1.1 प्रारंभिक जीविका निर्वाह कृषि (झूम अथवा कर्तन-दहन प्रणाली)
यह कृषि भूमि के छोटे टुकड़ों पर आदिम औजारों (जैसे लकड़ी के हल, डाओ और खुदाई करने वाली छड़ी) तथा पारिवारिक या सामुदायिक श्रम की सहायता से की जाती है:
- कर्तन एवं दहन प्रणाली (Slash and Burn): किसान जंगल के एक छोटे हिस्से की वनस्पति को काटकर साफ करते हैं और फिर उसे जला देते हैं। राख को मिट्टी में मिला दिया जाता है और उस पर फसलें उगाई जाती हैं। जब मिट्टी की उर्वरता कम हो जाती है, तो किसान उस जमीन को छोड़ देते हैं और किसी दूसरे नए भूखंड को साफ करते हैं।
- विशेषताएं: यह पूरी तरह मानसून, मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता और पर्यावरण पर निर्भर होती है। इसमें रासायनिक खादों या आधुनिक उपकरणों का प्रयोग नहीं होता; अतः उत्पादकता बहुत कम होती है।
झूम कृषि के विभिन्न स्थानीय व वैश्विक नाम (बोर्ड परीक्षा हेतु अति-महत्वपूर्ण):
| क्षेत्र / राज्य / देश | स्थानीय नाम |
|---|---|
| पूर्वोत्तर राज्य (असम, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड) | झूम (Jhumming) |
| मध्य प्रदेश | बेवर (Bewar) या दहिया (Dahiya) |
| आंध्र प्रदेश | पोडू (Podu) या पेंडा (Penda) |
| ओडिशा | पामा डाबी (Pama Dabi), कोमान या बरिंगा |
| पश्चिमी घाट | कुमारी (Kumari) |
| दक्षिण-पूर्वी राजस्थान | वालरे (Valre) या वाल्टरे |
| हिमालयी क्षेत्र | खिल (Khil) |
| झारखंड | कुरुवा (Kuruwa) |
| बस्तर (छत्तीसगढ़) व अंडमान-निकोबार | दीपा (Dipa) |
| मैक्सिको व मध्य अमेरिका (विश्व) | मिल्पा (Milpa) |
| ब्राजील (दक्षिण अमेरिका) | रोका (Roca) |
| मलेशिया व इंडोनेशिया (एशिया) | लादांग (Ladang) |
1.2 गहन जीविका कृषि (Intensive Subsistence Farming)
- यह कृषि उन क्षेत्रों में की जाती है जहाँ भूमि पर जनसंख्या का दबाव अत्यधिक होता है।
- यह श्रम-सघन (Labour intensive) कृषि है जहाँ सीमित भूमि से अधिकतम उत्पादन प्राप्त करने के लिए जैव-रासायनिक उर्वरकों और अत्यधिक सिंचाई का उपयोग किया जाता है।
- भू-जोत का छोटा आकार: 'पीढ़ी-दर-पीढ़ी उत्तराधिकार के अधिकार' (Right of inheritance) के कारण खेतों का आकार निरंतर छोटा और अलाभकारी होता जा रहा है। किसान सीमित भूमि से ही पूरी जीविका चलाने के लिए बाध्य हैं।
1.3 वाणिज्यिक कृषि एवं रोपण कृषि (Commercial & Plantation Agriculture)
इस कृषि का मुख्य उद्देश्य फसल को बाजार में बेचकर भारी लाभ कमाना होता है। इसमें आधुनिक तकनीकों, अधिक उपज देने वाले प्रमाणित बीजों (HYV), रासायनिक खादों और कीटनाशकों का बड़े पैमाने पर प्रयोग किया जाता है।
1. यह एक प्रकार की वाणिज्यिक कृषि है जिसमें एक बहुत बड़े विस्तृत भूखंड पर केवल एक ही फसल (एकल फसल) उगाई जाती है।
2. यह उद्योग और कृषि के बीच का 'अंतरापृष्ठ' (Interface) है; यानी यहाँ पैदा होने वाली फसल उद्योगों के लिए कच्चा माल बनती है।
3. इसमें भारी मात्रा में पूंजी (Capital intensive) और प्रवासी श्रमिकों (Migrant labourers) की आवश्यकता होती है।
4. प्रमुख उदाहरण: चाय (असम व उत्तरी बंगाल), कॉफी (कर्नाटक की नीलगिरि पहाड़ियाँ), रबड़ (केरल), गन्ना, और केला (तमिलनाडु)।