1.1 संसाधन क्या है? (मानव-प्रौद्योगिकी-संस्थाओं का अंतर्संबंध)
हमारे पर्यावरण में उपलब्ध हर वह वस्तु जो हमारी आवश्यकताओं को पूरा करने में प्रयुक्त होती है, जिसे बनाने के लिए प्रौद्योगिकी उपलब्ध है, जो आर्थिक रूप से संभाव्य (Economically feasible) और सांस्कृतिक रूप से स्वीकार्य (Culturally acceptable) है, संसाधन (Resource) कहलाती है।
- मानव स्वयं संसाधनों का एक महत्वपूर्ण घटक है। वह प्रकृति के साथ प्रौद्योगिकी के माध्यम से क्रिया करता है और अपने आर्थिक विकास की गति को तेज करने के लिए संस्थाओं (Institutions) का निर्माण करता है।
- संसाधन प्रकृति के 'मुफ्त उपहार' नहीं हैं, बल्कि वे मानवीय क्रियाओं का परिणाम हैं। मानव पर्यावरण में उपस्थित पदार्थों को संसाधनों में रूपांतरित करता है।
1.2 संसाधनों का वर्गीकरण (Classification of Resources)
संसाधनों को निम्नलिखित चार मुख्य आधारों पर वर्गीकृत किया गया है:
| वर्गीकरण का आधार | संसाधन के प्रकार | परिभाषा एवं उदाहरण |
|---|---|---|
| 1. उत्पत्ति के आधार पर | जैव संसाधन (Biotic) | जीवमंडल से प्राप्त संसाधन जिनमें जीवन होता है। उदाहरण: मनुष्य, वनस्पतिजात, प्राणिजात, मत्स्य जीवन, पशुधन। |
| अजैव संसाधन (Abiotic) | निर्जीव वस्तुओं से बने सभी संसाधन। उदाहरण: चट्टानें, धातुएं, खनिज, मृदा। | |
| 2. समाप्यता के आधार पर | नवीकरण योग्य (Renewable) | वे संसाधन जिन्हें भौतिक, रासायनिक या यांत्रिक प्रक्रियाओं द्वारा नवीकृत या पुनः उत्पन्न किया जा सकता है। उदाहरण: सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जल, वन व वन्यजीव। |
| अनवीकरण योग्य (Non-Renewable) | इनका निर्माण एक लंबे भूवैज्ञानिक अंतराल में होता है; इनके बनने में लाखों वर्ष लगते हैं। कुछ चक्रीय होते हैं (जैसे धातुएं) और कुछ अचक्रीय होते हैं जो एक बार प्रयोग से समाप्त हो जाते हैं (जैसे कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस)। | |
| 3. स्वामित्व के आधार पर | व्यक्तिगत संसाधन | व्यक्तियों के निजी स्वामित्व वाले संसाधन। उदाहरण: किसानों की निजी भूमि, बाग, चारागाह, तालाब, कुएं, निजी मकान। |
| सामुदायिक संसाधन | समुदाय के सभी सदस्यों के लिए सुलभ संसाधन। उदाहरण: गांव की शामिलात भूमि (चारण भूमि, श्मशान), तालाब, नगरीय पार्क, खेल के मैदान। | |
| राष्ट्रीय संसाधन | तकनीकी रूप से देश में मौजूद सभी संसाधन राष्ट्रीय हैं। देश की राजनीतिक सीमाओं के भीतर की सारी भूमि, खनिज, वन, जल तथा 12 समुद्री मील (22.2 किमी) तक का सागरीय क्षेत्र (प्रादेशिक जल) व उसमें मौजूद संपदा राष्ट्र की है। | |
| अंतरराष्ट्रीय संसाधन | तटरेखा से 200 समुद्री मील की दूरी से परे खुले महासागरीय संसाधनों (अपवर्जक आर्थिक क्षेत्र - EEZ से परे) पर किसी अकेले देश का अधिकार नहीं होता; इनका उपयोग अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की सहमति से ही किया जा सकता है। (भारत को हिंद महासागर के तल से मैंगनीज ग्रंथियों के खनन का अधिकार मिला है)। | |
| 4. विकास के स्तर के आधार पर | संभावी संसाधन (Potential) | वे संसाधन जो किसी प्रदेश में विद्यमान हैं परंतु उनका उपयोग नहीं किया गया है। उदाहरण: राजस्थान और गुजरात में सौर व पवन ऊर्जा की अपार संभावनाएँ हैं लेकिन उनका सही विकास नहीं हुआ है। |
| विकसित संसाधन (Developed) | वे संसाधन जिनका सर्वेक्षण किया जा चुका है और उनके उपयोग की गुणवत्ता और मात्रा निर्धारित की जा चुकी है। | |
| भंडार (Stock) | पर्यावरण में उपलब्ध वे पदार्थ जो मानव आवश्यकताओं की पूर्ति कर सकते हैं परंतु उपयुक्त प्रौद्योगिकी के अभाव में उसकी पहुंच से बाहर हैं। उदाहरण: जल दो ज्वलनशील गैसों—हाइड्रोजन और ऑक्सीजन का यौगिक है; हाइड्रोजन ऊर्जा का बड़ा स्रोत बन सकता है परंतु इसके उच्च-स्तरीय तकनीकी ज्ञान का अभाव है। | |
| संचित कोष (Reserves) | यह भंडार का ही हिस्सा है जिसे उपलब्ध तकनीकी ज्ञान की सहायता से प्रयोग में लाया जा सकता है परंतु इनका उपयोग अभी शुरू नहीं किया गया है; इनका उपयोग भविष्य की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए किया जा सकता है। उदाहरण: बांधों में जल, वन आदि। |