१.१ भौगोलिक स्थिति, विस्तार एवं महाद्वीपीय स्वरूप
पृथ्वी के सात महाद्वीपों में स्थलीय क्षेत्रफल की दृष्टि से ओशिनिया (Oceania) सबसे छोटा महाद्वीप है। इसका कुल स्थलीय क्षेत्रफल लगभग 85 लाख वर्ग किलोमीटर (8.52 मिलियन वर्ग किमी) है। ओशिनिया मुख्य रूप से दक्षिणी एवं पूर्वी गोलार्ध में स्थित है। इसके उत्तर एवं पूर्व में प्रशांत महासागर, पश्चिम एवं दक्षिण में हिंद महासागर, तथा सुदूर दक्षिण में दक्षिणी महासागर विस्तृत है।
अन्य महाद्वीपों की भांति ओशिनिया कोई एक निरंतर भूभाग नहीं है; यह ऑस्ट्रेलिया मुख्य भूमि, न्यूजीलैंड के दो बड़े द्वीपों, तस्मानिया, पापुआ न्यू गिनी और मध्य व दक्षिणी प्रशांत महासागर में फैले लगभग 10,000 छोटे-बड़े प्रवाल एवं ज्वालामुखीय द्वीपों का एक अनूठा द्वीप महाद्वीप है।
| भौगोलिक पैरामीटर | मान / स्थिति | भौगोलिक महत्व |
|---|---|---|
| अक्षांशीय विस्तार | लगभग 28° उत्तरी अक्षांश (मिडवे एटोल) से 47° दक्षिणी अक्षांश (स्टीवर्ट द्वीप, न्यूजीलैंड) | विषुवतीय, उष्णकटिबंधीय, उपोष्ण और शीतोष्ण कटिबंधों का विस्तृत फैलाव। |
| देशांतरीय विस्तार | लगभग 113° पूर्वी देशांतर (स्टीप पॉइंट, ऑस्ट्रेलिया) से 130° पश्चिमी देशांतर (पिटकेयर्न) | 180° देशांतर और अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा (IDL) इसी महासागर से गुजरती है। |
| कुल क्षेत्रफल | लगभग 85.2 लाख वर्ग किमी (ऑस्ट्रेलिया अकेले लगभग 76.9 लाख वर्ग किमी) | समग्र महाद्वीप का लगभग 90% भूभाग अकेले ऑस्ट्रेलिया राष्ट्र के पास है। |
| सीमावर्ती जलराशियां | प्रशांत महासागर, हिंद महासागर, कोरल सागर, तस्मान सागर, तिमोर सागर | लगभग 5 करोड़ वर्षों से अन्य महाद्वीपों से पूर्णतः कटा हुआ और पृथक रहा है। |
१.२ ओशिनिया के चार प्रमुख भौगोलिक उप-क्षेत्र
भौगोलिक स्थिति, भूगर्भीय बनावट और मूल निवासियों की प्रजातीय विशेषताओं के आधार पर ओशिनिया को चार प्रमुख क्षेत्रों में वर्गीकृत किया गया है:
| उप-क्षेत्र का नाम | नाम की व्युत्पत्ति | प्रमुख द्वीप एवं राष्ट्र | भौगोलिक एवं भूगर्भीय लक्षण |
|---|---|---|---|
| १. ऑस्ट्रेलेशिया (Australasia) | "एशिया के दक्षिण में स्थित" (लैटिन australis = दक्षिण) | ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, तस्मानिया और न्यू गिनी (पापुआ न्यू गिनी सहित)। | प्राचीन गोंडवानालैंड के प्राचीन महाद्वीपीय खंड; ओशिनिया के कुल भूभाग और जनसंख्या का 95% से अधिक हिस्सा समाहित करता है। |
| २. मेलानेशिया (Melanesia) | "काले लोगों के द्वीप" (ग्रीक melas = काला, nesos = द्वीप; गहरे रंग के मूल निवासियों के आधार पर) | पापुआ न्यू गिनी, सोलोमन द्वीप, वानुआतु, फिजी, न्यू कैलेडोनिया। | ऑस्ट्रेलिया के उत्तर-पूर्व में स्थित; विवर्तनिक प्लेट सीमाओं पर स्थित ऊंचे ज्वालामुखीय द्वीप और घने उष्णकटिबंधीय वर्षावन। |
| ३. माइक्रोनेशिया (Micronesia) | "छोटे द्वीप" (ग्रीक mikros = छोटा, nesos = द्वीप) | मार्शल द्वीप, किरिबाती, गुआम, नौरू, पलाऊ, मारियाना द्वीप समूह। | भूमध्य रेखा के उत्तर में पश्चिमी प्रशांत में फैले हजारों छोटे प्रवाल एटोल और चूना पत्थर के द्वीप; समुद्र स्तर वृद्धि से अत्यधिक संवेदनशील। |
| ४. पोलिनेशिया (Polynesia) | "अनेक द्वीप" (ग्रीक polys = अनेक, nesos = द्वीप) | हवाई द्वीप (यूएसए), समोआ, टोंगा, तुवालु, कुक द्वीप, फ्रेंच पोलिनेशिया (ताहिती), ईस्टर द्वीप। | मध्य एवं पूर्वी प्रशांत महासागर में फैला एक विशाल त्रिकोण (उत्तर में हवाई, दक्षिण-पश्चिम में न्यूजीलैंड और दक्षिण-पूर्व में ईस्टर द्वीप)। अधिकांशतः ज्वालामुखीय व प्रवाल द्वीप। |
१.३ ओशिनिया की खोज का इतिहास
यूरोपीय नाविकों के आगमन से हजारों वर्ष पूर्व ऑस्ट्रेलिया के मूल निवासी (Aborigines) और पोलिनेशिया के कुशल नाविक तारों और लहरों की दिशा देखकर प्रशांत महासागर में लंबी यात्राएं करते थे:
- विलेम जांस्ज़ून (1606): डच नाविक, जो ऑस्ट्रेलियाई मुख्य भूमि (कारपेंटारिया की खाड़ी) पर कदम रखने वाले प्रथम दर्ज यूरोपीय थे।
- एबेल तस्मान (1642): डच खोजी नाविक, जिन्होंने तस्मानिया (तत्कालीन नाम वैन डायमेंस लैंड) और न्यूजीलैंड की खोज की। उनके नाम पर तस्मानिया और तस्मान सागर का नामकरण हुआ।
- कैप्टन जेम्स कुक (1770): ब्रिटिश नाविक जिन्होंने अपने जहाज एचएमएस एंडेवर से ऑस्ट्रेलिया के पूर्वी तट का विस्तृत सर्वेक्षण किया और इसे न्यू साउथ वेल्स नाम दिया। उन्होंने बॉटनी बे पर लंगर डाला और न्यूजीलैंड का मानचित्र बनाया।