना अध्याय 9: सर्वांगसमता की अवधारणा अध्याय 10: सन्निकटन अध्याय 11: भिन्नों का वर्गमूल अध्याय 12: बीजीय सूत्र अध्याय 13: समांतर रेखाएँ एवं तिर्यक रेखा अध्याय 14: त्रिभुज के गुणधर्म अध्याय 15: समय और दूरी अध्याय 16: द्वि-दंड आलेख अध्याय 17: आयत और वर्ग का क्षेत्रफल अध्याय 18: सममिति अध्याय 19: गुणनखंडन अध्याय 20: चतुर्भुजों का वर्गीकरण अध्याय 21: चतुर्भुजों की रचना अध्याय 22: समीकरण निर्माण एवं समाधान

AI अध्ययन मित्र

त्वरित शंका समाधान

सर्वांगसमता की अवधारणा में कोई संदेह या प्रश्न है? हमारे AI अध्ययन मित्र से तुरंत समझें।