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WBB • कक्षा XI • Mathematics • अध्याय 12
अनुमानित समय: 90 मिनट
प्रगति: अध्ययनरत

शंकु परिच्छेद

शंकु परिच्छेद या शांकव विश्लेषणात्मक ज्यामिति का अत्यंत आधारभूत एवं समृद्ध अध्याय है, जो एक लंब वृत्तीय द्विशंकु को विभिन्न कोणों पर एक समतल द्वारा काटने पर प्राप्त वक्रों के समूह को निरूपित करता है। प्राचीन यूनानी गणितज्ञ अपोलोनियस से लेकर रेने देकार्त द्वारा विकसित कार्तीय निर्देशांक ज्यामिति तक, शांकव वक्रों ने खगोल भौतिकी, प्रकाशिकी और आधुनिक उपग्रह प्रक्षेपण प्रणालियों को गणितीय भाषा प्रदान की है। एक शांकव को कार्तीय तल में एक ऐसे चर बिंदु के बिंदु-पथ के रूप में परिभाषित किया जाता है, जिसकी एक निश्चित स्थिर बिंदु (नाभि या फोकस) से दूरी और एक निश्चित स्थिर सरल रेखा (नियता या डायरेक्ट्रिक्स) से लंबवत दूरी का अनुपात सदैव एक अचर मान होता है, जिसे उत्केंद्रता (e) कहा जाता है। जब उत्केंद्रता शून्य होती है, तो वक्र वृत्त कहलाता है; जब उत्केंद्रता ठीक एक के बराबर होती है, तो वक्र परवलय बनाता है; जब उत्केंद्रता शून्य और एक के मध्य होती है, तो वक्र दीर्घवृत्त बनता है; तथा जब उत्केंद्रता एक से अधिक होती है, तो वक्र दो शाखाओं वाला अतिपरवलय निर्मित करता है। इस अध्याय में विद्यार्थी वृत्त, परवलय, दीर्घवृत्त और अतिपरवलय के मानक समीकरण, ज्यामितीय गुण, प्राचलिक रूप और प्रकाशिक परावर्तन नियमों का गहन अध्ययन करेंगे।

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

शांकव वक्रों के नियम प्राकृतिक आकाशीय पिंडों की गतियों से लेकर दैनिक जीवन की आधुनिक इंजीनियरिंग में व्यापक रूप से प्रयुक्त होते हैं। जोहानेस केप्लर के प्रथम ग्रहीय नियम के अनुसार हमारे सौरमंडल का प्रत्येक ग्रह सूर्य को एक नाभि पर रखकर दीर्घवृत्ताकार कक्षा में परिक्रमा करता है। सौरमंडल से गुजरने वाले पुच्छल तारे या मुक्त अंतरिक्षीय पिंड परवलयाकार अथवा अतिपरवलयाकार पथों का अनुसरण करते हैं। प्रकाशिकी एवं दूरसंचार में परवलयाकार परावर्तक के अद्वितीय गुण के कारण अक्ष के समांतर आने वाली सभी विद्युत-चुंबकीय तरंगें नाभि पर एकत्रित होती हैं, जो उपग्रह डिश एंटीना, कार की हेडलाइट, सर्चलाइट और सौर भट्टी का निर्माण आधार है। चिकित्सा विज्ञान में शॉकवेव लिथोट्रिप्सी पद्धति द्वारा दीर्घवृत्त की एक नाभि पर उत्पन्न पराश्रव्य तरंगों को परावर्तित कर बिना चीर-फाड़ के दूसरी नाभि पर स्थित गुर्दे की पथरी को चूर्ण कर दिया जाता है। समुद्री एवं वायु नेविगेशन प्रणालियों में अतिपरवलयिक ज्यामिति द्वारा सटीक स्थिति ज्ञात की जाती है। पश्चिम बंगाल बोर्ड (WBCHSE) कक्षा 11 की वार्षिक परीक्षा तथा WBJEE, JEE Main और Advanced की दृष्टि से यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं उच्च अंकदायी अध्याय है।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. शंकु के परिच्छेद, नाभि-नियता परि...
2 2. वृत्त: मानक, व्यापक, व्यास एवं प...
3 3. परवलय: ज्यामितीय अवयव एवं चार मा...
4 4. दीर्घवृत्त: ज्यामितीय संरचना, मा...
5 5. अतिपरवलय: दो शाखाएँ, अनंतस्पर्शी...
6 6. व्यापक द्विघात समीकरण के विविक्त...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. शंकु के परिच्छेद, नाभि-नियता परिभाषा एवं उत्केंद्रता

शंकु परिच्छेद (Conic Sections) वे वक्र हैं जो एक त्रिविमीय लंब वृत्तीय द्विशंकु को एक समतल द्वारा विभिन्न कोणों पर काटने से प्राप्त होते हैं।

1.1 लंब वृत्तीय शंकु का समतल द्वारा परिच्छेद

मान लीजिए कि शंकु के ऊर्ध्वाधर अक्ष के साथ उसका अर्ध-शीर्ष कोण $\alpha$ है और प्रतिच्छेदी समतल अक्ष के साथ $\beta$ कोण बनाता है:

  • वृत्त (Circle): जब $\beta = 90^\circ$ (समतल अक्ष के लंबवत हो), तो प्राप्त परिच्छेद एक वृत्त होता है।
  • दीर्घवृत्त (Ellipse): जब $\alpha < \beta < 90^\circ$ (समतल शंकु के एक भाग को पूर्णतः काटे), तो प्राप्त संवृत वक्र दीर्घवृत्त कहलाता है।
  • परवलय (Parabola): जब $\beta = \alpha$ (समतल शंकु की जनक रेखा के समांतर हो), तो प्राप्त विवृत वक्र परवलय होता है।
  • अतिपरवलय (Hyperbola): जब $0 \le \beta < \alpha$ (समतल शंकु के दोनों भागों को काटे), तो प्राप्त दो शाखाओं वाला वक्र अतिपरवलय होता है।
  • अपभ्रष्ट शांकव (Degenerate Conics): यदि समतल शंकु के शीर्ष (Apex) से होकर गुजरे:
    • $\beta > \alpha$: परिच्छेद केवल एक बिंदु (Point) होता है।
    • $\beta = \alpha$: परिच्छेद एक सरल रेखा (Straight Line) होता है।
    • $\beta < \alpha$: परिच्छेद प्रतिच्छेदी सरल रेखाओं का युग्म (Pair of Intersecting Lines) होता है।
1.2 नाभि-नियता-उत्केंद्रता पर आधारित विश्लेषणात्मक परिभाषा
मूल परिभाषा: एक शांकव कार्तीय तल में एक ऐसे गतिशील बिंदु $P(x, y)$ का बिंदु-पथ है जिसकी एक निश्चित स्थिर बिंदु $S(x_1, y_1)$ (जिसे नाभि कहते हैं) से दूरी और एक निश्चित स्थिर सरल रेखा $ax + by + c = 0$ (जिसे नियता कहते हैं) से लंबवत दूरी का अनुपात सदैव एक अचर मान $e$ होता है। $$\mathbf{\frac{SP}{PM} = e \iff SP = e \cdot PM}$$ इस अचर अनुपात $e \ge 0$ को शांकव की उत्केंद्रता (Eccentricity) कहा जाता है।
1.3 उत्केंद्रता ($e$) के आधार पर शांकव का वर्गीकरण
शांकव का नाम उत्केंद्रता ($e$) ज्यामितीय विशेषता मानक कार्तीय समीकरण
वृत्त (Circle) $e = 0$ नियता अनंत पर स्थित; केंद्र से दूरी नियत त्रिज्या $r$ $(x - h)^2 + (y - k)^2 = r^2$
परवलय (Parabola) $e = 1$ नाभि से दूरी और नियता से दूरी समान ($SP = PM$) $y^2 = 4ax$
दीर्घवृत्त (Ellipse) $0 < e < 1$ नाभीय दूरी नियता दूरी से कम होती है ($SP < PM$) $\frac{x^2}{a^2} + \frac{y^2}{b^2} = 1 \quad (a > b)$
अतिपरवलय (Hyperbola) $e > 1$ नाभीय दूरी नियता दूरी से अधिक होती है ($SP > PM$) $\frac{x^2}{a^2} - \frac{y^2}{b^2} = 1$
समकोणिक अतिपरवलय $e = \sqrt{2}$ अनुप्रस्थ अक्ष और संयुग्मी अक्ष समान ($a = b$) $x^2 - y^2 = a^2$ अथवा $xy = c^2$

2. वृत्त: मानक, व्यापक, व्यास एवं प्राचलिक रूप

वृत्त तल के उन सभी बिंदुओं का बिंदु-पथ है जो एक निश्चित स्थिर बिंदु (केंद्र) से सदैव समान दूरी (त्रिज्या) पर स्थित होते हैं।

2.1 केंद्रीय एवं मानक रूप
  • केंद्रीय रूप: मूलबिंदु $O(0, 0)$ पर केंद्र और $r$ त्रिज्या वाले वृत्त का समीकरण: $$\mathbf{x^2 + y^2 = r^2}$$
  • मानक (केंद्र-त्रिज्या) रूप: केंद्र $C(h, k)$ और त्रिज्या $r$ वाले वृत्त का समीकरण: $$\mathbf{(x - h)^2 + (y - k)^2 = r^2}$$
2.2 वृत्त का व्यापक द्विघात समीकरण

$(x - h)^2 + (y - k)^2 = r^2$ का प्रसार करने पर $x^2 + y^2 - 2hx - 2ky + (h^2 + k^2 - r^2) = 0$ प्राप्त होता है। यहाँ $g = -h$, $f = -k$ और $c = h^2 + k^2 - r^2$ रखने पर वृत्त का व्यापक समीकरण प्राप्त होता है:

व्यापक समीकरण: $$\mathbf{x^2 + y^2 + 2gx + 2fy + c = 0}$$
  • केंद्र के निर्देशांक: $\mathbf{C(-g, -f)} = \left(-\frac{1}{2} \times x\text{ का गुणांक}, \; -\frac{1}{2} \times y\text{ का गुणांक}\right)$
  • त्रिज्या: $\mathbf{r = \sqrt{g^2 + f^2 - c}}$

$g^2 + f^2 - c$ के आधार पर वृत्त की प्रकृति:

  • यदि $g^2 + f^2 - c > 0$: वृत्त एक वास्तविक वृत्त (Real Circle) है।
  • यदि $g^2 + f^2 - c = 0$: त्रिज्या शून्य होने के कारण यह एक बिंदु वृत्त (Point Circle) है, जो केवल $(-g, -f)$ बिंदु को दर्शाता है।
  • यदि $g^2 + f^2 - c < 0$: त्रिज्या काल्पनिक होने के कारण यह एक काल्पनिक वृत्त (Imaginary Circle) है।
2.3 व्यापक द्विघात समीकरण के वृत्त होने की शर्तें

समीकरण $Ax^2 + 2Hxy + By^2 + 2Gx + 2Fy + C = 0$ एक वृत्त को निरूपित करता है यदि और केवल यदि:

  1. $\mathbf{A = B \neq 0}$ ($x^2$ और $y^2$ के गुणांक बराबर हों)।
  2. $\mathbf{H = 0}$ ($xy$ का पद अनुपस्थित हो)।
  3. $\mathbf{G^2 + F^2 - AC \ge 0}$ (त्रिज्या वास्तविक हो)।
2.4 व्यास रूप में वृत्त का समीकरण

यदि किसी वृत्त के व्यास के सिरों के निर्देशांक $A(x_1, y_1)$ और $B(x_2, y_2)$ हों, तो अर्धवृत्त में बना कोण समकोण होने के कारण वृत्त का समीकरण:

$$\mathbf{(x - x_1)(x - x_2) + (y - y_1)(y - y_2) = 0}$$
2.5 वृत्त के प्राचलिक समीकरण

केंद्र $(h, k)$ और त्रिज्या $r$ वाले वृत्त पर किसी बिंदु के प्राचलिक समीकरण ($\theta \in [0, 2\pi)$):

$$\mathbf{x = h + r \cos \theta, \quad y = k + r \sin \theta}$$

3. परवलय: ज्यामितीय अवयव एवं चार मानक रूप

परवलय वह शांकव है जिसकी उत्केंद्रता $e = 1$ होती है। परवलय पर स्थित प्रत्येक बिंदु की नाभि से दूरी उसकी नियता से लंबवत दूरी के बराबर होती है।

3.1 परवलय की मुख्य शब्दावली
  • नाभि (Focus, $S$): निश्चित स्थिर बिंदु।
  • नियता (Directrix, $L$): निश्चित स्थिर रेखा।
  • अक्ष (Axis): नाभि से गुजरने वाली तथा नियता पर लंबवत रेखा।
  • शीर्ष (Vertex, $V$): परवलय और उसके अक्ष का प्रतिच्छेद बिंदु।
  • नाभिलम्ब (Latus Rectum, $LL'$): नाभि से गुजरने वाली तथा अक्ष पर लंबवत जीवा।
  • नाभीय दूरी (Focal Distance, $SP$): परवलय पर स्थित बिंदु $P$ की नाभि से दूरी।
3.2 परवलय के चार मानक रूप
गुणधर्म $y^2 = 4ax \; (a > 0)$ $y^2 = -4ax \; (a > 0)$ $x^2 = 4ay \; (a > 0)$ $x^2 = -4ay \; (a > 0)$
खुलने की दिशा दाईं ओर ($x \ge 0$) बाईं ओर ($x \le 0$) ऊपर की ओर ($y \ge 0$) नीचे की ओर ($y \le 0$)
शीर्ष $(0, 0)$ $(0, 0)$ $(0, 0)$ $(0, 0)$
नाभि ($S$) $(a, 0)$ $(-a, 0)$ $(0, a)$ $(0, -a)$
नियता का समीकरण $x = -a \iff x + a = 0$ $x = a \iff x - a = 0$ $y = -a \iff y + a = 0$ $y = a \iff y - a = 0$
अक्ष का समीकरण $y = 0$ ($x$-अक्ष) $y = 0$ ($x$-अक्ष) $x = 0$ ($y$-अक्ष) $x = 0$ ($y$-अक्ष)
नाभिलम्ब की लम्बाई $4a$ $4a$ $4a$ $4a$
नाभिलम्ब के सिरे $(a, 2a), \; (a, -2a)$ $(-a, 2a), \; (-a, -2a)$ $(2a, a), \; (-2a, a)$ $(2a, -a), \; (-2a, -a)$
नाभीय दूरी ($SP$) $x + a$ $a - x$ $y + a$ $a - y$
प्राचलिक निर्देशांक $(at^2, 2at)$ $(-at^2, 2at)$ $(2at, at^2)$ $(2at, -at^2)$
3.3 स्थानांतरित शीर्ष वाले परवलय $(h, k)$

जब परवलय का शीर्ष मूलबिंदु से $V(h, k)$ पर स्थानांतरित हो और अक्ष निर्देशांक अक्षों के समांतर हों:

  • $x$-अक्ष के समांतर अक्ष: $\mathbf{(y - k)^2 = 4a(x - h)}$ (नाभि: $(h + a, k)$, नियता: $x = h - a$)।
  • $y$-अक्ष के समांतर अक्ष: $\mathbf{(x - h)^2 = 4a(y - k)}$ (नाभि: $(h, k + a)$, नियता: $y = k - a$)।

4. दीर्घवृत्त: ज्यामितीय संरचना, मानक रूप एवं नाभीय गुण

दीर्घवृत्त वह शांकव है जिसकी उत्केंद्रता $0 < e < 1$ होती है। इसे नाभि-नियता अनुपात अथवा दो स्थिर नाभियों से दूरियों के अचर योग द्वारा परिभाषित किया जाता है।

4.1 दो समतुल्य ज्यामितीय परिभाषाएँ
  1. नाभि-नियता परिभाषा: $SP = e \cdot PM$, जहाँ $0 < e < 1$।
  2. द्वि-नाभि परिभाषा: तल में दो स्थिर नाभियाँ $S$ और $S'$ होने पर, दीर्घवृत्त ऐसे बिंदुओं का बिंदु-पथ है जिनकी दोनों नाभियों से दूरियों का योग सदैव अचर और दीर्घ अक्ष की लम्बाई के बराबर होता है: $$\mathbf{SP + S'P = 2a \quad (2a > 2ae)}$$
4.2 क्षैतिज एवं ऊर्ध्वाधर दीर्घवृत्त की तुलना
ज्यामितीय अवयव क्षैतिज दीर्घ अक्ष: $\frac{x^2}{a^2} + \frac{y^2}{b^2} = 1 \; (a > b)$ ऊर्ध्वाधर दीर्घ अक्ष: $\frac{x^2}{a^2} + \frac{y^2}{b^2} = 1 \; (b > a)$
केंद्र $(0, 0)$ $(0, 0)$
दीर्घ अक्ष (Major Axis) लम्बाई $2a$, $x$-अक्ष पर ($y = 0$) लम्बाई $2b$, $y$-अक्ष पर ($x = 0$)
लघु अक्ष (Minor Axis) लम्बाई $2b$, $y$-अक्ष पर ($x = 0$) लम्बाई $2a$, $x$-अक्ष पर ($y = 0$)
शीर्ष $(\pm a, 0)$ $(0, \pm b)$
नाभियाँ ($S, S'$) $(\pm ae, 0)$ $(0, \pm be)$
नियताओं के समीकरण $x = \pm \frac{a}{e}$ $y = \pm \frac{b}{e}$
उत्केंद्रता संबंध ($e$) $b^2 = a^2(1 - e^2) \implies \mathbf{e = \sqrt{1 - \frac{b^2}{a^2}}}$ $a^2 = b^2(1 - e^2) \implies \mathbf{e = \sqrt{1 - \frac{a^2}{b^2}}}$
नाभिलम्ब की लम्बाई $\mathbf{\frac{2b^2}{a}}$ $\mathbf{\frac{2a^2}{b}}$
नाभीय दूरियाँ ($P(x, y)$) $SP = a - ex, \quad S'P = a + ex$ $SP = b - ey, \quad S'P = b + ey$
4.3 सहायक वृत्त एवं प्राचलिक समीकरण

दीर्घवृत्त के दीर्घ अक्ष को व्यास मानकर खींचे गए वृत्त को सहायक वृत्त (Auxiliary Circle) कहते हैं, जिसका समीकरण $x^2 + y^2 = a^2$ होता है।

दीर्घवृत्त के किसी बिंदु के प्राचलिक समीकरण ($\theta \in [0, 2\pi)$): $$\mathbf{x = a \cos \theta, \quad y = b \sin \theta}$$ यहाँ कोण $\theta$ को बिंदु $P(x, y)$ का उत्केंद्र कोण (Eccentric Angle) कहा जाता है।

5. अतिपरवलय: दो शाखाएँ, अनंतस्पर्शी एवं समकोणिक अतिपरवलय

अतिपरवलय वह शांकव है जिसकी उत्केंद्रता $e > 1$ होती है। इसमें दो असंयुक्त शाखाएँ होती हैं तथा नाभियों से दूरियों का अंतर सदैव अचर रहता है।

5.1 ज्यामितीय परिभाषाएँ
  1. नाभि-नियता परिभाषा: $SP = e \cdot PM$, जहाँ $e > 1$।
  2. द्वि-नाभि परिभाषा: तल में दो स्थिर नाभियाँ $S$ व $S'$ होने पर, अतिपरवलय ऐसे बिंदुओं का बिंदु-पथ है जिनकी दोनों नाभियों से दूरियों का निरपेक्ष अंतर सदैव अचर और अनुप्रस्थ अक्ष की लम्बाई के बराबर होता है: $$\mathbf{|SP - S'P| = 2a}$$
5.2 मानक अतिपरवलय एवं संयुग्मी अतिपरवलय की तुलना
ज्यामितीय अवयव मानक अतिपरवलय: $\frac{x^2}{a^2} - \frac{y^2}{b^2} = 1$ संयुग्मी अतिपरवलय: $-\frac{x^2}{a^2} + \frac{y^2}{b^2} = 1 \iff \frac{y^2}{b^2} - \frac{x^2}{a^2} = 1$
अनुप्रस्थ अक्ष (Transverse Axis) लम्बाई $2a$, $x$-अक्ष पर ($y = 0$) लम्बाई $2b$, $y$-अक्ष पर ($x = 0$)
संयुग्मी अक्ष (Conjugate Axis) लम्बाई $2b$, $y$-अक्ष पर ($x = 0$) लम्बाई $2a$, $x$-अक्ष पर ($y = 0$)
शीर्ष $(\pm a, 0)$ $(0, \pm b)$
नाभियाँ ($S, S'$) $(\pm ae, 0)$ $(0, \pm be)$
नियताओं के समीकरण $x = \pm \frac{a}{e}$ $y = \pm \frac{b}{e}$
उत्केंद्रता संबंध ($e$) $b^2 = a^2(e^2 - 1) \implies \mathbf{e = \sqrt{1 + \frac{b^2}{a^2}}}$ $a^2 = b^2(e^2 - 1) \implies \mathbf{e = \sqrt{1 + \frac{a^2}{b^2}}}$
नाभिलम्ब की लम्बाई $\mathbf{\frac{2b^2}{a}}$ $\mathbf{\frac{2a^2}{b}}$
5.3 अतिपरवलय की अनंतस्पर्शी (Asymptotes)

वह सरल रेखा जो किसी अतिपरवलय को अनंत पर स्पर्श करती है परंतु परिमित दूरी पर कभी नहीं काटती, अनंतस्पर्शी कहलाती है। मानक अतिपरवलय $\frac{x^2}{a^2} - \frac{y^2}{b^2} = 1$ की अनंतस्पर्शी रेखाएँ:

$$\mathbf{y = \pm \frac{b}{a} x \iff \frac{x}{a} - \frac{y}{b} = 0 \quad \text{तथा} \quad \frac{x}{a} + \frac{y}{b} = 0}$$ अनंतस्पर्शी युग्म का संयुक्त समीकरण: $\mathbf{\frac{x^2}{a^2} - \frac{y^2}{b^2} = 0}$।
5.4 समकोणिक (आयताकार) अतिपरवलय

जिस अतिपरवलय में अनुप्रस्थ अक्ष की लम्बाई संयुग्मी अक्ष की लम्बाई के बराबर होती है ($a = b$), उसे समकोणिक अतिपरवलय (Rectangular Hyperbola) कहते हैं:

  • मानक समीकरण: $\mathbf{x^2 - y^2 = a^2}$
  • उत्केंद्रता: $e = \sqrt{1 + \frac{a^2}{a^2}} = \sqrt{1 + 1} = \mathbf{\sqrt{2}}$ (प्रत्येक समकोणिक अतिपरवलय की उत्केंद्रता सदैव $\sqrt{2}$ होती है)।
  • अनंतस्पर्शी: $y = \pm x$, जो परस्पर लंबवत होती हैं ($\theta = 90^\circ$)।
  • अनंतस्पर्शियों को अक्ष मानकर रूपांतरित रूप: $\mathbf{xy = c^2}$ (जहाँ $c^2 = a^2/2$)।
5.5 प्राचलिक समीकरण

$\sec^2 \theta - \tan^2 \theta = 1$ सर्वसमिका के प्रयोग से अतिपरवलय $\frac{x^2}{a^2} - \frac{y^2}{b^2} = 1$ के प्राचलिक समीकरण:

$$\mathbf{x = a \sec \theta, \quad y = b \tan \theta}$$

6. व्यापक द्विघात समीकरण के विविक्तकर द्वारा शांकव पहचान एवं अनुप्रयोग

कार्तीय तल में दो चरों का कोई भी द्विघात समीकरण एक शांकव वक्र को निरूपित करता है। विविक्तकर की सहायता से शांकव की प्रकृति की तुरंत पहचान की जा सकती है।

6.1 व्यापक द्विघात समीकरण एवं विविक्तकर ($\Delta$)

द्विघात समीकरण:

$$\mathbf{Ax^2 + 2Hxy + By^2 + 2Gx + 2Fy + C = 0}$$

इसका सारणिक विविक्तकर $\Delta$ है:

$$\mathbf{\Delta = \begin{vmatrix} A & H & G \\ H & B & F \\ G & F & C \end{vmatrix} = ABC + 2FGH - AF^2 - BG^2 - CH^2}$$
सारणिक मान $H^2 - AB$ का मान शांकव की प्रकृति
$\mathbf{\Delta = 0}$
(अपभ्रष्ट शांकव)
$H^2 - AB > 0$ दो प्रतिच्छेदी सरल रेखाएँ
$H^2 - AB = 0$ दो समांतर अथवा संपाती सरल रेखाएँ
$H^2 - AB < 0$ एक एकल बिंदु
$\mathbf{\Delta \neq 0}$
(वास्तविक शांकव)
$H^2 - AB = 0$ परवलय (Parabola) ($e = 1$)
$H^2 - AB < 0$ दीर्घवृत्त (Ellipse) ($0 < e < 1$); यदि $H = 0$ और $A = B$ हो तो वृत्त
$H^2 - AB > 0$ अतिपरवलय (Hyperbola) ($e > 1$)
$H^2 - AB > 0$ तथा $A + B = 0$ समकोणिक अतिपरवलय ($e = \sqrt{2}$)
6.2 शांकव वक्रों के परावर्तन गुण एवं वास्तविक अनुप्रयोग
  • परवलयाकार परावर्तन: नाभि से निकलने वाली किरणें परवलय के आंतरिक तल से टकराकर अक्ष के समांतर परावर्तित होती हैं। विलोमतः, समांतर किरणें नाभि पर एकत्रित होती हैं। अनुप्रयोग: कार की हेडलाइट, सर्चलाइट, सैटेलाइट डिश रिसीवर और परावर्ती दूरदर्शी।
  • दीर्घवृत्ताकार परावर्तन: एक नाभि से उत्सर्जित ध्वनि या प्रकाश किरणें दीर्घवृत्ताकार वक्र से परावर्तित होकर सीधे दूसरी नाभि से होकर गुजरती हैं। अनुप्रयोग: विस्परिंग गैलरी (Whispering Galleries) और बिना ऑपरेशन गुर्दे की पथरी तोड़ने वाली लिथोट्रिप्सी मशीन।
  • अतिपरवलयाकार परावर्तन: एक नाभि की ओर निर्देशित किरण बाह्य सतह से परावर्तित होकर दूसरी नाभि से अपसरित होती प्रतीत होती है। अनुप्रयोग: कैसेग्रेन टेलीस्कोप का द्वितीयक दर्पण और रडार नेविगेशन (LORAN)।

महत्वपूर्ण सूत्र, सर्वसमिकाएँ एवं प्रमेय

वृत्त का व्यापक रूप
केंद्र: (-g, -f), त्रिज्या: √(g² + f² - c)
g, f, c की पहचान से पूर्व x² और y² के गुणांक 1 होने आवश्यक हैं। वास्तविक वृत्त हेतु g² + f² - c ≥ 0।
मानक परवलय समीकरण
y² = 4ax, LL' = 4a, नाभि (a, 0)
प्राचलिक निर्देशांक (at², 2at)। किसी भी बिंदु की नाभीय दूरी SP = x + a होती है।
दीर्घवृत्त उत्केंद्रता एवं नाभिलम्ब
b² = a²(1 - e²), e = √(1 - b²/a²), LL' = 2b²/a
a > b (क्षैतिज) के लिए। यदि b > a हो तो a और b आपस में बदल जाते हैं।
अतिपरवलय उत्केंद्रता एवं नाभिलम्ब
b² = a²(e² - 1), e = √(1 + b²/a²), LL' = 2b²/a
समकोणिक अतिपरवलय में a = b होने पर e = √2 तथा अनंतस्पर्शी y = ±x होती हैं।
नाभीय दूरियों की अचरता
दीर्घवृत्त योग = 2a, अतिपरवलय अंतर = 2a
ग्रहों की कक्षा, डोरी निर्माण विधि एवं रडार नेविगेशन का आधारभूत नियम।
शांकव विविक्तकर प्रतिबंध
Δ ≠ 0: H² = AB (परवलय), H² < AB (दीर्घवृत्त), H² > AB (अतिपरवलय)
यदि Δ = 0 हो, तो समीकरण अपभ्रष्ट रेखा युग्म या एकल बिंदु को व्यक्त करता है।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
समीकरण 2x² + 2y² - 8x + 12y - 1 = 0 द्वारा निरूपित वृत्त का केंद्र एवं त्रिज्या ज्ञात कीजिए। [2 अंक]
विस्तृत समाधान / उत्तर:
हल: दिया गया वृत्त का समीकरण: $$2x^2 + 2y^2 - 8x + 12y - 1 = 0$$ व्यापक रूप $x^2 + y^2 + 2gx + 2fy + c = 0$ में बदलने हेतु दोनों पक्षों को $2$ से भाग देने पर: $$x^2 + y^2 - 4x + 6y - \frac{1}{2} = 0$$ व्यापक समीकरण $x^2 + y^2 + 2gx + 2fy + c = 0$ से तुलना करने पर: $$2g = -4 \implies g = -2$$ $$2f = 6 \implies f = 3$$ $$c = -\frac{1}{2}$$
वृत्त का केंद्र: $$\text{केंद्र } C(-g, -f) = (-(-2), -3) = \mathbf{(2, -3)}$$
वृत्त की त्रिज्या: $$r = \sqrt{g^2 + f^2 - c} = \sqrt{(-2)^2 + 3^2 - \left(-\frac{1}{2}\right)} = \sqrt{4 + 9 + \frac{1}{2}} = \sqrt{\frac{27}{2}} = \mathbf{\frac{3\sqrt{6}}{2} \text{ इकाई}}$$ अतः वृत्त का केंद्र $(2, -3)$ तथा त्रिज्या $\frac{3\sqrt{6}}{2}$ इकाई है।
उदाहरण 2
परवलय y² = -12x के लिए नाभि के निर्देशांक, नियता का समीकरण, नाभिलम्ब की लम्बाई तथा अक्ष का समीकरण ज्ञात कीजिए। [3 अंक]
विस्तृत समाधान / उत्तर:
हल: दिया गया समीकरण: $$y^2 = -12x$$ यह परवलय के बाईं ओर खुलने वाले मानक रूप $y^2 = -4ax$ ($a > 0$) के समतुल्य है। गुणांकों की तुलना करने पर: $$4a = 12 \implies a = 3$$ अब आवश्यक ज्यामितीय अवयव ज्ञात करते हैं:
  1. नाभि के निर्देशांक ($S$): $y^2 = -4ax$ के लिए नाभि ऋणात्मक $x$-अक्ष पर $(-a, 0)$ पर स्थित होती है: $$\mathbf{\text{नाभि } S = (-3, 0)}$$
  2. नियता का समीकरण: नियता $y$-अक्ष के समांतर रेखा $x = a$ है: $$x = 3 \iff \mathbf{x - 3 = 0}$$
  3. नाभिलम्ब की लम्बाई ($LL'$): $$\mathbf{LL' = 4a = 4(3) = 12 \text{ इकाई}}$$
  4. अक्ष का समीकरण: सममिति अक्ष $x$-अक्ष है: $$\mathbf{y = 0}$$
उदाहरण 3
दीर्घवृत्त 9x² + 25y² = 225 की उत्केंद्रता, नाभियों के निर्देशांक, नाभिलम्ब की लम्बाई तथा नियताओं के समीकरण ज्ञात कीजिए। [3 अंक]
विस्तृत समाधान / उत्तर:
हल: दिया गया समीकरण: $$9x^2 + 25y^2 = 225$$ दोनों पक्षों को $225$ से भाग देने पर: $$\frac{9x^2}{225} + \frac{25y^2}{225} = 1 \implies \mathbf{\frac{x^2}{25} + \frac{y^2}{9} = 1}$$ मानक रूप $\frac{x^2}{a^2} + \frac{y^2}{b^2} = 1$ से तुलना करने पर: $$a^2 = 25 \implies a = 5$$ $$b^2 = 9 \implies b = 3$$ चूँकि $a > b$, अतः दीर्घ अक्ष $x$-अक्ष के अनुदिश स्थित है।
1. उत्केंद्रता ($e$): $$b^2 = a^2(1 - e^2) \implies 9 = 25(1 - e^2) \implies 1 - e^2 = \frac{9}{25}$$ $$e^2 = 1 - \frac{9}{25} = \frac{16}{25} \implies \mathbf{e = \frac{4}{5} = 0.8}$$
2. नाभियों के निर्देशांक ($S, S'$): $$ae = 5 \times \frac{4}{5} = 4$$ $$\mathbf{\text{नाभियाँ } = (\pm ae, 0) = (\pm 4, 0)}$$
3. नाभिलम्ब की लम्बाई: $$\mathbf{LL' = \frac{2b^2}{a} = \frac{2(9)}{5} = \frac{18}{5} = 3.6 \text{ इकाई}}$$
4. नियताओं के समीकरण: $$x = \pm \frac{a}{e} = \pm \frac{5}{4/5} = \pm \frac{25}{4} \implies \mathbf{4x \pm 25 = 0}$$
उदाहरण 4
उस अतिपरवलय का समीकरण ज्ञात कीजिए जिसकी नाभियाँ (±5, 0) हैं तथा अनुप्रस्थ अक्ष की लम्बाई 8 इकाई है। इसकी उत्केंद्रता और नाभिलम्ब की लम्बाई भी ज्ञात कीजिए। [4 अंक]
विस्तृत समाधान / उत्तर:
हल: दिया गया है: नाभियाँ $x$-अक्ष पर स्थित हैं $(\pm 5, 0) \implies$ मानक रूप $\frac{x^2}{a^2} - \frac{y^2}{b^2} = 1$। $$\text{नाभियाँ } (\pm ae, 0) = (\pm 5, 0) \implies \mathbf{ae = 5}$$ अनुप्रस्थ अक्ष की लम्बाई $2a = 8 \implies \mathbf{a = 4 \implies a^2 = 16}$।
1. उत्केंद्रता ($e$) ज्ञात करना: $$ae = 5 \implies 4e = 5 \implies \mathbf{e = \frac{5}{4} = 1.25}$$
2. $b^2$ का मान ज्ञात करना: अतिपरवलय के मूलभूत सूत्र $b^2 = a^2(e^2 - 1)$ से: $$b^2 = 16\left(\left(\frac{5}{4}\right)^2 - 1\right) = 16\left(\frac{25}{16} - 1\right) = 16\left(\frac{9}{16}\right) = \mathbf{9}$$ अतः $b = 3$।
3. अतिपरवलय का समीकरण: मानक रूप में $a^2 = 16$ तथा $b^2 = 9$ रखने पर: $$\mathbf{\frac{x^2}{16} - \frac{y^2}{9} = 1 \iff 9x^2 - 16y^2 = 144}$$
4. नाभिलम्ब की लम्बाई: $$\mathbf{LL' = \frac{2b^2}{a} = \frac{2(9)}{4} = \frac{18}{4} = \frac{9}{2} = 4.5 \text{ इकाई}}$$
उदाहरण 5
परवलय y² - 4y - 8x - 4 = 0 का शीर्ष, नाभि, अक्ष तथा नियता का समीकरण ज्ञात कीजिए। [4 अंक]
विस्तृत समाधान / उत्तर:
हल: दिया गया समीकरण: $$y^2 - 4y - 8x - 4 = 0$$ $y$ के पदों को पूर्ण वर्ग बनाने पर: $$y^2 - 4y = 8x + 4$$ $$(y - 2)^2 - 4 = 8x + 4$$ $$(y - 2)^2 = 8x + 8$$ $$(y - 2)^2 = 8(x + 1)$$ स्थानांतरित मानक रूप $(Y)^2 = 4a(X)$ से तुलना करने पर: जहाँ $Y = y - 2, \quad X = x + 1, \quad 4a = 8 \implies a = 2$।
1. शीर्ष: $$X = 0 \implies x + 1 = 0 \implies x = -1$$ $$Y = 0 \implies y - 2 = 0 \implies y = 2$$ $$\mathbf{\text{शीर्ष } V = (-1, 2)}$$
2. नाभि: मानक निर्देशांकों में नाभि $X = a = 2, \; Y = 0$: $$x + 1 = 2 \implies x = 1$$ $$y - 2 = 0 \implies y = 2$$ $$\mathbf{\text{नाभि } S = (1, 2)}$$
3. अक्ष का समीकरण: मानक निर्देशांकों में अक्ष $Y = 0$: $$y - 2 = 0 \implies \mathbf{y = 2}$$
4. नियता का समीकरण: मानक निर्देशांकों में नियता $X = -a = -2$: $$x + 1 = -2 \implies x = -3 \iff \mathbf{x + 3 = 0}$$
उदाहरण 6
तीन बिंदुओं O(0, 0), A(5, 0) तथा B(3, 4) से होकर जाने वाले वृत्त का समीकरण ज्ञात कीजिए। इसका केंद्र और त्रिज्या भी ज्ञात कीजिए। [5 अंक]
विस्तृत समाधान / उत्तर:
हल: माना वृत्त का व्यापक समीकरण है: $$x^2 + y^2 + 2gx + 2fy + c = 0 \quad \text{--- (1)}$$ चरण 1: बिंदु $O(0, 0)$ वृत्त पर स्थित है: $$0^2 + 0^2 + 2g(0) + 2f(0) + c = 0 \implies \mathbf{c = 0}$$ समीकरण घटकर $x^2 + y^2 + 2gx + 2fy = 0$ रह जाता है। चरण 2: बिंदु $A(5, 0)$ वृत्त पर स्थित है: $$5^2 + 0^2 + 2g(5) + 2f(0) = 0$$ $$25 + 10g = 0 \implies 10g = -25 \implies \mathbf{g = -\frac{5}{2}}$$ चरण 3: बिंदु $B(3, 4)$ वृत्त पर स्थित है: $$3^2 + 4^2 + 2g(3) + 2f(4) = 0$$ $$9 + 16 + 6g + 8f = 0 \implies 25 + 6\left(-\frac{5}{2}\right) + 8f = 0$$ $$25 - 15 + 8f = 0 \implies 10 + 8f = 0 \implies 8f = -10 \implies \mathbf{f = -\frac{5}{4}}$$ चरण 4: वृत्त का समीकरण बनाना: $g = -\frac{5}{2}, \; f = -\frac{5}{4}, \; c = 0$ के मान समीकरण (1) में रखने पर: $$x^2 + y^2 + 2\left(-\frac{5}{2}\right)x + 2\left(-\frac{5}{4}\right)y + 0 = 0$$ $$x^2 + y^2 - 5x - \frac{5}{2}y = 0$$ दोनों पक्षों को $2$ से गुणा करने पर: $$\mathbf{2x^2 + 2y^2 - 10x - 5y = 0 \iff x^2 + y^2 - 5x - \frac{5}{2}y = 0}$$ चरण 5: केंद्र एवं त्रिज्या ज्ञात करना: $$\text{केंद्र } C(-g, -f) = \left(-\left(-\frac{5}{2}\right), -\left(-\frac{5}{4}\right)\right) = \mathbf{\left(\frac{5}{2}, \frac{5}{4}\right)}$$ $$r = \sqrt{g^2 + f^2 - c} = \sqrt{\left(-\frac{5}{2}\right)^2 + \left(-\frac{5}{4}\right)^2 - 0} = \sqrt{\frac{25}{4} + \frac{25}{16}} = \sqrt{\frac{125}{16}} = \mathbf{\frac{5\sqrt{5}}{4} \text{ इकाई}}$$ अतः वृत्त का समीकरण $2x^2 + 2y^2 - 10x - 5y = 0$, केंद्र $\left(\frac{5}{2}, \frac{5}{4}\right)$ तथा त्रिज्या $\frac{5\sqrt{5}}{4}$ इकाई है।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

सही वैज्ञानिक तथ्य

व्यापक रूप में x² व y² के गुणांक सदैव 1 होने चाहिए। किसी अन्य गुणांक की उपस्थिति में पहले पूरे समीकरण को उससे भाग दें।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

सही वैज्ञानिक तथ्य

y² = -4ax में नाभि (-a, 0) तथा नियता x = +a होती है। नाभि और नियता शीर्ष के सापेक्ष सदैव विपरीत चिह्न की होती हैं।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

सही वैज्ञानिक तथ्य

हमेशा देखें कि किस चर के नीचे का हर बड़ा है। यदि y² के नीचे का हर बड़ा है (b > a), तो दीर्घ अक्ष y-अक्ष पर होगा और नाभियाँ (0, ±be) होंगी।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

सही वैज्ञानिक तथ्य

दीर्घवृत्त में e < 1 होने के कारण b² = a²(1 - e²) होता है। अतिपरवलय में e > 1 होने के कारण b² = a²(e² - 1) होता है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

सही वैज्ञानिक तथ्य

दीर्घवृत्त में नाभीय दूरियों का योग अचर होता है: SP + S'P = 2a। अतिपरवलय में नाभीय दूरियों का अंतर अचर होता है: |SP - S'P| = 2a।

शंकु परिच्छेद ज्यामितीय संरचना एवं मानक समीकरण चित्र

शंकु परिच्छेद ज्यामितीय संरचना एवं मानक समीकरण WBCHSE कक्षा 11 गणित (वृत्त, परवलय, दीर्घवृत्त एवं अतिपरवलय) शांकव परिभाषा एवं उत्केंद्रता शांकव का मूल नियम: SP / PM = e ■ वृत्त (Circle): e = 0 ■ परवलय (Parabola): e = 1 ■ दीर्घवृत्त (Ellipse): 0 < e < 1 ■ अतिपरवलय (Hyperbola): e > 1 ■ समकोणीय अतिपरवलय: a = b ⇒ e = √2 परवलय (Parabola) S y² = 4ax नाभि (Focus): S(a, 0) नियता: x = -a नाभिलंब जीवा की लंबाई: 4a Parametric: x = at², y = 2at वृत्त (Circle) मानक रूप: (x - h)² + (y - k)² = r² ■ General Equation: x² + y² + 2gx + 2fy + c = 0 केंद्र: (-g, -f) त्रिज्या: r = √(g² + f² - c) Intercepts: 2√(g² - c) & 2√(f² - c) दीर्घवृत्त (Ellipse) अक्ष संबंध: b² = a²(1 - e²) नाभियाँ: S, S'(±ae, 0), नियता: x = ±a/e नाभिलंब जीवा की लंबाई = 2b²/a ■ Focal Distance Property: नाभीय दूरियों का योग: SP + S'P = 2a अतिपरवलय (Hyperbola) अक्ष संबंध: b² = a²(e² - 1) नाभियाँ: S, S'(±ae, 0), नियता: x = ±a/e अनंतस्पर्शी (Asymptotes): y = ±(b/a)x ■ Focal Distance Difference Property: नाभीय दूरियों का अंतर: |SP - S'P| = 2a

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
शांकव एक ऐसे गतिशील बिंदु का बिंदु-पथ है जिसकी नाभि से दूरी और नियता से दूरी का अनुपात सदैव अचर (उत्केंद्रता e) रहता है।
मुख्य बिंदु 2
उत्केंद्रता शांकव की प्रकृति तय करती है: e = 0 वृत्त, e = 1 परवलय, 0 < e < 1 दीर्घवृत्त तथा e > 1 अतिपरवलय।
मुख्य बिंदु 3
वृत्त का व्यापक समीकरण x² + y² + 2gx + 2fy + c = 0, केंद्र (-g, -f) तथा त्रिज्या √(g² + f² - c) होती है।
मुख्य बिंदु 4
व्यास रूप में वृत्त का समीकरण: (x - x₁)(x - x₂) + (y - y₁)(y - y₂) = 0।
मुख्य बिंदु 5
चार मानक परवलय: y² = 4ax (दाएं), y² = -4ax (बाएं), x² = 4ay (ऊपर) तथा x² = -4ay (नीचे); सभी का नाभिलम्ब 4a होता है।
मुख्य बिंदु 6
मानक दीर्घवृत्त x²/a² + y²/b² = 1 (a > b) की नाभियाँ (±ae, 0), नियताएँ x = ±a/e तथा नाभिलम्ब 2b²/a होता है।
मुख्य बिंदु 7
दीर्घवृत्त पर स्थित किसी बिंदु की दोनों नाभियों से दूरियों का योग सदैव दीर्घ अक्ष के बराबर होता है: SP + S'P = 2a।
मुख्य बिंदु 8
मानक अतिपरवलय x²/a² - y²/b² = 1 की नाभियाँ (±ae, 0), नियताएँ x = ±a/e, नाभिलम्ब 2b²/a तथा अनंतस्पर्शी y = ±(b/a)x होती हैं।
मुख्य बिंदु 9
अतिपरवलय पर स्थित किसी बिंदु की दोनों नाभियों से दूरियों का निरपेक्ष अंतर सदैव अनुप्रस्थ अक्ष के बराबर होता है: |SP - S'P| = 2a।
मुख्य बिंदु 10
समकोणिक अतिपरवलय में a = b, समीकरण x² - y² = a², उत्केंद्रता सदैव e = √2 तथा अनंतस्पर्शी परस्पर लंबवत होती हैं।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
शीर्ष (0, 0) तथा नाभि (0, -4) वाले परवलय का समीकरण ज्ञात कीजिए।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: नाभि (0, -a) = (0, -4) ⇒ a = 4। समीकरण x² = -4(4)y ⇒ x² = -16y (अथवा x² + 16y = 0)।
नाभि ऋणात्मक y-अक्ष पर स्थित है, अतः मानक रूप x² = -4ay होगा।
2
वृत्त x² + y² - 6x + 4y - 12 = 0 का केंद्र तथा त्रिज्या ज्ञात कीजिए।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: केंद्र (-g, -f) = (3, -2)। त्रिज्या r = √((-3)² + 2² - (-12)) = √(9 + 4 + 12) = √25 = 5 इकाई।
x² + y² + 2gx + 2fy + c = 0 से तुलना करने पर g = -3, f = 2, c = -12।
3
दीर्घवृत्त 4x² + 9y² = 36 की उत्केंद्रता तथा नाभिलम्ब की लम्बाई ज्ञात कीजिए।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: a = 3, b = 2। e = √(1 - 4/9) = √5/3। नाभिलम्ब की लम्बाई = 2b²/a = 2(4)/3 = 8/3 इकाई।
समीकरण को 36 से भाग देकर x²/9 + y²/4 = 1 रूप में बदलें।
4
किसी भी समकोणिक अतिपरवलय की उत्केंद्रता का मान क्या होता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: e = √(1 + a²/a²) = √(1 + 1) = √2।
समकोणिक अतिपरवलय में a = b होता है। उत्केंद्रता सूत्र e = √(1 + b²/a²) का प्रयोग करें।
5
यदि एक गतिशील बिंदु P की (3, 0) और (-3, 0) से दूरियों का योग 10 हो, तो P का बिंदु-पथ ज्ञात कीजिए।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: a = 5, ae = 3 ⇒ e = 3/5। अतः b² = a²(1 - e²) = 25(1 - 9/25) = 16। अभीष्ट समीकरण: x²/25 + y²/16 = 1।
SP + S'P = 2a एक दीर्घवृत्त को दर्शाता है, जहाँ नाभियाँ (±ae, 0) = (±3, 0) तथा 2a = 10 है।
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