शंकु परिच्छेद (Conic Sections) वे वक्र हैं जो एक त्रिविमीय लंब वृत्तीय द्विशंकु को एक समतल द्वारा विभिन्न कोणों पर काटने से प्राप्त होते हैं।
मान लीजिए कि शंकु के ऊर्ध्वाधर अक्ष के साथ उसका अर्ध-शीर्ष कोण $\alpha$ है और प्रतिच्छेदी समतल अक्ष के साथ $\beta$ कोण बनाता है:
- वृत्त (Circle): जब $\beta = 90^\circ$ (समतल अक्ष के लंबवत हो), तो प्राप्त परिच्छेद एक वृत्त होता है।
- दीर्घवृत्त (Ellipse): जब $\alpha < \beta < 90^\circ$ (समतल शंकु के एक भाग को पूर्णतः काटे), तो प्राप्त संवृत वक्र दीर्घवृत्त कहलाता है।
- परवलय (Parabola): जब $\beta = \alpha$ (समतल शंकु की जनक रेखा के समांतर हो), तो प्राप्त विवृत वक्र परवलय होता है।
- अतिपरवलय (Hyperbola): जब $0 \le \beta < \alpha$ (समतल शंकु के दोनों भागों को काटे), तो प्राप्त दो शाखाओं वाला वक्र अतिपरवलय होता है।
- अपभ्रष्ट शांकव (Degenerate Conics): यदि समतल शंकु के शीर्ष (Apex) से होकर गुजरे:
- $\beta > \alpha$: परिच्छेद केवल एक बिंदु (Point) होता है।
- $\beta = \alpha$: परिच्छेद एक सरल रेखा (Straight Line) होता है।
- $\beta < \alpha$: परिच्छेद प्रतिच्छेदी सरल रेखाओं का युग्म (Pair of Intersecting Lines) होता है।
| शांकव का नाम | उत्केंद्रता ($e$) | ज्यामितीय विशेषता | मानक कार्तीय समीकरण |
|---|---|---|---|
| वृत्त (Circle) | $e = 0$ | नियता अनंत पर स्थित; केंद्र से दूरी नियत त्रिज्या $r$ | $(x - h)^2 + (y - k)^2 = r^2$ |
| परवलय (Parabola) | $e = 1$ | नाभि से दूरी और नियता से दूरी समान ($SP = PM$) | $y^2 = 4ax$ |
| दीर्घवृत्त (Ellipse) | $0 < e < 1$ | नाभीय दूरी नियता दूरी से कम होती है ($SP < PM$) | $\frac{x^2}{a^2} + \frac{y^2}{b^2} = 1 \quad (a > b)$ |
| अतिपरवलय (Hyperbola) | $e > 1$ | नाभीय दूरी नियता दूरी से अधिक होती है ($SP > PM$) | $\frac{x^2}{a^2} - \frac{y^2}{b^2} = 1$ |
| समकोणिक अतिपरवलय | $e = \sqrt{2}$ | अनुप्रस्थ अक्ष और संयुग्मी अक्ष समान ($a = b$) | $x^2 - y^2 = a^2$ अथवा $xy = c^2$ |