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WBB • कक्षा XI • Mathematics • अध्याय 2
अनुमानित समय: 65 मिनट
प्रगति: अध्ययनरत

संबंध एवं फलन

समुच्चय सिद्धांत की सुदृढ़ नींव पर आधारित संबंध (Relations) एवं फलन (Functions) उच्च गणित, कलन (Calculus) और आधुनिक बीजगणित के केंद्रीय स्तंभ हैं। फ्रांसीसी दार्शनिक एवं गणितज्ञ रेने देकार्त के दर्शन से प्रेरित होकर क्रमित युग्म (Ordered Pair) तथा कार्तीय गुणन (Cartesian Product) A × B को परिभाषित किया जाता है। दो समुच्चयों के कार्तीय गुणन के किसी भी उपसमुच्चय को एक संबंध (Relation) कहा जाता है। किसी संबंध के अंतर्गत आने वाले क्रमित युग्मों के प्रथम घटकों के समुच्चय को प्रांत (Domain) और द्वितीय घटकों के समुच्चय को परिसर (Range) कहते हैं, जबकि संपूर्ण द्वितीय समुच्चय को सहप्रांत (Codomain) कहा जाता है। फलन अथवा प्रतिचित्रण एक ऐसा विशिष्ट संबंध है जो दो अनिवार्य शर्तों को पूरा करता है: प्रांत के प्रत्येक अवयव का सहप्रांत में एक प्रतिबिंब होना अनिवार्य है तथा किसी भी अवयव का एक से अधिक प्रतिबिंब नहीं हो सकता। कार्तीय तल में ऊर्ध्वाधर रेखा परीक्षण (Vertical Line Test) किसी आलेख के फलन होने की त्वरित ज्यामितीय पुष्टि करता है। वास्तविक फलनों में मापांक फलन |x|, महत्तम पूर्णांक फलन [x], चिह्न फलन sgn(x), बहुपद और परिमेय फलन कैलकुलस के प्राथमिक उपकरण हैं। फलनों के बीजगणित में योग, अंतर, गुणन तथा भाग के लिए प्रांतों का सर्वनिष्ठ (Intersection) एवं हर को शून्य न होने देने का नियम लागू होता है। करणीयुक्त एवं परिमेय फलनों के वास्तविक प्रांत एवं परिसर ज्ञात करने के लिए वेवी कर्व विधि और बीजगणितीय रूपांतरण का सटीक उपयोग किया जाता है।

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

पश्चिम बंगाल बोर्ड (WBCHSE) कक्षा 11 की वार्षिक परीक्षा, WBJEE तथा JEE Main जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करने के लिए संबंध एवं फलन का गहन अध्ययन अनिवार्य है। अवकलन और समाकलन में सीमा (Limits), सांतत्य (Continuity), अवकलनीयता (Differentiability), उच्चिष्ठ एवं निम्निष्ठ (Maxima-Minima) का कोई भी प्रमेय फलन के प्रांत, परिसर और उसकी शाखाबद्ध प्रकृति के बिना नहीं समझा जा सकता। कंप्यूटर साइंस में कार्यात्मक प्रोग्रामिंग (Functional Programming), रिलेशनल डेटाबेस (RDBMS), क्रिप्टोग्राफिक हैश फंक्शन और लैम्ब्डा कैलकुलस सीधे गणितीय संबंधों और प्रतिचित्रणों पर आधारित हैं। आधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डीप लर्निंग में उपयोग होने वाले सक्रियण फलन (Activation Functions) जैसे ReLU (Rectified Linear Unit) वस्तुतः मापांक फलन f(x) = max(0, x) = (x + |x|)/2 का ही बीजगणितीय रूप हैं। WBCHSE परीक्षा में वास्तविक फलनों के प्रांत व परिसर ज्ञात करने, महत्तम पूर्णांक समीकरण हल करने और फलनों के वर्गीकरण से संबंधित 4 से 6 अंकों के दीर्घ व लघु उत्तरीय प्रश्न प्रतिवर्ष निश्चित रूप से पूछे जाते हैं।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. क्रमित युग्म एवं समुच्चयों का का...
2 2. संबंध की संकल्पना, निरूपण एवं वर...
3 3. फलन (प्रतिचित्रण) की औपचारिक परि...
4 4. मानक वास्तविक फलनों का वर्गीकरण,...
5 5. वास्तविक फलनों का बीजगणित एवं सर...
6 6. वास्तविक फलनों के प्रांत एवं परि...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. क्रमित युग्म एवं समुच्चयों का कार्तीय गुणन

समुच्चय सिद्धांत से संबंध, फलन और वैश्लेषिक ज्यामिति की यात्रा क्रमित युग्म (Ordered Pair) और कार्तीय गुणन (Cartesian Product) की संकल्पना से प्रारंभ होती है, जिसका नामकरण महान फ्रांसीसी दार्शनिक और गणितज्ञ रेने देकार्त (René Descartes, 1596–1650) के सम्मान में किया गया है।

1.1 क्रमित युग्म (Ordered Pair) एवं समानता का नियम

जब दो अवयवों को एक निश्चित क्रम में व्यवस्थित करके कोष्ठक के भीतर लिखा जाता है, तो उसे क्रमित युग्म (Ordered Pair) कहते हैं, जिसे $(a, b)$ द्वारा दर्शाया जाता है। यहाँ $a$ को प्रथम घटक या भुज (Abscissa) तथा $b$ को द्वितीय घटक या कोटि (Ordinate) कहा जाता है।

क्रमित युग्मों की समानता का नियम: दो क्रमित युग्म $(a, b)$ और $(c, d)$ परस्पर समान होंगे यदि और केवल यदि उनके संगत प्रथम घटक समान हों तथा संगत द्वितीय घटक समान हों: $$(a, b) = (c, d) \iff a = c \quad \text{तथा} \quad b = d$$

समुच्चय से मौलिक अंतर: समुच्चय में अवयवों का क्रम अर्थहीन होता है: $\{1, 2\} = \{2, 1\}$। परंतु क्रमित युग्म में क्रम सर्वोपरि है: $(1, 2) \neq (2, 1)$ (जब तक कि दोनों अवयव समान न हों)।

1.2 दो समुच्चयों का कार्तीय गुणन ($A \times B$)

माना $A$ और $B$ दो अरिक्त (non-empty) समुच्चय हैं। $A$ और $B$ का कार्तीय गुणन $A \times B$ (उच्चारण: "$A$ cross $B$") उन सभी क्रमित युग्मों $(a, b)$ का समुच्चय है जिनका प्रथम अवयव $a \in A$ तथा द्वितीय अवयव $b \in B$ हो।

समुच्चय निर्माण रूप: $$A \times B = \{(a, b) : a \in A \land b \in B\}$$
  • यदि $A = \emptyset$ अथवा $B = \emptyset$ हो, तो परिभाषा अनुसार $A \times B = \emptyset$ होगा।
  • अ-क्रमविनिमेयता: सामान्यतः $A \times B \neq B \times A$। ये दोनों समुच्चय केवल तभी समान होते हैं जब $A = B$ हो।
कार्तीय गुणन की अवयव संख्या (कार्डिनलिटी) प्रमेय

यदि $A$ और $B$ दो परिमित समुच्चय हैं जिनमें $n(A) = p$ तथा $n(B) = q$ अवयव हैं, तो:

$$n(A \times B) = n(A) \cdot n(B) = p \cdot q$$

उपपत्ति की रूपरेखा: समुच्चय $A$ से प्रथम अवयव $a$ चुनने के $p$ स्वतंत्र विकल्प हैं। इनमें से प्रत्येक विकल्प के लिए समुच्चय $B$ से द्वितीय अवयव $b$ चुनने के $q$ स्वतंत्र विकल्प हैं। गणना के मूल गुणन सिद्धांत के अनुसार कुल क्रमित युग्मों की संख्या $p \times q$ होगी।

1.3 कार्तीय गुणन के वितरण नियम

कार्तीय गुणन समुच्चय की मूलभूत संक्रियाओं (सम्मेलन, सर्वनिष्ठ और अंतर) पर वितरित होता है:

  1. सम्मेलन पर वितरण: $A \times (B \cup C) = (A \times B) \cup (A \times C)$
  2. सर्वनिष्ठ पर वितरण: $A \times (B \cap C) = (A \times B) \cap (A \times C)$
  3. अंतर पर वितरण: $A \times (B - C) = (A \times B) - (A \times C)$
  4. उभयनिष्ठ अवयव प्रमेय (बोर्ड परीक्षा हेतु अत्यंत महत्वपूर्ण): यदि दो समुच्चयों $A$ और $B$ में $k$ अवयव उभयनिष्ठ (common) हों, अर्थात् $n(A \cap B) = k$, तो $A \times B$ तथा $B \times A$ में ठीक $k^2$ अवयव उभयनिष्ठ होंगे: $$(A \times B) \cap (B \times A) = (A \cap B) \times (B \cap A) \implies n((A \times B) \cap (B \times A)) = k^2$$
1.4 उच्च विमाओं में कार्तीय गुणन
  • $\mathbb{R} \times \mathbb{R} = \mathbb{R}^2 = \{(x, y) : x, y \in \mathbb{R}\}$ संपूर्ण सतत 2-विमीय कार्तीय निर्देशांक तल (Cartesian Plane) को निरूपित करता है।
  • $\mathbb{R} \times \mathbb{R} \times \mathbb{R} = \mathbb{R}^3 = \{(x, y, z) : x, y, z \in \mathbb{R}\}$ संपूर्ण 3-विमीय यूक्लिडीय आकाश (3D Space) को निरूपित करता है।

2. संबंध की संकल्पना, निरूपण एवं वर्गीकरण

दैनिक जीवन में "पिता-पुत्र", "बड़ा है", "सहोदर है" जैसे संबंध दो व्यक्तियों या वस्तुओं के बीच संबंध दर्शाते हैं। गणित में इस विचार को कार्तीय गुणन के उपसमुच्चयों के रूप में अमूर्त व सटीक बनाया गया है।

2.1 संबंध की गणितीय परिभाषा

किसी अरिक्त समुच्चय $A$ से किसी अरिक्त समुच्चय $B$ में एक संबंध $R$ (Relation) कार्तीय गुणन $A \times B$ का कोई भी उपसमुच्चय होता है।

औपचारिक परिभाषा: $R \subseteq A \times B$
यदि $(a, b) \in R$ हो, तो हम कहते हैं कि "$a$ का संबंध $b$ से संबंध $R$ द्वारा है", जिसे प्रतीकात्मक रूप में $a R b$ लिखा जाता है।
यदि $(a, b) \notin R$ हो, तो हम लिखते हैं $a \cancel{R} b$।

यदि संबंध एक ही समुच्चय $A$ से $A$ में हो ($R \subseteq A \times A$), तो इसे समुच्चय $A$ पर एक संबंध कहा जाता है।

2.2 कुल संभव संबंधों की संख्या

माना $A$ और $B$ दो परिमित समुच्चय हैं जिनमें क्रमशः $n(A) = p$ और $n(B) = q$ अवयव हैं।

  • कार्तीय गुणन $A \times B$ में कुल $p \cdot q$ अवयव होते हैं।
  • चूँकि $A \times B$ का प्रत्येक उपसमुच्चय एक संबंध को निरूपित करता है, अतः $A$ से $B$ में कुल संभव संबंधों की संख्या $A \times B$ के उपसमुच्चयों की संख्या के बराबर होगी: $$\mathbf{\text{कुल संबंधों की संख्या} = 2^{n(A \times B)} = 2^{p \cdot q}}$$
  • इनमें से अरिक्त संबंधों की संख्या $2^{pq} - 1$ होती है।
2.3 संबंध का प्रांत, परिसर एवं सहप्रांत
पारिभाषिक पद गणितीय परिभाषा मुख्य गुणधर्म
प्रांत (Domain) $\text{Dom}(R) = \{a \in A : (a, b) \in R \text{ किसी } b \in B \text{ के लिए}\}$ संबंध $R$ के क्रमित युग्मों के सभी प्रथम घटकों का समुच्चय। $\text{Dom}(R) \subseteq A$।
परिसर (Range) $\text{Range}(R) = \{b \in B : (a, b) \in R \text{ किसी } a \in A \text{ के लिए}\}$ संबंध $R$ के क्रमित युग्मों के सभी द्वितीय घटकों का समुच्चय। $\text{Range}(R) \subseteq B$।
सहप्रांत (Codomain) $\text{Codomain}(R) = B$ संपूर्ण लक्ष्य समुच्चय $B$। सर्वदा $\mathbf{\text{Range}(R) \subseteq \text{Codomain}(R)}$।
2.4 संबंधों के विशिष्ट प्रकार
  1. रिक्त संबंध (Empty Relation): $\Phi \subseteq A \times B$। इसमें कोई क्रमित युग्म नहीं होता।
  2. सार्वत्रिक संबंध (Universal Relation): $U = A \times B$। इसमें कार्तीय गुणन के सभी क्रमित युग्म उपस्थित होते हैं।
  3. तत्समक संबंध (Identity Relation): समुच्चय $A$ पर $I_A = \{(a, a) : a \in A\}$। प्रत्येक अवयव केवल और केवल स्वयं से संबंधित होता है।
  4. प्रतिलोम संबंध (Inverse Relation): यदि $R \subseteq A \times B$ हो, तो इसका प्रतिलोम संबंध $R^{-1} \subseteq B \times A$ निम्न प्रकार परिभाषित होता है: $$R^{-1} = \{(b, a) : (a, b) \in R\}$$ महत्वपूर्ण गुणधर्म: $\text{Dom}(R^{-1}) = \text{Range}(R)$ तथा $\text{Range}(R^{-1}) = \text{Dom}(R)$।

3. फलन (प्रतिचित्रण) की औपचारिक परिभाषा एवं परीक्षण

फलन (Function या Mapping) एक ऐसा विशिष्ट संबंध है जो समुच्चय $A$ के प्रत्येक अवयव को समुच्चय $B$ के एक अद्वितीय अवयव से जोड़ता है। यह पूरी उच्च गणित और कलन का आधार है।

3.1 फलन की औपचारिक अभिगृहीत (Axiomatic) परिभाषा

माना $A$ और $B$ दो अरिक्त समुच्चय हैं। समुच्चय $A$ से समुच्चय $B$ में एक संबंध $f$ एक फलन (Function) अथवा प्रतिचित्रण (Mapping) कहलाता है, जिसे प्रतीकात्मक रूप से $f: A \to B$ लिखा जाता है, यदि और केवल यदि यह निम्नलिखित दो कठोर नियमों को संतुष्ट करे:

  1. अस्तित्व / संपूर्णता नियम (Totality Rule): समुच्चय $A$ के प्रत्येक अवयव $x \in A$ का समुच्चय $B$ में कम से कम एक प्रतिबिंब (image) अवश्य होना चाहिए। अर्थात् $\text{Dom}(f) = A$। समुच्चय $A$ में कोई भी अवयव बिना प्रतिबिंब के रिक्त नहीं छूट सकता।
  2. अद्वितीयता नियम (Uniqueness Rule): समुच्चय $A$ के किसी भी अवयव का समुच्चय $B$ में एक से अधिक प्रतिबिंब नहीं हो सकता। अर्थात् यदि $(x, y_1) \in f$ तथा $(x, y_2) \in f$ हो, तो अनिवार्य रूप से: $$y_1 = y_2$$

यदि $(x, y) \in f$ हो, तो हम लिखते हैं $y = f(x)$, जहाँ $y$ को $x$ का प्रतिबिंब (Image) तथा $x$ को $y$ का पूर्व-प्रतिबिंब (Pre-image) कहा जाता है।

3.2 कुल संभव फलनों की संख्या सूत्र

यदि $n(A) = p$ तथा $n(B) = q$ परिमित समुच्चय हों, तो $A$ से $B$ में कुल फलनों की संख्या:

$$\mathbf{\text{कुल फलनों की संख्या} = [n(B)]^{[n(A)]} = q^p}$$

तार्किक व्याख्या: समुच्चय $A$ के $p$ अवयवों में से प्रत्येक अवयव के पास समुच्चय $B$ के $q$ अवयवों में से किसी एक को अपना प्रतिबिंब चुनने के स्वतंत्र रूप से $q$ विकल्प हैं। अतः गुणन नियम से कुल फलनों की संख्या $q \times q \times \dots \times q \ (p \text{ बार}) = q^p$ होगी।

3.3 ज्यामितीय ऊर्ध्वाधर रेखा परीक्षण (Vertical Line Test)

कार्तीय तल $\mathbb{R}^2$ में खींचा गया कोई भी वक्र $y = f(x)$ के रूप में एक वैध वास्तविक फलन का आलेख है या नहीं, इसे ज्यामितीय रूप से जांचने की यह सबसे शक्तिशाली विधि है:

ऊर्ध्वाधर रेखा परीक्षण: कार्तीय तल में स्थित कोई वक्र $y$ को $x$ के फलन के रूप में तभी निरूपित करता है, जब $x$-अक्ष के लंबवत् (ऊर्ध्वाधर) खींची गई कोई भी काल्पनिक रेखा $x = c$ उस वक्र को अधिक से अधिक एक बिंदु पर काटे।
  • यदि कोई ऊर्ध्वाधर रेखा वक्र को दो या दो से अधिक बिंदुओं पर काटती है, तो वह वक्र फलन नहीं है (क्योंकि एक ही इनपुट मान $x$ के दो भिन्न आउटपुट मान $y_1 \neq y_2$ प्राप्त हो रहे हैं, जो अद्वितीयता नियम का उल्लंघन है)।
  • उदाहरण 1: वृत्त $x^2 + y^2 = r^2$ एक फलन नहीं है, क्योंकि ऊर्ध्वाधर रेखा $x = 0$ इसे दो बिंदुओं $(0, r)$ और $(0, -r)$ पर काटती है।
  • उदाहरण 2: परवलय $y = x^2$ एक वैध फलन है, जबकि $y^2 = x$ एक फलन नहीं है।

4. मानक वास्तविक फलनों का वर्गीकरण, आलेख एवं गुणधर्म

वास्तविक मान फलन (Real-valued Function) वे फलन होते हैं जिनका प्रांत और परिसर दोनों वास्तविक संख्याओं के समुच्चय $\mathbb{R}$ अथवा उसके उपसमुच्चय होते हैं। कैलकुलस में इन मानक फलनों का आलेखीय व बीजगणितीय व्यवहार अत्यंत महत्वपूर्ण है।

4.1 मानक वास्तविक फलनों की मास्टर तुलना तालिका
फलन का नाम बीजगणितीय समीकरण प्रांत (Domain) परिसर (Range) आलेख का स्वरूप व विशेषताएं
तत्समक फलन (Identity Function) $f(x) = x$ $\mathbb{R}$ $\mathbb{R}$ मूलबिंदु $(0, 0)$ से गुजरने वाली $45^\circ$ ढाल वाली सरल रेखा।
अचर फलन (Constant Function) $f(x) = c$ ($c \in \mathbb{R}$) $\mathbb{R}$ $\{c\}$ $x$-अक्ष के समांतर क्षैतिज रेखा, ढाल $m = 0$।
मापांक फलन (Modulus Function) $f(x) = |x| = \begin{cases} x, & x \ge 0 \\ -x, & x < 0 \end{cases}$ $\mathbb{R}$ $[0, \infty)$ मूलबिंदु $(0, 0)$ पर नुकीले शीर्ष वाली V-आकार की आकृति। सर्वदा अऋणात्मक।
महत्तम पूर्णांक फलन (Greatest Integer / Floor) $f(x) = [x]$ ($x$ से छोटा या बराबर महत्तम पूर्णांक) $\mathbb{R}$ $\mathbb{Z}$ (पूर्णांक) सीढ़ीनुमा आलेख (Step graph)। प्रत्येक पूर्णांक पर दाहिने छोर पर खुला वृत्त।
चिह्न फलन (Signum Function) $\text{sgn}(x) = \begin{cases} 1, & x > 0 \\ 0, & x = 0 \\ -1, & x < 0 \end{cases} = \begin{cases} \frac{|x|}{x}, & x \neq 0 \\ 0, & x = 0 \end{cases}$ $\mathbb{R}$ $\{-1, 0, 1\}$ तीन खंडों में विभक्त आलेख। $x=0$ पर असंतत (jump discontinuity)।
भिन्नात्मक भाग फलन (Fractional Part) $f(x) = \{x\} = x - [x]$ $\mathbb{R}$ $[0, 1)$ आरी के दांत जैसी (Sawtooth) आवर्ती आकृति। आवर्तकाल $T = 1$।
व्युत्क्रम फलन (Reciprocal Function) $f(x) = \frac{1}{x}$ $\mathbb{R} - \{0\}$ $\mathbb{R} - \{0\}$ आयताकार अतिपरवलय (Rectangular Hyperbola)। प्रथम व तृतीय चतुर्थांश में।
वर्गमूल फलन (Square Root Function) $f(x) = \sqrt{x}$ $[0, \infty)$ $[0, \infty)$ मूलबिंदु से प्रारंभ होने वाली परवलयिक चाप (प्रथम चतुर्थांश में)।
4.2 मापांक फलन के मुख्य गुणधर्म

कैलकुलस और असमिकाओं को हल करने में निम्नलिखित सूत्र आधारभूत हैं:

  • $|x| \le a \iff -a \le x \le a \quad (a > 0)$
  • $|x| \ge a \iff x \le -a \quad \text{अथवा} \quad x \ge a \quad (a > 0)$
  • त्रिभुज असमिका: $|x + y| \le |x| + |y|$ तथा $|x - y| \ge ||x| - |y||$
  • $\sqrt{x^2} = |x|$ (यह सर्वदा सत्य है, $\sqrt{x^2} = \pm x$ लिखना गणितीय रूप से अमान्य है)।
4.3 महत्तम पूर्णांक फलन के महत्वपूर्ण गुणधर्म
  • $[x] \le x < [x] + 1$ तथा $x - 1 < [x] \le x$
  • $[x + k] = [x] + k$, जहाँ $k \in \mathbb{Z}$ (कोई भी पूर्णांक बाहर निकाला जा सकता है)।
  • $[x] + [-x] = \begin{cases} 0, & \text{यदि } x \in \mathbb{Z} \\ -1, & \text{यदि } x \notin \mathbb{Z} \end{cases}$

5. वास्तविक फलनों का बीजगणित एवं सर्वनिष्ठ प्रांत

जब दो वास्तविक फलनों का योग, अंतर, गुणन अथवा भाग किया जाता है, तो परिणामी फलन का प्रांत दोनों मूल फलनों के प्रांतों के सर्वनिष्ठ (Intersection) द्वारा निर्धारित होता है।

5.1 बीजगणितीय संक्रियाओं के नियम

माना $f: D_1 \to \mathbb{R}$ तथा $g: D_2 \to \mathbb{R}$ दो वास्तविक फलन हैं, जहाँ $D_1, D_2 \subseteq \mathbb{R}$।

  1. फलनों का योग (Addition): $(f + g)(x) = f(x) + g(x)$
    प्रांत: $\text{Dom}(f + g) = D_1 \cap D_2$
  2. फलनों का अंतर (Subtraction): $(f - g)(x) = f(x) - g(x)$
    प्रांत: $\text{Dom}(f - g) = D_1 \cap D_2$
  3. फलनों का गुणन (Multiplication): $(f \cdot g)(x) = f(x) \cdot g(x)$
    प्रांत: $\text{Dom}(f \cdot g) = D_1 \cap D_2$
  4. अदिश से गुणन (Scalar Multiplication): $(c \cdot f)(x) = c \cdot f(x)$, जहाँ $c \in \mathbb{R}$
    प्रांत: $\text{Dom}(c \cdot f) = D_1$
  5. फलनों का भागफल (Quotient): $\left(\frac{f}{g}\right)(x) = \frac{f(x)}{g(x)}$
    प्रांत: $\mathbf{\text{Dom}\left(\frac{f}{g}\right) = (D_1 \cap D_2) - \{x \in D_2 : g(x) = 0\}}$
    महत्वपूर्ण नोट: हर $g(x)$ को शून्य करने वाले सभी वास्तविक मानों को सर्वनिष्ठ प्रांत में से अनिवार्य रूप से निष्कासित करना होगा।

6. वास्तविक फलनों के प्रांत एवं परिसर ज्ञात करने की उन्नत विधियां

बोर्ड परीक्षा (WBCHSE) एवं प्रवेश परीक्षाओं (WBJEE) में सबसे अधिक अंक वास्तविक फलनों के प्रांत (Domain) और परिसर (Range) ज्ञात करने पर आवंटित होते हैं। इसके लिए सुनियोजित बीजगणितीय विधियों का पालन करना चाहिए।

6.1 प्राकृतिक प्रांत (Natural Domain) ज्ञात करने के 4 सार्वभौमिक नियम
  1. परिमेय व्यंजक नियम: यदि व्यंजक $\frac{P(x)}{Q(x)}$ के रूप में हो, तो हर कभी शून्य नहीं हो सकता: $$\mathbf{Q(x) \neq 0}$$
  2. वर्गमूल / सममूल नियम: यदि व्यंजक $\sqrt{f(x)}$ या $\sqrt[2n]{f(x)}$ के रूप में हो, तो करणी के भीतर की राशि अऋणात्मक होनी चाहिए: $$\mathbf{f(x) \ge 0}$$
  3. हर में स्थित वर्गमूल नियम: यदि व्यंजक $\frac{1}{\sqrt{f(x)}}$ हो, तो राशि धनात्मक और अशून्य होनी चाहिए: $$\mathbf{f(x) > 0}$$
  4. लघुगणकीय नियम: यदि व्यंजक $\log_b(f(x))$ हो, तो कोणांक $f(x) > 0$ तथा आधार $b > 0, b \neq 1$ होना चाहिए।
6.2 मानक करणी असमिकाएं (वेवी कर्व विधि - Wavy Curve Method)
फलन रूप आवश्यक असमिका शर्त प्रांत (Domain) परिसर (Range)
$f(x) = \sqrt{a^2 - x^2}$ $a^2 - x^2 \ge 0 \implies x^2 \le a^2$ $[-a, a]$ $[0, a]$
$f(x) = \frac{1}{\sqrt{a^2 - x^2}}$ $a^2 - x^2 > 0 \implies x^2 < a^2$ $(-a, a)$ $\left[\frac{1}{a}, \infty\right)$
$f(x) = \sqrt{x^2 - a^2}$ $x^2 - a^2 \ge 0 \implies x^2 \ge a^2$ $(-\infty, -a] \cup [a, \infty)$ $[0, \infty)$
6.3 परिसर (Range) ज्ञात करने की विधियां
  • विधि 1: चर $x$ को $y$ के पदों में व्यक्त करना (Inversion Method): दिए गए समीकरण $y = f(x)$ को $x = \phi(y)$ के रूप में रूपांतरित करें। तत्पश्चात उन सभी वास्तविक मानों $y$ का समुच्चय ज्ञात करें जिनके लिए $x$ वास्तविक बना रहे और मूल प्रांत में स्थित हो।
  • विधि 2: पूर्ण वर्ग बनाकर सीमा निर्धारण: द्विघात व्यंजकों $f(x) = ax^2 + bx + c$ के लिए पूर्ण वर्ग बनाकर न्यूनतम अथवा अधिकतम मान ज्ञात करें।
  • विधि 3: परिबद्ध फलनों के गुणधर्मों का उपयोग: जैसे $-1 \le \sin x \le 1$, $0 \le |x| < \infty$, अथवा $0 \le \{x\} < 1$ का उपयोग करके परिसर की सीमाएं सीधे निर्धारित करना।

महत्वपूर्ण सूत्र, सर्वसमिकाएँ एवं प्रमेय

कार्तीय गुणन की अवयव संख्या सूत्र
p · q
यदि n(A)=p तथा n(B)=q हो, तो कार्तीय गुणन में कुल क्रमित युग्मों की संख्या p × q होती है।
कुल संभव संबंधों की संख्या
2^(pq)
चूँकि A × B का प्रत्येक उपसमुच्चय एक संबंध है, अतः कुल संबंधों की संख्या 2^(pq) होती है।
कुल संभव फलनों (प्रतिचित्रणों) की संख्या
$$q^p$$
प्रांत A के प्रत्येक p अवयव के पास सहप्रांत B में प्रतिबिंब चुनने के q स्वतंत्र विकल्प होते हैं।
उभयनिष्ठ अवयव कार्तीय प्रमेय
k²
यदि A और B में k अवयव उभयनिष्ठ हों, तो A × B तथा B × A में ठीक k² क्रमित युग्म उभयनिष्ठ होते हैं।
फलनों के भागफल का प्राकृतिक प्रांत
(D₁ ∩ D₂) - {g(x)=0}
दो फलनों के भागफल का प्रांत दोनों प्रांतों के सर्वनिष्ठ में से हर को शून्य करने वाले बिंदुओं को हटाकर प्राप्त होता है।
द्विघात करणी का मानक प्रांत एवं परिसर
Dom: [-a, a], Range: [0, a]
अर्धवृत्ताकार आलेख; x का मान -a से a के बीच तथा धनात्मक वर्गमूल का मान 0 से a के बीच रहता है।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
यदि क्रमित युग्म \(\left(\frac{x}{3} + 1, y - \frac{2}{3}\right) = \left(\frac{5}{3}, \frac{1}{3}\right)\) हो, तो \(x\) और \(y\) का मान ज्ञात कीजिए। [2 अंक]
विस्तृत समाधान / उत्तर:
हल:
चरण 1: क्रमित युग्मों की समानता का नियम लागू करने पर: दो क्रमित युग्म तभी समान होते हैं जब उनके संगत प्रथम घटक और संगत द्वितीय घटक समान हों। अतः: $$\frac{x}{3} + 1 = \frac{5}{3} \quad \text{तथा} \quad y - \frac{2}{3} = \frac{1}{3}$$
चरण 2: प्रथम घटक से $x$ का मान ज्ञात करना: $$\frac{x}{3} = \frac{5}{3} - 1 = \frac{5 - 3}{3} = \frac{2}{3}$$ दोनों पक्षों में 3 से गुणा करने पर: $$x = 2$$
चरण 3: द्वितीय घटक से $y$ का मान ज्ञात करना: $$y = \frac{1}{3} + \frac{2}{3} = \frac{1 + 2}{3} = \frac{3}{3} = 1$$
निष्कर्ष: $$x = 2, \quad y = 1$$
उदाहरण 2
यदि समुच्चय \(A = \{1, 2, 3\}\) और \(B = \{3, 4\}\) हों, तो कार्तीय गुणन \(A \times B\) तथा \(B \times A\) ज्ञात कीजिए। क्या \(A \times B = B \times A\) है? साथ ही \((A \times B) \cap (B \times A)\) का मान ज्ञात कीजिए। [1+1+1=3 अंक]
विस्तृत समाधान / उत्तर:
हल:
चरण 1: कार्तीय गुणन $A \times B$ ज्ञात करना: $$A \times B = \{(1, 3), (1, 4), (2, 3), (2, 4), (3, 3), (3, 4)\}$$ यहाँ $n(A \times B) = 3 \times 2 = 6$।
चरण 2: कार्तीय गुणन $B \times A$ ज्ञात करना: $$B \times A = \{(3, 1), (3, 2), (3, 3), (4, 1), (4, 2), (4, 3)\}$$ यहाँ $n(B \times A) = 2 \times 3 = 6$।
चरण 3: समानता की जांच: क्रमित युग्मों में क्रम महत्वपूर्ण होता है। उदाहरणार्थ, $(1, 3) \in A \times B$ परंतु $(1, 3) \notin B \times A$ (बल्कि $(3, 1) \in B \times A$ है, तथा $(1, 3) \neq (3, 1)$)। अतः: $$\mathbf{A \times B \neq B \times A}$$
चरण 4: सर्वनिष्ठ $(A \times B) \cap (B \times A)$ ज्ञात करना: दोनों समुच्चयों में उभयनिष्ठ क्रमित युग्मों की तुलना करने पर: $$(A \times B) \cap (B \times A) = \{(3, 3)\}$$ सैद्धांतिक सत्यापन: $A \cap B = \{3\}$, अतः $n(A \cap B) = 1$। सूत्रानुसार: $n((A \times B) \cap (B \times A)) = [n(A \cap B)]^2 = 1^2 = 1$, जो पूरी तरह से सत्यापित होता है।
उदाहरण 3
माना प्राकृत संख्याओं के समुच्चय \(\mathbb{N}\) पर एक संबंध \(R = \{(x, y) : x + 2y = 8, \; x, y \in \mathbb{N}\}\) परिभाषित है। (i) \(R\) को रोस्टर रूप में लिखिए। (ii) \(R\) का प्रांत (Domain) एवं परिसर (Range) ज्ञात कीजिए। (iii) प्रतिलोम संबंध \(R^{-1}\) ज्ञात कीजिए। [1+2+1=4 अंक]
विस्तृत समाधान / उत्तर:
हल:
चरण 1: दिए गए प्रतिबंध का विश्लेषण: समीकरण $x + 2y = 8 \implies x = 8 - 2y$। चूँकि $x, y \in \mathbb{N} = \{1, 2, 3, 4, \dots\}$: $x > 0 \implies 8 - 2y > 0 \implies 2y < 8 \implies y < 4$। अतः $y$ के संभावित प्राकृत मान $y \in \{1, 2, 3\}$ हो सकते हैं।
  • जब $y = 1 \implies x = 8 - 2(1) = 6 \in \mathbb{N}$
  • जब $y = 2 \implies x = 8 - 2(2) = 4 \in \mathbb{N}$
  • जब $y = 3 \implies x = 8 - 2(3) = 2 \in \mathbb{N}$

(i) रोस्टर रूप में संबंध $R$: $$R = \{(6, 1), (4, 2), (2, 3)\}$$
(ii) प्रांत एवं परिसर:
  • प्रांत $\text{Dom}(R)$ (प्रथम घटकों का समुच्चय): $$\text{Dom}(R) = \{2, 4, 6\}$$
  • परिसर $\text{Range}(R)$ (द्वितीय घटकों का समुच्चय): $$\text{Range}(R) = \{1, 2, 3\}$$

(iii) प्रतिलोम संबंध $R^{-1}$: क्रमित युग्मों के घटकों को आपस में बदलने पर: $$R^{-1} = \{(1, 6), (2, 4), (3, 2)\}$$
उदाहरण 4
वास्तविक फलन \(f(x) = \sqrt{9 - x^2}\) का प्रांत (Domain) तथा परिसर (Range) ज्ञात कीजिए। [2+3=5 अंक]
विस्तृत समाधान / उत्तर:
हल:
भाग A: फलन का प्रांत (Domain) ज्ञात करना:
चरण 1: अस्तित्व की शर्त: फलन $f(x) = \sqrt{9 - x^2}$ का मान वास्तविक होने के लिए करणी के भीतर की राशि अऋणात्मक होनी चाहिए: $$9 - x^2 \ge 0$$
चरण 2: असमिका को हल करना: दोनों पक्षों में $-1$ से गुणा करने पर (असमिका का चिह्न उलट जाएगा): $$x^2 - 9 \le 0 \implies (x - 3)(x + 3) \le 0$$ वेवी कर्व (संख्या रेखा) विधि के अनुसार, गुणनखंड $(x - 3)(x + 3) \le 0$ का हल अंतराल $[-3, 3]$ है। अतः प्रांत: $$\mathbf{\text{Dom}(f) = [-3, 3] = \{x \in \mathbb{R} : -3 \le x \le 3\}}$$
भाग B: फलन का परिसर (Range) ज्ञात करना:
चरण 3: चर $y$ का प्रतिबंध: माना $y = f(x) = \sqrt{9 - x^2}$। चूँकि मुख्य वर्गमूल सर्वदा अऋणात्मक होता है: $$y \ge 0$$
चरण 4: दोनों पक्षों का वर्ग करके $x$ को $y$ के पदों में व्यक्त करना: $$y^2 = 9 - x^2 \implies x^2 = 9 - y^2 \implies x = \pm\sqrt{9 - y^2}$$ $x$ के वास्तविक मान के लिए करणीगत राशि अऋणात्मक होनी चाहिए: $$9 - y^2 \ge 0 \implies y^2 \le 9 \implies -3 \le y \le 3$$
चरण 5: प्रतिबंधों का सर्वनिष्ठ: प्रतिबंध $y \ge 0$ तथा $-3 \le y \le 3$ का उभयनिष्ठ भाग: $$0 \le y \le 3$$ अतः परिसर: $$\mathbf{\text{Range}(f) = [0, 3]}$$
उदाहरण 5
वास्तविक फलन \(f(x) = \frac{x^2 + 2x + 1}{x^2 - 8x + 12}\) का प्रांत (Domain) ज्ञात कीजिए। [3 अंक]
विस्तृत समाधान / उत्तर:
हल:
चरण 1: परिमेय फलन के अस्तित्व का नियम: दिया गया फलन $f(x) = \frac{P(x)}{Q(x)}$ एक परिमेय फलन है, जहाँ: $$P(x) = x^2 + 2x + 1, \quad Q(x) = x^2 - 8x + 12$$ वास्तविक मान के लिए हर शून्य नहीं होना चाहिए, अर्थात् $Q(x) \neq 0$।
चरण 2: हर के शून्यक ज्ञात करना: $$x^2 - 8x + 12 = 0$$ मध्य पद को विभक्त करने पर: $$x^2 - 6x - 2x + 12 = 0 \implies x(x - 6) - 2(x - 6) = 0$$ $$(x - 2)(x - 6) = 0 \implies x = 2 \quad \text{अथवा} \quad x = 6$$
चरण 3: प्रांत का निर्धारण: यदि $x = 2$ अथवा $x = 6$ होगा, तो फलन का हर शून्य हो जाएगा और फलन अपरिभाषित हो जाएगा। अतः वास्तविक संख्याओं के समुच्चय $\mathbb{R}$ में से इन दो बिंदुओं को हटाना होगा: $$\mathbf{\text{Dom}(f) = \mathbb{R} - \{2, 6\} = (-\infty, 2) \cup (2, 6) \cup (6, \infty)}$$
उदाहरण 6
यदि \(f(x) = x^2\) तथा \(g(x) = 2x + 1\) दो वास्तविक फलन हों, तो निम्नलिखित फलनों के व्यंजक एवं उनके संबंधित प्रांत ज्ञात कीजिए: (i) \((f + g)(x)\) (ii) \((f - g)(x)\) (iii) \((fg)(x)\) (iv) \(\left(\frac{f}{g}\right)(x)\) [1+1+1+2=5 अंक]
विस्तृत समाधान / उत्तर:
हल:
चरण 1: मूल फलनों के प्रांतों की पहचान: $f(x) = x^2$ एक बहुपद फलन है, अतः $\text{Dom}(f) = D_1 = \mathbb{R}$। $g(x) = 2x + 1$ भी एक रैखिक बहुपद फलन है, अतः $\text{Dom}(g) = D_2 = \mathbb{R}$। दोनों का सर्वनिष्ठ: $$D_1 \cap D_2 = \mathbb{R} \cap \mathbb{R} = \mathbb{R}$$
(i) फलनों का योग $(f + g)(x)$ व प्रांत: $$(f + g)(x) = f(x) + g(x) = x^2 + 2x + 1 = (x + 1)^2$$ प्रांत: $\text{Dom}(f + g) = D_1 \cap D_2 = \mathbf{\mathbb{R}}$
(ii) फलनों का अंतर $(f - g)(x)$ व प्रांत: $$(f - g)(x) = f(x) - g(x) = x^2 - (2x + 1) = x^2 - 2x - 1$$ प्रांत: $\text{Dom}(f - g) = D_1 \cap D_2 = \mathbf{\mathbb{R}}$
(iii) फलनों का गुणन $(fg)(x)$ व प्रांत: $$(fg)(x) = f(x) \cdot g(x) = x^2(2x + 1) = 2x^3 + x^2$$ प्रांत: $\text{Dom}(fg) = D_1 \cap D_2 = \mathbf{\mathbb{R}}$
(iv) फलनों का भागफल $\left(\frac{f}{g}\right)(x)$ व प्रांत: $$\left(\frac{f}{g}\right)(x) = \frac{f(x)}{g(x)} = \frac{x^2}{2x + 1}$$ भागफल के अस्तित्व के लिए $g(x) \neq 0$ होना चाहिए: $$2x + 1 \neq 0 \implies 2x \neq -1 \implies x \neq -\frac{1}{2}$$ अतः प्रांत: $$\mathbf{\text{Dom}\left(\frac{f}{g}\right) = \mathbb{R} - \left\{-\frac{1}{2}\right\}}$$

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

यह मान लेना कि (a, b) = (b, a) और {a, b} = (a, b)

सही वैज्ञानिक तथ्य

क्रमित युग्म में क्रम सर्वोपरि होता है: (1, 2) ≠ (2, 1) जब तक कि दोनों अवयव समान न हों। समुच्चय अक्रमित होते हैं जबकि क्रमित युग्म निश्चित क्रम में होते हैं।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

वर्गमूल फलन √(x²) = ±x लिखना

सही वैज्ञानिक तथ्य

संकेत √ सर्वदा मुख्य (अऋणात्मक) वर्गमूल को दर्शाता है। अतः √(x²) = |x| होता है, न कि ±x। उदाहरणार्थ, √((-5)²) = √25 = 5 = |-5|।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

परिसर (Range) और सहप्रांत (Codomain) को समान मान लेना

सही वैज्ञानिक तथ्य

सहप्रांत (Codomain) संपूर्ण समुच्चय B होता है, जबकि परिसर (Range) केवल उन अवयवों का उपसमुच्चय होता है जो A के किसी अवयव के वास्तविक प्रतिबिंब हैं: Range(f) ⊆ Codomain(f)।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

महत्तम पूर्णांक फलन में ऋणात्मक संख्याओं का मान गलत निकालना

सही वैज्ञानिक तथ्य

परिभाषा अनुसार, [x] संख्या रेखा पर x के बाईं ओर स्थित सबसे बड़ा पूर्णांक होता है। -2.3 संख्या रेखा पर -3 और -2 के बीच स्थित है, अतः इसके बाईं ओर का सबसे बड़ा पूर्णांक -3 है। अर्थात् [-2.3] = -3।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

फलनों के भागफल में हर के शून्य होने की अनदेखी करना

सही वैज्ञानिक तथ्य

शून्य से विभाजन गणित में अपरिभाषित है। अतः भागफल फलन के प्रांत में से उन सभी x के मानों को अनिवार्य रूप से निष्कासित करना चाहिए जहाँ g(x) = 0 हो: Dom(f/g) = (Dom(f) ∩ Dom(g)) - {x : g(x) = 0}।

संबंध, फलन एवं वास्तविक आलेखीय ज्यामिति संपूर्ण वास्तुकला रूपरेखा

WBCHSE कक्षा 11 गणित • इकाई 1: संबंध एवं फलन संबंध, फलन (प्रतिचित्रण), मानक आलेख एवं प्रांत-परिसर कार्तीय गुणनफल • फलन के मूलभूत नियम • ऊर्ध्वाधर रेखा परीक्षण • विशेष वास्तविक फलन 1. कार्तीय गुणन एवं संबंध कार्तीय गुणनफल (Cartesian Product) A × B = {(a, b) : a ∈ A तथा b ∈ B} n(A × B) = n(A) · n(B) = p · q संबंध की परिभाषा एवं कुल संख्या कोई भी संबंध R समुच्चय A × B का एक उपसमुच्चय है (R ⊆ A × B) कुल संभव संबंधों की संख्या = 2^(p·q) प्रांत (Domain), परिसर (Range) व सहप्रांत • प्रांत Dom(R) = {a ∈ A : (a, b) ∈ R} • परिसर Range(R) = {b ∈ B : (a, b) ∈ R} • सहप्रांत Codomain = संपूर्ण समुच्चय B Range(R) ⊆ Codomain(R) प्रतिलोम संबंध (Inverse Relation) R^(-1) = {(b, a) : (a, b) ∈ R} Dom(R^(-1)) = Range(R), Range(R^(-1)) = Dom(R) 2. फलन (प्रतिचित्रण) एवं आलेखीय परीक्षण फलन होने के दो अनिवार्य प्रतिबंध A (Dom) 1 2 3 B (Codom) x y z 1. प्रांत के प्रत्येक अवयव का प्रतिबिंब अवश्य होना चाहिए। 2. प्रत्येक अवयव का केवल एक ही अद्वितीय प्रतिबिंब हो। कुल फलनों की संख्या = [n(B)]^[n(A)] = q^p ऊर्ध्वाधर रेखा परीक्षण (Vertical Line Test) 1 Point ✓ 2 Points ✗ यदि कोई ऊर्ध्वाधर रेखा x = c आलेख को एक से अधिक बिंदुओं पर काटे, तो वह फलन नहीं है! y = x² (फलन है ✓) x² + y² = r² (वृत्त, फलन नहीं ✗) वास्तविक फलनों का बीजगणित Dom(f ± g) = Dom(f) ∩ Dom(g) Dom(f · g) = Dom(f) ∩ Dom(g) Dom(f / g) = [Dom(f) ∩ Dom(g)] - {x : g(x) = 0} 3. मानक वास्तविक फलन एवं प्रांत-परिसर मापांक फलन: f(x) = |x| Dom = ℝ, Range = [0, ∞) (V-आकार आलेख) महत्तम पूर्णांक फलन: f(x) = [x] Dom = ℝ, Range = ℤ (सोपान/सीढ़ीदार आलेख) चिह्न फलन: f(x) = sgn(x) Range = {-1, 0, 1}, Dom = ℝ प्रांत एवं परिसर निर्धारण के नियम • √(f(x)) हेतु: f(x) ≥ 0 • 1 / g(x) हेतु: g(x) ≠ 0 • 1 / √(f(x)) हेतु: f(x) > 0 • √(a² - x²): Dom = [-a, a], Range = [0, a] TargetExams गोल्ड स्टैंडर्ड • WBCHSE कक्षा 11 गणित • अध्याय 2: संबंध एवं फलन (Relations and Functions)

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
दो क्रमित युग्म (a, b) और (c, d) तभी समान होते हैं जब उनके संगत घटक समान हों: a = c तथा b = d।
मुख्य बिंदु 2
दो समुच्चयों A और B का कार्तीय गुणन A × B = {(a, b) : a ∈ A तथा b ∈ B} होता है; इसकी अवयव संख्या n(A × B) = n(A) · n(B) = p · q है।
मुख्य बिंदु 3
समुच्चय A से B में कोई भी संबंध R कार्तीय गुणन A × B का एक उपसमुच्चय होता है (R ⊆ A × B); कुल संभव संबंधों की संख्या 2^(pq) होती है।
मुख्य बिंदु 4
संबंध R के क्रमित युग्मों के प्रथम घटकों का समुच्चय प्रांत (Domain) तथा द्वितीय घटकों का समुच्चय परिसर (Range) कहलाता है; समुच्चय B सहप्रांत है तथा Range ⊆ Codomain।
मुख्य बिंदु 5
कोई संबंध f: A → B एक फलन कहलाता है यदि और केवल यदि A के प्रत्येक अवयव का B में एक और केवल एक अद्वितीय प्रतिबिंब हो; कुल फलनों की संख्या [n(B)]^[n(A)] = q^p होती है।
मुख्य बिंदु 6
ऊर्ध्वाधर रेखा परीक्षण: कार्तीय तल में कोई वक्र y को x के फलन के रूप में तभी निरूपित करता है जब कोई भी ऊर्ध्वाधर रेखा वक्र को एक से अधिक बिंदु पर न काटे।
मुख्य बिंदु 7
मापांक फलन f(x) = |x| का प्रांत = ℝ तथा परिसर = [0, ∞) होता है; इसका आलेख मूलबिंदु पर शीर्ष वाला V-आकार का होता है।
मुख्य बिंदु 8
महत्तम पूर्णांक फलन f(x) = [x] का मान x से छोटा या उसके बराबर महत्तम पूर्णांक होता है; इसका प्रांत = ℝ तथा परिसर = ℤ (पूर्णांकों का समुच्चय) है।
मुख्य बिंदु 9
वास्तविक फलनों f और g के लिए Dom(f ± g) = Dom(f · g) = Dom(f) ∩ Dom(g), जबकि भाग के लिए Dom(f / g) = [Dom(f) ∩ Dom(g)] - {x : g(x) = 0} होता है।
मुख्य बिंदु 10
करणीयुक्त व्यंजक √(f(x)) के वास्तविक प्रांत के लिए f(x) ≥ 0 अनिवार्य है, तथा 1/√(f(x)) के लिए f(x) > 0 होना आवश्यक है।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
यदि समुच्चय A में 3 अवयव तथा समुच्चय B में 2 अवयव हों, तो A से B में कुल संबंधों की संख्या तथा कुल फलनों की संख्या कितनी होगी?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: कुल संबंधों की संख्या = 2^(3 × 2) = 2^6 = 64। कुल फलनों की संख्या = [n(B)]^[n(A)] = 2^3 = 8।
संबंधों के लिए 2^(pq) तथा फलनों के लिए q^p सूत्र का उपयोग करें।
2
सिद्ध कीजिए कि वृत्त x² + y² = 16 का समीकरण y को x के फलन के रूप में निरूपित नहीं करता है।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: ऊर्ध्वाधर रेखा परीक्षण के अनुसार, यदि हम x = 0 (y-अक्ष) पर विचार करें, तो 0² + y² = 16 ⇒ y² = 16 ⇒ y = 4 अथवा y = -4। इस प्रकार x = 0 के लिए दो भिन्न प्रतिबिंब प्राप्त होते हैं: (0, 4) और (0, -4)। चूँकि एक इनपुट के दो आउटपुट हैं, अतः अद्वितीयता नियम का उल्लंघन होता है और यह फलन नहीं है।
ऊर्ध्वाधर रेखा x = 0 खींचें और देखें कि यह वृत्त को कितने बिंदुओं पर काटती है।
3
महत्तम पूर्णांक फलन के लिए निम्नलिखित के मान ज्ञात कीजिए: (i) [3.7], (ii) [-3.7], (iii) [5], (iv) [-5]।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (i) [3.7] = 3 (3.7 के बाईं ओर का सबसे बड़ा पूर्णांक 3 है) (ii) [-3.7] = -4 (-3.7 संख्या रेखा पर -4 और -3 के बीच है, बाईं ओर का पूर्णांक -4 है) (iii) [5] = 5 (पूर्णांक का मान स्वयं वही रहता है) (iv) [-5] = -5
परिभाषा याद रखें: [x] संख्या रेखा पर x के बाईं ओर स्थित सबसे बड़ा पूर्णांक होता है।
4
फलन f(x) = 1 / √(x² - 25) का वास्तविक प्रांत ज्ञात कीजिए।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: हर में वर्गमूल होने के कारण x² - 25 > 0 होना अनिवार्य है। ⇒ (x - 5)(x + 5) > 0 वेवी कर्व विधि से: x < -5 अथवा x > 5 अतः प्रांत = (-∞, -5) ∪ (5, ∞)।
चूँकि वर्गमूल हर में है, अतः शर्त strictly f(x) > 0 होगी (शून्य सम्मिलित नहीं हो सकता)।
5
यदि f(x) = x + 3 तथा g(x) = x² - 9 हों, तो फलन (f / g)(x) का सरलीकृत रूप एवं इसका सटीक प्रांत क्या होगा?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (f / g)(x) = (x + 3) / (x² - 9) = (x + 3) / [(x + 3)(x - 3)] = 1 / (x - 3) (जहाँ x ≠ -3)। यद्यपि गुणनखंड (x + 3) कट जाता है, परंतु मूल फलन के हर के सभी शून्यक प्रांत से बाहर होंगे: x² - 9 ≠ 0 ⇒ x ≠ ±3। अतः सटीक प्रांत = ℝ - {-3, 3}।
गुणनखंड काटने से पूर्व मूल हर के शून्यकों को प्रांत से निष्कासित करना न भूलें।
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