अंग्रेजी शब्द Citizenship की व्युत्पत्ति लैटिन भाषा के शब्द 'Civis' (नागरिक) और 'Civitas' (नगर-राज्य) से हुई है। प्राचीन यूनानी नगर-राज्यों में प्रत्यक्ष रूप से शासन व न्याय प्रक्रिया में भाग लेने वाले व्यक्तियों को ही नागरिक माना जाता था। कालांतर में आधुनिक विशाल लोकतांत्रिक राज्यों में नागरिकता की अवधारणा अत्यंत व्यापक, समावेशी एवं सार्वभौमिक हो गई है।
- अरस्तू की परिभाषा (Politics): अरस्तू के अनुसार, 'नागरिक वह व्यक्ति है जिसे राज्य के विचार-विमर्श संबंधी अथवा न्यायिक शासन में सहभागिता करने का अधिकार प्राप्त है।' किंतु अरस्तू की यह यूनानी अवधारणा अत्यंत संकीर्ण व बहिष्करणकारी थी। उन्होंने महिलाओं, दासों, विदेशी प्रवासियों और शारीरिक श्रमिकों को नागरिकता से वंचित कर दिया था, क्योंकि उनका मानना था कि निरंतर शारीरिक श्रम करने वालों के पास राज्यकार्य व सद्गुण संवर्धन हेतु आवश्यक 'अवकाश' (Leisure) नहीं होता।
- हेरोल्ड जे. लास्की की परिभाषा (A Grammar of Politics): आधुनिक लोकतांत्रिक चिंतक लास्की ने लिखा है कि 'नागरिकता लोककल्याण के लिए अपनी सुप्रशिक्षित निर्णयबुद्धि का योगदान है' (Citizenship is the contribution of one's instructed judgment to the public good)। लास्की के अनुसार नागरिक मूक प्रजा नहीं है, बल्कि अन्यायपूर्ण नीतियों के विरुद्ध आवाज उठाना उसका नैतिक कर्तव्य है।
- टी. एच. मार्शल का त्रिविमीय विकास सिद्धांत (Citizenship and Social Class, 1950): ब्रिटिश समाजशास्त्री टी. एच. मार्शल ने स्पष्ट किया कि आधुनिक नागरिकता के अधिकार तीन सदियों में क्रमिक रूप से विकसित हुए हैं:
| शताब्दी | अधिकार का आयाम | मूल अंतर्वस्तु एवं संस्थागत आधार |
|---|---|---|
| 18वीं शताब्दी | नागरिक अधिकार (Civil Rights) | व्यक्तिगत स्वतंत्रता, विचार, अभिव्यक्ति एवं अंतःकरण की स्वतंत्रता, संपत्ति का अधिकार और स्वतंत्र न्यायालयों से न्याय पाने का अधिकार। |
| 19वीं शताब्दी | राजनीतिक अधिकार (Political Rights) | सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार, चुनाव में प्रत्याशी बनने का अधिकार और संसद व शासन में भाग लेने का अधिकार। |
| 20वीं शताब्दी | सामाजिक अधिकार (Social Rights) | आर्थिक सुरक्षा, रोजगार, सार्वभौमिक शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं और कल्याणकारी राज्य द्वारा एक गरिमापूर्ण मानवीय जीवन का अधिकार। |