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झारखण्ड बोर्ड (JAC) • कक्षा 7 • Hindi (भाषा मंजरी-7) • अध्याय 4
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

खुशबू रचते हैं हाथ

प्रस्तुत सशक्त, यथार्थवादी एवं प्रगतिशील कविता “खुशबू रचते हैं हाथ” समकालीन हिंदी कविता के प्रमुख हस्ताक्षर अरुण कमल द्वारा रचित है। यह कविता हमारे समाज के उस गहरे अंतर्विरोध और विडंबना को उजागर करती है जहाँ देश-दुनिया को महकाने वाली सुगंधित अगरबत्तियाँ बनाने वाले श्रमजीवी लोग स्वयं अत्यंत नारकीय, दुर्गंधयुक्त और अभावग्रस्त बस्तियों में जीने को विवश हैं। कूड़े-करकट के ढेरों, गंदे नालों और बदबूदार तंग गलियों में रहकर फटे-कटे, जख्मी हाथों से सुगंध का निर्माण करने वाले ये मजदूर सामाजिक उपेक्षा और आर्थिक शोषण के शिकार हैं। कवि ने कविता के माध्यम से श्रम के सौंदर्य, श्रमजीवियों की गरिमा और सामाजिक विषमता पर गहरा क्षोभ व्यक्त किया है।

जो हाथ पूरी दुनिया को महकाते हैं, वे स्वयं इतनी भयानक बदबू और तंग बस्तियों में क्यों रहते हैं?

जब आप अपने घर, देवालय या पूजा-स्थल में चंदन, गुलाब और केवड़े की खुशबूदार अगरबत्ती जलाते हैं, तो क्या आपने कभी सोचा है कि इसे बनाने वाले हाथ कैसे हैं? वे हाथ हैं उभरी नसों वाले बुजुर्गों के, घिसे नाखूनों वाले बच्चों के, और जख्मों से फटे हुए कोमल हाथों के! वे ऐसी अंधेरी गलियों और बदबूदार नालों के किनारे बैठते हैं जहाँ सामान्य मनुष्य एक क्षण भी सांस नहीं ले सकता। यह कविता समाज की इसी दारुण सच्चाई पर तीखा प्रहार करती है।

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

यह कविता विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर समाज के उपेक्षित एवं शोषित वर्ग के प्रति संवेदनशील बनाती है। यह बाल-श्रम, असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के कष्टों और सामाजिक विषमता के प्रति छात्रों में विचारशीलता और मानवीय करुणा का संचार करती है। यह श्रम की महत्ता को रेखांकित करते हुए एक समतामूलक समाज के निर्माण की प्रेरणा देती है।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • अगरबत्ती निर्माण उद्योग एवं कुटीर उद्योगों की सामान्य जानकारी।
  • सामाजिक विषमता, गरीबी और बस्तियों (झुग्गी-झोपड़ियों) की जीवनशैली का प्राथमिक बोध।
  • कविता में प्रयुक्त बिंबों और प्रतीकों (खुशबू, गंदे नाले, उभरी नसें) को ग्रहण करने की क्षमता।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • विद्यार्थी कवि अरुण कमल की यथार्थवादी एवं सामाजिक सरोकारों से युक्त काव्य-शैली को समझ सकेंगे।
  • कविता में निहित तीखे व्यंग्य और सामाजिक अंतर्विरोध को पहचान सकेंगे।
  • श्रमजीवियों के शारीरिक व आर्थिक संघर्ष तथा बाल-श्रम की समस्याओं का विश्लेषण कर सकेंगे।
  • कविता में प्रयुक्त विशेषणों, तुकांत शब्दों और मुहावरेदार भाषा का व्याकरणिक प्रयोग सीख सकेंगे।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. कविता का सप्रसंग भावार्थ एवं साम...
2 2. शब्दार्थ, शिल्प-सौंदर्य एवं प्रत...
3 3. काव्यात्मक शिल्प एवं उपमा अलंकार...
4 4. भाषा की बात: विलोम शब्द, तुकबंदी...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. कविता का सप्रसंग भावार्थ एवं सामाजिक अंतर्विरोध

कवि अरुण कमल ने कविता को अत्यंत साधारण बोलचाल की भाषा में लिखा है, किंतु इसके भीतर छिपा सामाजिक यथार्थ अत्यंत गहरा और झकझोर देने वाला है:

क. गंदे नालों और कूड़े के ढेरों के बीच का परिवेश

कविता की शुरुआत ही उस नारकीय वातावरण के चित्रण से होती है जहाँ अगरबत्ती बनाने वाले कारीगर रहते हैं—“कई गलियों के बीच / कई नालों के पार / कूड़े-करकट के ढेरों के बाद / बदबू से फटते जाते इस टोले के अंदर / खुशबू रचते हैं हाथ।” कवि बताते हैं कि शहर के जिस हिस्से में कचरे के पहाड़ लगे हैं और गंदे नालों की सड़ांध से सिर फटा जा रहा है, उसी घृणित और बदबूदार टोले में यह अनूठा चमत्कार घटित होता है कि वहाँ दुनिया की सबसे मनमोहक खुशबू गढ़ी जाती है।

ख. हाथों की विभिन्नता: उम्र और शोषण का सजीव बिंब

कवि ने अगरबत्ती निर्माण में लगे मजदूरों के हाथों का सूक्ष्म और कारुणिक अवलोकन किया है:

  • उभरी नसों वाले हाथ: यह वृद्ध और कमजोर मजदूरों के हाथ हैं, जिनकी उम्र भर की मेहनत ने उनकी नसों को चमड़ी से बाहर उभार दिया है।
  • घिसे नाखूनों वाले हाथ: यह उन अभागे बच्चों और किशोरों के हाथ हैं जो लगातार तीलियों पर मसाला लपेटते-लपेटते अपने नाखूनों को घिस चुके हैं।
  • पीपल के पत्ते से नए-नए हाथ: यह अत्यंत छोटे, मासूम और कोमल बच्चों के हाथ हैं, जिन्हें खेलने-पढ़ने की उम्र में रोटी के लिए भट्टी जैसी जिंदगी में झोंक दिया गया है।
  • जूही की डाल से खुशबूदार हाथ: यह युवतियों और महिलाओं के हाथ हैं जो स्वयं सुंदर और सुगंधित होकर भी अंधकारमय भविष्य ढो रही हैं।
  • जख्म से फटे हुए हाथ: रासायनिक मसालों और बाँस की खपच्चियों से छलनी हुए घायल हाथ, जो पीड़ा सहकर भी दूसरों के लिए सुगंध बनाते हैं।

ग. सामाजिक विडंबना और अनुत्तरित प्रश्न

कविता के अंतिम अंश में कवि एक कड़वा प्रश्न छोड़ते हैं—“यहीं इस गली में बनती हैं / मुल्क की मशहूर अगरबत्तियाँ / गंदे मुहल्लों के गंदे लोग / बनाते हैं केवड़ा, गुलाब, खस और रातरानी अगरबत्तियाँ!” समाज जिन्हें “गंदे लोग” कहकर दुत्कारता है और अलग-थलग बस्तियों में छोड़ देता है, वही लोग पूरे मुल्क को रातरानी और केवड़े की महक से सराबोर करते हैं। यह कविता का केंद्रीय व्यंग्य है।

2. शब्दार्थ, शिल्प-सौंदर्य एवं प्रतीक-योजना

कविता में प्रयुक्त शब्द सीधे और सपाट लगते हैं, किंतु वे गहरे प्रतीकात्मक अर्थ वहन करते हैं:

कठिन शब्द व्याकरणिक प्रकृति सटीक अर्थ काव्य संदर्भ
टोला संज्ञा (देशज) मुहल्ला, छोटी बस्ती, जाति या पेशे का इलाका बदबू से भरे टोले में मजदूर रहते हैं।
कूड़ा-करकट संज्ञा (युग्म शब्द) कचरा, व्यर्थ की फेंकी हुई वस्तुएँ बस्ती के चारों ओर कचरे का ढेर लगा है।
मुल्क संज्ञा (विदेशज/अरबी) देश, राष्ट्र, वतन यहाँ पूरे मुल्क की मशहूर अगरबत्तियाँ बनती हैं।
खस संज्ञा (तत्सम) एक सुगंधित घास जिसकी जड़ से इत्र बनता है खस की खुशबूदार अगरबत्ती का निर्माण।
रातरानी संज्ञा (तद्भव) रात में खिलने वाला अत्यंत तीव्र सुगंधित पुष्प अगरबत्ती का एक लोकप्रिय सुगंधित प्रकार।
रचना क्रिया सृजन करना, निर्माण करना, बनाना खुशबू रचते हैं हाथ (सृजन की क्रिया)।

3. काव्यात्मक शिल्प एवं उपमा अलंकारों का सौंदर्य

कवि अरुण कमल ने मजदूरों के विभिन्न हाथों की तुलना प्रकृति के विविध उपादानों से की है, जिससे कविता में अद्भुत चित्रात्मकता आ गई है:

1. “पीपल के पत्ते से नए-नए हाथ”

यहाँ उपमा अलंकार है। पीपल का नया पत्ता अत्यंत सुकोमल, चिकना और हल्का लालिमायुक्त होता है। कवि ने छोटे-छोटे अबोध बाल-मजदूरों के कोमल हाथों की तुलना पीपल की नई कोपलों से की है, जो बाल-श्रम की अमानवीयता को उजागर करता है।

2. “जूही की डाल से खुशबूदार हाथ”

यहाँ भी उपमा अलंकार है। जूही की डाल नाजुक और फूलों से सुवासित होती है। यह उपमा किशोरियों और युवतियों के कोमल व सुगंधित हाथों के लिए प्रयुक्त हुई है, जो विषैले माहौल में भी अपनी गरिमा बनाए हुए हैं।

4. भाषा की बात: विलोम शब्द, तुकबंदी एवं पुनरुक्ति प्रकाश

कविता में प्रयुक्त व्याकरणिक विशेषताओं का विश्लेषण निम्नलिखित है:

क. परस्पर विरोधी (विलोम) बिंबों का अद्भुत संगम

कवि ने कविता को शक्तिशाली बनाने के लिए विरोधी अर्थ वाले शब्दों को आमने-सामने रखा है:

खुशबू ↔ बदबू, गंदे नाले ↔ सुगंधित अगरबत्ती, फटे-कटे हाथ ↔ सुंदर निर्माण। यह विरोध समाज के खोखलेपन को स्पष्ट करता है।

ख. पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार

जब एक ही शब्द की आवृत्ति बिना अर्थ बदले केवल प्रभाव बढ़ाने के लिए हो: नए-नए हाथ। यहाँ पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है जो नवीनता और कोमलता की प्रचुरता को दर्शाता है।

महत्वपूर्ण काव्य-सिद्धांत, भावार्थ एवं व्याकरण सूत्र

कविता का केंद्रीय अंतर्विरोध
दुर्गंधयुक्त बस्तियाँ + नारकीय जीवन = विश्वस्तरीय सुगंध (अगरबत्तियाँ) का सृजन
समाज का निर्माता स्वयं सबसे दयनीय और उपेक्षित स्थिति में जीवन व्यतीत करता है।
हाथों का वर्गीकरण (सृजनकर्ता वर्ग)
उभरी नसें (वृद्ध) + घिसे नाखून (बालक) + पीपल के पत्ते (शिशु) + जूही की डाल (युवती)
परिवार की हर पीढ़ी जीवनयापन के लिए इस कठिन कुटीर श्रम में जुटी हुई है।
अलंकार सूत्र: उपमा अलंकार
उपमेय (हाथ) + वाचक शब्द (से) + उपमान (पीपल के पत्ते / जूही की डाल)
पीपल के पत्ते से नए-नए हाथ में पूर्णोपमा अलंकार की सुंदर छटा है।
सामाजिक संदेश
श्रम की प्रतिष्ठा + बाल-श्रम का उन्मूलन + सामाजिक न्याय की स्थापना
जो वर्ग समाज को सौंदर्य और सुगंध देता है, उसे सम्मान और मूलभूत सुविधाएँ मिलनी चाहिए।
विलोम युग्म
सुगंध (खुशबू) ↔ दुर्गंध (बदबू)
कविता में खुशबू जीवन के उल्लास का और बदबू सामाजिक उपेक्षा का प्रतीक है।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
“खुशबू रचते हैं हाथ” कविता का मुख्य प्रतिपाद्य (केंद्रीय भाव) अपने शब्दों में स्पष्ट कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर: इस कविता का मुख्य प्रतिपाद्य समाज में व्याप्त आर्थिक विषमता, श्रमजीवियों के शोषण और बाल-श्रम की अमानवीय स्थिति को उजागर करना है। कवि यह दिखाते हैं कि दुनिया को सुगंधित करने वाली अगरबत्तियाँ बनाने वाले कारीगर स्वयं घोर नारकीय, बदबूदार और अस्वच्छ बस्तियों में रहते हैं। यह कविता शोषित मजदूरों के प्रति गहरी सहानुभूति प्रकट करती है और समाज से प्रश्न करती है कि दुनिया को महकाने वालों का अपना जीवन बदबू और अभावों में क्यों डूबा हुआ है?
उदाहरण 2
कविता में किस-किस प्रकार के हाथों का उल्लेख किया गया है और वे किन वर्गों का प्रतिनिधित्व करते हैं?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर: कविता में पाँच प्रकार के हाथों का उल्लेख किया गया है:
1. उभरी नसों वाले हाथ: वृद्ध एवं जीवनभर खटने वाले कमजोर मजदूरों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
2. घिसे नाखूनों वाले हाथ: लगातार श्रम करते-करते नाखूनों को घिस चुके बच्चों व बाल-मजदूरों के हाथ हैं।
3. पीपल के पत्ते से नए-नए हाथ: अत्यंत छोटे, सुकोमल और मासूम बच्चों के हाथ हैं।
4. जूही की डाल से खुशबूदार हाथ: नवयुवतियों और महिलाओं के हाथ हैं।
5. कटे-पिटे जख्मी हाथ: विषम परिस्थितियों में चोट खाकर भी कार्य करते रहने वाले पीड़ित श्रमिकों के हाथ हैं।
उदाहरण 3
“गंदे मुहल्लों के गंदे लोग” कहकर कवि समाज की किस मानसिकता पर व्यंग्य कर रहे हैं?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर: उच्च और संपन्न वर्ग अक्सर झुग्गी-झोपड़ियों और तंग गलियों में रहने वाले गरीब मजदूरों को हेय दृष्टि से देखता है और उन्हें “गंदे लोग” कहकर दूर रहता है। कवि इसी पाखंडी और संवेदनहीन मानसिकता पर तीखा व्यंग्य करते हैं। वे बताते हैं कि समाज जिन्हें गंदा समझता है, वास्तव में वही लोग पूरे देश के पूजा-घरों और महलों को महकाने वाली अगरबत्तियाँ बनाते हैं। उनकी गरीबी समाज की देन है, उनका काम तो अत्यंत पवित्र और पूजनीय है।
उदाहरण 4
अगरबत्ती बनाने वाले कारीगरों के रहने का वातावरण कैसा है? इसका उनके स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ता है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर: अगरबत्ती बनाने वाले कारीगर तंग, संकरी गलियों, बदबूदार नालों और कचरे के बड़े-बड़े ढेरों के बीच बने बदबूदार टोलों में रहते हैं। वहाँ शुद्ध हवा और धूप का सर्वथा अभाव होता है। ऐसे अस्वच्छ और रासायनिक मसालों से भरे वातावरण में लगातार काम करने से मजदूरों को साँस की बीमारियाँ, दमा, त्वचा रोग और नसों की कमजोरी हो जाती है, जिससे उनका जीवनकाल समय से पहले ही समाप्त होने लगता है।
उदाहरण 5
“पीपल के पत्ते से नए-नए हाथ” पंक्ति में कौन-सा अलंकार है और कवि ने यह उपमा क्यों चुनी?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
उत्तर: इस पंक्ति में उपमा अलंकार है (वाचक शब्द ‘से’ का प्रयोग हुआ है)। कवि ने यह उपमा इसलिए चुनी क्योंकि पीपल की नई कोपलें अत्यंत सुकोमल, कोमल-तन और ताजी होती हैं। इसी प्रकार बाल-मजदूरों के हाथ भी अत्यंत कोमल, अबोध और नाजुक हैं। यह उपमा पाठकों के मन में बच्चों के प्रति करुणा और बाल-श्रम के प्रति तीव्र विरोध का भाव जगाती है।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

कविता को केवल अगरबत्ती बनाने की विधि का वर्णन समझ लेना!

सही वैज्ञानिक तथ्य

यह कविता उद्योग-वर्णन नहीं, बल्कि सामाजिक विषमता, श्रम के शोषण और मानवीय संवेदना पर आधारित एक गंभीर प्रगतिशील व्यंग्य-काव्य है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

कवि का नाम रामधारी सिंह ‘दिनकर’ या सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ लिख देना!

सही वैज्ञानिक तथ्य

इस प्रसिद्ध समकालीन कविता के रचयिता अरुण कमल हैं।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

‘खस’ शब्द को किसी बीमारी का नाम समझ लेना!

सही वैज्ञानिक तथ्य

‘खस’ एक प्रकार की प्राकृतिक सुगंधित घास (Vetiver) होती है जिसकी जड़ों का उपयोग इत्र और अगरबत्ती निर्माण में होता है।

चित्रात्मक व्याख्या एवं मॉडल

पाठ 4: खुशबू रचते हैं हाथ — सामाजिक विषमता व श्रम का यथार्थ कठोर नारकीय यथार्थ (बस्तियाँ) • गंदे नाले एवं कूड़े-करकट के ढेर • बदबू से सिर फटाते तंग टोले • उभरी नसों वाले कमजोर वृद्ध हाथ • घिसे नाखूनों वाले अभागे बच्चे • जख्मों से फटे व छिले हुए हाथ बनाम संसार को महकाती सुगंध (सृजन) • मुल्क की सबसे मशहूर अगरबत्तियाँ • केवड़ा, गुलाब, खस व रातरानी इत्र • देवालयों और घरों में पावन सुवास • पीपल के पत्तों जैसे सुकोमल हाथ • जूही की डाल से खुशबूदार हाथ

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
‘खुशबू रचते हैं हाथ’ कवि अरुण कमल द्वारा रचित एक अत्यंत संवेदनशील, यथार्थवादी एवं प्रगतिशील कविता है।
मुख्य बिंदु 2
कविता हमारे समाज में व्याप्त गहरे अंतर्विरोध और वर्ग-भेद को उजागर करती है।
मुख्य बिंदु 3
विश्वभर को सुगंधित करने वाली अगरबत्तियों का निर्माण अत्यंत गंदे, बदबूदार नालों और कूड़े के ढेरों के बीच होता है।
मुख्य बिंदु 4
अगरबत्ती निर्माण में परिवार के सभी सदस्य—वृद्ध, महिलाएँ, नवयुवतियाँ और अबोध बच्चे लगे हुए हैं।
मुख्य बिंदु 5
वृद्ध मजदूरों की नसों के उभरने का दृश्य उनके जीवनपर्यंत कठोर परिश्रम और भुखमरी का प्रतीक है।
मुख्य बिंदु 6
‘घिसे नाखूनों वाले हाथ’ और ‘पीपल के पत्ते से नए हाथ’ देश में मौजूद बाल-श्रम की ज्वलंत समस्या को सामने लाते हैं।
मुख्य बिंदु 7
‘जूही की डाल से खुशबूदार हाथ’ नवयुवतियों के संघर्ष और कोमलता का सुंदर उपमापरक चित्रण है।
मुख्य बिंदु 8
समाज जिन्हें ‘गंदे लोग’ मानकर बहिष्कृत करता है, वस्तुतः वही लोग समाज के आध्यात्मिक व भौतिक जीवन को महकाते हैं।
मुख्य बिंदु 9
कवि ने कविता के माध्यम से श्रमजीवियों को गरिमा, उचित पारिश्रमिक और स्वस्थ जीवन-वातावरण देने का आह्वान किया है।
मुख्य बिंदु 10
यह कविता विद्यार्थियों में सामाजिक उत्तरदायित्व, सहानुभूति और शोषण के विरुद्ध चेतना का निर्माण करती है।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
कविता में अगरबत्ती बनाने वाले कारीगरों की बस्तियों का क्या वातावरण बताया गया है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: गंदे नालों, कूड़े-करकट के ढेरों और असहनीय बदबू से भरी संकरी बस्तियों का वातावरण।
वे ऐसे दूषित और तंग माहौल में रहने को विवश हैं जहाँ सामान्य इंसान साँस भी नहीं ले सकता।
2
‘पीपल के पत्ते से नए-नए हाथ’ पंक्ति में कवि का क्या संकेत है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: अत्यंत छोटे, सुकोमल और अबोध बच्चों के हाथों की ओर (बाल-श्रम की ओर)।
पीपल की नई कोमल पत्तियों की तरह ये हाथ अभी मासूम हैं, जिन्हें पढ़ने की उम्र में काम पर लगाया गया है।
3
कविता में किन-किन प्रमुख सुगंधित अगरबत्तियों के नाम आए हैं?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: केवड़ा, गुलाब, खस और रातरानी अगरबत्तियों के नाम आए हैं।
ये सुगंधियाँ पूरे मुल्क के घरों और मंदिरों को महकाती हैं।
4
मजदूरों के हाथ ‘जख्म से फटे’ क्यों हो जाते हैं?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: बाँस की तीलियाँ छीलने और रासायनिक मसालों को लगातार हाथों से रगड़ने व लपेटने के कारण।
सुरक्षा उपकरणों के अभाव में कारीगरों की त्वचा कट जाती है और घाव बन जाते हैं।
5
‘खुशबू रचते हैं हाथ’ पंक्ति की बार-बार पुनरावृत्ति क्या प्रभाव उत्पन्न करती है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: यह पंक्ति कविता में टेक (स्थायी) का काम करती है और विपरीत परिस्थितियों में भी सृजन के सौंदर्य को उभारती है।
यह विरोधाभास को गहरा करती है कि घोर गंदगी में रहकर भी ये हाथ खुशबू की रचना कर रहे हैं।
अध्याय का अध्ययन पूर्ण हुआ?
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