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CBSE • कक्षा X • Social Science • अध्याय 21
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था

विगत दो-तीन दशकों में भारतीय उपभोक्ताओं के बाजारों का स्वरूप पूरी तरह बदल चुका है। आज दुकानों में दुनिया भर के नवीनतम मॉडल की कारें, स्मार्टफोन, टेलीविजन और परिधान आसानी से उपलब्ध हैं। यह अभूतपूर्व परिवर्तन 'वैश्वीकरण' (Globalisation) की देन है। विभिन्न देशों के बीच परस्पर आर्थिक अंतर्संबंधों और तीव्र एकीकरण की प्रक्रिया को वैश्वीकरण कहते हैं। इस प्रक्रिया में 'बहुराष्ट्रीय कंपनियों' (MNCs) की केंद्रीय भूमिका रही है। MNCs उत्पादन को केवल एक देश में सीमित न रखकर विश्व भर में उन स्थानों पर स्थापित करती हैं जहाँ उत्पादन लागत न्यूनतम हो—जैसे चीन में विनिर्माण, भारत में कुशल IT इंजीनियर, और मेक्सिको व पूर्वी यूरोप में बाजारों की निकटता। परिवहन क्रांति (कंटेनर प्रणाली) और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (IT, इंटरनेट) ने वैश्वीकरण को असाधारण गति दी। स्वतंत्रता के बाद भारत ने अपने नवजात उद्योगों की रक्षा हेतु 'व्यापार अवरोधक' (आयात कर) लगाए थे, परंतु 1991 की 'नई आर्थिक नीति' के तहत भारत सरकार ने विदेशी व्यापार और निवेश का 'उदारीकरण' (Liberalisation) करते हुए इन अवरोधकों को हटा दिया। विश्व व्यापार संगठन (WTO) सभी देशों के बीच मुक्त व्यापार का समर्थन करता है, परंतु विकसित देशों की भारी कृषि सब्सिडी के कारण यह अक्सर विवादों में रहता है। भारत में वैश्वीकरण के मिश्रित परिणाम रहे हैं: जहाँ संपन्न उपभोक्ताओं, बहुराष्ट्रीय कंपनियों और टाटा मोटर्स, इंफोसिस जैसी भारतीय MNCs को भारी लाभ हुआ है, वहीं छोटे घरेलू उत्पादक (खिलौने, प्लास्टिक, बैटरी निर्माता) विदेशी आयात के सामने बर्बाद हो गए हैं और असंगठित मजदूरों की नौकरियां अत्यंत असुरक्षित हो गई हैं। इस अध्याय में हम कारगिल फूड्स, भारतीय बाजारों में चीनी खिलौनों के प्रभाव और 'न्यायसंगत वैश्वीकरण' (Fair Globalisation) की रणनीतियों का गहन, विश्लेषणात्मक और बोर्ड-उन्मुख अध्ययन करेंगे।

कैसे एक अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनी ने भारत के खाद्य तेल बाजार पर कब्जा कर लिया?

भारत के एक बड़े और प्रतिष्ठित ब्रांड 'परख फूड्स' के पास देश के कोने-कोने में तेल रिफाइनरियां और विशाल वितरण नेटवर्क था। लेकिन अमेरिका की एक महाकाय बहुराष्ट्रीय कंपनी 'कारगिल फूड्स' (Cargill Foods) भारत आई और उसने अरबों रुपये के बल पर परख फूड्स को सीधे खरीद लिया! आज कारगिल फूड्स भारत में 50 लाख पैकेट खाद्य तेल प्रतिदिन बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनी बन चुकी है। यही है वैश्वीकरण की असली ताकत—जहाँ एक विदेशी कंपनी हजारों मील दूर बैठकर किसी भी देश के पूरे बाजार को अपनी मुट्ठी में कर सकती है! आइए समझें कि वैश्वीकरण का यह खेल भारत के आम आदमी, किसानों और श्रमिकों को कैसे प्रभावित कर रहा है।

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

CBSE और CBSE कक्षा 10वीं बोर्ड परीक्षा में 'वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था' अर्थशास्त्र का सर्वाधिक विश्लेषणात्मक अध्याय है। बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) की कार्यप्रणाली और उनके द्वारा उत्पादन पर नियंत्रण के तीन तरीके, भारतीय बाजारों में चीनी खिलौनों का उदाहरण, वैश्वीकरण को प्रेरित करने वाले कारक (परिवहन व IT क्रांति), 1991 का उदारीकरण और व्यापार अवरोधकों को हटाने का औचित्य, विश्व व्यापार संगठन (WTO) की भूमिका व विवाद, तथा वैश्वीकरण के भारतीय अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक व नकारात्मक प्रभाव और 'न्यायसंगत वैश्वीकरण' पर 3 से 5 अंकों के प्रश्न अनिवार्य रूप से पूछे जाते हैं।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • विदेशी व्यापार (आयात और निर्यात) की बुनियादी समझ।
  • घरेलू उद्योग और विदेशी कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा का सामान्य ज्ञान।
  • इंटरनेट और आधुनिक संचार तकनीकों से प्राथमिक परिचय।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) की परिभाषा, उनकी वैश्विक अवस्थिति के कारणों और उत्पादन पर नियंत्रण के तरीकों का विश्लेषण करना।
  • वैश्वीकरण की संकल्पना तथा सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (IT) और परिवहन (कंटेनर) की प्रेरक भूमिका को समझना।
  • 1991 की नई आर्थिक नीति के तहत 'उदारीकरण' और 'व्यापार अवरोधकों' (Trade Barriers) को हटाने के प्रभाव की व्याख्या करना।
  • विश्व व्यापार संगठन (WTO) के उद्देश्यों, कार्यप्रणाली और विकसित बनाम विकासशील देशों के बीच विवादों का मूल्यांकन करना।
  • भारतीय समाज के विभिन्न वर्गों (उपभोक्ता, बड़ी कंपनियां, छोटे उत्पादक, असंगठित मजदूर) पर वैश्वीकरण के प्रभावों का समालोचनात्मक परीक्षण करना।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. अंतर्देशीय उत्पादन एवं बहुराष्ट्...
2 2. विदेश व्यापार एवं बाजारों का एकी...
3 3. वैश्वीकरण क्या है और इसे संभव बन...
4 4. विश्व व्यापार संगठन (WTO) एवं अं...
5 5. भारत में वैश्वीकरण का प्रभाव एवं...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. अंतर्देशीय उत्पादन एवं बहुराष्ट्रीय कंपनियां (MNCs)

1.1 बहुराष्ट्रीय कंपनी (MNC) क्या है और वह कहाँ निवेश करती है?

परिभाषा: बहुराष्ट्रीय कंपनी (Multinational Corporation - MNC) वह कंपनी है जो एक से अधिक देशों में उत्पादन के स्वामित्व या नियंत्रण का संचालन करती है। (जैसे सैमसंग, फोर्ड मोटर्स, टाटा मोटर्स, इंफोसिस, कारगिल फूड्स)।

MNCs अपनी उत्पादन इकाइयाँ कहाँ स्थापित करती हैं?

  • जहाँ बाजार नजदीक हो ताकि तैयार माल तुरंत बिक सके।
  • जहाँ कम लागत पर कुशल और अकुशल श्रम प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हो।
  • जहाँ उत्पादन के अन्य कारक (सस्ती बिजली, पानी, कच्चा माल) आसानी से मिलें।
  • जहाँ की सरकारी नीतियां उनके व्यापार के अनुकूल हों।

वैश्विक उत्पादन का विभाजन: MNCs अपने उत्पादन को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटकर दुनिया भर में फैला देती हैं। उदाहरणार्थ, अमेरिका की एक कंपनी अपने उत्पाद का डिजाइन अमेरिका के शोध केंद्रों में तैयार कराती है, उसके पुर्जे चीन में विनिर्मित होते हैं (क्योंकि वहाँ सस्ता विनिर्माण है), उन्हें जोड़कर उत्पाद तैयार करने का काम मेक्सिको और पूर्वी यूरोप में होता है (क्योंकि वे अमेरिका व यूरोप के बड़े बाजारों के निकट हैं), और कॉल सेंटर व ग्राहक सेवा का काम भारत में कराया जाता है (क्योंकि भारत में अंग्रेजी बोलने वाले अत्यंत कुशल और सस्ते इंजीनियर उपलब्ध हैं)। इससे कंपनी की उत्पादन लागत 50-60% घट जाती है!

1.2 MNCs द्वारा अन्य देशों में उत्पादन को नियंत्रित करने के तीन तरीके

  1. स्थानीय कंपनियों के साथ संयुक्त उपक्रम (Joint Venture): MNCs विकासशील देशों की स्थापित स्थानीय कंपनियों के साथ मिलकर संयुक्त रूप से उत्पादन शुरू करती हैं। इससे स्थानीय कंपनी को दो लाभ होते हैं: आधुनिक मशीनों हेतु अतिरिक्त पूंजी (विदेशी निवेश) और नवीनतम वैश्विक तकनीक। (जैसे फोर्ड मोटर्स ने महिंद्रा एंड महिंद्रा के साथ मिलकर भारत में कारें बनाईं)।
  2. स्थानीय कंपनियों को सीधे खरीद लेना (Takeover): यह MNCs का सबसे आम तरीका है। अपनी अकूत संपदा के बल पर वे स्थानीय कंपनियों को खरीदकर अपने उत्पादन का विस्तार करती हैं।
    उदाहरण: अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनी कारगिल फूड्स (Cargill Foods) ने भारत की प्रसिद्ध खाद्य तेल कंपनी 'परख फूड्स' को खरीद लिया। परख फूड्स के पास चार रिफाइनरियां और विशाल वितरण नेटवर्क था। आज कारगिल फूड्स भारत में 50 लाख पाउच प्रतिदिन बनाने वाली सबसे बड़ी तेल उत्पादक बन चुकी है।
  3. छोटे उत्पादकों को उत्पादन का ठेका देना (Contract to small producers): वस्त्र, जूते-चप्पल और खेल के सामान जैसे उद्योगों में MNCs दुनिया भर के हजारों छोटे उत्पादकों को आर्डर देती हैं और फिर उन पर अपना ब्रांड नाम (जैसे Nike, Adidas, Puma) लगाकर विश्व भर के उपभोक्ताओं को भारी कीमतों पर बेचती हैं।

2. विदेश व्यापार एवं बाजारों का एकीकरण: चीनी खिलौनों का उदाहरण

2.1 विदेश व्यापार द्वारा बाजारों का एकीकरण

विदेश व्यापार उत्पादकों को अपने घरेलू बाजार से बाहर निकलकर विश्व के अन्य देशों के बाजारों में माल बेचने का अवसर देता है। इसी प्रकार, खरीदारों को विभिन्न देशों में उत्पादित वस्तुओं के अनेक विकल्प प्राप्त होते हैं। व्यापार के खुलने से वस्तुओं के मूल्य विभिन्न देशों के बाजारों में समान होने लगते हैं और दोनों देशों के उत्पादक आपस में कड़ी प्रतिस्पर्धा करते हैं।

2.2 भारतीय बाजारों में चीनी खिलौने (Chinese Toys in India)

वैश्वीकरण और मुक्त व्यापार के प्रभाव को समझने का सबसे सटीक उदाहरण भारतीय खिलौना बाजार है:

केस स्टडी - चीनी खिलौनों का आक्रमण:
1. चीनी विनिर्माताओं को भारत में प्लास्टिक के खिलौने निर्यात करने का अवसर मिला। उन्होंने भारतीय बाजारों में नए-नए आकर्षक डिजाइनों वाले सस्ते इलेक्ट्रॉनिक खिलौने उतारे।
2. भारतीय उपभोक्ताओं (माता-पिता व बच्चों) के पास अब कम कीमत पर अधिक सुंदर खिलौनों के विकल्प आ गए। परिणामस्वरूप, चीनी खिलौने तेजी से लोकप्रिय हो गए।
3. प्रभाव: एक ही वर्ष के भीतर भारत की 70% से 80% खिलौनों की दुकानों में भारतीय खिलौनों की जगह चीनी खिलौनों ने ले ली!
4. परिणाम: चीन के खिलौना निर्माताओं को भारी व्यापारिक लाभ हुआ, जबकि भारत के पारंपरिक खिलौना उद्योग बुरी तरह तबाह हो गए, कई कारखाने बंद हो गए और भारतीय खिलौना निर्माताओं को भारी घाटा झेलना पड़ा।

3. वैश्वीकरण क्या है और इसे संभव बनाने वाले कारक (प्रौद्योगिकी व उदारीकरण)

3.1 वैश्वीकरण की परिभाषा (What is Globalisation?)

परिभाषा: विभिन्न देशों के बीच परस्पर तीव्र आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अंतर्संबंधों तथा एकीकरण की बहुआयामी प्रक्रिया को वैश्वीकरण (Globalisation) कहते हैं। इसके अंतर्गत विभिन्न देशों के बीच वस्तुओं, सेवाओं, निवेश, नवीन प्रौद्योगिकियों और लोगों (प्रवास) का तीव्र आदान-प्रदान होता है।

3.2 वैश्वीकरण को गति देने वाले दो प्रमुख कारक

1. प्रौद्योगिकी में तीव्र सुधार (Technology)

• परिवहन तकनीक: पिछले 50 वर्षों में लंबी दूरियों तक भारी माल के परिवहन में क्रांति आ गई है। कंटेनरों (Containers) के उपयोग से जहाजों, रेलों और ट्रकों पर माल की लोडिंग-अनलोडिंग का समय और लागत बहुत घट गई है。
• सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (IT): टेलीकम्युनिकेशन, कंप्यूटर, इंटरनेट, ई-मेल और सैटेलाइट संचार ने दूरियों को मिटा दिया है।
उदाहरण: लंदन के पाठकों के लिए एक समाचार पत्रिका का संपादन और छपाई दिल्ली के एक कार्यालय में की जाती है; इंटरनेट से मैटर भेजा जाता है और छपाई के बाद हवाई जहाज से लंदन पहुंचा दिया जाता है।

2. विदेशी व्यापार और निवेश नीति का उदारीकरण

• व्यापार अवरोधक (Trade Barriers): आयातित वस्तुओं पर लगाया जाने वाला कर (Tariff) व्यापार अवरोधक कहलाता है। स्वतंत्रता के बाद भारत सरकार ने घरेलू उद्योगों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाने के लिए कड़े आयात प्रतिबंध लगाए थे。
• 1991 की नई आर्थिक नीति: 1991 के आसपास भारत सरकार ने महसूस किया कि अब भारतीय उत्पादकों को विश्व भर के उत्पादकों से मुकाबला करना चाहिए।
• उदारीकरण (Liberalisation): सरकार द्वारा विदेशी व्यापार और निवेश पर से अनुचित अवरोधों और प्रतिबंधों को हटाने की प्रक्रिया को उदारीकरण कहते हैं।

4. विश्व व्यापार संगठन (WTO) एवं अंतरराष्ट्रीय व्यापार विवाद

4.1 विश्व व्यापार संगठन (World Trade Organisation - WTO)

विश्व व्यापार संगठन एक ऐसा अंतरराष्ट्रीय संगठन है जिसका ध्येय अंतरराष्ट्रीय व्यापार को उदार बनाना है:

  • इसकी स्थापना विकसित देशों की पहल पर हुई थी। वर्तमान में विश्व के लगभग 164 से अधिक देश इसके सदस्य हैं।
  • यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार से संबंधित नियम निर्धारित करता है और यह सुनिश्चित करता है कि सभी सदस्य देश इन नियमों का कड़ाई से पालन करें।
  • सिद्धांत रूप में यह संगठन सभी देशों को मुक्त व्यापार (Free Trade) की अनुमति देने की वकालत करता है।

4.2 WTO पर वाद-विवाद: विकसित बनाम विकासशील देश (कृषि सब्सिडी का मुद्दा)

WTO की दोहरी नीति और विसंगति:
यद्यपि WTO का उद्देश्य मुक्त व्यापार है, परंतु व्यवहार में विकसित देशों ने अनुचित तरीके से अपने व्यापार अवरोधकों को बरकरार रखा है:
• अमेरिकी कृषि सब्सिडी: अमेरिका की कुल आबादी का मात्र 0.5% हिस्सा कृषि करता है, परंतु अमेरिकी सरकार अपने किसानों को उत्पादन और निर्यात के लिए अरबों डॉलर की भारी सरकारी सब्सिडी (वित्तीय सहायता) देती है। इस भारी सब्सिडी के कारण अमेरिकी किसान अपनी उपज को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में लागत से भी कम दामों पर बेचते हैं。
• विकासशील देशों पर दबाव: दूसरी ओर, WTO के नियमों का हवाला देकर भारत जैसे विकासशील देशों पर यह दबाव डाला जाता है कि वे अपने गरीब किसानों को दी जाने वाली खाद और बिजली की सब्सिडी बंद करें और आयात पर से टैक्स हटाएं!
यह एक अत्यंत असमान और अनुचित व्यापार प्रणाली है जिसका भारत और अन्य विकासशील देश कड़ा विरोध कर रहे हैं।

5. भारत में वैश्वीकरण का प्रभाव एवं न्यायसंगत वैश्वीकरण की चुनौती

5.1 वैश्वीकरण के विविध प्रभाव (विजेता बनाम पराजित)

भारत में वैश्वीकरण का प्रभाव सभी लोगों पर एक समान नहीं पड़ा है:

वर्गवैश्वीकरण का प्रभाव (सकारात्मक / नकारात्मक)
1. शहरी धनी उपभोक्ता (विजेता)उपभोक्ताओं को कम कीमतों पर नवीनतम तकनीक, उत्कृष्ट गुणवत्ता और अनगिनत विकल्प (कारें, टीवी, मोबाइल) मिले हैं; उनके जीवन स्तर में भारी सुधार हुआ है।
2. बड़ी भारतीय बहुराष्ट्रीय कंपनियां (विजेता)कुछ शीर्ष भारतीय कंपनियां स्वयं बहुराष्ट्रीय कंपनियों के रूप में उभरी हैं—जैसे टाटा मोटर्स (ऑटोमोबाइल), इंफोसिस (IT), रैनबैक्सी (दवाएं), एशियन पेंट्स (पेंट), और सुंदरम फास्टनर्स (नट-बोल्ट)।
3. IT व सेवा प्रदाता (विजेता)सॉफ्टवेयर, कॉल सेंटर (BPO), डेटा एंट्री, लेखांकन और इंजीनियरिंग सेवाओं के लिए लाखों उच्च वेतन वाली नौकरियां पैदा हुईं।
4. छोटे घरेलू उत्पादक (पराजित / पीड़ित)विदेशी कंपनियों के सस्ते आयात के सामने बैटरी, कैपेसिटर, प्लास्टिक, खिलौने, टायर, डेयरी और खाद्य तेल के लाखों छोटे कारखाने बंद हो गए और लाखों मजदूर बेरोजगार हो गए।
5. असंगठित औद्योगिक श्रमिक (पराजित / पीड़ित)कंपनियों ने प्रतिस्पर्धा में टिकने हेतु 'लचीले श्रम कानून' (Flexible Labour Laws) लागू किए। श्रमिकों को स्थायी नौकरी के बजाय अस्थायी (ठेके पर) रखा जाने लगा, काम के घंटे बढ़ाकर 10-12 घंटे कर दिए गए, वेतन घटा दिया गया और कोई सामाजिक सुरक्षा नहीं बची।

5.2 न्यायसंगत वैश्वीकरण के लिए संघर्ष (Fair Globalisation)

न्यायसंगत वैश्वीकरण का अर्थ: एक ऐसा वैश्वीकरण जो सभी नागरिकों के लिए समान अवसर सृजित करे और यह सुनिश्चित करे कि वैश्वीकरण के लाभों में सबकी बराबर हिस्सेदारी हो।

न्यायसंगत वैश्वीकरण हासिल करने में सरकार की भूमिका:
1. श्रम कानूनों का कड़ा क्रियान्वयन: सरकार यह सुनिश्चित करे कि श्रम कानूनों का ईमानदारी से पालन हो और श्रमिकों को उनके अधिकार और न्यूनतम मजदूरी मिले।
2. छोटे उत्पादकों को संरक्षण: जब तक छोटे घरेलू उत्पादक प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम न हो जाएं, तब तक सरकार उन्हें वित्तीय मदद, आधुनिक तकनीक और व्यापार अवरोधकों के जरिए संरक्षण दे।
3. WTO में एकजुट मोर्चा: न्यायसंगत नियमों के लिए सरकार को समान हितों वाले अन्य विकासशील देशों के साथ मिलकर WTO में विकसित देशों के वर्चस्व के खिलाफ साझा मोर्चा बनाना चाहिए।

महत्वपूर्ण ऐतिहासिक शब्दावली, कालक्रम एवं प्रशासनिक व्यवस्था

बहुराष्ट्रीय कंपनी (MNC)
एक से अधिक देशों में उत्पादन पर नियंत्रण या स्वामित्व रखने वाली कंपनी।
विदेशी निवेश (FDI)
MNCs द्वारा परिसंपत्तियों (भूमि, भवन, मशीन) की खरीद में लगाया गया धन।
कारगिल फूड्स (MNC)
अमेरिकी कंपनी जिसने भारतीय 'परख फूड्स' को खरीदकर खाद्य तेल बाजार पर नियंत्रण किया।
चीनी खिलौनों का प्रभाव
भारतीय खिलौना बाजार की 70-80% दुकानों पर सस्ते व आकर्षक चीनी खिलौनों का कब्जा।
वैश्वीकरण (Globalisation)
विभिन्न देशों के बीच परस्पर तीव्र आर्थिक, सामाजिक व सांस्कृतिक एकीकरण।
कंटेनर परिवहन
माल ढुलाई की लागत व लोडिंग समय को घटाकर विदेशी व्यापार को गति देने वाली तकनीक।
व्यापार अवरोधक (Trade Barrier)
विदेशी व्यापार को नियंत्रित करने हेतु आयात पर लगाया गया कर (Tariff)।
उदारीकरण (1991)
सरकार द्वारा विदेशी व्यापार और निवेश पर से अनुचित प्रतिबंधों को हटाने की प्रक्रिया।
विश्व व्यापार संगठन (WTO)
मुक्त व्यापार को बढ़ावा देने वाली 164+ देशों की वैश्विक नियामक संस्था।
कृषि सब्सिडी विवाद
अमेरिकी किसानों को भारी सरकारी मदद बनाम विकासशील देशों से सब्सिडी हटाने का दबाव।
भारतीय MNCs
टाटा मोटर्स, इंफोसिस, रैनबैक्सी, एशियन पेंट्स, सुंदरम फास्टनर्स।
न्यायसंगत वैश्वीकरण
वैश्वीकरण के लाभों का सभी वर्गों (मजदूरों, छोटे उत्पादकों) में न्यायसंगत वितरण।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
बहुराष्ट्रीय कंपनियां (MNCs) अपने उत्पादन को केवल एक देश में सीमित रखने के बजाय विश्व भर में क्यों फैलाती हैं? किसी एक बहुराष्ट्रीय कंपनी का उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्पादन को वैश्विक स्तर पर फैलाने के कारण:
बहुराष्ट्रीय कंपनियां (MNCs) अपने उत्पादन को उन सभी स्थानों पर स्थापित करती हैं जहाँ उत्पादन की लागत न्यूनतम हो और उनका मुनाफा अधिकतम हो सके:
1. सस्ता विनिर्माण: चीन जैसे देशों में सस्ता श्रम और कच्चा माल प्रचुर है, अतः अधिकांश इलेक्ट्रॉनिक्स और विनिर्माण इकाइयाँ चीन में लगाई जाती हैं।
2. बाजार की निकटता: मेक्सिको और पूर्वी यूरोप जैसे देश अमेरिका और यूरोप के विशाल उपभोग बाजारों के एकदम निकट हैं, अतः वहाँ अंतिम असेंबलिंग कराई जाती है ताकि माल ढुलाई का खर्च और समय कम लगे।
3. सस्ते कुशल इंजीनियर व सेवा क्षेत्र: भारत में अत्यधिक कुशल और अंग्रेजी बोलने वाले शिक्षित तकनीकी इंजीनियर बहुत कम वेतन पर मिल जाते हैं, जिससे कॉल सेंटर और सॉफ्टवेयर का काम भारत से कराया जाता है。

उदाहरण:
एक अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनी औद्योगिक उपकरणों का डिजाइन अमेरिका के अपने अनुसंधान केंद्र में तैयार कराती है, उसके कल-पुर्जे चीन में सस्ते में बनवाए जाते हैं, उन पुर्जों को मेक्सिको में जोड़कर पूरा उपकरण बनाया जाता है, और उस उत्पाद की तकनीकी ग्राहक सेवा (Customer Care) भारत के कॉल सेंटरों द्वारा संभाली जाती है। इस प्रकार उत्पादन को विश्व भर में फैलाकर कंपनी 50% से 60% लागत बचा लेती है।
उदाहरण 2
विदेशी व्यापार किस प्रकार विभिन्न देशों के बाजारों को आपस में जोड़ने (एकीकरण करने) का कार्य करता है? 'भारतीय बाजारों में चीनी खिलौनों' के उदाहरण द्वारा समझाइए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
बाजारों का एकीकरण:
विदेश व्यापार दुनिया भर के उत्पादकों को अपने देश की भौगोलिक सीमाओं से बाहर निकलकर दूसरे देशों के ग्राहकों तक पहुंचने का मौका देता है। इससे विभिन्न देशों के बाजारों में एक ही वस्तु के दाम लगभग बराबर होने लगते हैं और घरेलू व विदेशी उत्पादकों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा होती है。

चीनी खिलौनों का उदाहरण:
1. चीन के खिलौना निर्माताओं को जब भारत में खिलौने बेचने की छूट मिली, तो उन्होंने भारतीय बाजारों में नए-नए डिजाइनों और इलेक्ट्रॉनिक विशेषताओं वाले सस्ते प्लास्टिक के खिलौने उतारे।
2. भारतीय उपभोक्ताओं के पास अब कम कीमत पर बेहतर खिलौने खरीदने के भरपूर विकल्प आ गए। परिणामस्वरूप, एक ही वर्ष के भीतर भारत की 70% से 80% दुकानों में भारतीय खिलौनों की जगह चीनी खिलौने बिकने लगे।
3. परिणाम: भारतीय खिलौना निर्माताओं की बिक्री गिर गई, उनके कई कारखाने बंद हो गए और उन्हें भारी घाटा हुआ; जबकि चीनी निर्माताओं का व्यापार फल-फूल गया। इस प्रकार विदेशी व्यापार ने चीन के कारखानों को भारत के बाजारों से सीधे जोड़ दिया।
उदाहरण 3
1991 में भारत सरकार द्वारा अपनाई गई 'उदारीकरण' (Liberalisation) की नीति क्या थी? स्वतंत्रता के बाद व्यापार अवरोधक क्यों लगाए गए थे और 1991 में इन्हें क्यों हटाया गया?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
व्यापार अवरोधक और स्वतंत्रता के बाद की स्थिति:
आयातित माल पर लगने वाले सीमा शुल्क (Tax on imports) को 'व्यापार अवरोधक' (Trade Barrier) कहा जाता है। 1947 में स्वतंत्रता के बाद भारत सरकार ने विदेशी व्यापार और निवेश पर कड़े प्रतिबंध लगाए थे। ऐसा इसलिए किया गया था ताकि औपनिवेशिक लूट के बाद उभर रहे देश के नवजात घरेलू उद्योगों को विदेशी कंपनियों की भीषण प्रतिस्पर्धा से बचाया जा सके। उस समय केवल आवश्यक वस्तुओं—जैसे मशीनरी, उर्वरक और पेट्रोलियम—के आयात की ही अनुमति थी。

1991 में नीति परिवर्तन (उदारीकरण):
1991 में भारत सरकार ने ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए अपनी आर्थिक नीति में व्यापक बदलाव किया, जिसे 'उदारीकरण' कहा गया:
1. सरकार द्वारा विदेशी व्यापार और विदेशी निवेश पर से अनावश्यक प्रतिबंधों और लाइसेंसिंग प्रणाली को समाप्त करने की प्रक्रिया को उदारीकरण कहते हैं।
2. हटाने का कारण: सरकार ने अनुभव किया कि चार दशकों के संरक्षण के बाद अब समय आ गया है कि भारतीय उत्पादक विश्व भर के उत्पादकों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करें। प्रतिस्पर्धा से भारतीय कंपनियों को अपनी गुणवत्ता सुधारने और नई तकनीकों को अपनाने की प्रेरणा मिलेगी।
उदाहरण 4
विश्व व्यापार संगठन (WTO) के मुख्य उद्देश्य क्या हैं? विकासशील देश इसकी कार्यप्रणाली का विरोध क्यों कर रहे हैं?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
विश्व व्यापार संगठन (WTO) के मुख्य उद्देश्य:
1. सभी देशों के मध्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार को पूरी तरह से उदार और बाधा-रहित बनाना।
2. अंतरराष्ट्रीय व्यापार से संबंधित सामान्य नियमों का निर्माण करना और यह देखना कि सभी 164 सदस्य देश इन नियमों का पालन करें।
3. सीमा शुल्क और गैर-टैरिफ बाधाओं को घटाकर वैश्वीकरण और मुक्त व्यापार को बढ़ावा देना。

विकासशील देशों द्वारा विरोध के कारण (कृषि सब्सिडी का विवाद):
यद्यपि WTO का सिद्धांत सभी के लिए निष्पक्ष और मुक्त व्यापार है, परंतु व्यवहार में यह संस्था विकसित देशों (अमेरिका, यूरोपीय संघ) के दबाव में कार्य करती है:
• अमेरिकी किसानों को विशाल सब्सिडी: अमेरिका में मात्र 0.5% लोग खेती करते हैं, परंतु अमेरिकी सरकार अपने धनी किसानों को फसलों के उत्पादन और विदेशों में बेचने के लिए प्रतिवर्ष अरबों डॉलर की भारी सरकारी सब्सिडी देती है। इस अनुचित सहायता के बल पर वे अपनी उपज को विश्व बाजारों में बहुत ही कम दामों पर बेचते हैं。
• भारत पर अनुचित दबाव: दूसरी ओर, WTO भारत जैसे विकासशील देशों पर लगातार दबाव बनाता है कि वे अपने गरीब किसानों को दी जाने वाली न्यूनतम खाद, बिजली और बीज की सब्सिडी को बंद करें!
अतः विकासशील देशों का आरोप है कि WTO के नियम एकतरफा हैं जो केवल अमीर देशों के हितों की रक्षा करते हैं।
उदाहरण 5
'वैश्वीकरण का प्रभाव सभी लोगों पर एक समान नहीं पड़ा है।' इस कथन की पुष्टि करते हुए समझाइए कि 'न्यायसंगत वैश्वीकरण' (Fair Globalisation) प्राप्त करने के लिए सरकार क्या कदम उठा सकती है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
वैश्वीकरण के असमान प्रभाव (विजेता बनाम पीड़ित):
1. लाभान्वित वर्ग: शहरी क्षेत्र के संपन्न उपभोक्ताओं को उच्च गुणवत्ता वाली वस्तुएं सस्ती दरों पर मिलीं। टाटा मोटर्स, इंफोसिस, रैनबैक्सी जैसी बड़ी भारतीय बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने वैश्विक स्तर पर विस्तार किया। IT और सेवा क्षेत्र के युवाओं को आकर्षक नौकरियां मिलीं।
2. प्रभावित/पीड़ित वर्ग: बैटरी, प्लास्टिक, खिलौने, जूते और डेयरी के लाखों छोटे भारतीय उत्पादक विदेशी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के सस्ते आयात से मुकाबला नहीं कर सके और उनके उद्योग बंद हो गए। इसके अलावा, श्रम कानूनों को लचीला बनाए जाने से कारखानों के लाखों मजदूरों की नौकरी की सुरक्षा समाप्त हो गई और वे कम मजदूरी पर ठेके पर काम करने को विवश हो गए。

न्यायसंगत वैश्वीकरण हेतु सरकार की भूमिका:
न्यायसंगत वैश्वीकरण का अर्थ है ऐसा वैश्वीकरण जिसके लाभों में समाज के सबसे कमजोर वर्ग की भी उचित हिस्सेदारी हो। इसके लिए सरकार निम्नलिखित कदम उठा सकती है:
1. कड़े श्रम कानून लागू करना: सरकार यह सुनिश्चित करे कि उद्योगों में श्रम कानूनों का कड़ाई से पालन हो और मजदूरों को उचित मजदूरी, निश्चित काम के घंटे और सामाजिक सुरक्षा मिले।
2. छोटे उत्पादकों को समर्थन: जब तक छोटे घरेलू उत्पादक अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के योग्य न बन जाएं, तब तक सरकार उन्हें सस्ती बिजली, कम ब्याज पर ऋण और आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराए।
3. विकासशील देशों का गठबंधन: WTO में विकसित देशों की दादागीरी और कृषि सब्सिडी के खिलाफ भारत को अन्य विकासशील देशों के साथ मिलकर एक मजबूत साझा मोर्चा बनाना चाहिए।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

बहुराष्ट्रीय कंपनी (MNC) और साधारण निर्यातक कंपनी में भ्रम होना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

साधारण कंपनी केवल अपने देश में माल बनाकर विदेश भेजती है; जबकि MNC एक से अधिक देशों में उत्पादन और कारखानों पर सीधे नियंत्रण रखती है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

व्यापार अवरोधक (Trade Barrier) को केवल सीमा सील करना समझना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

व्यापार अवरोधक से मुख्य तात्पर्य 'आयात पर लगने वाले कर' (Tariff) से है, जिससे विदेशी वस्तुएं महंगी हो जाती हैं और घरेलू उद्योगों को संरक्षण मिलता है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

1991 के उदारीकरण को विदेशी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाना लिखना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

1991 के उदारीकरण का अर्थ विदेशी व्यापार और विदेशी निवेश पर से सरकारी प्रतिबंधों को 'हटाना' था, लगाना नहीं।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

यह मानना कि वैश्वीकरण से भारत के सभी छोटे-बड़े उत्पादकों को केवल फायदा ही हुआ है।

सही वैज्ञानिक तथ्य

बड़ी कंपनियों और उपभोक्ताओं को लाभ हुआ, परंतु खिलौने, प्लास्टिक और बैटरी जैसे क्षेत्रों के लाखों छोटे उत्पादक विदेशी आयात के कारण तबाह हो गए।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

WTO को केवल विकासशील देशों की संस्था समझना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

WTO की शुरुआत विकसित देशों की पहल पर हुई थी और आज भी इसकी नीतियों में विकसित देशों का भारी प्रभाव रहता है।

वैश्वीकरण: बहुराष्ट्रीय कंपनियां, 1991 उदारीकरण, WTO एवं न्यायसंगत वैश्वीकरण

वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था: MNCs, 1991 उदारीकरण, WTO एवं प्रभाव1. बहुराष्ट्रीय कंपनियां (MNCs)वैश्विक उत्पादन व निवेश• उत्पादन लागत न्यूनतम करना• वैश्विक विभाजन:चीन (सस्ता निर्माण), भारत (IT),मेक्सिको (बाजार निकटता)• विदेशी निवेश (FDI) व अधिग्रहण• कारगिल फूड्स उदाहरण:भारतीय 'परख फूड्स' को खरीदा• चीनी खिलौने: 80% बाजार पर कब्जा2. 1991 उदारीकरण व WTOव्यापार अवरोधकों की समाप्ति• व्यापार अवरोधक (Tariff):आयात पर कर; घरेलू उद्योग संरक्षण• 1991 नई आर्थिक नीति (उदारीकरण)• कंटेनर व IT क्रांति• WTO: 164+ देश; मुक्त व्यापार• WTO विवाद:अमेरिकी कृषि को भारी सब्सिडी,पर भारत से सब्सिडी हटाने का दबाव3. प्रभाव व न्यायसंगत वैश्वीकरणविजेता बनाम पीड़ित• उपभोक्ता: कम कीमत, अधिक विकल्प• भारतीय MNCs:टाटा मोटर्स, इंफोसिस, रैनबैक्सी• छोटे उत्पादक: बैटरी, खिलौने बर्बाद• मजदूर: लचीले कानून, असुरक्षित कार्य• न्यायसंगत वैश्वीकरण:श्रम कानूनों का कड़ा पालन;छोटे उत्पादक संरक्षण व WTO मोर्चाबोर्ड परीक्षा के प्रमुख संप्रत्यय (Golden Globalisation Capsule)MNCs की लागत नीति:चीन में सस्ता निर्माण, भारत में IT सेवा; कुल उत्पादन लागत में 50-60% की कमी।1991 उदारीकरण:भारतीय उत्पादकों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा हेतु व्यापार अवरोधक (टैरिफ) हटाना।न्यायसंगत वैश्वीकरण:श्रम अधिकारों की सुरक्षा और छोटे उद्योगों को संरक्षण देकर लाभों का समान बंटवारा।

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
विभिन्न देशों के बीच परस्पर तीव्र आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक एकीकरण को वैश्वीकरण (Globalisation) कहते हैं।
मुख्य बिंदु 2
बहुराष्ट्रीय कंपनियां (MNCs) उत्पादन लागत घटाने हेतु विश्व के विभिन्न देशों में उत्पादन को विभाजित करती हैं (चीन में निर्माण, भारत में IT)।
मुख्य बिंदु 3
MNCs स्थानीय कंपनियों के साथ संयुक्त उपक्रम, उनका सीधा अधिग्रहण (कारगिल फूड्स द्वारा परख फूड्स), और छोटे उत्पादकों को ठेका देकर नियंत्रण करती हैं।
मुख्य बिंदु 4
सस्ते और आकर्षक चीनी खिलौनों ने एक ही वर्ष में भारत के 70-80% खिलौना बाजार पर कब्जा कर लिया जिससे भारतीय निर्माता बर्बाद हुए।
मुख्य बिंदु 5
कंटेनर परिवहन और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (IT) क्रांति ने वैश्वीकरण को अभूतपूर्व गति दी है।
मुख्य बिंदु 6
1991 की नई आर्थिक नीति के तहत भारत ने 'व्यापार अवरोधक' (आयात कर) हटाकर अर्थव्यवस्था का 'उदारीकरण' किया।
मुख्य बिंदु 7
विश्व व्यापार संगठन (WTO) 164+ देशों में मुक्त व्यापार को बढ़ावा देता है, परंतु अमेरिकी किसानों को दी जाने वाली भारी सब्सिडी के कारण विवादित है।
मुख्य बिंदु 8
वैश्वीकरण से धनी उपभोक्ताओं, IT क्षेत्र और भारतीय MNCs (टाटा मोटर्स, इंफोसिस) को भारी लाभ हुआ।
मुख्य बिंदु 9
छोटे घरेलू उत्पादक (प्लास्टिक, बैटरी, खिलौने) विदेशी आयात के सामने नष्ट हो गए और असंगठित मजदूरों की नौकरियां असुरक्षित हो गईं।
मुख्य बिंदु 10
न्यायसंगत वैश्वीकरण हेतु सरकार को श्रम कानूनों का कड़ाई से पालन कराना चाहिए और छोटे उत्पादकों को सुरक्षा प्रदान करनी चाहिए।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
बहुराष्ट्रीय कंपनी (MNC) किसे कहते हैं? इसके दो प्रमुख उदाहरण दीजिए।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: वह कंपनी जो एक से अधिक देशों में उत्पादन पर नियंत्रण अथवा स्वामित्व रखती है, उसे बहुराष्ट्रीय कंपनी कहते हैं। उदाहरण: टाटा मोटर्स, इंफोसिस, कारगिल फूड्स, सैमसंग।
2
भारतीय बाजारों में 'चीनी खिलौनों' के प्रभाव से हमें वैश्वीकरण का क्या सबक मिलता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: यह दर्शाता है कि मुक्त व्यापार से उपभोक्ताओं को सस्ते व आकर्षक विकल्प मिलते हैं, परंतु घरेलू छोटे उत्पादक जो विदेशी आयात की कम लागत से मुकाबला नहीं कर पाते, वे भारी घाटे में जाकर बर्बाद हो जाते हैं।
3
'व्यापार अवरोधक' (Trade Barrier) क्या है और भारत सरकार ने 1991 में इन्हें क्यों हटाया?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: आयात पर लगाया गया कर (टैरिफ) व्यापार अवरोधक कहलाता है जिसका उपयोग आयात को नियंत्रित करने के लिए होता है। 1991 में सरकार ने इन्हें इसलिए हटाया ताकि भारतीय उत्पादक विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें और अपनी गुणवत्ता में सुधार ला सकें।
4
विश्व व्यापार संगठन (WTO) के संदर्भ में विकासशील देशों की मुख्य आपत्ति (विवाद) क्या है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: आपत्ति यह है कि अमेरिका और विकसित देश अपने किसानों को अरबों डॉलर की भारी सरकारी सब्सिडी देकर सस्ता माल बेचते हैं, जबकि WTO के जरिए वे विकासशील देशों (जैसे भारत) पर अपने किसानों की सब्सिडी बंद करने का अनुचित दबाव डालते हैं।
5
'न्यायसंगत वैश्वीकरण' (Fair Globalisation) से क्या तात्पर्य है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: ऐसा वैश्वीकरण जो समाज के सभी वर्गों (विशेष रूप से छोटे उत्पादकों और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों) के लिए समान अवसर सृजित करे और जिसके लाभों में केवल धनी वर्ग का ही नहीं बल्कि सभी नागरिकों का न्यायसंगत हिस्सा हो।
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कक्षा 10 Social Science के सभी अध्याय

अध्याय 1: यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय अध्याय 2: भारत में राष्ट्रवाद अध्याय 3: भूमंडलीकृत विश्व का बनना अध्याय 4: औद्योगिकीकरण का युग अध्याय 5: मुद्रण संस्कृति और आधुनिक दुनिया अध्याय 6: संसाधन एवं विकास अध्याय 7: वन एवं वन्यजीव संसाधन अध्याय 8: जल संसाधन अध्याय 9: कृषि अध्याय 10: खनिज तथा ऊर्जा संसाधन अध्याय 11: विनिर्माण उद्योग अध्याय 12: राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की जीवन रेखाएँ अध्याय 13: सत्ता की साझेदारी (Power-sharing) अध्याय 14: संघवाद (Federalism) अध्याय 15: लिंग, धर्म और जाति अध्याय 16: राजनीतिक दल (Political Parties) अध्याय 17: लोकतंत्र के परिणाम अध्याय 18: विकास (Development) अध्याय 19: भारतीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्रक अध्याय 20: मुद्रा और साख अध्याय 21: वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था अध्याय 22: उपभोक्ता अधिकार

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