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झारखण्ड बोर्ड (JAC) • कक्षा 7 • Hindi (भाषा मंजरी-7) • अध्याय 2
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

गिल्लू

झारखण्ड राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् (JCERT) कक्षा 7 हिन्दी "भाषा मंजरी" का द्वितीय पाठ "गिल्लू" हिन्दी साहित्य की अमर साधिका एवं छायावाद की आधारस्तंभ महादेवी वर्मा द्वारा रचित एक अत्यंत मर्मस्पर्शी, आत्मीय और हृदयद्रावक रेखाचित्र/संस्मरण है। इसमें लेखिका द्वारा कौवों के चोंच के प्रहार से घायल एक नन्हे गिलहरी के बच्चे की प्राण-रक्षा, उसका वात्सल्यपूर्ण पालन-पोषण, उसकी नटखट और मनमोहक बाल-सुलभ क्रीड़ाएँ तथा अंततः उसके देहावसान (मृत्यु) का अत्यंत मार्मिक और सजीव चित्रण किया गया है। यह पाठ मनुष्य और मूक पशु-पक्षियों के बीच प्रेम, करुणा, सहअस्तित्व और संवेदनशीलता का अद्वितीय आदर्श स्थापित करता है।

🐿️ क्या आपने कभी सोचा है?

🐾 क्या एक नन्ही-सी गिलहरी, जिसे समाज केवल एक जंगली जीव मानता है, किसी मनुष्य के सुख-दुख को गहराई से महसूस कर सकती है और अस्वस्थ होने पर सिरहाने बैठकर परिचारिका की भाँति बालों को सहला सकती है?

🥛 जब कौवों ने उस अचेत, रक्त-रंजित नन्हे जीव को मृतप्राय छोड़ दिया था, तब लेखिका ने किस अपार धैर्य से रुई की बत्ती और दूध की बूँदों से उसके अंदर दोबारा जीवन की लौ जलाई?

🌼 सोनजुही की पीली कली को देखकर महादेवी वर्मा की आँखों में आज भी एक नन्हे जीव की यादें क्यों उमड़ आती हैं?

मानव-हृदय और मूक प्रकृति के बीच इस पावन और आत्मिक रिश्ते की अनुभूति हमें "गिल्लू" रेखाचित्र में मिलती है। यह पाठ पत्थर दिल इंसान को भी करुणा और ममता से सराबोर कर देता है।

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

आज जब आधुनिकता की अंधी दौड़ में मनुष्य पर्यावरण और मूक पशु-पक्षियों के प्रति क्रूर होता जा रहा है, तब महादेवी वर्मा का यह पाठ हमें सिखाता है कि पृथ्वी केवल मनुष्यों की नहीं है। पशु-पक्षियों में भी भावनाएँ, कृतज्ञता और संवेदनाएँ होती हैं। यह पाठ बच्चों के कोमल हृदय में जीव-दया, पर्यावरण संरक्षण और करुणा के मानवीय मूल्यों को जाग्रत करता है।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • संस्मरण एवं रेखाचित्र (Memoir / Sketch) विधा की प्राथमिक पहचान।
  • महादेवी वर्मा के जीवन एवं छायावादी साहित्य का संक्षिप्त ज्ञान।
  • पशु-पक्षियों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण एवं जीव-दया।
  • हिन्दी की मुहावरेदार भाषा एवं भावात्मक शब्दावली की समझ।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • संस्मरण विधा की विशेषताओं को समझकर गिल्लू पाठ का सार बता सकेंगे।
  • महादेवी वर्मा के पशु-प्रेम, वात्सल्य और संवेदनशील व्यक्तित्व को व्याख्यायित कर सकेंगे।
  • गिल्लू के उपचार, खान-पान (काजू, बिस्कुट) और उसकी चंचल क्रीड़ाओं का सजीव वर्णन कर सकेंगे।
  • गिल्लू और लेखिका के बीच के अटूट भावनात्मक संबंध का विश्लेषण कर सकेंगे।
  • गिलहरियों के जीवन-काल (सामान्यतः 2 वर्ष) और गिल्लू की जीवन-संध्या के प्रसंग को समझा सकेंगे।
  • कठिन शब्दों (काकभुशुंडि, समाधि, आहत, परिचारिका, स्निग्ध) के अर्थ लिखकर वाक्यों में प्रयोग कर सकेंगे।
  • सोनजुही की पीली कली और गिल्लू की समाधि के प्रतीकात्मक अर्थ को स्पष्ट कर सकेंगे।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. पाठ का विस्तृत सारांश एवं प्रमुख...
2 2. शब्दार्थ, कठिन शब्दावली एवं मुहा...
3 3. पात्र-चित्रण एवं संस्मरण का मर्म...
4 4. भाषा-शैली एवं व्याकरणिक पक्ष (Gr...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. पाठ का विस्तृत सारांश एवं प्रमुख घटनाक्रम (Comprehensive Story Summary)

1. घायल अवस्था में गिल्लू की प्राप्ति एवं उपचार

एक दिन सवेरे जब महादेवी वर्मा बरामदे में आईं, तो उन्होंने देखा कि दो कौवे एक गमले के चारों ओर चोंचों से छुआ-छुऔअल जैसा खेल खेल रहे थे। वहाँ गमले और दीवार की संधि में एक नन्हा-सा गिलहरी का बच्चा गिरा पड़ा था जिसे कौवों ने अपनी चोंचों से मारकर लहूलुहान कर दिया था। सबने कहा कि यह नहीं बचेगा, किंतु लेखिका ने उसे उठाकर अपने कमरे में लाया। घावों को पोंछकर पेनिसिलिन का मरहम लगाया और कई घंटों के प्रयास के बाद रुई की पतली बत्ती से दूध की बूँद उसके नन्हे मुँह में टपकाई। तीसरे दिन वह इतना स्वस्थ हो गया कि अपनी चमकीली आँखों से सबको देखने लगा।

2. गिल्लू का नामकरण एवं नटखट क्रीड़ाएँ

लेखिका ने उसका नाम ‘गिल्लू‘ रखा। उसके रहने के लिए एक हल्की डलिया में रुई बिछाकर उसे खिड़की पर लटका दिया गया, जो दो वर्षों तक उसका प्यारा झूला रहा। गिल्लू लेखिका का ध्यान आकर्षित करने के लिए पर्दे पर तेजी से चढ़ता और उतरता। वह लेखिका की थाली में से एक-एक चावल बड़े करीने से उठाकर खाता था। उसका सबसे प्रिय खाद्य काजू था।

3. लेखिका के प्रति गिल्लू की संवेदनशीलता एवं सेवाभाव

जब लेखिका एक मोटर दुर्घटना में घायल होकर अस्पताल में थीं, तो गिल्लू ने अपने प्रिय काजू खाना बंद कर दिया था। जब लेखिका घर लौटीं, तो वह उनके सिरहाने तकिए पर बैठकर अपने नन्हे पंजों से उनके बालों को हौले-हौले सहलाता रहता था, मानो कोई कुशल परिचारिका (नर्स) सेवा कर रही हो।

4. गिल्लू की जीवन-संध्या एवं समाधि

गिलहरियों के जीवन की अवधि प्रायः दो वर्ष से अधिक नहीं होती। गिल्लू की जीवन-यात्रा का अंत भी आ गया। अंतिम दिन उसने कुछ नहीं खाया, न बाहर गया। रात में असह्य यातना के बीच भी वह झूले से उतरकर लेखिका के बिस्तर पर आया और अपने ठंडे पंजों से वही उँगली पकड़ ली जिसे उसने अपने बचपन के पहले दिन पकड़ा था। सुबह की पहली किरण के साथ ही उसने प्राण त्याग दिए। लेखिका ने उसे सोनजुही की लता के नीचे समाधि दी, क्योंकि वह लता उसे सबसे प्रिय थी और लेखिका को विश्वास था कि किसी बसंत में वह सोनजुही की पीली कली बनकर अवश्य खिलेगा।

2. शब्दार्थ, कठिन शब्दावली एवं मुहावरे (Glossary & Idioms)

पाठ में प्रयुक्त साहित्यिक और भावपूर्ण शब्दों का संकलन:

कठिन शब्द प्रामाणिक अर्थ प्रसंग / संदर्भ
काकभुशुंडि कौवा (विचित्र और समादरित पक्षी) हमारे समाज में कौवे को पितृपक्ष में आदर मिलता है।
आहत घायल, चोटिल कौवों की चोंच से गिल्लू बुरी तरह आहत हो गया था।
परिचारिका सेविका, नर्स गिल्लू लेखिका के बालों को परिचारिका की तरह सहलाता था।
स्निग्ध चिकने, चमकदार, कोमल गिल्लू के रोएँ बहुत स्निग्ध और सुंदर थे।
समाधि कब्र, अंतिम विश्राम स्थल सोनजुही की जड़ में गिल्लू को समाधि दी गई।

3. पात्र-चित्रण एवं संस्मरण का मर्म (Character Analysis & Core Theme)

1. गिल्लू का चरित्र
  • स्वाभिमानी एवं बुद्धिमान: केवल अपनी भूख मिटाने वाला जानवर नहीं, बल्कि लेखिका के स्नेह को पहचानने वाला चतुर जीव।
  • असीम कृतज्ञ: लेखिका की अस्वस्थता में खाना छोड़ देना और उनके सिरहाने बैठकर सेवा करना उसकी कृतज्ञता दर्शाता है।
  • स्वतंत्रता-प्रेमी: बाहर की गिलहरियों की चहचहाहट सुनकर जाली के पास बैठकर मुक्त आकाश को निहारना।
2. महादेवी वर्मा का व्यक्तित्व

लेखिका का हृदय करुणा, मातृत्व और संवेदनशील वात्सल्य का सागर है। उन्होंने एक उपेक्षित, तुच्छ माने जाने वाले जीव को जो मान-सम्मान और पारिवारिक आत्मीयता दी, वह संसार के लिए अनुकरणीय है।

4. भाषा-शैली एवं व्याकरणिक पक्ष (Grammar & Style Study)

व्याकरणिक विशेषताएं
  • प्रत्यय प्रयोग: परिचारिका (परिचारक + इका), चमकीली (चमक + ईली), चिकनाहट (चिकना + आहट)।
  • समास: काकद्वय (दो कौवे - द्विगु समास), जीवन-यात्रा (जीवन की यात्रा - तत्पुरुष समास)।
  • विशेषण-विशेष्य युग्म: नन्हा जीव, स्निग्ध रोएँ, चमकीली आँखें, कांच के मनके, पीली कली।

महत्वपूर्ण काव्य-सिद्धांत, भावार्थ एवं व्याकरण सूत्र

पाठ की लेखिका
महादेवी वर्मा
छायावाद की प्रमुख कवयित्री एवं आधुनिक मीरा
साहित्यिक विधा
रेखाचित्र / संस्मरण (Memoir)
वास्तविक जीवन की आत्मीय स्मृतियों पर आधारित
गिल्लू का प्रिय भोजन
काजू (Cashew nuts)
काजू न मिलने पर अन्य खाद्य नीचे गिरा देता था
गिलहरी की औसत आयु
लगभग 2 वर्ष
वैज्ञानिक एवं प्राकृतिक जीवन चक्र
समाधि स्थल एवं प्रतीक
सोनजुही की लता (Sonjuhi creeper)
पीली कली के रूप में पुनर्जन्म का विश्वास

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
सोनजुही में लगी पीली कली को देखकर लेखिका के मन में कौन-सी स्मृतियाँ जाग्रत हो उठीं?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर: सोनजुही की हरी-भरी घनी पत्तियों में खिली नन्हीं पीली कली को देखकर लेखिका को तत्काल अपने प्रिय छोटे जीव ‘गिल्लू‘ की याद आ गई। गिल्लू इसी सोनजुही की घनी छाँव में छिपकर बैठा करता था और अचानक लेखिका के कंधे पर कूदकर उन्हें चौंका देता था। गिल्लू की मृत्यु के बाद उसे इसी लता की जड़ में समाधि दी गई थी, अतः लेखिका को लगा कि वह नन्हा जीव पीली कली के रूप में ही खिल उठा है।
उदाहरण 2
कौवों के आक्रमण से घायल गिल्लू को लेखिका ने किस प्रकार नया जीवन प्रदान किया?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर: कौवों द्वारा चोंच मारकर लहूलुहान कर दिए जाने पर सबने कहा कि यह नहीं बचेगा। किंतु लेखिका उसे उठाकर कमरे में ले आईं। उन्होंने रुई से रक्त पोंछकर घावों पर पेनिसिलिन का मरहम लगाया। रुई की पतली बत्ती बनाकर दूध में भिगोकर उसके नन्हे मुँह में लगाने का अथक प्रयास किया। कई घंटों के उपचार के बाद तीसरे दिन गिल्लू ने आँखें खोलीं और स्वस्थ होकर नया जीवन प्राप्त किया।
उदाहरण 3
गिल्लू लेखिका का ध्यान आकर्षित करने के लिए क्या-क्या शरारतें करता था?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर: जब लेखिका लिखने बैठती थीं, तो उनका ध्यान अपनी ओर खींचने के लिए गिल्लू उनके पैरों के पास आकर सर्र से पर्दे पर चढ़ जाता था और फिर उसी तेजी से नीचे उतरता था। कभी वह लेखिका की कलम को पकड़ने का प्रयास करता, कभी मेज पर रखे कागजों के नीचे छिप जाता और कभी फूलदान के फूलों में छिपकर अचानक बाहर निकल आता था।
उदाहरण 4
लेखिका की अस्वस्थता के समय गिल्लू ने अपनी संवेदनशीलता और प्रेम किस प्रकार प्रकट किया?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर: जब लेखिका मोटर दुर्घटना में घायल होकर अस्पताल में भर्ती थीं, तब गिल्लू ने खाना-पीना बहुत कम कर दिया था। उसका प्रिय भोजन काजू जब उसकी डलिया में रखा जाता, तो वह उसे नहीं खाता था। अस्पताल से घर लौटने पर वह तकिए पर सिरहाने बैठकर अपने नन्हे-नन्हे पंजों से लेखिका के बालों को हौले-हौले सहलाता रहता था, मानो कोई सच्ची परिचारिका सेवा कर रही हो।
उदाहरण 5
गिल्लू की अंतिम यात्रा और उसकी समाधि का मार्मिक वर्णन कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर: गिलहरियों का जीवनकाल लगभग दो वर्ष होता है। अंतिम दिन गिल्लू ने कुछ नहीं खाया। रात में असहनीय वेदना के बावजूद वह झूले से उतरकर लेखिका के पास आया और उनके बिस्तर पर अपने ठंडे पंजों से वही उँगली पकड़ ली जो उसने बचपन में पकड़ी थी। सुबह की पहली किरण फूटते ही वह चिरनिद्रा में सो गया। लेखिका ने उसे सोनजुही की लता के नीचे समाधि दी, क्योंकि वह लता गिल्लू को सर्वाधिक प्रिय थी।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

गिल्लू को केवल एक पालतू जानवर मान लेना!

सही वैज्ञानिक तथ्य

गिल्लू केवल पालतू जानवर नहीं, बल्कि लेखिका के परिवार का एक संवेदनशील, आत्मिक सदस्य था जो मानवीय सुख-दुख को गहराई से महसूस करता था।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

गिल्लू के प्रिय भोजन में केवल दूध लिख देना!

सही वैज्ञानिक तथ्य

गिल्लू का सबसे प्रिय भोजन काजू था। दूध उसने केवल बचपन के घायल दिनों में पिया था।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

गिल्लू की समाधि स्थल को किसी पेड़ का नाम दे देना!

सही वैज्ञानिक तथ्य

गिल्लू की समाधि सोनजुही की लता के नीचे बनाई गई थी, किसी बड़े वृक्ष के नीचे नहीं।

चित्रात्मक व्याख्या एवं मॉडल

पाठ 2: गिल्लू — करुणा, मूक प्रेम एवं आत्मीय संस्मरण (Memoir Architecture) गिल्लू की जीवन-यात्रा (Life Stages) 1. कौवों का प्रहार एवं उपचार (पेनिसिलिन) 2. डलिया का झूला एवं प्रिय खाद्य (काजू) 3. परिचारिका रूप एवं 2 वर्ष बाद महाप्रयाण सोनजुही की पीली कली में अमर स्मृति मानवीय मूल्य एवं संवेदनाएँ जीव-दया सहअस्तित्व कृतज्ञता लेखिका: महादेवी वर्मा (रेखाचित्र विधा)

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
‘गिल्लू‘ महादेवी वर्मा द्वारा रचित एक अत्यंत प्रसिद्ध और मार्मिक रेखाचित्र/संस्मरण है।
मुख्य बिंदु 2
कौवों के चोंच के घातक प्रहार से घायल नन्हे गिलहरी के बच्चे की लेखिका ने सेवा कर जान बचाई।
मुख्य बिंदु 3
लेखिका ने खिड़की पर रुई बिछी डलिया टांगकर गिल्लू के लिए एक सुंदर झूला बनाया।
मुख्य बिंदु 4
गिल्लू का सबसे प्रिय भोजन काजू था और वह थाली में से एक-एक चावल करीने से खाता था।
मुख्य बिंदु 5
लेखिका का ध्यान खींचने के लिए वह पर्दे पर तेजी से चढ़ता और उतरता था।
मुख्य बिंदु 6
मोटर दुर्घटना में घायल लेखिका के सिरहाने बैठकर वह परिचारिका की तरह बाल सहलाता था।
मुख्य बिंदु 7
गिलहरियों की औसत जीवन अवधि लगभग 2 वर्ष होती है।
मुख्य बिंदु 8
अंतिम रात में गिल्लू ने लेखिका की वही उंगली पकड़ी जो उसने बचपन में पकड़ी थी और प्राण त्याग दिए।
मुख्य बिंदु 9
गिल्लू को उसकी प्रिय सोनजुही की लता की जड़ में समाधि दी गई।
मुख्य बिंदु 10
यह पाठ मानव और पशु-पक्षियों के बीच निस्वार्थ प्रेम, करुणा और सहअस्तित्व का संदेश देता है।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
‘गिल्लू‘ पाठ की लेखिका कौन हैं?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: महादेवी वर्मा
छायावाद की प्रमुख कवयित्री महादेवी वर्मा ने इस संस्मरण की रचना की है।
2
गिल्लू का सबसे प्रिय खाद्य पदार्थ क्या था?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: काजू
गिल्लू को काजू अत्यंत प्रिय था, काजू न मिलने पर वह अन्य चीजें झूले से नीचे फेंक देता था।
3
गिलहरियों का सामान्य जीवनकाल कितना होता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: लगभग 2 वर्ष
प्राकृतिक रूप से गिलहरियों का जीवनकाल लगभग 2 वर्ष का ही होता है।
4
गिल्लू को कहाँ समाधि दी गई थी?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: सोनजुही की लता के नीचे
सोनजुही गिल्लू को बहुत प्रिय थी, अतः उसकी जड़ में उसे समाधि दी गई।
5
‘काकभुशुंडि‘ किसे कहा गया है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: कौवे को
पाठ में लेखिका ने कौवे के लिए काकभुशुंडि शब्द का प्रयोग किया है।
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