महादेवी वर्मा (1907 - 1987):
हिंदी साहित्य के छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों (प्रसाद, निराला, पंत और महादेवी) में महादेवी वर्मा का स्थान अद्वितीय है। उन्हें 'आधुनिक मीरा' कहा जाता है। उन्होंने 'यामा' (ज्ञानपीठ पुरस्कार), 'नीहार', 'रश्मि', 'नीरजा' और 'सांध्यगीत' जैसी अमर काव्य कृतियों की रचना की। वे केवल कवयित्री ही नहीं, बल्कि एक उच्च कोटि की गद्यकार और चित्रकार भी थीं।
तत्कालीन समाज बनाम महादेवी का परिवार:
- समाज की क्रूर स्थिति: उस समय भारतीय समाज में लड़कियों के जन्म को दुर्भाग्य माना जाता था। जन्म लेते ही उन्हें 'परमधाम' भेज दिया जाता था (अर्थात् मार दिया जाता था) अथवा उपेक्षा के अंधेरे में धकेल दिया जाता था।
- महादेवी के परिवार में विशिष्ट स्वागत:
- उनके कुल में लगभग दो सौ वर्षों तक कोई लड़की पैदा नहीं हुई थी।
- बाबा ने कुलदेवी दुर्गा की बहुत आराधना और मन्नतें माँगी थीं।
- जब महादेवी जी का जन्म हुआ, तो पूरे परिवार में अपार आनंद मनाया गया। उन्हें 'देवी' मानकर खूब लाड़-प्यार दिया गया और उन्हें वह सब करने की स्वतंत्रता मिली जो लड़कों को मिलती थी।