अंग्रेजी शब्द 'Law' ट्यूटोनिक मूल शब्द 'Lag' से निकला है, जिसका अर्थ है स्थिर, समरूप या अपरिवर्तनीय। राजनीति विज्ञान एवं विधिशास्त्र में कानून का अभिप्राय राज्य की संप्रभु सत्ता द्वारा निर्मित, मान्यता प्राप्त तथा लागू किए जाने वाले उन अनिवार्य नियमों से है जो व्यक्तियों के बाह्य आचरण को नियंत्रित करते हैं:
- जॉन ऑस्टिन (विश्लेषणात्मक विधिशास्त्र): 'कानून संप्रभु का वह आदेश है, जिसके पीछे बाध्यकारी दंड या अनुशास्ति (Sanction) का भय होता है।'
- टी.ई. हॉलैंड: 'संप्रभु राजनीतिक सत्ता द्वारा लागू किए जाने वाले मानव के बाह्य आचरण के सामान्य नियम ही कानून हैं।'
- वुडरो विल्सन: 'कानून स्थापित विचारों और आदतों का वह भाग है जिसे समान नियमों के रूप में औपचारिक मान्यता प्राप्त है तथा जो सरकार के अधिकार और शक्ति द्वारा समर्थित है।'
- सालमंड: 'न्याय प्रशासन में राज्य द्वारा स्वीकृत एवं प्रयुक्त सिद्धांतों का निकाय ही कानून है।'
- रीति-रिवाज एवं प्रथाएं (Customs): प्राचीन समय से समाज में स्वतः विकसित वे आचरण जिन्हें कालान्तर में अदालतों द्वारा मान्यता देकर कानूनी बल प्रदान किया गया (उदा. ब्रिटिश कॉमन लॉ)।
- धर्म (Religion): प्राचीन व मध्यकालीन समाजों में धार्मिक संहिताएं ही नागरिक व आपराधिक कानूनों का आधार थीं (उदा. हिंदू धर्मशास्त्र, इस्लामिक शरीयत)।
- न्यायिक निर्णय (Judicial Precedents): उच्च न्यायालयों द्वारा दिए गए वे ऐतिहासिक निर्णय जो भविष्य के मुकदमों के लिए बाध्यकारी नजीर बन जाते हैं।
- विधि वेत्ताओं की टीकाएं (Scientific Commentaries): कोक, ब्लैकस्टोन, डायसी जैसे प्रख्यात न्यायविदों के ग्रंथ जो कानूनों की प्रामाणिक व्याख्या में सहायक होते हैं।
- साम्या या औचित्य (Equity): जहाँ संहिताबद्ध कानून मौन या कठोर हो, वहाँ न्यायाधीश अपने विवेक, निष्पक्षता और स्वाभाविक न्यायबोध के आधार पर निर्णय देते हैं।
- विधानमंडल / व्यवस्थापिका (Legislation): आधुनिक लोकतांत्रिक युग में जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों द्वारा निर्मित विधियां कानून का सबसे प्रत्यक्ष व मुख्य स्रोत हैं।
| तुलना का आधार | विधि / कानून (Law) | नैतिकता (Morality) |
|---|---|---|
| नियंत्रण का क्षेत्र | केवल व्यक्ति के बाह्य आचरण व क्रियाकलापों को नियंत्रित करता है। | व्यक्ति के आंतरिक विचारों, मनोभावों, अंतरात्मा और चरित्र को नियंत्रित करती है। |
| प्रवर्तन शक्ति | राज्य की संप्रभु शक्ति, पुलिस तथा शारीरिक दंड के प्रावधानों द्वारा लागू। | अंतरात्मा की आवाज, सामाजिक प्रतिष्ठा तथा आत्म-ग्लानि द्वारा मार्गदर्शित। |
| निश्चितता व समरूपता | सुस्पष्ट, संहिताबद्ध, लिखित तथा संपूर्ण राज्य में समान रूप से लागू। | अस्पष्ट, परिवर्तनशील तथा विभिन्न समाजों व व्यक्तियों में भिन्न-भिन्न। |