भारत का संविधान विश्व का सबसे वृहद् और विस्तृत लिखित संविधान है। मूल रूप से 1949 में अंगीकृत होने के समय इसमें एक प्रस्तावना, 395 अनुच्छेद (Articles) जो 22 भागों (Parts) में विभक्त थे, तथा 8 अनुसूचियाँ (Schedules) थीं। विभिन्न संवैधानिक संशोधनों के उपरांत वर्तमान में इसमें 470 से अधिक अनुच्छेद, 25 भाग तथा 12 अनुसूचियाँ समाहित हैं।
- भौगोलिक विस्तार एवं अपार विविधता: भारतीय उपमहाद्वीप का विशाल आकार तथा सामाजिक, सांस्कृतिक, भाषाई, धार्मिक और जनजातीय विविधता के कारण सभी वर्गों व क्षेत्रों के संरक्षण हेतु विस्तृत कानूनी प्रावधान आवश्यक थे।
- भारत शासन अधिनियम, 1935 का ऐतिहासिक प्रभाव: 1935 का अधिनियम स्वयं अत्यंत विस्तृत और जटिल दस्तावेज था। संविधान निर्माताओं ने इसके प्रशासनिक ढाँचे और संस्थागत तंत्र को व्यापक रूप से अंगीकार किया।
- केन्द्र तथा राज्यों के लिए एकल संविधान: संयुक्त राज्य अमेरिका के विपरीत, जहाँ संघ और प्रत्येक राज्य के अलग-अलग संविधान होते हैं, भारत में केन्द्र और सभी राज्यों के लिए केवल एक ही व्यापक संविधान है।
- कानूनी दिग्गजों का प्रभुत्व: संविधान सभा में डॉ. बी.आर. अंबेडकर, अल्लादि कृष्णास्वामी अय्यर, के.एम. मुंशी जैसे प्रख्यात विधि विशेषज्ञों का वर्चस्व था, जिन्होंने भविष्य की किसी भी कानूनी अस्पष्टता को समाप्त करने हेतु प्रत्येक प्रशासनिक विवरण को संहिताबद्ध किया।