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WBB • कक्षा XI • Mathematics • अध्याय 1
अनुमानित समय: 65 मिनट
प्रगति: अध्ययनरत

समुच्चय सिद्धांत

उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्ध में जर्मन गणितज्ञ जॉर्ज कैंटर (Georg Cantor) द्वारा प्रतिपादित समुच्चय सिद्धांत (Set Theory) आधुनिक गणित की आधारशिला माना जाता है। बीजगणित, कलन (Calculus), प्रायिकता, सांस्थितिकी (Topology) तथा कंप्यूटर विज्ञान का प्रत्येक क्षेत्र समुच्चय सिद्धांत के मूल सिद्धांतों पर आधारित है। गणितीय परिभाषा के अनुसार समुच्चय सुपरिभाषित एवं भिन्न-भिन्न वस्तुओं का संग्रह (well-defined collection of distinct objects) है। सुपरिभाषित होने का तात्पर्य यह है कि एक ऐसा वस्तुनिष्ठ और असंदिग्ध नियम होना चाहिए जिसके द्वारा किसी भी वस्तु के बारे में निश्चित रूप से यह तय किया जा सके कि वह उस संग्रह में सम्मिलित है या नहीं। समुच्चय को मुख्य रूप से दो विधियों द्वारा निरूपित किया जाता है: रोस्टर या सारणीबद्ध रूप (Roster form) और समुच्चय निर्माण रूप (Set-builder form)। रिक्त समुच्चय, एकल समुच्चय, परिमित एवं अपरिमित समुच्चय, समान समुच्चय तथा तुल्य समुच्चय इसके प्रमुख प्रकार हैं। n अवयवों वाले किसी परिमित समुच्चय के कुल 2^n उपसमुच्चय होते हैं और उनके संग्रह को घात समुच्चय (Power Set) कहा जाता है। जॉन वेन द्वारा प्रतिपादित वेन आरेख की सहायता से सम्मिलन (Union), सर्वनिष्ठ (Intersection), अंतर (Difference), सममित अंतर (Symmetric Difference) और पूरक (Complement) जैसी संक्रियाओं का दृश्य निरूपण किया जाता है। डी मॉर्गन के नियम तथा समावेशन-अपवर्जन सिद्धांत व्यावहारिक सांख्यिकीय सर्वेक्षणों एवं वास्तविक गणनाओं का सटीक समाधान प्रस्तुत करते हैं।

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

कक्षा 11 उच्च माध्यमिक गणित, पश्चिम बंगाल संयुक्त प्रवेश परीक्षा (WBJEE) तथा जेईई मेन (JEE Main) जैसी प्रतिष्ठित राष्ट्रीय परीक्षाओं के लिए समुच्चय सिद्धांत की गहरी समझ अनिवार्य है। कलन (Calculus) में फलनों के प्रांत (Domain), परिसर (Range), सांतत्य (Continuity) तथा अवकलनीयता को वास्तविक संख्याओं के समुच्चयों के मध्य संबंधों के रूप में ही परिभाषित किया जाता है। कंप्यूटर विज्ञान में रिलेशनल डेटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम (RDBMS) और एसक्यूएल (SQL) के INNER JOIN, LEFT JOIN तथा UNION ऑपरेशन सीधे समुच्चय संक्रियाओं के व्यावहारिक अनुप्रयोग हैं। सर्च इंजन इंटरनेट पर अरबों वेब पेजों में से प्रासंगिक जानकारी खोजने के लिए बूलियन सेट ऑपरेटरों (AND, OR, NOT) का प्रयोग करते हैं। इसके अतिरिक्त रूसी गणितज्ञ आंद्रे कोलमोगोरोव के प्रायिकता सिद्धांत में प्रतिदर्श समष्टि (Sample Space) एक सार्वत्रिक समुच्चय है तथा घटनाएँ (Events) उसके उपसमुच्चय होती हैं। पश्चिम बंगाल बोर्ड परीक्षा में समुच्चय बीजगणित के प्रमाण, डी मॉर्गन के नियमों का विश्लेषण तथा 3 समुच्चयों के सर्वेक्षण आधारित प्रश्नों से 4 से 5 अंक के प्रश्न प्रतिवर्ष पूछे जाते हैं।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. समुच्चय सिद्धांत की ऐतिहासिक उत्...
2 2. समुच्चयों के प्रकार, गणनीयता, उप...
3 3. घात समुच्चय (Power Set), सार्वत्...
4 4. समुच्चय संक्रियाएं: सम्मिलन, सर्...
5 5. समुच्चय बीजगणित एवं डी मॉर्गन के...
6 6. गणनीयता सिद्धांत, समावेशन-अपवर्ज...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. समुच्चय सिद्धांत की ऐतिहासिक उत्पत्ति, परिभाषा एवं निरूपण

उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्ध में 1874 ईस्वी में जर्मन गणितज्ञ जॉर्ज कैंटर (Georg Cantor) ने त्रिकोणमितीय श्रेणियों और सांतत्यक पर शोध करते समय समुच्चय सिद्धांत का आविष्कार किया। प्रारंभ में विरोध के बावजूद यह आधुनिक गणित की सार्वभौमिक भाषा बन गया।

1.1 समुच्चय की परिभाषा एवं "सुपरिभाषित" (Well-Defined) का अर्थ

वास्तविक या विचार जगत की सुपरिभाषित एवं परस्पर भिन्न वस्तुओं के संग्रह को समुच्चय (Set) कहते हैं। संग्रह की वस्तुओं को समुच्चय के अवयव या सदस्य (Elements / Members) कहा जाता है।

"सुपरिभाषित" संग्रह की कसौटी: कोई संग्रह तब सुपरिभाषित कहलाता है जब एक ऐसा स्पष्ट और वस्तुनिष्ठ नियम उपस्थित हो जिसके आधार पर किसी भी वस्तु के विषय में बिना किसी संशय के यह तय किया जा सके कि वह उस संग्रह में है अथवा नहीं।
  • वैध समुच्चय: "अंग्रेजी वर्णमाला के स्वरों का संग्रह" — सुपरिभाषित है, क्योंकि {a, e, i, o, u} में कोई मतभेद नहीं है। "20 से छोटी अभाज्य संख्याओं का संग्रह" — सुपरिभाषित है ({2, 3, 5, 7, 11, 13, 17, 19})।
  • अवैध संग्रह (समुच्चय नहीं हैं): "भारत के 5 सर्वश्रेष्ठ वैज्ञानिकों का संग्रह" — समुच्चय नहीं है, क्योंकि "सर्वश्रेष्ठ" एक व्यक्तिपरक विशेषण है जिसका कोई सार्वभौमिक पैमाना नहीं है। "कक्षा 11 गणित के कठिन अध्यायों का संग्रह" — समुच्चय नहीं है।
1.2 गणितीय संकेत एवं सदस्यता (Membership)

समुच्चयों को अंग्रेजी वर्णमाला के बड़े अक्षरों ($A, B, C, X, Y, Z$) द्वारा तथा उनके अवयवों को छोटे अक्षरों ($a, b, c, x, y, z$) या संख्याओं द्वारा दर्शाया जाता है।

  • यदि $x$ समुच्चय $A$ का अवयव है, तो लिखते हैं: $x \in A$ (पढ़ा जाता है: "$x$ belongs to $A$" अथवा "$x$, $A$ का अवयव है")।
  • यदि $x$ समुच्चय $A$ का अवयव नहीं है, तो लिखते हैं: $x \notin A$ (पढ़ा जाता है: "$x$ does not belong to $A$")।
1.3 समुच्चय निरूपण की प्रमुख विधियाँ
विधि विवरण एवं नियम मानक उदाहरण
1. रोस्टर या सारणीबद्ध रूप (Roster / Tabular Form) समुच्चय के सभी अवयवों को अर्धविराम (कमा) द्वारा अलग करके मंजले कोष्ठक $\{ \}$ के भीतर सूचीबद्ध किया जाता है।
नियम 1: अवयवों का क्रम बदलने से समुच्चय पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता: $\{1, 2, 3\} = \{3, 1, 2\}$।
नियम 2: समुच्चय में किसी अवयव की पुनरावृत्ति नहीं की जाती: "TRIGONOMETRY" के अक्षरों का समुच्चय $\{T, R, I, G, O, N, M, E, Y\}$ है।
$V = \{a, e, i, o, u\}$
$P = \{2, 3, 5, 7, 11\}$
$E = \{2, 4, 6, 8, \dots\}$ (अपरिमित)
2. समुच्चय निर्माण रूप (Set-Builder / Rule Form) अवयवों को सीधे सूचीबद्ध न करके एक चर $x$ के माध्यम से उनके विशिष्ट उभयनिष्ठ गुणधर्म $P(x)$ का उल्लेख किया जाता है।
सामान्य प्रारूप: $A = \{x : P(x)\}$ अथवा $\{x \mid P(x)\}$, जिसका अर्थ है: "उन सभी $x$ का समुच्चय जो गुणधर्म $P(x)$ को संतुष्ट करते हैं"।
$V = \{x : x \text{ अंग्रेजी वर्णमाला का एक स्वर है}\}$
$S = \{x \in \mathbb{N} : x^2 - 5x + 6 = 0\}$
$A = \{x : x = 2n, n \in \mathbb{N}\}$
1.4 मानक संख्या समुच्चय

उच्च माध्यमिक गणित में प्रयुक्त सार्वभौमिक संख्या समुच्चय:

  • $\mathbb{N} = \{1, 2, 3, 4, \dots\}$ : सभी प्राकृत संख्याओं का समुच्चय (Natural Numbers)।
  • $\mathbb{W} = \{0, 1, 2, 3, \dots\}$ : सभी पूर्ण संख्याओं का समुच्चय (Whole Numbers)।
  • $\mathbb{Z}$ अथवा $\mathbb{I} = \{\dots, -3, -2, -1, 0, 1, 2, 3, \dots\}$ : सभी पूर्णांकों का समुच्चय (Integers)।
  • $\mathbb{Q} = \left\{\frac{p}{q} : p, q \in \mathbb{Z}, q \neq 0, \gcd(p, q) = 1\right\}$ : सभी परिमेय संख्याओं का समुच्चय (Rational Numbers)।
  • $\mathbb{R}$ : सभी वास्तविक संख्याओं का समुच्चय (Real Numbers) (परिमेय एवं अपरिमेय संख्याओं का समुच्चय)।
  • $\mathbb{C} = \{a + ib : a, b \in \mathbb{R}, i = \sqrt{-1}\}$ : सभी सम्मिश्र संख्याओं का समुच्चय (Complex Numbers)।

2. समुच्चयों के प्रकार, गणनीयता, उपसमुच्चय एवं वास्तविक अंतराल

समुच्चयों के विभिन्न प्रकार तथा उनके मध्य अंतर्विष्टि संबंधों की स्पष्ट समझ उच्च गणित का आधार है।

2.1 समुच्चयों का वर्गीकरण एवं गणनीयता (Cardinality)
  • रिक्त समुच्चय (Empty / Null / Void Set): वह समुच्चय जिसमें एक भी अवयव न हो। इसे डेनिश अक्षर $\emptyset$ (फाई) या खाली कोष्ठक $\{\}$ द्वारा दर्शाया जाता है।
    अवयवों की संख्या: $n(\emptyset) = 0$।
    उदाहरण: $A = \{x \in \mathbb{R} : x^2 + 9 = 0 \text{ तथा } x \in \mathbb{R}\} = \emptyset$; $B = \{x \in \mathbb{N} : 3 < x < 4\} = \emptyset$।
    परीक्षक का जाल: $\{\emptyset\}$ रिक्त समुच्चय नहीं है! यह एक एकल समुच्चय है जिसका एकमात्र अवयव स्वयं $\emptyset$ है। इसी प्रकार $\{0\}$ भी एक एकल समुच्चय है।
  • एकल समुच्चय (Singleton Set): वह समुच्चय जिसमें केवल एक ही अवयव हो। $n(A) = 1$।
    उदाहरण: $A = \{x \in \mathbb{N} : x^2 = 36\} = \{6\}$। सम अभाज्य संख्या का समुच्चय: $\{2\}$।
  • परिमित (Finite) एवं अपरिमित (Infinite) समुच्चय:
    जिस समुच्चय में अवयवों की संख्या निश्चित व गणनीय हो, उसे परिमित समुच्चय कहते हैं। इसके भिन्न अवयवों की संख्या को इसकी प्रमुख संख्या (Cardinal Number) कहते हैं, जिसे $n(A)$ या $|A|$ लिखा जाता है।
    जिस समुच्चय में अवयवों की संख्या अपरिमित हो, उसे अपरिमित समुच्चय कहते हैं (जैसे: $\mathbb{N}, \mathbb{Z}, \mathbb{R}$)।
  • समान समुच्चय (Equal Sets, $A = B$): दो समुच्चय $A$ और $B$ समान कहलाते हैं यदि और केवल यदि उनके अवयव बिल्कुल एक जैसे हों।
    प्रतीकात्मक रूप: $A = B \iff (\forall x, x \in A \iff x \in B)$ अर्थात् $A \subseteq B$ तथा $B \subseteq A$।
  • तुल्य समुच्चय (Equivalent Sets, $A \sim B$): दो परिमित समुच्चय $A$ और $B$ तुल्य कहलाते हैं यदि उनमें अवयवों की संख्या समान हो, अर्थात् $n(A) = n(B)$।
    शाश्वत सत्य: सभी समान समुच्चय तुल्य होते हैं, परंतु तुल्य समुच्चय समान हों यह आवश्यक नहीं है! (जैसे $\{1, 2, 3\} \sim \{a, b, c\}$ क्योंकि दोनों में 3 अवयव हैं, किंतु वे समान नहीं हैं)।
2.2 उपसमुच्चय एवं अधिसमुच्चय (Subsets and Supersets)

यदि समुच्चय $A$ का प्रत्येक अवयव समुच्चय $B$ का भी अवयव हो, तो $A$ को $B$ का उपसमुच्चय (Subset) कहते हैं और इसे $A \subseteq B$ लिखते हैं। तब $B$ को $A$ का अधिसमुच्चय (Superset) ($B \supseteq A$) कहा जाता है।

औपचारिक परिभाषा: $A \subseteq B \iff (\forall x, x \in A \implies x \in B)$
  • प्रत्येक समुच्चय स्वयं का उपसमुच्चय होता है: प्रत्येक समुच्चय $A$ के लिए $A \subseteq A$ (स्वतुल्य गुण)।
  • रिक्त समुच्चय प्रत्येक समुच्चय का उपसमुच्चय होता है: किसी भी समुच्चय $A$ के लिए $\emptyset \subseteq A$।
  • उचित उपसमुच्चय (Proper Subset, $A \subset B$): यदि $A \subseteq B$ और $A \neq B$ हो, तो $A$ को $B$ का उचित उपसमुच्चय कहते हैं। अर्थात् $B$ में कम से कम एक अवयव ऐसा होगा जो $A$ में नहीं है।
    उदाहरण: यदि $A = \{1, 2\}$ और $B = \{1, 2, 3\}$ हो, तो $A \subset B$।
  • संक्रामक गुण: यदि $A \subseteq B$ और $B \subseteq C$ हो, तो $A \subseteq C$।
  • समुच्चय समानता की कसौटी: $A = B \iff (A \subseteq B \text{ तथा } B \subseteq A)$। यही प्रमेय सभी बीजगणितीय सूत्रों को सिद्ध करने की कुंजी है!
2.3 वास्तविक संख्याओं $\mathbb{R}$ के उपसमुच्चय के रूप में अंतराल (Intervals)

वास्तविक संख्या रेखा $\mathbb{R}$ के सतत खंडों को रोस्टर रूप में नहीं लिखा जा सकता। उन्हें अंतरालों के रूप में व्यक्त किया जाता है:

अंतराल का नाम प्रतीक समुच्चय निर्माण रूप ज्यामितीय अर्थ
विवृत अंतराल (Open Interval) $(a, b)$ $\{x \in \mathbb{R} : a < x < b\}$ सिरे $a$ और $b$ सम्मिलित नहीं हैं (खोखले वृत्तों द्वारा निरूपित)।
संवृत अंतराल (Closed Interval) $[a, b]$ $\{x \in \mathbb{R} : a \le x \le b\}$ दोनों सिरे $a$ और $b$ सम्मिलित हैं (ठोस बिंदुओं द्वारा निरूपित)।
वाम-संवृत दक्षिण-विवृत $[a, b)$ $\{x \in \mathbb{R} : a \le x < b\}$ $a$ सम्मिलित है किंतु $b$ सम्मिलित नहीं है।
वाम-विवृत दक्षिण-संवृत $(a, b]$ $\{x \in \mathbb{R} : a < x \le b\}$ $a$ सम्मिलित नहीं है किंतु $b$ सम्मिलित है।
अनंत अंतराल (Infinite Intervals) $[a, \infty)$, $(-\infty, b)$ $\{x \in \mathbb{R} : x \ge a\}$, $\{x \in \mathbb{R} : x < b\}$ अनंत की ओर प्रसारित किरण। ध्यान रहे कि $\infty$ या $-\infty$ पर सदैव छोटा कोष्ठक लगता है।

3. घात समुच्चय (Power Set), सार्वत्रिक समुच्चय एवं वेन आरेख

घात समुच्चय द्विपद प्रमेय एवं संयोजन गणित का मूल आधार है, जबकि वेन आरेख अमूर्त संबंधों को दृश्य ज्यामिति प्रदान करता है।

3.1 घात समुच्चय (Power Set) एवं उपसमुच्चय गणना

किसी दिए गए समुच्चय $A$ के सभी उपसमुच्चयों के संग्रह को $A$ का घात समुच्चय (Power Set) कहते हैं। इसे $P(A)$ या $\mathcal{P}(A)$ द्वारा निरूपित किया जाता है।

परिभाषा: $P(A) = \{S : S \subseteq A\}$

ध्यान दें कि घात समुच्चय का प्रत्येक अवयव स्वयं एक समुच्चय होता है! किसी भी समुच्चय $A$ के लिए:

  • $\emptyset \in P(A)$ (क्योंकि $\emptyset \subseteq A$)
  • $A \in P(A)$ (क्योंकि $A \subseteq A$)
उपसमुच्चय संख्या पर महत्वपूर्ण प्रमेय

यदि किसी परिमित समुच्चय $A$ में $n$ अवयव हों (अर्थात् $n(A) = n$), तो:

  1. $A$ के कुल उपसमुच्चयों की संख्या $2^n$ होती है, अर्थात् $n(P(A)) = |P(A)| = 2^n$।
  2. $A$ के उचित उपसमुच्चयों की संख्या $2^n - 1$ होती है (क्योंकि समुच्चय $A$ स्वयं का उचित उपसमुच्चय नहीं है)।
  3. $A$ के अरिक्त उपसमुच्चयों की संख्या $2^n - 1$ होती है (रिक्त समुच्चय $\emptyset$ को छोड़कर)।
  4. $A$ के अरिक्त उचित उपसमुच्चयों की संख्या $2^n - 2$ होती है ($\emptyset$ तथा $A$ दोनों को छोड़कर)।
पुनरावृत्त घात समुच्चय (Nested Power Set - परीक्षा में बार-बार पूछा जाने वाला प्रश्न):
यदि $A = \emptyset$, तो $n(A) = 0$।
प्रथम घात समुच्चय: $P(A) = P(\emptyset) = \{\emptyset\} \implies n(P(A)) = 2^0 = 1$।
द्वितीय घात समुच्चय: $P(P(\emptyset)) = \{\emptyset, \{\emptyset\}\} \implies n(P(P(\emptyset))) = 2^1 = 2$।
तृतीय घात समुच्चय: $P(P(P(\emptyset))) = \{\emptyset, \{\emptyset\}, \{\{\emptyset\}\}, \{\emptyset, \{\emptyset\}\}\} \implies n(P(P(P(\emptyset)))) = 2^2 = 4$।
सामान्य सूत्र: $n(P(P(\dots P(A)\dots))) = 2^{2^{\dots^n}}$।
3.2 सार्वत्रिक समुच्चय (Universal Set, $U$ अथवा $\xi$)

किसी विशिष्ट संदर्भ अथवा गणितीय विवेचना में विचारणीय सभी समुच्चय यदि किसी एक निश्चित वृहद् समुच्चय के उपसमुच्चय हों, तो उस मूल समुच्चय को सार्वत्रिक समुच्चय (Universal Set) कहते हैं। इसे $U$ अथवा $\xi$ द्वारा दर्शाया जाता है।

  • निर्देशांक ज्यामिति में सार्वत्रिक समुच्चय कार्तीय तल $\mathbb{R}^2 = \mathbb{R} \times \mathbb{R}$ है।
  • पूर्णांकों के सिद्धांत में सार्वत्रिक समुच्चय पूर्णांक समुच्चय $\mathbb{Z}$ है।
3.3 वेन आरेख (Venn Diagram) परंपरा

अंग्रेज तर्कशास्त्री जॉन वेन (John Venn, 1834–1923) ने समुच्चयों के संबंधों को चित्रों द्वारा निरूपित करने की पद्धति दी:

  • सार्वत्रिक समुच्चय $U$ को एक आयत द्वारा निरूपित किया जाता है।
  • सार्वत्रिक समुच्चय के उपसमुच्चयों (जैसे $A, B, C$) को आयत के भीतर वृत्तों द्वारा दर्शाया जाता है।
  • उपसमुच्चय ($A \subseteq B$) दर्शाने के लिए वृत्त $A$ को वृत्त $B$ के भीतर पूर्णतः खींचा जाता है।
  • असंयुक्त समुच्चयों ($A \cap B = \emptyset$) को परस्पर अलग-अलग वृत्तों द्वारा दर्शाया जाता है।

4. समुच्चय संक्रियाएं: सम्मिलन, सर्वनिष्ठ, अंतर एवं पूरक

जिस प्रकार संख्याओं में जोड़ व गुणा की संक्रियाएं होती हैं, उसी प्रकार समुच्चयों में सम्मिलन, सर्वनिष्ठ, अंतर एवं पूरक मूल संक्रियाएं हैं।

4.1 समुच्चयों का सम्मिलन (Union of Sets, $A \cup B$)

दो समुच्चयों $A$ और $B$ का सम्मिलन वह समुच्चय है जिसमें वे सभी अवयव होते हैं जो या तो $A$ में हैं, या $B$ में हैं, या दोनों में हैं।

निर्माण रूप: $A \cup B = \{x : x \in A \lor x \in B\}$

उदाहरण: यदि $A = \{1, 2, 3, 4\}$ तथा $B = \{3, 4, 5, 6\}$, तो $A \cup B = \{1, 2, 3, 4, 5, 6\}$।

4.2 समुच्चयों का सर्वनिष्ठ (Intersection of Sets, $A \cap B$)

दो समुच्चयों $A$ और $B$ का सर्वनिष्ठ वह समुच्चय है जिसमें वे सभी उभयनिष्ठ अवयव होते हैं जो $A$ और $B$ दोनों में एक साथ उपस्थित हैं।

निर्माण रूप: $A \cap B = \{x : x \in A \land x \in B\}$

उदाहरण: उपर्युक्त उदाहरण में $A \cap B = \{3, 4\}$।

  • असंयुक्त समुच्चय (Disjoint Sets): यदि दो समुच्चयों में कोई भी उभयनिष्ठ अवयव न हो, अर्थात् उनका सर्वनिष्ठ रिक्त समुच्चय हो, तो उन्हें असंयुक्त समुच्चय कहते हैं। शर्त: $A \cap B = \emptyset$।
4.3 समुच्चयों का अंतर (Difference of Sets, $A - B$ अथवा $A \setminus B$)

समुच्चय $A$ से समुच्चय $B$ का अंतर उन अवयवों का समुच्चय है जो $A$ में तो हैं परंतु $B$ में नहीं हैं।

निर्माण रूप: $A - B = \{x : x \in A \land x \notin B\} = A \cap B'$

महत्वपूर्ण गुण: समुच्चयों का अंतर सामान्यतः क्रमविनिमेय नहीं होता, अर्थात् $A - B \neq B - A$ (जब तक कि $A = B$ न हो)।

उदाहरण: $A = \{1, 2, 3, 4\}$ तथा $B = \{3, 4, 5, 6\}$ के लिए:
$A - B = \{1, 2\}$
$B - A = \{5, 6\}$
ध्यान दें कि $(A - B)$, $(A \cap B)$ तथा $(B - A)$ परस्पर असंयुक्त समुच्चय हैं और उनका सम्मिलन $A \cup B$ होता है!

4.4 सममित अंतर (Symmetric Difference, $A \Delta B$)

दो समुच्चयों $A$ और $B$ का सममित अंतर उन अवयवों का समुच्चय है जो या तो $A$ में हैं या $B$ में हैं, किंतु दोनों के उभयनिष्ठ सर्वनिष्ठ में नहीं हैं।

सूत्र: $A \Delta B = (A - B) \cup (B - A) = (A \cup B) - (A \cap B)$

उदाहरण: $A = \{1, 2, 3, 4\}$ तथा $B = \{3, 4, 5, 6\}$ के लिए $A \Delta B = \{1, 2\} \cup \{5, 6\} = \{1, 2, 5, 6\}$।
गुणधर्म: $A \Delta B = B \Delta A$ (क्रमविनिमेय); $A \Delta A = \emptyset$; $A \Delta \emptyset = A$।

4.5 पूरक समुच्चय (Complement of a Set, $A'$ अथवा $A^c$)

सार्वत्रिक समुच्चय $U$ के सापेक्ष किसी उपसमुच्चय $A$ का पूरक समुच्चय उन सभी अवयवों का समुच्चय है जो $U$ में हैं परंतु $A$ में नहीं हैं।

निर्माण रूप: $A' = U - A = \{x \in U : x \notin A\}$

पूरक समुच्चय के मूलभूत गुणधर्म:

  1. $A \cup A' = U$ (पूरक सम्मिलन नियम)
  2. $A \cap A' = \emptyset$ (पूरक सर्वनिष्ठ नियम)
  3. $(A')' = A$ (द्वि-पूरक नियम / Law of Involution)
  4. $U' = \emptyset$ तथा $\emptyset' = U$ (सार्वत्रिक व रिक्त समुच्चय के पूरक)

5. समुच्चय बीजगणित एवं डी मॉर्गन के नियमों का औपचारिक प्रमाण

समुच्चय बीजगणित संक्रियाओं के प्रतीकात्मक नियमों का तंत्र है जो बूलियन बीजगणित एवं डिजिटल तर्क का आधार है।

5.1 समुच्चय बीजगणित के आधारभूत नियम
नियम का नाम सम्मिलन प्रारूप सर्वनिष्ठ प्रारूप
1. वर्गसम नियम (Idempotent Laws) $A \cup A = A$ $A \cap A = A$
2. तत्समक नियम (Identity Laws) $A \cup \emptyset = A$ ($\emptyset$ तत्समक है) $A \cap U = A$ ($U$ तत्समक है)
3. प्रभुत्व नियम (Domination Laws) $A \cup U = U$ $A \cap \emptyset = \emptyset$
4. क्रमविनिमेय नियम (Commutative Laws) $A \cup B = B \cup A$ $A \cap B = B \cap A$
5. साहचर्य नियम (Associative Laws) $(A \cup B) \cup C = A \cup (B \cup C)$ $(A \cap B) \cap C = A \cap (B \cap C)$
6. वितरण नियम (Distributive Laws) $A \cup (B \cap C) = (A \cup B) \cap (A \cup C)$ $A \cap (B \cup C) = (A \cap B) \cup (A \cap C)$
5.2 डी मॉर्गन के नियम (De Morgan's Laws)

ब्रिटिश गणितज्ञ ऑगस्टस डी मॉर्गन (1806–1871) ने पूरक तथा सम्मिलन/सर्वनिष्ठ के मध्य दो अत्यंत महत्वपूर्ण नियम दिए:

प्रथम नियम: दो समुच्चयों के सम्मिलन का पूरक उनके व्यक्तिगत पूरकों के सर्वनिष्ठ के बराबर होता है: $$(A \cup B)' = A' \cap B'$$ द्वितीय नियम: दो समुच्चयों के सर्वनिष्ठ का पूरक उनके व्यक्तिगत पूरकों के सम्मिलन के बराबर होता है: $$(A \cap B)' = A' \cup B'$$
डी मॉर्गन के प्रथम नियम का सैद्धांतिक प्रमाण: $(A \cup B)' = A' \cap B'$ [अंक: 4]

दो समुच्चयों $X$ और $Y$ की समानता सिद्ध करने के लिए परस्पर उपसमुच्चय सिद्ध करते हैं: $X \subseteq Y$ तथा $Y \subseteq X$।

चरण 1: सिद्ध करना कि $(A \cup B)' \subseteq A' \cap B'$

  1. माना $x \in (A \cup B)'$ कोई स्वेच्छ अवयव है।
  2. $\implies x \notin (A \cup B)$ [पूरक की परिभाषानुसार]
  3. $\implies x \in A$ अथवा $x \in B$ कथन असत्य है
  4. $\implies x \notin A$ तथा $x \notin B$ [तार्किक वियोजन का निषेध]
  5. $\implies x \in A'$ तथा $x \in B'$ [पूरक की परिभाषानुसार]
  6. $\implies x \in (A' \cap B')$ [सर्वनिष्ठ की परिभाषानुसार]
  7. चूँकि $(A \cup B)'$ का प्रत्येक अवयव $A' \cap B'$ में है:
    $(A \cup B)' \subseteq A' \cap B'$ ... (समीकरण 1)

चरण 2: सिद्ध करना कि $A' \cap B' \subseteq (A \cup B)'$

  1. माना $y \in A' \cap B'$ कोई स्वेच्छ अवयव है।
  2. $\implies y \in A'$ तथा $y \in B'$
  3. $\implies y \notin A$ तथा $y \notin B$
  4. $\implies y \notin (A \cup B)$ [क्योंकि यदि $y \in A \cup B$ होता तो कम से कम एक में होना पड़ता]
  5. $\implies y \in (A \cup B)'$
  6. चूँकि $A' \cap B'$ का प्रत्येक अवयव $(A \cup B)'$ में है:
    $A' \cap B' \subseteq (A \cup B)'$ ... (समीकरण 2)

समीकरण (1) और (2) से सिद्ध होता है: $(A \cup B)' = A' \cap B'$। (इति सिद्धम्) $\quad \blacksquare$

6. गणनीयता सिद्धांत, समावेशन-अपवर्जन सिद्धांत एवं कार्तीय गुणन

गणनीयता सिद्धांत समुच्चयों के अतिव्यापन की दोहरी गणना से बचते हुए अवयवों की सटीक संख्या ज्ञात करने में सक्षम बनाते हैं।

6.1 दो समुच्चयों का गणनीयता सूत्र

माना $A$ और $B$ दो परिमित समुच्चय हैं। सम्मिलन $A \cup B$ को तीन असंयुक्त भागों में विभाजित किया जा सकता है: $(A - B)$, $(A \cap B)$ तथा $(B - A)$।

अतः $n(A \cup B) = n(A - B) + n(A \cap B) + n(B - A)$।

चूँकि $n(A) = n(A - B) + n(A \cap B) \implies n(A - B) = n(A) - n(A \cap B)$, मान प्रतिस्थापित करने पर मूल सूत्र प्राप्त होता है:

दो समुच्चयों का मूल सूत्र: $$n(A \cup B) = n(A) + n(B) - n(A \cap B)$$

महत्वपूर्ण उपप्रमेय:

  • यदि समुच्चय असंयुक्त हों ($A \cap B = \emptyset$), तो $n(A \cap B) = 0 \implies \mathbf{n(A \cup B) = n(A) + n(B)}$।
  • केवल एक समुच्चय में स्थित अवयवों की संख्या (सममित अंतर): $$n(A \Delta B) = n(A - B) + n(B - A) = n(A) + n(B) - 2n(A \cap B) = n(A \cup B) - n(A \cap B)$$
  • न तो $A$ और न ही $B$ में स्थित अवयव: $$n(A' \cap B') = n((A \cup B)') = n(U) - n(A \cup B)$$
6.2 तीन समुच्चयों का समावेशन-अपवर्जन सिद्धांत (PIE)

किन्हीं तीन परिमित समुच्चयों $A, B$ और $C$ के लिए:

तीन समुच्चयों का महासूत्र: $$n(A \cup B \cup C) = n(A) + n(B) + n(C) - [n(A \cap B) + n(B \cap C) + n(C \cap A)] + n(A \cap B \cap C)$$

अंत में $+n(A \cap B \cap C)$ क्यों जोड़ते हैं? एकल पदों में तीनों का उभयनिष्ठ सर्वनिष्ठ 3 बार जुड़ता है। फिर दो-दो के सर्वनिष्ठ में यह 3 बार घट जाता है (शुद्ध गणना शून्य हो जाती है)। अतः इसे सम्मिलन में ठीक 1 बार सम्मिलित करने के लिए अंत में $+n(A \cap B \cap C)$ जोड़ना आवश्यक होता है!

उप-क्षेत्रों की गणना के सीधे सूत्र
  • ठीक दो समुच्चयों में स्थित अवयवों की संख्या: $$n(\text{ठीक दो}) = [n(A \cap B) + n(B \cap C) + n(C \cap A)] - 3n(A \cap B \cap C)$$
  • कम से कम दो समुच्चयों में स्थित अवयवों की संख्या: $$n(\text{कम से कम दो}) = [n(A \cap B) + n(B \cap C) + n(C \cap A)] - 2n(A \cap B \cap C)$$
  • ठीक एक समुच्चय में स्थित अवयवों की संख्या: $$n(\text{ठीक एक}) = n(A) + n(B) + n(C) - 2[n(A \cap B) + n(B \cap C) + n(C \cap A)] + 3n(A \cap B \cap C)$$
6.3 समुच्चयों का कार्तीय गुणनफल (Cartesian Product, $A \times B$)

दो अरिक्त समुच्चयों $A$ और $B$ का कार्तीय गुणनफल उन सभी क्रमित युग्मों $(a, b)$ का समुच्चय है जहाँ $a \in A$ तथा $b \in B$:

$$A \times B = \{(a, b) : a \in A \land b \in B\}$$
  • क्रमित युग्म (Ordered Pair): $(a, b) = (c, d) \iff a = c$ तथा $b = d$। अतः $(1, 2) \neq (2, 1)$।
  • अक्रमविनिमेय: सामान्यतः $A \times B \neq B \times A$।
  • अवयव संख्या प्रमेय: यदि $n(A) = p$ और $n(B) = q$ हो, तो $n(A \times B) = p \times q$।
  • $A$ से $B$ में कुल संभव संबंधों (Relations) की संख्या $A \times B$ के उपसमुच्चयों की संख्या होती है, जो $2^{pq}$ के बराबर है। (यह अध्याय 2 'संबंध एवं फलन' की नींव रखता है)।

महत्वपूर्ण सूत्र, सर्वसमिकाएँ एवं प्रमेय

घात समुच्चय गणनीयता सूत्र
2^n उपसमुच्चय
n अवयवों के लिए कुल 2^n उपसमुच्चय होते हैं जिनमें ∅ और A शामिल हैं। उचित उपसमुच्चय 2^n - 1 होते हैं।
उचित उपसमुच्चय संख्या सूत्र
2^n - 1 उपसमुच्चय
समुच्चय A स्वयं का उचित उपसमुच्चय नहीं होता, इसलिए 1 घटाया जाता है। अरिक्त उचित उपसमुच्चय 2^n - 2 होते हैं।
दो समुच्चयों का गणनीयता सूत्र
n(A) + n(B) - n(A ∩ B)
उभयनिष्ठ अवयवों की दोहरी गणना से बचाता है। असंयुक्त समुच्चयों में n(A ∪ B) = n(A) + n(B)।
सममित अंतर की गणनीयता
$$n(A \cup B) - n(A \cap B)$$
उभयनिष्ठ सर्वनिष्ठ को छोड़कर केवल A अथवा केवल B के अवयवों की गणना करता है।
तीन समुच्चयों का समावेशन-अपवर्जन सूत्र
n(A)+n(B)+n(C) - [n(AB)+n(BC)+n(CA)] + n(ABC)
बोर्ड परीक्षा के 5 अंक के सर्वेक्षण प्रश्नों के समाधान का मुख्य सूत्र।
डी मॉर्गन के नियम
द्वैत पूरक सर्वसमिकाएं
बूलियन तर्कशास्त्र, कंप्यूटर विज्ञान एवं प्रायिकता सिद्धांत में अत्यंत उपयोगी।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
विस्तृत समाधान / उत्तर:

भाग (क): पूर्णांकों की असमिका का हल [2 अंक]

  1. दी गई असमिका: $x^2 - 3x - 10 \le 0$।
  2. मध्य पद विभाजन द्वारा गुणनखंडन करने पर:

$$(x - 5)(x + 2) \le 0$$

  1. चिह्न योजना (Sign-scheme) के अनुसार गुणनफल $-2$ तथा $5$ के मध्य शून्य या ऋणात्मक होगा:

$$-2 \le x \le 5$$

  1. चूँकि $x \in \mathbb{Z}$ (पूर्णांक), अतः इस अंतराल के पूर्णांकों को सूचीबद्ध करते हैं:

$$S = \{-2, -1, 0, 1, 2, 3, 4, 5\}$$

[गुणनखंडन पर 1 अंक, रोस्टर सूची पर 1 अंक]

भाग (ख): घात समुच्चय एवं पुनरावृत्त मान [3 अंक]

  1. दिया है $A = \{a, b\}$, अवयव संख्या $n = 2$। कुल उपसमुच्चय $= 2^2 = 4$। घात समुच्चय:

$$P(A) = \{\emptyset, \{a\}, \{b\}, \{a, b\}\}$$

[P(A) पर 1 अंक] 2. $n(P(P(P(\emptyset))))$ का मूल्यांकन:

  • रिक्त समुच्चय $\emptyset$ के लिए $n(\emptyset) = 0$।
  • प्रथम घात समुच्चय: $n(P(\emptyset)) = 2^0 = 1$ ($P(\emptyset) = \{\emptyset\}$)।
  • द्वितीय घात समुच्चय: $n(P(P(\emptyset))) = 2^1 = 2$।
  • तृतीय घात समुच्चय: $n(P(P(P(\emptyset)))) = 2^2 = 4$।

$$ herefore n(P(P(P(\emptyset)))) = 4$$

[गणना पर 2 अंक]

उदाहरण 2
विस्तृत समाधान / उत्तर:

भाग (क): सैद्धांतिक प्रमाण [4 अंक] दो समुच्चयों की समानता हेतु परस्पर उपसमुच्चय सिद्ध करते हैं:

चरण 1: सिद्ध करना कि $(A \cap B)' \subseteq A' \cup B'$

  1. माना $x \in (A \cap B)'$ कोई स्वेच्छ अवयव है।
  2. $\implies x otin (A \cap B)$ [पूरक की परिभाषानुसार]
  3. $\implies x \in A$ तथा $x \in B$ कथन असत्य है
  4. $\implies x otin A$ अथवा $x otin B$
  5. $\implies x \in A'$ अथवा $x \in B'$ [पूरक की परिभाषानुसार]
  6. $\implies x \in (A' \cup B')$ [सम्मिलन की परिभाषानुसार]
  7. अतः: $(A \cap B)' \subseteq A' \cup B'$ ... (1) [चरण 1 पर 2 अंक]

चरण 2: सिद्ध करना कि $A' \cup B' \subseteq (A \cap B)'$

  1. माना $y \in A' \cup B'$ कोई स्वेच्छ अवयव है।
  2. $\implies y \in A'$ अथवा $y \in B'$
  3. $\implies y otin A$ अथवा $y otin B$
  4. $\implies y otin (A \cap B)$ [क्योंकि यदि $y \in A \cap B$ होता तो दोनों में होना पड़ता]
  5. $\implies y \in (A \cap B)'$
  6. अतः: $A' \cup B' \subseteq (A \cap B)'$ ... (2) [चरण 2 पर 1.5 अंक]

(1) तथा (2) से सिद्ध होता है: $(A \cap B)' = A' \cup B'$। (इति सिद्धम्) [0.5 अंक]

भाग (ख): संख्यात्मक सत्यापन [1 अंक] दिया है: $U = \{1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8\}$, $A = \{2, 4, 6, 8\}$, $B = \{2, 3, 5, 7\}$।

  • बायाँ पक्ष: $A \cap B = \{2\} \implies (A \cap B)' = U - \{2\} = \{1, 3, 4, 5, 6, 7, 8\}$।
  • दायाँ पक्ष: $A' = U - A = \{1, 3, 5, 7\}$; $B' = U - B = \{1, 4, 6, 8\}$। $A' \cup B' = \{1, 3, 5, 7\} \cup \{1, 4, 6, 8\} = \{1, 3, 4, 5, 6, 7, 8\}$। चूँकि बायाँ पक्ष = दायाँ पक्ष, अतः नियम सत्यापित हुआ। [1 अंक]
उदाहरण 3
विस्तृत समाधान / उत्तर:

चरण 1: समुच्चयों एवं मानों की पहचान

  • सार्वत्रिक समुच्चय $U$ (कुल छात्र) $\implies n(U) = 100$।
  • भौतिकी पसंद करने वाले छात्र $P \implies n(P) = 65$।
  • रसायन विज्ञान पसंद करने वाले छात्र $C \implies n(C) = 45$।
  • कोई भी विषय पसंद न करने वाले: $n(P' \cap C') = n((P \cup C)') = 15$।

चरण 2: $n(P \cup C)$ ज्ञात करना

$$n(P \cup C) = n(U) - n((P \cup C)') = 100 - 15 = 85$$

(1) दोनों विषय पसंद करने वाले छात्र $n(P \cap C)$ [2 अंक]

$$n(P \cup C) = n(P) + n(C) - n(P \cap C)$$

$$85 = 65 + 45 - n(P \cap C)$$

$$85 = 110 - n(P \cap C)$$

$$n(P \cap C) = 110 - 85 = 25$$

$ herefore$ 25 छात्र दोनों विषय पसंद करते हैं। [2 अंक]

(2) केवल भौतिकी पसंद करने वाले छात्र [1 अंक]

$$n(P - C) = n(P) - n(P \cap C) = 65 - 25 = 40$$

$ herefore$ 40 छात्र केवल भौतिकी पसंद करते हैं। [1 अंक]

(3) केवल रसायन विज्ञान पसंद करने वाले छात्र [1 अंक]

$$n(C - P) = n(C) - n(P \cap C) = 45 - 25 = 20$$

$ herefore$ 20 छात्र केवल रसायन विज्ञान पसंद करते हैं। [1 अंक]

सत्यापन: 40 (केवल भौतिकी) + 25 (दोनों) + 20 (केवल रसायन) + 15 (कोई नहीं) = 100 छात्र। पूर्णतः सही!

उदाहरण 4
विस्तृत समाधान / उत्तर:

चरण 1: दिए गए मान

  • $n(U) = 200$
  • $n(T) = 100, \quad n(A) = 70, \quad n(B) = 60$
  • $n(T \cap A) = 35, \quad n(T \cap B) = 30, \quad n(A \cap B) = 25$
  • $n(T \cap A \cap B) = 15$

(क) कम से कम एक समाचार पत्र पढ़ने वाले $n(T \cup A \cup B)$ [2 अंक] समावेशन-अपवर्जन सूत्र द्वारा:

$$n(T \cup A \cup B) = n(T) + n(A) + n(B) - [n(T \cap A) + n(T \cap B) + n(A \cap B)] + n(T \cap A \cap B)$$

मान रखने पर:

$$n(T \cup A \cup B) = 100 + 70 + 60 - [35 + 30 + 25] + 15$$

$$n(T \cup A \cup B) = 230 - 90 + 15 = 155$$

$ herefore$ 155 व्यक्ति कम से कम एक समाचार पत्र पढ़ते हैं। [2 अंक]

(ख) कोई भी समाचार पत्र न पढ़ने वाले व्यक्ति [1 अंक]

$$n( ext{कोई नहीं}) = n(U) - n(T \cup A \cup B) = 200 - 155 = 45$$

$ herefore$ 45 व्यक्ति कोई भी समाचार पत्र नहीं पढ़ते। [1 अंक]

(ग) ठीक दो समाचार पत्र पढ़ने वाले व्यक्ति [2 अंक] प्रत्येक युग्म सर्वनिष्ठ में से तीनों का उभयनिष्ठ सर्वनिष्ठ घटाने पर:

  • केवल $T$ और $A$ पढ़ने वाले $= n(T \cap A) - n(T \cap A \cap B) = 35 - 15 = 20$
  • केवल $T$ और $B$ पढ़ने वाले $= n(T \cap B) - n(T \cap A \cap B) = 30 - 15 = 15$
  • केवल $A$ और $B$ पढ़ने वाले $= n(A \cap B) - n(T \cap A \cap B) = 25 - 15 = 10$ $ herefore$ ठीक दो समाचार पत्र पढ़ने वाले $= 20 + 15 + 10 = 45$ व्यक्ति।

वैकल्पिक सीधा सूत्र:

$$n( ext{ठीक दो}) = [n(T \cap A) + n(T \cap B) + n(A \cap B)] - 3n(T \cap A \cap B)$$

$$n( ext{ठीक दो}) = 90 - 3(15) = 90 - 45 = 45$$

$ herefore$ 45 व्यक्ति ठीक दो समाचार पत्र पढ़ते हैं। [2 अंक]

उदाहरण 5
विस्तृत समाधान / उत्तर:

चरण 1: सिद्ध करना कि $A \cap (B \cup C) \subseteq (A \cap B) \cup (A \cap C)$ [2 अंक]

  1. माना $x \in A \cap (B \cup C)$ कोई स्वेच्छ अवयव है।
  2. $\implies x \in A$ तथा $x \in (B \cup C)$ [सर्वनिष्ठ की परिभाषानुसार]
  3. $\implies x \in A$ तथा ($x \in B$ अथवा $x \in C$) [सम्मिलन की परिभाषानुसार]
  4. स्थिति 1: यदि $x \in B$ हो: चूँकि $x \in A$ तथा $x \in B \implies x \in A \cap B \implies x \in (A \cap B) \cup (A \cap C)$।
  5. स्थिति 2: यदि $x \in C$ हो: चूँकि $x \in A$ तथा $x \in C \implies x \in A \cap C \implies x \in (A \cap B) \cup (A \cap C)$।
  6. दोनों ही स्थितियों में $x \in (A \cap B) \cup (A \cap C)$।
  7. $ herefore$ $A \cap (B \cup C) \subseteq (A \cap B) \cup (A \cap C)$ ... (1) [चरण 1 पर 2 अंक]

चरण 2: सिद्ध करना कि $(A \cap B) \cup (A \cap C) \subseteq A \cap (B \cup C)$ [2 अंक]

  1. माना $y \in (A \cap B) \cup (A \cap C)$ कोई स्वेच्छ अवयव है।
  2. $\implies y \in (A \cap B)$ अथवा $y \in (A \cap C)$
  3. स्थिति 1: यदि $y \in (A \cap B)$ हो: $\implies y \in A$ तथा $y \in B \implies y \in A$ तथा $y \in (B \cup C) \implies y \in A \cap (B \cup C)$।
  4. स्थिति 2: यदि $y \in (A \cap C)$ हो: $\implies y \in A$ तथा $y \in C \implies y \in A$ तथा $y \in (B \cup C) \implies y \in A \cap (B \cup C)$।
  5. $ herefore$ $(A \cap B) \cup (A \cap C) \subseteq A \cap (B \cup C)$ ... (2) [चरण 2 पर 1.5 अंक]

(1) तथा (2) से सिद्ध होता है: $A \cap (B \cup C) = (A \cap B) \cup (A \cap C)$। (इति सिद्धम्) [0.5 अंक]

उदाहरण 6
विस्तृत समाधान / उत्तर:

(1) A × B तथा B × A ज्ञात करना [2 अंक]

  1. $A imes B = \{(a, b) : a \in A, b \in B\}$

$$A imes B = \{(1, 3), (1, 4), (2, 3), (2, 4), (3, 3), (3, 4)\}$$

  1. $B imes A = \{(b, a) : b \in B, a \in A\}$

$$B imes A = \{(3, 1), (3, 2), (3, 3), (4, 1), (4, 2), (4, 3)\}$$

  1. तुलना करने पर $(1, 3) eq (3, 1)$, अतः अवयव समान नहीं हैं।

$$ herefore A imes B eq B imes A$$

कार्तीय गुणनफल क्रमविनिमेय नहीं होता। [2 अंक]

(2) $(A imes B) \cap (B imes A)$ ज्ञात करना [1 अंक] दोनों समुच्चयों में उभयनिष्ठ क्रमित युग्म देखने पर: केवल $(3, 3)$ दोनों में उपस्थित है।

$$ herefore (A imes B) \cap (B imes A) = \{(3, 3)\}$$

[1 अंक]

(3) A से B में संबंधों की कुल संख्या [1 अंक]

  • $n(A) = 3$ तथा $n(B) = 2 \implies n(A imes B) = 3 imes 2 = 6$।
  • $A imes B$ का प्रत्येक उपसमुच्चय $A$ से $B$ में एक संबंध होता है।
  • अतः कुल संबंधों की संख्या $= 2^{n(A imes B)} = 2^6 = 64$। $ herefore$ कुल 64 संबंध संभव हैं। [1 अंक]

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

रिक्त समुच्चय लिखते समय {∅} अथवा {0} लिख देना, या यह मानना कि ∅ = {0} = {∅}।

सही वैज्ञानिक तथ्य

रिक्त समुच्चय में शून्य अवयव होते हैं और इसे केवल ∅ या {} लिखा जाता है (n(∅) = 0)। किंतु {0} एक एकल समुच्चय है जिसमें संख्या 0 अवयव है (n({0}) = 1), तथा {∅} भी एक एकल समुच्चय है जिसका एकमात्र अवयव ∅ है (n({∅}) = 1)।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

सदस्यता (∈) तथा उपसमुच्चय (⊆) के प्रतीकों का घालमेल, जैसे 1 ⊆ {1, 2} या {1} ∈ {1, 2} लिखना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

∈ प्रतीक किसी व्यक्तिगत अवयव का समुच्चय से संबंध दर्शाता है (जैसे 1 ∈ {1, 2}); जबकि ⊆ प्रतीक दो समुच्चयों के अंतर्विष्टि संबंध को दर्शाता है (जैसे {1} ⊆ {1, 2})। यदि कोई अवयव स्वयं एक समुच्चय हो, जैसे A = {{1}, 2}, तब {1} ∈ A तथा {{1}} ⊆ A होगा।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

n अवयवों वाले समुच्चय के उचित उपसमुच्चयों की संख्या 2^n लिख देना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

कोई उपसमुच्चय S ⊆ A उचित उपसमुच्चय तभी होता है जब S ≠ A हो। चूँकि प्रत्येक समुच्चय स्वयं का उपसमुच्चय होता है (A ⊆ A), अतः ठीक एक उपसमुच्चय अनुचित होता है। इसलिए उचित उपसमुच्चयों की संख्या सदैव 2^n - 1 होती है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

डी मॉर्गन के नियमों में संक्रिया चिह्न बदलना भूल जाना, जैसे (A ∪ B)' = A' ∪ B' लिखना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

पूरक संक्रिया तार्किक संक्रिया को पूरी तरह उलट देती है: सम्मिलन (∪) बदलकर सर्वनिष्ठ (∩) हो जाता है, और सर्वनिष्ठ (∩) बदलकर सम्मिलन (∪) हो जाता है! अर्थात् (A ∪ B)' = A' ∩ B' तथा (A ∩ B)' = A' ∪ B'।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

तीन समुच्चयों के सूत्र में अंतिम पद +n(A ∩ B ∩ C) को घटा देना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

एकल समुच्चयों के योग में तीनों का उभयनिष्ठ सर्वनिष्ठ 3 बार जुड़ता है। फिर दो-दो के सर्वनिष्ठ में यह 3 बार घट जाता है (जिससे शुद्ध गणना शून्य हो जाती है)। अतः इसे सम्मिलन में 1 बार गिनने के लिए अंत में +n(A ∩ B ∩ C) जोड़ना अनिवार्य है।

समुच्चय सिद्धांत एवं वेन आरेख बीजगणित का संकल्पनात्मक मानचित्र

WBCHSE कक्षा 11 गणित • इकाई 1: समुच्चय एवं फलन समुच्चय सिद्धांत, वेन आरेख एवं गणनीयता के नियम जॉर्ज कैंटर सिद्धांत • समुच्चय संक्रियाएं • डी मॉर्गन के नियम • समावेशन-अपवर्जन सिद्धांत 1. समुच्चय आधार एवं निरूपण समुच्चय परिभाषा एवं अवयव सुपरिभाषित एवं भिन्न वस्तुओं का संग्रह (Well-defined collection) x ∈ A (अवयव है), x ∉ A (अवयव नहीं है) रोस्टर बनाम समुच्चय निर्माण रूप रोस्टर (सूचीबद्ध): A = {2, 3, 5, 7, 11} निर्माण रूप: {x : x अभाज्य संख्या है, x ≤ 11} समुच्चयों के प्रकार एवं अंतराल • रिक्त समुच्चय (Null): ∅ अथवा {}, n(∅) = 0 • एकल समुच्चय (Singleton): n(A) = 1 • उपसमुच्चय (A ⊆ B), उचित उपसमुच्चय (A ⊂ B) • वास्तविक संख्याओं के अंतराल: [a, b], (a, b), [a, b) घात समुच्चय (Power Set) एवं गणना कुल उपसमुच्चयों की संख्या = 2^n उचित उपसमुच्चयों की संख्या = 2^n - 1 घात समुच्चय: P(A) = {S : S ⊆ A}, |P(A)| = 2^n 2. वेन आरेख एवं संक्रियाएं U A B सम्मेलन (Union): A ∪ B {x : x ∈ A अथवा x ∈ B} n(A∪B) = n(A)+n(B)-n(A∩B) U A B सर्वनिष्ठ (Intersection): A ∩ B {x : x ∈ A तथा x ∈ B} A ∩ B = ∅ ⇒ Disjoint Sets U A-B B अंतर (Difference): A - B {x : x ∈ A तथा x ∉ B} = A ∩ B' n(A - B) = n(A) - n(A ∩ B) U A-B B-A सममित अंतर: A Δ B (A - B) ∪ (B - A) = (A ∪ B) - (A ∩ B) n(AΔB) = n(A)+n(B)-2n(A∩B) U A A' पूरक समुच्चय (Complement): A' U - A = {x ∈ U : x ∉ A} A ∪ A' = U | A ∩ A' = ∅ 3. बीजगणितीय नियम एवं गणनीयता डी मॉर्गन के नियम (De Morgan's Laws) (A ∪ B)' = A' ∩ B' (A ∩ B)' = A' ∪ B' वितरण एवं प्रतिलोम नियम A ∩ (B ∪ C) = (A ∩ B) ∪ (A ∩ C) A ∪ (B ∩ C) = (A ∪ B) ∩ (A ∪ C) (A')' = A, A ∪ A' = U, A ∩ A' = ∅ 2 समुच्चयों का गणनीय सूत्र n(A ∪ B) = n(A) + n(B) - n(A ∩ B) असंयुक्त समुच्चयों में (A ∩ B = ∅): n(A ∪ B) = n(A) + n(B) 3 समुच्चयों का समावेशन-अपवर्जन सूत्र n(A ∪ B ∪ C) = n(A) + n(B) + n(C) - [n(A∩B) + n(B∩C) + n(C∩A)] + n(A ∩ B ∩ C) TargetExams गोल्ड स्टैंडर्ड • WBCHSE कक्षा 11 गणित • अध्याय 1: समुच्चय सिद्धांत (Sets)

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
समुच्चय सुपरिभाषित और भिन्न वस्तुओं का संग्रह है; व्यक्तिगत पसंद पर आधारित संग्रह (जैसे "अच्छे खिलाड़ी") गणितीय समुच्चय नहीं हैं।
मुख्य बिंदु 2
समुच्चय को रोस्टर रूप (अवयवों को अल्पविराम से अलग कर मंजले कोष्ठक में लिखना) और निर्माण रूप (विशेष गुणधर्म P(x) द्वारा) में व्यक्त किया जाता है।
मुख्य बिंदु 3
रिक्त समुच्चय (∅) में कोई अवयव नहीं होता और n(∅) = 0; ध्यान रहे कि {∅} एक एकल समुच्चय है, रिक्त समुच्चय नहीं।
मुख्य बिंदु 4
n अवयवों वाले परिमित समुच्चय के कुल उपसमुच्चयों की संख्या 2^n, उचित उपसमुच्चयों की संख्या 2^n - 1 और अरिक्त उपसमुच्चयों की संख्या 2^n - 1 होती है।
मुख्य बिंदु 5
किसी समुच्चय के सभी उपसमुच्चयों के समुच्चय को घात समुच्चय P(A) कहते हैं; |P(A)| = 2^n तथा |P(P(A))| = 2^(2^n)।
मुख्य बिंदु 6
वास्तविक संख्याओं के अविच्छिन्न उपसमुच्चयों को अंतरालों द्वारा दर्शाया जाता है: विवृत अंतराल (a, b), संवृत अंतराल [a, b] और अर्ध-विवृत अंतराल [a, b) या (a, b]।
मुख्य बिंदु 7
प्रमुख समुच्चय संक्रियाएं हैं: सम्मिलन (A ∪ B), सर्वनिष्ठ (A ∩ B), असंयुक्त समुच्चय (A ∩ B = ∅), अंतर (A - B = A ∩ B') तथा सममित अंतर (A Δ B = (A - B) ∪ (B - A))।
मुख्य बिंदु 8
डी मॉर्गन के नियमानुसार: सम्मिलन का पूरक, पूरकों का सर्वनिष्ठ होता है (A ∪ B)' = A' ∩ B', तथा सर्वनिष्ठ का पूरक, पूरकों का सम्मिलन होता है (A ∩ B)' = A' ∪ B'।
मुख्य बिंदु 9
दो समुच्चयों के लिए गणनीयता सूत्र: n(A ∪ B) = n(A) + n(B) - n(A ∩ B); असंयुक्त समुच्चयों में n(A ∪ B) = n(A) + n(B)।
मुख्य बिंदु 10
तीन समुच्चयों का समावेशन-अपवर्जन सूत्र: n(A ∪ B ∪ C) = n(A) + n(B) + n(C) - [n(A ∩ B) + n(B ∩ C) + n(C ∩ A)] + n(A ∩ B ∩ C)।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
समीकरण x² - 7x + 12 = 0 के उन मूलों का संग्रह जो प्राकृत संख्याएँ हैं, परिमित है अथवा अपरिमित? इसे रोस्टर रूप में लिखिए।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: x² - 7x + 12 = 0 को हल करने पर (x - 3)(x - 4) = 0 प्राप्त होता है, अतः x = 3 अथवा x = 4। 3 और 4 दोनों प्राकृत संख्याएँ हैं। रोस्टर रूप में समुच्चय {3, 4} है। चूँकि इसमें अवयवों की संख्या निश्चित (2) है, यह एक परिमित समुच्चय है।
द्विघात समीकरण का गुणनखंड करके जाँचिए कि मूल ℕ के सदस्य हैं या नहीं।
2
यदि एक परिमित समुच्चय A में 5 अवयव हों, तो: (1) कुल उपसमुच्चयों की संख्या, (2) उचित उपसमुच्चयों की संख्या तथा (3) इसके घात समुच्चय P(A) के अवयवों की संख्या ज्ञात कीजिए।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (1) कुल उपसमुच्चय = 2^5 = 32। (2) उचित उपसमुच्चय = 2^5 - 1 = 31। (3) घात समुच्चय की प्रमुख संख्या |P(A)| = 2^5 = 32।
उपसमुच्चय एवं घात समुच्चय के लिए 2^n सूत्र का प्रयोग करें।
3
किस गणितीय प्रतिबंध के अंतर्गत A - B = A होता है? तथा किस प्रतिबंध के अंतर्गत A - B = ∅ होता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर:
  1. A - B = A होगा यदि और केवल यदि A और B में कोई उभयनिष्ठ अवयव न हो, अर्थात् A ∩ B = ∅ (असंयुक्त समुच्चय)।
  2. A - B = ∅ होगा यदि और केवल यदि A का प्रत्येक अवयव B में भी उपस्थित हो, अर्थात् A ⊆ B हो।

विचार करें कि अंतर करते समय A में से क्या घटाया जाता है।
4
यदि U = {x ∈ ℕ : x ≤ 10}, A = {1, 3, 5, 7, 9} तथा B = {2, 3, 5, 7} हो, तो (A Δ B)' का मान ज्ञात कीजिए।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: U = {1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10}। A - B = {1, 9}; B - A = {2}। A Δ B = (A - B) ∪ (B - A) = {1, 2, 9}। अतः (A Δ B)' = U - {1, 2, 9} = {3, 4, 5, 6, 7, 8, 10}।
पहले A Δ B = (A - B) ∪ (B - A) ज्ञात करें, फिर U में से घटाएं।
5
50 छात्रों की एक कक्षा में 30 गणित तथा 25 भौतिकी पढ़ते हैं। यदि प्रत्येक छात्र कम से कम एक विषय पढ़ता हो, तो कितने छात्र दोनों विषय पढ़ते हैं?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: दिया है n(M ∪ P) = 50, n(M) = 30 तथा n(P) = 25। 50 = 30 + 25 - n(M ∩ P) = 55 - n(M ∩ P)। n(M ∩ P) = 55 - 50 = 5। अतः ठीक 5 छात्र दोनों विषय पढ़ते हैं।
n(M ∪ P) = n(M) + n(P) - n(M ∩ P) सूत्र में n(M ∪ P) = 50 रखें।
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