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WBB • कक्षा XI • Political Science • अध्याय 12
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

चुनाव और प्रतिनिधित्व

चुनाव और प्रतिनिधि संस्थाएं आधुनिक संवैधानिक लोकतंत्र की जीवनरेखा हैं, जिनके माध्यम से जनता की संप्रभु सत्ता वैध राजनीतिक प्राधिकार में परिवर्तित होती है। भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण राष्ट्र में प्रत्यक्ष लोकतंत्र की कार्यपद्धति असंभव है; इसलिए सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार (अनुच्छेद 326) के आधार पर नियमित, स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनावों के माध्यम से चुने गए जनप्रतिनिधियों द्वारा शासन संचालित होता है। भारतीय संविधान के भाग XV (अनुच्छेद 324 से 329) के तहत संसद, राज्य विधानमंडलों, राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति के चुनावों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण का दायित्व एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था—भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को सौंपा गया है। इस अध्याय में सरल बहुमत प्रणाली (FPTP) तथा आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली (PR) का तुलनात्मक अध्ययन, निर्वाचन आयोग की संवैधानिक शक्तियां, तथा ईवीएम, वीवीपैट, नोटा और राजनीति के अपराधीकरण को रोकने हेतु किए गए ऐतिहासिक सुधारों का विस्तृत विवेचन शामिल है।

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

चुनाव और प्रतिनिधित्व के सिद्धांतों का अध्ययन राजनीति विज्ञान के विद्यार्थियों के लिए आधुनिक शासन व्यवस्था के क्रियान्वयन को समझने का बुनियादी आधार है। इससे विद्यार्थी यह समझ पाते हैं कि मतदाताओं का मत किस प्रकार संसद में सीटों में बदलता है, भारत ने लोकसभा चुनावों में सरल बहुमत प्रणाली और राष्ट्रपति व राज्यसभा चुनावों में आनुपातिक प्रतिनिधित्व क्यों अपनाया, तथा आदर्श आचार संहिता (MCC) व न्यायपालिका के सुधारवादी निर्णय किस प्रकार स्वतंत्र और निष्पक्ष लोकतांत्रिक प्रतिस्पर्धा को सुनिश्चित करते हैं।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. लोकतंत्र एवं प्रतिनिधित्व: सार्व...
2 2. सरल बहुमत प्रणाली (FPTP): कार्यव...
3 3. आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली (P...
4 4. भारत का निर्वाचन आयोग (ECI): संव...
5 5. आदर्श आचार संहिता (MCC) एवं चुना...
6 6. भारतीय चुनाव प्रणाली की चुनौतिया...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. लोकतंत्र एवं प्रतिनिधित्व: सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार

प्रत्यक्ष लोकतंत्र से प्रतिनिधि सरकार एवं मताधिकार का विस्तार

लोकतांत्रिक दर्शन की आधारशिला यह है कि सर्वोच्च शक्ति जनता में निहित होती है। प्राचीन यूनान के छोटे नगर-राज्यों में जहां नागरिक प्रत्यक्ष रूप से विधि-निर्माण में भाग लेते थे (प्रत्यक्ष लोकतंत्र), आधुनिक विशाल आबादी वाले राज्यों में वह संभव नहीं है। अतः आधुनिक युग में नागरिक अपने प्रतिनिधियों को चुनकर अप्रत्यक्ष या प्रतिनिधिक लोकतंत्र का संचालन करते हैं।

सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार (अनुच्छेद 326):
  • संवैधानिक प्रावधान: अनुच्छेद 326 यह सुनिश्चित करता है कि लोकसभा और प्रत्येक राज्य की विधानसभा के चुनाव सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के आधार पर होंगे। धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर किसी भी नागरिक को मताधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।
  • स्वतंत्रता के समय का ऐतिहासिक साहस: 1950 में जब देश की 80% से अधिक आबादी अशिक्षित और निर्धन थी, तब पश्चिमी आलोचकों को संदेह था कि भारत में वयस्क मताधिकार सफल होगा या नहीं। परंतु भारतीय मतदाताओं ने सिद्ध कर दिया कि राजनीतिक विवेक साक्षरता का मोहताज नहीं होता।
  • 61वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1988: प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल में 61वें संशोधन द्वारा मतदान की न्यूनतम आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष कर दी गई, जिसने करोड़ों युवाओं को देश के नीति-निर्माण में भागीदार बनाया।
  • एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य: डॉ. बी.आर. आंबेडकर ने रेखांकित किया कि वयस्क मताधिकार राजनीतिक समानता का प्रतीक है, जहां धनी और निर्धन दोनों के मत का गणितीय मूल्य सर्वथा समान है।

2. सरल बहुमत प्रणाली (FPTP): कार्यविधि, गुण एवं दोष

फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट (First-Past-The-Post) अथवा बहुलता प्रणाली

भारत में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के आम चुनावों के लिए सरल बहुमत प्रणाली (FPTP) का उपयोग किया जाता है। इसे 'बहुलता प्रणाली' (Plurality System) भी कहा जाता है।

प्रणाली का आयामनियम एवं व्यावहारिक प्रक्रिया
एकल सदस्यीय निर्वाचन क्षेत्रपूरे देश को (लोकसभा हेतु 543) अथवा राज्य को छोटे-छोटे भौगोलिक क्षेत्रों में बांटा जाता है। प्रत्येक क्षेत्र से केवल एक प्रत्याशी निर्वाचित होता है।
विजय का नियम (Plurality)जिस प्रत्याशी को अन्य सभी प्रत्याशियों से अधिक मत प्राप्त होते हैं, वह विजयी घोषित होता है। कुल वैध मतों का 50% से अधिक (पूर्ण बहुमत) पाना आवश्यक नहीं है।
भारत द्वारा चयन के कारणसंविधान निर्माताओं ने इसे इसलिए चुना क्योंकि: (1) यह सामान्य मतदाताओं के लिए समझने में बेहद सरल है, (2) यह स्पष्ट बहुमत देकर स्थिर सरकार सुनिश्चित करता है, तथा (3) मतदाता और स्थानीय प्रतिनिधि के बीच सीधा जवाबदेही का संबंध रहता है।
प्रमुख कमियां / दोषवोट प्रतिशत और सीटों के अनुपात में भारी अंतर रहता है। कोई दल मात्र 35-40% वोट पाकर भी संसद की 60-70% सीटें जीतकर सरकार बना लेता है (बनावटी बहुमत)। पराजित प्रत्याशियों को मिले करोड़ों वोट व्यर्थ चले जाते हैं।

3. आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली (PR): एकल संक्रमणीय मत एवं सूची व्यवस्था

मतों एवं सीटों का सटीक अनुपात: एकल संक्रमणीय मत प्रणाली

आनुपातिक प्रतिनिधित्व (Proportional Representation - PR) वह निर्वाचन दर्शन है जिसका उद्देश्य विधायिका में प्रत्येक राजनीतिक दल को उसके द्वारा प्राप्त मतों के सटीक अनुपात में सीटें दिलाना है, जिससे किसी भी नागरिक का वोट व्यर्थ न जाए।

आनुपातिक प्रतिनिधित्व के मुख्य प्रकार एवं भारतीय संदर्भ:
  • सूची प्रणाली (List System): इज़राइल और नीदरलैंड जैसे देशों में प्रचलित। प्रत्येक दल अपने उम्मीदवारों की सूची प्रस्तुत करता है। मतदाता दलों को वोट देते हैं और दल को प्राप्त मतों के प्रतिशत के अनुपात में सूची से क्रमानुसार सदस्य चुने जाते हैं।
  • एकल संक्रमणीय मत प्रणाली (Single Transferable Vote - STV): थॉमस हेयर द्वारा प्रतिपादित (हेयर प्रणाली)। इसमें बहु-सदस्यीय क्षेत्र होते हैं और मतदाता उम्मीदवारों को वरीयता क्रम (1st, 2nd, 3rd) में वोट देता है। विजयी होने के लिए प्रत्याशी को एक निश्चित चुनावी कोटा पाना होता है: कोटा = [कुल वैध मत / (सीटें + 1)] + 1। अतिरिक्त मतों व पराजित उम्मीदवारों के मतों को अगली पसंद के अनुसार स्थानांतरित किया जाता है।
  • भारत में इसका प्रयोग: भारतीय संविधान में अप्रत्यक्ष चुनावों हेतु इस प्रणाली को अपनाया गया है: (1) भारत के राष्ट्रपति का चुनाव (अनुच्छेद 55), (2) उपराष्ट्रपति का चुनाव (अनुच्छेद 66), (3) राज्यसभा के सदस्यों का चुनाव (अनुच्छेद 80), तथा (4) राज्य विधान परिषदों के चुनाव।
  • लाभ व हानियां: लाभ यह है कि अल्पसंख्यकों और छोटे दलों को उचित प्रतिनिधित्व मिलता है। हानि यह है कि मतगणना अत्यंत जटिल होती है, यह कमजोर गठबंधन सरकारों को जन्म दे सकती है और प्रतिनिधि का मतदाता से सीधा संपर्क समाप्त हो जाता है।

4. भारत का निर्वाचन आयोग (ECI): संवैधानिक स्थिति, संरचना व शक्तियां

अनुच्छेद 324: भारतीय लोकतंत्र का निष्पक्ष एवं स्वायत्त प्रहरी

चुनाव प्रक्रिया को कार्यपालिका के राजनीतिक दबाव से मुक्त रखने हेतु संविधान के अनुच्छेद 324 द्वारा संसद, राज्य विधानमंडलों, राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति के सभी चुनावों के 'अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण' की संपूर्ण शक्ति भारत निर्वाचन आयोग में निहित की गई है।

संस्थागत पहलूसंवैधानिक उपबंध एवं अधिकार
संरचना एवं बहु-सदस्यीय स्वरूपप्रारंभ में एक सदस्यीय रहने के बाद अक्टूबर 1993 से यह स्थायी रूप से तीन सदस्यीय निकाय बन चुका है, जिसमें एक मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) तथा दो अन्य चुनाव आयुक्त (ECs) होते हैं। तीनों को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान वेतन व दर्जा प्राप्त है तथा निर्णय बहुमत से लिए जाते हैं।
पदमुक्ति से संवैधानिक संरक्षणअनुच्छेद 324(5) के अनुसार मुख्य चुनाव आयुक्त को राष्ट्रपति द्वारा केवल उसी रीति से हटाया जा सकता है जिस रीति से सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है (संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत द्वारा महाभियोग)। अन्य आयुक्तों को सीईसी की सिफारिश के बिना नहीं हटाया जा सकता।
प्रमुख प्रशासनिक कार्य(1) सटीक मतदाता सूची तैयार करना व उसका पुनरीक्षण, (2) परिसीमन आयोग के साथ क्षेत्रों का सीमांकन, (3) चुनाव तिथियों की घोषणा व अधिसूचना, (4) दलों को राष्ट्रीय व राज्य स्तरीय दल के रूप में मान्यता देना तथा चुनाव चिह्न आवंटित करना।
अर्ध-न्यायिक एवं परामर्शकारी शक्तियांदलों के विभाजन व चुनाव चिह्नों के विवाद में न्यायालय की तरह फैसला सुनाता है। अनुच्छेद 103 व 192 के तहत संसद व विधानसभा सदस्यों की अयोग्यता पर राष्ट्रपति व राज्यपाल को अनिवार्य परामर्श देता है।

5. आदर्श आचार संहिता (MCC) एवं चुनावी शुचिता की निगरानी

चुनावी प्रतिस्पर्धा में समान अवसर (Level Playing Field) का संरक्षण

आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct - MCC) राजनीतिक दलों की आपसी सहमति से विकसित दिशा-निर्देशों का वह समुच्चय है जो चुनाव प्रचार को स्वच्छ, नैतिक और निष्पक्ष बनाए रखने हेतु लागू किया जाता है। यह निर्वाचन आयोग द्वारा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करते ही तत्काल प्रभाव से लागू हो जाती है।

आदर्श आचार संहिता के प्रमुख प्रतिबंध:
  • सत्ताधारी दल पर नियंत्रण: मंत्री एवं सत्तारूढ़ दल प्रचार हेतु सरकारी गाड़ियों, विमानों या विश्राम गृहों का उपयोग नहीं कर सकते। चुनाव तिथियों की घोषणा के बाद सरकार किसी नई वित्तीय सहायता, परियोजना या आधारशिला की घोषणा नहीं कर सकती जो मतदाताओं को लुभाए।
  • सांप्रदायिक व धार्मिक प्रचार पर रोक: जाति, धर्म, संप्रदाय या भाषा के नाम पर वोट मांगना पूर्णतः प्रतिबंधित है। मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे या चर्च जैसे धार्मिक स्थलों का उपयोग राजनीतिक प्रचार के मंच के रूप में नहीं किया जा सकता।
  • रिश्वत व प्रलोभन पर अंकुश: मतदाताओं को शराब, नकदी या उपहार बांटना गंभीर अपराध है। मतदान केंद्र के 100 मीटर के दायरे में प्रचार प्रतिबंधित रहता है।
  • 48 घंटे पूर्व चुनाव प्रचार पर विराम (Silence Period): मतदान समाप्त होने के निर्धारित समय से ठीक 48 घंटे पूर्व सभी सार्वजनिक सभाएं, रैलियां और प्रचार अभियान पूरी तरह बंद कर दिए जाते हैं।

यद्यपि आचार संहिता संसद द्वारा पारित कोई औपचारिक कानून नहीं है, परंतु सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि अनुच्छेद 324 के तहत स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए निर्वाचन आयोग इसके उल्लंघनकर्ताओं के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कदम उठाने में पूर्णतः सक्षम है।

6. भारतीय चुनाव प्रणाली की चुनौतियां एवं ऐतिहासिक सुधार

4Ms की चुनौतियां: धनबल, बाहुबल, मशीनरी का दुरुपयोग और मीडिया विसंगतियां

सफलता के बावजूद भारतीय चुनाव प्रणाली आज भी चार गंभीर बुराइयों (4Ms) से जूझ रही है: (1) Money Power (धनबल): काले धन का अंधाधुंध प्रवाह व मतों की खरीद-फरोख्त, (2) Muscle Power (बाहुबल): राजनीति का अपराधीकरण व डराना-धमकाना, (3) Misuse of Machinery: सरकारी तंत्र व पुलिस का राजनीतिक दुरुपयोग, तथा (4) Media Manipulation: पेड न्यूज, फेक न्यूज और सोशल मीडिया पर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण।

सुधार का क्षेत्रसंवैधानिक एवं तकनीकी उपलब्धियां
ईवीएम एवं वीवीपैट (EVM & VVPAT)2004 से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के पूर्ण प्रयोग ने मतपत्रों की धांधली और बूथ कैप्चरिंग को समाप्त किया। VVPAT (Voter Verifiable Paper Audit Trail) के माध्यम से मतदाता कांच के पीछे 7 सेकंड तक पर्ची देखकर यह सुनिश्चित कर सकता है कि उसका वोट सही प्रत्याशी को गया है।
नोटा विकल्प (NOTA - 2013)PUCL बनाम भारत संघ (2013) वाद में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर ईवीएम में 'None of the Above' (नोटा) का विकल्प जोड़ा गया, जिसने मतदाताओं को सभी प्रत्याशियों को अस्वीकार करने का लोकतांत्रिक अधिकार प्रदान किया।
आपराधिक रिकॉर्ड व संपत्ति का प्रकटीकरणसर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक निर्णय (ADR मामले, 2002 एवं 2003) के तहत उम्मीदवारों हेतु अपने आपराधिक मामलों, संपत्ति, देनदारियों व शिक्षा का शपथपत्र देना अनिवार्य किया गया, जो अनुच्छेद 19(1)(क) के तहत मतदाता के जानने के अधिकार की रक्षा करता है।
समितियों की सिफारिशेंदिनेश गोस्वामी समिति (1990) तथा इंद्रजीत गुप्त समिति (1998) ने काले धन पर रोक लगाने हेतु चुनावों के राज्य-वित्तपोषण (State Funding) तथा गंभीर अपराधों में दोषी राजनेताओं को चुनाव लड़ने से रोकने की सिफारिश की।

महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रावधान, राजनीतिक सिद्धांत एवं कालक्रम

ड्रूप कोटा सूत्र (एकल संक्रमणीय मत प्रणाली)
विजय हेतु आवश्यक कोटा = [कुल वैध मत / (रिक्त सीटें + 1)] + 1
FPTP विजय का नियम (Plurality Rule)
चुनावी विजय = प्रत्याशी के मत > किसी अन्य एकल प्रत्याशी के मत (50% पूर्ण बहुमत की आवश्यकता नहीं)
मताधिकार की संवैधानिक शर्त (अनुच्छेद 326)
वैध मताधिकार = भारतीय नागरिकता + आयु >= 18 वर्ष - विधिक अयोग्यताएं

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
प्रश्न 1: सरल बहुमत प्रणाली (FPTP) तथा आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली (PR) के मध्य तीन बुनियादी अंतर स्पष्ट कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

सरल बहुमत प्रणाली (FPTP) और आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली (PR) में तीन प्रमुख बुनियादी अंतर निम्नलिखित हैं:

  1. निर्वाचन क्षेत्र का स्वरूप: FPTP प्रणाली में देश अथवा राज्य को छोटे-छोटे एकल सदस्यीय भौगोलिक क्षेत्रों में विभाजित किया जाता है। जबकि PR प्रणाली में बड़े बहु-सदस्यीय क्षेत्र होते हैं अथवा संपूर्ण राष्ट्र ही एक निर्वाचन क्षेत्र के रूप में कार्य करता है (जैसे इज़राइल)।

  2. विजय का मापदंड: FPTP प्रणाली में जो प्रत्याशी अन्य प्रतिद्वंद्वियों से केवल एक मत भी अधिक पा लेता है (बहुलता या Plurality), वह विजयी घोषित होता है; कुल मतों का 50% पाना आवश्यक नहीं है। PR प्रणाली में दलों को उनके द्वारा प्राप्त मत प्रतिशत के अनुपात में सीटें आवंटित की जाती हैं अथवा प्रत्याशी को निश्चित कोटा पाना होता है।

  3. मतों एवं सीटों का अनुपात: FPTP में प्राप्त मतों और सीटों के बीच भारी असमानता देखने को मिलती है तथा पराजितों के मत व्यर्थ चले जाते हैं। PR में प्रत्येक मत का मूल्य होता है तथा संसद में जनमत का सटीक एवं आनुपातिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होता है।

उदाहरण 2
प्रश्न 2: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत निर्वाचन आयोग की संवैधानिक स्थिति, संरचना एवं सुरक्षा का वर्णन कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

अनुच्छेद 324 भारतीय चुनाव प्रबंधन को स्वायत्तता प्रदान करता है:

  1. संवैधानिक स्थिति: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) एक स्वतंत्र, स्थायी संवैधानिक संस्था है जिसे संसद, राज्य विधानमंडलों, राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति पदों के चुनावों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण का एकाधिकार प्राप्त है।

  2. संरचना: 1993 से यह एक बहु-सदस्यीय निकाय है जिसमें एक मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) तथा दो चुनाव आयुक्त (ECs) शामिल हैं। तीनों के अधिकार, वेतन और सुविधाएं सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान हैं तथा निर्णय बहुमत से होते हैं।

  3. पदमुक्ति से संरक्षण: कार्यपालिका के अनुचित दबाव से बचाने हेतु अनुच्छेद 324(5) के अनुसार मुख्य चुनाव आयुक्त को केवल उसी विधि से हटाया जा सकता है जिस विधि से सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है (संसद के दोनों सदनों द्वारा विशेष बहुमत से पारित महाभियोग)। अन्य आयुक्तों को सीईसी की सिफारिश के बिना नहीं हटाया जा सकता।

उदाहरण 3
प्रश्न 3: भारतीय संविधान निर्माताओं ने लोकसभा चुनावों हेतु आनुपातिक प्रतिनिधित्व के स्थान पर FPTP प्रणाली को क्यों चुना?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

संविधान सभा ने गंभीरतापूर्वक विचार करने के बाद मुख्यतः निम्नलिखित तीन कारणों से FPTP प्रणाली का चयन किया:

  1. मतदाताओं के लिए सरलता: स्वतंत्रता के समय भारत की 80% से अधिक जनता अशिक्षित थी। FPTP प्रणाली अत्यंत सरल है: मतदाता अपनी पसंद के चुनाव चिह्न पर मोहर लगाता है और सर्वाधिक मत पाने वाला प्रत्याशी जीत जाता है। आनुपातिक प्रणाली की जटिल वरीयता व कोटा गणना को समझना सामान्य मतदाताओं के लिए असंभव था।

  2. संसदीय लोकतंत्र में सरकार का स्थायित्व: संसदीय व्यवस्था के सफल संचालन हेतु विधायिका में स्पष्ट बहुमत आवश्यक होता है। FPTP प्रणाली बड़े दलों को अतिरिक्त सीटें देकर स्पष्ट बहुमत प्रदान करती है, जिससे बार-बार सरकार गिरने का संकट नहीं होता।

  3. प्रतिनिधि व जनता का प्रत्यक्ष संबंध: FPTP प्रणाली में प्रत्येक क्षेत्र का अपना एक निश्चित सांसद या विधायक होता है जिसके पास स्थानीय नागरिक अपनी समस्याएं लेकर जा सकते हैं। सूची आधारित आनुपातिक प्रणाली में मतदाता दल को वोट देता है, जिससे स्थानीय प्रतिनिधि की जवाबदेही समाप्त हो जाती है।

उदाहरण 4
प्रश्न 4: आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) क्या है? इसका वैधानिक एवं संवैधानिक आधार क्या है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

आदर्श आचार संहिता भारतीय चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाए रखने का एक प्रमुख साधन है:

  1. अवधारणा: यह राजनीतिक दलों की आम सहमति से तैयार की गई आचार संहिता है जो चुनाव प्रचार के दौरान दलों, उम्मीदवारों और सत्तारूढ़ सरकारों के आचरण के नैतिक मानक निर्धारित करती है।

  2. लागू होने की अवधि: निर्वाचन आयोग द्वारा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करते ही यह तुरंत प्रभावी हो जाती है और परिणाम घोषित होने तक लागू रहती है।

  3. प्रमुख प्रतिबंध: इसके द्वारा मंत्रियों द्वारा सरकारी गाड़ियों, विमानों व मशीनरी का प्रचार में उपयोग करने, नई लोक-लुभावन योजनाओं की घोषणा करने, जाति-धर्म के नाम पर घृणा फैलाने और मतदाताओं को रिश्वत देने पर पूर्ण रोक लगाई जाती है।

  4. संवैधानिक आधार: यह संसद का कोई औपचारिक अधिनियम नहीं है। किंतु सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि अनुच्छेद 324 के अंतर्गत स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव संपन्न कराने हेतु निर्वाचन आयोग को जो व्यापक संवैधानिक शक्तियां प्राप्त हैं, उनके तहत वह आचार संहिता के उल्लंघनकर्ताओं के प्रचार पर प्रतिबंध लगा सकता है।

उदाहरण 5
प्रश्न 5: 61वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1988 के ऐतिहासिक महत्व का मूल्यांकन कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

61वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1988, भारतीय लोकतंत्र का एक युगांतकारी मील का पत्थर है:

  1. मतदान आयु में कमी: इस संशोधन द्वारा संविधान के अनुच्छेद 326 में संशोधन कर लोकसभा और विधानसभा चुनावों में मतदान की न्यूनतम आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष कर दी गई।

  2. युवा सशक्तिकरण: इससे देश के करोड़ों जागरूक युवाओं को मताधिकार प्राप्त हुआ और राष्ट्र के नीति-निर्माण व नेतृत्व चयन में युवाओं की प्रत्यक्ष भागीदारी सुनिश्चित हुई।

  3. लोकतंत्र का विस्तार: इस संशोधन ने भारतीय लोकतंत्र के जनाधार को व्यापक बनाया और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को और अधिक युवा, ऊर्जावान व प्रतिनिधिक स्वरूप प्रदान किया।

उदाहरण 6
प्रश्न 6: भारतीय चुनाव प्रणाली के समक्ष कौन सी प्रमुख चुनौतियां (4Ms) हैं? इनके निवारण हेतु क्या सुधार किए गए हैं?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

भारतीय चुनाव प्रणाली की प्रमुख चुनौतियों को संक्षेप में 4Ms कहा जाता है:

  1. प्रमुख चुनौतियां (4Ms):
  • Money Power (धनबल): चुनावों में काले धन का अत्यधिक व्यय और वोट खरीदने का प्रयास।
  • Muscle Power (बाहुबल): राजनीति में अपराधियों का वर्चस्व और मतदाताओं को डराना-धमकाना।
  • Misuse of Machinery: चुनाव के समय सरकारी तंत्र, पुलिस व प्रशासन का राजनीतिक उपयोग।
  • Media Manipulation: सोशल मीडिया पर भ्रामक प्रचार और समाचार पत्रों में पेड न्यूज का चलन।
  1. किए गए प्रमुख संस्थागत सुधार:
  • ईवीएम एवं वीवीपैट: 2004 से मतपत्रों की लूट व धांधली समाप्त कर पूरी तरह सुरक्षित डिजिटल मतदान स्थापित हुआ।
  • उम्मीदवारों का हलफनामा: सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार प्रत्याशियों के लिए अपने आपराधिक मामलों व संपत्तियों की घोषणा अनिवार्य की गई।
  • नोटा (NOTA) का विकल्प: 2013 से मतदाताओं को अयोग्य प्रत्याशियों को खारिज करने का वैधानिक अधिकार दिया गया।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

यह सोचना कि लोकसभा चुनाव में जीतने के लिए किसी प्रत्याशी को 50% से अधिक वोट प्राप्त करना अनिवार्य है।

सही वैज्ञानिक तथ्य

FPTP प्रणाली में पूर्ण बहुमत (50% + 1) की आवश्यकता नहीं होती; अन्य प्रत्याशियों की तुलना में केवल एक वोट भी अधिक पाने वाला प्रत्याशी विजयी हो जाता है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

यह समझना कि आदर्श आचार संहिता संसद द्वारा पारित कोई औपचारिक वैधानिक कानून है।

सही वैज्ञानिक तथ्य

आदर्श आचार संहिता कोई अधिनियम नहीं है; यह राजनीतिक दलों की आम सहमति की आचार संहिता है जिसे निर्वाचन आयोग अनुच्छेद 324 के संवैधानिक अधिकारों के तहत लागू करता है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

यह मानना कि भारत में मतदान की न्यूनतम आयु अभी भी 21 वर्ष है।

सही वैज्ञानिक तथ्य

1988 के 61वें संविधान संशोधन द्वारा मतदान की न्यूनतम आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष कर दी गई थी।

चित्रात्मक व्याख्या एवं मॉडल

संविधान का भाग XV • अनुच्छेद 324-329 चुनाव और प्रतिनिधित्व प्रणाली लोकतंत्र की जीवनरेखा: चुनावी प्रणालियां, निर्वाचन आयोग एवं ऐतिहासिक सुधार ✓ सरल बहुमत प्रणाली (FPTP) लोकसभा एवं राज्य विधानसभाएं • एकल सदस्यीय निर्वाचन क्षेत्र • सर्वाधिक मत प्राप्त प्रत्याशी विजयी (Plurality) • स्थिर सरकार व स्पष्ट बहुमत की संभावना • मतदाता व प्रतिनिधि में प्रत्यक्ष संपर्क Merit: Decisive Mandate Simple, swift & stable administration ⚖ आनुपातिक प्रतिनिधित्व (PR-STV) राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति व राज्यसभा • एकल संक्रमणीय मत अथवा सूची प्रणाली • निश्चित कोटा (Quota) प्राप्त करना अनिवार्य • प्राप्त मत प्रतिशत के अनुपात में सीटें • अल्पसंख्यकों व छोटे दलों का उचित प्रतिनिधित्व Merit: Democratic Inclusivity Every vote counts; no wasted ballots 🏛 भारत निर्वाचन आयोग (ECI) अनुच्छेद 324 (स्वायत्त संवैधानिक संस्था) • मुख्य चुनाव आयुक्त एवं अन्य चुनाव आयुक्त • पारदर्शी मतदाता सूची निर्माण व पुनरीक्षण • आदर्श आचार संहिता (MCC) का क्रियान्वयन • दलों की मान्यता एवं चुनाव चिह्न आवंटन Constitutional Mandate Superintendence, direction & control भारतीय चुनाव प्रणाली में प्रमुख सुधार: ईवीएम एवं वीवीपैट (EVM & VVPAT) नोटा विकल्प (NOTA - 2013) मतदान आयु 21 से 18 वर्ष (61वां संशोधन) आपराधिक रिकॉर्ड व संपत्ति का शपथपत्र

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
  1. आधुनिक लोकतांत्रिक राज्यों में सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार (अनुच्छेद 326) के आधार पर प्रतिनिधिक लोकतंत्र का संचालन होता है।
मुख्य बिंदु 2
  1. 61वें संविधान संशोधन अधिनियम (1988) द्वारा भारत में मतदान की न्यूनतम आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष कर दी गई।
मुख्य बिंदु 3
  1. लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में सरल बहुमत प्रणाली (FPTP) लागू है, जिसमें सर्वाधिक मत प्राप्त प्रत्याशी विजयी होता है।
मुख्य बिंदु 4
  1. भारत ने सरलता और सरकार के स्थायित्व को सुनिश्चित करने के लिए प्रत्यक्ष आम चुनावों में FPTP प्रणाली को अपनाया।
मुख्य बिंदु 5
  1. आनुपातिक प्रतिनिधित्व (PR) प्रणाली में विधायिका की सीटें दलों को प्राप्त कुल मतों के प्रतिशत के अनुपात में मिलती हैं।
मुख्य बिंदु 6
  1. राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, राज्यसभा तथा विधान परिषदों के अप्रत्यक्ष चुनावों में एकल संक्रमणीय मत द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली का उपयोग होता है।
मुख्य बिंदु 7
  1. अनुच्छेद 324 के अंतर्गत स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की स्थापना की गई है।
मुख्य बिंदु 8
  1. 1993 से निर्वाचन आयोग एक मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) तथा दो अन्य चुनाव आयुक्तों (ECs) का तीन सदस्यीय स्वतंत्र निकाय है।
मुख्य बिंदु 9
  1. चुनाव तिथियों की घोषणा के साथ ही आदर्श आचार संहिता (MCC) लागू हो जाती है, जो सत्ता के दुरुपयोग और अनैतिक प्रचार पर रोक लगाती है।
मुख्य बिंदु 10
  1. भारतीय चुनाव सुधारों में ईवीएम व वीवीपैट का प्रयोग, 2013 का नोटा (NOTA) विकल्प तथा उम्मीदवारों की आपराधिक व वित्तीय जानकारी का प्रकटीकरण प्रमुख हैं।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

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