एक समबाहु त्रिभुज की तीनों भुजाएं बराबर होती हैं और प्रत्येक कोण 60° होता है। जब हम किसी त्रिज्या से चाप लगाते हैं और त्रिज्या बदले बिना उसी चाप पर पुनः काटते हैं, तो केंद्र पर ठीक 60° का कोण निर्मित होता है।
- किरण $OA$ खींचिए।
- $O$ को केंद्र मानकर किसी त्रिज्या का चाप खींचिए जो $OA$ को $P$ पर काटे।
- त्रिज्या अपरिवर्तित रखते हुए $P$ से चाप पर काटिए जो $Q$ पर मिले।
- $O$ और $Q$ को मिलाइए। $\angle AOQ = \mathbf{60^\circ}$।
- $Q$ से उसी त्रिज्या से अगला चाप काटने पर $\mathbf{120^\circ}$ प्राप्त होता है।
उदाहरण: पटरी व परकार से 60° का कोण बनाइए।
किरण $BC$ खींची। $B$ से चाप लगाया जो $BC$ को $X$ पर काटता है। $X$ से उसी त्रिज्या का चाप $Y$ पर काटा। $B$ और $Y$ को मिलाया। $\angle ABC = \mathbf{60^\circ}$।
यदि त्रिज्या थोड़ी भी बदल गई तो कोण 60° नहीं रहेगा। परकार का पेंच कसकर रखें।
मधुमक्खी के छत्ते के षट्भुज और फर्श की टाइलों में 60° और 120° का कोण प्रयुक्त होता है।