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झारखण्ड बोर्ड (JAC) • कक्षा 7 • Hindi (भाषा मंजरी-7) • अध्याय 3
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

मिठाईवाला

प्रस्तुत मार्मिक एवं यथार्थपरक कहानी “मिठाईवाला” प्रख्यात कथाकार भगवती प्रसाद वाजपेयी द्वारा रचित है। यह कहानी एक ऐसे संपन्न और प्रतिष्ठित व्यक्ति के हृदयस्पर्शी वात्सल्य भाव को उजागर करती है, जिसने एक दर्दनाक हादसे में अपने प्यारे बच्चों और धर्मपत्नी को सदा के लिए खो दिया था। वह अपने हृदय के असीम दुख को भुलाने और नगर के छोटे-छोटे बच्चों में अपने खोए हुए नन्हें बच्चों की झलक पाने के लिए कभी खिलौनेवाला, कभी मुरलीवाला और कभी मिठाईवाला बनकर अत्यंत कम दामों में सामान बेचने आता है। उसका उद्देश्य व्यापार से लाभ कमाना नहीं, बल्कि बच्चों की निश्छल किलकारियों और प्रसन्न मुखड़ों में अपनी ममता व मानसिक शांति खोजना है। यह कहानी बाल-मनोविज्ञान, मातृत्व-पितृत्व की अगाध संवेदना और मानवीय करुणा का अनुपम आलेख प्रस्तुत करती है।

क्या कोई व्यापारी घाटा सहकर केवल बच्चों की मुस्कान खरीदने के लिए फेरी लगा सकता है?

कल्पना कीजिए एक ऐसे मधुर कंठ वाले फेरीवाले की, जिसकी मीठी पुकार “बच्चों को बहलानेवाला, खिलौनेवाला!” सुनकर न केवल बच्चे अपने घरों से नंगे पाँव दौड़ पड़ते हैं, बल्कि बड़े-बुजुर्ग और पर्दे में रहने वाली स्त्रियाँ भी छतों से झाँकने लगती हैं। जो खिलौने बाजार में चार-चार आने के मिलते हैं, वह उन्हें मात्र दो-दो पैसे में लुटा देता है! नगरवासी हैरान हैं कि आखिर यह कैसा विचित्र व्यापारी है जो बिना किसी मुनाफे के अपनी पूंजी लुटा रहा है? इसके पीछे छिपा है एक टूटे हुए पिता के हृदय का वह अगाध वात्सल्य, जो संसार के किसी भी धन-दौलत से कहीं अधिक अनमोल है।

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

यह पाठ विद्यार्थियों में मानवीय संवेदना, परोपकार, सहानुभूति और आत्मीयता के उदात्त गुणों का विकास करता है। आज के उपभोक्तावादी युग में जहाँ हर संबंध और कार्य केवल लाभ-हानि की तराजू पर तौला जाता है, वहाँ यह कहानी सिखाती है कि भौतिक समृद्धि से कहीं अधिक मूल्यवान हृदय का प्रेम, दूसरों के दुखों को अपना समझना और समाज में खुशियाँ बाँटना है। साथ ही, यह बाल-मनोविज्ञान के विविध पहलुओं को समझने का अवसर भी प्रदान करती है।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • फेरीवालों और गाँव-शहर की हाट-बाजार संस्कृति की प्राथमिक जानकारी होना।
  • बाल-सुलभ इच्छाओं, हठ और खिलौनों के प्रति बच्चों के आकर्षण से परिचित होना।
  • कहानी विधा के तत्वों (पात्र, कथानक, संवाद, वातावरण और उद्देश्य) का बुनियादी बोध।
  • संवेदना, वात्सल्य और मानवीय करुणा जैसे नैतिक व भावनात्मक मूल्यों की समझ।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • विद्यार्थी कहानीकार भगवती प्रसाद वाजपेयी की भावप्रवण और संवेदनशील लेखन शैली का रसास्वादन कर सकेंगे।
  • मिठाईवाले के चरित्र के माध्यम से त्याग, वात्सल्य और सुख-दुख के दार्शनिक स्वरूप को समझ सकेंगे।
  • कहानी में आए तद्भव, देशज और आंचलिक शब्दों (जैसे चिक, दस्तूर, पेटी, साफा, हिल्लोल) का अर्थ एवं व्याकरणिक उपयोग सीखेंगे।
  • रोहिणी, विजय बाबू और दादी के संवादों के जरिए तत्कालीन सामाजिक परिवेश, नारी स्थिति और पारिवारिक संरचना का विश्लेषण कर सकेंगे।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. कथा-सार एवं तीनों रूपों (खिलौनेव...
2 2. मिठाईवाले का मार्मिक रहस्योद्घाट...
3 3. पात्र-चित्रण एवं सामाजिक यथार्थ...
4 4. व्याकरण बोध: विशेषण, प्रत्यय एवं...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. कथा-सार एवं तीनों रूपों (खिलौनेवाला, मुरलीवाला, मिठाईवाला) का विश्लेषण

कहानी का ताना-बाना तीन प्रमुख चरणों में विभाजित है, जिसमें मुख्य पात्र भिन्न-भिन्न रूपों में उसी नगर में प्रवेश करता है:

प्रथम चरण: खिलौनेवाला बनकर आगमन

कहानी के प्रारंभ में वह एक खिलौनेवाले के रूप में आता है। उसका कंठ अत्यंत मधुर और गान स्नेह से सिक्त है—“बच्चों को बहलानेवाला, खिलौनेवाला!” उसकी मादक पुकार सुनते ही घरों में हलचल मच जाती है। छोटे-छोटे बच्चे अपने खेल-कूद छोड़कर दौड़ पड़ते हैं। वह अपनी पेटी खोलता है और सुंदर, सजीव खिलौने बच्चों को दिखाता है। चुन्नू और मुन्नू अपने पिता विजय बाबू से पैसे लेकर दो-दो पैसे में सुंदर मिट्टी के खिलौने (घोड़ा और गाड़ी) खरीद लाते हैं। विजय बाबू सोचते हैं कि खिलौनेवाला ठगने आया होगा, किंतु बच्चों की खुशी देखकर शांत हो जाते हैं। कुछ ही महीनों बाद वह चला जाता है।

द्वितीय चरण: आठ मास बाद मुरलीवाला बनकर लौटना

लगभग आठ महीने बाद नगर में एक मुरलीवाले की चर्चा फैलती है। वह अत्यंत कुशल मुरलीवादक है, जो ऐसी मीठी तान छेड़ता है कि सुनने वाले मुग्ध हो जाते हैं। वह रंग-बिरंगी बाँसुरियाँ मात्र दो-दो पैसे में बेच रहा है। जब विजय बाबू उससे मोल-भाव करते हुए ताना मारते हैं कि “तुम फेरीवालों की आदत होती है सबको दो-दो पैसे में देना और मुझ पर अहसान लादना”, तब मुरलीवाला अत्यंत शालीनता से कहता है कि ग्राहकों का तो दस्तूर ही होता है कि दुकानदार चाहे हानि उठाकर ही चीज क्यों न बेचे, वे यही समझते हैं कि उन्हें लूटा जा रहा है। रोहिणी चिक (बांस के पर्दे) के पीछे से उसकी बातें सुनकर उसके मधुर स्वभाव और विनम्रता का अनुभव करती है।

तृतीय चरण: शीतकाल में मिठाईवाला बनकर चरम परिणति

सर्दियों के दिनों में वही परिचित, स्नेहासिक्त स्वर फिर गूँजता है—“बच्चों को बहलानेवाला, मिठाईवाला!” रोहिणी तुरंत उस स्वर को पहचान लेती है। वह अपनी वृद्धा दादी से कहकर मिठाईवाले को घर के आँगन में बुलवाती है। रोहिणी पर्दे की ओट से दादी के माध्यम से उससे उसके जीवन के विषय में पूछती है कि वह इतने सस्ते में सामान क्यों बेचता है और अलग-अलग रूपों में इतने लंबे अंतराल के बाद ही क्यों आता है? यहाँ कहानी अपनी चरम भावुकता और रहस्योद्घाटन पर पहुँचती है।

2. मिठाईवाले का मार्मिक रहस्योद्घाटन एवं शब्दार्थ तालिका

मिठाईवाला अपनी आँखों में आँसू भरकर अपने अतीत का पर्दा हटाता है। वह बताता है कि वह भी कभी अपने नगर का एक अत्यंत प्रतिष्ठित, धनी और सुखी गृहस्थ था। उसके पास सुंदर मकान, मोटर-गाड़ी, नौकर-चाकर, रूपवती सुशील पत्नी और सोने के सजीव खिलौनों जैसे दो नन्हें-मुन्ने बच्चे थे। किंतु विधाता की क्रूर लीला ने एक ही झटके में उसका सारा संसार उजाड़ दिया। सब काल के गाल में समा गए।

वह बताता है कि वह आत्महत्या भी कर सकता था, परंतु उसे लगा कि उसके बच्चे इसी संसार के किसी न किसी बच्चे के रूप में फिर जन्म लिए होंगे। इसलिए वह बच्चों के बीच आता है ताकि उनकी हँसी में अपने बच्चों की हँसी और उनके स्पर्श में अपने बच्चों का दुलार अनुभव कर सके। उसे किसी धन की लालसा नहीं है, जो धन उसके पास नहीं है (वात्सल्य और आत्मीयता), वही वह यहाँ खोजता है।

अध्याय के महत्वपूर्ण क्लिष्ट शब्दों के अर्थ

कठिन शब्द शब्द-भेद / प्रकृति सटीक अर्थ वाक्य प्रयोग
हिल्लोल संज्ञा (तत्सम) तरंग, लहर, भावों का उफान उसकी मधुर आवाज सुनकर नगर में आनंद की हिल्लोल उठती थी।
अतिशय विशेषण (तत्सम) अत्यधिक, बेहद, बहुत ज्यादा मिठाईवाले के मन में बच्चों के प्रति अतिशय वात्सल्य था।
दस्तूर संज्ञा (विदेशज/उर्दू) नियम, प्रथा, रीति-रिवाज मोल-भाव करना तो बाजार का पुराना दस्तूर है।
चिक संज्ञा (देशज) बाँस की तीलियों का पर्दा रोहिणी चिक की ओट में बैठकर बातें सुन रही थी।
प्रतिष्ठित विशेषण (तत्सम) सम्मानित, समाज में प्रतिष्ठा रखने वाला अतीत में वह अपने नगर का अत्यंत प्रतिष्ठित नागरिक था।
अकिंचन विशेषण (तत्सम) जिसके पास कुछ न हो, साधनहीन वह स्वयं को वात्सल्य के अभाव में अकिंचन महसूस करता था।

3. पात्र-चित्रण एवं सामाजिक यथार्थ का उद्घाटन

कहानी के सभी पात्र अत्यंत स्वाभाविक, सजीव और सामाजिक यथार्थ का प्रतिनिधित्व करते हैं:

1. मिठाईवाला (मुख्य पात्र)

त्यागमूर्ति, अत्यंत संवेदनशील पिता, मधुरभाषी और संतोषी स्वभाव का धनी। वह अपने व्यक्तिगत दुःख को समाज के बच्चों में प्रेम बाँटकर मात देता है। उसका स्वाभिमान और शालीनता हर परिस्थिति में अक्षुण्ण रहती है।

2. रोहिणी (संवेदनशील गृहिणी)

एक विचारशील, संवेदनशील और सहृदय महिला। वह केवल वस्तुओं के बाहरी आवरण को नहीं देखती, बल्कि फेरीवाले के आंतरिक दर्द और विचित्र व्यवहार की तह तक जाने की जिज्ञासा रखती है।

3. विजय बाबू व दादी

विजय बाबू सामान्य व्यावहारिक एवं शंकालु सांसारिक व्यक्ति हैं, जो हर बात में नफा-नुकसान देखते हैं। दादी पारंपरिक भारतीय परिवार की संरक्षक और स्नेहिल बुजुर्ग महिला का प्रतिनिधित्व करती हैं।

4. व्याकरण बोध: विशेषण, प्रत्यय एवं युग्म शब्द (भाषा की बात)

प्रस्तुत पाठ में समृद्ध भाषाई सौंदर्य और व्याकरणिक विविधता दृष्टिगोचर होती है:

क. ‘वाला’ प्रत्यय का सटीक प्रयोग

‘वाला’ प्रत्यय संज्ञा या क्रिया के साथ जुड़कर नया विशेषण या कर्तावाचक संज्ञा बनाता है:

  • खिलौना + वाला = खिलौनेवाला (संज्ञा से संज्ञा/विशेषण)
  • मुरली + वाला = मुरलीवाला
  • मिठाई + वाला = मिठाईवाला
  • बहलाना + वाला = बहलानेवाला (क्रिया से विशेषण)
ख. पुनरुक्त (युग्म) शब्द और उनका भावार्थ

कहानी में प्रभावोत्पादकता बढ़ाने के लिए द्विरुक्त/पुनरुक्त शब्दों की भरमार है:

छोटे-छोटे (आकार की लघुता), दो-दो (निश्चित संख्या), रंग-बिरंगी (विविधता), मीठे-मीठे (स्वाद की प्रचुरता)। ऐसे शब्द भाषा में गेयता और लय उत्पन्न करते हैं।

महत्वपूर्ण काव्य-सिद्धांत, भावार्थ एवं व्याकरण सूत्र

कहानी के पंच-तत्व (कथा-शिल्प)
कथानक + पात्र-चित्रण + कथोपकथन + देशकाल/वातावरण + उद्देश्य
मिठाईवाला कहानी में ये पाँचों तत्व मानवीय वात्सल्य और करुणा को चरमोत्कर्ष तक पहुँचाते हैं।
मिठाईवाले का त्रिविध रूपांतरण
खिलौनेवाला (आकर्षण) → मुरलीवाला (लय-माधुर्य) → मिठाईवाला (स्वाद-तृप्ति)
तीनों रूपों का एक ही केंद्रबिंदु था—बच्चों की निश्छल किलकारियाँ और आत्मिक संतोष।
व्याकरण सूत्र: ‘वाला’ प्रत्यय
मूल शब्द (संज्ञा/क्रिया) + ‘वाला’ = कर्तावाचक संज्ञा / गुणवाचक विशेषण
जैसे: खिलौना + वाला = खिलौनेवाला, फेरी + वाला = फेरीवाला।
मानवीय मूल्य समीकरण
भौतिक संचय < आंतरिक वात्सल्य एवं परोपकार
धन-दौलत से बड़ा सुख दूसरों के मुरझाए चेहरों पर मुस्कान बिखेरने में है।
मुहावरा: काल के गाल में समाना
मृत्यु का ग्रास बनना / असमय नष्ट हो जाना
मिठाईवाले के हँसते-खेलते परिवार का दुर्भाग्यवश असमय अंत हो गया था।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
मिठाईवाला बार-बार नगर में अलग-अलग चीजें (खिलौने, मुरली, मिठाई) लेकर क्यों आता था और वह भी इतने सस्ते दामों पर?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर: मिठाईवाला वास्तव में एक अत्यंत धनी और प्रतिष्ठित परिवार का व्यक्ति था, जिसने अपने बच्चों और पत्नी को खो दिया था। वह बच्चों में अपने खोए हुए बच्चों की छवि और हँसी तलाशता था। वह अलग-अलग चीजें इसलिए लाता था ताकि बच्चे एक ही वस्तु से ऊब न जाएँ और हर बार उसके पास दौड़कर आएँ। वह सामान बहुत सस्ते दामों में (कभी-कभी घाटा सहकर भी) इसलिए बेचता था क्योंकि उसका उद्देश्य लाभ कमाना नहीं था, बल्कि बच्चों का सान्निध्य पाकर अपने दुखी हृदय को ढाढ़स और संतोष पहुँचाना था।
उदाहरण 2
विजय बाबू और मुरलीवाले के बीच मोल-भाव के समय हुए संवाद से दोनों के दृष्टिकोण का क्या अंतर प्रकट होता है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर: विजय बाबू एक व्यावहारिक, सांसारिक और संदेहशील ग्राहक की मानसिकता दर्शाते हैं। वे सोचते हैं कि फेरीवाले हमेशा अधिक दाम बताकर ग्राहकों पर अहसान जताते हैं। इसके विपरीत, मुरलीवाला एक स्वाभिमानी, संवेदनशील और निष्कपट व्यक्ति है। वह शालीनता से उत्तर देता है कि दुकानदार चाहे लागत मूल्य से भी कम पर सामान बेचे, ग्राहक यही सोचता है कि उसे ठगा जा रहा है। यह संवाद व्यापारी के स्वाभिमान और सांसारिक ग्राहकों की संकीर्ण सोच के अंतर को स्पष्ट करता है।
उदाहरण 3
रोहिणी ने दादी से मिठाईवाले को आँगन में बुलाने के लिए क्यों कहा? उसने चिक (पर्दे) की ओट से ही बातचीत क्यों की?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर: रोहिणी मिठाईवाले के मीठे, दर्दभरे और परिचित स्वर से अत्यधिक प्रभावित थी। वह जानना चाहती थी कि इतना सुसंस्कृत और शालीन व्यक्ति फेरी लगाकर इतने सस्ते में चीजें क्यों बेचता है। तत्कालीन समाज में पर्दा-प्रथा का प्रचलन था, जहाँ महिलाएँ परिवार के बुजुर्गों (जैसे दादी) के माध्यम से ही बाहरी अजनबियों से संवाद करती थीं और स्वयं पर्दे (चिक) की ओट में रहती थीं। इसलिए रोहिणी ने दादी के माध्यम से उसे बुलवाया।
उदाहरण 4
“अब इस बार ये पैसे न लूँगा”—कहानी के अंत में मिठाईवाले ने ऐसा क्यों कहा?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर: कहानी के अंत में जब मिठाईवाला अपने अतीत का दुखद वृत्तांत सुनाता है, तो उसके हृदय का सारा दबा हुआ दर्द आँसुओं के रूप में बह निकलता है। उसी समय चुन्नू-मुन्नू आकर उसकी गोद में मिठाई की पुड़िया माँगते हैं। मिठाईवाला दोनों बच्चों को मिठाई की पुड़िया थमा देता है। जब रोहिणी पैसे देती है, तो वह पैसे लेने से मना कर देता है क्योंकि उन बच्चों के स्पर्श और अपनत्व ने उसे वह असीम वात्सल्य सुख दे दिया था, जिसकी तुलना में कोई भी धन तुच्छ था।
उदाहरण 5
‘मिठाईवाला’ कहानी से हमें क्या नैतिक और मानवीय संदेश मिलता है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर: ‘मिठाईवाला’ कहानी हमें यह महान संदेश देती है कि व्यक्तिगत दुखों और त्रासदियों में घुट-घुट कर जीने की बजाय मनुष्य को अपने स्नेह और करुणा का दायरा विस्तृत करना चाहिए। दूसरों के आंसुओं को पोंछना और नन्हें बच्चों में खुशियाँ बाँटना जीवन का सर्वोच्च आनंद है। सच्चा धन भौतिक संपत्ति में नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना और निस्वार्थ प्रेम में निहित है।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

मिठाईवाले को एक साधारण और लालची व्यापारी समझ लेना!

सही वैज्ञानिक तथ्य

मिठाईवाला कोई साधारण लालची व्यापारी नहीं था, बल्कि वह एक संपन्न, स्वाभिमानी और वात्सल्य का भूखा पिता था जो केवल बच्चों की खुशी के लिए फेरी लगाता था।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

कहानी के रचनाकार का नाम प्रेमचंद या महादेवी वर्मा लिख देना!

सही वैज्ञानिक तथ्य

इस कहानी के लेखक भगवती प्रसाद वाजपेयी हैं (प्रेमचंद ने ‘ईदगाह’ और महादेवी वर्मा ने ‘गिल्लू’ लिखा है)।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

‘चिक’ शब्द का अर्थ चिकनाई या तेल समझ लेना!

सही वैज्ञानिक तथ्य

‘चिक’ एक आंचलिक/देशज शब्द है जिसका अर्थ बाँस की तीलियों का पर्दा होता है, जिसका उपयोग घरों में पर्दे के रूप में किया जाता था।

चित्रात्मक व्याख्या एवं मॉडल

पाठ 3: मिठाईवाला — वात्सल्य, करुणा एवं त्याग की त्रिवेणी 1 खिलौनेवाला • मधुर स्नेहासिक्त गान • दो-दो पैसे में सुंदर खिलौने • बच्चों में कौतूहल व दौड़ [मासूम आकर्षण] 2 मुरलीवाला • बाँसुरी की मनमोहक तान • विजय बाबू से संवाद • स्वाभिमान व शालीनता [आंतरिक गहराई] 3 मिठाईवाला • अतीत का मार्मिक उद्घाटन • खोए बच्चों की तलाश • अंत में पैसे लेने से इंकार [सर्वोच्च वात्सल्य]

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
कहानीकार भगवती प्रसाद वाजपेयी द्वारा रचित ‘मिठाईवाला’ एक अत्यंत भावुक और मार्मिक मानवीय कहानी है।
मुख्य बिंदु 2
नायक एक संपन्न प्रतिष्ठित व्यक्ति था, जिसके हँसते-खेलते परिवार (पत्नी व दो बच्चे) का असमय दुःखद अंत हो गया था।
मुख्य बिंदु 3
वह अपने असीम पुत्र-वियोग को मिटाने के लिए नगर के बच्चों में अपने संतानों की छवि खोजने निकलता है।
मुख्य बिंदु 4
प्रथम रूप में वह खिलौनेवाला बनकर बच्चों को दो-दो पैसे में मनमोहक खिलौने देकर आकर्षित करता है।
मुख्य बिंदु 5
आठ महीने पश्चात वह मुरलीवाला बनकर लौटता है और अपनी सुरीली तान तथा शालीन स्वभाव से सबका मन मोह लेता है।
मुख्य बिंदु 6
शीतकाल में वह मिठाईवाला बनकर आता है, जहाँ रोहिणी चिक के पीछे से दादी के जरिए उसका परिचय जानने का प्रयास करती है।
मुख्य बिंदु 7
मिठाईवाला अपने आँसू पोंछते हुए अपने अतीत, धन-वैभव और बच्चों की यादों का रहस्य खोलता है।
मुख्य बिंदु 8
वह स्पष्ट करता है कि उसका उद्देश्य धनार्जन नहीं, बल्कि बच्चों के हँसते चेहरों में अपने बच्चों की झलक पाकर आत्मसंतोष पाना है।
मुख्य बिंदु 9
अंत में चुन्नू-मुन्नू को मिठाई देते हुए वह पैसे लेने से मना कर देता है, जो उसके निष्काम वात्सल्य का प्रमाण है।
मुख्य बिंदु 10
कहानी पाठकों को सिखाती है कि दूसरों के दुखों को अपनाना और स्नेह बाँटना ही मनुष्य जीवन की सार्थकता है।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
मिठाईवाला बच्चों को सामान बेचने के पीछे क्या मुख्य उद्देश्य रखता था?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: बच्चों की किलकारियों और प्रसन्नता में अपने खोए हुए बच्चों की झलक पाना और आत्मिक शांति प्राप्त करना।
उसका लक्ष्य व्यापारिक लाभ कमाना कभी नहीं था, वह वात्सल्य की तृप्ति के लिए फेरी लगाता था।
2
कहानी में ‘चिक’ शब्द का क्या अर्थ है और इसका उपयोग किस सामाजिक व्यवस्था को दर्शाता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: ‘चिक’ का अर्थ बाँस की तीलियों का पर्दा है, जो तत्कालीन पर्दा-प्रथा को दर्शाता है।
रोहिणी बाहरी फेरीवाले से सीधे मिलने की बजाय चिक की ओट में रहकर दादी के माध्यम से बात करती है।
3
विजय बाबू ने मुरलीवाले पर क्या आरोप लगाया था?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: फेरीवालों द्वारा झूठा अहसान जताने और सबको कम दाम में देकर स्वयं को दानी दिखाने का आरोप लगाया।
विजय बाबू की सोच सांसारिक नफा-नुकसान और अविश्वास पर आधारित थी।
4
मिठाईवाले के कितने बच्चे थे और उनके स्वभाव की क्या विशेषता थी?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: उसके दो छोटे बच्चे थे जो सोने के सजीव खिलौनों जैसे सुंदर और चंचल थे।
मिठाईवाला चुन्नू-मुन्नू को देखकर अपने उन्हीं दोनों मासूम बच्चों का स्मरण करता था।
5
इस कहानी से छात्रों को क्या नैतिक सीख प्राप्त होती है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: व्यक्तिगत दुखों को भुलाकर परोपकार, वात्सल्य और दूसरों के जीवन में खुशियाँ बाँटने की सीख मिलती है।
मिठाईवाला अपने महान त्याग और अगाध प्रेम से समाज के सामने संवेदना का आदर्श प्रस्तुत करता है।
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