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CBSE • कक्षा X • Social Science • अध्याय 11
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

विनिर्माण उद्योग

कच्चे माल को मूल्यवान उत्पाद में परिवर्तित कर अधिक मात्रा में वस्तुओं के उत्पादन को 'विनिर्माण' (Manufacturing) कहते हैं। किसी भी राष्ट्र के आर्थिक विकास और संपन्नता की माप उसके विनिर्माण उद्योगों के विकास से की जाती है। विनिर्माण उद्योग न केवल कृषि के आधुनिकीकरण में सहायता करते हैं बल्कि द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रों में रोजगार का सृजन कर कृषि पर अत्यधिक निर्भरता को कम करते हैं, देश से बेरोजगारी और गरीबी दूर करते हैं तथा निर्मित वस्तुओं के निर्यात से बहुमूल्य विदेशी मुद्रा अर्जित करते हैं। उद्योगों की स्थापना कच्चे माल की उपलब्धता, सस्ते श्रम, पूंजी, शक्ति के साधनों, बाजार और परिवहन तंत्र द्वारा निर्धारित होती है। नगरों द्वारा दी जाने वाली सुविधाओं (बैंकिंग, बीमा, परिवहन) का लाभ उठाने के लिए जब कई उद्योग एक साथ स्थापित होते हैं, तो इसे 'समूहन बचत' (Agglomeration Economies) कहा जाता है। इस अध्याय में हम उद्योगों के बहुआयामी वर्गीकरण (कृषि आधारित बनाम खनिज आधारित, आधारभूत बनाम उपभोक्ता, सार्वजनिक, निजी, संयुक्त व सहकारी), सूती वस्त्र उद्योग, पश्चिम बंगाल के हुगली बेसिन में जूट उद्योग के संकेंद्रण, चीनी उद्योग के उत्तर से दक्षिण भारत (महाराष्ट्र) की ओर स्थानांतरण, छोटानागपुर पठार में लौह-इस्पात उद्योग के संकेन्द्रण, एल्युमिनियम प्रगलन, सीमेंट, उर्वरक, ऑटोमोबाइल तथा बेंगलुरु केंद्रित सूचना प्रौद्योगिकी (IT) क्रांति का गहन विश्लेषण करेंगे। साथ ही, उद्योगों द्वारा उत्पन्न वायु, जल, तापीय व ध्वनि प्रदूषण के दुष्प्रभावों तथा NTPC द्वारा प्रस्तुत पर्यावरण संरक्षण मॉडल का विस्तृत, प्रामाणिक और परीक्षा-उन्मुख अध्ययन प्रस्तुत किया गया है।

क्या गन्ने से बनी चीनी और लोहे से बनी रेलगाड़ी के बिना कोई देश विकसित हो सकता है?

जरा सोचिए: यदि कोई देश केवल गेहूं, धान और कच्चा लोहा उगाकर या खोदकर विदेशों को बेचता रहे, तो क्या वह कभी अमीर बन सकता है? कतई नहीं! लकड़ी से जब कागज बनता है, गन्ने से जब चीनी बनती है, लोहे के पत्थरों से जब स्टील की पटरियां बनती हैं, और रेत (सिलिका) से जब कम्प्यूटर की माइक्रोचिप्स बनती हैं, तो उनकी कीमत 100 गुना बढ़ जाती है! विनिर्माण ही वह जादू की छड़ी है जिसने अमेरिका, जर्मनी और जापान को दुनिया की महाशक्तियां बनाया। आइए जानें कि भारत के कारखाने कैसे हमारे देश को एक औद्योगिक महाशक्ति में बदल रहे हैं!

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

CBSE और CBSE कक्षा 10वीं बोर्ड परीक्षा में 'विनिर्माण उद्योग' भूगोल का सर्वाधिक विश्लेषणात्मक अध्याय है। विनिर्माण का महत्व (कृषि और उद्योग एक-दूसरे के पूरक हैं), समूहन बचत (Agglomeration Economies), हुगली बेसिन में जूट मिलों के संकेंद्रण के कारण, चीनी उद्योग के महाराष्ट्र की ओर पलायन के कारक, छोटानागपुर पठार पर लौह-इस्पात उद्योग के केंद्रीकरण के कारण, तथा औद्योगिक प्रदूषण रोकने के उपाय (NTPC पद्धति) पर 3 से 5 अंकों के दीर्घ उत्तरीय प्रश्न प्रतिवर्ष अनिवार्य रूप से पूछे जाते हैं। मानचित्र कार्य (Map Work) में जमशेदपुर, भिलाई, बोकारो, दुर्गापुर, सलेम, विशाखापट्टनम, कानपुर, सूरत, कोयंबटूर, और नोएडा/बेंगलुरु सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्कों की पहचान हर साल परीक्षा में आती है।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • प्राथमिक (कृषि, खनन), द्वितीयक (उद्योग) और तृतीयक (सेवा) आर्थिक क्षेत्रों की बुनियादी समझ।
  • कच्चे माल और तैयार माल के बीच का अंतर।
  • पर्यावरण प्रदूषण (वायु, जल, ध्वनि) के मूलभूत कारणों से परिचय।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • विनिर्माण की परिभाषा, आर्थिक विकास में इसके महत्व और 'कृषि तथा उद्योग के पारस्परिक पूरक संबंधों' का विश्लेषण करना।
  • उद्योगों की अवस्थिति को प्रभावित करने वाले भौगोलिक और गैर-भौगोलिक कारकों तथा 'समूहन बचत' की व्याख्या करना।
  • उद्योगों का कच्चे माल, भूमिका (आधारभूत/उपभोक्ता), पूंजी निवेश और स्वामित्व के आधार पर सटीक वर्गीकरण करना।
  • सूती, जूट (हुगली बेसिन), चीनी (महाराष्ट्र पलायन), लौह-इस्पात (छोटानागपुर बेसिन), और IT उद्योग के स्थानिक वितरण कारणों का मूल्यांकन करना।
  • औद्योगिक प्रदूषण के चार प्रकारों (वायु, जल, तापीय, ध्वनि) और NTPC के पर्यावरण प्रबंधन तंत्र का समालोचनात्मक परीक्षण करना।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. विनिर्माण का महत्व, उद्योग-कृषि...
2 2. उद्योगों का वर्गीकरण (Classifica...
3 3. कृषि आधारित उद्योग: सूती वस्त्र,...
4 4. खनिज आधारित उद्योग: लोहा-इस्पात,...
5 5. औद्योगिक प्रदूषण, पर्यावरणीय निम...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. विनिर्माण का महत्व, उद्योग-कृषि संबंध एवं औद्योगिक अवस्थिति

1.1 विनिर्माण का अर्थ एवं आर्थिक विकास में महत्व

विनिर्माण (Manufacturing): कच्चे माल को मूल्यवान उत्पाद में बदलकर अधिक मात्रा में वस्तुओं के उत्पादन को विनिर्माण कहते हैं। (जैसे गन्ने से चीनी, बॉक्साइट से एल्युमिनियम, लोहे से मशीनें)।

विनिर्माण उद्योगों को 'विकास की रीढ़' क्यों माना जाता है?
1. कृषि का आधुनिकीकरण: ये कृषि के आधुनिकीकरण में सहायक हैं। ट्रैक्टर, हार्वेस्टर, ट्यूबवेल, रासायनिक खाद और कीटनाशक उपलब्ध कराकर कृषि उत्पादकता को कई गुना बढ़ा देते हैं।
2. कृषि पर निर्भरता में कमी: द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रों में लाखों नौकरियों का सृजन करके कृषि पर से जनसंख्या का अत्यधिक बोझ घटाते हैं।
3. बेरोजगारी और गरीबी उन्मूलन: देश के पिछड़े और जनजातीय इलाकों में उद्योग स्थापित करके क्षेत्रीय असमानताओं को दूर किया जाता है।
4. विदेशी मुद्रा अर्जन: निर्मित वस्तुओं के अंतरराष्ट्रीय निर्यात से व्यापार का विस्तार होता है और बहुमूल्य विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है।

'कृषि और उद्योग एक-दूसरे के विरोधी नहीं बल्कि पूरक हैं': कृषि उद्योगों को कच्चा माल (कपास, जूट, गन्ना, तिलहन) देती है और उद्योग कृषि को उन्नत उपकरण, पंप, उर्वरक और प्लास्टिक पाइप प्रदान करते हैं। कृषि के विकास से उद्योगों को विशाल ग्रामीण बाजार मिलता है।

1.2 उद्योगों की अवस्थिति को प्रभावित करने वाले कारक एवं समूहन बचत

उद्योगों की स्थापना एक जटिल प्रक्रिया है जो निम्नलिखित कारकों की उपलब्धता से प्रभावित होती है:

  • भौगोलिक कारक: कच्चे माल की सुलभता, शक्ति के साधन (बिजली, कोयला), जल की प्रचुरता, और अनुकूल जलवायु।
  • गैर-भौगोलिक (आर्थिक) कारक: कुशल व सस्ता श्रम, पूंजी, बाजार, परिवहन व संचार तंत्र, तथा सरकारी नीतियां।
  • समूहन बचत (Agglomeration Economies): नगर उद्योगों को बाजार उपलब्ध कराते हैं तथा बैंकिंग, बीमा, परिवहन, श्रमिक और वित्तीय सलाह जैसी सुविधाएं देते हैं। कई बार अनेक उद्योग नगरीय केंद्रों द्वारा दी गई सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए एक साथ आसपास स्थापित हो जाते हैं। इसे 'समूहन बचत' कहते हैं।

2. उद्योगों का वर्गीकरण (Classification of Industries)

2.1 विभिन्न आधारों पर उद्योगों का वर्गीकरण

वर्गीकरण का आधारउद्योग के प्रकारपरिभाषा एवं प्रमुख उदाहरण
1. प्रयुक्त कच्चे माल के स्रोत परकृषि आधारित उद्योग (Agro-based)जो कृषि उत्पादों को कच्चे माल के रूप में प्रयोग करते हैं। उदाहरण: सूती वस्त्र, पटसन (जूट), रेशमी वस्त्र, ऊनी वस्त्र, चीनी, खाद्य तेल।
खनिज आधारित उद्योग (Mineral-based)जो खनिजों और धातुओं को कच्चे माल के रूप में प्रयोग करते हैं। उदाहरण: लोहा और इस्पात, सीमेंट, एल्युमिनियम प्रगलन, तांबा प्रगलन, भारी मशीनें।
2. मुख्य भूमिका के आधार परआधारभूत उद्योग (Basic Industries)वे उद्योग जिनके उत्पादन या कच्चे माल पर दूसरे अन्य उद्योग पूरी तरह निर्भर होते हैं। उदाहरण: लोहा और इस्पात उद्योग, तांबा प्रगलन, एल्युमिनियम प्रगलन।
उपभोक्ता उद्योग (Consumer Industries)जो सीधे उपभोक्ताओं के दैनिक उपभोग के लिए वस्तुओं का उत्पादन करते हैं। उदाहरण: चीनी, दंतमंजन (Toothpaste), कागज, सिलाई मशीनें, पंखे।
3. पूंजी निवेश के आधार परलघु उद्योग (Small Scale)जिन उद्योगों में अधिकतम पूंजी निवेश की सीमा 1 करोड़ रुपये तक होती है (परिसंपत्तियों के आधार पर)।
बड़े पैमाने के उद्योग (Large Scale)जिन उद्योगों में पूंजी निवेश 1 करोड़ रुपये से अधिक होता है (जैसे टाटा स्टील, रिलायंस)।
4. स्वामित्व के आधार परसार्वजनिक क्षेत्र (Public Sector)सरकारी एजेंसियों द्वारा प्रबंधित व संचालित उद्योग। उदाहरण: BHEL (भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड), SAIL (स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड)।
निजी क्षेत्र (Private Sector)व्यक्तियों या व्यक्तियों के समूह के स्वामित्व व संचालन वाले उद्योग। उदाहरण: TISCO, बजाज ऑटो लिमिटेड, डाबर इंडिया।
संयुक्त क्षेत्र (Joint Sector)राज्य सरकार और निजी क्षेत्र के संयुक्त प्रयासों द्वारा संचालित उद्योग। उदाहरण: ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL)।
सहकारी क्षेत्र (Cooperative Sector)जिनका स्वामित्व कच्चे माल के उत्पादकों, श्रमिकों या दोनों के हाथों में होता है और लाभ-हानि का वितरण समानुपातिक होता है। उदाहरण: महाराष्ट्र के चीनी उद्योग, केरल का कॉयर (नारियल जटा) उद्योग, अमूल (दूध)।

3. कृषि आधारित उद्योग: सूती वस्त्र, जूट उद्योग एवं चीनी उद्योग

3.1 सूती वस्त्र उद्योग (Cotton Textile Industry)

प्राचीन काल में भारत में सूती वस्त्र हथकरघों से बनते थे। 1854 में बंबई में पहली सफल सूती कपड़ा मिल स्थापित हुई।

  • आरंभिक संकेंद्रण (महाराष्ट्र और गुजरात):
    • कच्ची कपास की प्रचुर उपलब्धता (काली मिट्टी क्षेत्र)।
    • आर्द्र जलवायु (धागे के टूटने से बचाव)।
    • बंबई बंदरगाह द्वारा मशीनों के आयात और कपड़े के निर्यात की सुविधा।
    • सस्ता कुशल श्रम और विशाल बाजार।
  • वर्तमान विकेंद्रीकरण: कताई (Spinning) अभी भी महाराष्ट्र, गुजरात और तमिलनाडु में केंद्रित है, लेकिन बुनाई (Weaving) हथकरघा, बिजलीकरघा (Powerloom) और मिलों के माध्यम से पूरे देश में फैली हुई है।
  • चुनौतियाँ: पुरानी अप्रचलित मशीनें, अनियमित विद्युत आपूर्ति, सिंथेटिक रेशों (नायलॉन, पॉलिएस्टर) से कड़ी प्रतिस्पर्धा, और श्रमिकों की कम उत्पादकता।

3.2 पटसन (जूट) उद्योग और हुगली बेसिन

भारत कच्चे जूट का सबसे बड़ा उत्पादक तथा बांग्लादेश के बाद दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक है। देश की अधिकांश जूट मिलें पश्चिम बंगाल में हुगली नदी के किनारे 98 किमी लंबी और 3 किमी चौड़ी संकरी पेटी में स्थित हैं।

हुगली बेसिन में जूट मिलों के केंद्रीकरण के प्रमुख कारण:
1. कच्चे माल की निकटता: पश्चिम बंगाल, बिहार और असम के जूट उत्पादक क्षेत्रों की अत्यंत निकटता।
2. सस्ता जल परिवहन: हुगली नदी का सस्ता जल परिवहन तथा रेलवे और सड़कों का घना जाल।
3. प्रचुर जल आपूर्ति: कच्चे जूट को धोने, भिगोने और रेशे अलग करने के लिए प्रचुर मात्रा में मीठे पानी की उपलब्धता।
4. सस्ता श्रम: पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा और पूर्वी उत्तर प्रदेश से बड़ी संख्या में सस्ते श्रमिकों की सुलभता।
5. कोलकाता महानगर की सुविधाएं: कोलकाता एक बड़ा बंदरगाह है जो बैंकिंग, बीमा और तैयार माल के निर्यात की उत्कृष्ट सेवाएं देता है।

3.3 चीनी उद्योग: उत्तर भारत से दक्षिण भारत (महाराष्ट्र) की ओर स्थानांतरण

भारत विश्व में चीनी का दूसरा बड़ा उत्पादक (गुड़ व खांडसारी में प्रथम) है। यह एक मौसमी उद्योग है जो सहकारी क्षेत्र के लिए सबसे उपयुक्त है।

हाल के वर्षों में चीनी मिलों का दक्षिण और पश्चिम भारत (विशेष रूप से महाराष्ट्र) में स्थानांतरित होने के कारण:
1. गन्ने में सुक्रोज की अधिक मात्रा: दक्षिण भारत की जलवायु के कारण यहाँ के गन्ने में उत्तर भारत की तुलना में अधिक मिठास (Sucrose Content) होती है, जिससे अधिक चीनी निकलती है।
2. ठंडी व नम तटीय जलवायु: यहाँ की ठंडी और नम जलवायु पेराई सत्र (Crushing season) को लंबा बनाए रखती है, जिससे मिलें साल में अधिक महीनों तक चलती हैं।
3. सहकारी समितियों की सफलता: महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में सहकारी क्षेत्र (Cooperative societies) अत्यधिक संगठित और सफल हैं, जो गन्ने के किसानों और मिलों के हितों का समन्वय करते हैं।

4. खनिज आधारित उद्योग: लोहा-इस्पात, सीमेंट एवं सूचना प्रौद्योगिकी (IT)

4.1 लोहा और इस्पात उद्योग (Iron and Steel Industry)

यह एक आधारभूत (Basic) तथा भारी उद्योग है क्योंकि अन्य सभी भारी, मध्यम और हल्के उद्योग अपनी मशीनों के लिए इस्पात पर निर्भर हैं।

  • कच्चे माल का अनुपात: इस्पात निर्माण हेतु लौह अयस्क, कोकिंग कोयला और चूना पत्थर का अनुपात लगभग 4 : 2 : 1 होना आवश्यक है। साथ ही इस्पात को कठोर बनाने के लिए मैंगनीज मिलाया जाता है।
  • छोटानागपुर पठारी क्षेत्र में संकेंद्रण के कारण:
    • उच्च कोटि के लौह अयस्क के विशाल निक्षेप कम लागत में उपलब्ध हैं (झारखंड, ओडिशा)।
    • दामोदर घाटी से उत्तम कोकिंग कोयला और चूना पत्थर की निकटता।
    • बिहार, झारखंड, ओडिशा और प. बंगाल से सस्ता और प्रचुर श्रम।
    • कोलकाता बंदरगाह की निकटता और घरेलू व अंतरराष्ट्रीय बाजार की मांग।
  • प्रमुख इस्पात संयंत्र: जमशेदपुर (TISCO), भिलाई (छत्तीसगढ़), बोकारो (झारखंड), दुर्गापुर (प. बंगाल), राउरकेला (ओडिशा), विशाखापट्टनम (आ.प्र.), और सलेम (तमिलनाडु)। अधिकांश सार्वजनिक इस्पात का विपणन SAIL (स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड) करता है।

4.2 एल्युमिनियम प्रगलन एवं सीमेंट उद्योग

  • एल्युमिनियम प्रगलन (Aluminium Smelting): भारत का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण धातुकर्म उद्योग। यह लचीला, जंग-रोधी, ऊष्मा व विद्युत का सुचालक और मजबूत होता है। इसकी स्थापना के दो अनिवार्य कारक हैं: सस्ती और नियमित विद्युत आपूर्ति तथा कम लागत पर कच्चे माल (बॉक्साइट) की उपलब्धता। प्रमुख संयंत्र ओडिशा (NALCO, HINDALCO), प. बंगाल, केरल, उ.प्र., छ.ग. में हैं।
  • सीमेंट उद्योग: भवन निर्माण, सड़कों, पुलों, कारखानों और बंदरगाहों के निर्माण की आधारशिला। इसका कच्चा माल भारी व स्थूल होता है (चूना पत्थर, सिलिका, एल्युमिना और जिप्सम) तथा कोयला व विद्युत आवश्यक हैं। भारत का पहला सीमेंट संयंत्र 1904 में चेन्नई में लगाया गया था। गुजरात में स्थापित संयंत्र खाड़ी देशों के बाजार की मांग पूरी करते हैं।

4.3 सूचना प्रौद्योगिकी (IT) तथा इलेक्ट्रॉनिक उद्योग

इलेक्ट्रॉनिक उद्योग ट्रांजिस्टर सेट से लेकर टेलीविजन, टेलीफोन, सेल्यूलर टेलीकॉम, कम्प्यूटर और रक्षा उपकरणों तक का निर्माण करता है:

  • बेंगलुरु (Bengaluru): भारत की 'इलेक्ट्रॉनिक राजधानी' (Electronic Capital) के रूप में उभरा है। अन्य प्रमुख केंद्र: मुंबई, नई दिल्ली, हैदराबाद, पुणे, चेन्नई, कोलकाता और नोएडा हैं।
  • अर्थव्यवस्था में योगदान: भारत के सकल घरेलू उत्पाद में भारी वृद्धि, अरबों डॉलर की विदेशी मुद्रा की कमाई (सॉफ्टवेयर निर्यात), और 30% से अधिक महिला रोजगार। भारत के BPO (बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग) क्षेत्र में दुनिया भर के देशों का काम होता है।

5. औद्योगिक प्रदूषण, पर्यावरणीय निम्नीकरण एवं रोकथाम (NTPC मॉडल)

5.1 औद्योगिक प्रदूषण के चार प्रमुख प्रकार

  1. वायु प्रदूषण (Air Pollution): सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) और कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) जैसी अवांछनीय विषैली गैसों और धूल, धुंध व धुएं के कणों के अनियंत्रित उत्सर्जन से। मानव स्वास्थ्य, पशुओं और ऐतिहासिक इमारतों (जैसे ताजमहल) को भारी क्षति।
  2. जल प्रदूषण (Water Pollution): उद्योगों द्वारा अनुपचारित कार्बनिक और अकार्बनिक अपशिष्टों को सीधे नदियों में छोड़ने से। चमड़ा उद्योग, कागज, डाई, रसायन और तेल शोधनशालाएं भारी धातुएं (सीसा, पारा), अम्ल और रंग नदियों में बहाती हैं।
  3. तापीय प्रदूषण (Thermal Pollution): जब कारखानों और ताप विद्युत संयंत्रों से गर्म जल को बिना ठंडा किए सीधे नदियों और झीलों में प्रवाहित कर दिया जाता है। इससे जलीय जीवन और मछलियों का दम घुट जाता है। परमाणु संयंत्रों के अपशिष्ट से कैंसर और जन्मजात विकृतियां होती हैं।
  4. ध्वनि प्रदूषण (Noise Pollution): औद्योगिक जनरेटरों, करघों, भारी मशीनों, सायरन और पंखों से उत्पन्न अत्यधिक शोर से तनाव, बहरापन, उच्च रक्तचाप और हृदय गति में वृद्धि होती है।

5.2 पर्यावरण निम्नीकरण की रोकथाम के उपाय (NTPC मॉडल)

भारत में प्रमुख विद्युत प्रदाता निगम NTPC (नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन) ने ISO 14001 पर्यावरण प्रबंधन प्रमाणन प्राप्त किया है। इसके प्रमुख कदम निम्नलिखित हैं:

पर्यावरण संरक्षण की सर्वोत्तम कार्यप्रणाली:
1. आधुनिकतम तकनीक का उपयोग: नवीनतम उपकरणों को अपनाना और पुरानी मशीनों को अपग्रेड करना ताकि प्रदूषण न्यूनतम हो।
2. राख का अधिकतम उपयोग (Ash Utilisation): ताप विद्युत गृहों से निकलने वाली उड़न-राख (Fly ash) का ईंटों और सीमेंट निर्माण में अधिकतम पुनर्चक्रण करना।
3. हरित पट्टियों (Green Belts) का विकास: पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए संयंत्रों के चारों ओर सघन वनीकरण करना।
4. औद्योगिक जल का त्रि-स्तरीय उपचार (Effluent Treatment):
• प्राथमिक उपचार: यांत्रिक प्रक्रियाओं द्वारा छानना और तलछट जमाव।
• द्वितीयक उपचार: जैविक प्रक्रियाओं द्वारा अपशिष्ट को जीवाणुओं से विघटित करना।
• तृतीयक उपचार: जैविक, रासायनिक और भौतिक प्रक्रियाओं द्वारा पुनर्चक्रण कर जल को शुद्ध करना।
5. ऑनलाइन मॉनिटरिंग: सभी विद्युत गृहों में पारिस्थितिक आंकड़ों का निरंतर ऑनलाइन डेटा प्रबंधन करना।

महत्वपूर्ण ऐतिहासिक शब्दावली, कालक्रम एवं प्रशासनिक व्यवस्था

विनिर्माण (Manufacturing)
कच्चे माल को मूल्यवान तैयार उत्पाद में बदलकर बड़े पैमाने पर उत्पादन करना।
समूहन बचत (Agglomeration)
नगरीय केंद्रों की सुविधाओं (बैंकिंग, श्रम, बाजार) का लाभ उठाने हेतु उद्योगों का संकेंद्रण।
4 : 2 : 1 अनुपात
इस्पात निर्माण में कच्चा माल अनुपात: लौह अयस्क : कोकिंग कोयला : चूना पत्थर।
1854 बंबई
भारत की पहली सफल सूती कपड़ा मिल की स्थापना (कावासजी डाबर)।
हुगली बेसिन (प. बंगाल)
कच्चे माल की निकटता व सस्ते जल परिवहन के कारण भारत का मुख्य जूट उद्योग केंद्र।
चीनी उद्योग का पलायन
अधिक सुक्रोज, ठंडी नम जलवायु व सफल सहकारी समितियों के कारण महाराष्ट्र की ओर।
छोटानागपुर लौह केंद्र
लौह अयस्क, कोकिंग कोयला व सस्ते श्रम की निकटता के कारण इस्पात उद्योग का केंद्र।
1904 चेन्नई
भारत के पहले आधुनिक सीमेंट संयंत्र की स्थापना।
इलेक्ट्रॉनिक राजधानी
बेंगलुरु (Bengaluru); IT क्रांति व 30% महिला रोजगार का प्रमुख वैश्विक केंद्र।
ISO 14001 प्रमाणन
NTPC द्वारा पर्यावरण प्रबंधन और प्रदूषण रोकथाम हेतु प्राप्त अंतरराष्ट्रीय मानक।
अपशिष्ट जल के 3 उपचार
प्राथमिक (यांत्रिक), द्वितीयक (जैविक), और तृतीयक (रासायनिक/पुनर्चक्रण)।
SAIL
स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड; सार्वजनिक इस्पात संयंत्रों की विपणन एजेंसी।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
विनिर्माण उद्योग को किसी देश के 'आर्थिक विकास की रीढ़' क्यों माना जाता है? किन्हीं चार प्रमुख तर्कों द्वारा स्पष्ट कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
विनिर्माण उद्योग किसी भी राष्ट्र के आर्थिक विकास और आधुनिकता का आधार होते हैं। इन्हें विकास की रीढ़ माने जाने के चार मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

1. कृषि का आधुनिकीकरण: विनिर्माण उद्योग कृषि के आधुनिकीकरण में मुख्य भूमिका निभाते हैं। ये किसानों को आधुनिक उपकरण (ट्रैक्टर, हार्वेस्टर, कल्टीवेटर), प्लास्टिक पाइप, रासायनिक उर्वरक और कीटनाशक उपलब्ध कराते हैं, जिससे कृषि उत्पादकता कई गुना बढ़ जाती है।
2. कृषि पर से जनसंख्या का बोझ कम करना: भारत में लगभग आधी से अधिक आबादी आजीविका हेतु कृषि पर निर्भर है। विनिर्माण उद्योग द्वितीयक और तृतीयक (सेवा) क्षेत्रों में लाखों नियमित रोजगार सृजित कर कृषि से छिपी हुई बेरोजगारी को समाप्त करते हैं।
3. गरीबी और क्षेत्रीय असमानता का उन्मूलन: जनजातीय और पिछड़े इलाकों में बड़े उद्योग (जैसे बोकारो, भिलाई, राउरकेला) स्थापित करने से उन क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे, सड़कों और स्कूलों का विकास होता है तथा क्षेत्रीय असंतुलन दूर होता है।
4. विदेशी मुद्रा का अर्जन: जब कोई देश कच्चे माल के बजाय विनिर्मित तैयार वस्तुओं का अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निर्यात करता है, तो उसे कई गुना अधिक मूल्य और बहुमूल्य विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है, जिससे राष्ट्र समृद्ध बनता है।
उदाहरण 2
भारत में अधिकांश पटसन (जूट) मिलें पश्चिम बंगाल में 'हुगली नदी' के किनारे ही क्यों केंद्रित हैं? किन्हीं चार कारणों की व्याख्या कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
भारत की लगभग सभी जूट मिलें पश्चिम बंगाल में हुगली नदी के दोनों किनारों पर एक संकरी पेटी (98 किमी लंबी) में स्थित हैं। इसके प्रमुख कारण निम्न हैं:

1. कच्चे जूट की प्रचुर निकटता: पश्चिम बंगाल, असम और बिहार देश के प्रमुख जूट उत्पादक क्षेत्र हैं। मिलों को अपने दरवाजे पर ही ताजा और सस्ता कच्चा जूट मिल जाता है, जिससे परिवहन खर्च नगण्य हो जाता है।
2. सस्ता जल एवं रेल परिवहन: हुगली नदी एक सुगम और अत्यंत सस्ता जलमार्ग प्रदान करती है। इसके साथ ही रेलवे और पक्की सड़कों का सघन जाल कच्चे माल को मिलों तक और तैयार माल को बाजारों तक तेजी से पहुंचाता है।
3. जूट प्रसंस्करण हेतु प्रचुर जल: कच्चे जूट के डंठलों को पानी में गलाने (Retting), रेशे अलग करने और उन्हें धोने के लिए भारी मात्रा में ताजे पानी की आवश्यकता होती है, जो हुगली नदी से अनवरत मिलता है।
4. सस्ते श्रम व कोलकाता बंदरगाह की सुविधा: पश्चिम बंगाल के अलावा घनी आबादी वाले पड़ोसी राज्यों—बिहार, ओडिशा और उत्तर प्रदेश—से बड़ी संख्या में सस्ते और कुशल मजदूर उपलब्ध हो जाते हैं। इसके अतिरिक्त कोलकाता महानगर से बैंकिंग, बीमा सुविधाएं और विश्व भर में जूट के निर्यात हेतु आधुनिक बंदरगाह उपलब्ध है।
उदाहरण 3
हाल के वर्षों में भारत का चीनी उद्योग उत्तर भारत (उत्तर प्रदेश) से दक्षिण और पश्चिम भारत (विशेषकर महाराष्ट्र) की ओर क्यों स्थानांतरित हो रहा है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
यद्यपि ऐतिहासिक रूप से उत्तर प्रदेश चीनी का सबसे बड़ा उत्पादक रहा है, परंतु हाल के वर्षों में चीनी मिलों का झुकाव महाराष्ट्र और दक्षिण भारत की ओर तेजी से बढ़ा है। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

1. गन्ने में सुक्रोज (मिठास) की अधिक मात्रा: दक्षिण भारत की अनुकूल भौगोलिक परिस्थितियों और काली मिट्टी के कारण वहाँ के गन्ने में उत्तर भारत के गन्ने की तुलना में सुक्रोज (Sucrose Content) का प्रतिशत काफी अधिक होता है। अतः प्रति क्विंटल गन्ने से अधिक चीनी प्राप्त होती है।
2. लंबा पेराई सत्र (Longer Crushing Season): दक्षिण भारत प्रायद्वीपीय पठार पर स्थित है और समुद्र से घिरा है। यहाँ की जलवायु नम और ठंडी रहती है। उत्तर भारत की तरह यहाँ ग्रीष्मकाल में शुष्क गर्म हवाएं (लू) नहीं चलतीं जिससे गन्ने का रस जल्दी नहीं सूखता। परिणामस्वरूप मिलों का पेराई सत्र साल में अधिक महीनों तक चलता है।
3. सहकारी समितियों की अभूतपूर्व सफलता: चीनी एक मौसमी उद्योग है जो सहकारी क्षेत्र के लिए सर्वोत्तम होता है। महाराष्ट्र और कर्नाटक में सहकारी चीनी मिलें अत्यधिक सुगठित, पेशेवर और सफल हैं, जहाँ किसानों को गन्ने का उचित मूल्य और लाभांश सीधे प्राप्त होता है।
उदाहरण 4
भारत का अधिकांश लोहा और इस्पात उद्योग 'छोटानागपुर के पठारी क्षेत्र' में ही क्यों केंद्रित है? प्रमुख कारणों का विश्लेषण कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
लोहा और इस्पात एक भारी और वजन-ह्रासकारी (Weight-losing) उद्योग है, जिसकी स्थापना के लिए भारी कच्चे माल की निकटता अनिवार्य है। छोटानागपुर पठार (झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और प. बंगाल) में इसके संकेंद्रण के मुख्य कारण निम्न हैं:

1. उच्च कोटि के लौह अयस्क की निकटता: ओडिशा की बादामपहाड़ और झारखंड की नोआमुंडी व गुआ खदानों से उत्तम कोटि का हेमेटाइट अयस्क बहुत ही कम परिवहन लागत पर मिल जाता है।
2. उत्तम कोकिंग कोयले के भंडार: इस्पात प्रगलन के लिए अनिवार्य कोकिंग कोयला इसी पठार पर स्थित दामोदर घाटी (झरिया, बोकारो, रानीगंज) से प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हो जाता है।
3. चूना पत्थर और डोलोमाइट की सुलभता: धातु शोधन के लिए आवश्यक चूना पत्थर और मैंगनीज पास के ओडिशा और मध्य प्रदेश के क्षेत्रों से आसानी से प्राप्त हो जाते हैं।
4. सस्ता श्रम और विशाल बाजार: इस क्षेत्र के घनी आबादी वाले राज्यों (बिहार, झारखंड, प. बंगाल, ओडिशा) से भारी संख्या में सस्ते और परिश्रमी मजदूर मिल जाते हैं। साथ ही, कोलकाता का विकसित औद्योगिक बाजार और बंदरगाह इस्पात उत्पादों के निर्यात और भारी मशीनरी के आयात की उत्कृष्ट सुविधा देता है।
उदाहरण 5
उद्योग पर्यावरण को किस प्रकार प्रदूषित करते हैं? राष्ट्रीय ताप विद्युत निगम (NTPC) द्वारा पर्यावरण संरक्षण के लिए उठाए गए कदमों का उल्लेख कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उद्योगों द्वारा पर्यावरण प्रदूषण के रूप:
1. वायु प्रदूषण: चिमनियों से निकलने वाली सल्फर डाइऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी जहरीली गैसें तथा धुआं और धूल वायुमंडल को दूषित करते हैं।
2. जल प्रदूषण: चमड़ा, रसायन और कपड़ा मिलों द्वारा भारी धातुओं (सीसा, पारा), अम्लों और रासायनिक अपशिष्टों को बिना उपचार किए नदियों में बहा दिया जाता है।
3. तापीय प्रदूषण: ताप बिजलीघरों से खौलता हुआ गर्म जल सीधे जल स्रोतों में प्रवाहित करने से जलीय जीवों की मृत्यु हो जाती है。

NTPC द्वारा पर्यावरण संरक्षण के उपाय (ISO 14001 मॉडल):
1. उन्नत तकनीक और संयंत्रों का आधुनिकीकरण: नवीनतम तकनीकों और उपकरणों का प्रयोग जिससे ईंधन की खपत कम हो और प्रदूषण न्यूनतम स्तर पर रहे।
2. राख का अधिकतम उपयोग (Ash Utilisation): कोयले से चलने वाले संयंत्रों से निकलने वाली विशाल राख (Fly ash) का सीमेंट और ईंट उद्योग में पुनर्चक्रण करना।
3. सघन हरित पट्टियों का निर्माण: वायु प्रदूषण रोकने और पारिस्थितिक संतुलन हेतु विद्युत संयंत्रों के चारों ओर बड़े पैमाने पर पेड़ लगाकर ग्रीन बेल्ट्स विकसित करना।
4. अपशिष्ट जल का चक्रीय प्रबंधन (Water Treatment): औद्योगिक गंदे जल को प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक वैज्ञानिक शोधन संयंत्रों द्वारा उपचारित कर उसका पुनः उपयोग करना।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

आधारभूत उद्योग (Basic Industry) और उपभोक्ता उद्योग (Consumer Industry) में भ्रम होना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

आधारभूत उद्योग वे हैं जिनके उत्पाद अन्य उद्योगों के कच्चे माल बनते हैं (जैसे लोहा-इस्पात); जबकि उपभोक्ता उद्योग सीधे ग्राहकों के दैनिक उपयोग की चीजें बनाते हैं (जैसे चीनी, साबुन, पंखे)।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

भारत की पहली सूती कपड़ा मिल को 1854 में कोलकाता में स्थापित मानना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

1854 में भारत की पहली सफल सूती कपड़ा मिल 'बंबई' (मुंबई) में कावासजी डाबर द्वारा स्थापित हुई थी। (1818 में फोर्ट ग्लॉस्टर कोलकाता में पहली मिल असफल रही थी)।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

इस्पात निर्माण में कच्चे माल के अनुपात को भूलना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

इस्पात बनाने में लौह अयस्क, कोकिंग कोयला और चूना पत्थर का आवश्यक अनुपात 4 : 2 : 1 होता है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

भारत का पहला सीमेंट संयंत्र 1904 में गुजरात में स्थापित बताना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

भारत का पहला सीमेंट संयंत्र 1904 में 'चेन्नई' (तमिलनाडु) में स्थापित किया गया था।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

समूहन बचत (Agglomeration Economies) को बचत खाता या बैंक का कोई नियम समझ लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

समूहन बचत एक भौगोलिक-आर्थिक अवधारणा है जिसमें कई उद्योग नगरीय केंद्रों द्वारा दी जाने वाली संयुक्त सुविधाओं (श्रम, बाजार, बैंकिंग) का लाभ लेने हेतु एक ही स्थान पर एकत्रित होते हैं।

भारत में विनिर्माण उद्योग: वर्गीकरण, प्रमुख केंद्र एवं प्रदूषण नियंत्रण मॉडल

विनिर्माण उद्योग: औद्योगिक वर्गीकरण, प्रमुख केंद्र एवं पर्यावरण नियंत्रण1. कृषि आधारित उद्योगवस्त्र, जूट व चीनी उद्योग• 1854 बंबई: पहली सूती मिल• हुगली बेसिन (प. बंगाल):जूट मिलों का संकेंद्रण; सस्ता जलपरिवहन, प्रचुर जल, सस्ता श्रम• चीनी उद्योग का पलायन:महाराष्ट्र की ओर; अधिक सुक्रोज,लंबा पेराई सत्र व सफल सहकारी• समूहन बचत: नगरीय सुविधाएं2. खनिज आधारित उद्योगलोहा-इस्पात व IT क्रांति• लोहा-इस्पात: आधारभूत उद्योगअनुपात: 4 अयस्क : 2 कोयला : 1 चूना• छोटानागपुर पठार में संकेंद्रण• संयंत्र: TISCO, भिलाई, बोकारो• 1904 चेन्नई: पहला सीमेंट संयंत्र• सूचना प्रौद्योगिकी (IT):बेंगलुरु इलेक्ट्रॉनिक राजधानी;विदेशी मुद्रा अर्जन, 30% महिला रोजगार3. प्रदूषण व NTPC मॉडलटिकाऊ औद्योगिक विकास• वायु: SO2, CO विषैली गैसें• जल: रासायनिक व भारी धातुएं• तापीय: खौलता जल नदियों में• NTPC प्रबंधन (ISO 14001):1. नवीनतम तकनीकों का उपयोग2. राख (Fly ash) का अधिकतम उपयोग3. हरित पट्टियां (Green Belts)4. जल का त्रि-स्तरीय वैज्ञानिक शोधन5. ऑनलाइन डेटा मॉनिटरिंगबोर्ड परीक्षा के प्रमुख संप्रत्यय (Golden Manufacturing Capsule)समूहन बचत:नगरीय सुविधाओं (बैंकिंग, बीमा, परिवहन, बाजार) के लाभ हेतु उद्योगों का समूह बनना।आधारभूत उद्योग:लोहा और इस्पात उद्योग; इसके उत्पादन पर अन्य सभी हल्के व भारी उद्योग निर्भर हैं।IT क्रांति (बेंगलुरु):भारत की इलेक्ट्रॉनिक राजधानी; सॉफ्टवेयर निर्यात व 30% महिला रोजगार का मुख्य केंद्र।

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
कच्चे माल को मूल्यवान तैयार उत्पाद में बदलकर बड़े पैमाने पर वस्तुओं के उत्पादन को विनिर्माण (Manufacturing) कहते हैं।
मुख्य बिंदु 2
विनिर्माण उद्योग कृषि के आधुनिकीकरण में सहायक हैं, रोजगार देकर कृषि पर से निर्भरता घटाते हैं तथा निर्यात द्वारा विदेशी मुद्रा दिलाते हैं।
मुख्य बिंदु 3
नगरीय सुविधाओं (बैंकिंग, श्रम, बाजार) का लाभ उठाने के लिए उद्योगों के एक स्थान पर केंद्रित होने को 'समूहन बचत' (Agglomeration Economies) कहते हैं।
मुख्य बिंदु 4
उद्योगों को कृषि/खनिज आधारित, आधारभूत (लोहा-इस्पात)/उपभोक्ता (चीनी, कागज), और सार्वजनिक (BHEL, SAIL)/निजी/संयुक्त/सहकारी में बांटा जाता है।
मुख्य बिंदु 5
1854 में बंबई में पहली सफल सूती कपड़ा मिल स्थापित हुई; कच्ची कपास और आर्द्र जलवायु के कारण यह उद्योग महाराष्ट्र व गुजरात में विकसित हुआ।
मुख्य बिंदु 6
कच्चे माल की निकटता, सस्ते जल परिवहन और प्रचुर जल के कारण देश की अधिकांश जूट मिलें पश्चिम बंगाल के हुगली बेसिन में स्थित हैं।
मुख्य बिंदु 7
गन्ने में अधिक सुक्रोज, ठंडी नम जलवायु और सफल सहकारी समितियों के कारण चीनी उद्योग उत्तर प्रदेश से महाराष्ट्र की ओर स्थानांतरित हो रहा है।
मुख्य बिंदु 8
कच्चे माल (लौह अयस्क, कोकिंग कोयला, चूना पत्थर = 4 : 2 : 1) की निकटता और सस्ते श्रम के कारण लोहा-इस्पात उद्योग छोटानागपुर पठार पर केंद्रित है।
मुख्य बिंदु 9
बेंगलुरु भारत की 'इलेक्ट्रॉनिक राजधानी' है; IT उद्योग देश को भारी विदेशी मुद्रा और 30% महिला रोजगार प्रदान करता है।
मुख्य बिंदु 10
औद्योगिक प्रदूषण की रोकथाम हेतु NTPC मॉडल (राख का सदुपयोग, सघन हरित पट्टियां, जल का त्रि-स्तरीय शोधन) आदर्श उदाहरण है।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
विनिर्माण (Manufacturing) किसे कहते हैं और यह कृषि के विकास में किस प्रकार सहायक है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: कच्चे माल को मूल्यवान तैयार उत्पाद में बदलकर बड़े पैमाने पर उत्पादन करने को विनिर्माण कहते हैं। यह कृषि के लिए आधुनिक उपकरण (ट्रैक्टर, थ्रेशर), रासायनिक खाद, कीटनाशक और प्लास्टिक पाइप उपलब्ध कराकर कृषि उत्पादकता को बढ़ाता है।
2
'समूहन बचत' (Agglomeration Economies) से क्या तात्पर्य है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: जब बहुत से उद्योग नगरीय केंद्रों द्वारा प्रदान की जाने वाली सुविधाओं—जैसे बाजार, बैंकिंग, बीमा, परिवहन, कुशल श्रमिक और वित्तीय सलाह—का संयुक्त लाभ उठाने के लिए एक साथ आसपास स्थापित हो जाते हैं, तो इसे समूहन बचत कहते हैं।
3
हुगली नदी के किनारे जूट मिलों के संकेंद्रण के किन्हीं दो प्रमुख कारणों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर:
  1. जूट उत्पादक क्षेत्रों की निकटता और कच्चा माल धोने हेतु हुगली नदी से प्रचुर मीठे पानी की उपलब्धता। 2. हुगली नदी द्वारा अत्यंत सस्ता जल परिवहन तथा बिहार व ओडिशा से सस्ते श्रमिकों की सुलभता।

4
चीनी उद्योग उत्तर भारत से महाराष्ट्र और दक्षिण भारत की ओर क्यों खिसक रहा है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: क्योंकि दक्षिण भारत की अनुकूल जलवायु के कारण वहाँ के गन्ने में अधिक सुक्रोज (मिठास) पाई जाती है, तटीय नम जलवायु से पेराई सत्र लंबा चलता है, और वहाँ सहकारी समितियां अत्यधिक सफल हैं।
5
लोहा और इस्पात उद्योग को 'आधारभूत उद्योग' क्यों कहा जाता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: क्योंकि अन्य सभी भारी, मध्यम और हल्के उद्योग (जैसे मशीनरी, निर्माण, परिवहन उपकरण, उपभोक्ता वस्तुएं) अपने कल-पुर्जों और मशीनों के लिए इस्पात पर ही निर्भर होते हैं।
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