(क) हमें अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की आवश्यकता क्यों है?
अंतर्राष्ट्रीय संगठन कोई 'विश्व सरकार' नहीं होते जो संप्रभु देशों पर आदेश चला सकें। ये संप्रभु राष्ट्रों द्वारा स्वेच्छा से बनाए गए ऐसे मंच हैं जहाँ साझा समस्याओं का समाधान तलाशा जाता है:
- युद्ध और शांति के मामलों में मध्यस्थता: दो देशों के बीच बढ़ते तनाव और विवादों को कूटनीतिक वार्ताओं की मेज पर सुलझाना ताकि वे सैन्य संघर्ष में न बदलें।
- वैश्विक सार्वजनिक वस्तुओं का प्रबंधन: जलवायु परिवर्तन, ओजोन परत का क्षरण, महामारियों की रोकथाम, अंतरिक्ष और गहरे समुद्र के नियमन जैसे कार्यों को कोई एक देश अकेले नहीं कर सकता।
- सहयोग की लागत कम करना: नियम-आधारित व्यवस्था बनाकर व्यापार, बौद्धिक संपदा और नागरिक उड्डयन के साझा मानक स्थापित करना।
(ख) संयुक्त राष्ट्र संघ की ऐतिहासिक स्थापना
प्रथम विश्वयुद्ध के बाद 1919 में 'राष्ट्र संघ' (League of Nations) की स्थापना हुई थी, परंतु वह द्वितीय विश्वयुद्ध को रोकने में पूरी तरह विफल रहा। अतः द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान ही मित्र राष्ट्रों ने एक अधिक शक्तिशाली संगठन बनाने की प्रक्रिया शुरू की:
- अगस्त 1941 - अटलांटिक चार्टर: अमेरिकी राष्ट्रपति रूजवेल्ट और ब्रिटिश प्रधानमंत्री चर्चिल ने युद्धोपरांत शांति व्यवस्था का खाका तैयार किया।
- जनवरी 1942 - संयुक्त राष्ट्र की घोषणा: 26 मित्र राष्ट्रों ने वाशिंगटन में अटलांटिक चार्टर का समर्थन किया और 'United Nations' शब्द का आधिकारिक प्रयोग हुआ।
- फरवरी 1945 - याल्टा सम्मेलन: रूजवेल्ट, चर्चिल और स्टालिन ने सुरक्षा परिषद में मतदान प्रणाली और वीटो पावर पर सहमति बनाई।
- जून 1945 - सैन फ्रांसिस्को सम्मेलन: 50 देशों के प्रतिनिधियों ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर पर विचार-विमर्श करके 26 जून 1945 को हस्ताक्षर किए (पोलैंड 51वां सदस्य बना)।
- 24 अक्टूबर 1945 - औपचारिक स्थापना: सुरक्षा परिषद के 5 स्थायी सदस्यों और अधिकांश हस्ताक्षरकर्ताओं द्वारा चार्टर के अनुसमर्थन के साथ 24 अक्टूबर 1945 को 'संयुक्त राष्ट्र संघ' (UN) अस्तित्व में आया। इसलिए प्रतिवर्ष 24 अक्टूबर को 'संयुक्त राष्ट्र दिवस' मनाया जाता है।
भारत की सदस्यता: भारत ने 30 अक्टूबर 1945 को संयुक्त राष्ट्र चार्टर पर हस्ताक्षर करके इसके मूल संस्थापक सदस्य के रूप में प्रवेश किया था। वर्तमान में इसके 193 सदस्य देश हैं (नवीनतम सदस्य: 2011 में दक्षिण सूडान)।