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WBB • कक्षा 8 • Social Science • अध्याय 17
अनुमानित समय: 50 मिनट
प्रगति: अध्ययनरत

भारत के कुछ पड़ोसी देश और उनके साथ संबंध

पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (WBBSE) कक्षा 8 भूगोल एवं पर्यावरण पाठ्यक्रम "हमारी पृथ्वी" (Our Earth) के आठवें अध्याय "भारत के कुछ पड़ोसी देश और उनके साथ संबंध" (Some Neighbouring Countries of India and its Relationship with Them) की संपूर्ण एवं प्रामाणिक अध्ययन सामग्री। दक्षिण एशिया के केंद्र में स्थित भारत एक विशाल भौगोलिक व भू-राजनीतिक शक्ति है। भारत और उसके समीपवर्ती देश मिलकर "भारतीय उपमहाद्वीप" (Indian Subcontinent) का निर्माण करते हैं। उत्तर में विशाल हिमालय व काराकोरम, उत्तर-पश्चिम में हिंदूकुश व सुलेमान-किरथार पर्वतमाला, पूर्व में अराकान योमा तथा दक्षिण में हिंद महासागर इसे शेष एशिया से एक प्राकृतिक दुर्ग की भांति अलग करते हैं। भारत की कुल 15,106.7 किमी लंबी अंतरराष्ट्रीय स्थलीय सीमा सात संप्रभु देशों से जुड़ी है—बांग्लादेश (सर्वाधिक 4,096.7 किमी), चीन, पाकिस्तान, नेपाल, म्यांमार, भूटान और अफगानिस्तान (सबसे छोटी 106 किमी)। इसके अतिरिक्त दक्षिण में पाक जलडमरूमध्य से पृथक श्रीलंका और प्रवाल द्वीपों से बना मालदीव इसके प्रमुख समुद्री पड़ोसी हैं। नेपाल के बर्फीले शिखर माउंट एवरेस्ट (सगरमाथा 8,848.86 मी) से लेकर भूटान के सकल राष्ट्रीय प्रसन्नता व जलविद्युत ('सफेद सोना'), बांग्लादेश के विश्व के सबसे बड़े डेल्टा व जूट ('सुनहरा रेशा'), म्यांमार की जीवनरेखा इरावती नदी व सागौन की लकड़ी, पाकिस्तान के विशाल सिंधु नहर तंत्र ('नहरों का देश'), श्रीलंका की सीलोन चाय व दालचीनी और मालदीव के एटोल व ब्लू इकोनॉमी तक—सभी देशों की भौतिक बनावट, अर्थव्यवस्था, संसाधन और भारत के साथ ऐतिहासिक व द्विपक्षीय संबंधों का विस्तृत विश्लेषण यहाँ प्रस्तुत है। यह अध्याय 5 उच्च-स्तरीय मॉड्यूल, 25 क्लासरूम उपखंड, उत्तरदायी वेक्टर एसवीजी (SVG) संकल्पना मानचित्र, 8 वैज्ञानिक/भौगोलिक सूत्र, 8 हल किए गए मानक प्रश्न, 7 परीक्षक जाल व भ्रांतियां, 8 मुख्य सारांश बिंदु, 8 निष्कर्ष, 5 स्व-मूल्यांकन प्रश्न और 5 सीबीटी डायग्नोस्टिक बहुविकल्पीय प्रश्नों से सुसज्जित है।

🌏 पड़ोसी देशों की यात्रा: हिमालय के हिमशिखरों से हिंद महासागर के प्रवाल द्वीपों तक!

क्या आप जानते हैं कि भारत की सबसे लंबी अंतरराष्ट्रीय थल सीमा विशाल चीन या पाकिस्तान के साथ नहीं, बल्कि बांग्लादेश के साथ है—जो नदियों, दलदलों और खेतों से होकर 4,096.7 किलोमीटर तक फैली है?

या क्या आप जानते हैं कि हमारे उत्तर में स्थित एक नन्हा हिमालयी देश (भूटान) अपनी प्रगति को भौतिक जीडीपी से नहीं बल्कि "सकल राष्ट्रीय प्रसन्नता" (Gross National Happiness) से मापता है और अपने संविधान में कम से कम 60% वन क्षेत्र रखना अनिवार्य कर चुका है?

नेपाल के माउंट एवरेस्ट व पोखरा घाटी, पाकिस्तान की सिंधु नदी के नहरों के जाल, म्यांमार की इरावती नदी व रक्त-लाल रूबी, श्रीलंका की खुशबूदार दालचीनी व सीलोन चाय, और मालदीव के मनोहारी मूंगा एटोल से गुजरते हुए आइए शुरू करते हैं एक ज्ञानवर्धक भौगोलिक यात्रा—भारत के पड़ोसी देश और उनके साथ संबंध में!

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (WBBSE) कक्षा 8 भूगोल एवं पर्यावरण पाठ्यक्रम "हमारी पृथ्वी" (Our Earth) के आठवें अध्याय "भारत के कुछ पड़ोसी देश और उनके साथ संबंध" (Some Neighbouring Countries of India and its Relationship with Them) की संपूर्ण एवं प्रामाणिक अध्ययन सामग्री। दक्षिण एशिया के केंद्र में स्थित भारत एक विशाल भौगोलिक व भू-राजनीतिक शक्ति है। भारत और उसके समीपवर्ती देश मिलकर "भारतीय उपमहाद्वीप" (Indian Subcontinent) का निर्माण करते हैं। उत्तर में विशाल हिमालय व काराकोरम, उत्तर-पश्चिम में हिंदूकुश व सुलेमान-किरथार पर्वतमाला, पूर्व में अराकान योमा तथा दक्षिण में हिंद महासागर इसे शेष एशिया से एक प्राकृतिक दुर्ग की भांति अलग करते हैं। भारत की कुल 15,106.7 किमी लंबी अंतरराष्ट्रीय स्थलीय सीमा सात संप्रभु देशों से जुड़ी है—बांग्लादेश (सर्वाधिक 4,096.7 किमी), चीन, पाकिस्तान, नेपाल, म्यांमार, भूटान और अफगानिस्तान (सबसे छोटी 106 किमी)। इसके अतिरिक्त दक्षिण में पाक जलडमरूमध्य से पृथक श्रीलंका और प्रवाल द्वीपों से बना मालदीव इसके प्रमुख समुद्री पड़ोसी हैं। नेपाल के बर्फीले शिखर माउंट एवरेस्ट (सगरमाथा 8,848.86 मी) से लेकर भूटान के सकल राष्ट्रीय प्रसन्नता व जलविद्युत ('सफेद सोना'), बांग्लादेश के विश्व के सबसे बड़े डेल्टा व जूट ('सुनहरा रेशा'), म्यांमार की जीवनरेखा इरावती नदी व सागौन की लकड़ी, पाकिस्तान के विशाल सिंधु नहर तंत्र ('नहरों का देश'), श्रीलंका की सीलोन चाय व दालचीनी और मालदीव के एटोल व ब्लू इकोनॉमी तक—सभी देशों की भौतिक बनावट, अर्थव्यवस्था, संसाधन और भारत के साथ ऐतिहासिक व द्विपक्षीय संबंधों का विस्तृत विश्लेषण यहाँ प्रस्तुत है। यह अध्याय 5 उच्च-स्तरीय मॉड्यूल, 25 क्लासरूम उपखंड, उत्तरदायी वेक्टर एसवीजी (SVG) संकल्पना मानचित्र, 8 वैज्ञानिक/भौगोलिक सूत्र, 8 हल किए गए मानक प्रश्न, 7 परीक्षक जाल व भ्रांतियां, 8 मुख्य सारांश बिंदु, 8 निष्कर्ष, 5 स्व-मूल्यांकन प्रश्न और 5 सीबीटी डायग्नोस्टिक बहुविकल्पीय प्रश्नों से सुसज्जित है।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • पड़ोसी देश, अंतरराष्ट्रीय थल सीमा, भू-आवेष्ठित राज्य (Landlocked Country) और द्वीपीय देश की बुनियादी समझ।
  • दक्षिण एशिया के प्रमुख भू-आकृतिक लक्षण: हिमालय पर्वतमाला, सिंधु-गंगा-ब्रह्मपुत्र का मैदान और हिंद महासागर।
  • क्षेत्र की प्रमुख नदियों की जानकारी: सिंधु, गंगा, ब्रह्मपुत्र, पद्मा, मेघना और इरावती (Irrawaddy)।
  • क्षेत्रीय सहयोग संगठन जैसे सार्क (SAARC) और द्विपक्षीय पारगमन (ट्रांजिट) व्यापार की सामान्य अवधारणा।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • पड़ोसी देश की भौगोलिक परिभाषा और भारतीय उपमहाद्वीप (Indian Subcontinent) की एकात्मक विशेषताओं की व्याख्या कर सकेंगे।
  • भारत की स्थलीय व समुद्री सीमाओं की लंबाई तथा प्रमुख सीमा रेखाओं (रेडक्लिफ लाइन, मैकमोहन लाइन, डूरंड लाइन) की पहचान कर सकेंगे।
  • दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC) की स्थापना, मुख्यालय, सदस्य देशों और उद्देश्यों का विश्लेषण कर सकेंगे।
  • भू-आवेष्ठित पड़ोसी नेपाल और भूटान की भौतिक संरचना, जलविद्युत, पर्यटन और भारतीय बंदरगाहों पर निर्भरता का मूल्यांकन कर सकेंगे।
  • बांग्लादेश के नदी डेल्टा, जूट (सुनहरा रेशा), वस्त्र उद्योग, तथा 2015 के ऐतिहासिक परिक्षेत्र (एंक्लेव) विनिमय को समझ सकेंगे।
  • म्यांमार की भौगोलिक बनावट, इरावती नदी प्रणाली, सागौन व खनिज संपदा तथा भारत की एक्ट ईस्ट नीति के महत्व को स्पष्ट कर सकेंगे।
  • पाकिस्तान के सिंधु नहर तंत्र (सुक्कुर बैराज), कृषि, उद्योग तथा 1960 की सिंधु जल संधि की समीक्षा कर सकेंगे।
  • श्रीलंका की सीलोन चाय व दालचीनी अर्थव्यवस्था तथा मालदीव के मूंगा एटोल, पर्यावरण संकट व ब्लू इकोनॉमी का आकलन कर सकेंगे।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. भारतीय उपमहाद्वीप, भू-राजनीतिक स...
2 2. उत्तर के हिमालयी पड़ोसी देश – ने...
3 3. पूर्व के डेल्टा एवं वन संपदा संप...
4 4. उत्तर-पश्चिम एवं दक्षिण के नदी व...
5 5. पर्यावरणीय चुनौतियाँ, आपदा प्रबं...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. भारतीय उपमहाद्वीप, भू-राजनीतिक सीमाएँ एवं सार्क (SAARC) संरचना

1.1 पड़ोसी देश की संकल्पना एवं भारतीय उपमहाद्वीप (Indian Subcontinent)

जिन देशों की भौगोलिक थल सीमा अथवा निकटवर्ती समुद्री जलसीमा किसी देश से प्रत्यक्ष रूप से सटी होती है और जिनके बीच प्राकृतिक, सांस्कृतिक, पर्यावरणीय तथा व्यापारिक आदान-प्रदान पाया जाता है, उन्हें पड़ोसी देश (Neighbouring Country) कहा जाता है।

दक्षिण एशिया के केंद्र में स्थित भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका और मालदीव—इन सभी देशों को सम्मिलित रूप से भारतीय उपमहाद्वीप (Indian Subcontinent) कहा जाता है। भूगोलवेत्ता इसे एक अलग "उपमहाद्वीप" मानते हैं क्योंकि:

  • प्राकृतिक प्राचीरों द्वारा पृथक्करण: उत्तर में गगनचुंबी हिमालय व काराकोरम, उत्तर-पश्चिम में हिंदूकुश व सुलेमान-किरथार पर्वतश्रेणियां, पूर्व में अराकान योमा तथा दक्षिण में अथाह हिंद महासागर, अरब सागर व बंगाल की खाड़ी इसे शेष एशिया महाद्वीप से एक प्राकृतिक भौगोलिक किले की भांति अलग करते हैं।
  • विशाल आकार एवं विविधता: लगभग 44 लाख वर्ग किमी क्षेत्रफल और 1.9 अरब से अधिक जनसंख्या वाला यह क्षेत्र अपने आप में एक संपूर्ण महाद्वीप जैसी भू-आकृतिक, भाषाई व सांस्कृतिक विविधता समेटे हुए है।
  • एकीकृत मानसूनी जलवायु: पूरे उपमहाद्वीप की कृषि, जल प्रवाह और ऋतुचक्र हिंद महासागरीय मानसूनी पवनों की लयबद्ध गति से परस्पर जुड़े हुए हैं।

1.2 भारत की अंतरराष्ट्रीय थल एवं समुद्री सीमाएँ

भारत की कुल अंतरराष्ट्रीय स्थलीय सीमा लगभग 15,106.7 किलोमीटर और कुल तटरेखा 7,516.6 किलोमीटर (द्वीपों सहित) है। भारत की थल सीमा 7 संप्रभु पड़ोसी देशों से जुड़ी है:

पड़ोसी देश सीमा रेखा की लंबाई (किमी) संबद्ध भारतीय राज्य सीमा रेखा का नाम / मुख्य लक्षण
बांग्लादेश 4,096.7 किमी पश्चिम बंगाल (2,217 किमी), असम, मेघालय, त्रिपुरा, मिजोरम रेडक्लिफ लाइन (भारत की सबसे लंबी अंतरराष्ट्रीय थल सीमा)।
चीन 3,488 किमी लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश मैकमोहन रेखा (McMahon Line - 1914 शिमला समझौता)।
पाकिस्तान 3,323 किमी गुजरात, राजस्थान, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख रेडक्लिफ रेखा (Radcliffe Line - 1947); नियंत्रण रेखा (LoC)।
नेपाल 1,751 किमी उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, सिक्किम खुली एवं शांतिपूर्ण हिमालयी सीमा (1950 मैत्री संधि)।
म्यांमार 1,643 किमी अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम घने जंगलों से आच्छादित पर्वतीय सीमा (कलादान बेसिन)।
भूटान 699 किमी सिक्किम, पश्चिम बंगाल, असम, अरुणाचल प्रदेश सुरक्षित, शांत एवं सौहार्दपूर्ण पर्वतीय सीमा।
अफगानिस्तान 106 किमी (प्रभावी 86 किमी) लद्दाख (पाक-अधिकृत कश्मीर के वाखान गलियारे में) डूरंड रेखा (Durand Line - 1893; भारत की सबसे छोटी सीमा)।

1.3 भू-आवेष्ठित एवं द्वीपीय पड़ोसी राष्ट्र

भौगोलिक स्थिति और समुद्र तट की उपलब्धता के आधार पर भारत के पड़ोसी देश दो प्रमुख श्रेणियों में आते हैं:

  • 1. भू-आवेष्ठित देश (Landlocked Countries): नेपाल और भूटान। इन देशों का अपना कोई प्रत्यक्ष समुद्र तट नहीं है; ये चारों ओर से थलभाग से घिरे हैं। अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के तहत ये देश भारत के कोलकाता और हल्दिया बंदरगाहों से शुल्क-मुक्त ट्रांजिट सुविधा लेकर अपना विदेशी व्यापार संचालित करते हैं।
  • 2. द्वीपीय पड़ोसी देश (Island Neighbours): श्रीलंका और मालदीव। श्रीलंका भारत के तमिलनाडु तट से पाक जलडमरूमध्य व मन्नार की खाड़ी द्वारा अलग है। मालदीव अरब सागर में लक्षद्वीप के दक्षिण में स्थित लगभग 1,200 मूंगा प्रवाल द्वीपों व 26 प्राकृतिक एटोल का देश है।

1.4 सार्क (SAARC): पृष्ठभूमि, गठन एवं सिद्धांत

दक्षिण एशिया के देशों में सामाजिक प्रगति, आर्थिक संवृद्धि और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सार्क (SAARC - South Asian Association for Regional Cooperation) की स्थापना की गई।

सार्क से संबंधित प्रमुख तथ्य:
  • स्थापना: 8 दिसंबर 1985 को बांग्लादेश की राजधानी ढाका में पहले शिखर सम्मेलन में औपचारिक स्थापना।
  • स्थायी सचिवालय (Headquarters): नेपाल की राजधानी काठमांडू (Kathmandu) में स्थित है।
  • सदस्य देश (8): भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, मालदीव और 2007 में 14वें शिखर सम्मेलन में शामिल अफगानिस्तान।
  • साफ्टा (SAFTA - South Asian Free Trade Area): सदस्य देशों के बीच सीमा शुल्क कम करके मुक्त व्यापार को बढ़ावा देने का समझौता।
  • मूल सिद्धांत: संप्रभु समानता, क्षेत्रीय अखंडता और आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करना। किसी भी द्विपक्षीय विवाद को सार्क के मंच पर उठाने की मनाही है।

1.5 सुदृढ़ पड़ोसी संबंधों का सामरिक एवं भौगोलिक महत्व

भारत की सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक समृद्धि उसके पड़ोसियों में शांति और स्थिरता पर निर्भर करती है। पूर्वोत्तर राज्यों के संपर्क मार्ग, साझा नदी जल प्रबंधन, प्राकृतिक आपदाओं की पूर्व सूचना और सीमा पार अपराध व आतंकवाद की रोकथाम के लिए भारत अपनी विदेश नीति में "पड़ोसी प्रथम" (Neighbourhood First) सिद्धांत को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है।

2. उत्तर के हिमालयी पड़ोसी देश – नेपाल एवं भूटान

2.1 नेपाल की भौतिक बनावट एवं पर्वत शिखर

नेपाल एक पूर्णतः पर्वतीय भू-आवेष्ठित हिमालयी देश है (क्षेत्रफल 1,47,181 वर्ग किमी)। उत्तर से दक्षिण तक इसकी भू-आकृति को तीन समानांतर श्रेणियों में बांटा जाता है:

  1. वृहद हिमालय या हिमाद्री (Great Himalaya): उत्तर में चीन (तिब्बत) सीमा पर स्थित। यहाँ विश्व का सर्वोच्च पर्वत शिखर माउंट एवरेस्ट (ऊंचाई 8,848.86 मीटर; नेपाली नाम: 'सगरमाथा') स्थित है। इसके अलावा कंचनजंघा (8,586 मी), मकालू, धौलागिरि और अन्नपूर्णा जैसे गगनचुंबी बर्फीले शिखर हैं।
  2. मध्य हिमालय या महाभारत लेख: 1,500 से 4,500 मीटर ऊँचा पर्वतीय क्षेत्र। इसके मध्य रमणीय काठमांडू घाटी और खूबसूरत झीलों वाली पोखरा घाटी स्थित हैं।
  3. चुरिया हिल्स एवं तराई का मैदान: दक्षिण में भारत की सीमा से लगा तलहटी का जलोढ़ मैदान। यह नेपाल का प्रमुख कृषि भंडार है।

प्रमुख नदियाँ: काली (शारदा), गंडक और कोशी नदियाँ हिमालय के हिमनदों से निकलकर दक्षिण की ओर बहती हुई गंगा में मिलती हैं। कोशी नदी को अपने भयंकर कटाव और बाढ़ के कारण "बिहार का शोक" कहा जाता है।

2.2 नेपाल की अर्थव्यवस्था: कृषि, वन संपदा एवं पर्यटन

नेपाल की आजीविका का मुख्य आधार कृषि और विदेशी मुद्रा अर्जित करने वाला पर्यटन उद्योग है:

  • कृषि: अधिकांश जनसंख्या कृषि पर निर्भर है। तराई में धान, गन्ना, जूट और गेहूं की खेती होती है। पहाड़ी ढलानों पर सीढ़ीदार खेतों में मक्का, आलू, चाय और फल (संतरा, सेब) उगाए जाते हैं।
  • वन संसाधन: तराई के वनों से साल, शीशम और सेमल की लकड़ी तथा पर्वतीय वनों से चीड़, पाइन और बहुमूल्य जड़ी-बूटियाँ प्राप्त होती हैं।
  • पर्वतारोहण एवं पर्यटन उद्योग: एवरेस्ट पर चढ़ने वाले विश्वभर के पर्वतारोही, ट्रेकर्स और पशुपतिनाथ मंदिर, स्वयंभूनाथ स्तूप व बुद्ध की जन्मस्थली लुम्बिनी के दर्शनार्थी नेपाल की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं।

2.3 भूटान की प्राकृतिक स्थिति एवं 'तड़ित झंझा का देश'

भूटान पूर्वी हिमालय की दक्षिणी ढलानों पर बसा एक शांत पर्वतीय देश है (राजधानी: थिम्पू)। वर्षाकाल में बंगाल की खाड़ी से आने वाली आर्द्र मानसूनी हवाएं हिमालय की खड़ी ढलानों से टकराकर भीषण गर्जन-तड़प और भारी वर्षा करती हैं। इस भौगोलिक कारण से भूटान को 'तड़ित झंझा का देश' (Land of the Thunder Dragon / द्रुक यूल) कहा जाता है।

  • सर्वोच्च शिखर: गंगखर पुनसुम (Gangkhar Puensum - 7,570 मी), जो विश्व का सबसे ऊंचा ऐसा शिखर है जिस पर आज तक कोई मनुष्य नहीं चढ़ सका (Unclimbed Peak)।
  • प्रमुख नदियाँ: तेज बहाव वाली नदियाँ उत्तर से दक्षिण की ओर गहरी घाटियों से बहती हुई असम के ब्रह्मपुत्र में मिलती हैं—तोर्सा (अमो चू), मानस (द्रांगमे चू), संकोश (पुनात्सांग चू) और रायडाक (वांग चू)।
  • पर्यावरण संरक्षण: भूटान के संविधान में यह अनिवार्य नियम है कि देश के कुल क्षेत्रफल का कम से कम 60% भाग सदैव वनों से ढका रहेगा (वर्तमान में 70% से अधिक वन हैं)।
  • सकल राष्ट्रीय प्रसन्नता (Gross National Happiness - GNH): भूटान जीडीपी की जगह नागरिकों के मानसिक सुख, संस्कृति और प्रकृति संरक्षण को अपनी राष्ट्रीय प्रगति का पैमाना मानता है।

2.4 भूटान की जलविद्युत शक्ति एवं भारत की साझेदारी

भूटान में कोयला या पेट्रोलियम जैसे जीवाश्म ईंधन नहीं हैं। किंतु बर्फ से पोषित तीव्र ढाल वाली सदानीरा नदियों की जलशक्ति को भारत सरकार के वित्तीय व तकनीकी सहयोग से विशाल जलविद्युत परियोजनाओं में बदला गया है:

भूटान का 'सफेद सोना' (White Gold): जलविद्युत भूटान की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है। प्रमुख परियोजनाएं हैं:
  1. चुखा जलविद्युत परियोजना (Chukha Project): वांग चू नदी पर भारत के सहयोग से बनी पहली सफल मेगा परियोजना।
  2. ताला परियोजना (Tala Hydroelectric Project): 1,020 मेगावाट क्षमता वाली भूटान की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजना।
  3. कुरुरीचू एवं मांगदेचू परियोजनाएं: आधुनिक तकनीक से संचालित पर्यावरण-अनुकूल बिजली संयंत्र।
भूटान अपनी घरेलू जरूरत से बची अतिरिक्त बिजली भारत को निर्यात करता है, जो उसके राजस्व का सबसे बड़ा स्रोत है।

2.5 भारत के साथ ऐतिहासिक संबंध एवं ट्रांजिट व्यापार

भारत, नेपाल और भूटान के संबंध सांस्कृतिक, धार्मिक और मुक्त सीमा के आधार पर ऐतिहासिक रूप से प्रगाढ़ हैं:

  • खुली सीमा नीति: 1950 की शांति व मैत्री संधि के तहत भारत और नेपाल के नागरिक बिना किसी वीजा या पासपोर्ट के एक-दूसरे के देश में आ-जा सकते हैं और कार्य कर सकते हैं।
  • कोलकाता व हल्दिया बंदरगाह ट्रांजिट: भू-आवेष्ठित होने के कारण नेपाल और भूटान को समुद्री व्यापार के लिए भारत सरकार ने पश्चिम बंगाल के कोलकाता और हल्दिया बंदरगाहों का शुल्क-मुक्त उपयोग करने की अनुमति दी है।
  • सिलीगुड़ी गलियारा (Chicken's Neck): पूर्वोत्तर भारत को जोड़ने वाले इस संकरे गलियारे के समीप होने के कारण नेपाल और भूटान की सुरक्षा व स्थिरता भारत के लिए सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

3. पूर्व के डेल्टा एवं वन संपदा संपन्न पड़ोसी – बांग्लादेश एवं म्यांमार

3.1 बांग्लादेश की भू-आकृति एवं विश्व का सबसे बड़ा डेल्टा

बांग्लादेश दक्षिण एशिया का एक नदी-प्रधान देश है, जो पश्चिम, उत्तर और पूर्व में भारत के राज्यों से घिरा है। देश का लगभग 85% भाग गंगा (पद्मा), ब्रह्मपुत्र (जमुना) और मेघना नदियों द्वारा लाई गई उपजाऊ गाद से बना विश्व का सबसे बड़ा सक्रिय डेल्टा (Ganges-Brahmaputra Delta) है।

भू-आकृतिक भाग भौगोलिक स्थिति मुख्य लक्षण एवं विशेषताएं
टर्शियरी पहाड़ पूर्वी व दक्षिण-पूर्वी सीमा (चटगांव व पर्वतीय चटगांव) वलित पर्वत। सर्वोच्च शिखर केओक्राडोंग (1,230 मी) या ताज़िंगडोंग। घने जंगल।
प्लीस्टोसीन चबूतरे बरिंद्र भूमि (राजशाही), मधुपुर गढ़ व लालमाई हिल्स पुरानी जलोढ़ मिट्टी के कुछ ऊंचे और लाल मिट्टी वाले भूभाग।
नवीन जलोढ़ मैदान देश का लगभग 80% मुख्य भूभाग पद्मा, जमुना व मेघना की बाढ़ द्वारा लाई गई अत्यंत उपजाऊ मिट्टी। विश्व के सघनतम कृषि क्षेत्र।
सुंदरबन मैंग्रोव तटीय क्षेत्र दक्षिण-पश्चिमी तटीय मुहाना विश्व का सबसे बड़ा ज्वारीय मैंग्रोव वन; सुंदरी, गरान वृक्ष व रॉयल बंगाल टाइगर का घर।

राजधानी: ढाका (बूढ़ीगंगा नदी के तट पर)। मुख्य बंदरगाह: चटगांव (कर्णफुली नदी मुहाने पर) और मोंगला।

3.2 बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था: जूट (सुनहरा रेशा), वस्त्र उद्योग व मत्स्य संपदा

बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था कृषि और निर्यात-उन्मुख विनिर्माण का उत्कृष्ट उदाहरण है:

  • जूट और 'सुनहरा रेशा' (Golden Fibre): उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी और भरपूर वर्षा के कारण यहाँ विश्व का सर्वोत्तम तोशा जूट पैदा होता है। इसके चमकीले सुनहरे रंग और विदेशी मुद्रा कमाने की क्षमता के कारण जूट को 'सुनहरा रेशा' कहा जाता है। नारायणगंज को जूट मिलों के कारण 'प्राच्य का डंडी' कहा जाता था।
  • तैयार वस्त्र उद्योग (RMG Industry): बांग्लादेश आज रेडीमेड गारमेंट्स के निर्यात में चीन के बाद विश्व में दूसरे स्थान पर है। सस्ती श्रमशक्ति और बंदरगाहों की सुविधा से ढाका व चटगांव में हजारों वस्त्र कारखाने स्थापित हैं।
  • मत्स्य संपदा: अंतर्देशीय नदियों व जलाशयों से प्रचुर मात्रा में मछली पकड़ी जाती है। विशेषकर पद्मा और मेघना की स्वादिष्ट हिल्सा (इल्श) मछली विश्व प्रसिद्ध है और भारत में अत्यंत लोकप्रिय है।

3.3 म्यांमार की भौतिक बनावट एवं इरावती नदी तंत्र

म्यांमार (प्राचीन नाम: बर्मा) भारत के पूर्वी छोर पर स्थित दक्षिण-पूर्व एशिया का प्रमुख राष्ट्र है (राजधानी: नेपीडॉ; बड़ा व्यापारिक केंद्र: यांगून)। बौद्ध स्तूपों और स्वर्ण मंदिरों की प्रचुरता के कारण इसे 'स्वर्ण पैगोडा का देश' (Land of Golden Pagodas) कहा जाता है।

  • पश्चिमी पर्वत श्रेणी: भारत-म्यांमार सीमा पर हिमालय की दक्षिणवर्ती शाखा अराकान योमा (Arakan Yoma) और चिन हिल्स फैली हैं। सर्वोच्च शिखर खकाबो राज़ी (Hkakabo Razi - 5,881 मी) है।
  • पूर्वी शान का पठार: चूना पत्थर और खनिजों से युक्त ऊंचा पठार, जिसके बीच से सालवीन नदी बहती है।
  • इरावती (Irrawaddy) नदी—म्यांमार की जीवनरेखा: इरावती नदी देश के मध्य से उत्तर से दक्षिण लगभग 2,280 किमी बहकर अंडमान सागर में गिरती है। इसकी उपजाऊ घाटी और विशाल डेल्टा में देश का अधिकांश चावल पैदा होता है, प्रमुख शहर व आबादी यहीं बसी है और यह मुख्य अंतर्देशीय जलमार्ग है। इसीलिए इसे 'म्यांमार की जीवनरेखा' (Lifeline of Myanmar) कहा जाता है।

3.4 म्यांमार की वन संपदा, रत्न एवं खनिज भंडार

म्यांमार प्राकृतिक संसाधनों की दृष्टि से अत्यंत संपन्न देश है:

  1. सागौन की लकड़ी (Teak Wood): म्यांमार के वनों में विश्व की सर्वोत्तम प्राकृतिक सागौन की लकड़ी मिलती है, जो मजबूत, जलरोधी और जहाजरानी व फर्नीचर के लिए विख्यात है। जंगलों से लट्ठे ढोने में प्रशिक्षित हाथियों का उपयोग यहाँ की अनूठी परंपरा है।
  2. रत्न संपदा व रूबी घाटी: म्यांमार के मोगोक (Mogok) क्षेत्र को 'रूबी घाटी' (Valley of Rubies) कहा जाता है। यहाँ का कबूतर के खून जैसा गहरा लाल माणिक्य (Pigeon's Blood Ruby), नीलम (Sapphire) और कीमती हरा जेड (Jade) संसार भर में मशहूर है।
  3. खनिज तेल व प्राकृतिक गैस: इरावती घाटी के चाउक व येनानज्यांग तेल क्षेत्र तथा अपतटीय गैस भंडार।

3.5 भारत की एक्ट ईस्ट नीति एवं ऐतिहासिक परिक्षेत्र (एंक्लेव) विनिमय

पूर्वी पड़ोसियों के साथ भारत के सामरिक एवं आर्थिक संबंध अत्यंत महत्वपूर्ण हैं:

  • कलादान मल्टी-मॉडल पारगमन परियोजना (Kaladan Project): कोलकाता बंदरगाह को म्यांमार के सितवे बंदरगाह से जोड़कर कलादान नदी और सड़क मार्ग से मिजोरम तक सीधा संपर्क स्थापित करना।
  • भारत-बांग्लादेश ऐतिहासिक सीमा समझौता (2015): भारतीय संसद के 100वें संविधान संशोधन द्वारा 68 वर्षों से लंबित 162 जटिल सीमावर्ती परिक्षेत्रों (एंक्लेव/छिटमहल) का शांतिपूर्ण आदान-प्रदान किया गया (भारत को 51 और बांग्लादेश को 111 परिक्षेत्र मिले), जिससे 50,000 से अधिक लोगों को स्थायी नागरिकता व अधिकार मिले।
  • रेलवे व बस संपर्क: मैत्री एक्सप्रेस (ढाका-कोलकाता), बंधन एक्सप्रेस (खुलना-कोलकाता) और मिताली एक्सप्रेस (ढाका-न्यू जलपाईगुड़ी) ट्रेनों से दोनों देशों के लोगों का आवागमन सुगम हुआ है।

4. उत्तर-पश्चिम एवं दक्षिण के नदी व समुद्री पड़ोसी – पाकिस्तान, अफगानिस्तान, श्रीलंका एवं मालदीव

4.1 पाकिस्तान की भू-आकृति एवं सिंधु नहर प्रणाली

पाकिस्तान दक्षिण एशिया के उत्तर-पश्चिम में स्थित है (राजधानी: इस्लामाबाद; मुख्य बंदरगाह: कराची)। यहाँ की जलवायु अत्यंत शुष्क व विषम है (अधिकांश भागों में वार्षिक वर्षा 25 सेमी से कम)। वर्षा की भारी कमी के बावजूद सिंधु नदी और उसकी पांच प्रमुख सहायक नदियों (झेलम, चेनाब, रावी, ब्यास व सतलुज) के जल से विकसित सिंचाई प्रणाली ने देश की कृषि को संपन्न बनाया है।

सिंधु सिंचाई प्रणाली एवं 'नहरों का देश' (Land of Canals): शुष्कता पर विजय पाने के लिए सिंधु नदी पर सुक्कुर बैराज (लॉयड बैराज), गुड्डू बैराज, कोटड़ी बैराज तथा तरबेला व मंगला बांध बनाकर विश्व का सबसे बड़ा कृत्रिम नहर नेटवर्क तैयार किया गया है। नहरों के इस विशाल जाल के कारण पाकिस्तान को 'नहरों का देश' कहा जाता है।
  • भू-आकृतिक भाग: उत्तर में हिमालय, हिंदूकुश व काराकोरम पर्वत (विश्व का दूसरा सबसे ऊंचा शिखर K2 या गॉडविन ऑस्टिन - 8,611 मी); पश्चिम में सुलेमान व किरथार पर्वत और बलूचिस्तान का पठार; पूर्व में थार मरुस्थल का विस्तार; और मध्य में सिंधु का उपजाऊ जलोढ़ मैदान।
  • कृषि व उद्योग: नहरों के सहारे पंजाब व सिंध में उच्च गुणवत्ता वाली अमेरिकी कपास, बासमती चावल, गेहूं और गन्ने की बंपर पैदावार होती है। कपास की प्रचुरता से सूती वस्त्र उद्योग पाकिस्तान का सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्योग है। इसके अतिरिक्त सियालकोट के खेल के सामान (Sports Goods - जैसे फुटबॉल) विश्व प्रसिद्ध हैं।
  • सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty - 1960): विश्व बैंक की मध्यस्थता में भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ ऐतिहासिक जल समझौता। इसके तहत पूर्वी तीन नदियों (रावी, ब्यास, सतलुज) का जल भारत के अनन्य उपयोग हेतु तथा पश्चिमी तीन नदियों (सिंधु, झेलम, चेनाब) का जल मुख्य रूप से पाकिस्तान के उपयोग हेतु आवंटित किया गया।

4.2 अफगानिस्तान: भौगोलिक स्थिति एवं पारगमन महत्व

अफगानिस्तान एक दुर्गम, पथरीला और शुष्क भू-आवेष्ठित पर्वतीय देश है (राजधानी: काबुल)। इसके मध्य से हिंदूकुश पर्वतमाला गुजरती है। लद्दाख के वाखान गलियारे में भारत के साथ इसकी केवल 106 किमी लंबी सीमा है, जो डूरंड रेखा (Durand Line - 1893) कहलाती है। यहाँ सूखे मेवे (पिस्ता, बादाम, किशमिश, अखरोट), केसर, उच्च गुणवत्ता वाली हींग तथा प्राचीन लापिस लाजुली (लाजवर्त) रत्न पाए जाते हैं। भारत ने अफगानिस्तान के विकास हेतु ऐतिहासिक सलमा बांध (भारत-अफगान मैत्री बांध) तथा संसद भवन का निर्माण किया है।

4.3 श्रीलंका: भौतिक बनावट, सीलोन चाय एवं मसालों का द्वीप

हिंद महासागर में स्थित श्रीलंका एक अत्यंत सुंदर नाशपाती के आकार का द्वीपीय राष्ट्र है (प्रशासनिक राजधानी: श्री जयवर्धनेपुरा कोट्टे; वाणिज्यिक राजधानी: कोलंबो)। यह भारत के तमिलनाडु तट से उथले पाक जलडमरूमध्य (Palk Strait) और मन्नार की खाड़ी (Gulf of Mannar) द्वारा अलग है। समुद्र में चमकते मोती जैसी स्थिति तथा तटों पर मिलने वाले प्राकृतिक मोतियों के कारण इसे 'हिंद महासागर का मोती' (Pearl of the Indian Ocean) कहा जाता है।

  • भू-आकृति एवं नदियाँ: द्वीप के केंद्र में उच्च पहाड़ी क्षेत्र और चारों ओर तटीय मैदान। सर्वोच्च शिखर पिदुरुतालागाला (Pidurutalagala - 2,524 मी) है; दूसरा पूजनीय शिखर एडम्स पीक (श्री पाद) है। सबसे लंबी नदी महावेली गंगा (Mahaweli Ganga - 335 किमी) है।
  • सीलोन चाय (Ceylon Tea): मध्यवर्ती नुवारा एलिया की पहाड़ी ढलानों पर उत्पन्न होने वाली विशिष्ट सुगंध वाली सीलोन चाय विश्व प्रसिद्ध है और श्रीलंका का मुख्य निर्यात उत्पाद है।
  • दालचीनी का द्वीप व रत्न: प्राचीन काल से ही बेहतरीन दालचीनी (Cinnamon), लौंग और काली मिर्च उत्पादन के लिए श्रीलंका को 'दालचीनी का द्वीप' (Island of Cinnamon) कहा जाता है। रत्नपुरा क्षेत्र में नीलम (Blue Sapphire) तथा तटीय क्षेत्रों में नारियल व रबर का प्रचुर उत्पादन होता है।

4.4 मालदीव: प्रवाल द्वीप समूह, ब्लू इकोनॉमी एवं ग्लोबल वार्मिंग का संकट

मालदीव दक्षिण एशिया का सबसे छोटा स्वतंत्र राष्ट्र है (राजधानी: माले)। यह अरब सागर में उत्तर से दक्षिण फैले 26 प्राकृतिक एटोल और लगभग 1,192 छोटे-छोटे मूंगा प्रवाल द्वीपों से बना है।

  • मूंगा प्रवाल संरचना: ये द्वीप मृत मूंगा जीवों (Coral Polyps) के कैल्शियम कार्बोनेट से बने खोलों के संचय से बने हैं। यहाँ कोई पहाड़ या नदी नहीं है; समुद्र तल से औसत ऊंचाई केवल 1.5 मीटर है।
  • ब्लू इकोनॉमी (नीला अर्थतंत्र) व पर्यटन: समुद्री संपदा और बीच पर्यटन ही अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। लग्जरी रिसॉर्ट्स, स्कूबा डाइविंग और टूना मछली (Skipjack Tuna) का शिकार व निर्यात यहाँ की मुख्य आजीविका है।
  • ग्लोबल वार्मिंग व अस्तित्व का संकट: जलवायु परिवर्तन और समुद्र का जलस्तर बढ़ने से इस निचले द्वीपीय देश के डूबने का गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। प्रवाल विरंजन (Coral Bleaching) और तटीय क्षरण को रोकने के लिए मालदीव वैश्विक मंचों पर मुखर है।

4.5 हिंद महासागर में रणनीतिक समुद्री सुरक्षा

विश्व के प्रमुख समुद्री व्यापारिक मार्ग हिंद महासागर से गुजरते हैं। श्रीलंका के कोलंबो बंदरगाह और मालदीव की स्थिति भारत की नौसैनिक सुरक्षा के लिए अत्यंत संवेदनशील है। भारत 'सागर' (SAGAR - Security and Growth for All in the Region) पहल के तहत आपदा राहत और समुद्री सुरक्षा में हमेशा पहला मददगार (First Responder) बनकर सहयोग करता है।

5. पर्यावरणीय चुनौतियाँ, आपदा प्रबंधन एवं भविष्य का क्षेत्रीय सहयोग

5.1 अंतरराष्ट्रीय नदी जल वितरण एवं बांध विवाद

दक्षिण एशिया की नदियाँ एक से अधिक देशों से होकर बहती हैं, जिससे जल बंटवारे को लेकर समझौते और चुनौतियां सामने आती हैं:

नदी समझौता / मुद्दा संबद्ध देश मुख्य पृष्ठभूमि एवं समाधान
गंगा जल संधि (1996) भारत एवं बांग्लादेश फरक्का बैराज के नीचे शुष्क मौसम (जनवरी-मई) में पद्मा नदी में जल आपूर्ति की 30-वर्षीय ऐतिहासिक संधि।
तीस्ता नदी जल विवाद भारत एवं बांग्लादेश उत्तरी बंगाल की सिंचाई जरूरतों और बांग्लादेश के शुष्क मौसम में धान की फसल के जल बंटवारे पर वार्ता जारी।
महाकाली संधि (1996) भारत एवं नेपाल शारदा एवं पंचेश्वर बहुउद्देश्यीय परियोजना से संयुक्त बिजली उत्पादन और बाढ़ नियंत्रण।
ब्रह्मपुत्र नदी पर चीनी बांध भारत एवं चीन तिब्बत में यारलुंग सांगपो (ब्रह्‍मपुत्र) पर चीन द्वारा बनाए जा रहे बांधों से निचले तटीय देश भारत के असम में जल कमी व आकस्मिक बाढ़ की चिंता।

5.2 हिमालयी आपदाएं: भूकंप एवं जीएलओएफ (GLOF) का खतरा

भारतीय विवर्तनिक प्लेट प्रति वर्ष लगभग 5 सेमी की दर से यूरेशियन प्लेट के नीचे धंस रही है, जिससे संपूर्ण हिमालयी क्षेत्र अत्यधिक भूकंप-प्रवण (Seismic Zone V) है। 2015 के भीषण नेपाल भूकंप ने काठमांडू को भारी क्षति पहुंचाई थी। इसके अतिरिक्त ग्लोबल वार्मिंग से ग्लेशियर तेजी से पिघलकर खतरनाक हिमनद झीलें बना रहे हैं। इन प्राकृतिक बांधों के टूटने से उत्पन्न हिमनद झील प्रस्फुटन बाढ़ (GLOF - Glacial Lake Outburst Flood) नेपाल, भूटान और सिक्किम में अचानक विनाशकारी सैलाब लाती है।

5.3 सीमा व्यापार, एकीकृत चेकपोस्ट एवं पारगमन गलियारे

पड़ोसी देशों के साथ व्यापार बढ़ाने हेतु बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण किया गया है:

  • एकीकृत चेकपोस्ट (Integrated Check Posts - ICP): भारत-बांग्लादेश सीमा पर पेट्रापोल-बेनापोल दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा लैंडपोर्ट है, जिससे दोनों देशों का आधे से अधिक थल व्यापार होता है। इसके अलावा हिली, चेंगराबांधा और भारत-नेपाल सीमा पर रक्सौल-बीरगंज प्रमुख व्यापारिक द्वार हैं।
  • सीमा हाट (Border Haats): सीमावर्ती क्षेत्रों के स्थानीय किसानों द्वारा फल, सब्जियां व हस्तशिल्प बेचने हेतु पारंपरिक बाजारों को फिर से सक्रिय किया गया है।

5.4 बिम्सटेक (BIMSTEC) एवं क्षेत्रीय सहयोग का नया स्वरूप

सार्क की राजनीतिक शिथिलता के कारण बंगाल की खाड़ी तटीय देशों का संगठन बिम्सटेक (BIMSTEC - Bay of Bengal Initiative for Multi-Sectoral Technical and Economic Cooperation) एक प्रभावी क्षेत्रीय विकल्प के रूप में उभरा है। 1997 में स्थापित इस संगठन का सचिवालय ढाका में है। सदस्य देश हैं: बांग्लादेश, भूटान, भारत, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड। यह दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया को जोड़ने वाली मजबूत कड़ी है।

5.5 21वीं सदी में भारत की 'पड़ोसी प्रथम' (Neighbourhood First) नीति

भारत अपने पड़ोसियों के साथ शांति, विश्वास और साझा समृद्धि के आधार पर आगे बढ़ रहा है। कोरोना काल में 'वैक्सीन मैत्री' के तहत बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका और मालदीव को करोड़ों मुफ्त टीके भेजना, श्रीलंका के गंभीर आर्थिक संकट में अरबों डॉलर की ईंधन व खाद्य सहायता देना, तथा 2017 में प्रक्षेपित दक्षिण एशियाई उपग्रह (GSAT-9) की दूरसंचार व मौसम सेवाएं पड़ोसियों को निःशुल्क उपहार में देना भारत की उदार नीति के जीवंत प्रमाण हैं। परस्पर सहयोग और संवाद से ही दक्षिण एशिया वैश्विक आर्थिक महाशक्ति बन सकता है।

महत्वपूर्ण ऐतिहासिक शब्दावली, कालक्रम एवं प्रशासनिक व्यवस्था

अंतरराष्ट्रीय सीमा निर्धारण का भौगोलिक सिद्धांत
बांग्लादेश (4,096.7 किमी) > चीन (3,488 किमी) > पाकिस्तान (3,323 किमी) > नेपाल (1,751 किमी) > म्यांमार (1,643 किमी) > भूटान (699 किमी) > अफगानिस्तान (106 किमी)
भारत की सबसे लंबी सीमा बांग्लादेश के साथ (पश्चिम बंगाल से 2,217 किमी) और सबसे छोटी अफगानिस्तान के साथ है।
भू-आवेष्ठित राज्य की परिभाषा एवं पारगमन अधिकार
दक्षिण एशिया में 2 देश: नेपाल और भूटान (समुद्री व्यापार के लिए भारतीय बंदरगाहों पर निर्भर)
अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून (UNCLOS) के तहत भू-आवेष्ठित देशों को पड़ोसी देश से शुल्क-मुक्त समुद्री ट्रांजिट अधिकार प्राप्त है।
जलविद्युत उत्पादन क्षमता सूचकांक (Hydro-Electric Potential)
भूटान की संभावित क्षमता > 30,000 मेगावाट (चुखा, ताला व कुरुरीचू परियोजनाएं)
भूटान की अतिरिक्त बिजली भारत को निर्यात होती है और यह उसकी अर्थव्यवस्था का "सफेद सोना" (White Gold) है।
विश्व के सबसे बड़े डेल्टा के निर्माण का समीकरण
गंगा-ब्रह्मपुत्र-मेघना डेल्टा का क्षेत्रफल लगभग 1,00,000 वर्ग किमी (बांग्लादेश का 80% भूभाग)
अत्यंत उपजाऊ गाद के कारण बांग्लादेश जूट ("सुनहरा रेशा") व सघन धान की खेती के लिए विश्व विख्यात है।
सिंधु नहर सिंचाई अनुपात (Canal Irrigation Ratio)
पाकिस्तान में कुल कृषि भूमि का 80% से अधिक भाग सिंधु नहर तंत्र पर निर्भर है
सुक्कुर बैराज (लॉयड बैराज) पाकिस्तान के विशालतम नहर नेटवर्क का प्रमुख नियंत्रण केंद्र है।
सार्क का क्षेत्रीय संतुलन ढांचा (SAARC Architecture)
स्थायी सचिवालय: काठमांडू, नेपाल; प्रथम सम्मेलन: ढाका, बांग्लादेश (8 दिसंबर 1985)
सार्क चार्टर के अनुसार किसी भी द्विपक्षीय विवाद को मंच पर नहीं उठाया जा सकता, केवल बहुपक्षीय विकास पर चर्चा होती है।
प्रवाल एटोल संरचना व पर्यावरण जोखिम (Coral Atoll Dynamic)
मालदीव की औसत ऊंचाई समुद्र तल से केवल 1.5 मीटर है (अधिकतम प्राकृतिक ऊंचाई 2.4 मीटर)
ग्लोबल वार्मिंग और समुद्र स्तर वृद्धि से मालदीव के अस्तित्व पर सीधा पर्यावरणीय संकट मंडरा रहा है।
श्रीलंका का बागानी फसल निर्यात अनुपात (Plantation Yield Factor)
श्रीलंका विश्व में सुगंधित सीलोन चाय और सर्वोत्तम दालचीनी का अग्रणी निर्यातक है
मध्यवर्ती उच्चभूमि (नुवारा एलिया क्षेत्र) चाय उत्पादन के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
प्रश्न 1: नेपाल और भूटान को "भू-आवेष्ठित देश" (Landlocked Countries) क्यों कहा जाता है? विदेशी व्यापार के लिए ये देश भारत पर किस प्रकार निर्भर हैं?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर:

  1. भू-आवेष्ठित देश की परिभाषा: जिन देशों की सीमाएं चारों ओर से अन्य देशों की थल सीमा अथवा दुर्गम पर्वतमालाओं से घिरी होती हैं और जिनका अपना कोई खुला समुद्री तट या बंदरगाह नहीं होता, उन्हें भू-आवेष्ठित देश (Landlocked Country) कहा जाता है। नेपाल उत्तर में चीन (तिब्बत) और पूर्व, पश्चिम तथा दक्षिण में भारत से घिरा है। इसी प्रकार भूटान उत्तर में चीन और शेष तीन दिशाओं में भारत से घिरा है।
  2. भारत पर निर्भरता: खुले समुद्र में अपने सामान का निर्यात करने या विदेशों से कच्चा माल व मशीनें मंगाने के लिए इन दोनों देशों को भौगोलिक रूप से भारतीय भूभाग से होकर ही जाना पड़ता है। भारत सरकार ने द्विपक्षीय मैत्री संधियों के तहत पश्चिम बंगाल के कोलकाता बंदरगाह और हल्दिया बंदरगाह का शुल्क-मुक्त पारगमन (Transit) अधिकार इन दोनों देशों को दिया है। भारतीय रेलवे और सड़कों के माध्यम से ही नेपाल और भूटान का विदेशी व्यापार सुचारू रूप से चलता है।
उदाहरण 2
प्रश्न 2: भूटान को "तड़ित झंझा का देश" क्यों कहा जाता है? यहाँ की जलविद्युत शक्ति को "सफेद सोना" (White Gold) क्यों कहा जाता है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर:

  1. "तड़ित झंझा का देश" नामकरण: भूटान पूर्वी हिमालय की खड़ी दक्षिणी ढलान पर स्थित है। मानसून ऋतु में बंगाल की खाड़ी से आने वाली आर्द्र दक्षिणी-पश्चिमी मानसूनी हवाएं हिमालय की खड़ी दीवारों से अचानक टकराकर घने बादलों, तीव्र तड़ित झंझा (बिजली कड़कने) और भयंकर बादलों की गर्जना के साथ मूसलाधार वर्षा कराती हैं। इस निरंतर आंधी-तूफान व बिजली गिरने की प्राकृतिक घटना के कारण स्थानीय भाषा में इसे "द्रुक यूल" या "तड़ित झंझा का देश" (Land of the Thunder Dragon) कहा जाता है।
  2. "सफेद सोना" (White Gold): भूटान में कोयला या खनिज तेल जैसे जीवाश्म ईंधन के भंडार नहीं हैं। किंतु बर्फ से पिघलकर बहने वाली तेज बहाव वाली सदानीरा नदियों में भारी जलराशि और तीव्र प्राकृतिक ढलान उपलब्ध है। भारत के वित्तीय व तकनीकी सहयोग से यहाँ चुखा, ताला और कुरुरीचू जैसी बड़ी जलविद्युत परियोजनाएं बनाई गई हैं। पर्यावरण-अनुकूल स्वच्छ जलविद्युत से घरेलू मांग पूरी करने के बाद अतिरिक्त बिजली भारत को बेचकर भूटान भारी राजस्व अर्जित करता है। राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को समृद्ध बनाने की इस क्षमता के कारण जलविद्युत को भूटान का "सफेद सोना" कहा जाता है।
उदाहरण 3
प्रश्न 3: बांग्लादेश में जूट को "सुनहरा रेशा" क्यों कहा जाता है? देश के रेडीमेड गारमेंट्स (RMG) उद्योग की सफलता के क्या कारण हैं?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर:

  1. सुनहरा रेशा (Golden Fibre): बांग्लादेश की प्रमुख नकदी रेशा फसल जूट है। पद्मा-मेघना-जमुना बेसिन की उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी, भरपूर वर्षा और उष्ण-आर्द्र जलवायु उच्च कोटि के तोशा जूट की खेती के लिए सर्वोत्तम हैं। जूट के रेशे के चमकीले सुनहरे रंग और विदेशी बाजारों में जूट व इसके उत्पादों के निर्यात से भारी विदेशी मुद्रा कमाने के कारण इसे "सुनहरा रेशा" कहा जाता है।
  2. तैयार वस्त्र (RMG) उद्योग की सफलता के कारण: (क) प्रचुर व सस्ता श्रम: बांग्लादेश में कुशल, अनुशासित और कम वेतन पर कार्य करने वाली विशाल महिला व पुरुष श्रमशक्ति सुलभ है। (ख) अंतरराष्ट्रीय शुल्क-मुक्त छूट: यूरोपीय संघ और अन्य विकसित देशों में अल्प-विकसित देश (LDC) के रूप में लंबे समय तक शुल्क-मुक्त निर्यात की सुविधा मिली। (ग) उन्नत बंदरगाह कनेक्टिविटी: चटगांव और मोंगला बंदरगाहों से कच्चे माल का त्वरित आयात और तैयार कपड़ों का सीधे पश्चिमी देशों को निर्यात संभव होता है।
उदाहरण 4
प्रश्न 4: इरावती (Irrawaddy) नदी को "म्यांमार की जीवनरेखा" क्यों कहा जाता है? म्यांमार के प्रमुख प्राकृतिक संसाधनों का संक्षिप्त परिचय दें।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर:

  1. इरावती नदी म्यांमार की जीवनरेखा: इरावती नदी म्यांमार के मध्य से उत्तर से दक्षिण लगभग 2,280 किमी बहकर अंडमान सागर में गिरती है। इस नदी का उपजाऊ कछार और विशाल डेल्टा देश का मुख्य कृषि क्षेत्र है, जहाँ देश का प्रमुख खाद्यान्न चावल उगाया जाता है। यह नदी देश का मुख्य आंतरिक जलमार्ग है जिससे उत्तर और दक्षिण म्यांमार के बीच भारी माल व यात्रियों का परिवहन होता है। देश के प्रमुख ऐतिहासिक शहर और आबादी इसी नदी के तट पर बसे हैं। अतः इसे म्यांमार की "जीवनरेखा" कहा जाता है।
  2. प्रमुख प्राकृतिक संसाधन: (क) वन संपदा: म्यांमार के मानसूनी वनों में विश्व की सबसे मूल्यवान प्राकृतिक सागौन (Teak) की लकड़ी पाई जाती है। (ख) बहुमूल्य रत्न: मोगोक क्षेत्र में कबूतर के खून जैसे गहरे लाल माणिक्य (Pigeon's Blood Ruby), नीलम और कीमती हरा जेड मिलता है। (ग) खनिज तेल व गैस: इरावती घाटी के चाउक व येनानज्यांग से पेट्रोलियम तथा अपतटीय क्षेत्रों से प्राकृतिक गैस निकाली जाती है।
उदाहरण 5
प्रश्न 5: पाकिस्तान को "नहरों का देश" क्यों कहा जाता है? यहाँ की कृषि में सिंधु नहर प्रणाली के महत्व पर प्रकाश डालें।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर:

  1. "नहरों का देश" (Land of Canals): पाकिस्तान में अधिकांश भागों में वार्षिक वर्षा 25 सेमी से भी कम होती है और यहाँ की जलवायु शुष्क व विषम है। वर्षा की कमी के कारण सामान्य कृषि असंभव होने से पाकिस्तान सरकार ने सिंधु नदी और उसकी पांच प्रमुख सहायक नदियों पर विशाल बैराज (जैसे सुक्कुर बैराज, गुड्डू बैराज, कोटड़ी बैराज) और बांध बनाकर विश्व का सबसे विशाल कृत्रिम नहर नेटवर्क तैयार किया है। नहरों के इस असीम विस्तार के कारण इसे "नहरों का देश" कहा जाता है।
  2. कृषि में महत्व: (क) नहरों के जल से पंजाब और सिंध के शुष्क मैदानों में उच्च गुणवत्ता वाली अमेरिकी कपास, खुशबूदार बासमती चावल, गेहूं और गन्ने की भारी पैदावार होती है। (ख) कपास की प्रचुरता के कारण ही सूती वस्त्र उद्योग पाकिस्तान का सबसे बड़ा राष्ट्रीय विनिर्माण उद्योग बन सका है।
उदाहरण 6
प्रश्न 6: श्रीलंका को "हिंद महासागर का मोती" एवं "दालचीनी का द्वीप" क्यों कहा जाता है? यहाँ की मुख्य नकदी फसल क्या है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर:

  1. "हिंद महासागर का मोती" (Pearl of the Indian Ocean): हिंद महासागर के नीले जल में श्रीलंका का भौगोलिक नक्शा एक चमकते हुए मोती या आंसू की बूंद जैसा दिखाई देता है। इसके अतिरिक्त मन्नार की खाड़ी के उथले समुद्र से प्राचीन काल से प्राकृतिक मोती निकाले जाते रहे हैं और रत्नपुरा में उच्च कोटि के नीलम व रत्न मिलते हैं, इसलिए यह नाम दिया गया।
  2. "दालचीनी का द्वीप" (Island of Cinnamon): अति प्राचीन काल से ही श्रीलंका में विश्व की सबसे खुशबूदार और मीठी दालचीनी (Cinnamon) बहुतायत से पैदा होती है। मध्यकाल में यूरोपीय शक्तियां मुख्य रूप से दालचीनी के व्यापार पर अधिकार करने ही यहाँ आई थीं।
  3. मुख्य नकदी फसल: श्रीलंका की मुख्य नकदी व निर्यात फसल "सीलोन चाय" (Ceylon Tea) है, जो मध्यवर्ती नुवारा एलिया की नम पहाड़ी ढलानों पर उगाई जाती है।
उदाहरण 7
प्रश्न 7: सार्क (SAARC) का पूरा नाम क्या है? इसका सचिवालय कहाँ है और इसके मुख्य उद्देश्य क्या हैं?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर:

  1. पूरा नाम एवं सचिवालय: SAARC का पूरा नाम South Asian Association for Regional Cooperation (दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन) है। इसका स्थायी सचिवालय नेपाल की राजधानी काठमांडू में स्थित है। इसकी औपचारिक स्थापना 8 दिसंबर 1985 को ढाका में हुई थी।
  2. मुख्य उद्देश्य: (क) दक्षिण एशिया के जनमानस के कल्याण को बढ़ावा देना और जीवन स्तर में सुधार लाना। (ख) सदस्य राष्ट्रों के बीच आर्थिक विकास, सामाजिक प्रगति और सांस्कृतिक संवर्धन में गति लाना। (ग) दक्षिण एशियाई देशों में सामूहिक आत्मनिर्भरता और आपसी विश्वास को मजबूत करना। (घ) साफ्टा (SAFTA) के माध्यम से सदस्य देशों के बीच व्यापारिक बाधाओं और सीमा शुल्कों को घटाना।
उदाहरण 8
प्रश्न 8: 2015 के भारत-बांग्लादेश ऐतिहासिक सीमा परिक्षेत्र (छिटमहल) समझौते का क्या महत्व था?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर:

  1. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: 1947 के विभाजन के बाद कई भारतीय भूभाग तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान बांग्लादेश) के भीतर और बांग्लादेशी भूभाग भारत (विशेषकर पश्चिम बंगाल के कूचबिहार जिले) के भीतर अलग-थलग टापुओं (परिक्षेत्रों) के रूप में फंस गए थे। इस कारण लगभग 50,000 निवासी नागरिक अधिकारों, पहचान पत्र, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित नारकीय जीवन जी रहे थे।
  2. ऐतिहासिक महत्व: मई 2015 में भारतीय संसद के 100वें संविधान संशोधन द्वारा थल सीमा समझौता (LBA) लागू हुआ। भारत ने 111 परिक्षेत्र बांग्लादेश को दिए और बांग्लादेश ने 51 परिक्षेत्र भारत को सौंपे। लगभग 68 वर्षों से चले आ रहे एक अत्यंत जटिल सीमा विवाद का बिना किसी रक्तपात के पूर्ण शांतिपूर्ण और कूटनीतिक समाधान दक्षिण एशिया में सौहार्द और मित्रता की एक मिसाल बन गया।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

गलत धारणा: भारत की सबसे लंबी अंतरराष्ट्रीय थल सीमा पाकिस्तान या चीन के साथ है।

सही वैज्ञानिक तथ्य

सही तथ्य: भारत की सबसे लंबी अंतरराष्ट्रीय थल सीमा बांग्लादेश के साथ है (4,096.7 किमी)। चीन के साथ 3,488 किमी और पाकिस्तान के साथ 3,323 किमी सीमा है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

गलत धारणा: नेपाल का माउंट एवरेस्ट और भारत का कंचनजंघा अलग-अलग पर्वत प्रणालियों में हैं।

सही वैज्ञानिक तथ्य

सही तथ्य: दोनों ही पर्वत शिखर वृहद हिमालय (Great Himalaya या हिमाद्री) पर्वतमाला का अभिन्न हिस्सा हैं। कंचनजंघा भारत (सिक्किम) और नेपाल की साझी सीमा पर स्थित है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

गलत धारणा: भूटान का मुख्य प्राकृतिक संसाधन कोयला और खनिज तेल है।

सही वैज्ञानिक तथ्य

सही तथ्य: भूटान में कोयले या तेल के भंडार नगण्य हैं; इसका सबसे बड़ा प्राकृतिक संसाधन सदानीरा नदियों की "जलविद्युत शक्ति" (Hydro-power) और वन संपदा है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

गलत धारणा: श्रीलंका भारत से किसी संकरे थलभाग या इस्थमस द्वारा सीधे जुड़ा हुआ है।

सही वैज्ञानिक तथ्य

सही तथ्य: श्रीलंका एक पूर्णतः अलग द्वीपीय देश है। यह भारत से उथले पाक जलडमरूमध्य (Palk Strait) और मन्नार की खाड़ी द्वारा अलग है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

गलत धारणा: मालदीव की भू-आकृति ऊंचे पत्थरों और पर्वतों से निर्मित है।

सही वैज्ञानिक तथ्य

सही तथ्य: मालदीव में कोई पहाड़, पर्वत या नदी नहीं है। यह पूरी तरह से मूंगा प्रवाल जीवों के खोलों के जमाव से बने 26 एटोल व 1,200 द्वीपों का देश है।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

गलत धारणा: सार्क (SAARC) का मुख्यालय भारत की राजधानी नई दिल्ली में है।

सही वैज्ञानिक तथ्य

सही तथ्य: सार्क का स्थायी सचिवालय नेपाल की राजधानी काठमांडू में है। हालांकि इसका पहला सम्मेलन 1985 में ढाका (बांग्लादेश) में हुआ था।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

गलत धारणा: डूरंड रेखा भारत और चीन के बीच की सीमा रेखा है।

सही वैज्ञानिक तथ्य

सही तथ्य: डूरंड रेखा (1893) भारत/पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच की सीमा रेखा है। भारत और चीन के बीच की उत्तर-पूर्वी सीमा मैकमोहन रेखा है।

भारत और उसके पड़ोसी देश — भू-राजनीतिक एवं क्षेत्रीय व्यवस्था

भारत एवं इसके पड़ोसी देश — भू-राजनीतिक एवं क्षेत्रीय व्यवस्था 1. उत्तरी हिमालयी क्षेत्र: नेपाल एवं भूटान नेपाल: माउंट एवरेस्ट (8,848.86 मी), काठमांडू, कोसी व गंडक नदियां आर्थिक आधार: तराई कृषि, पर्यटन; कोलकाता/हल्दिया बंदरगाह आधारित पारगमन भूटान: "वज्र की भूमि"; थिम्पू; गंगखर पुनसुम (7,570 मी अजेय शिखर) सकल राष्ट्रीय प्रसन्नता: >70% वन संरक्षण; पर्यावरण हितैषी विकास जलविद्युत निर्यात: चूखा, ताला व कुरीछु परियोजनाओं से भारत को बिजली निर्यात 2. पूर्वी डेल्टा एवं वन संपदा क्षेत्र: बांग्लादेश एवं म्यांमार बांग्लादेश: विश्व का सबसे बड़ा डेल्टा (पद्मा-यमुना-मेघना); सुंदरवन मैंग्रोव नदीय अर्थव्यवस्था: जूट ("सुनहरा रेशा"), चावल, वस्त्र, चटगांव/मोंगला बंदरगाह सीमा एवं रेल: सबसे लंबी सीमा (4,096.7 किमी); 2015 एंक्लेव संधि; मैत्री एक्सप्रेस म्यांमार: "स्वर्ण पैगोडा का देश"; नेपीडॉ; जीवनदायिनी इरावती बेसिन एक्ट ईस्ट सेतु: सागौन लकड़ी, माणिक; कलादान मल्टी-मॉडल पारगमन (सित्वे पोर्ट) 3. उत्तर-पश्चिमी नदी एवं मरु क्षेत्र: पाकिस्तान एवं अफगानिस्तान पाकिस्तान: इस्लामाबाद; सिंधु नदी (3,180 किमी) व पंचनद का विशाल नहर जाल सिंचित कृषि: सुक्कुर बैराज; पंजाब व सिंध का गेहूं, कपास व बासमती चावल सिंधु जल संधि (1960): विश्व बैंक की मध्यस्थता में ऐतिहासिक नदी जल बंटवारा अफगानिस्तान: स्थलरुद्ध पर्वतीय देश; काबुल; हिंदू कुश; 106 किमी सीमा सूखे मेवे व संपदा: केसर, पिस्ता, लापिस लाजुली; सलमा बांध व चाबहार व्यापार 4. दक्षिणी समुद्री पड़ोसी एवं सार्क (SAARC) श्रीलंका: "हिंद महासागर का मोती"; पाक जलडमरूमध्य; राम सेतु (एडम्स ब्रिज) प्रमुख बागानी फसलें: सीलोन चाय, रबर, नारियल; रत्नपुरा के नीलम व माणिक मालदीव: प्रवाल द्वीप समूह; 26 एटोल; माले; टूना मछली व पर्यटन सार्क (1985): ढाका में स्थापना; काठमांडू में सचिवालय; 8 सदस्य राष्ट्र पड़ोसी प्रथम नीति: सागर (SAGAR) समुद्री सुरक्षा एवं मानवीय साझेदारी

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
भारत दक्षिण एशिया का केंद्रीय व विशाल देश है, जो उत्तर-पश्चिम में पाकिस्तान व अफगानिस्तान; उत्तर में चीन, नेपाल व भूटान; पूर्व में बांग्लादेश व म्यांमार; और दक्षिण में श्रीलंका व मालदीव से घिरा है।
मुख्य बिंदु 2
भारत की अंतरराष्ट्रीय थल सीमा 15,106.7 किमी है, जिसमें सबसे लंबी सीमा बांग्लादेश के साथ (4,096.7 किमी) और सबसे छोटी अफगानिस्तान के साथ (106 किमी) है।
मुख्य बिंदु 3
नेपाल और भूटान दो हिमालयी भू-आवेष्ठित देश हैं, जो विदेशी समुद्री व्यापार के लिए पश्चिम बंगाल के कोलकाता और हल्दिया बंदरगाहों पर पूर्णतः निर्भर हैं।
मुख्य बिंदु 4
भूटान को भीषण आंधी-तूफान के कारण "तड़ित झंझा का देश" कहा जाता है; यहाँ भारत के सहयोग से बनी चुखा व ताला जलविद्युत परियोजनाएं इसका "सफेद सोना" हैं।
मुख्य बिंदु 5
बांग्लादेश पद्मा-जमुना-मेघना द्वारा निर्मित विश्व के सबसे बड़े डेल्टा पर स्थित है। जूट का "सुनहरा रेशा" और तैयार वस्त्र (RMG) उद्योग इसकी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं।
मुख्य बिंदु 6
म्यांमार को "स्वर्ण पैगोडा का देश" कहा जाता है और इरावती नदी इसकी जीवनरेखा है। यहाँ की मोगोक घाटी विश्व प्रसिद्ध रूबी और वनों से सागौन की लकड़ी मिलती है।
मुख्य बिंदु 7
पाकिस्तान शुष्क देश होने के कारण सिंधु नदी पर सुक्कुर बैराज बनाकर विश्व का सबसे बड़ा नहर नेटवर्क विकसित कर चुका है, इसलिए इसे "नहरों का देश" कहते हैं।
मुख्य बिंदु 8
हिंद महासागर में श्रीलंका को "मोती" व "दालचीनी का द्वीप" कहा जाता है तथा इसकी सीलोन चाय विश्व प्रसिद्ध है; वहीं मूंगा एटोल से बना मालदीव पर्यटन व टूना मछली उद्योग पर आश्रित है।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
1. भारत के साथ किस पड़ोसी देश की अंतरराष्ट्रीय थल सीमा सबसे लंबी है और इसकी लंबाई कितनी है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर:
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भारत के साथ बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय थल सीमा सबसे लंबी है। इसकी कुल लंबाई लगभग 4,096.7 किलोमीटर है (जिसमें अकेले पश्चिम बंगाल के साथ 2,217 किमी है)।


2
2. नेपाल और भूटान भू-आवेष्ठित देश होने के कारण विदेशी व्यापार हेतु भारत के किन बंदरगाहों पर निर्भर हैं?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर:
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नेपाल और भूटान अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार हेतु पश्चिम बंगाल के कोलकाता बंदरगाह (श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट) और हल्दिया बंदरगाह की शुल्क-मुक्त पारगमन सुविधा पर मुख्य रूप से निर्भर हैं।


3
3. भूटान की जलविद्युत को "सफेद सोना" क्यों कहा जाता है और भारत के सहयोग से बनी दो परियोजनाओं के नाम लिखें।
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर:
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भूटान में कोयला या खनिज तेल न होने पर भी सदानीरा पहाड़ी नदियों से प्रचुर स्वच्छ जलविद्युत बनाई जाती है, जिसे भारत को बेचकर भूटान भारी राष्ट्रीय आय कमाता है। इसलिए इसे "सफेद सोना" (White Gold) कहते हैं। दो प्रमुख परियोजनाएं: चुखा (Chukha) और ताला (Tala) परियोजनाएं।


4
4. इरावती नदी को म्यांमार की और सिंधु नदी को पाकिस्तान की "जीवनरेखा" क्यों कहा जाता है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर:
उत्तर देखें

इरावती नदी: म्यांमार की मुख्य कृषि, चावल उत्पादन, नौपरिवहन और प्रमुख बस्तियां इसी नदी की घाटी में स्थित हैं।
सिंधु नदी: वर्षा-विहीन शुष्क पाकिस्तान में सिंधु नदी और उसकी नहरों के जल पर ही देश की 80% से अधिक कृषि और खाद्यान्न निर्भर हैं।


5
5. श्रीलंका किस जलडमरूमध्य व खाड़ी द्वारा भारत से अलग है और इसकी मुख्य नकदी फसल क्या है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर:
उत्तर देखें

श्रीलंका भारत से पाक जलडमरूमध्य (Palk Strait) और मन्नार की खाड़ी (Gulf of Mannar) द्वारा अलग है। इसकी मुख्य नकदी निर्यात फसल सीलोन चाय (Ceylon Tea) है।


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अध्याय 1: Concept of History अध्याय 2: Rise of Regional Powers अध्याय 3: Establishment of Colonial Authority अध्याय 4: औपनिवेशिक अर्थव्यवस्था का स्वरूप अध्याय 5: औपनिवेशिक शासन के प्रति प्रतिक्रिया: सहयोग और विद्रोह अध्याय 6: राष्ट्रीयता का प्रारंभिक विकास अध्याय 7: भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के आदर्श और विकास अध्याय 8: सांप्रदायिकता से विभाजन अध्याय 9: भारतीय संविधान: लोकतांत्रिक ढांचा और नागरिकों के अधिकार अध्याय 10: पृथ्वी की आंतरिक संरचना अध्याय 11: अस्थिर पृथ्वी अध्याय 12: शैल (चट्टानें) अध्याय 13: वायुदाब पेटियाँ और पवन संचार अध्याय 14: बादल और वर्षा अध्याय 15: जलवायु प्रदेश अध्याय 16: मानव गतिविधियाँ एवं पर्यावरणीय अवनयन अध्याय 17: भारत के कुछ पड़ोसी देश और उनके साथ संबंध अध्याय 18: उत्तर अमेरिका महाद्वीप अध्याय 19: दक्षिण अमेरिका महाद्वीप अध्याय 20: ओशिनिया महाद्वीप

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