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CBSE • कक्षा XII • Political Science • अध्याय 3
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

समकालीन दक्षिण एशिया

दक्षिण एशिया विश्व राजनीति का एक ऐसा अनूठा और अत्यंत संवेदनशील भू-भाग है, जहाँ संघर्ष और सहयोग, अशांति और सौहार्द, तथा तानाशाही और जीवंत लोकतंत्र साथ-साथ सांस लेते हैं। उत्तर में हिमालय की दुर्गम पर्वतमाला, दक्षिण में हिंद महासागर तथा पूर्व और पश्चिम में क्रमशः बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से घिरा यह क्षेत्र एक विशिष्ट भौगोलिक और सांस्कृतिक पहचान प्रस्तुत करता है। दक्षिण एशिया के अंतर्गत मुख्य रूप से सात देश शामिल हैं—भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका और मालदीव (2007 में अफगानिस्तान भी सार्क में शामिल हुआ)। इस क्षेत्र में राजनीतिक प्रणालियों की अद्भुत विविधता है: भारत और श्रीलंका ने स्वतंत्रता के बाद से ही निरंतर और सफलतापूर्वक लोकतांत्रिक व्यवस्था को बनाए रखा है; पाकिस्तान और बांग्लादेश में लोकतंत्र और सैन्य तानाशाही के बीच आँख-मिचौली चलती रही है; नेपाल में सदियों पुरानी राजशाही समाप्त होकर 2015 में एक धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक गणराज्य स्थापित हुआ; भूटान संवैधानिक राजतंत्र से बहुदलीय लोकतंत्र की ओर बढ़ा; और मालदीव 2005 में बहुदलीय गणतंत्र बना। यह अध्याय जैक बोर्ड (CBSE Class 12) के पाठ्यक्रम का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसमें भारत-पाकिस्तान संघर्ष, बांग्लादेश का मुक्ति संग्राम (1971), श्रीलंका का जातीय संघर्ष (LTTE), नेपाल में लोकतंत्र की बहाली तथा सार्क (SAARC) व साफ्टा (SAFTA) की उपलब्धियों और सीमाओं का सांगोपांग विवेचन किया गया है।

🌍 क्या आपने कभी सोचा है: एक ही मिट्टी, एक जैसी भाषाएं और सदियों का साझा इतिहास रखने वाले पड़ोसी देश 7 दशकों से एक-दूसरे के खून के प्यासे क्यों हैं?

1947 से पहले भारत और पाकिस्तान एक ही देश थे; हमारे पूर्वज एक थे, संगीत और खान-पान एक था। लेकिन आज दोनों के बीच 3,000 किलोमीटर लंबी सीमा पर टैंक और तोपें तनी हैं और दोनों के पास ऐसे परमाणु बम हैं जो पूरे उपमहाद्वीप को कुछ ही मिनटों में भस्म कर सकते हैं!

उसी उपमहाद्वीप में पाकिस्तान ने अपने ही बंगाली नागरिकों पर ऐसे अमानवीय अत्याचार किए कि 1971 में 93,000 पाकिस्तानी सैनिकों को भारतीय सेना के सामने आत्मसमर्पण करना पड़ा और विश्व के मानचित्र पर 'बांग्लादेश' का उदय हुआ। उसी दक्षिण एशिया में एक शांत द्वीप श्रीलंका में सिंहली और तमिलों के बीच 25 साल तक चले गृहयुद्ध में आत्मघाती बम विस्फोटों ने भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी तक की जान ले ली! आखिर दक्षिण एशिया में लोकतंत्र इतनी मुश्किलों से क्यों जूझता है और क्या यहाँ कभी यूरोपीय संघ जैसा स्थायी भाईचारा संभव है? आइए, दक्षिण एशिया के इस धड़कते इतिहास को गहराई से समझें।

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

इस अध्याय का अध्ययन क्यों अपरिहार्य है?

  1. बोर्ड परीक्षा में ठोस अंक: CBSE कक्षा 12 में दक्षिण एशिया से 6 अंक का दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (जैसे: पाकिस्तान में लोकतंत्र के मार्ग में बाधाएँ, 1971 का बांग्लादेश युद्ध, श्रीलंका का जातीय संघर्ष या सार्क की असफलता के कारण) लगभग हर साल दोहराया जाता है।
  2. राष्ट्रीय सुरक्षा एवं कूटनीति की समझ: कश्मीर मुद्दा, सीमा पार आतंकवाद, सिंधु जल समझौता, और चीन द्वारा श्रीलंका व पाकिस्तान में बंदरगाह निर्माण (String of Pearls) को समझने के लिए यह पृष्ठभूमि अनिवार्य है।
  3. प्रतियोगी परीक्षाओं (UPSC/JPSC/SSC) का आधार: शिमला समझौता (1972), लाहौर घोषणा (1999), 1987 का भारत-श्रीलंका समझौता और साफ्टा (SAFTA) संधियां सामान्य अध्ययन के मुख्य विषय हैं।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • 1947 का भारत विभाजन: द्वि-राष्ट्र सिद्धांत और विभाजन से उत्पन्न मानवीय त्रासदी।

  • शीतयुद्ध की गुटबाजी: पाकिस्तान का अमेरिकी गुट (CENTO, SEATO) में शामिल होना और भारत की गुटनिरपेक्ष नीति।

  • लोकतंत्र बनाम सैन्य शासन: राजनीतिक सत्ता में सेना और निर्वाचित सरकारों की शक्तियों का संतुलन।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • दक्षिण एशिया की भौगोलिक और राजनीतिक सीमाओं तथा इस क्षेत्र की विविधता को रेखांकित कर सकेंगे।
  • पाकिस्तान में लोकतंत्र की अस्थिरता और सैन्य शासन के प्रभुत्व के सामाजिक, धार्मिक और भू-राजनीतिक कारणों का विश्लेषण कर सकेंगे।
  • 1971 में पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान बांग्लादेश) के मुक्ति संग्राम और बांग्लादेश के निर्माण में भारत की ऐतिहासिक भूमिका की व्याख्या कर सकेंगे।
  • नेपाल में पूर्ण राजशाही से संवैधानिक राजतंत्र और अंततः एक संघीय लोकतांत्रिक गणराज्य की स्थापना के संघर्ष को समझ सकेंगे।
  • श्रीलंका में सिंहली बहुसंख्यकवाद और लिट्टे (LTTE) के बीच जातीय संघर्ष के कारणों और 2009 में उसके पटाक्षेप का समालोचनात्मक मूल्यांकन कर सकेंगे।
  • सार्क (SAARC) और साफ्टा (SAFTA) के उद्देश्यों, उपलब्धियों और भारत-पाक कटुता के कारण उनकी सीमाओं का वस्तुनिष्ठ परीक्षण कर सकेंगे।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. पाकिस्तान में लोकतंत्र और सैन्य...
2 2. बांग्लादेश का उदय (1971): भाषाई...
3 3. नेपाल: पूर्ण राजशाही से संघीय लो...
4 4. श्रीलंका में जातीय संघर्ष: सिंहल...
5 5. क्षेत्रीय सहयोग: सार्क (SAARC) ए...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. पाकिस्तान में लोकतंत्र और सैन्य शासन का चक्रव्यूह

(क) सैन्य तख्तापलटों का ऐतिहासिक सिलसिला

1947 में अपनी स्थापना के बाद से पाकिस्तान का राजनीतिक इतिहास निर्वाचित सरकारों और प्रत्यक्ष सैन्य तानाशाही के बीच झूलता रहा है:

  • जनरल अयूब खान (1958-1969): देश के पहले संविधान बनने के तुरंत बाद सेना प्रमुख जनरल अयूब खान ने सत्ता पर कब्जा कर लिया। जन-असंतोष के कारण उन्हें सत्ता छोड़नी पड़ी।
  • जनरल याहिया खान (1969-1971): अयूब खान के बाद याहिया खान ने बागडोर संभाली। इन्हीं के शासनकाल में 1971 का बांग्लादेश संकट उत्पन्न हुआ और भारत के हाथों पाकिस्तान की करारी पराजय हुई।
  • जुल्फिकार अली भुट्टो (1971-1977): पराजय के बाद लोकतंत्र लौटा और भुट्टो के नेतृत्व में नागरिक सरकार बनी।
  • जनरल जिया-उल-हक (1977-1988): 1977 में जनरल जिया ने भुट्टो का तख्तापलट किया (बाद में 1979 में भुट्टो को फांसी दे दी गई)। जिया ने पाकिस्तान का व्यापक इस्लामीकरण (Islamisation) किया।
  • लोकतांत्रिक दौर (1988-1999): जिया की विमान दुर्घटना में मृत्यु के बाद बेनजीर भुट्टो (पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी) और नवाज शरीफ (मुस्लिम लीग) के बीच दलीय लोकतंत्र चला।
  • जनरल परवेज मुशर्रफ (1999-2008): अक्टूबर 1999 में कारगिल युद्ध के तुरंत बाद मुशर्रफ ने नवाज शरीफ को अपदस्थ कर सत्ता हथिया ली।
  • 2008 के बाद: यद्यपि लोकतांत्रिक चुनाव हो रहे हैं, परंतु पर्दे के पीछे असली शक्ति आज भी रावलपिंडी (सेना मुख्यालय) और आईएसआई (ISI) के पास ही केंद्रित है।

(ख) पाकिस्तान में लोकतंत्र के मार्ग में स्थायी बाधाएँ

कारकविस्तृत विश्लेषण
1. सेना, धर्मगुरुओं और भूस्वामियों का सामाजिक दबदबा पाकिस्तानी समाज में सामंती जमींदारों, कट्टरपंथी इस्लामी धर्मगुरुओं और सैन्य अभिजात वर्ग का त्रिकोणीय गठजोड़ इतना मजबूत है कि जब भी निर्वाचित सरकारें सुधार की बात करती हैं, सेना उन्हें 'राष्ट्रीय सुरक्षा' का हवाला देकर अपदस्थ कर देती है।
2. भारत के साथ निरंतर शत्रुता सेना और रूढ़िवादी गुटों ने जनता के बीच यह डर बैठा दिया है कि भारत पाकिस्तान को नष्ट करना चाहता है। इस 'भारतीय हौवे' के बल पर सेना भारी रक्षा बजट हड़पती है और अपने राजनीतिक दखल को जायज ठहराती है।
3. अंतरराष्ट्रीय समर्थन और भू-राजनीतिक स्वार्थ शीतयुद्ध के दौरान अमेरिका और पश्चिमी देशों ने सोवियत संघ के खिलाफ पाकिस्तान की सेना को अरबों डॉलर के हथियार और वित्तीय सहायता दी। बाद में 'आतंकवाद के विरुद्ध वैश्विक युद्ध' में भी अमेरिका ने लोकतंत्र के बजाय सैन्य तानाशाहों (जिया और मुशर्रफ) को अपना मुख्य मोहरा बनाया।
4. कमजोर राजनीतिक दल एवं संस्थागत भ्रष्टाचार नागरिक राजनीतिक दलों में आंतरिक लोकतंत्र का अभाव, वंशवाद और व्यापक भ्रष्टाचार के कारण जनता का निर्वाचित नेताओं से मोहभंग हो जाता है, जिससे सेना को दखल देने का बहाना मिल जाता है।

2. बांग्लादेश का उदय (1971): भाषाई स्वाभिमान से संप्रभु राष्ट्र तक

(क) पूर्वी पाकिस्तान में शोषण और असंतोष की पृष्ठभूमि

1947 में जब धर्म के आधार पर पाकिस्तान बना, तो उसके दो हिस्से थे—पश्चिमी पाकिस्तान और 1,600 किमी दूर पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान बांग्लादेश)। दोनों के बीच केवल धर्म की समानता थी, जबकि भाषा, संस्कृति, खान-पान और जीवनशैली पूरी तरह भिन्न थी।

पश्चिमी पाकिस्तान के शासकों ने पूर्वी पाकिस्तान के साथ घोर औपनिवेशिक भेदभाव शुरू किया:

  • उर्दू भाषा थोपना: बंगाली भाषा और संस्कृति को दबाकर उर्दू को जबरन राष्ट्रभाषा घोषित किया गया, जिसके विरोध में 1952 में ढाका में ऐतिहासिक भाषा आंदोलन हुआ।
  • आर्थिक शोषण: पूर्वी पाकिस्तान की जूट और चाय से अर्जित विदेशी मुद्रा का बड़ा हिस्सा पश्चिमी पाकिस्तान के विकास पर खर्च किया जाता था, जबकि पूर्वी बंगाल बाढ़ और भुखमरी से त्रस्त रहा।
  • प्रशासन और सेना में उपेक्षा: सेना और उच्च प्रशासनिक पदों पर 90% से अधिक कब्जा पश्चिमी पाकिस्तानियों का था।

(ख) 1970 के चुनाव और 'ऑपरेशन सर्चलाइट'

शेख मुजीबुर रहमान के नेतृत्व वाली आवामी लीग ने पूर्वी पाकिस्तान की स्वायत्तता के लिए ऐतिहासिक 'छह सूत्रीय कार्यक्रम' (6-Point Demand) प्रस्तुत किया।

1970 के चुनाव में पूर्वी पाकिस्तान की 169 में से 167 सीटें जीतकर आवामी लीग ने पूर्ण बहुमत हासिल किया। परंतु पश्चिमी पाकिस्तान के शासक जुल्फिकार अली भुट्टो और सैन्य तानाशाह याहिया खान एक बंगाली के सामने झुकने को तैयार नहीं थे।

🩸 25 मार्च 1971: सैन्य बर्बरता और मुक्ति संग्राम:
पाकिस्तानी सेना ने पूर्वी पाकिस्तान में 'ऑपरेशन सर्चलाइट' शुरू किया। शेख मुजीब को गिरफ्तार कर लिया गया और लाखों निर्दोष बंगालियों का कत्लेआम किया गया। इसके प्रत्युत्तर में बंगालियों ने 'मुक्ति वाहिनी' का गठन किया। लगभग 1 करोड़ शरणार्थी अपनी जान बचाकर भारत में घुस आए।

(ग) 1971 का भारत-पाक युद्ध और बांग्लादेश की मुक्ति

प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने मुक्ति वाहिनी को नैतिक, वित्तीय और सैन्य समर्थन दिया। 3 दिसंबर 1971 को पाकिस्तान द्वारा भारतीय हवाई अड्डों पर हमले के बाद भारत औपचारिक युद्ध में उतरा। मात्र 13 दिनों के भीतर 16 दिसंबर 1971 को 93,000 पाकिस्तानी सैनिकों ने भारतीय सेना के समक्ष ऐतिहासिक आत्मसमर्पण किया और विश्व के नक्शे पर संप्रभु बांग्लादेश का उदय हुआ।

3. नेपाल: पूर्ण राजशाही से संघीय लोकतांत्रिक गणराज्य तक का सफर

(क) नेपाल का राजनीतिक संक्रमण

नेपाल लंबे समय तक विश्व का एकमात्र हिंदू साम्राज्य रहा। 1990 के जन-आंदोलन के बाद संवैधानिक राजतंत्र स्थापित हुआ, परंतु 1996 से माओवादियों ने सशस्त्र विद्रोह छेड़ दिया। 2001 में राजदरबार हत्याकांड के बाद गद्दी पर बैठे राजा ज्ञानेंद्र ने 2005 में संसद भंग कर पूर्ण तानाशाही स्थापित कर ली।

(ख) 2006 का ऐतिहासिक लोकतंत्र आंदोलन

अप्रैल 2006 में सात राजनीतिक दलों के सप्तदलीय गठबंधन (SPA) और माओवादियों ने मिलकर अभूतपूर्व जन-आंदोलन चलाया। राजा ज्ञानेंद्र को संसद बहाल करनी पड़ी। 2008 में राजशाही का पूर्ण उन्मूलन कर दिया गया और सितंबर 2015 में नेपाल ने अपना नया लोकतांत्रिक व धर्मनिरपेक्ष संविधान लागू किया।

4. श्रीलंका में जातीय संघर्ष: सिंहली बहुसंख्यकवाद बनाम लिट्टे (LTTE)

(क) जातीय संघर्ष की मूल जड़ें

1948 में स्वतंत्र श्रीलंका में 74% सिंहली (बौद्ध) और 18% तमिल थे। 1956 में सिंहली को एकमात्र राजभाषा बनाने और तमिलों के खिलाफ भेदभावपूर्ण नीतियों के विरोध में 1976 में वी. प्रभाकरन के नेतृत्व में लिट्टे (LTTE) का गठन हुआ, जिसने स्वतंत्र 'तमिल ईलम' के लिए सशस्त्र गृहयुद्ध छेड़ दिया।

(ख) भारतीय शांति सेना (IPKF) और संघर्ष का अंत

1987 के भारत-श्रीलंका समझौते के तहत भेजी गई भारतीय शांति सेना (IPKF) लिट्टे और श्रीलंकाई जनता दोनों के विरोध के कारण 1990 में वापस लौटी (1,100 से अधिक भारतीय जवान शहीद हुए)। 1991 में लिट्टे ने राजीव गांधी की हत्या कर दी। मई 2009 में श्रीलंकाई सेना ने प्रभाकरन को मारकर लिट्टे का अंत कर दिया। इस गृहयुद्ध के बावजूद श्रीलंका ने दक्षिण एशिया में उच्च मानव विकास (HDI) और लोकतंत्र को बनाए रखा।

5. क्षेत्रीय सहयोग: सार्क (SAARC) एवं साफ्टा (SAFTA) की उपलब्धियां व बाधाएं

(क) सार्क (SAARC) की स्थापना

8 दिसंबर 1985 को ढाका में 7 देशों ने सार्क की स्थापना की (मुख्यालय: काठमांडू)। 2007 में अफगानिस्तान 8वां सदस्य बना। इसका उद्देश्य आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा देना था।

(ख) साफ्टा (SAFTA) और सार्क का गतिरोध

जनवरी 2004 में साफ्टा (SAFTA) पर हस्ताक्षर हुए, जो 1 जनवरी 2006 से लागू हुआ, जिसका लक्ष्य क्षेत्रीय व्यापार पर सीमा शुल्क घटाना था।

⚠️ सार्क के गतिरोध के मुख्य कारण:
1. भारत-पाकिस्तान कटुता: सीमा पार आतंकवाद के कारण 2016 के उरी हमले के बाद से शिखर सम्मेलन स्थगित हैं।
2. पारस्परिक अविश्वास: छोटे पड़ोसी देश भारत के विशाल आकार को लेकर आशंकित रहते हैं।
3. द्विपक्षीय मुद्दों का निषेध: चार्टर के तहत द्विपक्षीय विवादों पर चर्चा प्रतिबंधित होने से मूल समस्याएं अनसुलझी रहती हैं। फलस्वरूप भारत ने बिम्सटेक (BIMSTEC) को प्राथमिकता देना शुरू किया है।

महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रावधान, राजनीतिक सिद्धांत एवं कालक्रम

1947
भारत का विभाजन; स्वतंत्र भारत एवं पाकिस्तान का गठन।
1948
सिलोन (श्रीलंका) स्वतंत्र हुआ; प्रथम भारत-पाक कश्मीर युद्ध।
1960
विश्व बैंक की मध्यस्थता में भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल समझौता।
1965
भारत और पाकिस्तान के बीच दूसरा युद्ध; 1966 में ताशकंद समझौता।
1970
पाकिस्तान में आम चुनाव; पूर्वी पाकिस्तान में आवामी लीग को पूर्ण बहुमत।
25 मार्च 1971
पाकिस्तानी सेना द्वारा पूर्वी पाकिस्तान में "ऑपरेशन सर्चलाइट" शुरू।
16 दिसंबर 1971
पाकिस्तानी सेना का आत्मसमर्पण; संप्रभु बांग्लादेश का जन्म।
3 जुलाई 1972
इंदिरा गांधी और जुल्फिकार अली भुट्टो के बीच शिमला समझौता।
8 दिसंबर 1985
ढाका में सार्क (SAARC) की स्थापना; काठमांडू में सचिवालय।
जुलाई 1987
भारत-श्रीलंका समझौता; भारतीय शांति सेना (IPKF) की तैनाती।
1990
श्रीलंका से IPKF की वापसी; नेपाल में लोकतांत्रिक संविधान लागू।
21 मई 1991
लिट्टे के आत्मघाती हमलावर द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या।
मई 1998
भारत (पोखरण) और पाकिस्तान (चागई हिल्स) द्वारा परमाणु परीक्षण।
1999
कारगिल युद्ध (ऑपरेशन विजय) में पाकिस्तानी घुसपैठियों का सफाया।
जनवरी 2004
12वें सार्क सम्मेलन में साफ्टा (SAFTA) पर हस्ताक्षर; 2006 से प्रभावी।
अप्रैल 2006
नेपाल में जन-आंदोलन-II; संसद बहाली और माओवादी शांति समझौता।
मई 2009
प्रभाकरन के मारे जाने के साथ लिट्टे (LTTE) का खात्मा।
सितंबर 2015
नेपाल द्वारा नए धर्मनिरपेक्ष एवं लोकतांत्रिक संविधान की घोषणा।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
प्रश्न 1 (1 अंक - वस्तुनिष्ठ): सार्क (SAARC) की स्थापना किस वर्ष हुई थी तथा इसका स्थायी सचिवालय कहाँ स्थित है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर:
सार्क (SAARC) की स्थापना 8 दिसंबर 1985 को ढाका (बांग्लादेश) में हुई थी तथा इसका स्थायी सचिवालय काठमांडू (नेपाल) में स्थित है।
उदाहरण 2
प्रश्न 2 (2 अंक - अति लघु उत्तरीय): 1972 के शिमला समझौते की किन्हीं दो प्रमुख शर्तों का उल्लेख कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर:
3 जुलाई 1972 को प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और जुल्फिकार अली भुट्टो के मध्य हस्ताक्षरित शिमला समझौते की दो प्रमुख शर्तें निम्न हैं:

  1. दोनों देश अपने सभी द्विपक्षीय विवादों (विशेषकर कश्मीर मुद्दे) को केवल शांतिपूर्ण वार्ता और आपसी बातचीत से सुलझाएंगे; किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार नहीं होगी।
  2. दोनों देश 17 दिसंबर 1971 के युद्धविराम के बाद बनी 'नियंत्रण रेखा' (Line of Control - LoC) का सम्मान करेंगे।
उदाहरण 3
प्रश्न 3 (4 अंक - लघु उत्तरीय): पाकिस्तान में एक स्थिर लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था स्थापित न हो पाने के किन्हीं चार कारणों का परीक्षण कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर:
पाकिस्तान में लोकतंत्र की जड़ें न जम पाने के चार प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:

  1. सेना का अत्यधिक राजनीतिक प्रभाव: सेना केवल सुरक्षा बल नहीं है, बल्कि एक विशाल आर्थिक व राजनीतिक शक्ति है जो मामूली मतभेद पर तख्तापलट कर देती है।
  2. कट्टरपंथी धर्मगुरुओं एवं सामंतों का दबदबा: समाज पर सामंती ज़मींदारों और रूढ़िवादी मौलवियों का नियंत्रण है जो लोकतांत्रिक सुधारों का विरोध करते हैं।
  3. भारत विरोधी उन्माद: सेना जनता में यह भय बनाए रखती है कि केवल सेना ही देश को भारत से बचा सकती है, जिससे सैन्य हस्तक्षेप को वैधता मिल जाती है।
  4. विदेशी ताकतों के रणनीतिक स्वार्थ: शीतयुद्ध काल में और आतंकवाद विरोधी अभियानों में अमेरिका व पश्चिमी देशों ने अपने स्वार्थ के लिए सैन्य तानाशाहों (अयूब, जिया, मुशर्रफ) को भारी वित्तीय व सैन्य सहायता दी।
उदाहरण 4
प्रश्न 4 (4 अंक - लघु उत्तरीय): 1971 में बांग्लादेश के निर्माण के पीछे कौन-से प्रमुख कारण उत्तरदायी थे?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर:
1971 में बांग्लादेश के जन्म के लिए निम्नलिखित प्रमुख कारण उत्तरदायी थे:

  1. भाषाई और सांस्कृतिक दमन: पश्चिमी पाकिस्तान के शासकों ने पूर्वी पाकिस्तान पर जबरन उर्दू थोपने का प्रयास किया, जिससे भाषाई असंतोष भड़का।
  2. आर्थिक शोषण: पूर्वी पाकिस्तान से अर्जित विदेशी मुद्रा का बड़ा हिस्सा पश्चिमी पाकिस्तान पर खर्च किया जाता था, जबकि पूर्वी बंगाल उपेक्षित रहा।
  3. 1970 के चुनावों के जनादेश का अपमान: चुनाव में शेख मुजीब की आवामी लीग को 167 सीटें मिलीं, परंतु उन्हें प्रधानमंत्री बनाने से इनकार कर दिया गया।
  4. पाकिस्तानी सेना का बर्बर कत्लेआम: मार्च 1971 में 'ऑपरेशन सर्चलाइट' के तहत लाखों बंगालियों का कत्लेआम किया गया। इसके प्रत्युत्तर में मुक्ति वाहिनी बनी और भारतीय सेना के सहयोग से स्वतंत्र बांग्लादेश का जन्म हुआ।
उदाहरण 5
प्रश्न 5 (6 अंक - दीर्घ उत्तरीय): "दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC) अपनी अपार संभावनाओं के बावजूद अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने में आंशिक रूप से विफल रहा है।" इस कथन की समीक्षा करते हुए सार्क की विफलताओं के कारणों और साफ्टा (SAFTA) के महत्व पर प्रकाश डालिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर:
8 दिसंबर 1985 को स्थापित सार्क (SAARC) का उद्देश्य दक्षिण एशिया के देशों में आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा देना था। परंतु यह संगठन अपनी अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर सका है:

(क) सार्क की विफलताओं और गतिरोध के प्रमुख कारण:

  1. भारत-पाकिस्तान की निरंतर कटुता: सीमा पार आतंकवाद और कश्मीर विवाद ने सार्क को बंधक बना रखा है। 2016 के उरी आतंकी हमले के बाद से शिखर सम्मेलन स्थगित हैं।
  2. पारस्परिक अविश्वास और भय का वातावरण: छोटे पड़ोसी देश भारत के विशाल आकार और अर्थव्यवस्था से आशंकित रहते हैं कि भारत उन पर प्रभुत्व स्थापित कर लेगा।
  3. द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा का निषेध: सार्क चार्टर के तहत द्विपक्षीय विवादों को उठाने की मनाही है, जिससे मूल राजनीतिक विवाद अनसुलझे रहते हैं।
  4. आंतरिक व्यापार का निम्न स्तर: दक्षिण एशिया का आपसी व्यापार कुल वैश्विक व्यापार का मात्र 5% से भी कम है।

(ख) साफ्टा (SAFTA) का महत्व और सीमाएँ:
जनवरी 2004 में हस्ताक्षरित साफ्टा (1 जनवरी 2006 से प्रभावी) का उद्देश्य सीमा शुल्क घटाकर दक्षिण एशिया को मुक्त व्यापार क्षेत्र बनाना था। परंतु पाकिस्तान की अड़ंगेबाजी और लंबी नकारात्मक सूची (Negative List) के कारण यह अपेक्षित सफलता नहीं पा सका।

निष्कर्ष: सार्क के गतिरोध के कारण भारत अब बिम्सटेक (BIMSTEC) और द्विपक्षीय व्यापार समझौतों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहा है।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

परीक्षार्थी अक्सर लिखते हैं कि बांग्लादेश 1947 में ही स्वतंत्र देश बन गया था।

सही वैज्ञानिक तथ्य

1947 में वह "पूर्वी पाकिस्तान" बना था। 16 दिसंबर 1971 के युद्ध के बाद वह स्वतंत्र राष्ट्र "बांग्लादेश" बना।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

विद्यार्थी यह समझ लेते हैं कि सार्क (SAARC) में प्रारंभ से ही 8 सदस्य देश थे।

सही वैज्ञानिक तथ्य

1985 में स्थापना के समय केवल 7 देश थे। 8वां सदस्य "अफगानिस्तान" अप्रैल 2007 में 14वें शिखर सम्मेलन में शामिल हुआ।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

छात्र कारगिल युद्ध को 1971 के युद्ध से मिला देते हैं।

सही वैज्ञानिक तथ्य

1971 का युद्ध बांग्लादेश मुक्ति के लिए लड़ा गया था, जबकि 1999 का कारगिल संघर्ष LoC पर पाकिस्तानी घुसपैठियों को हटाने के लिए था।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

यह गलत धारणा होना कि नेपाल हमेशा से धर्मनिरपेक्ष था।

सही वैज्ञानिक तथ्य

नेपाल 2008 तक आधिकारिक हिंदू साम्राज्य था। 2008 में राजशाही समाप्त हुई और 2015 के संविधान द्वारा वह धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक गणराज्य बना।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

यह सोचना कि सार्क का मुख्यालय नई दिल्ली में है।

सही वैज्ञानिक तथ्य

सार्क का स्थायी सचिवालय (मुख्यालय) काठमांडू (नेपाल) में स्थित है।

समकालीन दक्षिण एशिया: राजनीतिक प्रणालियों और संघर्षों का तुलनात्मक परिदृश्य

🗺️ दक्षिण एशिया: शासन प्रणालियों एवं प्रमुख चुनौतियों का परिदृश्य

7 संस्थापक देश + अफगानिस्तान की लोकतांत्रिक व सामरिक यात्रा

🇮🇳 भारत एवं 🇱🇰 श्रीलंका
  • प्रणाली: 1947/48 से निरंतर सफल लोकतंत्र
  • श्रीलंका संकट: सिंहली-तमिल जातीय गृहयुद्ध (LTTE 1976-2009)
  • उपलब्धि: आर्थिक उदारीकरण, उच्च साक्षरता, जनसंख्या नियंत्रण
🇵🇰 पाकिस्तान एवं 🇧🇩 बांग्लादेश
  • प्रणाली: लोकतंत्र और सैन्य शासन का मिला-जुला इतिहास
  • पाकिस्तान चुनौती: सेना का राजनीतिक नियंत्रण, सीमा पार आतंकवाद
  • बांग्लादेश: 1971 का मुक्ति संग्राम; वर्तमान में आर्थिक प्रगति
🇳🇵 नेपाल, 🇧🇹 भूटान, 🇲🇻 मालदीव
  • नेपाल: 2008 में राजशाही समाप्त, 2015 का लोकतांत्रिक संविधान
  • भूटान: संवैधानिक राजतंत्र; 'सकल राष्ट्रीय प्रसन्नता' (GNH)
  • मालदीव: 2005 में बहुदलीय लोकतंत्र; पर्यावरण संकट

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
दक्षिण एशिया की भौगोलिक विशिष्टता: हिमालय, हिंद महासागर, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से घिरा यह क्षेत्र सांस्कृतिक रूप से साझा और राजनीतिक रूप से विविध है।
मुख्य बिंदु 2
लोकतंत्र की निरंतरता: भारत और श्रीलंका स्वतंत्रता के बाद से ही अपनी लोकतांत्रिक व्यवस्था को सफलतापूर्वक बनाए रखने वाले दो देश हैं।
मुख्य बिंदु 3
पाकिस्तान में सैन्य शासन: सेना, सामंतों और कट्टरपंथी मौलवियों के गठजोड़ तथा भारत विरोधी दुष्प्रचार के कारण पाकिस्तान में लोकतंत्र बार-बार लड़खड़ाया है।
मुख्य बिंदु 4
बांग्लादेश का मुक्ति संग्राम: पश्चिमी पाकिस्तान के भाषाई व आर्थिक दमन के खिलाफ 1971 में शेख मुजीब के नेतृत्व में मुक्ति संग्राम छिड़ा और भारतीय सेना की मदद से बांग्लादेश बना।
मुख्य बिंदु 5
16 दिसंबर 1971: पाकिस्तानी सेना के 93,000 सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया, जो द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद का सबसे बड़ा सैन्य आत्मसमर्पण था।
मुख्य बिंदु 6
नेपाल की लोकतांत्रिक यात्रा: 1990 के जन-आंदोलन, 1996-2006 के माओवादी विद्रोह और 2006 के जन-आंदोलन-II के बाद 2008 में राजशाही का अंत हुआ और 2015 में नया संविधान बना।
मुख्य बिंदु 7
श्रीलंका का जातीय संघर्ष: बहुसंख्यक सिंहलियों और अल्पसंख्यक तमिलों (LTTE) के बीच 1983 से 2009 तक खूनी गृहयुद्ध चला, जिसका अंत 2009 में प्रभाकरन की मौत से हुआ।
मुख्य बिंदु 8
भारतीय शांति सेना (IPKF 1987-90): श्रीलंका में शांति बहाली के लिए भेजी गई भारतीय सेना को दोनों पक्षों के विरोध का सामना करना पड़ा और 1991 में राजीव गांधी की हत्या हुई।
मुख्य बिंदु 9
सार्क (SAARC 1985): 8 देशों का यह क्षेत्रीय संगठन आपसी अविश्वास और भारत-पाकिस्तान कटुता के कारण अपनी पूरी क्षमता का प्रदर्शन नहीं कर पाया है।
मुख्य बिंदु 10
साफ्टा (SAFTA 2006): दक्षिण एशिया में मुक्त व्यापार के उद्देश्य से लाया गया यह समझौता राजनीतिक अड़चनों के कारण सीमित रहा।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
1971 के युद्ध के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच किस ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: 3 जुलाई 1972 को प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और जुल्फिकार अली भुट्टो के बीच "शिमला समझौते" पर हस्ताक्षर किए गए थे।
2
पूर्वी पाकिस्तान में आवामी लीग के नेता शेख मुजीबुर रहमान ने स्वायत्तता के लिए कितने सूत्रीय कार्यक्रम प्रस्तुत किए थे?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: शेख मुजीबुर रहमान ने पूर्वी पाकिस्तान की स्वायत्तता के लिए ऐतिहासिक "छह सूत्रीय कार्यक्रम" (6-Point Charter) प्रस्तुत किया था।
3
श्रीलंका में "तमिल ईलम" की मांग को लेकर सशस्त्र संघर्ष करने वाले उग्रवादी संगठन का पूरा नाम क्या था?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (LTTE - Liberation Tigers of Tamil Eelam), जिसके प्रमुख वेलुपिल्लई प्रभाकरन थे।
4
सार्क (SAARC) का आठवां सदस्य देश कौन सा बना और वह किस वर्ष शामिल हुआ?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: सार्क का आठवां सदस्य देश "अफगानिस्तान" बना, जिसे अप्रैल 2007 में नई दिल्ली शिखर सम्मेलन में शामिल किया गया।
5
दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र (SAFTA) समझौता किस वर्ष हस्ताक्षरित हुआ और यह कब से प्रभावी हुआ?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: साफ्टा समझौते पर जनवरी 2004 में इस्लामाबाद में हस्ताक्षर किए गए और यह 1 जनवरी 2006 से औपचारिक रूप से प्रभावी हुआ।
अध्याय का अध्ययन पूर्ण हुआ?
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