1.1 लोकतंत्र अन्य शासन प्रणालियों से बेहतर क्यों है?
तानाशाही, राजतंत्र या सैनिक शासन की तुलना में लोकतंत्र को निर्विवाद रूप से बेहतर माना जाता है क्योंकि यह:
- नागरिकों में समानता को बढ़ावा देता है: कानून के समक्ष सभी बराबर हैं; 'एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य' का सिद्धांत अमीर और गरीब, अगड़े और पिछड़े को समान राजनीतिक धरातल पर लाता है।
- व्यक्ति की गरिमा में वृद्धि करता है: प्रत्येक नागरिक को एक सम्मानजनक मनुष्य के रूप में मान्यता देता है, न कि किसी राजा की लाचार प्रजा के रूप में।
- फैसलों की गुणवत्ता में सुधार करता है: लोकतंत्र में फैसले किसी एक तानाशाह की सनक पर नहीं, बल्कि संसद में गहन विचार-विमर्श, बहस, विशेषज्ञों की सलाह और आम सहमति से लिए जाते हैं। इससे गलत फैसलों की संभावना न्यूनतम हो जाती है।
- टकरावों और मतभेदों को टालने और संभालने का तरीका देता है: समाज में विभिन्न जातियों, धर्मों और भाषाओं के बीच मतभेद होना स्वाभाविक है। लोकतंत्र शांतिपूर्ण बातचीत, समझौते और सत्ता की साझेदारी के जरिए इन टकरावों को सुलझाता है।
- गलतियों को सुधारने की गुंजाइश (Room to Correct Mistakes) प्रदान करता है: यदि सरकार से कोई गलत फैसला हो जाए, तो उस पर सार्वजनिक बहस हो सकती है और सरकार को अपना फैसला बदलना पड़ता है; या फिर जनता अगले चुनाव में उस सरकार को ही बदल देती है! तानाशाही में यह कभी संभव नहीं होता।
1.2 सिद्धांत और व्यवहार की दुविधा (Dilemma)
समाधान: हमारी अत्यधिक उम्मीदें ही इस दुविधा को जन्म देती हैं। हमें यह समझना होगा कि लोकतंत्र केवल शासन का एक स्वरूप (Form of Government) है, कोई जादुई छड़ी नहीं जो सभी सामाजिक, आर्थिक और ऐतिहासिक समस्याओं को एक झटके में हल कर दे। यह केवल ऐसी अनुकूल परिस्थितियां और नागरिक अधिकार उत्पन्न करता है जिनका लाभ उठाकर नागरिकों को स्वयं अपने लक्ष्यों को प्राप्त करना होता है।