1.1 प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक क्षेत्रक
| क्षेत्रक का नाम | परिभाषा एवं कार्यप्रणाली | प्रमुख उदाहरण |
|---|---|---|
| 1. प्राथमिक क्षेत्रक (Primary Sector) कृषि एवं सहायक क्षेत्रक | जब हम प्राकृतिक संसाधनों का सीधे उपयोग करके किसी वस्तु का उत्पादन करते हैं। चूंकि अधिकांश प्राकृतिक उत्पाद कृषि, डेयरी, मछली पकड़ने और वनों से प्राप्त होते हैं, इसलिए इसे 'कृषि एवं सहायक क्षेत्रक' भी कहा जाता है। | कपास उगाना, डेयरी फार्मिंग (दूध उत्पादन), मत्स्यन, वानिकी, खनिजों का उत्खनन। |
| 2. द्वितीयक क्षेत्रक (Secondary Sector) औद्योगिक क्षेत्रक | इस क्षेत्रक में प्राकृतिक उत्पादों को विनिर्माण प्रणाली (कारखानों, कार्यशालाओं या घरों में) के माध्यम से अन्य उपयोगी रूपों में परिवर्तित किया जाता है। चूंकि यह क्षेत्रक विभिन्न प्रकार के उद्योगों से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसे 'औद्योगिक क्षेत्रक' भी कहते हैं। | कपास के रेशे से सूत कातना और कपड़ा बुनना; गन्ने से चीनी व गुड़ बनाना; मिट्टी से ईंटें बनाना और ईंटों से भवन निर्माण करना। |
| 3. तृतीयक क्षेत्रक (Tertiary Sector) सेवा क्षेत्रक (Service Sector) | यह गतिविधियाँ स्वयं किसी वस्तु का उत्पादन नहीं करतीं, बल्कि उत्पादन प्रक्रिया में सहायता या सहयोग करती हैं। चूंकि ये गतिविधियाँ वस्तुओं के बजाय 'सेवाओं' का सृजन करती हैं, इसलिए इसे 'सेवा क्षेत्रक' भी कहा जाता है। | परिवहन (ट्रक, रेल), भंडारण (गोदाम), संचार (टेलीफोन, इंटरनेट), बैंकिंग, बीमा, व्यापार; तथा व्यक्तिगत सेवाएं: डॉक्टर, शिक्षक, धोबी, नाई, वकील, सॉफ्टवेयर इंजीनियर। |
1.2 तीनों क्षेत्रकों की परस्पर निर्भरता
तीनों क्षेत्रक एक-दूसरे के बिना कार्य नहीं कर सकते; वे परस्पर गहराई से गुंथे हुए हैं:
- यदि किसान चीनी मिलों को गन्ना बेचने से मना कर दें, तो मिलें बंद हो जाएंगी (प्राथमिक पर द्वितीयक की निर्भरता)।
- यदि कारखाने ट्रैक्टर, पंप सेट और कीटनाशक बनाना बंद कर दें, तो कृषि उत्पादन ठप हो जाएगा (द्वितीयक पर प्राथमिक की निर्भरता)।
- यदि ट्रांसपोर्टर हड़ताल कर दें और किसान का टमाटर व दूध शहरों तक न पहुंचे, तो किसान बर्बाद हो जाएगा और शहर भूखा मरेगा (तृतीयक पर दोनों की निर्भरता)।