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WBB • कक्षा 8 • Social Science • अध्याय 20
अनुमानित समय: 50 मिनट
प्रगति: अध्ययनरत

ओशिनिया महाद्वीप

पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (WBBSE) द्वारा कक्षा 8 के भूगोल पाठ्यक्रम "हमारा पर्यावरण / हमारी पृथ्वी" (আমাদের পৃথিবী) के अंतर्गत निर्धारित "ओशिनिया महाद्वीप" (Oceania) का आधिकारिक एवं प्रामाणिक मास्टर अध्ययन मार्गदर्शिका। प्रशांत एवं हिंद महासागर के अथाह जल-विस्तार में फैला ओशिनिया भू-क्षेत्रफल की दृष्टि से पृथ्वी का लघुतम किंतु जैव-विविधता एवं प्राकृतिक संरचना की दृष्टि से सर्वाधिक विलक्षण द्वीप महाद्वीप है। ऑस्ट्रेलिया का प्राचीन पश्चिमी पठार एवं विशाल लाल मरुस्थल (आउटबैक), मध्यवर्ती निम्नभूमि, प्राकृतिक जल-दाब युक्त ग्रेट आर्टेशियन बेसिन और -15 मीटर गहरी आयर झील, पूर्वी तट पर ग्रेट डिवाइडिंग रेंज एवं ऑस्ट्रेलियाई आल्प्स का सर्वोच्च शिखर माउंट कोसिउस्को (2,228 मीटर), क्वींसलैंड तट पर विश्व की विशालतम प्रवाल भित्ति ग्रेट बैरियर रीफ, तथा मरे-डार्लिंग बेसिन का हरा-भरा अन्न भंडार एवं डाउन्स घास के मैदानों का विश्वविख्यात मेरिनो ऊन उद्योग—ओशिनिया को भौगोलिक दृष्टि से अद्वितीय बनाते हैं। इसके अतिरिक्त न्यूजीलैंड के हिमाच्छादित दक्षिणी आल्प्स (माउंट कुक, 3,724 मीटर), उपजाऊ कैंटरबरी के मैदान, उत्तरी द्वीप के सक्रिय ज्वालामुखी व रोटोरुआ के उष्ण जल-प्रपात (गीजर), तथा 5 करोड़ वर्षों के भौगोलिक अलगाव के कारण विकसित हुए आदिम प्राणी—मार्सुपियल (कंगारू, कोआला) और अंडे देने वाले स्तनधारी मोनोट्रीम (प्लैटिपस, एकिडना)—इस महाद्वीप को प्रकृति की एक अनूठी प्रयोगशाला बनाते हैं। यह मार्गदर्शिका 5 विस्तृत मॉड्यूल में विभाजित है: (1) भौगोलिक स्थिति, विस्तार एवं ओशिनिया के चार प्रमुख क्षेत्रीय विभाग; (2) ऑस्ट्रेलिया के भू-आकृतिक विभाग: उच्चभूमि, निम्नभूमि, मरुस्थल एवं एकाश्म शैल; (3) जल निकासी तंत्र, जलवायु, आर्टेशियन कुएं एवं ग्रेट बैरियर रीफ; (4) पशुपालन अर्थव्यवस्था (मेरिनो भेड़, जैकारू), कृषि एवं खनिज संपदा; और (5) न्यूजीलैंड का भूगोल, कैंटरबरी के मैदान एवं विशिष्ट जैव-विविधता। इसमें 25 उपखंड, रिस्पॉन्सिव वेक्टर SVG कॉन्सेप्ट मैप, 8 वैज्ञानिक/भौगोलिक सिद्धांत कार्ड, 8 विस्तृत हल किए गए उदाहरण, 7 परीक्षक जाल चेतावनियां, 8 मास्टर सारांश बिंदु, 8 मुख्य निष्कर्ष, 5 स्व-मूल्यांकन प्रश्न व समाधान, तथा 5 कंप्यूटर आधारित डायग्नोस्टिक बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) सम्मिलित हैं।

🌊 द्वीप महाद्वीप का रहस्य: जहां नदियां सूख जाती हैं और स्तनधारी अंडे देते हैं!

क्या आप एक ऐसे महाद्वीप की कल्पना कर सकते हैं, जहां नवजात बच्चे को मां पेट की थैली में रखकर लंबी छलांगें लगाती है, स्तनधारी होने के बावजूद जीव सरीसृपों की तरह अंडे देते हैं, और नदियां समुद्र में मिलने के बजाय मरुस्थल की खारी झील में सूख जाती हैं?

स्वागत है ओशिनिया महाद्वीप में—स्थलीय क्षेत्रफल में पृथ्वी का सबसे छोटा, किंतु महासागरीय विस्तार में सबसे विशाल महाद्वीप! ऑस्ट्रेलिया के तप्त लाल आउटबैक से लेकर न्यूजीलैंड की बर्फ से ढकी चोटियों और ग्रेट बैरियर रीफ के फिरोजी पानी तक, ओशिनिया प्रकृति का एक जीवित संग्रहालय है।

यहां बिना किसी मोटर या पंप के जमीन से पानी प्राकृतिक दबाव से फव्वारे की तरह फूटता है, और विशाल फार्मों में लाखों मेरिनो भेड़ों की रखवाली जांबाज घुड़सवार जैकारू करते हैं! आइए, इस अद्भुत महाद्वीप के भूगोल का अन्वेषण करें।

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (WBBSE) द्वारा कक्षा 8 के भूगोल पाठ्यक्रम "हमारा पर्यावरण / हमारी पृथ्वी" (আমাদের পৃথিবী) के अंतर्गत निर्धारित "ओशिनिया महाद्वीप" (Oceania) का आधिकारिक एवं प्रामाणिक मास्टर अध्ययन मार्गदर्शिका। प्रशांत एवं हिंद महासागर के अथाह जल-विस्तार में फैला ओशिनिया भू-क्षेत्रफल की दृष्टि से पृथ्वी का लघुतम किंतु जैव-विविधता एवं प्राकृतिक संरचना की दृष्टि से सर्वाधिक विलक्षण द्वीप महाद्वीप है। ऑस्ट्रेलिया का प्राचीन पश्चिमी पठार एवं विशाल लाल मरुस्थल (आउटबैक), मध्यवर्ती निम्नभूमि, प्राकृतिक जल-दाब युक्त ग्रेट आर्टेशियन बेसिन और -15 मीटर गहरी आयर झील, पूर्वी तट पर ग्रेट डिवाइडिंग रेंज एवं ऑस्ट्रेलियाई आल्प्स का सर्वोच्च शिखर माउंट कोसिउस्को (2,228 मीटर), क्वींसलैंड तट पर विश्व की विशालतम प्रवाल भित्ति ग्रेट बैरियर रीफ, तथा मरे-डार्लिंग बेसिन का हरा-भरा अन्न भंडार एवं डाउन्स घास के मैदानों का विश्वविख्यात मेरिनो ऊन उद्योग—ओशिनिया को भौगोलिक दृष्टि से अद्वितीय बनाते हैं। इसके अतिरिक्त न्यूजीलैंड के हिमाच्छादित दक्षिणी आल्प्स (माउंट कुक, 3,724 मीटर), उपजाऊ कैंटरबरी के मैदान, उत्तरी द्वीप के सक्रिय ज्वालामुखी व रोटोरुआ के उष्ण जल-प्रपात (गीजर), तथा 5 करोड़ वर्षों के भौगोलिक अलगाव के कारण विकसित हुए आदिम प्राणी—मार्सुपियल (कंगारू, कोआला) और अंडे देने वाले स्तनधारी मोनोट्रीम (प्लैटिपस, एकिडना)—इस महाद्वीप को प्रकृति की एक अनूठी प्रयोगशाला बनाते हैं। यह मार्गदर्शिका 5 विस्तृत मॉड्यूल में विभाजित है: (1) भौगोलिक स्थिति, विस्तार एवं ओशिनिया के चार प्रमुख क्षेत्रीय विभाग; (2) ऑस्ट्रेलिया के भू-आकृतिक विभाग: उच्चभूमि, निम्नभूमि, मरुस्थल एवं एकाश्म शैल; (3) जल निकासी तंत्र, जलवायु, आर्टेशियन कुएं एवं ग्रेट बैरियर रीफ; (4) पशुपालन अर्थव्यवस्था (मेरिनो भेड़, जैकारू), कृषि एवं खनिज संपदा; और (5) न्यूजीलैंड का भूगोल, कैंटरबरी के मैदान एवं विशिष्ट जैव-विविधता। इसमें 25 उपखंड, रिस्पॉन्सिव वेक्टर SVG कॉन्सेप्ट मैप, 8 वैज्ञानिक/भौगोलिक सिद्धांत कार्ड, 8 विस्तृत हल किए गए उदाहरण, 7 परीक्षक जाल चेतावनियां, 8 मास्टर सारांश बिंदु, 8 मुख्य निष्कर्ष, 5 स्व-मूल्यांकन प्रश्न व समाधान, तथा 5 कंप्यूटर आधारित डायग्नोस्टिक बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) सम्मिलित हैं।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • पिछली कक्षाओं से महाद्वीप, महासागर, अक्षांश एवं देशांतर का मूलभूत ज्ञान।
  • प्लेट विवर्तनिकी (Plate Tectonics) और प्राचीन गोंडवानालैंड के विखंडन की सामान्य समझ।
  • पर्वत, पठार, मैदान, नदी घाटियों एवं तटीय भू-आकृतियों की आधारभूत जानकारी।
  • जलवायु क्षेत्रों (उष्णकटिबंधीय, मरुस्थलीय, शीतोष्ण) और जल-चक्र की समझ।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • ओशिनिया की सीमाओं, भौगोलिक स्थिति और इसके चार प्रमुख उप-क्षेत्रों (ऑस्ट्रेलेशिया, मेलानेशिया, माइक्रोनेशिया, पोलिनेशिया) को स्पष्ट रूप से समझाना।
  • ऑस्ट्रेलिया के चार प्रमुख भू-आकृतिक विभागों (पूर्वी उच्चभूमि, मध्यवर्ती निम्नभूमि, पश्चिमी पठार एवं तटीय मैदान) का विश्लेषण करना।
  • ग्रेट आर्टेशियन बेसिन में आर्टेशियन कुओं के निर्माण, कार्यप्रणाली और पशुपालन में इनकी उपयोगिता का मूल्यांकन करना।
  • मरे-डार्लिंग नदी तंत्र के प्रवाह मार्ग और आयर झील की अंतःस्थलीय जल निकासी प्रक्रिया को स्पष्ट करना।
  • ग्रेट बैरियर रीफ की जैविक संरचना, प्रवाल कीटों के जीवन और कोरल ब्लीचिंग (प्रवाल विरंजन) संकट का विश्लेषण करना।
  • डाउन्स शीतोष्ण घास के मैदानों में मेरिनो भेड़ पालन, विशाल स्टेशनों और जैकारू श्रमिकों की भूमिका का वर्णन करना।
  • न्यूजीलैंड के उत्तरी और दक्षिणी द्वीपों की भू-आकृति की तुलना करना और कैंटरबरी के मैदानों के कृषि महत्व को समझना।
  • लाखों वर्षों के भौगोलिक अलगाव के संदर्भ में मार्सुपियल और मोनोट्रीम जीवों के अनुकूलन की व्याख्या करना।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 १. ओशिनिया की भौगोलिक स्थिति, क्षेत...
2 २. ऑस्ट्रेलिया के भू-आकृतिक विभाग:...
3 ३. नदी तंत्र, जलवायु, आर्टेशियन कुए...
4 ४. पशुपालन अर्थव्यवस्था, कृषि एवं ऑ...
5 ५. न्यूजीलैंड का भूगोल, कैंटरबरी के...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

१. ओशिनिया की भौगोलिक स्थिति, क्षेत्रीय विभाजन एवं खोज का इतिहास

१.१ भौगोलिक स्थिति, विस्तार एवं महाद्वीपीय स्वरूप

पृथ्वी के सात महाद्वीपों में स्थलीय क्षेत्रफल की दृष्टि से ओशिनिया (Oceania) सबसे छोटा महाद्वीप है। इसका कुल स्थलीय क्षेत्रफल लगभग 85 लाख वर्ग किलोमीटर (8.52 मिलियन वर्ग किमी) है। ओशिनिया मुख्य रूप से दक्षिणी एवं पूर्वी गोलार्ध में स्थित है। इसके उत्तर एवं पूर्व में प्रशांत महासागर, पश्चिम एवं दक्षिण में हिंद महासागर, तथा सुदूर दक्षिण में दक्षिणी महासागर विस्तृत है।

अन्य महाद्वीपों की भांति ओशिनिया कोई एक निरंतर भूभाग नहीं है; यह ऑस्ट्रेलिया मुख्य भूमि, न्यूजीलैंड के दो बड़े द्वीपों, तस्मानिया, पापुआ न्यू गिनी और मध्य व दक्षिणी प्रशांत महासागर में फैले लगभग 10,000 छोटे-बड़े प्रवाल एवं ज्वालामुखीय द्वीपों का एक अनूठा द्वीप महाद्वीप है।

भौगोलिक पैरामीटर मान / स्थिति भौगोलिक महत्व
अक्षांशीय विस्तार लगभग 28° उत्तरी अक्षांश (मिडवे एटोल) से 47° दक्षिणी अक्षांश (स्टीवर्ट द्वीप, न्यूजीलैंड) विषुवतीय, उष्णकटिबंधीय, उपोष्ण और शीतोष्ण कटिबंधों का विस्तृत फैलाव।
देशांतरीय विस्तार लगभग 113° पूर्वी देशांतर (स्टीप पॉइंट, ऑस्ट्रेलिया) से 130° पश्चिमी देशांतर (पिटकेयर्न) 180° देशांतर और अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा (IDL) इसी महासागर से गुजरती है।
कुल क्षेत्रफल लगभग 85.2 लाख वर्ग किमी (ऑस्ट्रेलिया अकेले लगभग 76.9 लाख वर्ग किमी) समग्र महाद्वीप का लगभग 90% भूभाग अकेले ऑस्ट्रेलिया राष्ट्र के पास है।
सीमावर्ती जलराशियां प्रशांत महासागर, हिंद महासागर, कोरल सागर, तस्मान सागर, तिमोर सागर लगभग 5 करोड़ वर्षों से अन्य महाद्वीपों से पूर्णतः कटा हुआ और पृथक रहा है।

१.२ ओशिनिया के चार प्रमुख भौगोलिक उप-क्षेत्र

भौगोलिक स्थिति, भूगर्भीय बनावट और मूल निवासियों की प्रजातीय विशेषताओं के आधार पर ओशिनिया को चार प्रमुख क्षेत्रों में वर्गीकृत किया गया है:

उप-क्षेत्र का नाम नाम की व्युत्पत्ति प्रमुख द्वीप एवं राष्ट्र भौगोलिक एवं भूगर्भीय लक्षण
१. ऑस्ट्रेलेशिया (Australasia) "एशिया के दक्षिण में स्थित" (लैटिन australis = दक्षिण) ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, तस्मानिया और न्यू गिनी (पापुआ न्यू गिनी सहित)। प्राचीन गोंडवानालैंड के प्राचीन महाद्वीपीय खंड; ओशिनिया के कुल भूभाग और जनसंख्या का 95% से अधिक हिस्सा समाहित करता है।
२. मेलानेशिया (Melanesia) "काले लोगों के द्वीप" (ग्रीक melas = काला, nesos = द्वीप; गहरे रंग के मूल निवासियों के आधार पर) पापुआ न्यू गिनी, सोलोमन द्वीप, वानुआतु, फिजी, न्यू कैलेडोनिया। ऑस्ट्रेलिया के उत्तर-पूर्व में स्थित; विवर्तनिक प्लेट सीमाओं पर स्थित ऊंचे ज्वालामुखीय द्वीप और घने उष्णकटिबंधीय वर्षावन।
३. माइक्रोनेशिया (Micronesia) "छोटे द्वीप" (ग्रीक mikros = छोटा, nesos = द्वीप) मार्शल द्वीप, किरिबाती, गुआम, नौरू, पलाऊ, मारियाना द्वीप समूह। भूमध्य रेखा के उत्तर में पश्चिमी प्रशांत में फैले हजारों छोटे प्रवाल एटोल और चूना पत्थर के द्वीप; समुद्र स्तर वृद्धि से अत्यधिक संवेदनशील।
४. पोलिनेशिया (Polynesia) "अनेक द्वीप" (ग्रीक polys = अनेक, nesos = द्वीप) हवाई द्वीप (यूएसए), समोआ, टोंगा, तुवालु, कुक द्वीप, फ्रेंच पोलिनेशिया (ताहिती), ईस्टर द्वीप। मध्य एवं पूर्वी प्रशांत महासागर में फैला एक विशाल त्रिकोण (उत्तर में हवाई, दक्षिण-पश्चिम में न्यूजीलैंड और दक्षिण-पूर्व में ईस्टर द्वीप)। अधिकांशतः ज्वालामुखीय व प्रवाल द्वीप।

१.३ ओशिनिया की खोज का इतिहास

यूरोपीय नाविकों के आगमन से हजारों वर्ष पूर्व ऑस्ट्रेलिया के मूल निवासी (Aborigines) और पोलिनेशिया के कुशल नाविक तारों और लहरों की दिशा देखकर प्रशांत महासागर में लंबी यात्राएं करते थे:

  • विलेम जांस्ज़ून (1606): डच नाविक, जो ऑस्ट्रेलियाई मुख्य भूमि (कारपेंटारिया की खाड़ी) पर कदम रखने वाले प्रथम दर्ज यूरोपीय थे।
  • एबेल तस्मान (1642): डच खोजी नाविक, जिन्होंने तस्मानिया (तत्कालीन नाम वैन डायमेंस लैंड) और न्यूजीलैंड की खोज की। उनके नाम पर तस्मानिया और तस्मान सागर का नामकरण हुआ।
  • कैप्टन जेम्स कुक (1770): ब्रिटिश नाविक जिन्होंने अपने जहाज एचएमएस एंडेवर से ऑस्ट्रेलिया के पूर्वी तट का विस्तृत सर्वेक्षण किया और इसे न्यू साउथ वेल्स नाम दिया। उन्होंने बॉटनी बे पर लंगर डाला और न्यूजीलैंड का मानचित्र बनाया।

२. ऑस्ट्रेलिया के भू-आकृतिक विभाग: उच्चभूमि, निम्नभूमि, पठार एवं एकाश्म शैल

२.१ ऑस्ट्रेलियाई भू-आकृति की सामान्य विशेषताएं

ऑस्ट्रेलिया पृथ्वी का सबसे पुराना, सबसे सपाट और सबसे शुष्क आबाद महाद्वीप है। समुद्र तल से इसकी औसत ऊंचाई केवल 330 मीटर है। इसकी मुख्य भूमि पर कोई सक्रिय ज्वालामुखी या स्थायी हिमनद नहीं है। ऑस्ट्रेलिया को उत्तर से दक्षिण दिशा में फैले चार प्रमुख भू-आकृतिक विभागों में विभाजित किया गया है:

भू-आकृतिक विभाग भूगर्भीय आयु एवं शैल प्रमुख पर्वत / भू-आकृतियां उच्चतम / निम्नतम बिंदु
१. पूर्वी उच्चभूमि (ग्रेट डिवाइडिंग रेंज) पैलियोजोइक युग के प्राचीन वलित पर्वत, जो करोड़ों वर्षों के अपरदन से घिसकर पठारों और पहाड़ियों में बदल चुके हैं। ग्रेट डिवाइडिंग रेंज, ब्लू माउंटेंस, स्नोई माउंटेंस, ऑस्ट्रेलियन आल्प्स। माउंट कोसिउस्को (2,228 मीटर) — मुख्य भूमि का सर्वोच्च शिखर।
२. मध्यवर्ती निम्नभूमि मेसोजोइक युग की अवसादी द्रोणी, जो प्राचीन काल में आंतरिक उथला समुद्र था; नदियों की लाई गाद से निर्मित। कारपेंटारिया निम्नभूमि, ग्रेट आर्टेशियन बेसिन, आयर झील द्रोणी, मरे-डार्लिंग मैदान। आयर झील (-15 मीटर) — ऑस्ट्रेलिया का निम्नतम गर्त (अंतःस्थलीय)।
३. पश्चिमी पठार (द आउटबैक) प्रीकैम्ब्रियन युग की अत्यंत प्राचीन आग्नेय व कायांतरित चट्टानें (शील्ड); अपरदन से संप्राय मैदान में परिवर्तित। किम्बरले पठार, हैमर्सले रेंज, मैकडॉनेल रेंज, गिब्सन, ग्रेट सैंडी व ग्रेट विक्टोरिया मरुस्थल। उलुरु (आयरेस रॉक) व काटा जूटा एकाश्म शैल।
४. तटीय मैदान टरशरी एवं क्वाटरनरी युग के जलोढ़ व समुद्री निक्षेप। संकीर्ण पूर्वी तटीय पट्टी, स्वान मैदान (पश्चिम), नल्लारबोर चूना पत्थर मैदान (दक्षिण)। समुद्र तल के निकट (0–100 मी); देश की 85% आबादी का निवास।

२.२ पूर्वी उच्चभूमि या ग्रेट डिवाइडिंग रेंज (Great Dividing Range)

ऑस्ट्रेलिया के पूर्वी तट के समानांतर केप यॉर्क प्रायद्वीप से दक्षिण में विक्टोरिया तक लगभग 3,500 किलोमीटर लंबी पर्वतमाला को ग्रेट डिवाइडिंग रेंज कहते हैं:

  • जलवायु अवरोधक: यह प्रशांत महासागर से आने वाली दक्षिण-पूर्वी व्यापारिक हवाओं को रोकती है। परिणामस्वरूप इसके पूर्वी ढलानों पर भारी पर्वतीय वर्षा (1,000–2,000 मिमी) होती है, जबकि पश्चिमी ढलान वृष्टि-छाया क्षेत्र बनकर शुष्क हो जाते हैं।
  • जल-विभाजक: यह महाद्वीप का प्रमुख जल-विभाजक है। इसके पूर्वी ढलान की छोटी और तीव्र नदियां पूर्व में प्रशांत महासागर में गिरती हैं, जबकि पश्चिमी ढलान की लंबी नदियां (मरे और डार्लिंग) पश्चिम में आंतरिक भाग की ओर बहती हैं।
  • माउंट कोसिउस्को (Mount Kosciuszko): स्नोई माउंटेंस में स्थित माउंट कोसिउस्को (2,228 मीटर) ऑस्ट्रेलिया का सर्वोच्च शिखर है। पोलिश खोजकर्ता पॉल स्ट्रजेलेकी ने पोलैंड के राष्ट्रीय नायक कोसिउस्को के नाम पर इसका नामकरण किया था। शीतकाल में यहां बर्फबारी होती है।

२.३ मध्यवर्ती निम्नभूमि एवं आयर झील

पूर्वी उच्चभूमि और पश्चिमी पठार के बीच स्थित विशाल अवसादी द्रोणी को मध्यवर्ती निम्नभूमि कहा जाता है:

  • कारपेंटारिया निम्नभूमि: उत्तर में कारपेंटारिया की खाड़ी की ओर ढलान वाला समतल मैदानी भाग।
  • आयर झील द्रोणी (Lake Eyre Basin): लगभग 12 लाख वर्ग किमी में फैला विश्व का सबसे बड़ा अंतःस्थलीय अपवाह क्षेत्र। आयर झील समुद्र तल से 15 मीटर नीचे स्थित है। यह वर्ष के अधिकांश समय एक सूखी, सफेद नमक की चादर (Salt Pan) बनी रहती है। दशकों में कभी होने वाली मूसलाधार वर्षा से यह अस्थायी रूप से भरती है।
  • मरे-डार्लिंग मैदान: दक्षिण-पूर्व में स्थित उपजाऊ जलोढ़ मैदान, जो देश का मुख्य कृषि केंद्र है।

२.४ पश्चिमी पठार, आउटबैक एवं उलुरु एकाश्म

पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया, उत्तरी क्षेत्र और दक्षिण ऑस्ट्रेलिया के विशाल भूभाग पर फैला पश्चिमी पठार देश के 60% से अधिक हिस्से को घेरता है। इसे बोलचाल में "आउटबैक" (Outback) या लाल केंद्र कहा जाता है:

  • महान ऑस्ट्रेलियाई मरुस्थल: यह पठार अत्यधिक शुष्क और वर्षाविहीन है। इसमें ग्रेट सैंडी मरुस्थल, गिब्सन मरुस्थल, ग्रेट विक्टोरिया मरुस्थल और सिम्पसन मरुस्थल (समानांतर लाल रेत के टीलों हेतु प्रसिद्ध) स्थित हैं।
  • उलुरु या आयरेस रॉक (Uluru / Ayers Rock): मध्य ऑस्ट्रेलिया में स्थित लाल बलुआ पत्थर की दुनिया की सबसे बड़ी एकाश्म चट्टान या मोनोलिथ (Inselberg) है। यह धरातल से 348 मीटर ऊंची है और इसकी परिधि 9.4 किमी है। सूर्य के कोण के अनुसार इसका रंग लाल, नारंगी, बैंगनी और सुनहरे रंग में बदलता दिखाई देता है। स्थानीय अनांगु आदिवासियों के लिए यह अत्यंत पवित्र स्थल है।
  • नल्लारबोर का मैदान (Nullarbor Plain): दक्षिणी तट पर स्थित 2 लाख वर्ग किमी में फैला चूना पत्थर का विशाल समतल मैदान। लैटिन में Nullus arbor का अर्थ है "एक भी पेड़ नहीं"। चूना पत्थर होने के कारण सारा वर्षा जल भूमिगत हो जाता है, जिससे सतह नदीविहीन और पूरी तरह वृक्षविहीन है।

३. नदी तंत्र, जलवायु, आर्टेशियन कुएं एवं ग्रेट बैरियर रीफ

३.१ मरे-डार्लिंग नदी तंत्र: ऑस्ट्रेलिया की जीवनरेखा

ऑस्ट्रेलिया का सबसे महत्वपूर्ण एवं विशालतम नदी तंत्र मरे-डार्लिंग नदी तंत्र (Murray-Darling Basin) है, जो देश के 10 लाख वर्ग किमी से अधिक क्षेत्र को सींचता है:

नदी का नाम उद्गम स्थल लंबाई संगम एवं मुहाना प्रमुख विशेषताएं
मरे नदी (Murray River) ऑस्ट्रेलियाई आल्प्स की स्नोई पर्वतमाला 2,508 किमी (ऑस्ट्रेलिया की सबसे लंबी नदी) एडिलेड के निकट एनकाउंटर की खाड़ी (अलेक्जेंड्रीना झील) में हिंद महासागर में विलीन। पिघलती बर्फ से पोषित होने के कारण वर्ष भर जल रहता है (सदा नीरा); सिंचाई हेतु ह्यूम एवं डार्टमाउथ बांध बनाए गए हैं।
डार्लिंग नदी (Darling River) ग्रेट डिवाइडिंग रेंज की उत्तरी पहाड़ियां (क्वींसलैंड सीमा) 1,472 किमी (संयुक्त तंत्र: 3,672 किमी) वेंटवर्थ (Wentworth) नामक स्थान पर मरे नदी में मिलती है। शुष्क भागों से बहने के कारण ग्रीष्म ऋतु में कहीं-कहीं सूख जाती है और गड्ढों में सिमट जाती है (अनित्यवाही)।
मुरमबिजी नदी (Murrumbidgee) स्नोई पर्वतमाला 1,485 किमी मरे नदी की प्रमुख सहायक नदी। मुरमबिजी सिंचाई क्षेत्र (MIA) में कृषि को अत्यधिक समृद्ध बनाती है।

३.२ अंतःस्थलीय प्रवाह एवं क्रीक (Creeks)

ऑस्ट्रेलिया के आधे से अधिक भाग में नदियां समुद्र तक नहीं पहुंच पाती हैं। मध्यवर्ती पहाड़ियों से निकलने वाली कूपर क्रीक, डायमेंटीना और जॉर्जिया नदियां आंतरिक भाग की आयर झील की ओर बहती हैं:

  • क्रीक (Creek): शुष्क मौसम में इन नदियों का पानी सूख जाता है और ये बालू व पत्थरों के सूखे रास्तों में बदल जाती हैं, जिन्हें क्रीक कहते हैं। केवल भारी वर्षा के समय ही इनमें पानी बहता है।
  • खारी झीलों में अंत: क्रीक का पानी आयर झील में गिरता है और तीव्र वाष्पीकरण से सूखकर नमक की मोटी परत बना देता है।

३.३ ग्रेट आर्टेशियन बेसिन एवं आर्टेशियन कुओं की कार्यप्रणाली

ऑस्ट्रेलिया की मध्यवर्ती निम्नभूमि के नीचे विशाल भूमिगत जल भंडार स्थित है, जिसे ग्रेट आर्टेशियन बेसिन (Great Artesian Basin) कहते हैं। यह 17 लाख वर्ग किमी में फैला है:

⚙️ आर्टेशियन बेसिन की भूगर्भीय संरचना

एक आर्टेशियन बेसिन एक अधोवलन (Syncline) द्रोणी होती है, जिसमें एक पारगम्य बलुआ पत्थर की परत (Aquifer) ऊपर और नीचे दो अपारगम्य शैल या चिकनी मिट्टी की परतों के बीच दबी रहती है।

पारगम्य परत के दोनों किनारे पूर्वी उच्चभूमि में अधिक ऊंचाई पर खुले रहते हैं, जहां वर्षा का जल रिसकर इसमें भरता रहता है। इससे भूमिगत जल पर अत्यधिक जल-स्थैतिक दबाव (Hydrostatic Pressure) उत्पन्न हो जाता है।

💧 आर्टेशियन कुएं (Artesian Well) की कार्यप्रणाली

जब निचले मैदानी भाग में ऊपरी अपारगम्य परत को छेदकर एक गहरा नलकूप खोदा जाता है, तो भूमिगत प्राकृतिक दबाव के कारण बिना किसी पंप के जल फव्वारे की भांति स्वतः सतह पर फूट पड़ता है।

पशुपालन में उपयोग: यह जल थोड़ा गर्म और लवणयुक्त होता है, अतः फसलों के लिए उत्तम नहीं है, किंतु शुष्क आउटबैक में लाखों भेड़ों और मवेशियों के पीने के लिए यह जीवनदायिनी सिद्ध होता है।

३.४ ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख जलवायु प्रदेश

मकर रेखा (23½° दक्षिण) ऑस्ट्रेलिया के मध्य से गुजरती है, जिससे यहां की जलवायु में अत्यधिक विविधता मिलती है:

  • उत्तरी उष्णकटिबंधीय मानसूनी जलवायु: ग्रीष्मकाल अत्यधिक गर्म व आर्द्र और भारी वर्षा वाला, शीतकाल शुष्क (डार्विन)।
  • मध्य व पश्चिमी मरुस्थलीय जलवायु: वर्ष भर तीव्र शुष्कता, नाममात्र वर्षा (<250 मिमी), दिन में भीषण गर्मी (45°C) तथा रातें ठंडी।
  • दक्षिण व दक्षिण-पश्चिमी भूमध्यसागरीय जलवायु: शुष्क धूपदार गर्मियां तथा नम और वर्षा युक्त सर्दियां (पर्थ और एडिलेड)। खट्टे फलों और अंगूर के लिए उपयुक्त।
  • पूर्वी व दक्षिण-पूर्वी समशीतोष्ण जलवायु: वर्ष भर सुहावना मौसम और नियमित वर्षा (सिडनी, मेलबर्न और तस्मानिया)।

३.५ ग्रेट बैरियर रीफ (Great Barrier Reef)

ऑस्ट्रेलिया के उत्तर-पूर्वी तट पर क्वींसलैंड के निकट कोरल सागर में स्थित विश्व की सबसे बड़ी जीवित संरचना ग्रेट बैरियर रीफ है। यह लगभग 2,300 किलोमीटर लंबी है और 3.44 लाख वर्ग किमी में फैली है:

  • प्रवालों की जैविक प्रकृति: प्रवाल कीट (Coral Polyp) नामक सूक्ष्म अकशेरुकी समुद्री जीव गर्म (20°–28°C), उथले और स्वच्छ समुद्री जल में कैल्शियम कार्बोनेट ($\text{CaCO}_3$) स्रावित कर अपनी सुरक्षा हेतु चूने का कंकाल बनाते हैं। करोड़ों वर्षों में इन कंकालों के जमाव से यह भित्ति बनी है।
  • सहजीवी शैवाल: प्रवाल कीटों के ऊतकों में जुजैंथिली (Zooxanthellae) नामक एककोशिकीय शैवाल रहते हैं, जो प्रकाश संश्लेषण से प्रवालों को पोषण और चमकीले रंग प्रदान करते हैं।
  • प्रवाल विरंजन (Coral Bleaching): ग्लोबल वार्मिंग के कारण समुद्री जल का तापमान बढ़ने पर प्रवाल कीट तनाव में आकर जुजैंथिली शैवाल को बाहर निकाल देते हैं। इससे प्रवाल सफेद चूने जैसे हो जाते हैं और पोषण न मिलने पर मर जाते हैं। इसे प्रवाल विरंजन कहते हैं।

४. पशुपालन अर्थव्यवस्था, कृषि एवं ऑस्ट्रेलिया की खनिज संपदा

४.१ डाउन्स घास के मैदान एवं पशुपालन अर्थव्यवस्था

ऑस्ट्रेलिया विश्व में ऊन उत्पादन और निर्यात में प्रथम स्थान पर है। इस पशुपालन उद्योग की रीढ़ पूर्वी उच्चभूमि के पश्चिमी ढलानों और मरे-डार्लिंग द्रोणी में फैले शीतोष्ण घास के मैदान हैं, जिन्हें डाउन्स (Downs) कहा जाता है:

  • अनुकूल प्राकृतिक दशाएं: मध्यम वर्षा (400–700 मिमी), शुष्क खिली धूप तथा मिचेल और फ्लिंडर्स जैसी पौष्टिक घासों की प्रचुरता भेड़ों के लिए अत्यधिक अनुकूल है।
  • विशाल फार्म या स्टेशन (Stations): ऑस्ट्रेलिया में पशुपालन छोटे बाड़ों में नहीं होता; हजारों वर्ग किलोमीटर में तार की बाड़ से घिरे विशालकाय चरागाहों में होता है, जिन्हें स्टेशन कहा जाता है। कुछ स्टेशन तो बेल्जियम जैसे यूरोपीय देशों से भी बड़े हैं (जैसे दक्षिण ऑस्ट्रेलिया का अन्ना क्रीक स्टेशन)!
  • जैकारू एवं जिलारू (Jackaroos and Jillaroos): इन विशाल स्टेशनों पर घोड़ों, मोटरबाइकों और हेलीकॉप्टरों से लाखों भेड़ों और मवेशियों की निगरानी करने वाले कुशल और साहसी कर्मियों में पुरुषों को जैकारू और महिलाओं को जिलारू कहा जाता है।

४.२ मेरिनो भेड़ एवं ऊन उद्योग

पहलू विवरण आर्थिक महत्व
मेरिनो भेड़ (Merino Sheep) मूल रूप से स्पेन की नस्ल; शुष्क वातावरण में भली-भांति जीवित रहती है; इसकी झुर्रीदार त्वचा से अत्यधिक बारीक, मुलायम व घनी ऊन प्राप्त होती है। ऑस्ट्रेलिया की कुल ऊन का 70-80% मेरिनो भेड़ से आता है। परिधान हेतु विश्व की 50% से अधिक महीन ऊन ऑस्ट्रेलिया निर्यात करता है।
ऊन की कतराई (Shearing) वसंत ऋतु में कुशल श्रमिकों का दल विशेष न्यूमेटिक कैंचियों से तीव्र गति से भेड़ों के बाल कतरता है। एक कुशल श्रमिक एक दिन में 200 से अधिक भेड़ों की ऊन बिना उनकी त्वचा को नुकसान पहुंचाए उतार देता है।
ऊन का निर्यात ऊन को छांटकर, ग्रेडिंग कर 200 किग्रा की गांठें (Bales) बनाई जाती हैं और सिडनी, मेलबर्न, फ्रीमेंटल बंदरगाहों से निर्यात किया जाता है। चीन, इटली, भारत, जापान और ब्रिटेन को भारी मात्रा में ऊन बेची जाती है।

४.३ मवेशी पालन: मांस एवं डेयरी उद्योग

  • मांस हेतु गो-पालन (Beef Cattle): क्वींसलैंड, उत्तरी क्षेत्र और पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के उष्णकटिबंधीय सवाना घास के मैदानों में ब्राह्मण और हेयरफोर्ड नस्ल के बैल पाले जाते हैं। प्रशीतित (Frozen) गोमांस निर्यात में ऑस्ट्रेलिया अग्रणी है।
  • डेयरी उद्योग (Dairy Cattle): विक्टोरिया, न्यू साउथ वेल्स और तस्मानिया के ठंडे, नम और हरे-भरे तटीय भागों में जर्सी और होल्स्टीन गायें पाली जाती हैं। मक्खन, पनीर, कंडेंस्ड मिल्क और दुग्ध पाउडर का बड़े पैमाने पर निर्यात होता है।

४.४ मरे-डार्लिंग द्रोणी की समृद्ध कृषि

मरे-डार्लिंग द्रोणी को "ऑस्ट्रेलिया का अन्न भंडार" (Food Bowl of Australia) कहा जाता है, क्योंकि यह देश के कुल कृषि उत्पादन का 40% से अधिक प्रदान करती है:

  • गेहूं की पेटी (Wheat Belt): इस द्रोणी की उपजाऊ मिट्टी में पूर्णतः मशीनीकृत पद्धति से गेहूं की व्यापक खेती की जाती है। ऑस्ट्रेलिया विश्व के प्रमुख गेहूं निर्यातकों में से एक है।
  • फलों के बाग एवं अंगूर की खेती: रिवेरीना और बारोसा घाटी में सिंचाई के माध्यम से संतरे, नींबू, सेब और अंगूर की खेती होती है। यहां निर्मित वाइन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विख्यात है।
  • चावल एवं कपास: मुरमबिजी और नमोई नदियों के जल से गहन सिंचाई द्वारा चावल और कपास की खेती की जाती है।

४.५ ऑस्ट्रेलिया की खनिज संपदा

ऑस्ट्रेलिया का मरुस्थलीय एवं पठारी भूभाग मूल्यवान खनिजों का अथाह भंडार है:

  • स्वर्ण खदानें: 1851 में सोने की खोज के बाद यहां आप्रवासियों का तांता लग गया (Gold Rush)। पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के कालपूर्ली (Kalgoorlie) और कूलगार्डी (Coolgardie) में विश्व प्रसिद्ध सोने की खदानें ("गोल्डन माइल") स्थित हैं।
  • लौह अयस्क: पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया का पिलबारा (Pilbara) क्षेत्र विश्व के उच्चतम ग्रेड के हेमेटाइट लौह अयस्क का भंडार है, जिसका निर्यात पोर्ट हेडलैंड बंदरगाह से होता है।
  • बॉक्साइट एवं कोयला: केप यॉर्क के वेईपा में दुनिया की विशालतम बॉक्साइट खदानें हैं। न्यू साउथ वेल्स और क्वींसलैंड में उच्च कोटि का बिटुमिनस कोयला पाया जाता है।

५. न्यूजीलैंड का भूगोल, कैंटरबरी के मैदान एवं अद्वितीय जैव-विविधता (मार्सुपियल व मोनोट्रीम)

५.१ न्यूजीलैंड का भू-आकृतिक स्वरूप

ऑस्ट्रेलिया से लगभग 1,600 किमी दक्षिण-पूर्व में तस्मान सागर के पार स्थित दो प्रमुख पर्वतीय द्वीपों से बना राष्ट्र न्यूजीलैंड (माओरी भाषा में Aotearoa — "लंबे सफेद बादलों का देश") है। इसके दो मुख्य द्वीप उत्तरी द्वीप (North Island) और दक्षिणी द्वीप (South Island) हैं, जो संकीर्ण कुक जलडमरूमध्य (Cook Strait) द्वारा अलग होते हैं:

द्वीप का नाम भू-आकृतिक एवं भूगर्भीय विशेषताएं प्रमुख चोटियां / प्राकृतिक चमत्कार आर्थिक गतिविधियां
उत्तरी द्वीप (North Island) प्रशांत अग्नि-वलय पर स्थित होने के कारण यहां सक्रिय ज्वालामुखी, गर्म जल के स्रोत और उबलते कीचड़ के कुंड पाए जाते हैं। माउंट रुआपेहू (सक्रिय ज्वालामुखी, 2,797 मी), टाउपो झील (विशाल क्रेटर झील), रोटोरुआ (Rotorua) के प्रसिद्ध गीजर एवं वाइराकेई भू-तापीय विद्युत केंद्र। सघन डेयरी उद्योग, कीवी फल व सेब के बाग, तथा चीड़ के वनों पर आधारित लकड़ी उद्योग।
दक्षिणी द्वीप (South Island) उत्तर से दक्षिण में विस्तृत हिमाच्छादित वलित पर्वतमाला से आच्छादित है, जिसे दक्षिणी आल्प्स (Southern Alps) कहते हैं। दक्षिण-पश्चिम में गहरे फियोर्ड (मिल्फोर्ड साउंड) हैं। माउंट कुक (अओराकी — 3,724 मीटर) — न्यूजीलैंड का सर्वोच्च शिखर; फ्रांज जोसेफ हिमनद। भेड़ पालन (ऊन एवं मांस), जलविद्युत, पर्यटन उद्योग तथा कैंटरबरी के मैदानों में गेहूं की खेती।

५.२ कैंटरबरी के मैदान: न्यूजीलैंड का अन्न भंडार

दक्षिणी द्वीप के पूर्वी भाग में दक्षिणी आल्प्स की तलहटी में फैला विस्तृत जलोढ़ मैदान कैंटरबरी का मैदान (Canterbury Plains) कहलाता है:

  • जलोढ़ निक्षेप: हिमनदों से पोषित वाइमाकारिरी, राका जैसी नदियों द्वारा बहाकर लाई गई गाद और बजरी के जमाव से यह उपजाऊ समतल मैदान बना है।
  • कृषि एवं पशुपालन: यह न्यूजीलैंड का प्रमुख गेहूं, जौ और जई उत्पादक क्षेत्र है। इसके अतिरिक्त कोरिएडेल नस्ल की भेड़ों का पालन और उच्च गुणवत्ता युक्त डेयरी फार्मिंग यहां की जाती है। इसका मुख्य नगर क्राइस्टचर्च (Christchurch) है।

५.३ भौगोलिक अलगाव एवं वैलेस रेखा (Wallace\'s Line)

ओशिनिया का जीव-जगत संसार में सबसे विचित्र और पुरातन है। लगभग 5 करोड़ वर्ष पूर्व गोंडवानालैंड के टूटने पर ऑस्ट्रेलिया एशिया और अंटार्कटिका से पूरी तरह कट गया। आधुनिक जरायुज (Placental) मांसाहारी स्तनधारी (जैसे शेर, चीता, भेड़िया) यहां नहीं पहुंच सके। बाली और लोम्बोक द्वीपों के बीच स्थित समुद्री खाई वैलेस रेखा कहलाती है, जो एशियाई और ऑस्ट्रेलियाई जीवों को अलग करती है। प्राकृतिक शिकारियों के अभाव में यहां प्राचीन स्तनधारियों को बिना किसी खतरे के विकसित होने का अवसर मिला।

५.४ स्तनधारियों का चमत्कार: मार्सुपियल बनाम मोनोट्रीम

स्तनधारी वर्ग जैविक परिभाषा एवं प्रजनन प्रणाली ओशिनिया के स्थानिक उदाहरण प्रमुख अनुकूलन
मार्सुपियल या उप-जरायुज (Marsupials) वे स्तनधारी जो अत्यंत छोटे, अपूर्ण रूप से विकसित बच्चे को जन्म देते हैं। बच्चा मां के पेट पर स्थित थैली (मार्सुपियम) में जाकर स्तन ग्रंथियों से दूध पीकर बड़ा होता है। कंगारू (Kangaroo), वालाबी, कोआला (Koala), वोम्बैट, तस्मानियन डेविल। कंगारू: मरुस्थल में लंबी छलांग लगाने हेतु मजबूत पिछले पैर व पूंछ; कोआला: केवल नीलगिरी के पत्ते खाता है और पेड़ों पर रहता है; वोम्बैट: बिल खोदते समय बच्चे पर मिट्टी न गिरे इसलिए थैली का मुंह पीछे की ओर होता है।
मोनोट्रीम या अंडप्रजक स्तनधारी (Monotremes) पृथ्वी के सबसे प्राचीन जीवित स्तनधारी। ये स्तनधारी होने और बच्चों को दूध पिलाने के बावजूद सरीसृपों की भांति चमड़े जैसे खोल वाले अंडे देते हैं तथा इनमें उत्सर्जन व जनन का एक ही छिद्र (क्लोएका) होता है। डक-बिल्ड प्लैटिपस (Platypus) एवं शॉर्ट-बीक्ड एकिडना (Echidna)। प्लैटिपस: बत्तख जैसी चोंच, जल में तैरने हेतु झिल्लीदार पैर, नर के पिछले पैरों में विषैला कांटा; एकिडना: शरीर पर सेही जैसे कांटे और चींटियां खाने हेतु लंबी चिपचिपी जीभ।

५.५ विशिष्ट पक्षी एवं वनस्पति

  • कीवी (Kiwi): न्यूजीलैंड का राष्ट्रीय पक्षी। यह उड़ने में असमर्थ (Flightless) और रात्रिचर पक्षी है, जिसकी चोंच के अग्रभाग पर नथुने होते हैं।
  • एमू व कैसोवरी (Emu & Cassowary): ऑस्ट्रेलिया के विशालकाय तेज दौड़ने वाले किंतु उड़ने में असमर्थ पक्षी।
  • कूकाबुरा (Kookaburra): ऑस्ट्रेलियाई पक्षी, जो सुबह और शाम को इंसानों के ठहाके मारने जैसी तेज आवाज निकालता है।
  • यूकेलिप्टस या नीलगिरी का पेड़: ऑस्ट्रेलिया का प्रमुख वृक्ष (700 से अधिक प्रजातियां)। इसकी पत्तियों से निकलने वाले तेल की वाष्प से सिडनी के निकट ब्लू माउंटेंस पर्वत पर नीला धुंधला आवरण दिखाई देता है।

महत्वपूर्ण ऐतिहासिक शब्दावली, कालक्रम एवं प्रशासनिक व्यवस्था

आर्टेशियन कुएं का जल-स्थैतिक दाब सिद्धांत
$$h_{piezometric} = z + {P}{ g} > z_{surface} ⇒ H = h_{recharge} - z_{well} > 0 ⇒ स्वतः जल निष्कासन$$
प्रवाल भित्ति कैल्सीभवन एवं विरंजन साम्यावस्था
$$Ca^{2+} + 2HCO_3^- CaCO_3 (कैल्शियम कार्बोनेट) + CO_2 + H_2O$$
ग्रेट डिवाइडिंग रेंज का पर्वतीय वृष्टि-छाया समीकरण
$$P_{पूर्वी तट (प्रशांत)} P_{पश्चिमी आंतरिक}; _{आर्द्र} ≈ 0.5^/100m < _{शुष्क} ≈ 1.0^/100m$$
आयर झील अंतःस्थलीय द्रोणी का जल संतुलन समीकरण
$${dS}{dt} = Q_{क्रीक प्रवाह} + P_{वर्षा} - ≤ft(E_{वाष्पीकरण} + I_{अंतःस्यंदन}) 0 ⇒ नमक की पपड़ी का निर्माण$$
डाउन्स चरागाह की पारिस्थितिक पशु धारण क्षमता
$$Stocking Rate = {A_{चरागाह} × Y_{चारा}}{D_{पशु आवश्यकता}} ≈ 1 - 2 DSE/हेक्टेयर (DSE = Dry Sheep Equivalent)$$
मरे-डार्लिंग द्रोणी जल आबंटन एवं निकास बजट
$$Q_{मुहाना} = Q_{उद्गम} + Q_{सहायक नदियां} - (ET_{वाष्पोत्सर्जन} + सिंचाई निष्कासन) ⇒ मुहाना सूखना व लवणता वृद्धि$$
द्वीपीय जैवभूगोल एवं प्रजाति विकास पृथक्करण (मैकआर्थर-विल्सन मॉडल)
$$S = c A^z; भौगोलिक अलगाव अवधि ≈ 50 × 10^6 वर्ष ⇒ मारसुपियल व मोनोट्रीम का आधिपत्य$$
रोटोरुआ गीजर का भू-तापीय दाब-तापमान समीकरण
$$P(z) = P_{वायुमंडल} + g z ⇒ T_{क्वथनांक}(P) > 100^; P_{कमी} ⇒ वाष्प का तीव्र विस्फोट$$

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
ओशिनिया की परिभाषा दीजिए तथा इसके चार प्रमुख उप-क्षेत्रों के नाम एवं आधार स्पष्ट कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

ओशिनिया की परिभाषा: ओशिनिया प्रशांत एवं हिंद महासागर में फैला पृथ्वी का सबसे छोटा द्वीप महाद्वीप है (क्षेत्रफल लगभग 85 लाख वर्ग किमी), जिसमें ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, पापुआ न्यू गिनी तथा हजारों प्रवाल एवं ज्वालामुखीय द्वीप शामिल हैं।

चार प्रमुख उप-क्षेत्र:

  1. ऑस्ट्रेलेशिया: ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, तस्मानिया और न्यू गिनी का प्राचीन महाद्वीपीय भूभाग (ओशिनिया का 95% क्षेत्रफल)।
  2. मेलानेशिया ("काले द्वीप"): ऑस्ट्रेलिया के उत्तर-पूर्व में गहरे रंग के मूल निवासियों वाले ज्वालामुखीय द्वीप (उदा. फिजी, सोलोमन द्वीप, वानुआतु)।
  3. माइक्रोनेशिया ("छोटे द्वीप"): भूमध्य रेखा के उत्तर में स्थित हजारों छोटे प्रवाल द्वीप व एटोल (उदा. मार्शल द्वीप, गुआम, किरिबाती, नौरू)।
  4. पोलिनेशिया ("अनेक द्वीप"): मध्य व पूर्वी प्रशांत महासागर में फैला विशाल त्रिकोणीय द्वीप समूह (उदा. हवाई, समोआ, टोंगा, ताहिती)।
उदाहरण 2
ऑस्ट्रेलिया की पूर्वी उच्चभूमि और पश्चिमी पठार के बीच तीन प्रमुख भौगोलिक अंतर बताइए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
  1. भूगर्भीय आयु एवं शैल:
  • पूर्वी उच्चभूमि: पैलियोजोइक युग के प्राचीन वलित पर्वत, जो करोड़ों वर्षों के अपरदन से घिसकर पठारों में बदल चुके हैं।
  • पश्चिमी पठार: प्रीकैम्ब्रियन युग की अत्यंत प्राचीन कठोर आग्नेय व कायांतरित चट्टानों (शील्ड) से बना संप्राय मैदान।
  1. स्थलाकृतिक स्वरूप:
  • पूर्वी उच्चभूमि: ग्रेट डिवाइडिंग रेंज के रूप में 3,500 किमी लंबी पर्वत श्रृंखला, जिसमें ऑस्ट्रेलिया का सर्वोच्च शिखर माउंट कोसिउस्को (2,228 मी) स्थित है।
  • पश्चिमी पठार: ऑस्ट्रेलिया के 60% भाग पर फैला समतल मैदान, जिसमें विशाल मरुस्थल (गिब्सन, ग्रेट विक्टोरिया) और उलुरु जैसी एकाश्म चट्टानें हैं।
  1. जलवायु एवं वर्षा:
  • पूर्वी उच्चभूमि: व्यापारिक पवनों के प्रभाव से पूर्वी ढलानों पर भारी वर्षा (1,000–2,000 मिमी)।
  • पश्चिमी पठार: अत्यधिक शुष्क मरुस्थलीय जलवायु (आउटबैक), जहां वार्षिक वर्षा 200 मिमी से कम होती है।
उदाहरण 3
आर्टेशियन कुआं क्या है? इसके निर्माण की आवश्यक भूगर्भीय परिस्थितियां और पशुपालन में इसका महत्व समझाइए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

परिभाषा: प्राकृतिक भूमिगत जल-दाब के कारण जिस नलकूप से बिना किसी पंप या मोटर के पानी स्वतः फव्वारे के रूप में ऊपर निकलता है, उसे आर्टेशियन कुआं कहते हैं।

निर्माण की तीन आवश्यक परिस्थितियां:

  1. अधोवलन (Synclinal) संरचना: चट्टानों की परतें कटोरे या तश्तरी की भांति मुड़ी होनी चाहिए।
  2. दो अपारगम्य परतों के बीच पारगम्य परत: छिद्रयुक्त पारगम्य बलुआ पत्थर (Aquifer) ऊपर और नीचे से ठोस अपारगम्य शैल या चिकनी मिट्टी की परतों के बीच फंसा होना चाहिए।
  3. उच्च वर्षा वाले पर्वतीय क्षेत्र में खुला किनारा: पारगम्य परत के दोनों किनारे पर्वतीय क्षेत्र (ग्रेट डिवाइडिंग रेंज) में अधिक ऊंचाई पर खुले होने चाहिए, जिससे वर्षा जल रिसकर प्रचंड जल-स्थैतिक दाब (Hydrostatic Head) उत्पन्न कर सके।

पशुपालन में महत्व: ऑस्ट्रेलिया की शुष्क आंतरिक निम्नभूमि में लाखों मेरिनो भेड़ों और मवेशियों को पीने का पानी इसी कुएं से मिलता है, जो वहां के ऊन और मांस उद्योग का मुख्य आधार है।

उदाहरण 4
ग्रेट बैरियर रीफ कहां स्थित है और इसका निर्माण कैसे हुआ है? "प्रवाल विरंजन" (Coral Bleaching) क्या है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
स्थिति: ऑस्ट्रेलिया के उत्तर-पूर्वी तट पर क्वींसलैंड के निकट कोरल सागर में 2,300 किमी की लंबाई में ग्रेट बैरियर रीफ स्थित है। निर्माण: गर्म (20°–28°C), उथले और स्वच्छ समुद्र में प्रवाल कीट (Coral Polyp) नामक सूक्ष्म जीव चूना स्रावित कर अपने चारों ओर कंकाल बनाते हैं। करोड़ों वर्षों में अरबों मृत प्रवालों के कंकालों के जमाव से यह विशाल भित्ति बनी है। इनके शरीर में जुजैंथिली नामक रंगीन सहजीवी शैवाल रहते हैं, जो इन्हें पोषण व रंग देते हैं। प्रवाल विरंजन (Coral Bleaching): ग्लोबल वार्मिंग के कारण समुद्र का तापमान बढ़ने पर प्रवाल कीट तनाव में आकर अपने रंगीन जुजैंथिली शैवाल को निष्कासित कर देते हैं। शैवाल के बिना प्रवाल कीट का सफेद चूने का कंकाल दिखने लगता है और भोजन के अभाव में वे भूख से मरने लगते हैं। इसे प्रवाल विरंजन कहते हैं।
उदाहरण 5
मरे-डार्लिंग नदी तंत्र को "ऑस्ट्रेलिया का अन्न भंडार" क्यों कहा जाता है? इसके प्रमुख कृषि उत्पादों का उल्लेख कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

अन्न भंडार कहने का कारण: यह नदी तंत्र 10 लाख वर्ग किमी में फैला है और ऑस्ट्रेलिया के कुल कृषि उत्पादन का 40% से अधिक हिस्सा प्रदान करता है। देश के अधिकांश खाद्यान्न, फल और डेयरी उत्पाद इसी घाटी में पैदा होते हैं।

प्रमुख कृषि उत्पाद:

  1. गेहूं की पेटी: द्रोणी की उपजाऊ मिट्टी में विशाल मशीनीकृत फार्मों पर भारी मात्रा में गेहूं का उत्पादन होता है, जिसका बड़ा हिस्सा निर्यात किया जाता है।
  2. फलों के बाग एवं वाइन उद्योग: रिवेरीना और बारोसा घाटी में सिंचाई से अंगूर, संतरे, सेब और जैतून की खेती होती है और विश्व प्रसिद्ध वाइन तैयार की जाती है।
  3. चावल एवं कपास: मुरमबिजी सिंचाई क्षेत्र में बांधों के जल से चावल और कपास की सघन खेती की जाती है।
  4. पशुपालन: डाउन्स के चरागाहों में लाखों मेरिनो भेड़ें पाली जाती हैं।
उदाहरण 6
ऑस्ट्रेलिया के मेरिनो भेड़ पालन उद्योग का वर्णन कीजिए। "स्टेशन" और "जैकारू" किन्हें कहते हैं?
विस्तृत समाधान / उत्तर:
मेरिनो भेड़ पालन उद्योग: ऑस्ट्रेलिया विश्व में महीन परिधान ऊन का सबसे बड़ा निर्यातक है। डाउन्स शीतोष्ण घास के मैदानों में स्पेनिश मूल की मेरिनो भेड़ें पाली जाती हैं। इनकी झुर्रीदार त्वचा से अत्यंत घनी, बारीक और उच्च कोटि की ऊन मिलती है। वसंत ऋतु में मशीनों से तेजी से बाल कतरकर विश्व भर में भेजे जाते हैं। स्टेशन (Stations): ऑस्ट्रेलिया में हजारों वर्ग किलोमीटर में फैले विशाल, तार की बाड़ से घिरे खुले चरागाहों को "स्टेशन" कहा जाता है, जहां लाखों मवेशी और भेड़ें स्वतंत्र रूप से चरते हैं। जैकारू (Jackaroos): इन विशालकाय स्टेशनों पर घोड़ों, मोटरसाइकिलों अथवा हेलीकॉप्टरों से मवेशियों की निगरानी करने वाले, बाड़ की मरम्मत करने वाले और ऊन कतराई का प्रबंधन करने वाले कुशल पुरुषों को "जैकारू" तथा महिलाओं को "जिलारू" कहा जाता है।
उदाहरण 7
न्यूजीलैंड के उत्तरी द्वीप और दक्षिणी द्वीप के भू-आकृतिक अंतरों की तुलना कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:
  1. उत्तरी द्वीप (North Island):
  • ज्वालामुखीय एवं भू-तापीय बनावट: यह द्वीप मुख्य रूप से सक्रिय ज्वालामुखियों (माउंट रुआपेहू, 2,797 मी) और क्रेटर झीलों (टाउपो झील) से युक्त है।
  • रोटोरुआ के गीजर: रोटोरुआ में जमीन से गर्म पानी व भाप के फव्वारे फूटते हैं तथा उबलते कीचड़ के कुंड पाए जाते हैं। यहां भू-तापीय ऊर्जा से बिजली बनाई जाती है।
  1. दक्षिणी द्वीप (South Island):
  • दक्षिणी आल्प्स पर्वतमाला: यह द्वीप ऊंचे हिमाच्छादित वलित पर्वतों (दक्षिणी आल्प्स) से आच्छादित है, जिसका सर्वोच्च शिखर माउंट कुक (3,724 मी) है।
  • हिमनद एवं फियोर्ड: यहां फ्रांज जोसेफ जैसे विशाल अल्पाइन हिमनद और दक्षिण-पश्चिम में मिल्फोर्ड साउंड जैसे गहरे समुद्री फियोर्ड स्थित हैं।
  • कैंटरबरी के मैदान: पूर्वी भाग में नदियों की लाई गाद से बना विशाल समतल कैंटरबरी का मैदान स्थित है, जो देश का प्रमुख गेहूं उत्पादक क्षेत्र है।
उदाहरण 8
ओशिनिया के जीव-जगत की विशिष्टता का कारण बताइए। मार्सुपियल और मोनोट्रीम जीवों में अंतर सोदाहरण स्पष्ट कीजिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

विशिष्टता का कारण: लगभग 5 करोड़ वर्ष पूर्व ऑस्ट्रेलिया गोंडवानालैंड से टूटकर अन्य महाद्वीपों से पूरी तरह अलग हो गया। वैलेस रेखा के पार समुद्र होने से उन्नत मांसाहारी शिकारी (जैसे शेर, बाघ) यहां नहीं पहुंच पाए। अतः आदिम स्तनधारी जीवों को बिना किसी प्राकृतिक खतरे के स्वतंत्र रूप से विकसित होने का अवसर मिला।

मार्सुपियल और मोनोट्रीम में अंतर:

  1. मार्सुपियल (उप-जरायुज):
  • ये अविकसित, अत्यंत छोटे बच्चे को जन्म देते हैं।
  • बच्चा मां के पेट पर बनी थैली (मार्सुपियम) में रहकर स्तनपान करता हुआ बड़ा होता है।
  • उदाहरण: कंगारू (Kangaroo) और कोआला (Koala)।
  1. मोनोट्रीम (अंडप्रजक स्तनधारी):
  • ये दुनिया के सबसे प्राचीन स्तनधारी हैं, जो स्तनधारी होने के बावजूद बच्चे पैदा करने के स्थान पर सरीसृपों की तरह अंडे देते हैं।
  • इनमें उत्सर्जन व प्रजनन का एक ही साझा छिद्र (क्लोएका) होता है तथा मां अंडों से निकले बच्चों को दूध पिलाती है।
  • उदाहरण: डक-बिल्ड प्लैटिपस (Platypus) और एकिडना (Echidna)।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

एक देश को पूरे महाद्वीप का पर्याय समझ लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

ओशिनिया समग्र महाद्वीप है, जिसमें ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, फिजी, समोआ जैसे अनेक संप्रभु देश और हजारों द्वीप शामिल हैं; ऑस्ट्रेलिया ओशिनिया का एक प्रमुख देश है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

सामान्य ट्यूबवेल की तरह आर्टेशियन कुएं को भी मोटर चालित मान लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

आर्टेशियन कुएं में किसी पंप की जरूरत नहीं होती; भूमिगत प्राकृतिक जल-दाब (Hydrostatic Head) से पानी स्वतः फव्वारे की तरह बाहर निकलता है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

सभी प्रमुख पर्वतमालाओं को नवीन वलित पर्वत मान लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

ग्रेट डिवाइडिंग रेंज एक अत्यंत प्राचीन और घिसी हुई पर्वतमाला है, जो अधिकांशतः पठारों और पहाड़ियों के रूप में है; मुख्य ऑस्ट्रेलिया का सर्वोच्च शिखर माउंट कोसिउस्को केवल 2,228 मीटर ऊंचा है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

बाह्य विचित्र संरचना देखकर स्तनधारी वर्ग के मूल लक्षणों को भूल जाना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

प्लैटिपस एक सच्चा स्तनधारी जीव है, क्योंकि इसके शरीर पर बाल होते हैं, यह समतापी है और अंडों से निकले बच्चों को अपनी स्तन ग्रंथियों से दूध पिलाता है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

मानचित्र पर नीले रंग का जलाशय देखकर उसे स्थायी मीठी झील समझ लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

आयर झील समुद्र तल से 15 मीटर नीचे स्थित एक सूखी, खारी अंतःस्थलीय नमक की पपड़ी है, जो दशकों में कभी-कभार वर्षा होने पर ही भरती है और फिर सूख जाती है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

ताहिती या फिजी की उष्णकटिबंधीय छवि को न्यूजीलैंड पर लागू कर देना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

न्यूजीलैंड एक शीतोष्ण पर्वतीय देश है; इसके दक्षिणी द्वीप में विशाल हिमाच्छादित दक्षिणी आल्प्स पर्वत और हिमनद पाए जाते हैं।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

पत्थर जैसी कठोर बनावट और स्थिर रहने के कारण प्रवाल को अजीव मान लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

प्रवाल कोई पत्थर या वनस्पति नहीं हैं; वे सिलेंट्रेटा (Cnidaria) संघ के "प्रवाल कीट" (Coral Polyp) नामक सूक्ष्म मांसाहारी समुद्री जीव हैं, जो अपने चारों ओर चूने का सुरक्षात्मक आवरण बनाते हैं।

ओशिनिया महाद्वीप — भौगोलिक एवं भौतिक विशेषताओं की समग्र रूपरेखा

ओशिनिया महाद्वीप — भौगोलिक एवं भौतिक विशेषताओं की समग्र रूपरेखा १. ओशिनिया के चार प्रमुख भौगोलिक उप-क्षेत्र ऑस्ट्रेलेशिया: ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, तस्मानिया, पापुआ न्यू गिनी मेलानेशिया ('काले द्वीप'): फिजी, सोलोमन द्वीप, वानुअतु, न्यू कैलेडोनिया माइक्रोनेशिया ('लघु द्वीप'): मार्शल द्वीप, किरिबाती, गुआम, नौरू, पलाऊ पोलिनेशिया ('अनेक द्वीप'): हवाई, समोआ, टोंगा, तुवालु, कुक द्वीप विशेषता: प्रशांत और हिंद महासागर से घिरा विश्व का लघुतम महाद्वीप २. ऑस्ट्रेलिया के भू-आकृतिक विभाग पूर्वी उच्चभूमि: ग्रेट डिवाइडिंग रेंज, माउंट कोसिउस्को (2,228 मीटर) मध्यवर्ती निम्नभूमि: ग्रेट आर्टेशियन बेसिन, आयर झील (-15 मीटर गर्त) पश्चिमी पठार (आउटबैक): गिब्सन, ग्रेट सैंडी, विक्टोरिया मरुस्थल उलुरु (आयरेस रॉक): लाल बलुआ पत्थर की विशाल पवित्र एकाश्म चट्टान तटीय मैदान: पूर्व एवं दक्षिण-पूर्व के उपजाऊ कृषि एवं औद्योगिक केंद्र ३. जल संसाधन, ग्रेट बैरियर रीफ एवं आर्टेशियन कुएं मरे-डार्लिंग तंत्र: ऑस्ट्रेलिया का प्रमुख नदी तंत्र एवं अन्न भंडार ग्रेट बैरियर रीफ: क्वींसलैंड तट पर 2,300 किमी लंबी प्रवाल भित्ति आर्टेशियन कुआं: प्राकृतिक भूजल दबाव से स्वतः ऊपर फूटता जल अंतःस्थ नदियां (क्रीक): शुष्क ऋतु में सूख जाने वाली मौसमी नदियां पारिस्थितिक संकट: समुद्र तापन व प्रदूषण से प्रवाल विरंजन (ब्लीचिंग) ४. पशुपालन अर्थव्यवस्था, न्यूजीलैंड एवं विशिष्ट जैवविविधता डाउन्स घास व ऊन उद्योग: मेरिनो भेड़ पालन, जैकारू श्रमिक व फार्म न्यूजीलैंड: उत्तरी द्वीप (गीजर/ज्वालामुखी) व दक्षिणी द्वीप (दक्षिणी आल्प्स) कैंटरबरी के मैदान: न्यूजीलैंड का उपजाऊ गेहूं व डेयरी उद्योग केंद्र अद्वितीय वन्यजीव: कंगारू, कोआला, प्लैटिपस, एकिडना, कीवी पक्षी माउंट कुक (अओराकी): 3,724 मी ऊंचा दक्षिणी आल्प्स का सर्वोच्च शिखर

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
ओशिनिया का स्वरूप: पृथ्वी का लघुतम महाद्वीप (क्षेत्रफल लगभग 85 लाख वर्ग किमी), जिसमें ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, पापुआ न्यू गिनी और हजारों द्वीप शामिल हैं; चार प्रमुख क्षेत्रों में विभाजित: ऑस्ट्रेलेशिया, मेलानेशिया, माइक्रोनेशिया और पोलिनेशिया।
मुख्य बिंदु 2
ऑस्ट्रेलिया के चार भू-आकृतिक विभाग: पूर्वी उच्चभूमि (ग्रेट डिवाइडिंग रेंज व सर्वोच्च शिखर माउंट कोसिउस्को 2,228 मी), मध्यवर्ती निम्नभूमि (आयर झील -15 मी निम्नतम गर्त), पश्चिमी पठार (विशाल शुष्क आउटबैक व उलुरु लाल बलुआ पत्थर एकाश्म) तथा संकीर्ण तटीय मैदान।
मुख्य बिंदु 3
मरे-डार्लिंग नदी तंत्र: ऑस्ट्रेलिया का प्रमुख नदी तंत्र (संयुक्त लंबाई 3,672 किमी), जो स्नोई पर्वतों से निकलकर देश के दक्षिण-पूर्वी भाग को सींचता हुआ एनकाउंटर की खाड़ी में हिंद महासागर में गिरता है।
मुख्य बिंदु 4
ग्रेट आर्टेशियन बेसिन: विश्व का विशालतम अधोवलन भूमिगत जल बेसिन (17 लाख वर्ग किमी); दो अपारगम्य परतों के बीच फंसी पारगम्य परत के प्राकृतिक जल-स्थैतिक दाब से बिना पंप के पानी स्वतः फव्वारे की भांति निकलता है।
मुख्य बिंदु 5
ग्रेट बैरियर रीफ: क्वींसलैंड तट पर कोरल सागर में 2,300 किमी लंबी विश्व की विशालतम जीवित प्रवाल भित्ति; प्रवाल कीटों और जुजैंथिली शैवाल की सहजीविता से निर्मित; समुद्र तापन से प्रवाल विरंजन संकट का सामना कर रही है।
मुख्य बिंदु 6
पशुपालन अर्थव्यवस्था एवं मेरिनो ऊन: शीतोष्ण डाउन्स घास के मैदानों में मेरिनो भेड़ों का पालन; हजारों वर्ग किमी में फैले स्टेशनों पर जैकारू श्रमिकों द्वारा प्रबंधन; ऑस्ट्रेलिया विश्व में महीन ऊन उत्पादन और निर्यात में प्रथम।
मुख्य बिंदु 7
न्यूजीलैंड की भू-आकृति: उत्तरी द्वीप में सक्रिय ज्वालामुखी, टाउपो झील व रोटोरुआ के गीजर; दक्षिणी द्वीप में हिमाच्छादित दक्षिणी आल्प्स (माउंट कुक, 3,724 मी), हिमनद तथा उपजाऊ कैंटरबरी का अन्न उत्पादक मैदान।
मुख्य बिंदु 8
अद्वितीय जैव-विविधता एवं विकास: 5 करोड़ वर्षों के भौगोलिक अलगाव व वैलेस रेखा के कारण यहां विकसित हुए अविकसित बच्चे को थैली में पालने वाले मारसुपियल (कंगारू, कोआला) और अंडे देने वाले स्तनधारी मोनोट्रीम (प्लैटिपस, एकिडना) तथा उड़ने में असमर्थ कीवी पक्षी।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
ओशिनिया के चार प्रमुख भौगोलिक उप-क्षेत्रों के नाम लिखिए तथा प्रत्येक के दो-दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: ऑस्ट्रेलेशिया (ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड), मेलानेशिया (फिजी, पापुआ न्यू गिनी), माइक्रोनेशिया (मार्शल द्वीप, गुआम) तथा पोलिनेशिया (हवाई, समोआ)।
2
आर्टेशियन कुआं क्या है और इससे बिना किसी पंप के पानी फव्वारे की तरह बाहर क्यों निकलता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: अधोवलन संरचना में दो अपारगम्य परतों के बीच फंसी पारगम्य परत के प्रचंड प्राकृतिक जल-स्थैतिक दाब के कारण पानी बिना पंप के स्वतः बाहर निकलता है।
3
मरे-डार्लिंग नदी तंत्र के मार्ग का वर्णन कीजिए और ऑस्ट्रेलियाई अर्थव्यवस्था में इसका महत्व स्पष्ट कीजिए।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: मार्ग: मरे नदी ऑस्ट्रेलियाई आल्प्स के स्नोई पर्वत से निकलकर 2,508 किमी बहती है। इसमें उत्तर से आने वाली डार्लिंग नदी (1,472 किमी) और मुरमबिजी नदी मिलती हैं। यह संयुक्त नदी तंत्र 3,672 किमी बहकर एनकाउंटर की खाड़ी में हिंद महासागर में विलीन होता है। अर्थव्यवस्था में महत्व: 1. इस द्रोणी की उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी में आधुनिक गेहूं की पेटी स्थित है जो भारी मात्रा में गेहूं निर्यात करती है; 2. रिवेरीना और बारोसा घाटी में सिंचाई द्वारा अंगूर, संतरे और फल उत्पादन से विश्व प्रसिद्ध वाइन उद्योग फला-फूला है; 3. डाउन्स के चरागाहों में लाखों मेरिनो भेड़ों और मवेशियों के पीने के पानी का यह मुख्य स्रोत है।
4
ग्रेट बैरियर रीफ का पारिस्थितिक महत्व क्या है और "प्रवाल विरंजन" (Coral Bleaching) क्यों हो रहा है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: यह विश्व की विशालतम जीवित प्रवाल भित्ति व समुद्री जैव-विविधता का आश्रय है। ग्लोबल वार्मिंग से समुद्र का तापमान बढ़ने पर प्रवाल अपने सहजीवी शैवाल को निकालकर सफेद होकर मर रहे हैं।
5
न्यूजीलैंड के उत्तरी और दक्षिणी द्वीप की भू-आकृति की तुलना कीजिए। कैंटरबरी के मैदान का परिचय दीजिए।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: उत्तरी द्वीप ज्वालामुखी व गीजर के लिए प्रसिद्ध है; दक्षिणी द्वीप दक्षिणी आल्प्स पर्वत व कैंटरबरी के उपजाऊ मैदान के लिए जाना जाता है।
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कक्षा 8 Social Science के सभी अध्याय

अध्याय 1: Concept of History अध्याय 2: Rise of Regional Powers अध्याय 3: Establishment of Colonial Authority अध्याय 4: औपनिवेशिक अर्थव्यवस्था का स्वरूप अध्याय 5: औपनिवेशिक शासन के प्रति प्रतिक्रिया: सहयोग और विद्रोह अध्याय 6: राष्ट्रीयता का प्रारंभिक विकास अध्याय 7: भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के आदर्श और विकास अध्याय 8: सांप्रदायिकता से विभाजन अध्याय 9: भारतीय संविधान: लोकतांत्रिक ढांचा और नागरिकों के अधिकार अध्याय 10: पृथ्वी की आंतरिक संरचना अध्याय 11: अस्थिर पृथ्वी अध्याय 12: शैल (चट्टानें) अध्याय 13: वायुदाब पेटियाँ और पवन संचार अध्याय 14: बादल और वर्षा अध्याय 15: जलवायु प्रदेश अध्याय 16: मानव गतिविधियाँ एवं पर्यावरणीय अवनयन अध्याय 17: भारत के कुछ पड़ोसी देश और उनके साथ संबंध अध्याय 18: उत्तर अमेरिका महाद्वीप अध्याय 19: दक्षिण अमेरिका महाद्वीप अध्याय 20: ओशिनिया महाद्वीप

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