1.1 वस्तु विनिमय प्रणाली एवं आवश्यकताओं का दोहरा संयोग
मुद्रा के आविष्कार से पहले लोग वस्तुओं के बदले सीधे वस्तुओं का आदान-प्रदान करते थे। इसे वस्तु विनिमय प्रणाली (Barter System) कहा जाता था।
वस्तु विनिमय प्रणाली की सबसे अनिवार्य शर्त और सबसे बड़ी बाधा 'आवश्यकताओं का दोहरा संयोग' थी। इसका अर्थ है कि एक व्यक्ति जिस वस्तु को बेचने की इच्छा रखता है, दूसरा व्यक्ति ठीक वही वस्तु खरीदने की इच्छा रखता हो।
उदाहरण: एक जूता बनाने वाला व्यक्ति अपने जूते बेचकर गेहूं खरीदना चाहता है। उसे एक ऐसे किसान को ढूंढना होगा जिसके पास न केवल बेचने के लिए अतिरिक्त गेहूं हो, बल्कि जिसे बदले में जूते खरीदने की भी सख्त जरूरत हो। यदि किसान को जूते नहीं चाहिए, तो विनिमय असंभव हो जाएगा।
मुद्रा की मध्यस्थता: मुद्रा एक मध्यवर्ती कड़ी (Intermediary) के रूप में कार्य करती है। जूता बनाने वाला जूतों को मुद्रा (रुपये) में बेच देता है और फिर उस मुद्रा से बाजार में किसी भी व्यक्ति से गेहूं खरीद लेता है। अतः मुद्रा आवश्यकताओं के दोहरे संयोग की समस्या को जड़ से समाप्त कर देती है; इसीलिए इसे 'विनिमय का माध्यम' (Medium of Exchange) कहा जाता है।
1.2 मुद्रा के आधुनिक रूप: करेंसी एवं मांग जमा
मुद्रा के रूपों का एक लंबा ऐतिहासिक विकास रहा है:
- आरंभिक रूप: अनाज और मवेशी (गाय, बकरी); इसके बाद धातु के सिक्के—सोना, चांदी और तांबे के सिक्के।
- आधुनिक मुद्रा: आधुनिक मुद्रा में कागजी नोट (Paper notes) और सिक्के शामिल हैं। आधुनिक मुद्रा सोने या चांदी जैसी किसी बहुमूल्य धातु से नहीं बनी है और न ही इसका अनाज की तरह कोई अपना उपभोग मूल्य है।
1. इसे देश की सरकार द्वारा प्राधिकृत (Authorized) किया गया है।
2. भारत में केंद्र सरकार की ओर से केवल भारतीय रिज़र्व बैंक (Reserve Bank of India - RBI) ही करेंसी नोट जारी करता है। कानूनन किसी अन्य व्यक्ति या संस्था को नोट जारी करने की अनुमति नहीं है।
3. भारतीय कानून के अनुसार किसी भी सौदे या भुगतान को रुपये में निपटाने से मना नहीं किया जा सकता। अतः भारत में रुपया विनिमय के माध्यम के रूप में सर्वमान्य कानूनी निविदा है।
1.3 बैंकों में निक्षेप (Deposits) एवं चेक (Cheque)
लोग अपनी दैनिक जरूरतों के बाद बची अतिरिक्त नकदी को बैंकों में अपने नाम से खाता खोलकर जमा कर देते हैं:
- मांग जमा (Demand Deposits): बैंक में जमा किए गए धन पर बैंक ब्याज देता है। चूंकि इस जमा राशि को खाताधारक अपनी आवश्यकतानुसार जब चाहे बैंक से निकाल (Demand) सकता है, इसलिए इसे 'मांग जमा' कहते हैं।
- चेक (Cheque): चेक एक ऐसा कागज है जो बैंक को किसी व्यक्ति के खाते से उस व्यक्ति को, जिसके नाम चेक जारी किया गया है, एक विशिष्ट रकम का भुगतान करने का लिखित आदेश देता है। चेक के माध्यम से बिना नकदी (Cash) का उपयोग किए सीधे धन का हस्तांतरण हो जाता है।