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CBSE • कक्षा XII • Political Science • अध्याय 4
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

अंतर्राष्ट्रीय संगठन

वैश्वीकरण और परस्पर निर्भरता के इस युग में युद्ध, आतंकवाद, महामारियाँ (जैसे कोविड-19), वैश्विक तापवृद्धि (Global Warming) और साइबर अपराध ऐसी चुनौतियाँ हैं जिनका समाधान कोई भी राष्ट्र—चाहे वह अमेरिका जैसी महाशक्ति ही क्यों न हो—अकेले अपने दम पर नहीं कर सकता। ऐसे वैश्विक संकटों के समाधान, शांति व सुरक्षा बनाए रखने और विभिन्न संप्रभु राष्ट्रों के बीच नियम-आधारित सहयोग स्थापित करने के लिए 'अंतर्राष्ट्रीय संगठनों' (International Organisations) की अनिवार्य आवश्यकता होती है। द्वितीय विश्वयुद्ध की विभीषिका के बाद 24 अक्टूबर 1945 को स्थापित संयुक्त राष्ट्र संघ (United Nations - UN) विश्व का सबसे बड़ा, सर्वाधिक प्रतिनिधि और सर्वसमावेशी अंतर्राष्ट्रीय मंच है। वर्तमान में इसके 193 सदस्य देश हैं। इस अध्याय में हम संयुक्त राष्ट्र संघ के ऐतिहासिक उद्भव, उसके प्रमुख अंगों (विशेषकर सुरक्षा परिषद और वीटो पावर), शीतयुद्ध के बाद संयुक्त राष्ट्र में सुधारों की आवश्यकता, सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिए भारत के दावे, तथा विश्व बैंक, आईएमएफ (IMF), विश्व व्यापार संगठन (WTO), आईएईए (IAEA) और एमनेस्टी इंटरनेशनल जैसी संस्थाओं की भूमिका का गहन विश्लेषण करेंगे। जैक बोर्ड (CBSE Class 12) राजनीति विज्ञान की परीक्षा में यह अध्याय 8 से 10 अंकों का अत्यधिक महत्वपूर्ण स्थान रखता है, जिसमें सुरक्षा परिषद सुधारों, वीटो पावर के औचित्य और संयुक्त राष्ट्र की प्रासंगिकता पर विश्लेषणात्मक प्रश्न पूछे जाते हैं।

🌐 क्या आपने कभी सोचा है: जब किसी एक देश के पास वीटो (Veto) की शक्ति होती है, तो वह 192 देशों के बहुमत के फैसले को एक झटके में रद्दी की टोकरी में कैसे फेंक देता है?

संयुक्त राष्ट्र संघ के दूसरे महासचिव डैग हैमरशोल्ड ने एक बार एक ऐतिहासिक वाक्य कहा था: "संयुक्त राष्ट्र का गठन मानवता को स्वर्ग पहुँचाने के लिए नहीं, बल्कि उसे नर्क में गिरने से बचाने के लिए किया गया था!"

क्या आपको पता है कि सुरक्षा परिषद के 5 स्थायी देशों (P-5: अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस) के पास ऐसी जादुई ताकत है कि यदि 190 देश किसी युद्ध को रोकने के पक्ष में मतदान करें, और चीन या अमेरिका अकेले अपनी उंगली उठाकर कह दे 'Veto' (मैं निषेध करता हूँ), तो वह प्रस्ताव तुरंत दफन हो जाता है! यही कारण है कि आज सीरिया, यूक्रेन या गाजा में लाखों बेगुनाह मारे जाते हैं और संयुक्त राष्ट्र केवल प्रस्ताव पारित करके तमाशा देखता रह जाता है। फिर भी प्रश्न उठता है: यदि संयुक्त राष्ट्र संघ न होता, तो क्या आज की परमाणु-सशस्त्र दुनिया में तीसरा विश्वयुद्ध टल पाता? यह अध्याय आपको अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति के इन पेचीदा पर्दों के पीछे ले जाएगा!

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

इस अध्याय का अध्ययन आपके लिए क्यों अनिवार्य है?

  1. बोर्ड परीक्षा में उत्कृष्ट अंक: CBSE कक्षा 12 राजनीति विज्ञान में सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों के विशेषाधिकार (Veto Power), सुरक्षा परिषद के पुनर्गठन के मापदंड, और भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी पर 6 अंक का दीर्घ उत्तरीय प्रश्न निश्चित रूप से पूछा जाता है।
  2. वैश्विक मामलों की समझ: रूस-यूक्रेन युद्ध, इजरायल-हमास संघर्ष और संयुक्त राष्ट्र की अक्षमता के पीछे की कानूनी व राजनीतिक संरचना को समझने का एकमात्र स्रोत यह अध्याय है।
  3. प्रतियोगी परीक्षाओं (UPSC, JPSC, CUET, CLAT) के लिए अनिवार्य: यूएन चार्टर, सुरक्षा परिषद के सुधार (G-4 गुट), आईएमएफ के विशेष आहरण अधिकार (SDR), विश्व व्यापार संगठन की अपीलीय संस्था और अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) की कार्यप्रणाली से ढेरों प्रश्न बनते हैं।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • राष्ट्र संघ (League of Nations): प्रथम विश्वयुद्ध के बाद बनी संस्था की विफलता के कारण।

  • द्वितीय विश्वयुद्ध (1939-1945): परमाणु हथियारों का प्रयोग और संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना की पृष्ठभूमि।

  • शीतयुद्ध का प्रभाव: महाशक्तियों द्वारा संयुक्त राष्ट्र को अपने वैचारिक प्रचार का अखाड़ा बनाने का इतिहास।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की आवश्यकता और वैश्वीकृत विश्व में उनकी अनिवार्य भूमिका की व्याख्या कर सकेंगे।
  • राष्ट्र संघ की विफलता से लेकर 24 अक्टूबर 1945 को संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना तक की विकास यात्रा को स्पष्ट कर सकेंगे।
  • संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रमुख अंगों (महासभा, सुरक्षा परिषद, आर्थिक व सामाजिक परिषद, अंतरराष्ट्रीय न्यायालय, सचिवालय) के कार्यों का विश्लेषण कर सकेंगे।
  • सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यों की "वीटो पावर" (Veto Power) के पक्ष और विपक्ष के तर्कों का समालोचनात्मक मूल्यांकन कर सकेंगे।
  • शीतयुद्धोत्तर काल में संयुक्त राष्ट्र संघ के पुनर्गठन और 1997 में कोफी अन्नान द्वारा सुझाए गए नए स्थायी सदस्यों के मापदंडों का परीक्षण कर सकेंगे।
  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के पक्ष में ऐतिहासिक, आर्थिक व कूटनीतिक तर्कों तथा उसके मार्ग की बाधाओं का विवेचन कर सकेंगे।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की आवश्यक...
2 2. संयुक्त राष्ट्र संघ की संरचना एव...
3 3. शीतयुद्धोत्तर काल में संयुक्त रा...
4 4. सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता...
5 5. अन्य महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय स...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की आवश्यकता एवं संयुक्त राष्ट्र संघ की उत्पत्ति

(क) हमें अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की आवश्यकता क्यों है?

अंतर्राष्ट्रीय संगठन कोई 'विश्व सरकार' नहीं होते जो संप्रभु देशों पर आदेश चला सकें। ये संप्रभु राष्ट्रों द्वारा स्वेच्छा से बनाए गए ऐसे मंच हैं जहाँ साझा समस्याओं का समाधान तलाशा जाता है:

  • युद्ध और शांति के मामलों में मध्यस्थता: दो देशों के बीच बढ़ते तनाव और विवादों को कूटनीतिक वार्ताओं की मेज पर सुलझाना ताकि वे सैन्य संघर्ष में न बदलें।
  • वैश्विक सार्वजनिक वस्तुओं का प्रबंधन: जलवायु परिवर्तन, ओजोन परत का क्षरण, महामारियों की रोकथाम, अंतरिक्ष और गहरे समुद्र के नियमन जैसे कार्यों को कोई एक देश अकेले नहीं कर सकता।
  • सहयोग की लागत कम करना: नियम-आधारित व्यवस्था बनाकर व्यापार, बौद्धिक संपदा और नागरिक उड्डयन के साझा मानक स्थापित करना।

(ख) संयुक्त राष्ट्र संघ की ऐतिहासिक स्थापना

प्रथम विश्वयुद्ध के बाद 1919 में 'राष्ट्र संघ' (League of Nations) की स्थापना हुई थी, परंतु वह द्वितीय विश्वयुद्ध को रोकने में पूरी तरह विफल रहा। अतः द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान ही मित्र राष्ट्रों ने एक अधिक शक्तिशाली संगठन बनाने की प्रक्रिया शुरू की:

  1. अगस्त 1941 - अटलांटिक चार्टर: अमेरिकी राष्ट्रपति रूजवेल्ट और ब्रिटिश प्रधानमंत्री चर्चिल ने युद्धोपरांत शांति व्यवस्था का खाका तैयार किया।
  2. जनवरी 1942 - संयुक्त राष्ट्र की घोषणा: 26 मित्र राष्ट्रों ने वाशिंगटन में अटलांटिक चार्टर का समर्थन किया और 'United Nations' शब्द का आधिकारिक प्रयोग हुआ।
  3. फरवरी 1945 - याल्टा सम्मेलन: रूजवेल्ट, चर्चिल और स्टालिन ने सुरक्षा परिषद में मतदान प्रणाली और वीटो पावर पर सहमति बनाई।
  4. जून 1945 - सैन फ्रांसिस्को सम्मेलन: 50 देशों के प्रतिनिधियों ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर पर विचार-विमर्श करके 26 जून 1945 को हस्ताक्षर किए (पोलैंड 51वां सदस्य बना)।
  5. 24 अक्टूबर 1945 - औपचारिक स्थापना: सुरक्षा परिषद के 5 स्थायी सदस्यों और अधिकांश हस्ताक्षरकर्ताओं द्वारा चार्टर के अनुसमर्थन के साथ 24 अक्टूबर 1945 को 'संयुक्त राष्ट्र संघ' (UN) अस्तित्व में आया। इसलिए प्रतिवर्ष 24 अक्टूबर को 'संयुक्त राष्ट्र दिवस' मनाया जाता है।

भारत की सदस्यता: भारत ने 30 अक्टूबर 1945 को संयुक्त राष्ट्र चार्टर पर हस्ताक्षर करके इसके मूल संस्थापक सदस्य के रूप में प्रवेश किया था। वर्तमान में इसके 193 सदस्य देश हैं (नवीनतम सदस्य: 2011 में दक्षिण सूडान)।

2. संयुक्त राष्ट्र संघ की संरचना एवं सुरक्षा परिषद (UNSC) में वीटो पावर

(क) संयुक्त राष्ट्र संघ के छह प्रमुख अंग

प्रमुख अंगसंरचना एवं मुख्य कार्य
1. आम सभा / महासभा (General Assembly) सभी 193 सदस्य देशों का प्रतिनिधित्व (प्रत्येक देश को 1 वोट)। इसे 'विश्व की लघु संसद' कहा जाता है। बजट पास करना, नए सदस्यों को प्रवेश देना और वैश्विक मुद्दों पर प्रस्ताव पारित करना (प्रस्ताव गैर-बाध्यकारी)।
2. सुरक्षा परिषद (Security Council - UNSC) विश्व में शांति और सुरक्षा बनाए रखने वाला सर्वोच्च शक्तिशाली अंग। इसके निर्णय कानूनी रूप से बाध्यकारी होते हैं। कुल 15 सदस्य: 5 स्थायी (P-5) और 10 अस्थायी सदस्य (2 वर्ष के कार्यकाल हेतु महासभा द्वारा निर्वाचित)।
3. आर्थिक एवं सामाजिक परिषद (ECOSOC) 54 सदस्य (3 वर्ष का कार्यकाल)। गरीबी, शिक्षा, स्वास्थ्य, मानवाधिकार और सतत विकास के क्षेत्र में विशिष्ट एजेंसियों (WHO, UNESCO, UNICEF, ILO) के कार्यों में समन्वय।
4. अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) मुख्यालय: हेग (नीदरलैंड)। 15 न्यायाधीश (9 वर्ष का कार्यकाल)। राष्ट्रों के बीच कानूनी विवादों का निपटारा करना।
5. सचिवालय (Secretariat) दैनिक प्रशासनिक कार्यों का संचालन। नेतृत्व महासचिव (Secretary-General) करते हैं (वर्तमान महासचिव एंटोनियो गुटेरेस, पुर्तगाल)।
6. न्यासिता परिषद (Trusteeship Council) 1994 में पलाऊ के स्वतंत्र होने के बाद इसके कार्य 1 नवंबर 1994 से औपचारिक रूप से निलंबित कर दिए गए हैं।

(ख) वीटो पावर (Veto Power - निषेधाधिकार) का विश्लेषण

सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों—अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस (P-5)—को किसी भी महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर 'वीटो' करने का विशेषाधिकार प्राप्त है।

💡 वीटो पावर कैसे काम करती है?
सुरक्षा परिषद में किसी प्रस्ताव को पारित करने के लिए 15 में से कम से कम 9 सदस्यों के सकारात्मक मत की आवश्यकता होती है, जिसमें पाँचों स्थायी सदस्यों की सहमति अनिवार्य है।
यदि 15 में से 14 सदस्य किसी प्रस्ताव के समर्थन में वोट दें, परंतु 5 स्थायी सदस्यों में से कोई एक भी नकारात्मक वोट (Negative Vote) दे दे, तो वह प्रस्ताव तुरंत खारिज हो जाता है।
वीटो का औचित्य और आलोचना:
- पक्ष में तर्क: 1945 में महाशक्तियों को संयुक्त राष्ट्र में जोड़े रखने के लिए यह आवश्यक था। यदि वीटो न होता, तो महाशक्तियां संगठन छोड़ देतीं और सीधा युद्ध शुरू हो जाता।
- विपक्ष में तर्क: यह संप्रभु समानता के लोकतांत्रिक सिद्धांत का उल्लंघन है। P-5 देश अपने संकीर्ण राष्ट्रीय स्वार्थों के लिए इसका दुरुपयोग करते हैं।

3. शीतयुद्धोत्तर काल में संयुक्त राष्ट्र संघ में सुधारों की मांग

(क) सुधारों की आवश्यकता क्यों?

1945 में जब संयुक्त राष्ट्र बना था, तब सदस्य संख्या मात्र 51 थी। 1990 के बाद विश्व में आमूलचूल परिवर्तन आ चुके हैं:

  • सोवियत संघ का पतन और शीतयुद्ध की समाप्ति हो चुकी है।
  • सदस्यों की संख्या बढ़कर 193 हो चुकी है, जिसमें अधिकांश विकासशील (एशिया, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका) देश हैं।
  • भारत, ब्राजील, जर्मनी, जापान और दक्षिण अफ्रीका जैसी नई आर्थिक और राजनीतिक शक्तियां उभर चुकी हैं।
  • पारंपरिक युद्धों के स्थान पर गृहयुद्ध, जलवायु परिवर्तन, साइबर युद्ध और आतंकवाद जैसी नई चुनौतियाँ सामने आ चुकी हैं।

(ख) 1997 में कोफी अन्नान द्वारा प्रस्तावित नए सदस्यों के मापदंड

1 जनवरी 1997 को तत्कालीन महासचिव कोफी अन्नान ने सुरक्षा परिषद में नए स्थायी और अस्थायी सदस्यों के चयन हेतु 6 व्यावहारिक मापदंड प्रस्तावित किए:

क्र.सं.प्रस्तावित मापदंडसामरिक व व्यावहारिक तात्पर्य
1बड़ी आर्थिक शक्तिवैश्विक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देता हो और वित्तीय रूप से सक्षम हो।
2बड़ी सैन्य शक्तिविश्व शांति और सुरक्षा अभियानों में महत्वपूर्ण सैन्य योगदान देने में समर्थ हो।
3यूएन बजट में बड़ा योगदाननियमित रूप से संयुक्त राष्ट्र के बजट में पर्याप्त वित्तीय अंशदान करता हो।
4जनसंख्या की दृष्टि से विशाल राष्ट्रविश्व की एक बड़ी आबादी का प्रतिनिधित्व करता हो।
5लोकतंत्र एवं मानवाधिकारों का सम्मानदेश में सुदृढ़ लोकतांत्रिक संस्थाएं हों और नागरिक स्वतंत्रताओं की रक्षा होती हो।
6विश्व की विविधता का प्रतिनिधित्वसुरक्षा परिषद को केवल विकसित देशों का क्लब बनने से रोककर समग्र विश्व का सच्चा आईना बनाना।

4. सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता हेतु भारत का सशक्त दावा

(क) भारत की दावेदारी के पक्ष में अकाट्य तर्क

भारत सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता के लिए सबसे स्वाभाविक और मजबूत दावेदार है:

  1. विश्व का सबसे बड़ा जीवंत लोकतंत्र: भारत ने 1947 से आज तक 140 करोड़ से अधिक की विशाल आबादी के साथ निर्बाध लोकतांत्रिक व्यवस्था और मानवाधिकारों को बनाए रखा है।
  2. जनसांख्यिकीय प्रतिनिधित्व: भारत विश्व की कुल आबादी के लगभग 18% भाग का प्रतिनिधित्व करता है। भारत को बाहर रखकर सुरक्षा परिषद लोकतांत्रिक हो ही नहीं सकती।
  3. तीव्रतम गति से बढ़ती आर्थिक महाशक्ति: भारत विश्व की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और वैश्विक विकास का इंजन है।
  4. शांति सेना (UN Peacekeeping) में अद्वितीय योगदान: संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में भारत ने सर्वाधिक सैनिकों (2.5 लाख से अधिक) का योगदान दिया है और 175 से अधिक भारतीय वीर शांति सैनिकों ने अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया है।
  5. मूल संस्थापक सदस्य: भारत 1945 से ही संयुक्त राष्ट्र का सक्रिय और उत्तरदायी सदस्य रहा है।
⚡ भारत की स्थायी सदस्यता के मार्ग में प्रमुख बाधाएँ:
1. चीन का खुला विरोध और वीटो: P-5 में से 4 देश (अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस) भारत का समर्थन करते हैं, परंतु चीन अपने वीटो का डर दिखाकर भारत के प्रवेश को रोकता है।
2. कॉफी क्लब (Coffee Club / Uniting for Consensus): पाकिस्तान, इटली, मेक्सिको, मिस्र आदि देश नए स्थायी सदस्यों के बनाए जाने का विरोध करते हैं।
3. वीटो पावर का गतिरोध: क्या नए सदस्यों को वीटो पावर मिले या नहीं? इस पर वैश्विक सहमति नहीं बन पा रही है।

5. अन्य महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संगठन एवं गैर-सरकारी संस्थाएं

संगठन / एजेंसीस्थापना एवं मुख्यालयमुख्य कार्य एवं आलोचना
1. अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) 1944 (ब्रेटन वुड्स), वाशिंगटन डी.सी. (190 सदस्य) वैश्विक वित्तीय स्थिरता, भुगतान संतुलन संकट में ऋण देना। जी-7 देशों के पास 40% से अधिक वोटिंग शेयर है।
2. विश्व बैंक (World Bank) 1944 (ब्रेटन वुड्स), वाशिंगटन डी.सी. (189 सदस्य) विकासशील देशों को गरीबी उन्मूलन, बुनियादी ढांचे और शिक्षा-स्वास्थ्य के लिए दीर्घकालिक रियायती ऋण प्रदान करना।
3. विश्व व्यापार संगठन (WTO) 1 जनवरी 1995 (GATT के स्थान पर), जेनेवा (164 सदस्य) वैश्विक व्यापार के नियम तय करना, प्रशुल्क घटाना और व्यापारिक विवादों को सुलझाना।
4. अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) 1957 (मुख्यालय: विएना, ऑस्ट्रिया) 'शांति के लिए परमाणु' (Atoms for Peace)। परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देना और सैन्य उपयोग रोकना।
5. एमनेस्टी इंटरनेशनल (Amnesty International) 1961 (मुख्यालय: लंदन) मानवाधिकारों की रक्षा के लिए कार्यरत एक स्वतंत्र गैर-सरकारी संगठन (NGO)। पूरी दुनिया में मानवाधिकार हनन की निष्पक्ष जांच।
6. ह्यूमन राइट्स वॉच (Human Rights Watch) 1978 (मुख्यालय: न्यूयॉर्क) अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकारों के हनन की ओर दुनिया का ध्यान खींचने वाला अग्रणी स्वतंत्र एनजीओ।

महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रावधान, राजनीतिक सिद्धांत एवं कालक्रम

अगस्त 1941
अटलांटिक चार्टर पर रूजवेल्ट और चर्चिल द्वारा हस्ताक्षर।
1 जनवरी 1942
26 देशों द्वारा वाशिंगटन में "संयुक्त राष्ट्र की घोषणा" पर हस्ताक्षर।
1944
ब्रेटन वुड्स सम्मेलन में IMF और विश्व बैंक की स्थापना का निर्णय।
फरवरी 1945
याल्टा सम्मेलन में सुरक्षा परिषद में मतदान प्रणाली और वीटो पर सहमति।
26 जून 1945
सैन फ्रांसिस्को में 50 देशों द्वारा संयुक्त राष्ट्र चार्टर पर हस्ताक्षर।
24 अक्टूबर 1945
संयुक्त राष्ट्र संघ (UN) की औपचारिक स्थापना; प्रतिवर्ष संयुक्त राष्ट्र दिवस।
30 अक्टूबर 1945
भारत संयुक्त राष्ट्र चार्टर पर हस्ताक्षर कर मूल संस्थापक सदस्य बना।
1948
संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा (UDHR) अंगीकार।
1957
विएना में अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की स्थापना।
1961
लंदन में एमनेस्टी इंटरनेशनल की स्थापना।
1965
सुरक्षा परिषद में अस्थायी सदस्यों की संख्या 6 से बढ़ाकर 10 की गई (कुल 15)।
1992
संयुक्त राष्ट्र महासभा में सुरक्षा परिषद के पुनर्गठन पर प्रस्ताव पारित।
1 नवंबर 1994
पलाऊ की स्वतंत्रता के साथ न्यासिता परिषद के कार्य निलंबित।
1 जनवरी 1995
GATT के स्थान पर विश्व व्यापार संगठन (WTO) की स्थापना।
1997
महासचिव कोफी अन्नान द्वारा नए स्थायी सदस्यों के चयन हेतु 6 मापदंड प्रस्तावित।
2011
दक्षिण सूडान संयुक्त राष्ट्र का 193वां सदस्य देश बना।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
प्रश्न 1 (1 अंक - वस्तुनिष्ठ): संयुक्त राष्ट्र संघ (UN) की स्थापना कब हुई थी और इसके मूल संस्थापक सदस्य देशों की संख्या कितनी थी?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर:
संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना 24 अक्टूबर 1945 को हुई थी और इसके मूल संस्थापक सदस्य देशों की संख्या 51 थी (भारत ने 30 अक्टूबर 1945 को हस्ताक्षर किए थे)।
उदाहरण 2
प्रश्न 2 (2 अंक - अति लघु उत्तरीय): संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में "वीटो पावर" (Veto Power) से क्या अभिप्राय है? यह किन देशों को प्राप्त है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर:
वीटो पावर (निषेधाधिकार): संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों को प्राप्त वह विशेषाधिकार है जिसके तहत किसी भी स्थायी सदस्य द्वारा नकारात्मक मत देने पर वह प्रस्ताव तुरंत रद्द हो जाता है, चाहे शेष सभी सदस्य उसके समर्थन में हों।
प्राप्त देश (P-5): संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, चीन, यूनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन), और फ्रांस।
उदाहरण 3
प्रश्न 3 (4 अंक - लघु उत्तरीय): 1997 में संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफी अन्नान द्वारा सुरक्षा परिषद में नए स्थायी सदस्यों के चयन के लिए प्रस्तावित किन्हीं चार मापदंडों का उल्लेख कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर:
1997 में तत्कालीन यूएन महासचिव कोफी अन्नान द्वारा प्रस्तावित प्रमुख मापदंड निम्नलिखित हैं:

  1. बड़ी आर्थिक शक्ति: वह देश एक बड़ी आर्थिक महाशक्ति होना चाहिए ताकि वैश्विक आर्थिक स्थिरता में योगदान दे सके।
  2. बड़ी सैन्य शक्ति: उसके पास सक्षम सैन्य बल होना चाहिए ताकि अंतरराष्ट्रीय शांति व सुरक्षा बहाली में प्रभावी योगदान दे सके।
  3. यूएन बजट में महत्वपूर्ण योगदान: वह देश नियमित रूप से संयुक्त राष्ट्र के बजट में बड़ा वित्तीय अंशदान करता हो।
  4. जनसंख्या की दृष्टि से विशाल राष्ट्र: वह देश विश्व की एक बड़ी आबादी का प्रतिनिधित्व करता हो और उसमें लोकतंत्र व मानवाधिकारों का सुदृढ़ सम्मान हो।
उदाहरण 4
प्रश्न 4 (4 अंक - लघु उत्तरीय): संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता के पक्ष में किन्हीं चार मजबूत तर्कों को प्रस्तुत कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर:
सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के पक्ष में चार सबसे सशक्त तर्क निम्नलिखित हैं:

  1. विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र: भारत विश्व की 18% आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाला सबसे विशाल और निरंतर स्थिर लोकतंत्र है।
  2. तीव्र गति से बढ़ती आर्थिक महाशक्ति: भारत विश्व की 5वीं सबसे बड़ी प्रमुख अर्थव्यवस्था है।
  3. शांति अभियानों (Peacekeeping) में सर्वोच्च योगदान: संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में भारत ने हमेशा सर्वाधिक सैनिकों का योगदान दिया है।
  4. मूल संस्थापक सदस्य और ऐतिहासिक साख: भारत 1945 से ही यूएन का सक्रिय सदस्य रहा है और गुटनिरपेक्ष आंदोलन के माध्यम से विकासशील देशों की आवाज उठाता रहा है।
उदाहरण 5
प्रश्न 5 (6 अंक - दीर्घ उत्तरीय): "संयुक्त राष्ट्र संघ को समाप्त करने का अर्थ होगा विश्व को जंगलराज में धकेल देना।" एकध्रुवीय विश्व में संयुक्त राष्ट्र संघ की प्रासंगिकता और सीमाओं का विस्तृत मूल्यांकन कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर:
शीतयुद्ध के अंत और सोवियत संघ के विघटन के बाद विश्व में संयुक्त राज्य अमेरिका का निर्विवाद वर्चस्व स्थापित हो गया। ऐसे दौर में कई आलोचकों ने तर्क दिया कि संयुक्त राष्ट्र केवल एक "बातूनी क्लब" बनकर रह गया है क्योंकि 2003 में इराक पर अमेरिकी हमला संयुक्त राष्ट्र की अनुमति के बिना किया गया था। परंतु इस यथार्थ के बावजूद संयुक्त राष्ट्र की प्रासंगिकता अक्षुण्ण है:

(क) संयुक्त राष्ट्र संघ की सीमाएँ और कमजोरियाँ:

  1. महाशक्तियों पर नियंत्रण का अभाव: जब भी P-5 देशों के राष्ट्रीय हित दांव पर होते हैं, वे संयुक्त राष्ट्र की अवहेलना कर देते हैं (उदा. 2003 में इराक हमला, 2022 में यूक्रेन युद्ध)।
  2. वीटो पावर का दुरुपयोग: P-5 देश अपने स्वार्थों की रक्षा के लिए वीटो का इस्तेमाल करते हैं, जिससे सीरिया और गाजा जैसे गंभीर मानवीय संकटों पर सुरक्षा परिषद पंगु बनी रहती है।
  3. वित्तीय निर्भरता: संयुक्त राष्ट्र के नियमित बजट का लगभग 22% हिस्सा अकेले अमेरिका वहन करता है, जिससे वह अपने वित्तीय प्रभाव का प्रयोग करता है।

(ख) एकध्रुवीय व वैश्वीकृत विश्व में संयुक्त राष्ट्र की निर्विवाद प्रासंगिकता:

  1. तीसरे विश्वयुद्ध की रोकथाम: संयुक्त राष्ट्र संघ ही वह एकमात्र वैश्विक मंच है जहाँ परमाणु संपन्न विरोधी देश एक मेज पर बैठकर बातचीत करते हैं। डैग हैमरशोल्ड के शब्दों में, "संयुक्त राष्ट्र मानवता को स्वर्ग पहुँचाने के लिए नहीं, बल्कि उसे नर्क से बचाने के लिए है।"
  2. साझा वैश्विक संकटों का समाधान: जलवायु परिवर्तन, महामारियों (WHO), निरस्त्रीकरण (IAEA) और शरणार्थी संकट जैसी समस्याओं से कोई भी देश अकेले नहीं निपट सकता।
  3. कमजोर व विकासशील देशों की आवाज़: महासभा में प्रत्येक देश को एक समान वोट प्राप्त है, जहाँ छोटे और गरीब राष्ट्र अपनी आवाज उठा सकते हैं।
  4. विकास और मानवीय सहायता: यूएनडीपी, यूनिसेफ और विश्व खाद्य कार्यक्रम ने युद्धग्रस्त और अकाल पीड़ित क्षेत्रों में करोड़ों लोगों की जान बचाई है।

निष्कर्ष: संयुक्त राष्ट्र कोई दोषरहित संस्था नहीं है, परंतु विंस्टन चर्चिल ने ठीक ही कहा था: "जबड़ा चलाने (वार्ता करने) की नौबत हथियार चलाने से लाख गुना बेहतर है।" आज की परस्पर जुड़ी दुनिया में संयुक्त राष्ट्र संघ का कोई विकल्प नहीं है।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

परीक्षार्थी अक्सर लिखते हैं कि भारत संयुक्त राष्ट्र संघ का सदस्य 1947 में आजादी मिलने के बाद बना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

भारत संयुक्त राष्ट्र संघ के मूल 51 संस्थापक सदस्यों में शामिल था और उसने स्वतंत्रता से पूर्व ही 30 अक्टूबर 1945 को यूएन चार्टर पर हस्ताक्षर किए थे।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

विद्यार्थी यह मान लेते हैं कि महासभा के प्रस्ताव सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों की तरह सभी देशों पर कानूनी रूप से बाध्यकारी होते हैं।

सही वैज्ञानिक तथ्य

महासभा के प्रस्ताव केवल "सिफारिशी" होते हैं; केवल सुरक्षा परिषद के अध्याय VII के तहत लिए गए निर्णय ही कानूनी रूप से बाध्यकारी होते हैं।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

यह सोचना कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अस्थायी सदस्य 5 वर्ष के लिए चुने जाते हैं।

सही वैज्ञानिक तथ्य

सुरक्षा परिषद के 10 अस्थायी सदस्य केवल 2 वर्ष की अवधि के लिए महासभा द्वारा चुने जाते हैं।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

यह भ्रम होना कि विश्व बैंक और आईएमएफ (IMF) दोनों संयुक्त राष्ट्र के मूल अंग हैं।

सही वैज्ञानिक तथ्य

ये संयुक्त राष्ट्र के 6 मुख्य अंगों में शामिल नहीं हैं; ये स्वतंत्र विशिष्ट वित्तीय संस्थाएं (Specialized Agencies) हैं जो ब्रेटन वुड्स सम्मेलन (1944) के तहत बनी थीं।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

परीक्षार्थी एमनेस्टी इंटरनेशनल को सरकारी संस्था समझ लेते हैं।

सही वैज्ञानिक तथ्य

एमनेस्टी इंटरनेशनल एक गैर-सरकारी अंतरराष्ट्रीय संगठन (NGO) है, जो सरकारों से स्वतंत्र होकर मानवाधिकारों की रक्षा के लिए कार्य करता है।

संयुक्त राष्ट्र संघ (UN) का संगठनात्मक ढांचा एवं P-5 वीटो प्रणाली

🌐 संयुक्त राष्ट्र संघ (UN) की संगठनात्मक संरचना

24 अक्टूबर 1945 को स्थापित - 193 सदस्य राष्ट्र

🛡️ सुरक्षा परिषद (UNSC)
  • कुल सदस्य: 15 (5 स्थायी + 10 अस्थायी)
  • P-5 देश: USA, रूस, चीन, UK, फ्रांस
  • विशेषाधिकार: वीटो पावर (Veto Power)
  • निर्णय: सदस्य देशों पर कानूनी रूप से बाध्यकारी
  • सुधार मांग: भारत, जापान, ब्राजील, जर्मनी (G-4)
🏛️ आम सभा / महासभा (UNGA)
  • प्रतिनिधित्व: सभी 193 सदस्य देश (1 देश = 1 वोट)
  • भूमिका: 'विश्व की लघु संसद', बजट अनुमोदन
  • प्रस्ताव: नैतिक व राजनीतिक महत्व (गैर-बाध्यकारी)
  • वार्षिक सत्र: प्रतिवर्ष सितंबर में न्यूयॉर्क में
⚖️ प्रमुख एजेंसियां एवं न्यायालय
  • ICJ (हेग): 15 न्यायाधीश, अंतर-राज्यीय विवाद
  • सचिवालय: महासचिव एंटोनियो गुटेरेस
  • आर्थिक एजेंसियां: IMF, विश्व बैंक, WTO
  • मानवीय एजेंसियां: WHO, UNESCO, UNICEF, IAEA
  • NGOs: एमनेस्टी इंटरनेशनल, ह्यूमन राइट्स वॉच

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की भूमिका: संप्रभु देशों के बीच सहयोग, युद्ध की रोकथाम, और जलवायु व महामारियों जैसी साझी समस्याओं के समाधान के लिए अपरिहार्य।
मुख्य बिंदु 2
संयुक्त राष्ट्र संघ की उत्पत्ति: राष्ट्र संघ की विफलता के बाद 24 अक्टूबर 1945 को सैन फ्रांसिस्को सम्मेलन के उपरांत 51 देशों द्वारा स्थापना की गई।
मुख्य बिंदु 3
भारत का ऐतिहासिक स्थान: भारत 30 अक्टूबर 1945 को चार्टर पर हस्ताक्षर करके संयुक्त राष्ट्र का मूल संस्थापक सदस्य बना था।
मुख्य बिंदु 4
छह प्रमुख अंग: महासभा, सुरक्षा परिषद, आर्थिक व सामाजिक परिषद, अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (हेग), सचिवालय और न्यासिता परिषद (1994 से निलंबित)।
मुख्य बिंदु 5
सुरक्षा परिषद की संरचना: कुल 15 सदस्य—5 स्थायी (P-5: अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन, फ्रांस) और 10 अस्थायी (2 वर्ष के लिए निर्वाचित)।
मुख्य बिंदु 6
वीटो पावर (Veto Power): किसी भी एक स्थायी सदस्य द्वारा नकारात्मक मत दिए जाने पर प्रस्ताव का स्वतः निरस्त हो जाना।
मुख्य बिंदु 7
कोफी अन्नान के 1997 के मापदंड: बड़ी आर्थिक व सैन्य शक्ति, यूएन बजट में योगदान, विशाल जनसंख्या, लोकतंत्र व मानवाधिकार तथा विविधता का प्रतिनिधित्व।
मुख्य बिंदु 8
भारत की स्थायी दावेदारी: सबसे बड़ा लोकतंत्र, 1.4 अरब आबादी, 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और शांति अभियानों में सर्वाधिक योगदान के दम पर सशक्त दावा।
मुख्य बिंदु 9
दावेदारी के मार्ग में बाधाएँ: चीन का वीटो, कॉफी क्लब (पाकिस्तान, इटली आदि) का विरोध और वीटो पावर के विस्तार पर आम सहमति का अभाव।
मुख्य बिंदु 10
वित्तीय व मानवाधिकार संस्थाएं: IMF व विश्व बैंक (1944), WTO (1995), IAEA (1957) तथा स्वतंत्र एनजीओ एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
संयुक्त राष्ट्र संघ (UN) का मुख्यालय कहाँ स्थित है और इसका अंतरराष्ट्रीय न्यायालय किस शहर में स्थित है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: संयुक्त राष्ट्र संघ का मुख्य मुख्यालय न्यूयॉर्क (USA) में है, जबकि इसका अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) हेग (नीदरलैंड) के पीस पैलेस में स्थित है।
2
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 10 अस्थायी सदस्यों का चुनाव किसके द्वारा और कितने समय के लिए किया जाता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: अस्थायी सदस्यों का चुनाव संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा दो-तिहाई बहुमत से 2 वर्ष के कार्यकाल के लिए किया जाता है।
3
विश्व व्यापार संगठन (WTO) की स्थापना किस वर्ष हुई थी और इसने किस पूर्ववर्ती संस्था का स्थान लिया?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: विश्व व्यापार संगठन की स्थापना 1 जनवरी 1995 को हुई थी और इसने 1947 के "प्रशुल्क एवं व्यापार संबंधी सामान्य समझौते" (GATT) का स्थान लिया।
4
अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) का गठन किस वर्ष हुआ और इसका मुख्यालय कहाँ स्थित है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: IAEA का गठन 1957 में हुआ था और इसका मुख्यालय विएना (ऑस्ट्रिया) में स्थित है।
5
वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव कौन हैं और वे किस देश के पूर्व प्रधानमंत्री रह चुके हैं?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: वर्तमान महासचिव एंटोनियो गुटेरेस (António Guterres) हैं और वे पुर्तगाल के पूर्व प्रधानमंत्री रह चुके हैं।
अध्याय का अध्ययन पूर्ण हुआ?
अभ्यास के लिए तैयार?

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