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WBB • कक्षा XI • Mathematics • अध्याय 14
अनुमानित समय: 90 मिनट
प्रगति: अध्ययनरत

प्रायिकता

प्रायिकता गणित की वह अत्यंत महत्वपूर्ण शाखा है जो अनिश्चितता, यादृच्छिक घटनाओं और संयोग के परिमाणीकरण का अध्ययन करती है। दैनिक जीवन में मौसम के पूर्वानुमान, वित्तीय बाजार के जोखिम, चिकित्सीय परीक्षणों के परिणाम या किसी खेल के परिणामों में पूर्ण निश्चितता का अभाव रहता है। माध्यमिक कक्षाओं में विद्यार्थियों ने पिछली घटनाओं की सापेक्ष बारंबारता पर आधारित प्रायोगिक प्रायिकता का अध्ययन किया था। परंतु उच्चतर माध्यमिक कक्षा 11 में 1933 में रूसी गणितज्ञ आंद्रे कोलमोगोरोव द्वारा प्रतिपादित आधुनिक अभिगृहीतीय (Axiomatic) दृष्टिकोण को व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत किया गया है। इस अध्याय में यादृच्छिक प्रयोग, प्रतिदर्श समष्टि, प्रतिदर्श बिंदु और समुच्चय सिद्धांत के माध्यम से घटनाओं के गणितीय विश्लेषण की सुदृढ़ नींव रखी जाती है। विद्यार्थी सरल व मिश्र घटनाएँ, परस्पर अपवर्जी घटनाएँ, निःशेष घटनाएँ, लाप्लास की चिरप्रतिष्ठित परिभाषा और कोलमोगोरोव के तीन मूलभूत अभिगृहीतों को गहराई से सीखते हैं। इसके अतिरिक्त, किन्हीं दो व तीन घटनाओं के लिए सामान्य योग प्रमेय, डी मॉर्गन के नियम तथा अनुकूल व प्रतिकूल संयोगानुपात (Odds in Favor / Against) से संबंधित प्रश्नों का विस्तृत समाधान इस अध्याय में प्रस्तुत किया गया है जो कक्षा 12 की सप्रतिबंध प्रायिकता और बेज़ प्रमेय के लिए अनिवार्य आधारशिला तैयार करता है।

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

आधुनिक अनुप्रयुक्त विज्ञान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम यांत्रिकी, बीमा सांख्यिकी एवं आर्थिक निर्णयन के प्रत्येक क्षेत्र में प्रायिकता का केंद्रीय महत्व है। मशीन लर्निंग और डेटा साइंस में बायेसियन इन्फेरेंस तथा तंत्रिका नेटवर्क का अनुकूलन प्रायिकता के सिद्धांतों पर आधारित है। वित्तीय अभियांत्रिकी में शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव और निवेश पोर्टफोलियो के जोखिम प्रबंधन में प्रायिकता का व्यापक उपयोग होता है। क्वांटम भौतिकी में कणों की स्थिति और तरंग फलन की व्याख्या पूर्णतः प्रायिकता पर निर्भर करती है। आनुवंशिकी और महामारी विज्ञान में रोगों के संचरण तथा टीकों की प्रभावशीलता का आकलन प्रायिकता मॉडलों से किया जाता है। पश्चिम बंगाल बोर्ड वार्षिक परीक्षा, WBJEE तथा JEE Advanced की दृष्टि से प्रायिकता एक अत्यंत स्कोरिंग और तार्किक अध्याय है जहाँ समुच्चय सिद्धांत और क्रमचय-संचय का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • कक्षा 11 समुच्चय सिद्धांत: उपसमुच्चय, संघ, सर्वनिष्ठ, पूरक समुच्चय, डी मॉर्गन नियम एवं अवयवों की संख्या
  • कक्षा 11 क्रमचय एवं संचय: गणना का मूलभूत सिद्धांत, nPr क्रमचय एवं nCr संचय चयन

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 मॉड्यूल 1: यादृच्छिक प्रयोग, परिणाम...
2 मॉड्यूल 2: घटना बीजगणित एवं घटनाओं...
3 मॉड्यूल 3: प्रायिकता की चिरप्रतिष्ठ...
4 मॉड्यूल 4: प्रायिकता का अभिगृहीतीय...
5 मॉड्यूल 5: प्रायिकता का योग प्रमेय...
6 मॉड्यूल 6: संयोगानुपात (Odds) एवं व...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

मॉड्यूल 1: यादृच्छिक प्रयोग, परिणाम एवं प्रतिदर्श समष्टि

गणितीय प्रायिकता का आरंभ नियतात्मक और यादृच्छिक परिघटनाओं के मध्य स्पष्ट अंतर को समझने से होता है।

1. नियतात्मक बनाम यादृच्छिक प्रयोग (Random Experiment)

भौतिक विज्ञान के वे प्रयोग जो समान परिस्थितियों में बार-बार दोहराने पर सदैव एक ही परिणाम देते हैं, उन्हें नियतात्मक (Deterministic) प्रयोग कहा जाता है (जैसे गुरुत्वीय त्वरण मापना)। इसके विपरीत, किसी प्रयोग को यादृच्छिक प्रयोग (Random Experiment) तब कहा जाता है जब वह दो आवश्यक शर्तों को पूरा करता हो:

  • इसके एक से अधिक संभव परिणाम हों।
  • प्रयोग संपन्न करने से पूर्व किसी विशिष्ट प्रयास के सटीक परिणाम का पूर्वानुमान लगाना असंभव हो, यद्यपि सभी संभव परिणामों की सूची पहले से ज्ञात होती है।
2. प्रयास (Trial), परिणाम (Outcome) एवं प्रतिदर्श समष्टि (Sample Space)

किसी यादृच्छिक प्रयोग को एक बार निष्पादित करना एक प्रयास (Trial) कहलाता है और प्राप्त फल को परिणाम (Outcome) कहते हैं। किसी यादृच्छिक प्रयोग के सभी संभव परिणामों का समुच्चय उस प्रयोग की प्रतिदर्श समष्टि (Sample Space) कहलाता है, जिसे सामान्यतः \(S\) (या \(\Omega\)) द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। प्रतिदर्श समष्टि के प्रत्येक अवयव को प्रतिदर्श बिंदु (Sample Point) कहा जाता है।

3. प्रमुख प्रतिदर्श समष्टियाँ
यादृच्छिक प्रयोग प्रतिदर्श समष्टि \(S\) प्रतिदर्श बिंदुओं की संख्या \(n(S)\)
एक निष्पक्ष सिक्के को उछालना \(S = \{H, T\}\) (शीर्ष, पुच्छ) \(2^1 = 2\)
\(n\) सिक्के एक साथ उछालना \(S = \{(x_1, x_2, \dots, x_n) : x_i \in \{H, T\}\}\) \(2^n\)
एक पासे को फेंकना \(S = \{1, 2, 3, 4, 5, 6\}\) \(6^1 = 6\)
दो पासों को एक साथ फेंकना \(S = \{(i, j) : 1 \le i, j \le 6\}\) \(6^2 = 36\)
ताश की गड्डी में से एक पत्ता निकालना 4 सूट \(\times\) 13 प्रकार के पत्ते \(52\)
ताश के 52 पत्तों की संरचना:

ताश की एक मानक गड्डी में कुल 52 पत्ते होते हैं जो दो रंगों में विभाजित हैं: 26 लाल (पान ♥ और ईंट ♦) तथा 26 काले (हुकुम ♠ और चिड़ी ♣)। कुल 4 सूट (रंग-प्रकार) होते हैं, प्रत्येक में 13 पत्ते: इक्का (Ace), 2 से 10 तक संख्याएँ, गुलाम (Jack), बेगम (Queen) और बादशाह (King)। कुल 12 चित्र वाले पत्तों को तस्वीर वाले पत्ते (Face Cards) (Jack, Queen, King) तथा 16 पत्तों (इक्का, बादशाह, बेगम, गुलाम) को प्रतिष्ठित पत्ते (Honor Cards) कहा जाता है।

मॉड्यूल 2: घटना बीजगणित एवं घटनाओं के प्रकार

आधुनिक प्रायिकता में किसी भी घटना को प्रतिदर्श समष्टि के उपसमुच्चय के रूप में परिभाषित किया जाता है।

1. घटना की औपचारिक परिभाषा

प्रतिदर्श समष्टि \(S\) का कोई भी उपसमुच्चय \(E\) एक घटना (Event) कहलाता है (\(E \subseteq S\))। यदि प्रयोग का वास्तविक परिणाम समुच्चय \(E\) का कोई अवयव हो, तो हम कहते हैं कि घटना \(E\) घटित हुई है।

2. घटनाओं के विभिन्न प्रकार
  • सरल घटना (Simple Event): वह घटना जिसमें केवल एक ही प्रतिदर्श बिंदु हो, अर्थात् \(n(E) = 1\)।
  • मिश्र / संयुक्त घटना (Compound Event): वह घटना जिसमें दो या अधिक प्रतिदर्श बिंदु हों। जैसे पासे पर सम संख्या आना \(E = \{2, 4, 6\}\)।
  • असंभव घटना (Impossible Event - \(\emptyset\)): वह घटना जिसमें कोई परिणाम न हो; इसकी प्रायिकता शून्य होती है: \(P(\emptyset) = 0\)। जैसे पासे पर अंक 7 आना।
  • निश्चित घटना (Certain / Sure Event - \(S\)): पूरी प्रतिदर्श समष्टि; इसका घटित होना निश्चित होता है: \(P(S) = 1\)। जैसे पासे पर 1 से 6 तक कोई अंक आना।
  • पूरक घटना (Complementary Event - \(E'\)): घटना \(E\) के न घटने की घटना \(E' = S - E\)।
3. घटनाओं का समुच्चय बीजगणित
शाब्दिक विवरण समुच्चय संकेतन प्रायिकता में अर्थ
"A नहीं" \(A'\) या \(A^c\) या \(\bar{A}\) घटना A घटित नहीं होती
"A या B" (कम से कम एक) \(A \cup B\) घटना A या B में से कम से कम एक घटित होती है
"A और B" (दोनों) \(A \cap B\) दोनों घटनाएँ A तथा B एक साथ घटित होती हैं
"A किंतु B नहीं" \(A - B = A \cap B'\) केवल घटना A घटित होती है
"न तो A और न ही B" \(A' \cap B' = (A \cup B)'\) A अथवा B में से कोई भी घटित नहीं होती
"A व B में से ठीक एक" \((A \cap B') \cup (A' \cap B)\) या तो केवल A या केवल B घटित होती है
4. परस्पर अपवर्जी एवं निःशेष घटनाएँ

दो घटनाएँ \(A\) और \(B\) परस्पर अपवर्जी (Mutually Exclusive) कहलाती हैं यदि वे एक साथ घटित न हो सकें, अर्थात् उनका कोई उभयनिष्ठ परिणाम न हो:

\[A \cap B = \emptyset \implies P(A \cap B) = 0\]

घटनाओं का समूह \(E_1, E_2, \dots, E_k\) निःशेष (Exhaustive) कहलाता है यदि उनका संघ पूरी प्रतिदर्श समष्टि के बराबर हो:

\[\bigcup_{i=1}^k E_i = E_1 \cup E_2 \cup \dots \cup E_k = S \implies P\left(\bigcup_{i=1}^k E_i\right) = 1\]

मॉड्यूल 3: प्रायिकता की चिरप्रतिष्ठित परिभाषा एवं संचय विधियाँ

सन् 1812 में पियरे-साइमन लाप्लास ने प्रायिकता की शास्त्रीय या चिरप्रतिष्ठित परिभाषा प्रतिपादित की।

1. लाप्लास की शास्त्रीय परिभाषा (Laplace Classical Definition)

यदि किसी यादृच्छिक प्रयोग के कुल \(n\) परिणाम परस्पर अपवर्जी, निःशेष और समप्रायिक (Equally Likely) हों, तथा इनमें से \(m\) परिणाम किसी घटना \(E\) के अनुकूल हों, तो घटना \(E\) की प्रायिकता \(P(E)\) होगी:

\[P(E) = \frac{n(E)}{n(S)} = \frac{m}{n} = \frac{\text{घटना } E\text{ के अनुकूल परिणामों की संख्या}}{\text{प्रयोग के कुल संभव परिणामों की संख्या}}\]
2. समप्रायिक परिणाम (Equally Likely Outcomes)

परिणामों को समप्रायिक कहा जाता है जब किसी एक परिणाम के घटित होने की संभावना अन्य किसी परिणाम से अधिक न हो। निष्पक्ष सिक्का, संतुलित पासा और अच्छी तरह फेंटे गए ताश के पत्ते समप्रायिकता के प्रमुख उदाहरण हैं।

3. संचय (Combinations) द्वारा गणना

जब प्रतिदर्श समष्टि बड़ी हो, तब परिणामों की गणना संचय सूत्रों से की जाती है:

  • \(n\) में से \(r\) वस्तुओं का चयन: बिना क्रम के चयन के कुल तरीके: \[\binom{n}{r} = \frac{n!}{r!(n - r)!}\]
  • बिना प्रतिस्थापन के गेंद निकालना: यदि एक थैले में \(w\) सफेद और \(b\) काली गेंदें हों (कुल \(w + b\)), तथा \(k\) गेंदें निकाली जाएँ, तो ठीक \(x\) सफेद गेंदें प्राप्त होने की प्रायिकता: \[P(X = x) = \frac{\binom{w}{x} \binom{b}{k - x}}{\binom{w + b}{k}}\]
4. शास्त्रीय परिभाषा की सीमाएं
  1. चक्रक दोष: परिभाषा में "समप्रायिक" शब्द आया है जिसका अर्थ "समान प्रायिकता वाला" होता है; अतः प्रायिकता को प्रायिकता से ही परिभाषित किया गया है।
  2. सीमित अनुप्रयोग: जब परिणाम समप्रायिक न हों (जैसे भारी किया हुआ पासा) अथवा परिणाम अनंत हों, तो यह परिभाषा सर्वथा अप्रभावी हो जाती है।

मॉड्यूल 4: प्रायिकता का अभिगृहीतीय दृष्टिकोण (कोलमोगोरोव ढांचा)

1933 में आंद्रे कोलमोगोरोव ने माप सिद्धांत (Measure Theory) के आधार पर प्रायिकता को सुदृढ़ अभिगृहीतीय आधार प्रदान किया।

1. कोलमोगोरोव के तीन मूल अभिगृहीत

मान लीजिए \(S\) एक प्रतिदर्श समष्टि है। एक वास्तविक मान फलन \(P\) को प्रायिकता कहा जाएगा यदि यह निम्नलिखित तीन अभिगृहीतों को संतुष्ट करता हो:

कोलमोगोरोव के तीन मूल अभिगृहीत:
  • अभिगृहीत 1 (अऋणात्मकता का अभिगृहीत): किसी भी घटना \(E \subseteq S\) के लिए, \[P(E) \ge 0\]
  • अभिगृहीत 2 (निश्चितता का अभिगृहीत): पूरी प्रतिदर्श समष्टि \(S\) के लिए, \[P(S) = 1\]
  • अभिगृहीत 3 (योग का अभिगृहीत): यदि \(A\) और \(B\) परस्पर अपवर्जी घटनाएँ हों (\(A \cap B = \emptyset\)), तो \[P(A \cup B) = P(A) + P(B)\] व्यापक रूप से, परस्पर अपवर्जी घटनाओं के अनुक्रम \(A_1, A_2, \dots\) के लिए: \[P\left(\bigcup_{i=1}^\infty A_i\right) = \sum_{i=1}^\infty P(A_i)\]
2. अभिगृहीतों से प्राप्त महत्वपूर्ण परिणाम
  • प्रमेय 1: असंभव घटना की प्रायिकता शून्य होती है।
    चूँकि \(S \cup \emptyset = S\) और \(S \cap \emptyset = \emptyset\), अभिगृहीत 3 से: \(P(S) + P(\emptyset) = P(S) \implies P(\emptyset) = 0\)।
  • प्रमेय 2: पूरक घटना की प्रायिकता।
    किसी भी घटना \(A\) के लिए \(A \cup A' = S\) और \(A \cap A' = \emptyset\), अतः: \[P(A) + P(A') = P(S) = 1 \implies P(A') = 1 - P(A)\]
  • प्रमेय 3: प्रायिकता की सीमा।
    अभिगृहीत 1 से \(P(A') \ge 0 \implies 1 - P(A) \ge 0 \implies P(A) \le 1\)। अतः: \[0 \le P(A) \le 1\]
  • प्रमेय 4: एकदिष्टता गुण (Monotonicity)।
    यदि \(A \subseteq B\), तो \(P(A) \le P(B)\) तथा \(P(B - A) = P(B) - P(A)\)।

मॉड्यूल 5: प्रायिकता का योग प्रमेय एवं संयुक्त घटनाएँ

जब घटनाएँ परस्पर अपवर्जी नहीं होतीं, तब उनके संघ की प्रायिकता ज्ञात करने हेतु सामान्य योग प्रमेय का प्रयोग किया जाता है।

1. दो घटनाओं हेतु सामान्य योग प्रमेय

प्रतिदर्श समष्टि \(S\) की किन्हीं दो घटनाओं \(A\) तथा \(B\) के लिए:

\[P(A \cup B) = P(A) + P(B) - P(A \cap B)\]
उपपत्ति (Proof):

वेन आरेख से, \(A \cup B = A \cup (B - (A \cap B))\), जहाँ \(A\) और \(B - (A \cap B)\) परस्पर असंयुक्त हैं। अभिगृहीत 3 से: \[P(A \cup B) = P(A) + P(B - (A \cap B))\] अंतर गुणधर्म से \(P(B - (A \cap B)) = P(B) - P(A \cap B)\)। अतः: \[P(A \cup B) = P(A) + P(B) - P(A \cap B)\] यदि \(A\) और \(B\) परस्पर अपवर्जी हों, तो \(A \cap B = \emptyset \implies P(A \cap B) = 0\), जिससे \(P(A \cup B) = P(A) + P(B)\) प्राप्त होता है।

2. तीन घटनाओं हेतु योग प्रमेय

किन्हीं तीन घटनाओं \(A, B, C\) के लिए:

\[P(A \cup B \cup C) = P(A) + P(B) + P(C) - P(A \cap B) - P(B \cap C) - P(C \cap A) + P(A \cap B \cap C)\]
3. प्रमुख व्युत्पन्न सूत्र
संयुक्त घटना प्रायिकता का सूत्र
केवल A घटित होती है (A किंतु B नहीं) \(P(A \cap B') = P(A - B) = P(A) - P(A \cap B)\)
केवल B घटित होती है (B किंतु A नहीं) \(P(B \cap A') = P(B - A) = P(B) - P(A \cap B)\)
A व B में से ठीक एक घटित होती है \(P(A) + P(B) - 2P(A \cap B) = P(A \cup B) - P(A \cap B)\)
न तो A और न ही B (डी मॉर्गन 1) \(P(A' \cap B') = 1 - P(A \cup B)\)
दोनों एक साथ नहीं (डी मॉर्गन 2) \(P(A' \cup B') = 1 - P(A \cap B)\)
4. बूल एवं बॉनफेरोनी की असमिकाएँ

चूँकि \(P(A \cap B) \ge 0\), योग प्रमेय से बूल की असमिका (Boole's Inequality) मिलती है: \[P(A \cup B) \le P(A) + P(B)\] तथा \(P(A \cup B) \le 1\) होने के कारण बॉनफेरोनी की असमिका (Bonferroni's Inequality) प्राप्त होती है: \[P(A \cap B) \ge P(A) + P(B) - 1\]

मॉड्यूल 6: संयोगानुपात (Odds) एवं व्यावहारिक अनुप्रयोग

व्यावहारिक सांख्यिकी, खेलों और जोखिम विश्लेषण में संभावनाओं को अक्सर संयोगानुपात (Odds) के रूप में व्यक्त किया जाता है।

1. अनुकूल एवं प्रतिकूल संयोगानुपात

मान लीजिए किसी प्रयोग के \(n\) समप्रायिक परिणामों में से \(m\) परिणाम घटना \(E\) के अनुकूल और शेष \(n - m\) परिणाम प्रतिकूल हैं।

  • अनुकूल संयोगानुपात (Odds in Favor): अनुकूल और प्रतिकूल परिणामों का अनुपात: \[\text{अनुकूल संयोगानुपात } = \frac{m}{n - m} = \frac{P(E)}{1 - P(E)}\] अनुपात रूप में \(m : (n - m)\)।
  • प्रतिकूल संयोगानुपात (Odds Against): प्रतिकूल और अनुकूल परिणामों का अनुपात: \[\text{प्रतिकूल संयोगानुपात } = \frac{n - m}{m} = \frac{1 - P(E)}{P(E)}\] अनुपात रूप में \((n - m) : m\)।
2. संयोगानुपात से प्रायिकता रूपांतरण
दिया गया संयोगानुपात घटना घटने की प्रायिकता \(P(E)\) घटना न घटने की प्रायिकता \(P(E')\)
अनुकूल संयोगानुपात \(a : b\) \(P(E) = \frac{a}{a + b}\) \(P(E') = \frac{b}{a + b}\)
प्रतिकूल संयोगानुपात \(a : b\) \(P(E) = \frac{b}{a + b}\) \(P(E') = \frac{a}{a + b}\)
3. परीक्षा हेतु चरणबद्ध समस्या समाधान विधि
  1. प्रतिदर्श समष्टि एवं \(n(S)\) की पहचान: कुल परिणामों की संख्या संचय \(\binom{n}{r}\) या गणना के मूलभूत सिद्धांत से ज्ञात करें।
  2. घटनाओं का प्रतीकात्मक निरूपण: घटना को \(A, B, C\) जैसे स्पष्ट प्रतीकों से दर्शाएँ।
  3. समुच्चय संकेतन में रूपांतरण: प्रश्न के शब्दों को समुच्चय संक्रियाओं में बदलें (जैसे "कम से कम एक" \(\to A \cup B\), "दोनों" \(\to A \cap B\), "कोई भी नहीं" \(\to A' \cap B'\))।
  4. अपवर्जिता की जाँच: देखें कि \(A \cap B = \emptyset\) है या नहीं, और तदनुसार उपयुक्त सूत्र का चयन करें।
  5. प्रायिकता सीमा सत्यापन: सुनिश्चित करें कि अंतिम उत्तर \([0, 1]\) के अंतराल में ही स्थित हो।

महत्वपूर्ण सूत्र, सर्वसमिकाएँ एवं प्रमेय

प्रायिकता की चिरप्रतिष्ठित (शास्त्रीय) परिभाषा
$$P(E) = \frac{n(E)}{n(S)} = \frac{m}{n}$$
कोलमोगोरोव के तीन मूल अभिगृहीत
$$P(E) \ge 0, \quad P(S) = 1, \quad P(A \cup B) = P(A) + P(B) \; (A \cap B = \emptyset)$$
दो घटनाओं हेतु सामान्य योग प्रमेय
$$P(A \cup B) = P(A) + P(B) - P(A \cap B)$$
तीन घटनाओं हेतु सामान्य योग प्रमेय
$$P(A \cup B \cup C) = \sum P(A) - \sum P(A \cap B) + P(A \cap B \cap C)$$
पूरक घटनाएँ एवं डी मॉर्गन के नियम
$$P(A') = 1 - P(A), \quad P(A' \cap B') = 1 - P(A \cup B), \quad P(A - B) = P(A) - P(A \cap B)$$
अनुकूल एवं प्रतिकूल संयोगानुपात रूपांतरण
Odds in Favor = {P(E)}{1 - P(E)} = {m}{n - m}, P(E) = {a}{a + b} \; (अनुकूल a:b)

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
अच्छी तरह फेंटे गए 52 ताश के पत्तों की एक गड्डी में से यादृच्छिक रूप से एक पत्ता निकाला जाता है। निकाले गए पत्ते के: (i) एक लाल तस्वीर वाला पत्ता (Red Face Card), और (ii) एक काला बादशाह या एक लाल इक्का होने की प्रायिकता ज्ञात कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

चरण 1: कुल प्रतिदर्श समष्टि

ताश की गड्डी में कुल \(n(S) = 52\) पत्ते होते हैं।

चरण 2: उप-प्रश्न (i) — लाल तस्वीर वाला पत्ता (Face Card)

तस्वीर वाले पत्ते गुलाम (Jack), बेगम (Queen) और बादशाह (King) होते हैं (प्रत्येक सूट में 3 पत्ते)। लाल रंग के 2 सूट होते हैं: पान (♥) और ईंट (♦)।

\[\text{लाल तस्वीर वाले पत्तों की संख्या } m_1 = 2 \times 3 = 6\] \[P(\text{लाल तस्वीर वाला पत्ता}) = \frac{m_1}{n(S)} = \frac{6}{52} = \frac{3}{26}\]

चरण 3: उप-प्रश्न (ii) — काला बादशाह या लाल इक्का

माना \(A\) = काला बादशाह निकालने की घटना तथा \(B\) = लाल इक्का निकालने की घटना। काले बादशाह 2 होते हैं (हुकुम व चिड़ी) \(\implies n(A) = 2\)। लाल इक्के 2 होते हैं (पान व ईंट) \(\implies n(B) = 2\)। चूँकि कोई भी पत्ता एक साथ बादशाह और इक्का नहीं हो सकता, घटनाएँ परस्पर अपवर्जी हैं: \(A \cap B = \emptyset\)।

\[n(A \cup B) = n(A) + n(B) = 2 + 2 = 4\] \[P(A \cup B) = \frac{4}{52} = \frac{1}{13}\]

उत्तर: (i) \(\frac{3}{26}\), (ii) \(\frac{1}{13}\)।

उदाहरण 2
दो निष्पक्ष पासों को एक साथ फेंका जाता है। प्राप्त अंकों के: (i) द्विक (Doublet), (ii) योग 9 से अधिक, और (iii) योग सम संख्या अथवा 3 से विभाज्य होने की प्रायिकता ज्ञात कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

चरण 1: कुल प्रतिदर्श समष्टि

दो पासों के लिए कुल परिणाम \(n(S) = 6 \times 6 = 36\) होते हैं।

चरण 2: उप-प्रश्न (i) — द्विक (Doublet) प्राप्त होना

द्विक का अर्थ दोनों पासों पर समान अंक आना: \(E_1 = \{(1,1), (2,2), (3,3), (4,4), (5,5), (6,6)\}\)।

\[n(E_1) = 6 \implies P(E_1) = \frac{6}{36} = \frac{1}{6}\]

चरण 3: उप-प्रश्न (ii) — योग 9 से अधिक होना

9 से अधिक संभावित योग 10, 11 और 12 हैं:

  • योग 10: \(\{(4,6), (5,5), (6,4)\}\) (3 युग्म)
  • योग 11: \(\{(5,6), (6,5)\}\) (2 युग्म)
  • योग 12: \(\{(6,6)\}\) (1 युग्म)
\[n(E_2) = 3 + 2 + 1 = 6 \implies P(E_2) = \frac{6}{36} = \frac{1}{6}\]

चरण 4: उप-प्रश्न (iii) — योग सम संख्या अथवा 3 से विभाज्य होना

माना \(A\) = योग सम संख्या है, तथा \(B\) = योग 3 से विभाज्य है।

  • सम योग (2, 4, 6, 8, 10, 12): कुल 36 में से ठीक आधे यानी 18 युग्म \(\implies n(A) = 18, P(A) = \frac{18}{36}\)।
  • 3 से विभाज्य योग (3, 6, 9, 12): योग 3 (2), योग 6 (5), योग 9 (4), योग 12 (1) \(\implies n(B) = 2 + 5 + 4 + 1 = 12, P(B) = \frac{12}{36}\)।
  • उभयनिष्ठ \(A \cap B\): योग सम भी हो और 3 से विभाज्य भी हो (अर्थात् 6 का गुणज: योग 6 या योग 12)। योग 6 (5) + योग 12 (1) = 6 युग्म \(\implies n(A \cap B) = 6, P(A \cap B) = \frac{6}{36}\)।

सामान्य योग प्रमेय से:

\[P(A \cup B) = P(A) + P(B) - P(A \cap B) = \frac{18}{36} + \frac{12}{36} - \frac{6}{36} = \frac{24}{36} = \frac{2}{3}\]

उत्तर: (i) \(\frac{1}{6}\), (ii) \(\frac{1}{6}\), (iii) \(\frac{2}{3}\)।

उदाहरण 3
यदि P(A) = 3/8, P(B) = 1/2, और P(A ∩ B) = 1/4 हो, तो ज्ञात कीजिए: (i) P(A ∪ B), (ii) P(A' ∩ B'), (iii) P(A ∩ B'), तथा (iv) P(A' ∪ B')।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

चरण 1: P(A ∪ B) की गणना

\[P(A \cup B) = P(A) + P(B) - P(A \cap B) = \frac{3}{8} + \frac{1}{2} - \frac{1}{4} = \frac{3}{8} + \frac{4}{8} - \frac{2}{8} = \frac{5}{8}\]

चरण 2: P(A' ∩ B') की गणना (न तो A और न ही B)

डी मॉर्गन के प्रथम नियमानुसार \(A' \cap B' = (A \cup B)'\):

\[P(A' \cap B') = 1 - P(A \cup B) = 1 - \frac{5}{8} = \frac{3}{8}\]

चरण 3: P(A ∩ B') की गणना (केवल A घटित होना)

अंतर नियम से \(P(A - B) = P(A \cap B') = P(A) - P(A \cap B)\):

\[P(A \cap B') = \frac{3}{8} - \frac{1}{4} = \frac{3}{8} - \frac{2}{8} = \frac{1}{8}\]

चरण 4: P(A' ∪ B') की गणना (दोनों एक साथ नहीं)

डी मॉर्गन के द्वितीय नियमानुसार \(A' \cup B' = (A \cap B)'\):

\[P(A' \cup B') = 1 - P(A \cap B) = 1 - \frac{1}{4} = \frac{3}{4}\]

उत्तर: (i) \(\frac{5}{8}\), (ii) \(\frac{3}{8}\), (iii) \(\frac{1}{8}\), (iv) \(\frac{3}{4}\)।

उदाहरण 4
5 पुरुषों, 4 महिलाओं और 3 बच्चों के समूह में से यादृच्छिक रूप से 4 व्यक्तियों की एक समिति चुनी जानी है। समिति में: (i) ठीक 2 पुरुष होने, (ii) कम से कम 1 महिला होने, और (iii) कोई भी बच्चा न होने की प्रायिकता ज्ञात कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

चरण 1: कुल प्रतिदर्श समष्टि n(S)

कुल व्यक्ति \(= 5 + 4 + 3 = 12\)। 12 में से 4 व्यक्ति चुनने के कुल तरीके:

\[n(S) = \binom{12}{4} = \frac{12 \times 11 \times 10 \times 9}{4 \times 3 \times 2 \times 1} = 495\]

चरण 2: उप-प्रश्न (i) — ठीक 2 पुरुष होना

5 पुरुषों में से 2 तथा शेष \(4 + 3 = 7\) गैर-पुरुषों (महिलाएँ व बच्चे) में से 2 चुनने के तरीके:

\[n(E_1) = \binom{5}{2} \times \binom{7}{2} = 10 \times 21 = 210\] \[P(E_1) = \frac{210}{495} = \frac{14}{33}\]

चरण 3: उप-प्रश्न (ii) — कम से कम 1 महिला होना

पूरक विधि: \(P(\text{कम से कम 1 महिला}) = 1 - P(\text{कोई महिला नहीं})\)। कोई महिला न लेकर 4 व्यक्ति शेष \(5 + 3 = 8\) व्यक्तियों (पुरुष व बच्चे) में से चुनने के तरीके:

\[n(\text{कोई महिला नहीं}) = \binom{8}{4} = \frac{8 \times 7 \times 6 \times 5}{4 \times 3 \times 2 \times 1} = 70\] \[P(\text{कोई महिला नहीं}) = \frac{70}{495} = \frac{14}{99}\] \[P(\text{कम से कम 1 महिला}) = 1 - \frac{14}{99} = \frac{85}{99}\]

चरण 4: उप-प्रश्न (iii) — कोई बच्चा न होना

कोई बच्चा न लेकर 4 व्यक्ति केवल वयस्कों (5 पुरुष + 4 महिलाएँ = 9 वयस्क) में से चुनने के तरीके:

\[n(E_3) = \binom{9}{4} = \frac{9 \times 8 \times 7 \times 6}{4 \times 3 \times 2 \times 1} = 126\] \[P(E_3) = \frac{126}{495} = \frac{14}{55}\]

उत्तर: (i) \(\frac{14}{33}\), (ii) \(\frac{85}{99}\), (iii) \(\frac{14}{55}\)।

उदाहरण 5
कक्षा के 60 विद्यार्थियों में से 30 ने एनसीसी (NCC), 32 ने एनएसएस (NSS) और 24 ने दोनों को चुना। यदि एक विद्यार्थी यादृच्छया चुना जाए, तो प्रायिकता ज्ञात कीजिए कि: (i) उसने NCC या NSS चुना हो, (ii) उसने दोनों में से कोई भी न चुना हो, और (iii) उसने NSS चुना हो किंतु NCC नहीं। साथ ही, विद्यार्थी द्वारा कोई भी न चुने जाने के अनुकूल एवं प्रतिकूल संयोगानुपात ज्ञात कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

चरण 1: समुच्चय संकेतन

माना \(A\) = NCC तथा \(B\) = NSS चुनने वाले विद्यार्थी। कुल विद्यार्थी \(n(S) = 60\)।

\[n(A) = 30 \implies P(A) = \frac{30}{60} = \frac{1}{2}\] \[n(B) = 32 \implies P(B) = \frac{32}{60} = \frac{8}{15}\] \[n(A \cap B) = 24 \implies P(A \cap B) = \frac{24}{60} = \frac{2}{5}\]

चरण 2: उप-प्रश्न (i) — NCC या NSS चुनना

\[P(A \cup B) = P(A) + P(B) - P(A \cap B) = \frac{30}{60} + \frac{32}{60} - \frac{24}{60} = \frac{38}{60} = \frac{19}{30}\]

चरण 3: उप-प्रश्न (ii) — कोई भी न चुनना

डी मॉर्गन के प्रथम नियमानुसार:

\[P(A' \cap B') = 1 - P(A \cup B) = 1 - \frac{19}{30} = \frac{11}{30}\]

चरण 4: उप-प्रश्न (iii) — केवल NSS चुनना (NSS किंतु NCC नहीं)

\[P(B \cap A') = P(B - A) = P(B) - P(A \cap B) = \frac{32}{60} - \frac{24}{60} = \frac{8}{60} = \frac{2}{15}\]

चरण 5: कोई भी न चुनने का अनुकूल एवं प्रतिकूल संयोगानुपात

माना \(E\) = कोई भी न चुनने की घटना। यहाँ \(P(E) = \frac{11}{30}\), अतः \(P(E') = 1 - \frac{11}{30} = \frac{19}{30}\)।

\[\text{अनुकूल संयोगानुपात } = \frac{P(E)}{P(E')} = \frac{11/30}{19/30} = \frac{11}{19} \implies 11 : 19\] \[\text{प्रतिकूल संयोगानुपात } = \frac{P(E')}{P(E)} = \frac{19/30}{11/30} = \frac{19}{11} \implies 19 : 11\]

उत्तर: (i) \(\frac{19}{30}\), (ii) \(\frac{11}{30}\), (iii) \(\frac{2}{15}\); अनुकूल अनुपात: \(11 : 19\); प्रतिकूल अनुपात: \(19 : 11\)।

उदाहरण 6
तीन उम्मीदवार A, B और C एक छात्रवृत्ति नामांकन की दौड़ में हैं। उम्मीदवार A के पक्ष में अनुकूल संयोगानुपात 1 : 2 तथा उम्मीदवार B के विपक्ष में प्रतिकूल संयोगानुपात 3 : 2 है। केवल एक ही उम्मीदवार जीत सकता है और घटनाएँ परस्पर अपवर्जी हैं। (i) प्रायिकताएँ P(A) और P(B) ज्ञात कीजिए। (ii) यदि A, B और C मिलकर एक निःशेष घटनाओं का समुच्चय (Exhaustive Set) बनाते हैं, तो P(C) तथा उम्मीदवार C के पक्ष में अनुकूल संयोगानुपात ज्ञात कीजिए। (iii) यदि किसी अन्य परिदृश्य में P(C) = 1/10 मापा जाता है, तो क्या तीनों उम्मीदवार मिलकर निःशेष समुच्चय बनाएंगे? कारण सहित स्पष्ट कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

चरण 1: अनुकूल संयोगानुपात से P(A) निकालना

उम्मीदवार \(A\) का अनुकूल संयोगानुपात \(1 : 2\) है। रूपांतरण सूत्र से (जहाँ \(a = 1, b = 2\)):

\[P(A) = \frac{a}{a + b} = \frac{1}{1 + 2} = \frac{1}{3}\]

चरण 2: प्रतिकूल संयोगानुपात से P(B) निकालना

उम्मीदवार \(B\) का प्रतिकूल संयोगानुपात \(3 : 2\) है। प्रतिकूल रूपांतरण सूत्र से (जहाँ \(a = 3, b = 2\)):

\[P(B) = \frac{b}{a + b} = \frac{2}{3 + 2} = \frac{2}{5}\]

चरण 3: उप-प्रश्न (ii) — निःशेषता की स्थिति में P(C) निकालना

चूँकि केवल एक ही उम्मीदवार जीत सकता है, घटनाएँ परस्पर अपवर्जी हैं: \(A \cap B = \emptyset, B \cap C = \emptyset, C \cap A = \emptyset\)। निःशेष घटनाएँ होने पर उनका संघ संपूर्ण प्रतिदर्श समष्टि होगा: \(A \cup B \cup C = S\)। कोलमोगोरोव के अभिगृहीत 2 व 3 से:

\[P(A \cup B \cup C) = P(A) + P(B) + P(C) = P(S) = 1\] \[\frac{1}{3} + \frac{2}{5} + P(C) = 1\]

3 और 5 का ल.स. 15 लेने पर:

\[\frac{5 + 6}{15} + P(C) = 1 \implies \frac{11}{15} + P(C) = 1 \implies P(C) = 1 - \frac{11}{15} = \frac{4}{15}\]

उम्मीदवार \(C\) के पक्ष में अनुकूल संयोगानुपात:

\[\text{Odds in favor of } C = \frac{P(C)}{1 - P(C)} = \frac{4/15}{11/15} = \frac{4}{11} \implies 4 : 11\]

चरण 4: उप-प्रश्न (iii) — जब P(C) = 1/10 हो तो निःशेषता की जाँच

तीनों घटनाओं की प्रायिकताओं का योग निकालते हैं:

\[P(A \cup B \cup C) = P(A) + P(B) + P(C) = \frac{1}{3} + \frac{2}{5} + \frac{1}{10}\]

3, 5 और 10 का ल.स. 30 है:

\[P(A \cup B \cup C) = \frac{10}{30} + \frac{12}{30} + \frac{3}{30} = \frac{25}{30} = \frac{5}{6}\]

घटनाओं के निःशेष होने के लिए कोलमोगोरोव के अभिगृहीत 2 के अनुसार \(P(A \cup B \cup C) = 1\) होना अनिवार्य है। यहाँ \(P(A \cup B \cup C) = \frac{5}{6} < 1\)। प्रतिदर्श समष्टि में कोई अन्य परिणाम शेष बचता है जिसकी प्रायिकता \(1 - 5/6 = 1/6 > 0\) है। अतः तीनों घटनाएँ मिलकर पूरी प्रतिदर्श समष्टि को नहीं ढँकतीं; अर्थात् वे निःशेष घटनाएँ नहीं हैं।

उत्तर: (i) \(P(A) = \frac{1}{3}\), \(P(B) = \frac{2}{5}\); (ii) \(P(C) = \frac{4}{15}\), अनुकूल अनुपात: \(4 : 11\); (iii) निःशेष घटनाएँ नहीं हैं क्योंकि \(P(A \cup B \cup C) = \frac{5}{6} \neq 1\)।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

सही वैज्ञानिक तथ्य

परस्पर अपवर्जी (Mutually Exclusive) और स्वतंत्र (Independent) घटनाएँ बिल्कुल भिन्न अवधारणाएँ हैं। परस्पर अपवर्जी का अर्थ है कि दोनों घटनाएँ एक साथ नहीं घट सकतीं: A ∩ B = ∅ और P(A ∩ B) = 0। जबकि स्वतंत्र घटनाओं का अर्थ है कि एक का घटित होना दूसरे को प्रभावित नहीं करता: P(A ∩ B) = P(A)P(B)। अशून्य प्रायिकता वाली दो घटनाएँ कभी भी एक साथ अपवर्जी और स्वतंत्र नहीं हो सकतीं।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

सही वैज्ञानिक तथ्य

अनुकूल संयोगानुपात का अर्थ अनुकूल : प्रतिकूल = a : b है, जिससे प्रायिकता P(E) = a / (a + b) होती है। जबकि प्रतिकूल संयोगानुपात का अर्थ प्रतिकूल : अनुकूल = a : b है, जिससे प्रायिकता P(E) = b / (a + b) होती है। विद्यार्थी अक्सर प्रतिकूल संयोगानुपात में भी a / (a + b) लिखकर बड़ी भूल कर बैठते हैं।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

सही वैज्ञानिक तथ्य

घटनाओं के अपवर्जी होने की जाँच किए बिना सीधे P(A ∪ B) = P(A) + P(B) लिख देना। जब A ∩ B अशून्य हो, तो दोनों को जोड़ने पर उभयनिष्ठ भाग दो बार जुड़ जाता है, जिससे प्रायिकता 1 से अधिक आ सकती है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

सही वैज्ञानिक तथ्य

विद्यार्थी अक्सर "न तो A और न ही B" को 1 - P(A ∩ B) समझ लेते हैं। वास्तव में 1 - P(A ∩ B) = P(A' ∪ B') होता है जिसका अर्थ है "दोनों एक साथ नहीं"। "न तो A और न ही B" का अर्थ है A भी नहीं और B भी नहीं: A' ∩ B' = (A ∪ B)', जिसकी प्रायिकता 1 - P(A ∪ B) होती है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

सही वैज्ञानिक तथ्य

जब एक के बाद एक पत्ते या गेंदें बिना वापस रखे (Without Replacement) निकाली जाती हैं, तो प्रत्येक चरण पर कुल संख्या (n, n-1, n-2) घटती जाती है। विद्यार्थी प्रायः हर चरण पर मूल संख्या n से ही भाग देकर गलत उत्तर निकालते हैं।

प्रायिकता की मूल अवधारणाएं, कोलमोगोरोव अभिगृहीत एवं योग प्रमेय वास्तुकला

P(E) प्रायिकता — मूल अवधारणाएं, अभिगृहीत एवं योग प्रमेय WBCHSE कक्षा 11 गणित • यूनिट V: सांख्यिकी एवं प्रायिकता 1. प्रतिदर्श समष्टि एवं घटना बीजगणित प्रतिदर्श समष्टि S, उपसमुच्चय घटना E, परस्पर अपवर्जी एवं निःशेष S (Universal Space) A B A ∩ B प्रतिदर्श समष्टि (Sample Space) S = सभी संभव परिणामों का समुच्चय परस्पर अपवर्जी घटनाएँ A ∩ B = ∅ ⇒ P(A ∩ B) = 0 निःशेष घटनाएँ (Exhaustive) A ∪ B = S ⇒ P(A ∪ B) = 1 2. कोलमोगोरोव का अभिगृहीतीय ढांचा अऋणात्मकता, निश्चित घटना P(S)=1, एवं योग नियम Classical / Laplace Definition: P(E) = n(E) / n(S) = m / n कोलमोगोरोव के तीन मूल अभिगृहीत: 1 Non-Negativity Axiom 0 ≤ P(E) ≤ 1 for every event E 2 Certainty Axiom P(S) = 1 (Sure event) & P(∅) = 0 3 Additivity Axiom If A ∩ B = ∅ (Mutually Exclusive): P(A ∪ B) = P(A) + P(B) 3. योग प्रमेय एवं संयोगानुपात (Odds) सामान्य घटनाएँ, डी मॉर्गन नियम एवं अनुकूल/प्रतिकूल अनुपात सामान्य योग प्रमेय (किन्हीं दो घटनाओं हेतु): P(A ∪ B) = P(A) + P(B) - P(A ∩ B) P(A - B) = P(A ∩ B') = P(A) - P(A ∩ B) Three Events Addition Theorem: P(A∪B∪C) = ΣP(A) - ΣP(A∩B) + P(A ∩ B ∩ C) डी मॉर्गन के नियम (De Morgan's Laws): P(A' ∩ B') = 1 - P(A ∪ B) P(A' ∪ B') = 1 - P(A ∩ B) Odds in Favor & Odds Against: Odds in favor a:b ⇒ P(E) = a/(a+b) Odds against b:a ⇒ P(E') = b/(a+b) TargetExams गोल्ड स्टैंडर्ड स्टडी मटेरियल • WBCHSE कक्षा 11 गणित WBCHSE Class 11 • Ch 14

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
यादृच्छिक प्रयोग वह प्रयोग है जिसके सभी संभव परिणाम पहले से ज्ञात होते हैं, किंतु किसी विशिष्ट प्रयास का सटीक परिणाम निश्चित रूप से नहीं बताया जा सकता।
मुख्य बिंदु 2
प्रतिदर्श समष्टि (S) किसी यादृच्छिक प्रयोग के सभी संभव परिणामों का सार्वत्रिक समुच्चय है; इसके प्रत्येक अवयव को प्रतिदर्श बिंदु कहा जाता है।
मुख्य बिंदु 3
घटना (E) प्रतिदर्श समष्टि S का कोई भी उपसमुच्चय है (E ⊆ S); एकल अवयव वाली घटना सरल तथा बहु-अवयवी घटना मिश्र घटना कहलाती है।
मुख्य बिंदु 4
दो घटनाएँ A और B परस्पर अपवर्जी (Mutually Exclusive) कहलाती हैं यदि वे एक साथ घटित न हो सकें, अर्थात् A ∩ B = ∅ और P(A ∩ B) = 0।
मुख्य बिंदु 5
घटनाओं का वह संग्रह निःशेष (Exhaustive) कहलाता है जिसका सम्मिलन पूरी प्रतिदर्श समष्टि के बराबर हो: A ∪ B ∪ ... ∪ K = S एवं P(A ∪ B ∪ ... ∪ K) = 1।
मुख्य बिंदु 6
समप्रायिक परिणामों हेतु लाप्लास की चिरप्रतिष्ठित प्रायिकता अनुकूल परिणामों और कुल संभव परिणामों का अनुपात होती है: P(E) = n(E) / n(S) = m / n।
मुख्य बिंदु 7
कोलमोगोरोव के तीन अभिगृहीत हैं: (1) अऋणात्मकता P(E) ≥ 0, (2) निश्चित घटना की प्रायिकता P(S) = 1, और (3) अपवर्जी घटनाओं हेतु P(A ∪ B) = P(A) + P(B)।
मुख्य बिंदु 8
किन्हीं दो घटनाओं के लिए सामान्य योग प्रमेय है: P(A ∪ B) = P(A) + P(B) - P(A ∩ B); अपवर्जी होने पर P(A ∪ B) = P(A) + P(B)।
मुख्य बिंदु 9
डी मॉर्गन के नियमानुसार किसी भी घटना के न घटने की प्रायिकता P(A' ∩ B') = 1 - P(A ∪ B) तथा दोनों के एक साथ न घटने की प्रायिकता P(A' ∪ B') = 1 - P(A ∩ B) है।
मुख्य बिंदु 10
यदि किसी घटना का अनुकूल संयोगानुपात a : b हो, तो प्रायिकता P(E) = a / (a + b) होती है; तथा प्रतिकूल संयोगानुपात a : b होने पर P(E) = b / (a + b) होती है।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
यादृच्छया चुने गए एक अधिवर्ष (Leap Year) में 53 रविवार होने की प्रायिकता क्या है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: एक लीप वर्ष में 366 दिन होते हैं = 52 सप्ताह + 2 दिन। 52 पूर्ण सप्ताहों में 52 रविवार निश्चित हैं। शेष 2 क्रमिक दिनों के 7 युग्म संभव हैं: {(रवि, सोम), (सोम, मंगल), (मंगल, बुध), (बुध, गुरु), (गुरु, शुक्र), (शुक्र, शनि), (शनि, रवि)}। इन 7 समप्रायिक युग्मों में से ठीक 2 युग्मों में रविवार आता है: (रवि, सोम) तथा (शनि, रवि)। अतः 53 रविवार होने की प्रायिकता 2/7 है।
एक लीप वर्ष में 366 दिन = 52 पूर्ण सप्ताह (364 दिन) + 2 अतिरिक्त क्रमिक दिन। 2 अतिरिक्त दिनों की प्रतिदर्श समष्टि बनाएँ।
2
यदि P(A) = 0.6, P(B) = 0.5 तथा P(A ∪ B) = 0.8 हो, तो मान ज्ञात कीजिए: (i) P(A ∩ B), एवं (ii) P(A' ∩ B)।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (i) P(A ∩ B) = P(A) + P(B) - P(A ∪ B) = 0.6 + 0.5 - 0.8 = 0.3। (ii) P(A' ∩ B) = P(B - A) = P(B) - P(A ∩ B) = 0.5 - 0.3 = 0.2।
P(A ∩ B) = P(A) + P(B) - P(A ∪ B) तथा P(A' ∩ B) = P(B) - P(A ∩ B) का प्रयोग करें।
3
शब्द "PROBABILITY" के 11 अक्षरों में से यादृच्छिक रूप से 2 अक्षर चुने जाते हैं। दोनों चुने गए अक्षरों के स्वर (Vowels) होने की प्रायिकता क्या है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: "PROBABILITY" शब्द में 11 अक्षर हैं। स्वर O, A, I, I हैं (कुल 4 स्वर)। 11 में से 2 अक्षर चुनने के कुल तरीके C(11, 2) = (11 × 10) / 2 = 55 हैं। 4 स्वरों में से 2 स्वर चुनने के तरीके C(4, 2) = (4 × 3) / 2 = 6 हैं। अतः दोनों के स्वर होने की प्रायिकता = 6/55 है।
कुल अक्षर 11 हैं तथा स्वर O, A, I, I (कुल 4 स्वर) हैं।
4
एक अभ्यर्थी के किसी परीक्षा में उत्तीर्ण होने के प्रतिकूल संयोगानुपात 7 : 3 हैं। अभ्यर्थी के परीक्षा उत्तीर्ण करने की प्रायिकता क्या है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: उत्तीर्ण होने का प्रतिकूल संयोगानुपात 7 : 3 है। यहाँ प्रतिकूल परिणाम a = 7 और अनुकूल परिणाम b = 3 हैं। कुल परिणाम = 7 + 3 = 10। अतः परीक्षा उत्तीर्ण करने की प्रायिकता = 3 / (7 + 3) = 3/10 = 0.3 है।
यदि प्रतिकूल संयोगानुपात a : b हो, तो उत्तीर्ण होने की प्रायिकता P = b / (a + b) होती है।
5
क्या किन्हीं दो घटनाओं A और B के लिए P(A) = 0.7, P(B) = 0.8 तथा P(A ∩ B) = 0.4 होना संभव है? कोलमोगोरोव के अभिगृहीतों से स्पष्ट कीजिए।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: योग प्रमेय से: P(A ∪ B) = P(A) + P(B) - P(A ∩ B) = 0.7 + 0.8 - 0.4 = 1.1। परंतु कोलमोगोरोव के अभिगृहीत 2 के अनुसार किसी भी घटना की प्रायिकता अधिकतम 1 हो सकती है (P(E) ≤ 1)। चूँकि P(A ∪ B) = 1.1 > 1 है, यह प्रायिकता के मूलभूत अभिगृहीत का उल्लंघन करता है। अतः ऐसा प्रायिकता मान असंभव है।
योग प्रमेय से P(A ∪ B) निकालें और अभिगृहीत 2 से तुलना करें।
अध्याय का अध्ययन पूर्ण हुआ?
अभ्यास के लिए तैयार?

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