मुंशी प्रेमचंद (1880 - 1936)
उपन्यास सम्राट और कहानी के पितामह मुंशी प्रेमचंद का जन्म 31 जुलाई 1880 को वाराणसी के निकट लमही गाँव में हुआ था। उनका मूल नाम धनपत राय था। उन्होंने उर्दू में 'नवाब राय' और हिंदी में 'प्रेमचंद' नाम से लेखन किया। प्रेमचंद ने साहित्य को 'जीवन की आलोचना' माना और पहली बार साहित्य को महलों और तिलिस्मों से निकालकर खेत-खलिहान, किसानों, मजदूरों और दलितों के जीवन से जोड़ा।
'दो बैलों की कथा' की रचना पृष्ठभूमि:
यह कहानी सन् 1931 में लिखी गई, जब भारत में महात्मा गांधी के नेतृत्व में 'सविनय अवज्ञा आंदोलन' अपने चरम पर था। पूरा देश औपनिवेशिक दासता से मुक्ति के लिए छटपटा रहा था।
- प्रेमचंद जी ने हीरा और मोती के माध्यम से भारतीय जनता की व्यथा और आकांक्षा को स्वर दिया।
- जिस प्रकार भारतीयों को विदेशों में (जैसे दक्षिण अफ्रीका में) अपमानित किया जाता था, भरपेट भोजन नहीं मिलता था और गुलाम समझा जाता था, ठीक वही स्थिति हीरा और मोती की गया के घर और कांजीहौस में दिखाई गई है।
- कहानी में स्पष्ट संकेत है: "सीधेपन की दुनिया नहीं है।" यदि भारतीय केवल सीधे और अहिंसक बने रहे, तो अंग्रेज शासक उन्हें पशुओं की तरह जोतते रहेंगे। आजादी पाने के लिए संगठित होकर प्रतिकार करना ही होगा।