(क) वैश्वीकरण क्या है?
वैश्वीकरण एक बहु-आयामी प्रक्रिया है जिसका सार है 'प्रवाह' (Flows)। दुनिया के विभिन्न हिस्सों के बीच सीमाओं की रुकावटों के बिना होने वाले निरंतर आदान-प्रदान को वैश्वीकरण कहते हैं। यह प्रवाह चार रूपों में होता है:
- विचारों का प्रवाह (Flow of Ideas): लोकतंत्र, मानवाधिकार, पर्यावरण संरक्षण और वैज्ञानिक ज्ञान का एक देश से दूसरे देश में निर्बाध प्रसार।
- पूंजी का प्रवाह (Flow of Capital): शेयर बाज़ार, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) और बैंकों के माध्यम से खरबों डॉलर का क्षण भर में एक देश से दूसरे देश में निवेश।
- वस्तुओं का प्रवाह (Flow of Commodities): आयात-निर्यात बाधाओं (टैरिफ) के घटने से दुनिया भर के उत्पाद (जैसे मोबाइल, कारें, दवाएं) सभी देशों के बाज़ारों में उपलब्ध होना।
- लोगों का प्रवाह (Flow of People): बेहतर शिक्षा, उच्च वेतन और रोजगार की तलाश में कुशल व अकुशल श्रमिकों और पेशेवरों का अंतरराष्ट्रीय प्रवासन। (यद्यपि विकसित देश वीजा नियमों द्वारा लोगों के प्रवाह पर सबसे अधिक प्रतिबंध लगाते हैं)।
(ख) वैश्वीकरण को गति देने वाले मूल कारण
यद्यपि व्यापार और साम्राज्यवाद का इतिहास सदियों पुराना है, परंतु समकालीन वैश्वीकरण की अभूतपूर्व गति के पीछे 'प्रौद्योगिकी' (Technology) की केंद्रीय भूमिका है:
1. संचार और सूचना क्रांति: टेलीग्राफ, टेलीफोन, माइक्रोचिप, इंटरनेट और ऑप्टिकल फाइबर केबल्स ने भौगोलिक दूरियों को पूरी तरह मिटा दिया है। आज न्यूयॉर्क और रांची के बीच संपर्क स्थापित करने में एक सेकंड का भी समय नहीं लगता।
2. परिवहन के आधुनिक साधन: विशाल कार्गो जहाजों और विमानों ने कच्चे माल और तैयार उत्पादों के परिवहन की लागत और समय को न्यूनतम कर दिया है।
3. वैश्विक अंतर्संबंधों की साझा चेतना: आज दुनिया के किसी एक कोने में होने वाली घटना (जैसे महामारी, युद्ध या आतंकी हमला) का तात्कालिक प्रभाव पूरी दुनिया के जनजीवन पर पड़ता है।