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CBSE • कक्षा X • Social Science • अध्याय 13
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

सत्ता की साझेदारी (Power-sharing)

लोकतंत्र केवल बहुमत का शासन नहीं है, बल्कि समाज के सभी विविध वर्गों, अल्पसंख्यकों और भाषाई समूहों को शासन प्रक्रिया में समान सम्मान और भागीदारी देने की एक उदात्त व्यवस्था है। इस मूलभूत सत्य को समझने के लिए यह अध्याय विश्व के दो छोटे देशों—यूरोप के बेल्जियम और दक्षिण एशिया के श्रीलंका की दो परस्पर विरोधी केस स्टडीज प्रस्तुत करता है। बेल्जियम में फ्लेमिश (59% डच भाषी), वालोनिया (40% फ्रेंच भाषी) और राजधानी ब्रुसेल्स (80% फ्रेंच, 20% डच) की जटिल जातीय बुनावट थी। 1970 से 1993 के बीच बेल्जियम के नेताओं ने चार संविधान संशोधनों के जरिए केंद्रीय सरकार में मंत्रियों की समानता, राज्य सरकारों को स्वायत्तता, ब्रुसेल्स में साझा सरकार, और भाषा-आधारित 'सामुदायिक सरकार' (Community Government) बनाकर गृहयुद्ध को टाल दिया और पूरे विश्व के लिए एक अनुकरणीय मॉडल स्थापित किया (यूरोपीय संघ ने ब्रुसेल्स को अपना मुख्यालय बनाया)। इसके विपरीत, श्रीलंका में 1948 की स्वतंत्रता के बाद 74% सिंहली बहुसंख्यकों ने 18% तमिल अल्पसंख्यकों की भाषा, धर्म और संस्कृति को 1956 के राजभाषा कानून द्वारा कुचल दिया, जिससे देश दशकों लंबे विनाशकारी गृहयुद्ध (Civil War) और LTTE के संघर्ष में झुलस गया। सत्ता की साझेदारी के पीछे दो अकाट्य तर्क हैं: 'युक्तिपरक तर्क' (सामाजिक टकराव और हिंसा को रोकना) तथा 'नैतिक तर्क' (लोकतंत्र की आत्मा)। आधुनिक लोकतंत्रों में सत्ता का बंटवारा चार रूपों में होता है: क्षैतिज वितरण (विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका के बीच नियंत्रण व संतुलन), ऊर्ध्वाधर वितरण (संघीय शासन: केंद्र, राज्य व स्थानीय स्तर), विभिन्न सामाजिक व धार्मिक समूहों के बीच (आरक्षित क्षेत्र), तथा राजनीतिक दलों (गठबंधन सरकारें) और दबाव समूहों के बीच। यह अध्याय लोकतांत्रिक चेतना, सहिष्णुता और संस्थागत संतुलन की आधारशिला है।

दो छोटे देश: एक ने समझदारी से स्वर्ग बना लिया, दूसरे ने जिद में गृहयुद्ध का नर्क भोग लिया!

यूरोप का बेल्जियम और एशिया का श्रीलंका—दोनों का क्षेत्रफल और आबादी लगभग हमारे हरियाणा राज्य के बराबर है। दोनों देशों में दो अलग-अलग भाषाएं बोलने वाले लोग रहते थे और दोनों में तनाव भड़का। बेल्जियम ने कहा—'हम दोनों भाषा वालों को सरकार में 50-50% बराबर हिस्सेदारी देंगे।' नतीजा? देश में शांति छा गई और वह इतना समृद्ध हुआ कि यूरोपीय संघ ने अपनी राजधानी ही वहाँ बना ली! दूसरी ओर श्रीलंका के सिंहली बहुसंख्यकों ने घमंड में कहा—'हम 74% हैं, तमिलों को हमारा हुक्म मानना ही पड़ेगा।' नतीजा? 30 साल तक खूनी गृहयुद्ध चला, हजारों लोग मारे गए और पूरा देश तबाह हो गया! यही अंतर है सत्ता की साझेदारी का। आइए जानें कि लोकतंत्र में कुर्सी बांटने से देश टूटता नहीं, बल्कि और मजबूत होता है!

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

CBSE और CBSE कक्षा 10वीं बोर्ड परीक्षा में 'सत्ता की साझेदारी' नागरिक शास्त्र (Civics) का सबसे महत्वपूर्ण और आधारभूत अध्याय है। बेल्जियम और श्रीलंका की जातीय बुनावट (Ethnic Composition) की तुलना, श्रीलंका में 1956 का कानून और बहुसंख्यकवाद के दुष्परिणाम, बेल्जियम मॉडल की चार प्रमुख विशेषताएं (सामुदायिक सरकार सहित), सत्ता की साझेदारी के पक्ष में युक्तिपरक बनाम नैतिक तर्क, तथा आधुनिक लोकतंत्रों में सत्ता की साझेदारी के चार रूप (विशेषकर नियंत्रण एवं संतुलन की क्षैतिज व्यवस्था) पर 3 से 5 अंकों के प्रश्न प्रतिवर्ष अनिवार्य रूप से पूछे जाते हैं।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • लोकतंत्र (जनता का, जनता द्वारा, जनता के लिए शासन) की मूलभूत परिभाषा।
  • बहुमत और अल्पसंख्यक की सामान्य राजनीतिक संकल्पना।
  • सरकार के तीन अंगों—संसद (कानून बनाना), सरकार (लागू करना), और अदालत (न्याय करना)—का प्राथमिक ज्ञान।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • बेल्जियम और श्रीलंका की जटिल जातीय बुनावट की तुलना करना और दोनों के राजनीतिक संकट के कारणों को समझना।
  • श्रीलंका में सिंहली वर्चस्व वाले 'बहुसंख्यकवाद' (1956 कानून) और उसके कारण भड़के गृहयुद्ध के विनाशकारी प्रभावों का विश्लेषण करना।
  • बेल्जियम के संविधान संशोधन मॉडल (मंत्रियों की समानता, राज्य स्वायत्तता, ब्रुसेल्स समाधान, सामुदायिक सरकार) का मूल्यांकन करना।
  • सत्ता की साझेदारी के 'युक्तिपरक' (Prudential) और 'नैतिक' (Moral) तर्कों के मध्य दार्शनिक अंतर स्पष्ट करना।
  • आधुनिक लोकतंत्रों में सत्ता के क्षैतिज वितरण (नियंत्रण और संतुलन), ऊर्ध्वाधर (संघीय) वितरण, और सामाजिक/राजनीतिक साझेदारी के रूपों का वर्गीकरण करना।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. बेल्जियम और श्रीलंका की जातीय बन...
2 2. श्रीलंका में बहुसंख्यकवाद एवं गृ...
3 3. बेल्जियम की समझदारी: संवैधानिक स...
4 4. सत्ता की साझेदारी क्यों आवश्यक ह...
5 5. आधुनिक लोकतंत्रों में सत्ता की स...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. बेल्जियम और श्रीलंका की जातीय बनावट (Ethnic Composition)

1.1 बेल्जियम की जातीय जटिलता

बेल्जियम यूरोप का एक छोटा सा देश है, जिसका क्षेत्रफल भारत के हरियाणा राज्य से भी छोटा है और आबादी लगभग 1 करोड़ से थोड़ी अधिक है। इसकी सीमाएं फ्रांस, नीदरलैंड, जर्मनी और लक्जमबर्ग से मिलती हैं:

  • देश की कुल आबादी की भाषाई बनावट:
    • 59% आबादी फ्लेमिश (Flemish) इलाके में रहती है और डच (Dutch) भाषा बोलती है (डच बहुसंख्यक हैं)।
    • 40% आबादी वालोनिया (Wallonia) इलाके में रहती है और फ्रेंच (French) भाषा बोलती है।
    • शेष 1% आबादी जर्मन भाषा बोलती है।
  • राजधानी ब्रुसेल्स (Brussels) का विरोधाभास: राजधानी ब्रुसेल्स में स्थिति बिल्कुल उलट थी—यहाँ 80% लोग फ्रेंच भाषी थे और मात्र 20% लोग डच भाषी थे।
  • तनाव का कारण: अल्पसंख्यक फ्रेंच भाषी लोग तुलनात्मक रूप से अधिक समृद्ध और शक्तिशाली थे। बहुत बाद में जाकर आर्थिक विकास और शिक्षा का लाभ पाने वाले डच भाषी लोगों को इससे गहरी नाराजगी थी। 1950 और 1960 के दशक में दोनों समुदायों के बीच तीखा तनाव पैदा हो गया।

1.2 श्रीलंका की जातीय बनावट

श्रीलंका भारत के दक्षिणी तट (तमिलनाडु) से कुछ किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक द्वीपीय देश है, जिसकी आबादी लगभग 2 करोड़ है:

समुदाय / भाषाई समूहजनसंख्या प्रतिशतधर्म एवं भौगोलिक फैलाव
सिंहली भाषी (Sinhala)74% (विशाल बहुसंख्यक)अधिकांश लोग बौद्ध धर्म के अनुयायी हैं। देश के दक्षिण, पश्चिम और मध्य भागों में केंद्रित।
तमिल भाषी (Tamil)18% (अल्पसंख्यक)दो उप-समूह हैं:
• श्रीलंकाई तमिल (13%): जो श्रीलंका के मूल निवासी हैं (उत्तर और पूर्वी प्रांतों में केंद्रित)।
• भारतीय तमिल (5%): औपनिवेशिक काल में बागानों में काम करने भारत से लाए गए मजदूरों की संतानें। (तमिल मुख्यतः हिंदू या मुस्लिम हैं)।
ईसाई (Christians)7%सिंहली और तमिल दोनों भाषाएं बोलते हैं।

2. श्रीलंका में बहुसंख्यकवाद एवं गृहयुद्ध की त्रासदी

2.1 1948 की स्वतंत्रता और बहुसंख्यकवाद (Majoritarianism)

बहुसंख्यकवाद की परिभाषा: यह एक ऐसी मान्यता है कि यदि कोई समुदाय बहुसंख्यक है, तो वह अपने मनमाने ढंग से देश का शासन चला सकता है और इसके लिए उसे अल्पसंख्यक समुदाय की जरूरतों और इच्छाओं की अवहेलना करने की पूरी छूट है。

1948 में श्रीलंका एक स्वतंत्र राष्ट्र बना। सिंहली समुदाय के नेताओं ने अपनी बहुसंख्या के बल पर शासन पर प्रभुत्व स्थापित करना चाहा। 1956 में एक कानून पारित किया गया जिसके द्वारा:

  1. सिंहली को एकमात्र राजभाषा घोषित कर दिया गया और इस प्रकार तमिल भाषा की पूरी तरह उपेक्षा की गई।
  2. विश्वविद्यालयों और सरकारी नौकरियों में सिंहली आवेदकों को प्राथमिकता देने की स्पष्ट पक्षपातपूर्ण नीति अपनाई गई।
  3. संविधान में यह प्रावधान किया गया कि सरकार केवल बौद्ध मत को संरक्षण और बढ़ावा देगी।

2.2 अलगाव की भावना, लिट्टे (LTTE) और गृहयुद्ध (Civil War)

  • इन सरकारी फैसलों से श्रीलंकाई तमिलों में भारी बेगानेपन और अलगाव की भावना भर गई। उन्हें लगा कि संविधान और सरकार उन्हें समान नागरिक अधिकारों से वंचित कर रही है।
  • तमिलों ने अपने राजनीतिक दल बनाए और तमिल को राजभाषा बनाने, क्षेत्रीय स्वायत्तता हासिल करने तथा शिक्षा और नौकरियों में समान अवसर की मांग को लेकर संघर्ष शुरू किया।
  • 1980 के दशक तक उत्तरी-पूर्वी श्रीलंका में एक स्वतंत्र 'तमिल ईलम' (Tamil Eelam - तमिल राज्य) बनाने की मांग को लेकर अनेक उग्रवादी संगठन बने (जिनमें LTTE - लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम प्रमुख था)।
  • गृहयुद्ध की विभीषिका: दोनों समुदायों के बीच अविश्वास ने एक भयानक गृहयुद्ध (Civil War) का रूप ले लिया। इसमें दोनों पक्षों के हजारों निर्दोष लोग मारे गए, लाखों लोग बेघर होकर शरणार्थी बन गए और श्रीलंका का फलता-फूलता सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक विकास दशकों पीछे चला गया।

3. बेल्जियम की समझदारी: संवैधानिक संशोधन एवं शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व

3.1 बेल्जियम मॉडल की चार प्रमुख विशेषताएं (1970 से 1993 के 4 संशोधन)

बेल्जियम के राजनेताओं ने क्षेत्रीय विविधताओं और सांस्कृतिक अंतरों को स्वीकार किया। 1970 से 1993 के बीच उन्होंने अपने संविधान में चार संशोधन किए ताकि देश में कोई बेगाना महसूस न करे:

बेल्जियम मॉडल के चार स्वर्णिम सिद्धांत:
1. केंद्रीय सरकार में मंत्रियों की समानता: संविधान में यह स्पष्ट प्रावधान किया गया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल में डच और फ्रेंच भाषी मंत्रियों की संख्या बिल्कुल बराबर (50-50%) होगी। कुछ विशेष कानून तभी बन सकते हैं जब दोनों भाषाई समूहों के सांसदों का बहुमत उसके पक्ष में हो; अर्थात कोई भी एक समुदाय एकतरफा फैसला नहीं कर सकता。
2. राज्य सरकारों को स्वायत्तता: केंद्र सरकार की अनेक महत्वपूर्ण शक्तियां देश के दो इलाकों (फ्लेमिश और वालोनिया) की क्षेत्रीय/राज्य सरकारों को सौंप दी गईं। राज्य सरकारें केंद्र के अधीन नहीं हैं。
3. राजधानी ब्रुसेल्स में साझा सरकार: ब्रुसेल्स में एक अलग सरकार है जिसमें दोनों समुदायों का समान प्रतिनिधित्व है। फ्रेंच भाषी लोगों ने ब्रुसेल्स में बराबरी की बात इसलिए स्वीकार की क्योंकि डच भाषियों ने पूरे देश की केंद्रीय सरकार में बराबरी स्वीकार की थी。
4. सामुदायिक सरकार (Community Government): केंद्रीय और राज्य सरकार के अलावा बेल्जियम में तीसरे स्तर की सरकार है जिसे 'सामुदायिक सरकार' कहते हैं। इसका चुनाव एक ही भाषा बोलने वाले लोग (डच, फ्रेंच और जर्मन) करते हैं, चाहे वे देश में कहीं भी रहते हों। इस सरकार को संस्कृति, शिक्षा और भाषा से जुड़े मसलों पर फैसले लेने का पूरा अधिकार है।

परिणाम: इस अनोखे मॉडल ने बेल्जियम को भाषा के आधार पर गृहयुद्ध और देश के टुकड़े होने से बचा लिया। जब यूरोपीय देशों ने मिलकर 'यूरोपीय संघ' (European Union - EU) का गठन किया, तो उन्होंने सर्वसम्मति से ब्रुसेल्स को अपना मुख्यालय चुना!

4. सत्ता की साझेदारी क्यों आवश्यक है? (युक्तिपरक बनाम नैतिक तर्क)

4.1 सत्ता की साझेदारी के पक्ष में दो प्रमुख तर्क

तुलना का आधार1. युक्तिपरक तर्क (Prudential Reason)2. नैतिक तर्क (Moral Reason)
मूल विचारलाभ-हानि के विवेकपूर्ण और व्यावहारिक विश्लेषण पर आधारित।लोकतांत्रिक मूल्यों, न्याय और अंतरात्मा पर आधारित।
मुख्य तर्क• सत्ता की साझेदारी विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच टकराव के अंदेशे को कम करती है।
• चूंकि सामाजिक टकराव अक्सर हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता का रूप ले लेता है, इसलिए सत्ता की साझेदारी राजनीतिक व्यवस्था के स्थायित्व (Stability) के लिए बहुत अच्छी है。
• बहुसंख्यकों की इच्छा को दूसरों पर थोपना तात्कालिक रूप से भले आकर्षक लगे, परंतु दीर्घकाल में यह राष्ट्र की अखंडता को छिन्न-भिन्न कर देता है।
• सत्ता की साझेदारी लोकतंत्र की 'आत्मा' (Spirit of Democracy) है。
• एक सच्चे लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था में वे सभी लोग शामिल होने चाहिए जो शासन की नीतियों से प्रभावित होते हैं और जिन्हें इसके परिणामों के साथ जीना है。
• लोगों को इस बात पर राय रखने का पूरा नैतिक अधिकार है कि उन पर किस प्रकार शासन किया जाए。
• एक वैध सरकार वही है जिसमें सभी समुदाय भागीदारी के माध्यम से शासन व्यवस्था से जुड़े रहते हैं।
निष्कर्षयुक्तिपरक तर्क बेहतर परिणामों पर बल देता है।नैतिक तर्क सत्ता के बंटवारे के आंतरिक महत्व और गरिमा को रेखांकित करता है।

5. आधुनिक लोकतंत्रों में सत्ता की साझेदारी के चार प्रमुख रूप

5.1 आधुनिक लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में सत्ता के बंटवारे के चार रूप

  1. 1. शासन के विभिन्न अंगों के बीच सत्ता का क्षैतिज वितरण (Horizontal Distribution):
    शासन के तीन प्रमुख अंगों—विधायिका (संसद), कार्यपालिका (सरकार), और न्यायपालिका (अदालतें) के बीच सत्ता का बंटवारा किया जाता है। इसे क्षैतिज वितरण इसलिए कहते हैं क्योंकि इसमें तीनों अंग सरकार के एक ही स्तर पर रहकर अपनी-अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हैं।
    नियंत्रण और संतुलन की व्यवस्था (System of Checks and Balances): इस व्यवस्था में कोई भी एक अंग असीमित शक्ति का प्रयोग नहीं कर सकता। प्रत्येक अंग दूसरे अंग पर अंकुश रखता है (जैसे न्यायपालिका कार्यपालिका के कानूनों की समीक्षा करती है, जबकि न्यायाधीशों की नियुक्ति कार्यपालिका करती है)। इससे अंगों के बीच शक्ति का संतुलन बना रहता है।
  2. 2. सरकार के विभिन्न स्तरों के बीच सत्ता का ऊर्ध्वाधर वितरण (Vertical / Federal Division):
    पूरे देश के लिए एक सामान्य केंद्रीय सरकार और प्रांतीय या क्षेत्रीय स्तर पर राज्य सरकारों के बीच सत्ता का विभाजन। जैसे भारत में केंद्र सरकार, राज्य सरकारें और स्थानीय निकाय (पंचायत व नगरपालिकाएं)। इसे संघीय शासन व्यवस्था कहते हैं।
  3. 3. विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच सत्ता की साझेदारी:
    सत्ता का बंटवारा भाषाई, धार्मिक और कमजोर सामाजिक वर्गों के बीच भी हो सकता है। जैसे बेल्जियम की 'सामुदायिक सरकार'। भारत में विधायिका और नौकरियों में महिलाओं, अनुसूचित जातियों (SC) और अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिए आरक्षित चुनाव क्षेत्र (Reserved Constituencies) की व्यवस्था इसी का उत्कृष्ट उदाहरण है।
  4. 4. राजनीतिक दलों, दबाव समूहों और आंदोलनों द्वारा सत्ता की साझेदारी:
    लोकतंत्र में नागरिकों के सामने सत्ता के दावेदारों में से चुनने का विकल्प होना चाहिए। जब किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता, तो दो या दो से अधिक दल मिलकर गठबंधन सरकार (Coalition Government) बनाते हैं और सत्ता साझा करते हैं। इसी प्रकार मजदूर संघ, किसान संगठन और उद्योगपतियों जैसे दबाव समूह (Pressure Groups) सरकारी नीतियों को प्रभावित करके सत्ता में अप्रत्यक्ष भागीदारी करते हैं।

महत्वपूर्ण ऐतिहासिक शब्दावली, कालक्रम एवं प्रशासनिक व्यवस्था

बेल्जियम भाषा संरचना
59% फ्लेमिश (डच भाषी); 40% वालोनिया (फ्रेंच भाषी); 1% जर्मन भाषी।
राजधानी ब्रुसेल्स स्थिति
80% फ्रेंच भाषी व 20% डच भाषी; पूरे देश की तुलना में उलट स्थिति।
श्रीलंका जातीय अनुपात
74% सिंहली भाषी (बौद्ध); 18% तमिल (13% श्रीलंकाई तमिल, 5% भारतीय तमिल)।
1956 श्रीलंका कानून
सिंहली को एकमात्र राजभाषा; बौद्ध धर्म को संरक्षण; तमिलों की घोर उपेक्षा।
बहुसंख्यकवाद (Majoritarianism)
अल्पसंख्यकों की अवहेलना कर बहुसंख्यक द्वारा मनमाने शासन की मान्यता।
LTTE व तमिल ईलम
श्रीलंका में स्वतंत्र तमिल राज्य (ईलम) हेतु उग्रवादी संगठन व खूनी गृहयुद्ध।
बेल्जियम के 4 संशोधन
1970-1993 के बीच शांति हेतु मंत्रियों की समानता, स्वायत्तता व सामुदायिक सरकार।
सामुदायिक सरकार
बेल्जियम में संस्कृति, शिक्षा व भाषा पर फैसले लेने वाली तीसरे स्तर की सरकार।
यूरोपीय संघ (EU) मुख्यालय
बेल्जियम मॉडल की सफलता के कारण ब्रुसेल्स में EU का मुख्यालय बनाया गया।
युक्तिपरक तर्क
सामाजिक टकराव और हिंसा को रोकना; राजनीतिक व्यवस्था का स्थायित्व।
नैतिक तर्क
सत्ता की साझेदारी लोकतंत्र की 'आत्मा' (Spirit of Democracy) है।
नियंत्रण और संतुलन
क्षैतिज वितरण: विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका का पारस्परिक अंकुश।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
बेल्जियम और श्रीलंका की जातीय बुनावट (Ethnic Composition) की तुलना कीजिए। दोनों देशों में तनाव के मूल कारण क्या थे?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
बेल्जियम और श्रीलंका दोनों ही छोटे देश हैं परंतु उनकी सामाजिक और जातीय बुनावट अत्यंत जटिल थी:

1. बेल्जियम की जातीय बनावट:
• देश की 59% आबादी फ्लेमिश इलाके में रहती है और डच भाषा बोलती है।
• 40% आबादी वालोनिया में रहती है और फ्रेंच भाषा बोलती है; 1% लोग जर्मन बोलते हैं।
• राजधानी ब्रुसेल्स की स्थिति: ब्रुसेल्स में 80% लोग फ्रेंच और 20% लोग डच बोलते थे।
• तनाव का कारण: अल्पसंख्यक फ्रेंच भाषी अधिक संपन्न और शक्तिशाली थे, जबकि बहुसंख्यक डच भाषी आर्थिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े थे, जिससे 1950-60 के दशक में दोनों के मध्य कटुता बढ़ी。

2. श्रीलंका की जातीय बनावट:
• देश की 74% आबादी सिंहली भाषी है जो अधिकांशतः बौद्ध धर्म को मानती है।
• 18% आबादी तमिल भाषी है (13% श्रीलंकाई मूल के तमिल और 5% औपनिवेशिक काल में भारत से आए बागान मजदूरों के वंशज भारतीय तमिल)। 7% ईसाई हैं।
• तनाव का कारण: स्वतंत्रता के बाद सिंहली बहुसंख्यकों ने अपनी भाषा और धर्म को पूरे देश पर थोपने का प्रयास किया और तमिलों को दोयम दर्जे का नागरिक बना दिया।
उदाहरण 2
श्रीलंका में 'बहुसंख्यकवाद' (Majoritarianism) की नीति ने किस प्रकार देश को गृहयुद्ध की आग में झोंक दिया? 1956 के कानून के प्रमुख प्रावधानों का उल्लेख कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
1948 में स्वतंत्रता के पश्चात श्रीलंका के सिंहली नेताओं ने अपनी भारी आबादी (74%) के घमंड में अल्पसंख्यक तमिलों (18%) के अधिकारों को कुचल दिया:

1956 के कानून के तीन प्रमुख पक्षपातपूर्ण प्रावधान:
1. सिंहली को एकमात्र राजभाषा का दर्जा: तमिल भाषा की पूरी उपेक्षा करते हुए सिंहली को देश की अकेली आधिकारिक भाषा बना दिया गया।
2. विश्वविद्यालयों और नौकरियों में भेदभाव: सरकारी नौकरियों और उच्च शिक्षा में केवल सिंहली आवेदकों को प्राथमिकता देने की नीति अपनाई गई।
3. बौद्ध धर्म को संवैधानिक संरक्षण: नए संविधान में स्पष्ट घोषणा की गई कि श्रीलंका गणराज्य केवल बौद्ध मत को संरक्षण और बढ़ावा देगा。

गृहयुद्ध की विभीषिका:
इन नीतियों से श्रीलंकाई तमिलों में यह विश्वास पक्का हो गया कि सरकार उनके अस्तित्व को मिटाना चाहती है। जब उनकी शांतिपूर्ण स्वायत्तता की मांग ठुकरा दी गई, तो 1980 के दशक में तमिलों ने 'तमिल ईलम' (स्वतंत्र तमिल राज्य) की मांग को लेकर हथियार उठा लिए और LTTE (लिबरेशन टाइगर्स) जैसे उग्रवादी संगठन बन गए।
इसके परिणामस्वरूप दोनों पक्षों के मध्य 30 वर्षों तक एक भयानक और खूनी गृहयुद्ध (Civil War) चला जिसमें लाखों लोग मारे गए, परिवार उजड़ गए और श्रीलंका का सामाजिक और आर्थिक विकास पूरी तरह नष्ट हो गया।
उदाहरण 3
बेल्जियम के नेताओं ने अपने देश के जातीय संकट को हल करने के लिए जो 'समझदारी' दिखाई, उसकी चार प्रमुख विशेषताओं का सविस्तार वर्णन कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
श्रीलंका के विपरीत बेल्जियम के नेताओं ने अत्यंत परिपक्वता का परिचय दिया। 1970 से 1993 के बीच उन्होंने अपने संविधान में चार बार संशोधन करके निम्नलिखित अभिनव व्यवस्था बनाई:

1. केंद्रीय मंत्रिमंडल में मंत्रियों की पूर्ण समानता: संविधान में यह तय किया गया कि केंद्र सरकार में डच भाषी और फ्रेंच भाषी मंत्रियों की संख्या बिल्कुल बराबर (50-50%) होगी। कोई भी समुदाय अपने दम पर एकतरफा कानून नहीं बना सकता था।
2. राज्य सरकारों को वास्तविक स्वायत्तता: केंद्रीय सरकार की अनेक प्रमुख शक्तियां देश के दोनों प्रमुख क्षेत्रों (फ्लेमिश और वालोनिया) की राज्य सरकारों को सौंप दी गईं। राज्य सरकारें केंद्र की मातहत या अधीन नहीं रहीं।
3. राजधानी ब्रुसेल्स में साझा सरकार: ब्रुसेल्स में एक अलग सरकार बनाई गई जिसमें दोनों समुदायों का समान प्रतिनिधित्व रखा गया। फ्रेंच भाषियों ने यहाँ समानता इसलिए स्वीकार की क्योंकि डच भाषियों ने पूरे देश की संसद में बराबरी दी थी।
4. सामुदायिक सरकार (Community Government) की अनूठी रचना: तीसरे स्तर पर एक विशेष सामुदायिक सरकार का गठन किया गया जिसे एक ही भाषा बोलने वाले लोग चुनते हैं। इस सरकार को संस्कृति, शिक्षा और भाषा से जुड़े मामलों में निर्णय लेने का स्वतंत्र अधिकार दिया गया।
इस समझदारी के कारण बेल्जियम टूटने से बच गया और इसकी राजधानी ब्रुसेल्स को यूरोपीय संघ का मुख्यालय बनाया गया।
उदाहरण 4
लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था में 'सत्ता की साझेदारी' क्यों आवश्यक है? इसके पक्ष में 'युक्तिपरक' (Prudential) और 'नैतिक' (Moral) तर्कों की तुलना कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
सत्ता की साझेदारी के पक्ष में दो भिन्न प्रकार के अकाट्य तर्क दिए जा सकते हैं:

1. युक्तिपरक तर्क (Prudential Reason):
• यह तर्क हानि-लाभ के विवेकपूर्ण व्यावहारिक विश्लेषण पर टिका है।
• समाज में विभिन्न जातियों, धर्मों और भाषाई समूहों के बीच मतभेद स्वाभाविक हैं। सत्ता की साझेदारी इन सामाजिक समूहों के बीच हिंसक टकराव और गृहयुद्ध के अंदेशे को कम कर देती है।
• चूंकि सामाजिक अशांति से राजनीतिक व्यवस्था में अस्थिरता आती है, अतः सत्ता में सबको भागीदार बनाना राजनीतिक व्यवस्था के स्थायित्व (Stability) की गारंटी है। बहुसंख्यकों द्वारा अल्पसंख्यकों पर मनमर्जी थोपना देश की एकता के लिए आत्मघाती होता है。

2. नैतिक तर्क (Moral Reason):
• यह तर्क लोकतंत्र के मूल दर्शन और न्याय पर आधारित है।
• सत्ता की साझेदारी 'लोकतंत्र की आत्मा' (Spirit of Democracy) है। लोकतंत्र का सीधा अर्थ ही यह है कि जो लोग शासन के फैसलों से प्रभावित होते हैं, उनकी सत्ता में भागीदारी अनिवार्य होनी चाहिए।
• एक वैध और सच्ची लोकतांत्रिक सरकार वही है जिसमें प्रत्येक नागरिक और समुदाय को यह महसूस हो कि शासन में उसकी भी आवाज सुनी जाती है।
उदाहरण 5
आधुनिक लोकतंत्रों में सत्ता की साझेदारी के चार मुख्य रूपों की व्याख्या कीजिए। 'नियंत्रण और संतुलन' (Checks and Balances) की व्यवस्था क्या है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
आधुनिक लोकतांत्रिक देशों में सत्ता का बंटवारा निम्नलिखित चार रूपों में पाया जाता है:

1. सत्ता का क्षैतिज वितरण (Horizontal Distribution):
शासन के तीन प्रमुख अंगों—विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका—के मध्य सत्ता का बंटवारा। इसमें तीनों अंग समान धरातल पर रहकर एक-दूसरे की शक्तियों को संतुलित करते हैं।
नियंत्रण और संतुलन की व्यवस्था: कोई भी अंग निरंकुश होकर असीमित शक्ति का प्रयोग नहीं कर सकता। विधायिका कानून बनाती है, कार्यपालिका उसे लागू करती है, परंतु न्यायपालिका यह देखती है कि कानून संविधान के अनुरूप है या नहीं। कार्यपालिका न्यायाधीशों की नियुक्ति करती है, परंतु वही न्यायाधीश कार्यपालिका की मनमानी पर रोक लगाते हैं। इस प्रकार प्रत्येक अंग दूसरे पर अंकुश रखता है。

2. सत्ता का ऊर्ध्वाधर / संघीय वितरण (Vertical Distribution):
विभिन्न स्तरों की सरकारों—जैसे पूरे देश के लिए केंद्र सरकार, प्रांतों के लिए राज्य सरकारें, और निचले स्तर पर पंचायत व नगरपालिकाएं—के बीच संविधान द्वारा शक्तियों का विभाजन।

3. विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच सत्ता का बंटवारा:
धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों को मुख्यधारा में लाने हेतु सत्ता में भागीदारी देना। जैसे बेल्जियम की 'सामुदायिक सरकार' या भारत की संसदों में महिलाओं, SC और ST के लिए आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र।

4. राजनीतिक दलों और दबाव समूहों द्वारा साझेदारी:
जब चुनाव में किसी एक दल को बहुमत नहीं मिलता, तो विभिन्न विचारों वाले दल मिलकर गठबंधन सरकार (Coalition Government) बनाते हैं। इसी प्रकार मजदूर संघ, व्यापारी संगठन और छात्र आंदोलन अपनी मांगों द्वारा सरकारी नीतियों को प्रभावित कर सत्ता में भागीदारी निभाते हैं।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

ब्रुसेल्स में डच भाषियों को बहुसंख्यक समझ लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

पूरे बेल्जियम में डच भाषी बहुसंख्यक (59%) थे, परंतु राजधानी ब्रुसेल्स में फ्रेंच भाषी बहुसंख्यक (80%) थे और डच मात्र 20% थे।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

श्रीलंका के गृहयुद्ध में बौद्धों और हिंदुओं का धार्मिक युद्ध लिखना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

श्रीलंका का संघर्ष मुख्य रूप से 'सिंहली भाषी (बहुसंख्यक)' और 'तमिल भाषी (अल्पसंख्यक)' समुदायों के बीच राजनीतिक अधिकारों और भाषा की उपेक्षा को लेकर भाषाई-जातीय संघर्ष था।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

सामुदायिक सरकार को पुलिस और सेना चलाने वाली सरकार समझना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

सामुदायिक सरकार को केवल 'संस्कृति, शिक्षा और भाषा' से जुड़े मामलों पर कानून बनाने और निर्णय लेने का अधिकार था।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

क्षैतिज वितरण और ऊर्ध्वाधर वितरण में अंतर न समझ पाना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

क्षैतिज वितरण एक ही स्तर पर विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच होता है (नियंत्रण व संतुलन); जबकि ऊर्ध्वाधर वितरण केंद्र, राज्य और स्थानीय सरकारों के बीच सीढ़ीनुमा होता है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

युक्तिपरक तर्क को नैतिक तर्क के साथ मिला देना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

युक्तिपरक तर्क 'लाभ-हानि और सामाजिक शांति' पर बल देता है; जबकि नैतिक तर्क 'लोकतंत्र की आत्मा और न्याय' पर बल देता है।

सत्ता की साझेदारी: बेल्जियम बनाम श्रीलंका, साझेदारी के तर्क एवं रूप

सत्ता की साझेदारी: बेल्जियम समझदारी, श्रीलंका बहुसंख्यकवाद व 4 रूप1. बेल्जियम की समझदारीशांति, समानता व EU मुख्यालय• 59% डच, 40% फ्रेंच, 1% जर्मन• ब्रुसेल्स: 80% फ्रेंच, 20% डच• 4 संविधान संशोधन (1970-93):1. केंद्र में 50-50% मंत्री समानता2. राज्य सरकारों को स्वायत्तता3. ब्रुसेल्स में साझा सरकार4. सामुदायिक सरकार (संस्कृति/भाषा)• यूरोपीय संघ (EU) ने ब्रुसेल्सको अपना मुख्यालय चुना2. श्रीलंका: बहुसंख्यकवादहठधर्मिता व खूनी गृहयुद्ध• 74% सिंहली (बौद्ध), 18% तमिल• 1956 का दमनकारी कानून:सिंहली को एकमात्र राजभाषा घोषित;नौकरियों व कॉलेज में सिंहली प्राथमिकता;बौद्ध धर्म को विशेष संरक्षण• तमिलों में अलगाव की भावना:तमिल ईलम मांग, LTTE का उदय• 30 वर्ष भयानक गृहयुद्ध (तबाही)3. सत्ता साझेदारी के 4 रूपक्षैतिज व ऊर्ध्वाधर वितरण• 1. क्षैतिज वितरण:विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका(नियंत्रण और संतुलन प्रणाली)• 2. ऊर्ध्वाधर (संघीय) वितरण:केंद्र, राज्य व स्थानीय पंचायतें• 3. सामाजिक समूह: आरक्षित सीटें• 4. दल व गठबंधन सरकारें• युक्तिपरक vs नैतिक तर्क (आत्मा)बोर्ड परीक्षा के प्रमुख संप्रत्यय (Golden Power Sharing Capsule)बेल्जियम समाधान:समान मंत्री, स्वायत्त राज्य व सामुदायिक सरकार; देश टूटने से बचा, EU मुख्यालय।श्रीलंका बहुसंख्यकवाद:1956 कानून द्वारा सिंहली भाषा व बौद्ध धर्म थोपना; तमिल अलगाव व खूनी गृहयुद्ध।नियंत्रण और संतुलन:क्षैतिज वितरण; विधायिका, कार्यपालिका व न्यायपालिका का परस्पर संतुलन व अंकुश।

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
बेल्जियम में 59% डच भाषी और 40% फ्रेंच भाषी थे, जबकि राजधानी ब्रुसेल्स में 80% फ्रेंच और 20% डच थे।
मुख्य बिंदु 2
श्रीलंका में 74% सिंहली (बौद्ध) और 18% तमिल (हिंदू/मुस्लिम) आबादी है।
मुख्य बिंदु 3
श्रीलंका ने 1956 के कानून द्वारा सिंहली को एकमात्र राजभाषा घोषित किया और बौद्ध धर्म को संरक्षण दिया जिससे तमिलों में अलगाव फैला।
मुख्य बिंदु 4
श्रीलंका में बहुसंख्यकवाद के कारण तमिल ईलम की मांग उठी, LTTE का गठन हुआ और देश 30 वर्ष के विनाशकारी गृहयुद्ध में झुलस गया।
मुख्य बिंदु 5
बेल्जियम ने 1970 से 1993 के बीच 4 संविधान संशोधन करके केंद्र में 50-50% मंत्री, राज्य सरकारों को स्वायत्तता और ब्रुसेल्स में साझा सरकार बनाई।
मुख्य बिंदु 6
बेल्जियम में डच, फ्रेंच और जर्मन भाषियों द्वारा चुनी जाने वाली 'सामुदायिक सरकार' संस्कृति, शिक्षा और भाषा पर निर्णय लेती है।
मुख्य बिंदु 7
बेल्जियम मॉडल की ऐतिहासिक सफलता के कारण यूरोपीय संघ (EU) ने ब्रुसेल्स को अपना मुख्यालय बनाया।
मुख्य बिंदु 8
सत्ता की साझेदारी का 'युक्तिपरक तर्क' सामाजिक टकराव और हिंसा को रोककर राजनीतिक स्थिरता देता है।
मुख्य बिंदु 9
सत्ता की साझेदारी का 'नैतिक तर्क' यह है कि यह 'लोकतंत्र की आत्मा' है जिसमें सभी प्रभावित लोगों की भागीदारी अनिवार्य है।
मुख्य बिंदु 10
सत्ता की साझेदारी 4 रूपों में होती है: क्षैतिज (विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका), ऊर्ध्वाधर (संघीय), सामाजिक समूह (आरक्षण), और दल/दबाव समूह।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
बेल्जियम की राजधानी ब्रुसेल्स में भाषाई बुनावट की क्या विशेष समस्या थी?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: पूरे बेल्जियम में डच भाषी लोग बहुसंख्यक (59%) थे और फ्रेंच भाषी अल्पसंख्यक (40%) थे, परंतु राजधानी ब्रुसेल्स में स्थिति बिल्कुल उलट थी—यहाँ 80% लोग फ्रेंच बोलते थे और मात्र 20% लोग डच बोलते थे।
2
श्रीलंका में 1956 के अधिनियम के तहत किए गए किन्हीं दो मुख्य प्रावधानों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर:
  1. तमिल भाषा की उपेक्षा करते हुए 'सिंहली' को श्रीलंका की एकमात्र आधिकारिक राजभाषा घोषित किया गया। 2. राज्य द्वारा केवल 'बौद्ध मत' को संरक्षण और बढ़ावा देने का संवैधानिक प्रावधान किया गया।

3
बेल्जियम में 'सामुदायिक सरकार' (Community Government) क्या है और इसे क्या अधिकार प्राप्त हैं?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: यह बेल्जियम में तीसरे स्तर की सरकार है जिसे एक ही भाषा बोलने वाले लोग (डच, फ्रेंच और जर्मन) चुनते हैं, चाहे वे देश में कहीं भी रहते हों। इस सरकार को संस्कृति, शिक्षा और भाषा से जुड़े मसलों पर निर्णय लेने का स्वतंत्र अधिकार प्राप्त है।
4
सत्ता की साझेदारी के पक्ष में 'युक्तिपरक' (Prudential) और 'नैतिक' (Moral) तर्कों में क्या अंतर है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: युक्तिपरक तर्क लाभ-हानि के व्यावहारिक विश्लेषण पर आधारित है और यह बताता है कि सत्ता साझा करने से सामाजिक समूहों में टकराव और हिंसा रुकती है; जबकि नैतिक तर्क यह बताता है कि सत्ता की साझेदारी 'लोकतंत्र की आत्मा' और नागरिकों का बुनियादी अधिकार है।
5
सत्ता के क्षैतिज वितरण को 'नियंत्रण और संतुलन की व्यवस्था' (Checks and Balances) क्यों कहा जाता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: क्योंकि इसमें शासन के तीनों अंग—विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका—समान स्तर पर रहकर एक-दूसरे की शक्तियों पर अंकुश रखते हैं, जिससे कोई भी एक अंग निरंकुश होकर असीमित शक्ति का दुरुपयोग नहीं कर सकता।
अध्याय का अध्ययन पूर्ण हुआ?
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कक्षा 10 Social Science के सभी अध्याय

अध्याय 1: यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय अध्याय 2: भारत में राष्ट्रवाद अध्याय 3: भूमंडलीकृत विश्व का बनना अध्याय 4: औद्योगिकीकरण का युग अध्याय 5: मुद्रण संस्कृति और आधुनिक दुनिया अध्याय 6: संसाधन एवं विकास अध्याय 7: वन एवं वन्यजीव संसाधन अध्याय 8: जल संसाधन अध्याय 9: कृषि अध्याय 10: खनिज तथा ऊर्जा संसाधन अध्याय 11: विनिर्माण उद्योग अध्याय 12: राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की जीवन रेखाएँ अध्याय 13: सत्ता की साझेदारी (Power-sharing) अध्याय 14: संघवाद (Federalism) अध्याय 15: लिंग, धर्म और जाति अध्याय 16: राजनीतिक दल (Political Parties) अध्याय 17: लोकतंत्र के परिणाम अध्याय 18: विकास (Development) अध्याय 19: भारतीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्रक अध्याय 20: मुद्रा और साख अध्याय 21: वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था अध्याय 22: उपभोक्ता अधिकार

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