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WBB • कक्षा XI • Mathematics • अध्याय 10
अनुमानित समय: 80 मिनट
प्रगति: अध्ययनरत

अनुक्रम तथा श्रेणी

अनुक्रम तथा श्रेणी विविक्त गणित, गणितीय विश्लेषण और बीजीय मॉडलिंग की आधारशिला हैं। एक निश्चित गणितीय नियम के अनुसार व्यवस्थित वास्तविक संख्याओं के विन्यास को अनुक्रम कहा जाता है, जो औपचारिक रूप से प्राकृत संख्याओं के समुच्चय पर परिभाषित एक वास्तविक मान फलन है। जब किसी अनुक्रम के पदों को धन चिन्हों द्वारा संयोजित किया जाता है, तो वह एक श्रेणी का निर्माण करता है। एक नियमित बीजीय प्रतिरूप के अनुसार आगे बढ़ने वाले विशेष अनुक्रमों को श्रेढ़ी या प्रगति कहा जाता है। इनमें समांतर श्रेढ़ी एक स्थिर सार्व अंतर द्वारा संचालित होकर रैखिक वृद्धि दर्शाती है, जबकि गुणोत्तर श्रेढ़ी एक स्थिर सार्व अनुपात के गुणन द्वारा चरघातांकी वृद्धि दर्शाती है। यह अध्याय परिमित और अनंत प्रगतियों के सामान्य पद, आंशिक योगफल तथा विशेषकर जब सार्व अनुपात का निरपेक्ष मान 1 से कम हो उस स्थिति में अनंत गुणोत्तर श्रेणी के अभिसरण और योगफल के सैद्धांतिक आधार की विस्तृत व्याख्या करता है। इसके अतिरिक्त, हरात्मक श्रेढ़ी, समांतर-गुणोत्तर श्रेणी तथा तीन मूलभूत माध्यों—समांतर माध्य, गुणोत्तर माध्य और हरात्मक माध्य के गहरे संबंधों का अध्ययन इस अध्याय का मुख्य केंद्र है। यह सार्वभौमिक असमिका कि समांतर माध्य सदैव गुणोत्तर माध्य से बड़ा या बराबर होता है और वह हरात्मक माध्य से बड़ा या बराबर होता है, उच्चतर बीजगणित, इष्टतमीकरण और कलन की समस्याओं को हल करने का एक अत्यंत शक्तिशाली साधन है।

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

अनुक्रम और श्रेणी का अनुप्रयोग आधुनिक वैज्ञानिक संगणना, वित्तीय गणित, दूरसंचार और सैद्धांतिक भौतिकी में सर्वव्यापी है। कंप्यूटर विज्ञान और डिजिटल सिग्नल प्रोसेसिंग में फूरियर श्रेणी और जेड-रूपांतरण जटिल संकेतों को अनंत तरंग प्रगतियों में वियोजित करते हैं। एल्गोरिदम विश्लेषण में पुनरावृत्ति संबंध—जैसे फाइबोनैचि अनुक्रम—डायनामिक प्रोग्रामिंग और विभाजन एल्गोरिदम की समय-जटिलता का निर्धारण करते हैं। आधुनिक वित्तीय गणित में चक्रवृद्धि ब्याज, भविष्य के नकदी प्रवाह का वर्तमान मूल्य, गृह ऋण की मासिक किस्तें (ईएमआई) और वार्षिकी का मूल्यांकन गुणोत्तर श्रेणियों के योगफल द्वारा किया जाता है। क्वांटम भौतिकी में जटिल समीकरणों के सन्निकटन के लिए पर्टर्बेशन श्रृंखला का विस्तार अपरिहार्य है। पश्चिम बंगाल बोर्ड कक्षा 11 की वार्षिक परीक्षा तथा WBJEE, JEE Main और JEE Advanced जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में अनुक्रम तथा श्रेणी से बहु-अवधारणात्मक प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। इस अध्याय की गहन समझ विद्यार्थियों के विश्लेषणात्मक कौशल और बीजीय क्षमता को मजबूती प्रदान करती है।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. मूलभूत अवधारणाएँ: अनुक्रम, श्रेण...
2 2. समांतर श्रेढ़ी (A.P.): गुणधर्म,...
3 3. गुणोत्तर श्रेढ़ी (G.P.): आंशिक य...
4 4. समांतर और गुणोत्तर माध्य का संबं...
5 5. समांतर-गुणोत्तर श्रेणी (A.G.P.)...
6 6. हरात्मक श्रेढ़ी (H.P.) तथा तीनों...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. मूलभूत अवधारणाएँ: अनुक्रम, श्रेणी, श्रेढ़ी तथा पुनरावृत्ति अनुक्रम

अनुक्रम, श्रेणी और श्रेढ़ी की सटीक गणितीय परिभाषा और उनके सूक्ष्म अंतर को समझना बीजगणित के इस अध्याय की पहली सीढ़ी है।

1.1 अनुक्रम (Sequence) की औपचारिक परिभाषा

एक निश्चित नियम के अनुसार क्रमबद्ध वास्तविक संख्याओं की एक व्यवस्था को अनुक्रम कहते हैं।

गणितीय परिभाषा: अनुक्रम एक ऐसा फलन $f: \mathbb{N} \to \mathbb{R}$ है जिसका प्रांत प्राकृत संख्याओं का समुच्चय $\mathbb{N} = \{1, 2, 3, \dots\}$ है। $n$ के प्रतिबिम्ब $f(n)$ को सामान्यतः $a_n$ या $T_n$ लिखा जाता है और इसे अनुक्रम का $n$-वाँ पद (सामान्य पद) कहते हैं।
  • परिमित अनुक्रम (Finite Sequence): वह अनुक्रम जिसमें पदों की संख्या सीमित हो, जैसे: $\langle a_n \rangle_{n=1}^m = \{a_1, a_2, \dots, a_m\}$।
  • अनंत अनुक्रम (Infinite Sequence): वह अनुक्रम जो निरंतर आगे बढ़ता रहे, जैसे: $\langle a_n \rangle_{n=1}^\infty = \{a_1, a_2, a_3, \dots\}$।
1.2 श्रेणी (Series) तथा आंशिक योग (Partial Sum)

यदि $a_1, a_2, a_3, \dots, a_n, \dots$ एक अनुक्रम है, तो इसके पदों को धन चिन्हों द्वारा जोड़ने पर प्राप्त व्यंजक को श्रेणी कहते हैं:

$$S = a_1 + a_2 + a_3 + \dots + a_n + \dots = \sum_{k=1}^\infty a_k$$

श्रेणी के प्रथम $n$ पदों के योग को $n$-वाँ आंशिक योग ($n$-th Partial Sum) कहा जाता है:

$$S_n = a_1 + a_2 + \dots + a_n = \sum_{k=1}^n a_k$$
1.3 पुनरावृत्ति अनुक्रम तथा फाइबोनैचि अनुक्रम

वह अनुक्रम जिसके आगामी पद उसके पूर्ववर्ती पदों के संबंधों द्वारा परिभाषित होते हैं, उसे पुनरावृत्ति अनुक्रम (Recursive Sequence) कहते हैं।

फाइबोनैचि अनुक्रम (The Fibonacci Sequence): $$a_1 = 1, \quad a_2 = 1, \quad a_n = a_{n-1} + a_{n-2} \quad (\text{सभी } n \ge 3 \text{ के लिए})$$ इसके पद हैं: $1, 1, 2, 3, 5, 8, 13, 21, 34, 55, \dots$

2. समांतर श्रेढ़ी (A.P.): गुणधर्म, योगफल तथा समांतर माध्य

समांतर श्रेढ़ी एक ऐसा अनुक्रम है जिसमें किसी भी पद और उसके ठीक पूर्ववर्ती पद का अंतर सदैव एक स्थिर संख्या रहता है।

2.1 परिभाषा, सामान्य पद एवं सार्व अंतर

एक अनुक्रम $a_1, a_2, a_3, \dots$ समांतर श्रेढ़ी (Arithmetic Progression या A.P.) कहलाता है यदि और केवल यदि:

$$a_{n+1} - a_n = d = \text{अचर} \quad (\text{जिसे सार्व अंतर या Common Difference कहते हैं})$$
सामान्य पद ($n$-वाँ पद): यदि प्रथम पद $a$ और सार्व अंतर $d$ हो, तो: $$\mathbf{T_n = a + (n - 1)d}$$ $m$ पदों वाली परिमित A.P. का अंत से $p$-वाँ पद $T_{m - p + 1} = l - (p - 1)d$ होता है, जहाँ $l$ अंतिम पद है।
2.2 प्रथम $n$ पदों का योग ($S_n$)

गॉस की युग्मन विधि द्वारा प्रथम $n$ पदों का योग प्राप्त किया जाता है:

$$S_n = a + (a + d) + (a + 2d) + \dots + [a + (n - 1)d]$$

विपरीत क्रम में लिखकर संगत पदों को जोड़ने पर:

$$2 S_n = [2a + (n - 1)d] + [2a + (n - 1)d] + \dots \text{ ($n$ बार)}$$
$$\mathbf{S_n = \frac{n}{2} [2a + (n - 1)d] = \frac{n}{2} [a + l]}$$ जहाँ $l = a + (n - 1)d$ श्रेढ़ी का अंतिम पद है।
2.3 समांतर श्रेढ़ी में अज्ञात पदों के चयन की मानक विधि
स्थिति मानक पद चयन सार्व अंतर मुख्य लाभ
A.P. में 3 पद $a - d, \; a, \; a + d$ $d$ योग $= 3a$ (सीधे $a$ का मान मिलता है)
A.P. में 4 पद $a - 3d, \; a - d, \; a + d, \; a + 3d$ $2d$ योग $= 4a$ ($d$ के विषम घात कट जाते हैं)
A.P. में 5 पद $a - 2d, \; a - d, \; a, \; a + d, \; a + 2d$ $d$ योग $= 5a$
2.4 समांतर माध्य (A.M.) एवं माध्यों का समावेश
  • एकल समांतर माध्य: यदि $a, A, b$ समांतर श्रेढ़ी में हों, तो $A - a = b - A \implies \mathbf{A = \frac{a + b}{2}}$।
  • $a$ और $b$ के बीच $n$ समांतर माध्यों ($A_1, A_2, \dots, A_n$) का समावेश:

    प्राप्त अनुक्रम $a, A_1, A_2, \dots, A_n, b$ कुल $(n + 2)$ पदों की A.P. बनाता है। अंतिम पद $b = a + (n + 1)d$:

    $$\mathbf{d = \frac{b - a}{n + 1}}, \quad A_k = a + k d = a + k \left( \frac{b - a}{n + 1} \right)$$ समाविष्ट $n$ समांतर माध्यों का योग: $$\sum_{k=1}^n A_k = \frac{n}{2}(A_1 + A_n) = \frac{n}{2}(a + b) = \mathbf{n \cdot A}$$

3. गुणोत्तर श्रेढ़ी (G.P.): आंशिक योग, अनंत श्रेणी तथा गुणोत्तर माध्य

गुणोत्तर श्रेढ़ी वह अनुक्रम है जिसमें प्रथम पद के बाद का प्रत्येक पद अपने पूर्ववर्ती पद में एक निश्चित अशून्य संख्या के गुणा से प्राप्त होता है।

3.1 परिभाषा एवं सामान्य पद

एक अनुक्रम $a_1, a_2, a_3, \dots$ गुणोत्तर श्रेढ़ी (Geometric Progression या G.P.) कहलाता है यदि और केवल यदि:

$$\frac{a_{n+1}}{a_n} = r = \text{अचर} \quad (\text{जिसे सार्व अनुपात या Common Ratio कहते हैं}, r \neq 0)$$
सामान्य पद ($n$-वाँ पद): यदि प्रथम पद $a$ और सार्व अनुपात $r$ हो, तो: $$\mathbf{T_n = a \cdot r^{n-1}}$$
3.2 प्रथम $n$ पदों का योग ($S_n$)
$$S_n = a + ar + ar^2 + \dots + ar^{n-1}$$ $$r S_n = ar + ar^2 + \dots + ar^n$$

प्रथम समीकरण में से द्वितीय को घटाने पर:

$$S_n (1 - r) = a(1 - r^n) \implies \mathbf{S_n = \frac{a(1 - r^n)}{1 - r} = \frac{a(r^n - 1)}{r - 1} \quad (r \neq 1)}$$

यदि $r = 1$ हो, तो $S_n = a + a + \dots + a = \mathbf{n a}$ होता है।

3.3 अनंत गुणोत्तर श्रेणी का योग ($S_\infty$) एवं अभिसरण

यदि सार्व अनुपात का निरपेक्ष मान 1 से कम हो ($|r| < 1$), तो $n \to \infty$ होने पर $r^n \to 0$ हो जाता है:

$$\mathbf{S_\infty = \lim_{n \to \infty} S_n = \frac{a}{1 - r}, \quad \text{केवल } |r| < 1 \text{ के लिए मान्य}}$$ अपसरण नोट: यदि $|r| \ge 1$ हो, तो अनंत श्रेणी किसी परिमित मान पर अभिसरित नहीं होती।

आवर्त दशमलव में अनुप्रयोग:

$$0.\dot{3}\dot{7} = 0.373737\dots = \frac{37}{100} + \frac{37}{100^2} + \frac{37}{100^3} + \dots$$

यहाँ $a = \frac{37}{100}$ तथा $r = \frac{1}{100} < 1$ है:

$$S_\infty = \frac{37/100}{1 - 1/100} = \frac{37/100}{99/100} = \mathbf{\frac{37}{99}}$$
3.4 गुणोत्तर माध्य (G.M.) एवं माध्यों का समावेश
  • एकल गुणोत्तर माध्य: दो धनात्मक संख्याओं $a$ और $b$ के बीच $G$ ऐसा हो कि $a, G, b$ G.P. में हों, तो $\frac{G}{a} = \frac{b}{G} \implies \mathbf{G = \sqrt{ab}}$।
  • $a$ और $b$ के बीच $n$ गुणोत्तर माध्यों ($G_1, G_2, \dots, G_n$) का समावेश:

    प्राप्त अनुक्रम $a, G_1, G_2, \dots, G_n, b$ कुल $(n + 2)$ पदों की G.P. बनाता है, जहाँ $b = a r^{n+1}$:

    $$\mathbf{r = \left( \frac{b}{a} \right)^{\frac{1}{n+1}}}, \quad G_k = a r^k = a \left( \frac{b}{a} \right)^{\frac{k}{n+1}}$$ समाविष्ट $n$ गुणोत्तर माध्यों का गुणनफल: $$\prod_{k=1}^n G_k = G_1 \cdot G_2 \dots G_n = (\sqrt{ab})^n = \mathbf{G^n}$$

4. समांतर और गुणोत्तर माध्य का संबंध: प्रमाण, द्विघात समीकरण एवं असमिका

समांतर माध्य और गुणोत्तर माध्य के बीच संबंध $A \ge G$ उच्चतर बीजगणित और चरम मान समस्याओं का सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत है।

4.1 मूलभूत AM-GM असमिका
प्रमेय: किन्हीं दो धनात्मक वास्तविक संख्याओं $a$ और $b$ के समांतर माध्य $A = \frac{a + b}{2}$ और गुणोत्तर माध्य $G = \sqrt{ab}$ के मध्य सदैव: $$\mathbf{A \ge G}$$ संबंध होता है, जहाँ समता $A = G$ केवल तभी सत्य होती है जब $a = b$ हो।

बीजीय प्रमाण:

$$A - G = \frac{a + b}{2} - \sqrt{ab} = \frac{a + b - 2\sqrt{ab}}{2} = \frac{(\sqrt{a} - \sqrt{b})^2}{2}$$

चूँकि किसी भी वास्तविक संख्या का वर्ग सदैव अऋणात्मक होता है, $(\sqrt{a} - \sqrt{b})^2 \ge 0$, अतः:

$$A - G \ge 0 \implies \mathbf{A \ge G}$$

समता केवल तभी सत्य होगी जब $(\sqrt{a} - \sqrt{b})^2 = 0 \iff \sqrt{a} = \sqrt{b} \iff a = b$ हो।

4.2 अर्धवृत्तीय ज्यामितीय प्रमाण ($A \ge G$)

$AB = a + b$ व्यास का एक अर्धवृत्त खींचते हैं। इस अर्धवृत्त की त्रिज्या है:

$$R = \frac{a + b}{2} = A \quad (\text{समांतर माध्य})$$

व्यास को बिंदु $D$ पर इस प्रकार विभाजित करते हैं कि $AD = a$ और $DB = b$ हो। $D$ से परिधि पर लंब $DP$ खींचने पर समकोण त्रिभुज के ज्यामितीय नियम से:

$$DP = \sqrt{AD \cdot DB} = \sqrt{ab} = G \quad (\text{गुणोत्तर माध्य})$$

चूँकि वृत्त की परिधि पर स्थित किसी बिंदु से खींचा गया लंब वृत्त की त्रिज्या से कभी बड़ा नहीं हो सकता (लंब $\le$ कर्ण/त्रिज्या), अतः ज्यामितीय रूप से $\mathbf{A \ge G}$ सिद्ध होता है। समता केवल तब होती है जब $D$ वृत्त के केंद्र पर हो ($a = b$)।

4.3 $a$ और $b$ मूलों वाला द्विघात समीकरण बनाना

यदि दो धनात्मक संख्याओं $a$ और $b$ के समांतर माध्य $A$ तथा गुणोत्तर माध्य $G$ ज्ञात हों:

$$\text{मूलों का योग: } a + b = 2A, \quad \text{मूलों का गुणनफल: } a b = G^2$$

अतः अभीष्ट द्विघात समीकरण होगा:

$$\mathbf{x^2 - 2Ax + G^2 = 0}$$

द्विघात सूत्र से हल करने पर संख्याएँ प्राप्त होती हैं:

$$\mathbf{a, b = A \pm \sqrt{A^2 - G^2}}$$

5. समांतर-गुणोत्तर श्रेणी (A.G.P.) एवं प्राकृत संख्याओं के घातों का योग

वास्तविक जीवन की कई समस्याओं में योगात्मक और गुणात्मक वृद्धि एक साथ होती है, जिससे समांतर-गुणोत्तर श्रेणी का निर्माण होता है।

5.1 समांतर-गुणोत्तर श्रेणी (A.G.P.)

एक A.G.P. वह श्रेणी है जिसका प्रत्येक पद एक समांतर श्रेढ़ी और एक गुणोत्तर श्रेढ़ी के संगत पदों का गुणनफल होता है:

$$a, \; (a + d)r, \; (a + 2d)r^2, \; \dots, \; [a + (n - 1)d]r^{n-1}$$

प्रथम $n$ पदों का योग $S_n$ निकालने के लिए:

$$S_n = a + (a + d)r + (a + 2d)r^2 + \dots + [a + (n - 1)d]r^{n-1}$$ $$r S_n = ar + (a + d)r^2 + \dots + [a + (n - 2)d]r^{n-1} + [a + (n - 1)d]r^n$$

घटाने पर $(n - 1)$ पदों की एक मानक गुणोत्तर श्रेणी प्राप्त होती है:

$$(1 - r) S_n = a + \left[ d r + d r^2 + \dots + d r^{n-1} \right] - [a + (n - 1)d]r^n$$
5.2 अनंत समांतर-गुणोत्तर श्रेणी का योग ($|r| < 1$)

जब $|r| < 1$ हो, तो $n \to \infty$ होने पर $r^n \to 0$ और $n r^n \to 0$ हो जाता है:

$$\mathbf{S_\infty = \frac{a}{1 - r} + \frac{d r}{(1 - r)^2}, \quad (|r| < 1)}$$
5.3 प्रथम $n$ प्राकृत संख्याओं के घातों का योग
सूत्र नाम श्रेणी विस्तार मानक सूत्र
प्रथम $n$ प्राकृत संख्याएँ $\sum_{k=1}^n k = 1 + 2 + 3 + \dots + n$ $$\mathbf{\frac{n(n + 1)}{2}}$$
वर्गों का योग $\sum_{k=1}^n k^2 = 1^2 + 2^2 + 3^2 + \dots + n^2$ $$\mathbf{\frac{n(n + 1)(2n + 1)}{6}}$$
घनों का योग $\sum_{k=1}^n k^3 = 1^3 + 2^3 + 3^3 + \dots + n^3$ $$\mathbf{\left[\frac{n(n + 1)}{2}\right]^2 = \left(\sum_{k=1}^n k\right)^2}$$

6. हरात्मक श्रेढ़ी (H.P.) तथा तीनों माध्यों की संयुक्त असमिका ($A \ge G \ge H$)

हरात्मक श्रेढ़ी तीनों शास्त्रीय प्रगतियों की त्रयी को पूर्ण करती है और केंद्रीय माध्यों के सार्वभौमिक संबंध स्थापित करती है।

6.1 हरात्मक श्रेढ़ी (Harmonic Progression या H.P.)

अशून्य वास्तविक संख्याओं का एक अनुक्रम $a_1, a_2, a_3, \dots$ हरात्मक श्रेढ़ी (H.P.) कहलाता है यदि और केवल यदि उनके व्युत्क्रम एक समांतर श्रेढ़ी (A.P.) बनाते हों:

$$\frac{1}{a_1}, \; \frac{1}{a_2}, \; \frac{1}{a_3}, \; \dots \quad \text{समांतर श्रेढ़ी में हैं}$$

यदि संगत A.P. का प्रथम पद $1/a$ और सार्व अंतर $d$ हो, तो H.P. का $n$-वाँ पद होगा:

$$\mathbf{T_n = \frac{1}{\frac{1}{a} + (n - 1)d}}$$

महत्वपूर्ण चेतावनी: H.P. के प्रथम $n$ पदों के योग का कोई सामान्य बीजीय सूत्र नहीं होता। H.P. के प्रश्नों को हल करने के लिए पदों को सदैव व्युत्क्रम करके A.P. में बदला जाता है।

6.2 हरात्मक माध्य (Harmonic Mean या H.M.)

यदि $a, H, b$ हरात्मक श्रेढ़ी में हों, तो $\frac{1}{a}, \frac{1}{H}, \frac{1}{b}$ समांतर श्रेढ़ी में होंगे:

$$\frac{2}{H} = \frac{1}{a} + \frac{1}{b} = \frac{a + b}{ab} \implies \mathbf{H = \frac{2ab}{a + b}}$$
6.3 ज्यामितीय सेतु: $G^2 = A \cdot H$

किन्हीं दो धनात्मक संख्याओं $a$ और $b$ के समांतर माध्य $A$, गुणोत्तर माध्य $G$ और हरात्मक माध्य $H$ के लिए:

$$A \cdot H = \left(\frac{a + b}{2}\right) \left(\frac{2ab}{a + b}\right) = ab = (\sqrt{ab})^2 = G^2$$
$$\mathbf{G^2 = A \cdot H \iff G = \sqrt{A \cdot H}}$$ यह सिद्ध करता है कि गुणोत्तर माध्य $G$ वास्तव में समांतर माध्य $A$ और हरात्मक माध्य $H$ का गुणोत्तर माध्य है! अर्थात् $A, G, H$ एक गुणोत्तर श्रेढ़ी बनाते हैं।
6.4 माध्यों की संपूर्ण असमिका: $A \ge G \ge H$

चूँकि $A \ge G$ तथा $G^2 = A H \implies \frac{G}{H} = \frac{A}{G} \ge 1 \implies G \ge H$:

$$\mathbf{A \ge G \ge H}$$ समता $A = G = H$ केवल तभी सत्य होती है जब $a = b$ हो।

महत्वपूर्ण सूत्र, सर्वसमिकाएँ एवं प्रमेय

समांतर श्रेढ़ी का योग सूत्र
(n/2)[2a + (n - 1)d]
l अंतिम पद है। सामान्य पद संबंध: T_n = S_n - S_{n-1}।
गुणोत्तर श्रेढ़ी का आंशिक योग
a(1 - rⁿ) / (1 - r)
r = 1 होने पर S_n = na होता है।
अनंत गुणोत्तर श्रेणी का योग
a / (1 - r)
केवल तभी मान्य जब सार्व अनुपात का निरपेक्ष मान 1 से कम हो। |r| ≥ 1 पर अपसारी होता है।
मूलभूत AM-GM असमिका
(a + b)/2 ≥ √(ab)
समता केवल तभी जब a = b। मूल सूत्र: a, b = A ± √(A² - G²)।
अनंत A.G.P. का योग
a/(1 - r) + dr/(1 - r)²
S_∞ में से r·S_∞ घटाकर प्राप्त किया जाता है।
माध्यों का संयुक्त संबंध
A ≥ G ≥ H तथा G² = AH
A, G, H एक G.P. बनाते हैं। हरात्मक माध्य H = 2ab / (a + b)।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
यदि किसी समांतर श्रेढ़ी के प्रथम \(n\) पदों का योग \(S_n = 3n^2 + 5n\) है, तो उसका \(n\)-वाँ पद और सार्व अंतर ज्ञात कीजिए। [2 अंक]
विस्तृत समाधान / उत्तर:
हल: दिया है: $S_n = 3n^2 + 5n$। हम जानते हैं कि $n \ge 2$ के लिए $n$-वाँ पद होता है: $$T_n = S_n - S_{n-1}$$ $S_{n-1}$ का मान ज्ञात करते हैं: $$S_{n-1} = 3(n - 1)^2 + 5(n - 1) = 3(n^2 - 2n + 1) + 5n - 5 = 3n^2 - 6n + 3 + 5n - 5 = 3n^2 - n - 2$$ अब घटाने पर: $$T_n = (3n^2 + 5n) - (3n^2 - n - 2) = 3n^2 + 5n - 3n^2 + n + 2 = \mathbf{6n + 2}$$ $n = 1$ के लिए सत्यापन: $$T_1 = 6(1) + 2 = 8, \quad S_1 = 3(1)^2 + 5(1) = 8 \quad (\text{सत्यापित})$$ सार्व अंतर $d$: $$d = T_n - T_{n-1} = [6n + 2] - [6(n - 1) + 2] = 6n + 2 - (6n - 4) = \mathbf{6}$$ अतः श्रेढ़ी का $n$-वाँ पद $6n + 2$ तथा सार्व अंतर $6$ है।
उदाहरण 2
समांतर श्रेढ़ी में स्थित तीन संख्याओं का योग \(21\) तथा उनका गुणनफल \(315\) है। संख्याएँ ज्ञात कीजिए। [3 अंक]
विस्तृत समाधान / उत्तर:
हल: माना समांतर श्रेढ़ी की तीन संख्याएँ हैं: $$a - d, \quad a, \quad a + d$$
शर्त 1: योग $21$ है: $$(a - d) + a + (a + d) = 21 \implies 3a = 21 \implies \mathbf{a = 7}$$
शर्त 2: गुणनफल $315$ है: $$(a - d) \cdot a \cdot (a + d) = 315$$ $a = 7$ रखने पर: $$(7 - d) \cdot 7 \cdot (7 + d) = 315$$ दोनों पक्षों को $7$ से भाग देने पर: $$(7 - d)(7 + d) = \frac{315}{7} = 45$$ $$49 - d^2 = 45 \implies d^2 = 49 - 45 = 4 \implies \mathbf{d = \pm 2}$$
संख्याओं का निर्माण:
  • यदि $d = 2$ हो: संख्याएँ $7 - 2, 7, 7 + 2 \implies \mathbf{5, 7, 9}$।
  • यदि $d = -2$ हो: संख्याएँ $7 - (-2), 7, 7 + (-2) \implies \mathbf{9, 7, 5}$।
अतः अभीष्ट संख्याएँ $5, 7, 9$ हैं।
उदाहरण 3
अनंत गुणोत्तर श्रेणी का योग ज्ञात कीजिए: \(5 + \frac{10}{3} + \frac{20}{9} + \frac{40}{27} + \dots\) [3 अंक]
विस्तृत समाधान / उत्तर:
हल: दी गई श्रेणी: $5 + \frac{10}{3} + \frac{20}{9} + \frac{40}{27} + \dots$ यहाँ प्रथम पद $a = 5$ है। सार्व अनुपात: $$r = \frac{T_2}{T_1} = \frac{10/3}{5} = \frac{10}{15} = \frac{2}{3}$$ अभिसरण जाँच: $$|r| = \left|\frac{2}{3}\right| = \frac{2}{3} < 1$$ चूँकि सार्व अनुपात का निरपेक्ष मान 1 से कम है, अतः श्रेणी अभिसारी है। अनंत गुणोत्तर श्रेणी के योग सूत्र का प्रयोग करने पर: $$S_\infty = \frac{a}{1 - r} = \frac{5}{1 - \frac{2}{3}} = \frac{5}{\frac{1}{3}} = 5 \times 3 = \mathbf{15}$$ अतः अनंत श्रेणी का योग $15$ है।
उदाहरण 4
\(1\) तथा \(31\) के बीच \(m\) समांतर माध्य इस प्रकार समाविष्ट किए गए हैं कि \(7\)-वें माध्य और \((m - 1)\)-वें माध्य का अनुपात \(5 : 9\) है। \(m\) का मान ज्ञात कीजिए। [4 अंक]
विस्तृत समाधान / उत्तर:
हल: माना $1$ और $31$ के बीच समाविष्ट $m$ समांतर माध्य $A_1, A_2, \dots, A_m$ हैं। संपूर्ण अनुक्रम: $$1, A_1, A_2, \dots, A_m, 31$$ एक A.P. बनाता है जिसमें कुल पद $= m + 2$ हैं। यहाँ प्रथम पद $a = 1$ तथा अंतिम पद $T_{m+2} = 31$: $$31 = 1 + (m + 2 - 1)d \implies 30 = (m + 1)d \implies \mathbf{d = \frac{30}{m + 1}}$$ $k$-वाँ समांतर माध्य है: $$A_k = a + k d = 1 + k \left( \frac{30}{m + 1} \right) = \frac{m + 1 + 30k}{m + 1}$$ अतः: $$A_7 = \frac{m + 1 + 30(7)}{m + 1} = \frac{m + 211}{m + 1}$$ $$A_{m-1} = \frac{m + 1 + 30(m - 1)}{m + 1} = \frac{m + 1 + 30m - 30}{m + 1} = \frac{31m - 29}{m + 1}$$ दिया गया अनुपात: $$\frac{A_7}{A_{m-1}} = \frac{m + 211}{31m - 29} = \frac{5}{9}$$ तिर्यक गुणा करने पर: $$9(m + 211) = 5(31m - 29)$$ $$9m + 1899 = 155m - 145$$ $$1899 + 145 = 155m - 9m$$ $$2044 = 146m \implies \mathbf{m = \frac{2044}{146} = 14}$$ अतः $m$ का अभीष्ट मान $14$ है।
उदाहरण 5
यदि दो धनात्मक संख्याओं के समांतर माध्य तथा गुणोत्तर माध्य क्रमशः \(A\) और \(G\) हों, तो सिद्ध कीजिए कि संख्याएँ \(A \pm \sqrt{(A + G)(A - G)}\) हैं। [4 अंक]
विस्तृत समाधान / उत्तर:
हल: माना दो धनात्मक संख्याएँ $a$ और $b$ हैं। परिभाषानुसार: $$A = \frac{a + b}{2} \implies a + b = 2A \quad \text{--- (समीकरण 1)}$$ $$G = \sqrt{ab} \implies ab = G^2 \quad \text{--- (समीकरण 2)}$$ हम बीजीय सर्वसमिका जानते हैं: $$(a - b)^2 = (a + b)^2 - 4ab$$ समीकरण 1 और 2 का मान रखने पर: $$(a - b)^2 = (2A)^2 - 4G^2 = 4A^2 - 4G^2 = 4(A^2 - G^2)$$ दोनों पक्षों का वर्गमूल लेने पर: $$a - b = \pm 2\sqrt{A^2 - G^2} \quad \text{--- (समीकरण 3)}$$ वर्गांतर के गुणनखंड करने पर: $$a - b = \pm 2\sqrt{(A + G)(A - G)}$$ समीकरण 1 और समीकरण 3 को जोड़ने पर: $$2a = 2A \pm 2\sqrt{(A + G)(A - G)} \implies a = A \pm \sqrt{(A + G)(A - G)}$$ समीकरण 1 में से समीकरण 3 को घटाने पर: $$2b = 2A \mp 2\sqrt{(A + G)(A - G)} \implies b = A \mp \sqrt{(A + G)(A - G)}$$ अतः दोनों संख्याएँ हैं: $$\mathbf{A \pm \sqrt{(A + G)(A - G)}}$$ [इति सिद्धम्]
उदाहरण 6
(i) श्रेणी \(1 \cdot 2 + 2 \cdot 3 + 3 \cdot 4 + \dots + n(n + 1)\) के प्रथम \(n\) पदों का योग ज्ञात कीजिए। [2.5 अंक] (ii) अनंत समांतर-गुणोत्तर श्रेणी का योग ज्ञात कीजिए: \(1 + \frac{4}{5} + \frac{7}{5^2} + \frac{10}{5^3} + \dots\) [2.5 अंक] [कुल 5 अंक]
विस्तृत समाधान / उत्तर:
हल:
भाग (i): $\sum k(k + 1)$ श्रेणी के $n$ पदों का योग: [2.5 अंक] श्रेणी का $k$-वाँ पद है: $$T_k = k(k + 1) = k^2 + k$$ अतः $n$ पदों का योग: $$S_n = \sum_{k=1}^n T_k = \sum_{k=1}^n (k^2 + k) = \sum_{k=1}^n k^2 + \sum_{k=1}^n k$$ मानक घात सूत्रों का प्रयोग करने पर: $$S_n = \frac{n(n + 1)(2n + 1)}{6} + \frac{n(n + 1)}{2}$$ उभयनिष्ठ पद $\frac{n(n + 1)}{2}$ बाहर निकालने पर: $$S_n = \frac{n(n + 1)}{2} \left[ \frac{2n + 1}{3} + 1 \right] = \frac{n(n + 1)}{2} \left[ \frac{2n + 1 + 3}{3} \right] = \frac{n(n + 1)(2n + 4)}{6}$$ $$S_n = \frac{2n(n + 1)(n + 2)}{6} = \mathbf{\frac{n(n + 1)(n + 2)}{3}}$$
भाग (ii): अनंत A.G.P. $S = 1 + \frac{4}{5} + \frac{7}{5^2} + \\frac{10}{5^3} + \\dots$ का योग: [2.5 अंक] माना $S = 1 + \frac{4}{5} + \frac{7}{5^2} + \frac{10}{5^3} + \dots \quad \text{--- (समीकरण 1)}$ यहाँ अंश के पद $1, 4, 7, 10, \dots$ समांतर श्रेढ़ी में हैं ($a = 1, d = 3$)। हर के पद सार्व अनुपात $r = \frac{1}{5}$ वाली गुणोत्तर श्रेढ़ी बनाते हैं। समीकरण 1 को $r = \frac{1}{5}$ से गुणा करने पर: $$\frac{1}{5} S = \frac{1}{5} + \frac{4}{5^2} + \frac{7}{5^3} + \dots \quad \text{--- (समीकरण 2)}$$ समीकरण 1 में से समीकरण 2 को घटाने पर (समान घातों को संरेखित करके): $$S - \frac{1}{5} S = 1 + \left( \frac{4}{5} - \frac{1}{5} \right) + \left( \frac{7}{5^2} - \frac{4}{5^2} \right) + \left( \frac{10}{5^3} - \frac{7}{5^3} \right) + \dots$$ $$\frac{4}{5} S = 1 + \frac{3}{5} + \frac{3}{5^2} + \frac{3}{5^3} + \dots$$ $$\frac{4}{5} S = 1 + 3 \left[ \frac{1}{5} + \frac{1}{5^2} + \frac{1}{5^3} + \dots \right]$$ कोष्ठक के भीतर की श्रेणी प्रथम पद $\frac{1}{5}$ और सार्व अनुपात $\frac{1}{5} < 1$ वाली अनंत गुणोत्तर श्रेणी है: $$\text{योग} = \frac{1/5}{1 - 1/5} = \frac{1/5}{4/5} = \frac{1}{4}$$ अतः: $$\frac{4}{5} S = 1 + 3 \left( \frac{1}{4} \right) = 1 + \frac{3}{4} = \frac{7}{4}$$ $S$ का मान निकालने पर: $$S = \frac{7}{4} \times \frac{5}{4} = \mathbf{\frac{35}{16}}$$ अतः अनंत श्रेणी का योग $\frac{35}{16}$ है।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

|r| ≥ 1 होने पर अनंत G.P. सूत्र का गलत प्रयोग

सही वैज्ञानिक तथ्य

अनंत गुणोत्तर श्रेणी का योग सूत्र S_∞ = a / (1 - r) केवल तभी मान्य है जब |r| < 1 हो।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

समाविष्ट माध्यों की संख्या और कुल पदों में भ्रम

सही वैज्ञानिक तथ्य

चूँकि b वास्तव में (n + 2)-वाँ पद है, अतः b = a + (n + 1)d, जिससे d = (b - a)/(n + 1) मिलता है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

n = 1 के लिए T_n = S_n - S_{n-1} सूत्र का अंधाधुंध प्रयोग

सही वैज्ञानिक तथ्य

पुनरावृत्ति T_n = S_n - S_{n-1} केवल n ≥ 2 के लिए मान्य है। n = 1 के लिए सीधे T₁ = S₁ होता है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

समांतर-गुणोत्तर श्रेणी के घटाव में पदों का गलत संरेखन

सही वैज्ञानिक तथ्य

r से गुणा करने के बाद श्रेणी को दाईं ओर एक पद खिसकाकर लिखना चाहिए ताकि r के समान घात एक सीध में आएँ।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

ऋणात्मक वास्तविक संख्याओं पर AM ≥ GM लगाना

सही वैज्ञानिक तथ्य

AM ≥ GM असमिका केवल और केवल धनात्मक वास्तविक संख्याओं a, b > 0 के लिए सिद्ध है।

अनुक्रम एवं श्रेणी रूपरेखा, A.P., G.P. तथा माध्य सोपान आरेख

पश्चिम बंगाल कक्षा 11 • बीजगणित • अध्याय 10 अनुक्रम तथा श्रेणी संरचना: A.P., G.P. एवं माध्य पदानुक्रम समांतर एवं गुणोत्तर श्रेढ़ी • AM-GM-HM असमिका • विशेष श्रेणियों के योग सूत्र ★ A ≥ G ≥ H | G² = A · H AM-GM-HM Unified Chain समांतर श्रेढ़ी (A.P.) Arithmetic Progression (A.P.) Tₙ = a + (n - 1)d Sₙ = (n/2)[2a + (n - 1)d] = (n/2)(a + l) l = last term | Tₙ = Sₙ - Sₙ₋₁ समांतर माध्य A = (a + b)/2 | Σ Aₖ = n · A गुणोत्तर श्रेढ़ी (G.P.) Tₙ = a · rⁿ⁻¹ Sₙ = a(1 - rⁿ)/(1 - r) (r ≠ 1) S_∞ = a / (1 - r) (|r| < 1) Valid if and only if |r| < 1 (diverges if |r| ≥ 1) गुणोत्तर माध्य G = √(ab) | Π Gₖ = Gⁿ Recurring Decimals: 0.3̄7̄ = 37/99 via infinite G.P. AM-GM ज्यामितीय उपपत्ति आरेख व्यास a + b वाला अर्धवृत्त: त्रिज्या A ≥ लंब ऊंचाई G Center C a b G = √(ab) A = (a+b)/2 माध्यों का सार्वभौमिक पदानुक्रम A ≥ G ≥ H (समानता केवल यदि a = b) G² = A · H ⇒ A, G, H form a G.P. Equality holds if and only if a = b Quadratic Equation with Roots a, b: x² - 2Ax + G² = 0 मूल a, b = A ± √(A² - G²) प्राकृतिक संख्याओं की घातों के योग सूत्र Standard Power Sum Formulas Σ k = n(n + 1)/2 Σ k² = n(n + 1)(2n + 1)/6 Σ k³ = [n(n + 1)/2]² = (Σ k)² समांतरो-गुणोत्तर श्रेढ़ी (A.G.P.) Form: a, (a+d)r, (a+2d)r², (a+3d)r³, ... S_∞ = a/(1 - r) + dr/(1 - r)² (|r| < 1) Obtained by subtracting r·S_∞ from S_∞ हरात्मक श्रेढ़ी (H.P.) Reciprocals form an Arithmetic Progression H = 2ab / (a + b) | G² = A · H

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
अनुक्रम एक फलन f: ℕ → ℝ है; अनुक्रम के पदों को धन चिन्हों से जोड़ने पर श्रेणी का निर्माण होता है।
मुख्य बिंदु 2
समांतर श्रेढ़ी में n-वाँ पद Tₙ = a + (n - 1)d तथा प्रथम n पदों का योग Sₙ = (n/2)[2a + (n - 1)d] = (n/2)(a + l) है।
मुख्य बिंदु 3
किसी भी श्रेणी के लिए n-वें पद और योग में संबंध: n ≥ 2 के लिए Tₙ = Sₙ - Sₙ₋₁ तथा T₁ = S₁ होता है।
मुख्य बिंदु 4
एकल समांतर माध्य A = (a + b)/2 है; n समांतर माध्यों के समावेश में सार्व अंतर d = (b - a)/(n + 1) होता है।
मुख्य बिंदु 5
गुणोत्तर श्रेढ़ी में n-वाँ पद Tₙ = a · rⁿ⁻¹ तथा n पदों का योग Sₙ = a(1 - rⁿ)/(1 - r) (r ≠ 1 के लिए) है।
मुख्य बिंदु 6
अनंत गुणोत्तर श्रेणी अभिसारी होती है और उसका योग S_∞ = a / (1 - r) होता है यदि और केवल यदि |r| < 1 हो।
मुख्य बिंदु 7
एकल गुणोत्तर माध्य G = √(ab) है; समाविष्ट n गुणोत्तर माध्यों का गुणनफल Gⁿ = (ab)^{n/2} होता है।
मुख्य बिंदु 8
धनात्मक वास्तविक संख्याओं के लिए समांतर माध्य सदैव गुणोत्तर माध्य से बड़ा या बराबर होता है (A ≥ G)।
मुख्य बिंदु 9
हरात्मक श्रेढ़ी के पदों के व्युत्क्रम समांतर श्रेढ़ी बनाते हैं; हरात्मक माध्य H = 2ab / (a + b) होता है।
मुख्य बिंदु 10
तीनों माध्यों का संयुक्त संबंध: A ≥ G ≥ H तथा G² = A · H (A, G, H एक गुणोत्तर श्रेढ़ी बनाते हैं)।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
प्रथम 20 विषम प्राकृत संख्याओं 1 + 3 + 5 + ... + 39 का योगफल क्या है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: योगफल n² = 20² = 400 है।
A.P. का योग सूत्र लगाएँ या याद करें कि प्रथम n विषम संख्याओं का योग n² होता है।
2
अनंत श्रेणी 1 + 1/2 + 1/4 + 1/8 + ... का योग क्या है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: S_∞ = 1 / (1 - 1/2) = 1 / (1/2) = 2।
a = 1 तथा r = 1/2 लेकर S_∞ = a / (1 - r) सूत्र का प्रयोग करें।
3
यदि दो संख्याओं का समांतर माध्य 10 और गुणोत्तर माध्य 8 है, तो संख्याएँ ज्ञात कीजिए।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: संख्याएँ = 10 ± √(100 - 64) = 10 ± √36 = 10 ± 6। अतः संख्याएँ 16 और 4 हैं।
संख्याएँ = A ± √(A² - G²) सूत्र का प्रयोग करें।
4
1² + 2² + 3² + ... + 10² का मान क्या है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: 10 × 11 × 21 / 6 = 2310 / 6 = 385।
n = 10 लेकर n(n + 1)(2n + 1)/6 सूत्र लगाएँ।
5
यदि A, G, H दो धनात्मक संख्याओं के माध्य हों, तो उनके बीच क्या संबंध होता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: G² = A · H (वे गुणोत्तर श्रेढ़ी में होते हैं) तथा A ≥ G ≥ H।
G का A और H के साथ ज्यामितीय संबंध याद करें।
अध्याय का अध्ययन पूर्ण हुआ?
अभ्यास के लिए तैयार?

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