फणीश्वरनाथ 'रेणु' (1921 - 1977):
हिंदी साहित्य के मूर्धन्य आंचलिक कथाकार फणीश्वरनाथ 'रेणु' का जन्म बिहार के पूर्णिया जिले के औड़ाही हिंगना गाँव में हुआ था।
- उन्होंने 1942 के 'भारत छोड़ो आंदोलन' और नेपाल के राणा-विरोधी लोकतांत्रिक आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई।
- उनका उपन्यास 'मैला आँचल' (1954) हिंदी का पहला और सबसे प्रसिद्ध आंचलिक उपन्यास माना जाता है, जिसने हिंदी गद्य को नई ताजगी और मिट्टी की गंध दी।
- उनकी प्रमुख कृतियों में 'परती परिकथा', 'जुलूस', 'ठुमरी', 'आदिम रात्रि की महक' और 'तीसरी कसम उर्फ मारे गए गुलफाम' (जिस पर प्रसिद्ध फिल्म बनी) शामिल हैं।
रिपोर्ताज विधा की विशेषताएं:
'रिपोर्ताज' मूलतः फ्रेंच भाषा का शब्द है। द्वितीय विश्वयुद्ध के समय यह विधा साहित्य में आई। जब किसी घटना या आँखों देखे दृश्य का ऐसा कलात्मक, सजीव और संवेदनशील वर्णन किया जाए कि वह पाठक के हृदय को छू ले और आँखों के सामने चित्र बनकर उपस्थित हो जाए, तो उसे 'रिपोर्ताज' कहते हैं। 'इस जल प्रलय में' हिंदी का एक श्रेष्ठ रिपोर्ताज है।