आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी (1907 - 1979):
हिंदी साहित्य के शीर्षस्थ निबंधकार, उपन्यासकार, समालोचक और सांस्कृतिक इतिहासकार आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का जन्म उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के 'दुबे का छपरा' गाँव में हुआ था। उन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय से ज्योतिषाचार्य की उपाधि प्राप्त की।
- सन् 1940 से 1950 तक वे विश्वकवि रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा स्थापित विश्वभारती (शांतिनिकेतन) में हिंदी भवन के निदेशक और प्राध्यापक रहे। वहाँ उन्हें गुरुदेव टैगोर और क्षितिमोहन सेन जैसे मनीषियों का सान्निध्य मिला, जिसने उनकी दृष्टि को अत्यंत विशाल और मानवतावादी बनाया।
- उनकी प्रमुख कृतियों में 'अशोक के फूल', 'कुटज', 'बाणभट्ट की आत्मकथा', 'चारु चंद्रलेख' और 'कबीर' अत्यंत प्रसिद्ध हैं।
संस्मरण का संदर्भ:
यह संस्मरण गुरुदेव के अंतिम दिनों का है जब वे अस्वस्थ थे और शांतिनिकेतन के कोलाहल से दूर सांत्वना और एकांत की तलाश में थे। द्विवेदी जी ने गुरुदेव के साथ बिताए उन पलों को बड़ी सूक्ष्मता से दर्ज किया है।