पं. माखनलाल चतुर्वेदी (1889 - 1968):
राष्ट्रीय चेतना के अग्रदूत और ओजस्वी कवि माखनलाल चतुर्वेदी का जन्म मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले के बाबई गाँव में हुआ था। उन्हें साहित्य जगत् में 'एक भारतीय आत्मा' के उपनाम से जाना जाता है।
- वे एक समर्पित स्वतंत्रता सेनानी थे जिन्होंने महात्मा गांधी के राष्ट्रीय आंदोलनों में भाग लेते हुए अनेक बार कठोर जेल यात्राएं सहीं।
- उनकी प्रमुख काव्य-कृतियों में 'हिमकिरीटिनी', 'हिमतरंगिणी' (साहित्य अकादमी पुरस्कार), 'युगचरण' और 'समर्पण' अत्यंत प्रसिद्ध हैं। उनकी कविता 'पुष्प की अभिलाषा' ('मुझे तोड़ लेना वनमाली...') भारतीय राष्ट्रीयता का अमर गान है।
'कैदी और कोकिला' की पृष्ठभूमि:
यह कविता जेल के अंधेरे वातावरण में लिखी गई थी। उस समय ब्रिटिश सरकार भारतीय देशभक्तों को चोरों, डाकुओं और लुटेरों के साथ काल-कोठरी में बंद रखती थी और उनसे जानवरों की तरह कोल्हू और मोट खिंचवाती थी ताकि उनका मनोबल टूट जाए। किंतु स्वाभिमान से भरे कवि ने उस यातना को भी राष्ट्र-मुक्ति का पावन अनुष्ठान बना दिया।