(क) नेहरू के बाद कौन? (मई 1964)
मई 1964 में जब पंडित जवाहरलाल नेहरू का निधन हुआ, तो दुनिया भर में यह आशंका व्यक्त की जा रही थी कि अब भारतीय लोकतंत्र समाप्त हो जाएगा और सेना सत्ता पर कब्जा कर लेगी। परंतु कांग्रेस अध्यक्ष के. कामराज ने पार्टी में आम सहमति बनाई और अत्यंत सादगी पसंद, ईमानदार व निर्विवाद नेता लाल बहादुर शास्त्री सर्वसम्मति से देश के दूसरे प्रधानमंत्री बने।
शास्त्री जी का कार्यकाल (1964-1966) संक्षिप्त रहा, परंतु उन्होंने 1965 के भारत-पाक युद्ध और भीषण सूखे का दृढ़ता से सामना करते हुए ऐतिहासिक नारा दिया: "जय जवान, जय किसान!" 10 जनवरी 1966 को ताशकंद समझौते पर हस्ताक्षर के कुछ ही घंटों बाद उनका असामयिक निधन हो गया।
(ख) शास्त्री के बाद इंदिरा गांधी का निर्वाचन (जनवरी 1966)
शास्त्री जी के निधन के बाद प्रधानमंत्री पद के लिए मोरारजी देसाई और श्रीमती इंदिरा गांधी के बीच तीखी चुनावी प्रतिस्पर्धा हुई। कांग्रेस संसदीय दल में गुप्त मतदान हुआ, जिसमें इंदिरा गांधी ने मोरारजी देसाई को भारी बहुमत (355 के मुकाबले 169 मत) से पराजित किया और देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं।
कांग्रेस के वरिष्ठ बुजुर्ग नेताओं के गुट—'सिंडिकेट' (Syndicate)—ने इंदिरा गांधी का समर्थन इस उम्मीद में किया था कि अनुभवहीन होने के कारण वे दिशा-निर्देशों के लिए पूरी तरह सिंडिकेट पर निर्भर रहेंगी। उस समय विपक्ष ने उन्हें संसद में कम बोलने के कारण 'गूंगी गुड़िया' कहा था। परंतु इंदिरा ने शीघ्र ही अपने स्वतंत्र और कड़े फैसलों से सिंडिकेट के भ्रम को तोड़ दिया।