सुमित्रानंदन पंत (1900 - 1977):
छायावाद के चार प्रमुख स्तंभों में प्रकृति के सबसे अनन्य चितेरे कवि सुमित्रानंदन पंत का जन्म उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के कौसानी नामक सुरम्य पर्वतीय गाँव में हुआ था।
- बचपन से ही हिमालय की नैसर्गिक वादियों ने उनके मन में प्रकृति-सौंदर्य के प्रति गहरा अनुराग भर दिया। उन्हें 'प्रकृति का सुकुमार कवि' कहा जाता है।
- वे हिंदी के पहले साहित्यकार थे जिन्हें सन् 1968 में उनकी अमर कृति 'चिदंबरा' पर देश का सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया गया।
- उनकी प्रमुख काव्य-कृतियों में 'पल्लव', 'वीणा', 'गुंजन', 'ग्राम्या', 'युगांत' और 'लोकायतन' अत्यंत प्रसिद्ध हैं। 'ग्राम श्री' कविता उनके प्रसिद्ध काव्य-संग्रह 'ग्राम्या' से ली गई है, जिसमें उन्होंने ग्रामीण जीवन के यथार्थ और सौंदर्य का मनोहारी संगम प्रस्तुत किया है।