Follow Us
झारखण्ड बोर्ड (JAC) • कक्षा 7 • Hindi (भाषा मंजरी-7) • अध्याय 8
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

अमीर खुसरो

प्रस्तुत ज्ञानवर्धक एवं सांस्कृतिक व्यक्तित्व पर आधारित पाठ “अमीर खुसरो” मध्यकालीन भारत के महान सूफी संत, अद्वितीय कवि, संगीतज्ञ, भाषाविद् और कौमी एकता के अग्रदूत अबुल हसन यमीनुद्दीन अमीर खुसरो (1253 - 1325 ई.) के बहुआयामी जीवन व कृतित्व पर प्रकाश डालता है। अमीर खुसरो को ‘हिन्द का तोता’ (तूती-ए-हिन्द) की उपाधि से विभूषित किया गया था। वे खड़ी बोली हिंदी (हिन्दवी) के पहले कवि माने जाते हैं। उन्होंने अपनी पहेलियों, मुकरियों, दो सुखनों, दोहों और गीतों के माध्यम से लोक-भाषा को साहित्य की मुख्यधारा से जोड़ा। संगीत के क्षेत्र में सितार और तबले का आविष्कार तथा कव्वाली व तराना गायकी का प्रवर्तन उनकी अप्रतिम देन है। हजरत निजामुद्दीन औलिया के परम शिष्य खुसरो ने भारतीय और फारसी संस्कृति के गंगा-जमुनी समन्वय को जन्म दिया।

जिस कवि ने 700 वर्ष पूर्व ‘खड़ी बोली हिंदी’ में पहली पहेली रची, क्या आप उनकी पहेलियाँ बूझ सकते हैं?

“एक थाल मोती से भरा, सबके सिर पर औंधा धरा। चारों ओर वह थाली फिरे, मोती उससे एक न गिरे!”—बचपन में यह पहेली हम सबने सुनी है, पर क्या आप जानते हैं कि यह पहेली 13वीं शताब्दी में अमीर खुसरो ने लिखी थी? (उत्तर: आकाश और तारे)। अमीर खुसरो ने उस दौर में हिंदी (हिन्दवी) में कविता रची जब राजदरबारों में केवल फारसी का बोलबाला था। वे भारत की मिट्टी, यहाँ की ऋतुओं और भाषा से बेपनाह मोहब्बत करते थे!

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

यह पाठ विद्यार्थियों को भारत की साझी (गंगा-जमुनी) संस्कृति, भाषा के विकास और धर्मनिरपेक्ष मानवीय मूल्यों से जोड़ता है। यह बताता है कि कैसे एक व्यक्ति अपनी प्रतिभा से भाषा, संगीत और लोक-साहित्य में युगांतरकारी परिवर्तन ला सकता है। यह राष्ट्रीय एकता और भाषाई सौहार्द का जीवंत पाठ है।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • मध्यकालीन भारत (सल्तनत काल) के इतिहास की सामान्य समझ।
  • पहेलियों, मुकरियों और लोक-गीतों के आनंददायक स्वरूप से परिचय।
  • हजरत निजामुद्दीन औलिया और सूफी आंदोलन की बुनियादी जानकारी।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • विद्यार्थी अमीर खुसरो के जीवन, सूफी दर्शन और गंगा-जमुनी समन्वय की अवधारणा को समझ सकेंगे।
  • खड़ी बोली हिंदी (हिन्दवी) के उद्भव और विकास में खुसरो के ऐतिहासिक योगदान को पहचान सकेंगे।
  • खुसरो की प्रमुख पहेलियों, मुकरियों, दो सुखनों और दोहों का भावार्थ ग्रहण कर सकेंगे।
  • संगीत के क्षेत्र में सितार, तबला, तराना और कव्वाली के आविष्कार का महत्व जान सकेंगे।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. अमीर खुसरो का जीवन-वृत्त एवं साह...
2 2. खुसरो की पहेलियाँ, मुकरियाँ एवं...
3 3. संगीत के क्षेत्र में अद्वितीय क्...
4 4. भाषा की बात: हिन्दवी, फारसी और म...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. अमीर खुसरो का जीवन-वृत्त एवं साहित्यिक व्यक्तित्व

अमीर खुसरो बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे:

क. जन्म एवं ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

अमीर खुसरो का जन्म सन् 1253 ईस्वी में उत्तर प्रदेश के एटा जिले के पटियाली नामक कस्बे में हुआ था। उनके पिता अमीर सैफुद्दीन महमूद तुर्क थे और माता भारतीय राजपूत मूल की थीं। उनके बचपन का नाम ‘अबुल हसन’ था। खुसरो ने गुलाम वंश से लेकर तुगलक वंश तक दिल्ली सल्तनत के ग्यारह से अधिक सुल्तानों का शासनकाल देखा, किंतु वे राजदरबार की विलासिता से दूर रहकर सूफी परंपरा में रमे रहे।

ख. हजरत निजामुद्दीन औलिया के प्रति अनन्य भक्ति

खुसरो दिल्ली के महान सूफी संत हजरत ख्वाजा निजामुद्दीन औलिया के सबसे प्रिय शिष्य (मुरीद) थे। दोनों के बीच गुरु-शिष्य का संबंध आध्यात्मिक प्रेम की पराकाष्ठा था। जब 1325 ई. में हजरत निजामुद्दीन औलिया का देहावसान हुआ, उस समय खुसरो दिल्ली से बाहर थे। समाचार पाकर वे दौड़े आए और अपने पीर के मजार पर अपना सिर पटकते हुए यह अमर दोहा पढ़ा—
“गोरी सोवे सेज पर, मुख पर डारे केस। चल खुसरो घर आपने, रैन भई चहुँ देस॥”
इसके छह माह के भीतर ही विरह की आग में जलते हुए खुसरो ने भी अपने प्राण त्याग दिए।

ग. तूती-ए-हिन्द (भारत का तोता) और देश-प्रेम

खुसरो को ‘तूती-ए-हिन्द’ (हिन्द का तोता) कहा जाता था। उन्होंने स्वयं गर्व से कहा था—“चू मन तूतिये हिन्दम अर रास्त पुरसी, ज़े मन हिन्दवी पुर्स ता नग्ज़ गोयम।” (यदि तुम मुझसे सच पूछना चाहते हो तो मैं हिन्द का तोता हूँ; मुझसे हिन्दवी में बात करो ताकि मैं मीठी-मीठी बातें कह सकूँ)। उन्होंने अपनी मसनवी ‘नुह सिपिहर’ में भारत की जलवायु, जीव-जंतुओं, ज्ञान-विज्ञान और भाषाओं की मुक्तकंठ से प्रशंसा की है।

2. खुसरो की पहेलियाँ, मुकरियाँ एवं दोहे (हिन्दवी का सौंदर्य)

खुसरो ने लोक-मनोरंजन के साथ बौद्धिक तीक्ष्णता को जोड़ते हुए कई विधाओं को जन्म दिया:

1. पहेलियाँ (बुझौवल)

“बीसों का सिर काट लिया, ना मारा ना खून किया।”

→ उत्तर: नाखून काटना।

“एक नार ने अचरज किया, साँप मार पिंजरे में दिया। ज्यों-ज्यों साँप ताल को खाए, सूखे ताल साँप मर जाए।”

→ उत्तर: दीया और बाती (तेल और लौ)।

2. मुकरियाँ (बात कहकर मुकर जाना)

“रात समय वह मेरे आवे, भोर भये वह घर उठि जावे। यह अचरज है सबसे न्यारा, ऐ सखि साजन? ना सखि तारा!”

इसमें सखी पहले साजन का भ्रम पैदा करती है और अंत में चतुराई से ‘तारा’ कहकर मुकर जाती है।

3. दो सुखन (एक ही उत्तर दो प्रश्नों का)

“घोड़ा अड़ा क्यों? पान सड़ा क्यों?”

→ उत्तर: फेरा न था! (घोड़े को दौड़ाया/फेरा नहीं गया और पान को पलटा/फेरा नहीं गया)।

3. संगीत के क्षेत्र में अद्वितीय क्रांति

खुसरो केवल कवि ही नहीं, भारतीय शास्त्रीय संगीत के महान अन्वेषक भी थे:

वाद्यों का आविष्कार (सितार व तबला)

• सितार: वीणा और ईरानी तंबूरे का अद्भुत संगम कर उन्होंने ‘सेह-तार’ (तीन तारों वाला वाद्य) बनाया जो आगे चलकर ‘सितार’ बना।
• तबला: पखावज (मृदंग) को दो टुकड़ों में काटकर आधुनिक तबले और बाएँ का निर्माण किया।

गायन शैलियाँ व राग

• कव्वाली: सूफी भक्ति संगीत की विश्वप्रसिद्ध ‘कव्वाली’ शैली के जनक खुसरो ही हैं।
• तराना व ख्याल: भारतीय रागों में फारसी धुनों का मिश्रण कर तराना और नए राग (जैसे यमन, साज़गिरी) ईजाद किए।

4. भाषा की बात: हिन्दवी, फारसी और मुहावरे

खुसरो की भाषा गंगा-जमुनी तहजीब की पहली संवाहक बनी:

क. फारसी और हिन्दवी का अद्भुत मिश्रण

खुसरो ने एक ही गजल में एक पंक्ति फारसी और दूसरी पंक्ति ब्रजभाषा/हिन्दी की रचकर चमत्कार उत्पन्न किया:

“ज़िहाले मिस्कीं मकुन तगाफ़ुल, दुराये नैना बनाए बतियाँ। किताबे हिज्राँ न दारम ऐ जाँ, न लेहु काहे लगाए छतियाँ॥”

ख. शब्दार्थ तालिका

रैन: रात्रि, रात। अचरज: आश्चर्य, अचंभा। सेज: बिछौना, शय्या। भोर: प्रात:काल, सवेरा। तूतिये-हिन्द: भारत का तोता।

महत्वपूर्ण काव्य-सिद्धांत, भावार्थ एवं व्याकरण सूत्र

उपाधि सूत्र: तूती-ए-हिन्द
तूती (तोता) + ए (का) + हिन्द (भारत) = भारत का तोता
अमीर खुसरो को उनकी मधुर वाणी और हिन्दवी रचनाओं के कारण यह उपाधि मिली।
खुसरो का ऐतिहासिक वाद्य आविष्कार
वीणा + ईरानी तंबूरा = सितार (सेह-तार) || पखावज का विभाजन = तबला
भारतीय शास्त्रीय संगीत में सितार और तबला खुसरो की अमर देन हैं।
गुरु-शिष्य अमर दोहा
गोरी सोवे सेज पर, मुख पर डारे केस। चल खुसरो घर आपने, रैन भई चहुँ देस॥
हजरत निजामुद्दीन औलिया के देहावसान पर खुसरो द्वारा रचित विश्वप्रसिद्ध दोहा।
सांस्कृतिक समन्वय (गंगा-जमुनी तहजीब)
भारतीय संस्कृति (हिन्दवी/राग) + फारसी प्रभाव = साझी भारतीय संस्कृति
खुसरो ने दोनों संस्कृतियों को मिलाकर कौमी एकता की नींव रखी।
दो सुखन का सूत्र
दो भिन्न प्रश्न → एक ही उभयनिष्ठ उत्तर
जैसे: ‘घोड़ा अड़ा क्यों? पान सड़ा क्यों?’ → ‘फेरा न था!’

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
अमीर खुसरो को ‘तूती-ए-हिन्द’ क्यों कहा जाता है? उनका संक्षिप्त परिचय दीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर: ‘तूती-ए-हिन्द’ का अर्थ है ‘भारत का तोता’। अमीर खुसरो (1253-1325 ई.) मध्यकालीन भारत के महान सूफी कवि, संगीतज्ञ और भाषाविद् थे। उन्होंने अपनी मधुर वाणी और जन-भाषा ‘हिन्दवी’ में अद्वितीय काव्य रचा। उन्होंने गर्व से कहा था कि यदि मुझसे मीठी और सच्ची बातें सुनना चाहते हो तो मुझसे हिन्दवी में बात करो। वे भारत की संस्कृति, प्रकृति और भाषाओं से अगाध प्रेम करते थे, इसलिए उन्हें यह आदरसूचक उपाधि दी गई।
उदाहरण 2
खड़ी बोली हिंदी के विकास में अमीर खुसरो का क्या ऐतिहासिक स्थान है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर: अमीर खुसरो को खड़ी बोली हिंदी का प्रथम कवि माना जाता है। उस युग में जब राजकाज और साहित्य में केवल फारसी तथा संस्कृत का वर्चस्व था, खुसरो ने आम जनता की बोली (हिन्दवी/खड़ी बोली) को साहित्य का माध्यम बनाया। उनकी पहेलियों, मुकरियों और गीतों ने खड़ी बोली को सहज, सुमधुर और लोकप्रिय बनाया, जिसने आधुनिक हिंदी कविता की सुदृढ़ नींव रखी।
उदाहरण 3
हजरत निजामुद्दीन औलिया के देहांत पर खुसरो ने कौन-सा मार्मिक दोहा पढ़ा और उसका क्या अर्थ है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर: खुसरो ने अपने प्रिय गुरु के मजार पर यह दोहा पढ़ा:
“गोरी सोवे सेज पर, मुख पर डारे केस। चल खुसरो घर आपने, रैन भई चहुँ देस॥”
भावार्थ: मेरी सुंदरी (यहाँ गुरु की पवित्र आत्मा) शांति की सेज (कब्र) पर अपने मुख पर बाल बिखराए चिर-निद्रा में सो गई है। हे खुसरो! अब तुम्हारा भी यहाँ कोई काम नहीं, अपने असली घर (परलोक) की तैयारी करो क्योंकि गुरु के जाने से पूरे संसार में अज्ञान और वियोग का अंधेरा छा गया है।
उदाहरण 4
भारतीय संगीत को अमीर खुसरो की क्या-क्या अमर देन हैं?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर: भारतीय संगीत में अमीर खुसरो की प्रमुख देनें निम्नलिखित हैं:
1. वाद्यों का आविष्कार: उन्होंने भारतीय वीणा और ईरानी तंबूरे को मिलाकर ‘सितार’ तथा पखावज को बाँटकर ‘तबला’ बनाया।
2. कव्वाली शैली: सूफी भक्ति गीतों को सामूहिक रूप से गाने की ‘कव्वाली’ गायकी की नींव रखी।
3. नए राग एवं तराना: उन्होंने यमन, साज़गिरी जैसे रागों का सृजन किया और ‘तराना’ गायकी का प्रचलन किया।
उदाहरण 5
खुसरो की मुकरी “रात समय वह मेरे आवे... ऐ सखि साजन? ना सखि तारा!” की क्या विशेषता है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर: ‘मुकरी’ लोक-काव्य की एक ऐसी चतुराई भरी विधा है जिसमें नायिका अपनी सखी से कोई बात कहती है जिससे पति (साजन) का आभास होता है, किंतु अंत में सखी के पूछने पर वह अपनी बात से मुकरकर किसी अन्य वस्तु (जैसे तारा) का नाम ले लेती है। यह बौद्धिक विनोद और वाक-चातुर्य का अद्भुत उदाहरण है।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

अमीर खुसरो को मुगल सम्राट अकबर का समकालीन समझ लेना!

सही वैज्ञानिक तथ्य

अमीर खुसरो मुगल काल के नहीं, बल्कि 13वीं-14वीं सदी के दिल्ली सल्तनत (खिलजी व तुगलक काल) के कवि थे।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

‘गोरी सोवे सेज पर...’ दोहे को किसी प्रेमिका के लिए लिखा गया श्रृंगारिक दोहा समझना!

सही वैज्ञानिक तथ्य

यह कोई लौकिक श्रृंगार दोहा नहीं, बल्कि अपने आध्यात्मिक गुरु हजरत निजामुद्दीन औलिया के देहावसान पर लिखा गया परम वैराग्य का दोहा है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

‘तूती-ए-हिन्द’ का अर्थ भारत की कोयल समझ लेना!

सही वैज्ञानिक तथ्य

तूती का अर्थ तोता (Parrot) होता है, कोयल नहीं।

चित्रात्मक व्याख्या एवं मॉडल

पाठ 8: अमीर खुसरो — गंगा-जमुनी संस्कृति, खड़ी बोली व संगीत के प्रवर्तक 1 खड़ी बोली / हिन्दवी • प्रथम खड़ी बोली कवि • पहेलियाँ व मुकरियाँ • दो सुखने व लोकगीत [लोकभाषा के जनक] 2 संगीत के आविष्कार • सितार (सेह-तार) • तबले का निर्माण • कव्वाली व तराना गायन [शास्त्रीय संगीत क्रांति] 3 सूफी भक्ति व गुरु-प्रेम • निजामुद्दीन औलिया मुरीद • ‘गोरी सोवे सेज पर...’ • निष्काम आध्यात्मिक प्रेम [आध्यात्मिक शिखर] 4 तूती-ए-हिन्द • ‘हिन्द का तोता’ उपाधि • भारत से अगाध प्रेम • गंगा-जमुनी कौमी एकता [राष्ट्रीय सौहार्द]

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
अमीर खुसरो (1253 - 1325 ई.) मध्यकालीन भारत के महान सूफी कवि, संगीतज्ञ और भाषाविद् थे।
मुख्य बिंदु 2
उनका जन्म उत्तर प्रदेश के एटा जिले के पटियाली कस्बे में हुआ था और उनका मूल नाम अबुल हसन था।
मुख्य बिंदु 3
खुसरो को ‘तूती-ए-हिन्द’ (भारत का तोता) की उपाधि से सम्मानित किया गया था।
मुख्य बिंदु 4
वे खड़ी बोली हिंदी (हिन्दवी) के पहले कवि माने जाते हैं, जिन्होंने जनभाषा में साहित्य रचा।
मुख्य बिंदु 5
उनकी पहेलियों, मुकरियों, दो सुखनों और दोहों ने लोक-साहित्य को समृद्ध और मनोरंजक बनाया।
मुख्य बिंदु 6
वे दिल्ली के प्रख्यात सूफी संत हजरत निजामुद्दीन औलिया के सबसे अनन्य और लाडले शिष्य थे।
मुख्य बिंदु 7
गुरु के देहावसान पर उनका रचा दोहा ‘गोरी सोवे सेज पर...’ हिंदी साहित्य की अमर धरोहर है।
मुख्य बिंदु 8
संगीत के क्षेत्र में उन्होंने वीणा और तंबूरे को मिलाकर ‘सितार’ और पखावज से ‘तबला’ बनाया।
मुख्य बिंदु 9
उन्होंने ‘कव्वाली’ और ‘तराना’ गायकी की नींव रखी तथा यमन जैसे कई नए रागों का सृजन किया।
मुख्य बिंदु 10
अमीर खुसरो भारत की साझी गंगा-जमुनी संस्कृति और कौमी एकता के सबसे बड़े प्रतीक पुरुष हैं।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
अमीर खुसरो को ‘हिन्द का तोता’ (तूती-ए-हिन्द) क्यों कहा गया?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: उनकी सुरीली वाणी, देश-प्रेम और हिन्दवी (खड़ी बोली) में रची गई मनमोहक रचनाओं के कारण।
उन्होंने स्वयं कहा था कि यदि मुझसे मीठी बातें सुनना चाहते हो तो मुझसे हिन्दवी में संवाद करो।
2
खुसरो ने संगीत के किन दो प्रसिद्ध वाद्य यंत्रों का आविष्कार किया?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: सितार (सेह-तार) और तबला का आविष्कार किया।
वीणा व तंबूरे से सितार और पखावज को दो भागों में विभक्त कर तबला बनाया।
3
‘गोरी सोवे सेज पर, मुख पर डारे केस...’ दोहा खुसरो ने किस अवसर पर कहा था?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: अपने आध्यात्मिक गुरु हजरत ख्वाजा निजामुद्दीन औलिया के देहावसान (मृत्यु) के अवसर पर।
यह दोहा उनके विरह और अनन्य भक्ति का चरम प्रकटीकरण है।
4
खुसरो की पहेली “एक थाल मोती से भरा, सबके सिर पर औंधा धरा...” का सही उत्तर क्या है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: आकाश (तारे और नभ-मंडल)।
थाल आकाश का और मोती उसमें चमकते तारों के प्रतीक हैं।
5
साहित्यिक इतिहास में अमीर खुसरो का सबसे महत्वपूर्ण भाषाई योगदान क्या है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: खड़ी बोली हिंदी (हिन्दवी) को साहित्य और कविता का माध्यम बनाकर उसका प्रवर्तन करना।
वे खड़ी बोली हिंदी के प्रथम कवि के रूप में निर्विवाद रूप से स्वीकार किए जाते हैं।
अध्याय का अध्ययन पूर्ण हुआ?
अभ्यास के लिए तैयार?

ऑनलाइन CBT टेस्ट देकर तैयारी का मूल्यांकन करें

झारखण्ड बोर्ड परीक्षा पैटर्न पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्नों का ऑनलाइन टेस्ट दें। तुरंत परिणाम, समय विश्लेषण और प्रत्येक प्रश्न का विस्तृत हल प्राप्त करें।

AI अध्ययन मित्र

त्वरित शंका समाधान

अमीर खुसरो में कोई संदेह या प्रश्न है? हमारे AI अध्ययन मित्र से तुरंत समझें।