यद्यपि समांतर माध्य या माध्यिका आंकड़ों के केंद्र को निर्धारित करते हैं, किंतु वे यह नहीं बताते कि पद केंद्र के आसपास कितने सघन या दूर-दूर फैले हुए हैं।
निम्नलिखित तीन पृथक श्रेणियों पर विचार कीजिए (प्रत्येक में 5 प्रेक्षण हैं):
- श्रेणी 1: $50, \; 50, \; 50, \; 50, \; 50 \implies \text{माध्य } \bar{x} = 50$
- श्रेणी 2: $48, \; 49, \; 50, \; 51, \; 52 \implies \text{माध्य } \bar{x} = 50$
- श्रेणी 3: $0, \; 25, \; 50, \; 75, \; 100 \implies \text{माध्य } \bar{x} = 50$
तीनों श्रेणियों का माध्य, माध्यिका और बहुलक समान रूप से $50$ है। किंतु श्रेणी 1 में शून्य फैलाव है, श्रेणी 2 में अत्यंत न्यून फैलाव है तथा श्रेणी 3 में अत्यधिक बिखराव है। अतः केंद्रीय प्रवृत्ति का मान अकेले संपूर्ण वितरण को स्पष्ट नहीं कर सकता।
- निरपेक्ष माप (Absolute Measures): वे माप जो मूल आंकड़ों की इकाई में ही व्यक्त होते हैं (जैसे: परिसर, माध्य विचलन, मानक विचलन)।
- सापेक्ष माप (Relative Measures): वे माप जो मात्रकहीन अनुपात या प्रतिशत के रूप में व्यक्त होते हैं (जैसे: विचरण गुणांक)। भिन्न-भिन्न इकाइयों वाले आंकड़ों की तुलना हेतु ये अपरिहार्य हैं।
किसी आंकड़ा समूह के अधिकतम मान ($L$) और न्यूनतम मान ($S$) के बीजगणितीय अंतर को परिसर ($R$) कहते हैं:
गुण एवं दोष: परिसर की गणना अत्यंत सरल है, किंतु यह केवल दो चरम मानों पर आधारित होता है और बीच के सभी आंकड़ों की उपेक्षा करता है। चरम मानों (आउटलायर्स) की उपस्थिति में यह भ्रामक निष्कर्ष देता है।