वृक्षों को प्रकृति का सबसे उदार वरदान माना गया है। इनके योगदान को निम्नलिखित मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है:
क. पारिस्थितिक एवं पर्यावरणीय लाभ (प्राणवायु का अक्षय स्रोत)
वृक्ष दिन के समय प्रकाश-संश्लेषण (Photosynthesis) की अद्भुत रासायनिक क्रिया द्वारा सूर्य के प्रकाश, जल और वायुमंडलीय कार्बन डाई-ऑक्साइड का उपयोग करके भोजन बनाते हैं और सह-उत्पाद के रूप में शुद्ध ऑक्सीजन (प्राणवायु) विसर्जित करते हैं। एक वयस्क घना वृक्ष एक दिन में इतनी ऑक्सीजन उत्पन्न करता है जो चार व्यक्तियों के जीवन के लिए पर्याप्त होती है। इसके अतिरिक्त, वृक्ष ध्वनि प्रदूषण और धूल-कणों को रोककर प्राकृतिक अवरोधक का कार्य करते हैं।
ख. जल-चक्र, वर्षा एवं भूजल पुनर्भरण
पेड़ों की पत्तियाँ वाष्पोत्सर्जन (Transpiration) द्वारा निरंतर जलवाष्प वायुमंडल में छोड़ती हैं, जिससे हवा में नमी बनी रहती है और सघन मेघ बनकर वर्षा लाते हैं। वृक्षों की मजबूत जड़ें वर्षा के वेग को धीमा कर जल को धरती के भीतर रिसने (Percolation) में सहायता करती हैं, जिससे भूमिगत जल-स्तर (Groundwater Level) ऊँचा उठता है।
ग. मृदा संरक्षण एवं बाढ़-नियंत्रण
जंगल की मिट्टी को वृक्षों की सघन जड़ें कसकर बाँधे रखती हैं। तेज वर्षा या आँधी के समय ये उपजाऊ ऊपरी मिट्टी को बहने (Soil Erosion) से बचाती हैं। नदियों के किनारों पर लगे पेड़ जल के तीव्र प्रवाह को रोककर भयंकर बाढ़ की विभीषिका को न्यूनतम कर देते हैं।