संत ललद्यद (1320 - 1392):
कश्मीरी भाषा की लोकप्रिय संत-कवयित्री ललद्यद का जन्म श्रीनगर के पास स्थित 'सिमपुरा' गाँव में हुआ था। उन्हें लल्लेश्वरी, लल्ला, लल-आरिफा आदि नामों से भी जाना जाता है।
- उनका जीवन पारिवारिक अत्याचारों और संघर्षों से भरा था, जिसके बाद उन्होंने संन्यास ले लिया और शैव दर्शन तथा सूफी मत के समन्वय से एक नई मानवीय भक्ति धारा प्रवाहित की।
- उनकी काव्य-शैली को 'वाख' कहा जाता है। जिस प्रकार हिंदी में कबीर की साखियाँ, मीरा के पद और तुलसी की चौपाइयाँ प्रसिद्ध हैं, उसी प्रकार कश्मीर में ललद्यद के वाख लोक-स्मृति में जीवित हैं।
- उन्होंने संस्कृत के पांडित्य-प्रदर्शन के स्थान पर जनता की सरल कश्मीरी भाषा में उपदेश दिया। यहाँ प्रस्तुत वाखों का हिंदी अनुवाद प्रसिद्ध लेखिका मीरा कांत ने किया है।