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झारखण्ड बोर्ड (JAC) • कक्षा 7 • Hindi (भाषा मंजरी-7) • अध्याय 16
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

तुम कल्पना करो

प्रसिद्ध राष्ट्रप्रेमी कवि गोपालसिंह ‘नेपाली’ द्वारा रचित ओजस्वी एवं जाग्रति-गीत “तुम कल्पना करो” देश के नवयुवकों और विद्यार्थियों को रूढ़ियों, संकीर्णताओं और दासता के बंधनों को तोड़कर एक नए भारत के निर्माण की कल्पना और सृजन करने का तेजस्वी आह्वान करता है। कवि स्पष्ट करते हैं कि बिना कल्पना के कोई नया विचार जन्म नहीं लेता, और बिना नए विचार के युग-परिवर्तन संभव नहीं है। सदियों की राजनीतिक और मानसिक गुलामी के बाद जो स्वतंत्रता हमें मिली है, उसे संवारने के लिए पुराने सड़े-गले ढाँचों को ढहाना होगा और नवीन समाज की रचना करनी होगी। कवि युवाओं की भुजाओं में पौरुष, आँखों में सपने और हृदय में राष्ट्र-भक्ति की अग्नि देखना चाहते हैं। यह कविता प्रत्येक विद्यार्थी को अपने आत्मविश्वास को जगाकर नए युग का शिल्पी बनने की अमर प्रेरणा देती है।

क्या केवल सपने देखने से संसार बदल सकता है, या कल्पना ही हर महान आविष्कार की पहली सीढ़ी होती है?

हवाई जहाज बनने से पहले राइट बंधुओं ने आकाश में पक्षी की तरह उड़ने की ‘कल्पना’ की थी। चाँद पर कदम रखने से पहले वैज्ञानिकों ने वहाँ पहुँचने की कल्पना की थी! कवि गोपालसिंह ‘नेपाली’ कहते हैं कि यदि तुम्हारे पास नई कल्पनाएँ नहीं हैं, तो तुम वही पुराना इतिहास दोहराते रहोगे। उठो, जंजीरें तोड़ो और उस नए भारत की कल्पना करो जहाँ कोई भूखा न हो, कोई परतंत्र न हो और हर मस्तक स्वाभिमान से ऊँचा हो!

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

यह कविता विद्यार्थियों में रचनात्मक चिंतन, नव-सृजन की क्षमता, ओज, निर्भीकता और राष्ट्रीय पुनर्निर्माण का संकल्प जगाती है। यह पुरानी लकीरों को पीटने के बजाय नवीन मार्ग तलाशने और सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने के लिए तार्किक सोच का विकास करती है।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • कवि गोपालसिंह ‘नेपाली’ के राष्ट्रभक्ति पूर्ण काव्य-सरोकारों से सामान्य परिचय।
  • ‘कल्पना’ (Creative Imagination) और ‘कर्म’ (Action) के पारस्परिक संबंध की समझ।
  • भारत के स्वाधीनता-प्राप्ति के बाद नवनिर्माण की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का बोध।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • विद्यार्थी कविता का ओजस्वी एवं सस्वर पाठ करने में सक्षम होंगे।
  • सृजनशील कल्पनाशीलता और व्यावहारिक पुरुषार्थ के अंतर्संबंध का विश्लेषण कर सकेंगे।
  • राष्ट्र-निर्माण में युवाओं की ऐतिहासिक भूमिका और उत्तरदायित्व को समझ सकेंगे।
  • कविता में प्रयुक्त तुकांत पदावली, ओज गुण और अनुप्रास अलंकार का व्याकरणिक अध्ययन कर सकेंगे।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. कविता का सप्रसंग भावार्थ एवं नवन...
2 2. शब्दार्थ तालिका, काव्य-शिल्प एवं...
3 3. कल्पना और कर्म: द्वैत का समन्वय
4 4. भाषा की बात: विलोम शब्द, अनुप्रा...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. कविता का सप्रसंग भावार्थ एवं नवनिर्माण का शंखनाद

कवि युवाओं को संबोधित करते हुए कहते हैं कि पुरानी परिपाटियों को छोड़कर नूतन युग का निर्माण करो:

क. पुरानी जंजीरों को तोड़ना: मानसिक दासता से मुक्ति

कवि कहते हैं—“तुम कल्पना करो, नवीन कल्पना करो! / धरी हुई जंजीर जो समाज की उतार दो / पुरानी रीतियों को छोड़ दो, सुधार दो।” सदियों से हमारा समाज जाति-पाँति, छुआछूत और दकियानूसी परंपराओं की बेड़ियों में जकड़ा हुआ था। कवि युवाओं को झकझोरते हुए कहते हैं कि समाज के गले में पड़ी इन सड़ चुकी जंजीरों को उतार फेंको। जब तक पुरानी रूढ़ियाँ नहीं टूटेंगी, तब तक नवजीवन का सूर्योदय नहीं हो सकता।

ख. नए समाज और नए राष्ट्र का भव्य स्वप्न

कवि आह्वान करते हैं कि एक ऐसे समाज की कल्पना करो जहाँ ज्ञान, न्याय और समता का राज्य हो। जहाँ कोई अकिंचन या दीन-हीन न हो। अपने हाथों के पौरुष से बंजर धरती को उपजाऊ बनाओ, कारखानों और खेतों में श्रम की नई इबारत लिखो। कल्पना केवल खयाली पुलाव पकाना नहीं है, बल्कि वह नए भविष्य का खाका तैयार करना है जिसे भुजाओं के बल से साकार करना है।

ग. काल के प्रवाह को मोड़ देने की युवा शक्ति

कविता के अंतिम चरणों में कवि युवाओं को याद दिलाते हैं कि इतिहास का रुख हमेशा युवाओं के संकल्प ने मोड़ा है। यदि युवा पीढ़ी जाग्रत हो जाए, तो वह समय की धारा को भी बदल सकती है। अतः हे देश के तरुणो! निराशा और आलस्य को त्यागो और एक स्वर्णिम युग की रचना के लिए अपनी कल्पनाओं को पंख दो।

2. शब्दार्थ तालिका, काव्य-शिल्प एवं ओजगुण

कविता में प्रयुक्त तत्सम एवं ओजस्वी शब्दों का अध्ययन:

काव्य शब्द व्याकरणिक भेद सटीक अर्थ काव्य संदर्भ
नवीन विशेषण (तत्सम) नया, आधुनिक, मौलिक नवीन कल्पना करो (नए विचारों का सृजन)।
रीति संज्ञा (तत्सम) परंपरा, प्रथा, कार्य करने का ढंग पुरानी कुंद रीतियों को त्याग देना चाहिए।
पौरुष भाववाचक संज्ञा (तत्सम) पराक्रम, पुरुषार्थ, वीरता, सामर्थ्य युवाओं को अपने पौरुष से देश गढ़ना है।
शिल्पी संज्ञा (तत्सम) कलाकार, मूर्तिकार, निर्माता विद्यार्थी राष्ट्र के नए शिल्पी हैं।
तरुण विशेषण / संज्ञा (तत्सम) युवा, नवयुवक, किशोर हे तरुण! उठो और नया युग रचो।

3. कल्पना और कर्म: द्वैत का समन्वय

कवि केवल काल्पनिक लोक में उड़ने की बात नहीं करते, वे कल्पना को कर्म की आधारशिला बताते हैं:

कल्पना का पक्ष (विचार)

• नई दृष्टि और लीक से हटकर सोचने का साहस।
• रूढ़ियों और दकियानूसी बंधनों का मानसिक बहिष्कार।
• एक समतामूलक, सुंदर और शक्तिशाली भारत का खाका।
• सृजनशीलता का पहला आंतरिक स्फुलिंग (चिनगारी)।

कर्म का पक्ष (पुरुषार्थ)

• कल्पना को वास्तविक धरातल पर उतारने का कठिन परिश्रम।
• खेतों, उद्योगों और विज्ञान में पसीना बहाना।
• देश की सीमाओं की रक्षा और समाज-सुधार में सक्रियता।
• कोरी बातों के स्थान पर परिणाममूलक कार्य।

4. भाषा की बात: विलोम शब्द, अनुप्रास एवं पुनरुक्ति प्रकाश

काव्यगत एवं व्याकरणिक सौंदर्य:

क. महत्वपूर्ण विलोम शब्द
  • नवीन ↔ प्राचीन/पुरातन
  • कल्पना ↔ यथार्थ/वास्तविकता
  • सुधार ↔ बिगाड़/पतन
  • तरुण ↔ वृद्ध
ख. काव्य रस एवं अलंकार

कविता में वीर रस का संचार है और ओज काव्य-गुण विद्यमान है। ‘नवीन कल्पना करो’, ‘रीतियाँ सुधार दो’ में अनुप्रास की सुंदर छटा है।

महत्वपूर्ण काव्य-सिद्धांत, भावार्थ एवं व्याकरण सूत्र

युग-परिवर्तन का महामंत्र
मौलिक कल्पना (दृष्टि) + कठोर पुरुषार्थ (कर्म) = नूतन युग का सृजन
बिना नई सोच के समाज का विकास संभव नहीं हो सकता।
कवि परिचय
गोपालसिंह ‘नेपाली’ (1911 - 1963)
छायावादोत्तर काल के प्रसिद्ध गीतकार एवं राष्ट्रभक्त कवि (रचनाएँ: उमंग, पंछी, रागिनी)।
विलोम सूत्र
नवीन (नया) ↔ पुरातन (पुराना) || तरुण (युवा) ↔ वृद्ध
कविता पुरातन रूढ़ियों को त्यागकर नवीन आदर्शों को अपनाने की प्रेरणा देती है।
काव्य रस व गुण
वीर रस (उत्साह) + ओज गुण + प्रेरणादायक उद्बोधन शैली
यह कविता युवाओं के सुप्त स्वाभिमान को जगाने वाला अमर गीत है।
शिल्पी शब्द की सार्थकता
शिल्प (कला/निर्माण) + ई (प्रत्यय) = शिल्पी (निर्माता)
देश के युवा ही भारत के नए भविष्य के सच्चे शिल्पी हैं।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
“तुम कल्पना करो” कविता में कवि गोपालसिंह ‘नेपाली’ ने युवाओं को क्या करने का आह्वान किया है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर: कवि ने देश के युवाओं को पुरानी, सड़ी-गली रीतियों और मानसिक दासता की जंजीरों को तोड़कर एक नए, समतामूलक और गौरवशाली भारत की नवीन कल्पना करने का आह्वान किया है। वे चाहते हैं कि युवा लकीर के फकीर न बनें, बल्कि अपने पौरुष और मौलिक विचारों से समाज में क्रांति लाएँ और देश के नवनिर्माण के अग्रदूत बनें।
उदाहरण 2
कवि समाज की किन ‘जंजीरों’ को उतार फेंकने की बात कर रहे हैं?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर: कवि उन सामाजिक रूढ़ियों, जाति-पाँति, छुआछूत, अंधविश्वास, अशिक्षा और मानसिक हीनभावना की जंजीरों को उतार फेंकने की बात कर रहे हैं जो सदियों से हमारे समाज की प्रगति में बाधक बनी हुई थीं। ये जंजीरें मनुष्य की स्वतंत्र सोच और सृजनशीलता का गला घोंटती हैं।
उदाहरण 3
“कल्पना ही हर महान आविष्कार की जननी है”—इस कथन की पुष्टि कविता के आधार पर कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर: कविता स्पष्ट करती है कि संसार में जितने भी बड़े परिवर्तन, क्रांति या वैज्ञानिक आविष्कार हुए हैं, वे पहले किसी मानव मस्तिष्क की कल्पना में ही उत्पन्न हुए थे। जब तक कोई व्यक्ति वर्तमान से आगे बढ़कर भविष्य के सुंदर स्वरूप की कल्पना नहीं करता, तब तक वह उसे पाने का प्रयास नहीं कर सकता। कल्पना विचारों को दिशा देती है और कर्म उन्हें साकार करता है।
उदाहरण 4
कवि युवाओं को ‘राष्ट्र का शिल्पी’ क्यों मानते हैं?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर: जिस प्रकार एक कुशल शिल्पी (मूर्तिकार) पत्थर को तराशकर एक अत्यंत सुंदर और सजीव मूर्ति का निर्माण करता है, उसी प्रकार देश के युवा अपनी प्रतिभा, ज्ञान, ऊर्जा और कर्मठता से एक पिछड़े समाज को तराशकर उसे एक समृद्ध, शक्तिशाली और सभ्य राष्ट्र का रूप दे सकते हैं। इसलिए युवा ही राष्ट्र के सच्चे शिल्पी हैं।
उदाहरण 5
‘नवीन’ और ‘तरुण’ शब्दों के दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर:
• नवीन: नया, नूतन, आधुनिक, नव्य।
• तरुण: युवा, नवयुवक, किशोर, नौजवान।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

‘कल्पना करो’ का अर्थ केवल दिवास्वप्न देखना या खयाली पुलाव पकाना समझ लेना!

सही वैज्ञानिक तथ्य

यहाँ कल्पना का अर्थ निष्क्रिय सपना देखना नहीं, बल्कि भविष्य के नवनिर्माण की क्रांतिकारी दृष्टि (Creative Vision) विकसित करना है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

कवि का नाम गोपालदास ‘नीरज’ लिख देना!

सही वैज्ञानिक तथ्य

इस कविता के रचयिता गोपालसिंह ‘नेपाली’ हैं, गोपालदास ‘नीरज’ नहीं।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

‘नवीन’ का विलोम ‘नया’ लिख देना!

सही वैज्ञानिक तथ्य

नवीन का विलोम पुरातन या प्राचीन होता है (‘नया’ तो नवीन का समानार्थी है)।

चित्रात्मक व्याख्या एवं मॉडल

पाठ 16: तुम कल्पना करो — युवा चेतना, रूढ़ि-मुक्ति एवं नव-सृजन का आह्वान 1 रूढ़ियों का भंजन • समाज की जंजीरें तोड़ना • पुरानी कुंद रीतियों का त्याग • मानसिक दासता से मुक्ति [अतीत के बंधनों का अंत] 2 नवीन कल्पना (दृष्टि) • समतामूलक समाज का स्वप्न • मौलिक विचारों का प्रादुर्भाव • भविष्य की स्वर्णिम रूपरेखा [सृजन का वैचारिक आधार] 3 पौरुष व राष्ट्र-निर्माण • भुजाओं के बल से नव-सृजन • समय की धारा मोड़ना • युवा शक्ति ही राष्ट्र-शिल्पी [अजेय भारत की स्थापना]

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
‘तुम कल्पना करो’ राष्ट्रकवि गोपालसिंह ‘नेपाली’ द्वारा रचित एक तेजस्वी एवं जाग्रति-पूर्ण प्रेरणा-गीत है।
मुख्य बिंदु 2
कवि देश के नवयुवकों से अतीत की रूढ़ियों और संकीर्णताओं को त्यागकर नवीन विचारों को अपनाने का आह्वान करते हैं।
मुख्य बिंदु 3
समाज के गले में पड़ी पुरानी जंजीरों (जाति-भेद, अंधविश्वास, छुआछूत) को तोड़ना ही सच्ची स्वतंत्रता है।
मुख्य बिंदु 4
कवि स्पष्ट करते हैं कि बिना कल्पना के किसी भी महान परिवर्तन या क्रांति की शुरुआत नहीं हो सकती।
मुख्य बिंदु 5
कल्पना केवल स्वप्न देखना नहीं है, बल्कि वह नए और उन्नत भारत की रचना का वैचारिक खाका है।
मुख्य बिंदु 6
युवाओं को अपने पौरुष और कठिन परिश्रम से उस स्वर्णिम कल्पना को धरातल पर साकार करना होगा।
मुख्य बिंदु 7
इतिहास गवाह है कि जब-जब युवा पीढ़ी जाग्रत हुई है, उसने समय के प्रवाह को भी अपनी दिशा में मोड़ दिया है।
मुख्य बिंदु 8
विद्यार्थी और युवा ही नए भारत के वास्तविक शिल्पी (निर्माता) हैं।
मुख्य बिंदु 9
कविता में वीर रस का संचार है तथा भाषा ओज गुण से संपन्न, लयात्मक और प्रेरणादायी है।
मुख्य बिंदु 10
यह पाठ प्रत्येक पाठक में आत्मविश्वास, निर्भीकता और राष्ट्र-सेवा की पवित्र भावना जाग्रत करता है।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
‘तुम कल्पना करो’ कविता के रचयिता कौन हैं?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: गोपालसिंह ‘नेपाली’।
वे हिंदी के प्रसिद्ध गीतकार और राष्ट्रभक्त कवि थे।
2
कवि समाज की किन जंजीरों को उतारने की बात कर रहे हैं?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: पुरानी रूढ़ियों, अंधविश्वासों, जाति-भेद और मानसिक दासता की जंजीरों को।
ये संकीर्ण परंपराएँ समाज के विकास में सबसे बड़ा रोड़ा हैं।
3
कवि के अनुसार नए भारत के निर्माण के लिए क्या अनिवार्य है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: मौलिक एवं नवीन कल्पना तथा उसे साकार करने वाला कठिन पुरुषार्थ (कर्म)।
विचार और कर्म के संगम से ही नया समाज बन सकता है।
4
कविता का प्रधान रस और काव्य-गुण क्या है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: प्रधान रस वीर रस है और काव्य-गुण ओज गुण है।
यह कविता पाठकों में जोश, उत्साह और राष्ट्रीय दायित्व का संचार करती है।
5
‘नवीन’ शब्द का विलोम शब्द क्या है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: प्राचीन (या पुरातन)।
नवीन का अर्थ नया और प्राचीन का अर्थ पुराना होता है।
अध्याय का अध्ययन पूर्ण हुआ?
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