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WBB • कक्षा XI • Mathematics • अध्याय 4
अनुमानित समय: 75 मिनट
प्रगति: अध्ययनरत

सम्मिश्र संख्याएं और द्विघात समीकरण

वास्तविक संख्या निकाय ℝ में x² + 1 = 0 जैसे अत्यंत सरल द्विघात समीकरणों का कोई वास्तविक हल संभव नहीं होता, क्योंकि किसी भी वास्तविक संख्या का वर्ग सदैव अऋणात्मक (x² ≥ 0) होता है। ऋणात्मक संख्याओं के वर्गमूल की इस बीजगणितीय सीमा को समाप्त करने के लिए गणित में काल्पनिक इकाई i (iota) का सूत्रपात किया गया, जहाँ i = √(-1) तथा i² = -1 परिभाषित है। इसी आधारशिला पर सम्मिश्र संख्या निकाय ℂ का निर्माण हुआ। किसी सम्मिश्र संख्या को मानक कार्तीय रूप में z = a + ib के रूप में व्यक्त किया जाता है, जहाँ a और b दोनों वास्तविक संख्याएँ हैं। इसमें a को वास्तविक भाग Re(z) तथा b को काल्पनिक भाग Im(z) कहा जाता है। द्विविमीय तल में सम्मिश्र संख्याओं को ज्यामितीय रूप से प्रदर्शित करने के लिए आरगैंड तल (गॉसीय तल) का उपयोग किया जाता है, जिसका क्षैतिज अक्ष वास्तविक अक्ष तथा ऊर्ध्वाधर अक्ष काल्पनिक अक्ष कहलाता है। प्रत्येक सम्मिश्र संख्या का एक निश्चित मापांक |z| = √(a² + b²) होता है जो मूलबिंदु से उसकी दूरी दर्शाता है, तथा एक निश्चित दिशा अथवा कोणांक (आयाम) Arg(z) = θ होता है। उच्चतर बीजगणित में सम्मिश्र संख्याओं को ध्रुवीय रूप z = r(cos θ + i sin θ) और ऑयलर चरघातांकी रूप z = r·e^(iθ) में व्यक्त किया जाता है। बीजगणित की आधारभूत प्रमेय यह सुनिश्चित करती है कि n-घात वाले किसी भी बहुपद समीकरण के ℂ में ठीक n मूल होते हैं, जिससे ऋणात्मक विविक्तकर वाले द्विघात समीकरणों के मूल सदैव संयुग्मी सम्मिश्र युग्मों के रूप में प्राप्त होते हैं।

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

सम्मिश्र संख्याएँ केवल सैद्धांतिक अमूर्त कल्पना नहीं हैं, बल्कि यह आधुनिक भौतिकी, विद्युत अभियांत्रिकी और उन्नत कंप्यूटिंग का अपरिहार्य आधार हैं। प्रत्यावर्ती धारा (AC सर्किट) विश्लेषण में वोल्टेज, धारा और प्रतिबाधा को सम्मिश्र फेजर के रूप में दर्शाया जाता है (Z = R + jX), जहाँ प्रतिरोध वास्तविक भाग और प्रतिघात काल्पनिक भाग होता है, जिससे जटिल अवकल समीकरण सरल बीजगणितीय जोड़-घटाव में बदल जाते हैं। क्वांटम यांत्रिकी में श्रोडिंगर का मूलभूत तरंग समीकरण अनिवार्य रूप से काल्पनिक इकाई i पर आधारित है: iℏ ∂ψ/∂t = Ĥψ। द्रव गतिकी और वैमानिकी में हवाई जहाजों के पंखों के चारों ओर वायु प्रवाह का सटीक मॉडलिंग करने के लिए सम्मिश्र फलनों की संरूप प्रतिचित्रण (Conformal Mapping) तकनीक का उपयोग किया जाता है। पश्चिम बंगाल बोर्ड (WBCHSE) कक्षा 11 की वार्षिक परीक्षा तथा WBJEE, JEE Main जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में सम्मिश्र संख्याएँ और द्विघात समीकरण सर्वाधिक अंकदायी अध्यायों में से एक है। मापांक-कोणांक के प्रगुण, डी मोइवर प्रमेय, इकाई के सम्मिश्र घनमूल (ω) तथा द्विघात समीकरणों के मूलों से संबंधित प्रश्नों से प्रतिवर्ष 4 से 8 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। इस अध्याय पर मजबूत वैचारिक पकड़ बोर्ड परीक्षा और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं में उत्कृष्ट सफलता सुनिश्चित करती है।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. सम्मिश्र संख्याओं की आवश्यकता, क...
2 2. सम्मिश्र संख्याओं का बीजगणित, गु...
3 3. आरगैंड तल, मापांक एवं मुख्य कोणा...
4 4. ध्रुवीय रूप, ऑयलर सूत्र एवं डी म...
5 5. सम्मिश्र संख्या का वर्गमूल एवं इ...
6 6. सम्मिश्र मूलों वाले द्विघात समीक...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. सम्मिश्र संख्याओं की आवश्यकता, काल्पनिक इकाई i एवं बीजगणितीय रूप

वास्तविक संख्या निकाय $\mathbb{R}$ में किसी भी वास्तविक संख्या का वर्ग कभी ऋणात्मक नहीं हो सकता ($x^2 \ge 0$)। इस कारण $x^2 + 1 = 0 \implies x^2 = -1$ जैसे समीकरणों का वास्तविक संख्याओं में कोई हल नहीं होता। इस सीमा को दूर करने के लिए स्विस गणितज्ञ लियोनार्ड ऑयलर ने ऋणात्मक संख्या के वर्गमूल को दर्शाने हेतु काल्पनिक इकाई $\mathbf{i}$ (iota) का प्रतिपादन किया।

1.1 काल्पनिक इकाई एवं $i$ की पूर्णांक घातें

काल्पनिक इकाई की मूलभूत परिभाषा:

$$\mathbf{i = \sqrt{-1}} \implies \mathbf{i^2 = -1}$$

$i$ की धनात्मक पूर्णांक घातें एक निश्चित 4-चरणीय चक्रीय क्रम का पालन करती हैं:

  • $i^1 = i$
  • $i^2 = -1$
  • $i^3 = i^2 \cdot i = (-1) \cdot i = -i$
  • $i^4 = (i^2)^2 = (-1)^2 = 1$

किसी भी पूर्णांक $n \in \mathbb{Z}$ को $4$ से भाग देने पर यूक्लिड विभाजन प्रमेयिका के अनुसार $n = 4k + r$ लिखा जा सकता है, जहाँ शेषफल $r \in \{0, 1, 2, 3\}$ है। अतः:

$$\mathbf{i^n = i^{4k+r} = (i^4)^k \cdot i^r = (1)^k \cdot i^r = i^r}$$

ऋणात्मक घातों के लिए भी यही नियम लागू होता है: $i^{-1} = \frac{1}{i} = \frac{i}{i^2} = -i$, $i^{-2} = -1$, $i^{-3} = i$, $i^{-4} = 1$।

परीक्षा की सामान्य भूल: दो धनात्मक संख्याओं के लिए $\sqrt{a}\sqrt{b} = \sqrt{ab}$ सत्य है, परंतु यदि दोनों संख्याएँ ऋणात्मक हों, तो यह नियम लागू नहीं होता! $$\sqrt{-a} \cdot \sqrt{-b} = (i\sqrt{a})(i\sqrt{b}) = i^2 \sqrt{ab} = \mathbf{-\sqrt{ab}} \neq \sqrt{(-a)(-b)} = \sqrt{ab}$$
1.2 सम्मिश्र संख्या की मानक परिभाषा

वह संख्या जिसे निम्नलिखित रूप में लिखा जा सके:

$$\mathbf{z = a + ib} \quad \text{जहाँ } a, b \in \mathbb{R} \text{ तथा } i = \sqrt{-1}$$

उसे एक सम्मिश्र संख्या (Complex Number) कहा जाता है। समस्त सम्मिश्र संख्याओं के समुच्चय को $\mathbb{C}$ द्वारा प्रदर्शित किया जाता है।

  • $\mathbf{a = \text{Re}(z)}$ को सम्मिश्र संख्या का वास्तविक भाग (Real Part) कहते हैं।
  • $\mathbf{b = \text{Im}(z)}$ को सम्मिश्र संख्या का काल्पनिक भाग (Imaginary Part) कहते हैं (ध्यान दें: $\text{Im}(z)$ वास्तविक गुणांक $b$ है, $ib$ नहीं)।
  • यदि $b = 0$ हो, तो $z = a$ एक शुद्ध वास्तविक संख्या (Purely Real) कहलाती है ($\mathbb{R} \subset \mathbb{C}$)।
  • यदि $a = 0$ तथा $b \neq 0$ हो, तो $z = ib$ एक शुद्ध काल्पनिक संख्या (Purely Imaginary) कहलाती है।
  • संख्या $0 = 0 + 0i$ एक साथ शुद्ध वास्तविक और शुद्ध काल्पनिक दोनों है।
1.3 दो सम्मिश्र संख्याओं की समानता

दो सम्मिश्र संख्याएँ $z_1 = a_1 + ib_1$ तथा $z_2 = a_2 + ib_2$ परस्पर समान ($z_1 = z_2$) तभी होती हैं जब उनके वास्तविक भाग और काल्पनिक भाग पृथक-पृथक समान हों:

$$a_1 + ib_1 = a_2 + ib_2 \iff \mathbf{a_1 = a_2} \quad \text{तथा} \quad \mathbf{b_1 = b_2}$$

क्रम असमिका टिप्पणी: सम्मिश्र संख्याओं में कोई क्रम संबंध ($>$ अथवा $<$) परिभाषित नहीं होता। $z_1 > z_2$ या $z_1 < z_2$ जैसे कथन सर्वथा अर्थहीन हैं, जब तक कि दोनों संख्याएँ शुद्ध वास्तविक न हों।

2. सम्मिश्र संख्याओं का बीजगणित, गुणन प्रतिलोम एवं संयुग्मी

सम्मिश्र संख्याओं पर जोड़, घटाव, गुणा और भाग की संक्रियाएँ सामान्य बीजगणितीय नियमों तथा $i^2 = -1$ के संबंध का पालन करती हैं। बीजगणितीय दृष्टि से $(\mathbb{C}, +, \cdot)$ एक पूर्ण क्षेत्र (Field) निर्मित करता है।

2.1 मूलभूत अंकगणितीय संक्रियाएँ

माना $z_1 = a + ib$ तथा $z_2 = c + id$ जहाँ $a, b, c, d \in \mathbb{R}$:

संक्रिया सूत्र बीजगणितीय प्रगुण
योग ($z_1 + z_2$) $(a + c) + i(b + d)$ संवृत, क्रमविनिमेय, साहचर्य; योज्य तत्समक $0 = 0 + 0i$ है।
अंतर ($z_1 - z_2$) $(a - c) + i(b - d)$ $z_1 + (-z_2)$ के समतुल्य, जहाँ $-z_2 = -c - id$ योज्य प्रतिलोम है।
गुणन ($z_1 \cdot z_2$) $(ac - bd) + i(ad + bc)$ संवृत, क्रमविनिमेय, साहचर्य, योग पर वितरणशील; गुणन तत्समक $1 = 1 + 0i$ है।
भाग ($\frac{z_1}{z_2}$) ($z_2 \neq 0$) $\frac{ac + bd}{c^2 + d^2} + i\frac{bc - ad}{c^2 + d^2}$ अंश तथा हर को हर के संयुग्मी ($c - id$) से गुणा करके हर को वास्तविक बनाया जाता है।
2.2 गुणन प्रतिलोम (Multiplicative Inverse)

किसी भी अशून्य सम्मिश्र संख्या $z = a + ib \neq 0$ का गुणन प्रतिलोम $z^{-1} = \frac{1}{z}$ होता है:

$$\mathbf{z^{-1} = \frac{1}{a + ib} = \frac{a - ib}{(a + ib)(a - ib)} = \frac{a - ib}{a^2 + b^2} = \frac{a}{a^2 + b^2} - i\frac{b}{a^2 + b^2}}$$
2.3 संयुग्मी सम्मिश्र संख्या (Complex Conjugate)

यदि $z = a + ib$ हो, तो उसके काल्पनिक भाग का चिन्ह बदलकर प्राप्त होने वाली सम्मिश्र संख्या को $z$ की संयुग्मी सम्मिश्र संख्या कहते हैं और इसे $\bar{z}$ द्वारा व्यक्त करते हैं:

$$\mathbf{\bar{z} = a - ib}$$

ज्यामितीय रूप से, आरगैंड तल में वास्तविक अक्ष के सापेक्ष $z$ का दर्पण प्रतिबिंब ही $\bar{z}$ होता है।

2.4 संयुग्मी के मूलभूत प्रगुण
  1. $\overline{(\bar{z})} = z$ (द्वैत प्रतिलोमन नियम)
  2. $z + \bar{z} = (a + ib) + (a - ib) = 2a = \mathbf{2\,\text{Re}(z)}$ (सदैव वास्तविक)
  3. $z - \bar{z} = (a + ib) - (a - ib) = 2ib = \mathbf{2i\,\text{Im}(z)}$ (शुद्ध काल्पनिक अथवा शून्य)
  4. $z = \bar{z} \iff \text{Im}(z) = 0 \iff z \text{ शुद्ध वास्तविक है}$
  5. $z + \bar{z} = 0 \iff \text{Re}(z) = 0 \iff z \text{ शुद्ध काल्पनिक है}$
  6. $\mathbf{z \cdot \bar{z} = (a + ib)(a - ib) = a^2 + b^2 = |z|^2}$
  7. $\overline{z_1 \pm z_2} = \bar{z}_1 \pm \bar{z}_2$
  8. $\overline{z_1 z_2} = \bar{z}_1 \cdot \bar{z}_2$
  9. $\overline{\left(\frac{z_1}{z_2}\right)} = \frac{\bar{z}_1}{\bar{z}_2} \quad (z_2 \neq 0)$

3. आरगैंड तल, मापांक एवं मुख्य कोणांक (आयाम)

जिस प्रकार वास्तविक संख्याओं को संख्या रेखा पर एक बिंदु के रूप में दर्शाया जाता है, उसी प्रकार प्रत्येक सम्मिश्र संख्या को द्विविमीय तल में एक अद्वितीय बिंदु द्वारा दर्शाया जा सकता है। इस तल को आरगैंड तल (Argand Plane) या गॉसीय तल कहा जाता है।

3.1 आरगैंड तल पर बिंदुओं का निरूपण

प्रत्येक सम्मिश्र संख्या $z = a + ib$ को क्रमित युग्म $(a, b)$ के रूप में एक बिंदु $P(a, b)$ द्वारा प्रदर्शित किया जाता है:

  • क्षैतिज $X$-अक्ष को वास्तविक अक्ष (Real Axis) कहते हैं (बिंदु $(a, 0)$ वास्तविक संख्या $a$ को दर्शाता है)।
  • ऊर्ध्वाधर $Y$-अक्ष को काल्पनिक अक्ष (Imaginary Axis) कहते हैं (बिंदु $(0, b)$ काल्पनिक संख्या $ib$ को दर्शाता है)।
  • मूलबिंदु $O(0, 0)$ सम्मिश्र संख्या $0 = 0 + 0i$ को निरूपित करता है।
3.2 सम्मिश्र संख्या का मापांक (Modulus)

$z = a + ib$ का मापांक $|z|$, आरगैंड तल में मूलबिंदु $O(0,0)$ से बिंदु $P(a, b)$ की यूक्लिडीय दूरी होता है:

$$\mathbf{|z| = r = \sqrt{a^2 + b^2} = \sqrt{[\text{Re}(z)]^2 + [\text{Im}(z)]^2}}$$

मापांक के प्रमुख प्रगुण:

  • $|z| \ge 0$, तथा $|z| = 0 \iff z = 0$।
  • $|z| = |-z| = |\bar{z}| = |-\bar{z}| = \sqrt{a^2 + b^2}$।
  • $-|z| \le \text{Re}(z) \le |z|$ तथा $-|z| \le \text{Im}(z) \le |z|$।
  • $z \cdot \bar{z} = |z|^2 \implies \mathbf{z^{-1} = \frac{\bar{z}}{|z|^2}}$।
  • गुणन प्रगुण: $|z_1 z_2| = |z_1| \cdot |z_2|$ तथा $\left|\frac{z_1}{z_2}\right| = \frac{|z_1|}{|z_2|} \quad (z_2 \neq 0)$।
  • त्रिभुज असमिका (Triangle Inequality): $$\mathbf{|z_1 + z_2| \le |z_1| + |z_2|} \quad \text{तथा} \quad \mathbf{|z_1 - z_2| \ge ||z_1| - |z_2||}$$ समानता $|z_1 + z_2| = |z_1| + |z_2|$ तभी होती है जब मूलबिंदु $O$, $z_1$, और $z_2$ समरेखीय हों तथा मूलबिंदु के एक ही ओर स्थित हों ($\text{Arg}(z_1) = \text{Arg}(z_2)$)।
  • समांतर चतुर्भुज नियम: $|z_1 + z_2|^2 + |z_1 - z_2|^2 = 2(|z_1|^2 + |z_2|^2)$।
3.3 कोणांक (आयाम) एवं मुख्य मान

आरगैंड तल में बिंदु $P$ के स्थिति सदिश $\vec{OP}$ द्वारा धनात्मक वास्तविक अक्ष की दिशा के साथ वामावर्त दिशा में बनाया गया कोण सम्मिश्र संख्या का कोणांक या आयाम (Argument / Amplitude) कहलाता है ($\arg(z)$)।

3.4 पश्चिम बंगाल बोर्ड मानक: मुख्य कोणांक $\text{Arg}(z)$

अद्वितीय मान सुनिश्चित करने के लिए मुख्य कोणांक $\text{Arg}(z) = \theta$ को सदैव अर्ध-विवृत अंतराल में सीमित रखा जाता है:

$$\mathbf{-\pi < \theta \le \pi \quad \text{अथवा} \quad -180^\circ < \theta \le 180^\circ}$$

मुख्य कोणांक ज्ञात करने का नियम:

  1. सर्वप्रथम संदर्भ न्यूनकोण ज्ञात कीजिए: $\mathbf{\alpha = \tan^{-1}\left|\frac{b}{a}\right|}$, जहाँ $0 < \alpha < \frac{\pi}{2}$।
  2. बिंदु $P(a, b)$ के चतुर्थांश का निर्धारण कर निम्नानुसार $\theta$ की गणना कीजिए:
बिंदु का चतुर्थांश चिन्ह ($a, b$) मुख्य कोणांक $\theta = \text{Arg}(z)$ मान का विस्तार
प्रथम चतुर्थांश (Q I) $a > 0, b > 0$ $\mathbf{\theta = \alpha}$ $0 < \theta < \frac{\pi}{2}$
द्वितीय चतुर्थांश (Q II) $a < 0, b > 0$ $\mathbf{\theta = \pi - \alpha}$ $\frac{\pi}{2} < \theta < \pi$
तृतीय चतुर्थांश (Q III) $a < 0, b < 0$ $\mathbf{\theta = -(\pi - \alpha) = -\pi + \alpha}$ $-\pi < \theta < -\frac{\pi}{2}$
चतुर्थ चतुर्थांश (Q IV) $a > 0, b < 0$ $\mathbf{\theta = -\alpha}$ $-\frac{\pi}{2} < \theta < 0$
3.5 अक्षीय विशेष स्थितियाँ
  • धनात्मक वास्तविक अक्ष ($z = a > 0$): $\theta = 0$
  • ऋणात्मक वास्तविक अक्ष ($z = -a < 0$): $\theta = \pi$
  • धनात्मक काल्पनिक अक्ष ($z = ib, b > 0$): $\theta = \frac{\pi}{2}$
  • ऋणात्मक काल्पनिक अक्ष ($z = -ib, b > 0$): $\theta = -\frac{\pi}{2}$
  • $z = 0$ के लिए मापांक $|0| = 0$, किंतु कोणांक अपरिभाषित है।

4. ध्रुवीय रूप, ऑयलर सूत्र एवं डी मोइवर प्रमेय

कार्तीय रूप $z = a + ib$ योग और घटाव के लिए सरल है, किंतु सम्मिश्र संख्याओं के गुणन, भाग तथा उच्चतर घातें ज्ञात करने के लिए ध्रुवीय (त्रिकोणमितीय) रूप और चरघातांकी रूप सर्वाधिक उपयोगी होते हैं।

4.1 ध्रुवीय रूप (मापांक-कोणांक रूप)

माना $z = a + ib \neq 0$ का मापांक $r = |z|$ तथा मुख्य कोणांक $\theta = \text{Arg}(z)$ है। समकोण त्रिभुज के आधार पर:

$$a = r\cos\theta, \quad b = r\sin\theta$$

इन मानों को $z = a + ib$ में प्रतिस्थापित करने पर ध्रुवीय रूप प्राप्त होता है:

$$\mathbf{z = r(\cos\theta + i\sin\theta)} \quad \text{जहाँ } r = \sqrt{a^2 + b^2} \text{ तथा } \theta = \text{Arg}(z)$$
4.2 ऑयलर का चरघातांकी सूत्र (Euler's Formula)

ऑयलर के प्रसिद्ध सूत्र के अनुसार, $e^{i\theta} = \cos\theta + i\sin\theta$ होता है। अतः किसी भी सम्मिश्र संख्या को चरघातांकी रूप में संक्षेप में लिखा जा सकता है:

$$\mathbf{z = r \cdot e^{i\theta}}$$
4.3 गुणन एवं भाग का ज्यामितीय अर्थ

माना $z_1 = r_1 e^{i\theta_1}$ तथा $z_2 = r_2 e^{i\theta_2}$:

  1. सम्मिश्र गुणन: $$z_1 z_2 = r_1 r_2 e^{i(\theta_1 + \theta_2)} = r_1 r_2 [\cos(\theta_1 + \theta_2) + i\sin(\theta_1 + \theta_2)]$$ $$\mathbf{|z_1 z_2| = |z_1| |z_2| = r_1 r_2} \quad \text{तथा} \quad \mathbf{\arg(z_1 z_2) = \arg(z_1) + \arg(z_2)}$$ ज्यामितीय अर्थ: $z_1$ को $z_2$ से गुणा करने पर मूलबिंदु से उसकी दूरी $r_2$ गुना बढ़ जाती है तथा स्थिति सदिश वामावर्त दिशा में $\theta_2$ कोण घूम जाता है।
  2. सम्मिश्र भाग: $$\frac{z_1}{z_2} = \frac{r_1}{r_2} e^{i(\theta_1 - \theta_2)} = \frac{r_1}{r_2} [\cos(\theta_1 - \theta_2) + i\sin(\theta_1 - \theta_2)]$$ $$\mathbf{\left|\frac{z_1}{z_2}\right| = \frac{|z_1|}{|z_2|} = \frac{r_1}{r_2}} \quad \text{तथा} \quad \mathbf{\arg\left(\frac{z_1}{z_2}\right) = \arg(z_1) - \arg(z_2)}$$
4.4 पूर्णांक घातों के लिए डी मोइवर प्रमेय (De Moivre's Theorem)

किसी भी पूर्णांक $n \in \mathbb{Z}$ तथा वास्तविक कोण $\theta$ के लिए:

$$\mathbf{(\cos\theta + i\sin\theta)^n = \cos(n\theta) + i\sin(n\theta)}$$

फलस्वरूप, यदि $z = r(\cos\theta + i\sin\theta)$ हो, तो:

$$z^n = r^n [\cos(n\theta) + i\sin(n\theta)] = r^n e^{in\theta}$$

5. सम्मिश्र संख्या का वर्गमूल एवं इकाई के घनमूल (1, ω, ω²)

सम्मिश्र संख्या का वर्गमूल बीजगणितीय विधि से निकालना तथा $x^3 = 1$ समीकरण के काल्पनिक मूलों के रूप में इकाई के घनमूलों के प्रगुण पश्चिम बंगाल बोर्ड परीक्षा के महत्वपूर्ण प्रश्न-क्षेत्र हैं।

5.1 $\sqrt{a + ib}$ ज्ञात करने की बीजगणितीय विधि

माना $\sqrt{a + ib} = x + iy$, जहाँ $x, y \in \mathbb{R}$। दोनों पक्षों का वर्ग करने पर:

$$a + ib = (x + iy)^2 = (x^2 - y^2) + i(2xy)$$

वास्तविक एवं काल्पनिक भागों की तुलना करने पर:

  1. $x^2 - y^2 = a$
  2. $2xy = b$

सर्वसमिका $(x^2 + y^2)^2 = (x^2 - y^2)^2 + (2xy)^2 = a^2 + b^2$ का प्रयोग करने पर:

$$x^2 + y^2 = \sqrt{a^2 + b^2} = |z|$$

दोनों समीकरणों को जोड़ने व घटाने पर $x$ तथा $y$ के मान प्राप्त होते हैं:

$$\mathbf{\sqrt{a + ib} = \pm \left[ \sqrt{\frac{\sqrt{a^2+b^2}+a}{2}} + i \cdot \text{sgn}(b) \sqrt{\frac{\sqrt{a^2+b^2}-a}{2}} \right]}$$ जहाँ $\text{sgn}(b) = +1$ यदि $b > 0$, तथा $\text{sgn}(b) = -1$ यदि $b < 0$।

मानक वर्गमूल:

  • $\sqrt{i} = \pm \frac{1 + i}{\sqrt{2}}$
  • $\sqrt{-i} = \pm \frac{1 - i}{\sqrt{2}}$
5.2 इकाई के सम्मिश्र घनमूल ($1, \omega, \omega^2$)

समीकरण $x^3 = 1 \implies x^3 - 1 = 0$ के गुणनखंड करने पर:

$$(x - 1)(x^2 + x + 1) = 0$$

यहाँ से तीन मूल प्राप्त होते हैं:

  1. वास्तविक मूल: $x = 1$
  2. द्विघात भाग $x^2 + x + 1 = 0$ से काल्पनिक मूल: $$x = \frac{-1 \pm \sqrt{1^2 - 4(1)(1)}}{2} = \mathbf{\frac{-1 \pm i\sqrt{3}}{2}}$$

यदि एक काल्पनिक मूल को $\mathbf{\omega}$ (ओमेगा) से व्यक्त करें:

$$\mathbf{\omega = \frac{-1 + i\sqrt{3}}{2}} \implies \mathbf{\omega^2 = \frac{-1 - i\sqrt{3}}{2}}$$

अतः इकाई का प्रत्येक काल्पनिक घनमूल दूसरे का वर्ग होता है!

5.3 $\omega$ के मूलभूत बीजगणितीय प्रगुण
प्रगुण गणितीय संबंध महत्व / अनुप्रयोग
मूलों का योग $\mathbf{1 + \omega + \omega^2 = 0}$ प्रतिस्थापन: $1 + \omega = -\omega^2$, $1 + \omega^2 = -\omega$, $\omega + \omega^2 = -1$।
मूलों का गुणनफल $\mathbf{\omega^3 = 1}$ घातें 3 से भाग देकर कम की जाती हैं: $\omega^{3k} = 1$, $\omega^{3k+1} = \omega$, $\omega^{3k+2} = \omega^2$।
संयुग्मी संबंध $\bar{\omega} = \omega^2 \quad \text{तथा} \quad \overline{\omega^2} = \omega$ इकाई के दोनों काल्पनिक घनमूल परस्पर एक-दूसरे के संयुग्मी होते हैं।
आरगैंड तल में ज्यामिति $|\omega| = 1, \quad \text{Arg}(\omega) = \frac{2\pi}{3}, \quad \text{Arg}(\omega^2) = -\frac{2\pi}{3}$ शीर्ष $1, \omega, \omega^2$ इकाई वृत्त में एक समबाहु त्रिभुज का निर्माण करते हैं।

6. सम्मिश्र मूलों वाले द्विघात समीकरण एवं संयुग्मी मूल प्रमेय

माध्यमिक कक्षाओं में द्विघात समीकरण का विविक्तकर $\Delta = b^2 - 4ac < 0$ होने पर यह कहा जाता था कि समीकरण का "कोई वास्तविक मूल नहीं है"। कक्षा 11 में सम्मिश्र संख्या निकाय $\mathbb{C}$ की सहायता से प्रत्येक द्विघात समीकरण के ठीक दो मूल सुनिश्चित रूप से प्राप्त किए जाते हैं।

6.1 बीजगणित की आधारभूत प्रमेय (Fundamental Theorem of Algebra)
प्रमेय (गॉस): सम्मिश्र गुणांकों वाले किसी भी $n$-घातीय ($n \ge 1$) बहुपद समीकरण का $\mathbb{C}$ में कम से कम एक मूल अवश्य होता है। परिणामस्वरूप, गुणनखंड प्रमेय के अनुसार प्रत्येक $n$-घातीय समीकरण के ठीक $n$ मूल सम्मिश्र निकाय में विद्यमान होते हैं।
6.2 $\Delta < 0$ की स्थिति में $ax^2 + bx + c = 0$ का हल

वास्तविक गुणांकों $a, b, c \in \mathbb{R}$ ($a \neq 0$) के लिए श्रीधराचार्य द्विघाती सूत्र:

$$x = \frac{-b \pm \sqrt{b^2 - 4ac}}{2a}$$

जब विविक्तकर $\Delta = b^2 - 4ac < 0$ हो, तो ऋणात्मक पद से $-1$ बाहर निकालकर:

$$\sqrt{b^2 - 4ac} = \sqrt{-(4ac - b^2)} = i\sqrt{4ac - b^2}$$

अतः सम्मिश्र मूल होंगे:

$$\mathbf{x = \frac{-b \pm i\sqrt{4ac - b^2}}{2a} = -\frac{b}{2a} \pm i\frac{\sqrt{4ac - b^2}}{2a}}$$
6.3 संयुग्मी मूल प्रमेय (Conjugate Root Theorem)
प्रमेय: किसी भी वास्तविक गुणांकों वाले बहुपद समीकरण के काल्पनिक मूल सदैव संयुग्मी युग्मों (Conjugate Pairs) में प्राप्त होते हैं। अर्थात् यदि $\alpha + i\beta$ ($\beta \neq 0$) एक मूल है, तो उसकी संयुग्मी संख्या $\alpha - i\beta$ भी अवश्य ही दूसरा मूल होगी।

महत्वपूर्ण चेतावनी: समीकरण के गुणांक वास्तविक होने अनिवार्य हैं। यदि गुणांक सम्मिश्र हों (जैसे $x^2 - ix + 2 = 0$), तो मूल संयुग्मी होना आवश्यक नहीं है!

6.4 मूलों और गुणांकों में संबंध

द्विघात समीकरण $ax^2 + bx + c = 0$ के मूल $\alpha, \beta \in \mathbb{C}$ होने पर:

  • मूलों का योग: $\mathbf{\alpha + \beta = -\frac{b}{a}}$
  • मूलों का गुणनफल: $\mathbf{\alpha \beta = \frac{c}{a}}$
  • समीकरण निर्माण: दिए गए मूलों $\alpha$ और $\beta$ से बनने वाला द्विघात समीकरण: $$\mathbf{x^2 - (\alpha + \beta)x + (\alpha \beta) = 0}$$

महत्वपूर्ण सूत्र, सर्वसमिकाएँ एवं प्रमेय

काल्पनिक इकाई एवं चक्रीय घातें
$$i^(4k+r) = i^r$$
4 से विभाजन शेषफल r in {0, 1, 2, 3}; ध्यान दें कि a, b > 0 होने पर sqrt(-a)sqrt(-b) = -sqrt(ab)।
मापांक एवं गुणन प्रतिलोम
z⁻¹ = z̄ / |z|²
किसी भी अशून्य सम्मिश्र संख्या के लिए मान्य; z और उसके संयुग्मी का गुणनफल सदैव अऋणात्मक वास्तविक होता है।
मुख्य कोणांक (आयाम)
θ ∈ (-π, π]
पश्चिम बंगाल बोर्ड मानक विस्तार -π < θ <= π है; संदर्भ न्यूनकोण α की सहायता से चतुर्थांश अनुसार θ निर्धारित होता है।
ध्रुवीय एवं ऑयलर चरघातांकी रूप
z = r(cosθ + i sinθ) = re^(iθ)
सम्मिश्र गुणन में मापांकों का गुणन व कोणों का योग होता है; भाग में मापांकों का भाग व कोणों का अंतर होता है।
सम्मिश्र संख्या का वर्गमूल सूत्र
√(a + ib)
काल्पनिक भाग का चिन्ह sgn(b) वर्गमूल में बना रहता है; जैसे sqrt(i) = +-(1+i)/sqrt(2)।
इकाई के घनमूल एवं द्विघात समीकरण
1 + ω + ω² = 0, ω³ = 1
वास्तविक गुणांकों वाले द्विघात समीकरण के काल्पनिक मूल सदैव संयुग्मी युग्मों में प्राप्त होते हैं।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
\(i^{243} + \frac{1}{i^{99}}\) का मान ज्ञात कीजिए। [2 marks]
विस्तृत समाधान / उत्तर:
हल:
चरण 1: $i^{243}$ का सरलीकरण: $243$ को $4$ से भाग देने पर: $243 = 4 \times 60 + 3$। $$i^{243} = (i^4)^{60} \cdot i^3 = (1)^{60} \cdot (-i) = \mathbf{-i}$$
चरण 2: $\frac{1}{i^{99}}$ का सरलीकरण: $99$ को $4$ से भाग देने पर: $99 = 4 \times 24 + 3$। $$i^{99} = (i^4)^{24} \cdot i^3 = (1)^{24} \cdot (-i) = -i$$ व्युत्क्रम का मान: $$\frac{1}{i^{99}} = \frac{1}{-i} = \frac{i}{-i^2} = \frac{i}{-(-1)} = \mathbf{+i}$$
चरण 3: दोनों पदों का योग: $$i^{243} + \frac{1}{i^{99}} = (-i) + (i) = \mathbf{0}$$
उत्तर: दिए गए व्यंजक का मान $0$ है।
उदाहरण 2
सम्मिश्र संख्या \(z = \frac{1 + 7i}{(2 - i)^2}\) को मानक रूप \(a + ib\) में व्यक्त कीजिए तथा इसका मापांक ज्ञात कीजिए। [3 marks]
विस्तृत समाधान / उत्तर:
हल:
चरण 1: हर का विस्तार: $$(2 - i)^2 = 2^2 - 2(2)(i) + i^2 = 4 - 4i - 1 = 3 - 4i$$
चरण 2: हर के संयुग्मी $(3 + 4i)$ से अंश व हर में गुणा: $$z = \frac{1 + 7i}{3 - 4i} = \frac{(1 + 7i)(3 + 4i)}{(3 - 4i)(3 + 4i)}$$ अंश का गुणनफल: $$(1 + 7i)(3 + 4i) = 3 + 4i + 21i + 28i^2 = 3 + 25i - 28 = -25 + 25i$$ हर का गुणनफल: $$(3 - 4i)(3 + 4i) = 3^2 + 4^2 = 9 + 16 = 25$$
चरण 3: मानक $a + ib$ रूप: $$z = \frac{-25 + 25i}{25} = \mathbf{-1 + i}$$ यहाँ वास्तविक भाग $a = -1$ तथा काल्पनिक भाग $b = 1$ है।
चरण 4: मापांक $|z|$ की गणना: $$|z| = \sqrt{a^2 + b^2} = \sqrt{(-1)^2 + (1)^2} = \sqrt{1 + 1} = \mathbf{\sqrt{2}}$$
उत्तर: मानक रूप $-1 + i$ है तथा मापांक $\sqrt{2}$ है।
उदाहरण 3
सम्मिश्र संख्या \(z = -1 - i\sqrt{3}\) का मापांक एवं मुख्य कोणांक ज्ञात कीजिए तथा इसे ध्रुवीय रूप में व्यक्त कीजिए। [3 marks]
विस्तृत समाधान / उत्तर:
हल:
चरण 1: मापांक $r = |z|$ ज्ञात करना: यहाँ $a = -1$ तथा $b = -\sqrt{3}$ है। $$r = |z| = \sqrt{(-1)^2 + (-\sqrt{3})^2} = \sqrt{1 + 3} = \sqrt{4} = \mathbf{2}$$
चरण 2: संदर्भ न्यूनकोण $\alpha$ ज्ञात करना: $$\tan \alpha = \left|\frac{b}{a}\right| = \left|\frac{-\sqrt{3}}{-1}\right| = \sqrt{3} \implies \alpha = \frac{\pi}{3} \quad (60^\circ)$$
चरण 3: चतुर्थांश निर्धारण एवं मुख्य कोणांक $\theta$: चूँकि $a = -1 < 0$ तथा $b = -\sqrt{3} < 0$, अतः बिंदु तृतीय चतुर्थांश (Q III) में स्थित है। तृतीय चतुर्थांश के मुख्य कोणांक नियमानुसार: $$\theta = -(\pi - \alpha) = -\left(\pi - \frac{\pi}{3}\right) = -\frac{2\pi}{3} \quad (-120^\circ)$$
चरण 4: ध्रुवीय रूप में निरूपण: $$z = r(\cos\theta + i\sin\theta) = \mathbf{2\left[\cos\left(-\frac{2\pi}{3}\right) + i\sin\left(-\frac{2\pi}{3}\right)\right]}$$ वैकल्पिक रूप: $2\left[\cos\frac{2\pi}{3} - i\sin\frac{2\pi}{3}\right]$।
उदाहरण 4
सम्मिश्र संख्या \(7 - 24i\) का वर्गमूल ज्ञात कीजिए। [4 marks]
विस्तृत समाधान / उत्तर:
हल:
चरण 1: बीजगणितीय संबंध स्थापित करना: माना $\sqrt{7 - 24i} = x + iy$, जहाँ $x, y \in \mathbb{R}$। दोनों पक्षों का वर्ग करने पर: $$7 - 24i = (x + iy)^2 = (x^2 - y^2) + i(2xy)$$
चरण 2: वास्तविक तथा काल्पनिक भागों की तुलना: $$\text{समीकरण (1): } x^2 - y^2 = 7$$ $$\text{समीकरण (2): } 2xy = -24 \implies xy = -12$$ चूँकि $xy = -12 < 0$, अतः $x$ तथा $y$ के चिन्ह परस्पर विपरीत होंगे।
चरण 3: $x^2 + y^2$ का मान ज्ञात करना: $$(x^2 + y^2)^2 = (x^2 - y^2)^2 + (2xy)^2 = 7^2 + (-24)^2 = 49 + 576 = 625$$ $$\text{समीकरण (3): } x^2 + y^2 = \sqrt{625} = 25 \quad (\text{चूँकि } x^2 + y^2 > 0)$$
चरण 4: $x$ तथा $y$ के मान निकालना: समीकरण (1) और (3) को जोड़ने पर: $$2x^2 = 7 + 25 = 32 \implies x^2 = 16 \implies x = \pm 4$$ समीकरण (3) से समीकरण (1) घटाने पर: $$2y^2 = 25 - 7 = 18 \implies y^2 = 9 \implies y = \pm 3$$
चरण 5: चिन्ह की शर्त लागू करना: चूँकि $xy = -12 < 0$:
  • जब $x = 4$, तब $y = -3$
  • जब $x = -4$, तब $y = 3$
$$\mathbf{\sqrt{7 - 24i} = \pm(4 - 3i)}$$
उदाहरण 5
यदि \(\omega\) इकाई का एक काल्पनिक घनमूल हो, तो सिद्ध कीजिए कि: \((1 - \omega + \omega^2)^5 + (1 + \omega - \omega^2)^5 = 32\)। [4 marks]
विस्तृत समाधान / उत्तर:
हल:
चरण 1: इकाई के घनमूलों के मूलभूत संबंध: $$1 + \omega + \omega^2 = 0 \quad \text{तथा} \quad \omega^3 = 1$$ अतः: $$1 + \omega^2 = -\omega \quad \text{तथा} \quad 1 + \omega = -\omega^2$$
चरण 2: प्रथम कोष्ठक का मान: $$1 - \omega + \omega^2 = (1 + \omega^2) - \omega = (-\omega) - \omega = -2\omega$$ इसकी 5वीं घात: $$(1 - \omega + \omega^2)^5 = (-2\omega)^5 = (-2)^5 \cdot \omega^5 = -32 \cdot \omega^5$$ चूँकि $\omega^5 = \omega^3 \cdot \omega^2 = 1 \cdot \omega^2 = \omega^2$: $$(1 - \omega + \omega^2)^5 = -32\omega^2$$
चरण 3: द्वितीय कोष्ठक का मान: $$1 + \omega - \omega^2 = (1 + \omega) - \omega^2 = (-\omega^2) - \omega^2 = -2\omega^2$$ इसकी 5वीं घात: $$(1 + \omega - \omega^2)^5 = (-2\omega^2)^5 = (-2)^5 \cdot \omega^{10} = -32 \cdot \omega^{10}$$ चूँकि $\omega^{10} = (\omega^3)^3 \cdot \omega = 1^3 \cdot \omega = \omega$: $$(1 + \omega - \omega^2)^5 = -32\omega$$
चरण 4: दोनों पदों का योग: $$\text{बायाँ पक्ष} = -32\omega^2 - 32\omega = -32(\omega^2 + \omega)$$ चूँकि $1 + \omega + \omega^2 = 0 \implies \omega + \omega^2 = -1$: $$\text{बायाँ पक्ष} = -32(-1) = \mathbf{32} = \text{दायाँ पक्ष}$$ अतः सिद्ध हुआ।
उदाहरण 6
सम्मिश्र गुणांकों वाले द्विघात समीकरण को हल कीजिए: \(x^2 - (7 - i)x + (18 - i) = 0\)। [5 marks]
विस्तृत समाधान / उत्तर:
हल:
चरण 1: गुणांक पहचानना एवं द्विघाती सूत्र: यहाँ $a = 1$, $b = -(7 - i)$, $c = 18 - i$। $$x = \frac{-b \pm \sqrt{b^2 - 4ac}}{2a} = \frac{(7 - i) \pm \sqrt{[-(7 - i)]^2 - 4(1)(18 - i)}}{2}$$
चरण 2: विविक्तकर $\Delta$ का मान: $$[-(7 - i)]^2 = (7 - i)^2 = 49 - 14i + i^2 = 49 - 14i - 1 = 48 - 14i$$ $$4ac = 4(1)(18 - i) = 72 - 4i$$ $$\Delta = b^2 - 4ac = (48 - 14i) - (72 - 4i) = -24 - 10i$$
चरण 3: $\Delta = -24 - 10i$ का वर्गमूल ज्ञात करना: माना $\sqrt{-24 - 10i} = u + iv$। तुलना से: $u^2 - v^2 = -24$ तथा $2uv = -10 \implies uv = -5$ (विपरीत चिन्ह)। $$u^2 + v^2 = \sqrt{(-24)^2 + (-10)^2} = \sqrt{576 + 100} = \sqrt{676} = 26$$ जोड़ने पर: $2u^2 = 26 - 24 = 2 \implies u^2 = 1 \implies u = \pm 1$। घटाने पर: $2v^2 = 26 - (-24) = 50 \implies v^2 = 25 \implies v = \pm 5$। चूँकि $uv = -5 < 0$: $$\sqrt{-24 - 10i} = \pm(1 - 5i)$$
चरण 4: सूत्र में मान प्रतिस्थापित करना: $$x = \frac{(7 - i) \pm (1 - 5i)}{2}$$ स्थिति 1 ($+$ चिन्ह लेने पर): $$x_1 = \frac{(7 - i) + (1 - 5i)}{2} = \frac{8 - 6i}{2} = \mathbf{4 - 3i}$$ स्थिति 2 ($-$ चिन्ह लेने पर): $$x_2 = \frac{(7 - i) - (1 - 5i)}{2} = \frac{6 + 4i}{2} = \mathbf{3 + 2i}$$
उत्तर: समीकरण के हल $\mathbf{x = 4 - 3i}$ तथा $\mathbf{x = 3 + 2i}$ हैं। ध्यान दें: चूँकि समीकरण के गुणांक वास्तविक नहीं थे, अतः मूल परस्पर संयुग्मी नहीं हैं।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

ऋणात्मक संख्याओं के लिए वर्गमूल गुणन नियम का अनुचित अनुप्रयोग

सही वैज्ञानिक तथ्य

सर्वप्रथम ऋणात्मक वर्गमूलों को $i$ के पदों में व्यक्त करें: $\sqrt{-4}\sqrt{-9} = (2i)(3i) = 6i^2 = 6(-1) = \mathbf{-6}$।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

चतुर्थांश की जाँच किए बिना केवल $\tan^{-1}(b/a)$ द्वारा मुख्य कोणांक लिखना

सही वैज्ञानिक तथ्य

$z = -1 - i$ में दोनों निर्देशांक ऋणात्मक हैं, अतः बिंदु तृतीय चतुर्थांश में है। मुख्य कोणांक $\theta = -(\pi - \pi/4) = \mathbf{-\frac{3\pi}{4}}$ है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

वास्तविक संख्याओं की भाँति सम्मिश्र संख्याओं में असमिका ($>$ अथवा $<$) का प्रयोग करना

सही वैज्ञानिक तथ्य

काल्पनिक भाग वाली सम्मिश्र संख्याओं में कोई असमिका परिभाषित नहीं होती। केवल उनके मापांकों की तुलना की जा सकती है: $|3 + 4i| = 5 > |1 + 2i| = \sqrt{5}$।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

प्रत्येक द्विघात समीकरण के मूल संयुग्मी युग्म में होने का भ्रम पालना

सही वैज्ञानिक तथ्य

$x^2 - (2+3i)x = 0$ के मूल $0$ और $2 + 3i$ हैं। गुणांक वास्तविक न होने के कारण $2 - 3i$ इसका मूल नहीं है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

काल्पनिक भाग $\text{Im}(z)$ के साथ $i$ को सम्मिलित कर लेना

सही वैज्ञानिक तथ्य

परिभाषानुसार $z = a + ib$ में $a$ तथा $b$ दोनों वास्तविक संख्याएँ होती हैं। अतः $\text{Im}(3 - 4i) = \mathbf{-4}$ है।

आरगैंड तल, मापांक-कोणांक ज्यामिति एवं द्विघात समीकरण मूल आरेख

ℂ सम्मिश्र संख्याएँ एवं आरगैंड तल (Argand Plane) मापांक (Modulus) | कोणांक (Argument) | ध्रुवीय रूप | संयुग्मी | इकाई के घनमूल वास्तविक अक्ष (Real Axis) → +X ↑ काल्पनिक अक्ष (Imag Axis) (+iY) -X ↓ -iY O(0,0) Q1: θ = α Q2: θ = π - α Q3: θ = -(π - α) Q4: θ = -α a = Re(z) ib = Im(z) P(z) = a + ib = r(cosθ + i sinθ) θ r = |z| -ib Q(z̄) = a - ib (संयुग्मी / Conjugate) -θ बीजगणितीय नियम i² = -1, i³ = -i, i⁴ = 1 z · z̄ = |z|² = a² + b² z⁻¹ = z̄ / |z|² ध्रुवीय एवं ऑयलर रूप z = r(cosθ + i sinθ) z = r · e^(iθ) |z₁z₂| = |z₁||z₂|, arg(z₁z₂) = arg(z₁) + arg(z₂) इकाई के घनमूल (Roots of Unity) मूल: 1, ω, ω² 1 + ω + ω² = 0 ω³ = 1, ω = (-1 + i√3)/2 द्विघात समीकरण (Δ < 0) ax² + bx + c = 0 Δ = b² - 4ac < 0 (काल्पनिक मूल) x = (-b ± i√|Δ|) / (2a) [संयुग्मी युग्म]

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
काल्पनिक इकाई i को i = √(-1) द्वारा परिभाषित किया जाता है, जहाँ i² = -1, i³ = -i, i⁴ = 1 तथा किसी भी पूर्णांक k व शेषफल r के लिए i^(4k+r) = i^r।
मुख्य बिंदु 2
किसी सम्मिश्र संख्या का मानक बीजगणितीय रूप z = a + ib होता है, जहाँ a, b ∈ ℝ; a वास्तविक भाग Re(z) तथा b काल्पनिक भाग Im(z) है।
मुख्य बिंदु 3
दो सम्मिश्र संख्याएँ a₁ + ib₁ और a₂ + ib₂ तभी समान होती हैं जब उनके वास्तविक और काल्पनिक भाग अलग-अलग समान हों (a₁ = a₂ और b₁ = b₂)।
मुख्य बिंदु 4
z = a + ib की संयुग्मी सम्मिश्र संख्या z̄ = a - ib होती है; गुणनफल z·z̄ = a² + b² = |z|² सदैव एक अऋणात्मक वास्तविक संख्या होता है।
मुख्य बिंदु 5
किसी अशून्य सम्मिश्र संख्या z का गुणन प्रतिलोम z⁻¹ = z̄ / |z|² = (a - ib)/(a² + b²) होता है।
मुख्य बिंदु 6
आरगैंड तल में मापांक |z| = √(a² + b²) मूलबिंदु से दूरी दर्शाता है और त्रिभुज असमिका |z₁ + z₂| ≤ |z₁| + |z₂| का पालन करता है।
मुख्य बिंदु 7
मुख्य कोणांक θ = Arg(z) सदैव अर्ध-विवृत अंतराल (-π, π] में स्थित होता है और न्यूनकोण α = tan⁻¹|b/a| द्वारा चतुर्थांश के अनुसार निकाला जाता है।
मुख्य बिंदु 8
ध्रुवीय रूप z = r(cos θ + i sin θ) तथा ऑयलर रूप z = r·e^(iθ) होता है; सम्मिश्र गुणन में मापांकों का गुणन तथा कोणांकों का योग होता है।
मुख्य बिंदु 9
इकाई के काल्पनिक घनमूल 1, ω, ω² होते हैं; इनके दो मूलभूत प्रगुण 1 + ω + ω² = 0 और ω³ = 1 हैं।
मुख्य बिंदु 10
वास्तविक गुणांकों वाले द्विघात समीकरण ax² + bx + c = 0 का विविक्तकर Δ = b² - 4ac < 0 होने पर मूल सदैव संयुग्मी सम्मिश्र युग्म होते हैं: x = (-b ± i√|Δ|) / (2a)।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
यदि (x + iy)(2 - 3i) = 4 + i हो, तो x और y के वास्तविक मान ज्ञात कीजिए।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: x + iy = (4 + i)/(2 - 3i) = [(4 + i)(2 + 3i)] / [2² + (-3)²] = (8 + 12i + 2i - 3)/13 = (5 + 14i)/13। अतः x = 5/13 तथा y = 14/13।
दोनों पक्षों में (2 - 3i) से भाग दें और हर के संयुग्मी से गुणा करें, फिर वास्तविक व काल्पनिक भागों की तुलना करें।
2
सम्मिश्र संख्या z = -√3 + i का मुख्य कोणांक कितना होगा?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: यहाँ a = -√3 < 0 तथा b = 1 > 0, अतः बिंदु द्वितीय चतुर्थांश में है। संदर्भ कोण α = tan⁻¹(1/√3) = π/6। अतः मुख्य कोणांक θ = π - α = π - π/6 = 5π/6 (अथवा 150°)।
बिंदु के चतुर्थांश की पहचान करें और α = tan⁻¹|1/(-√3)| निकालकर द्वितीय चतुर्थांश का सूत्र लागू करें।
3
यदि |z - 3| = |z + 3| हो, तो आरगैंड तल में z का बिंदुपथ क्या होगा?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: |x + iy - 3|² = |x + iy + 3|² ⟹ (x - 3)² + y² = (x + 3)² + y² ⟹ x² - 6x + 9 = x² + 6x + 9 ⟹ 12x = 0 ⟹ x = 0। बिंदुपथ रेखा x = 0 है, जो कि काल्पनिक अक्ष (तथा 3 व -3 को मिलाने वाले रेखाखंड का लंब समद्विभाजक) है।
z = x + iy रखकर दोनों पक्षों के मापांक का वर्ग करें।
4
(1 + ω - ω²)(1 - ω + ω²) का मान ज्ञात कीजिए, जहाँ ω इकाई का काल्पनिक घनमूल है।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: 1 + ω - ω² = -ω² - ω² = -2ω²। इसी प्रकार 1 - ω + ω² = (1 + ω²) - ω = -ω - ω = -2ω। गुणनफल = (-2ω²)(-2ω) = 4ω³ = 4(1) = 4।
1 + ω = -ω² और 1 + ω² = -ω प्रतिस्थापित करके गुणा करें।
5
सम्मिश्र निकाय में द्विघात समीकरण x² + 4x + 13 = 0 को हल कीजिए।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: यहाँ a = 1, b = 4, c = 13। विविक्तकर Δ = 4² - 4(1)(13) = 16 - 52 = -36। अतः x = [-4 ± √(-36)] / 2 = [-4 ± 6i] / 2 = -2 ± 3i। समीकरण के मूल -2 + 3i तथा -2 - 3i हैं।
विविक्तकर Δ = b² - 4ac निकालें और द्विघाती सूत्र का प्रयोग करें।
अध्याय का अध्ययन पूर्ण हुआ?
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