दी गई वस्तुओं में से कुछ या सभी को एक निश्चित क्रम में व्यवस्थित करने को क्रमचय (Permutation) कहते हैं। क्रमचय में क्रम अत्यंत महत्वपूर्ण होता है (अर्थात व्यवस्था $AB$ व्यवस्था $BA$ से भिन्न होती है)।
3.1 मूलभूत क्रमचय सूत्र ($^n P_r$)
$n$ भिन्न वस्तुओं में से एक समय में $r$ वस्तुएँ लेकर बनने वाले क्रमचयों की संख्या को $^n P_r$ या $P(n, r)$ से व्यक्त किया जाता है ($0 \le r \le n$):
$$\mathbf{^n P_r = \frac{n!}{(n - r)!} = n(n - 1)(n - 2) \cdots (n - r + 1)}$$
उपपत्ति का सारांश: $n$ भिन्न वस्तुओं द्वारा $r$ रिक्त स्थानों को भरने की प्रक्रिया:
- पहला स्थान: $n$ विधियों से भरा जा सकता है
- दूसरा स्थान: $(n - 1)$ विधियों से भरा जा सकता है
- $r$-वाँ स्थान: $[n - (r - 1)] = (n - r + 1)$ विधियों से भरा जा सकता है
- गुणन नियम से: $^n P_r = n(n - 1) \cdots (n - r + 1) = \frac{n(n - 1)\cdots(n - r + 1)(n - r)!}{(n - r)!} = \frac{n!}{(n - r)!}$।
विशेष मान:
- $^n P_0 = \frac{n!}{n!} = \mathbf{1}$
- $^n P_1 = \frac{n!}{(n - 1)!} = \mathbf{n}$
- $^n P_n = \frac{n!}{(n - n)!} = \frac{n!}{0!} = \frac{n!}{1} = \mathbf{n!}$ (सभी $n$ वस्तुओं को एक पंक्ति में व्यवस्थित करना)।
3.2 जब वस्तुओं की पुनरावृत्ति की अनुमति हो
$n$ विभिन्न वस्तुओं में से एक समय में $r$ वस्तुएँ लेकर बनने वाले क्रमचयों की संख्या, जब प्रत्येक वस्तु को कितनी भी बार दोहराया जा सके:
$$\text{कुल क्रमचय (पुनरावृत्ति सहित)} = \underbrace{n \times n \times \dots \times n}_{r \text{ बार}} = \mathbf{n^r}$$
3.3 समरूप वस्तुओं के क्रमचय (जब सभी वस्तुएँ भिन्न न हों)
प्रमेय: यदि कुल $n$ वस्तुओं में से $p_1$ वस्तुएँ प्रथम प्रकार की समरूप, $p_2$ वस्तुएँ द्वितीय प्रकार की समरूप, ..., और $p_k$ वस्तुएँ $k$-वें प्रकार की समरूप हों, तो कुल विभिन्न क्रमचयों की संख्या:
$$\mathbf{\text{क्रमचयों की संख्या} = \frac{n!}{p_1! \, p_2! \, \cdots \, p_k!}}$$
मानक उदाहरण: "MATHEMATICS" शब्द के अक्षरों के कुल क्रमचय:
- कुल अक्षर $n = 11$।
- समरूप अक्षर: M आता है 2 बार, A आता है 2 बार, T आता है 2 बार; तथा H, E, I, C, S प्रत्येक 1 बार।
- कुल क्रमचय $= \frac{11!}{2! \, 2! \, 2!} = \frac{39916800}{8} = \mathbf{4,989,600}$।
3.4 वृत्तीय क्रमचय (Circular Permutations)
जब $n$ भिन्न वस्तुओं को किसी बंद वृत्त के अनुदिश व्यवस्थित किया जाता है, तो कोई निश्चित सिरा न होने के कारण सभी वस्तुओं को एक स्थान खिसकाने पर नया विन्यास नहीं बनता:
- जब दक्षिणावर्त और वामावर्त क्रम भिन्न हों: गोल मेज के चारों ओर $n$ व्यक्तियों का बैठना:
$$\mathbf{\text{वृत्तीय क्रमचय} = (n - 1)!}$$
- जब दक्षिणावर्त और वामावर्त क्रम में अंतर न किया जा सके (फूलों की माला या मोतियों का हार): जहाँ माला को पलटने पर दक्षिणावर्त क्रम वामावर्त बन जाता है:
$$\mathbf{\text{वृत्तीय क्रमचय} = \frac{(n - 1)!}{2}}$$