(क) आर्थिक संकट और जन-असंतोष (1971-1973)
1971 के चुनाव में 'गरीबी हटाओ' के नारे और बांग्लादेश युद्ध की जीत के बाद जनता की अपेक्षाएं बहुत बढ़ गई थीं, परंतु देश भयंकर आर्थिक संकट में घिर गया:
- युद्ध और शरणार्थी संकट का बोझ: बांग्लादेश से आए 1 करोड़ शरणार्थियों के भरण-पोषण और 1971 के युद्ध के भारी खर्च ने भारत के खजाने को खाली कर दिया। अमेरिका ने भारत की सभी वित्तीय सहायता बंद कर दी।
- 1973 का अंतरराष्ट्रीय तेल संकट: कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में अप्रत्याशित उछाल आया, जिससे 1973 में महंगाई 23% और 1974 में 30% तक पहुँच गई। आम जनता के लिए दाल, तेल, खाद्यान्न खरीदना दूभर हो गया।
- मानसून की असफलता: कृषि पैदावार में 8% की गिरावट आई और औद्योगिक उत्पादन ठप हो गया। सरकारी कर्मचारियों के वेतन रोक दिए गए, जिससे भारी असंतोष फैला।
(ख) गुजरात और बिहार के छात्र आंदोलन (1974)
- गुजरात आंदोलन (जनवरी 1974): मोरबी इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रों ने मेस के बढ़े हुए बिल और खाद्य पदार्थों की महंगाई तथा भ्रष्टाचार के विरुद्ध आंदोलन छेड़ा। यह 'नवनिर्माण आंदोलन' बन गया। विपक्षी दलों के समर्थन और मोरारजी देसाई के आमरण अनशन के दबाव में आकर केंद्र सरकार को गुजरात विधानसभा भंग करनी पड़ी और जून 1975 में चुनाव कराने पड़े (जिसमें कांग्रेस हार गई)।
- बिहार आंदोलन और जयप्रकाश नारायण (मार्च 1974): बिहार में छात्रों ने बेरोजगारी, महंगाई और भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन शुरू किया और वयोवृद्ध सर्वोदयी नेता जयप्रकाश नारायण (JP) को आंदोलन का नेतृत्व करने के लिए आमंत्रित किया।
जेपी ने दो शर्तों पर नेतृत्व स्वीकार किया: (1) आंदोलन पूरी तरह अहिंसक रहेगा, और (2) यह केवल बिहार तक सीमित न रहकर राष्ट्रव्यापी बनेगा।
जेपी ने नारा दिया: "संपूर्ण क्रांति अब नारा है, भावी इतिहास हमारा है!" इसका उद्देश्य केवल सरकार बदलना नहीं, बल्कि समाज के सभी 7 आयामों—सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक, बौद्धिक, शैक्षणिक और आध्यात्मिक—में बुनियादी क्रांतिकारी परिवर्तन लाना था ताकि सच्चा लोकतांत्रिक समाज बन सके।
(ग) 1974 की ऐतिहासिक रेल हड़ताल
मई 1974 में जॉर्ज फर्नांडीस के नेतृत्व वाली 'नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी फॉर रेलवेमेन्स स्ट्रगल' ने बोनस और सेवा शर्तों की बहाली को लेकर 20 दिनों की अभूतपूर्व देशव्यापी रेल हड़ताल कर दी। भारत की जीवन रेखा (रेलवे) पूरी तरह ठप हो गई। इंदिरा सरकार ने इसे राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को पंगु बनाने की राष्ट्र-विरोधी साजिश माना और सेना व अर्धसैनिक बलों का प्रयोग कर हजारों रेलवे कर्मचारियों को गिरफ्तार करके हड़ताल को बेरहमी से कुचल दिया।