जगदीशचंद्र माथुर (1917 - 1978):
हिंदी नाटक और रंगमंच के अप्रतिम हस्ताक्षर जगदीशचंद्र माथुर का जन्म उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के खुर्जा में हुआ था।
- वे भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के उच्च अधिकारी रहे, आकाशवाणी के महानिदेशक रहे और उन्होंने 'थिएटर' को जन-जन तक पहुँचाने में ऐतिहासिक योगदान दिया।
- उनके प्रसिद्ध नाटकों में 'कोणार्क' (1951), 'पहला राजा', 'दशरथ नंदन', 'शारदीया' शामिल हैं।
- उनके एकांकी-संग्रहों में 'भोर का तारा' और 'ओ मेरे सपने' अत्यंत प्रसिद्ध हैं। 'रीढ़ की हड्डी' उनकी सर्वाधिक अभिनीत और विचारोत्तेजक सामाजिक एकांकी है।
एकांकी विधा की विशेषताएं:
एकांकी नाटक का वह लघुरूप है जिसमें केवल एक अंक (Act) होता है। इसमें जीवन के किसी एक महत्वपूर्ण प्रसंग, समस्या या द्वंद्व को तीव्र गति, चुस्त संवादों और सीमित पात्रों के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है। इसमें कथा का आरंभ, विकास और चरमोत्कर्ष बहुत त्वरित होता है।