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झारखण्ड बोर्ड (JAC) • कक्षा 9 • Hindi • अध्याय 4
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

Sanwale Sapanon Ki Yaad

'साँवले सपनों की याद' प्रख्यात राजनीतिज्ञ एवं साहित्यकार जाबिर हुसैन द्वारा लिखा गया एक अत्यंत भावुक, काव्यात्मक और वैयक्तिक संस्मरण है। यह संस्मरण जून 1987 में विश्वविख्यात पक्षी विज्ञानी (Ornithologist) 'बर्ड वॉचर' सालिम अली की मृत्यु के तुरंत बाद डायरी शैली में लिखा गया था। लेखक ने सालिम अली के जीवन, उनकी प्रकृति-साधना, पक्षी-प्रेम और पर्यावरण संरक्षण के प्रति उनकी निष्ठा को काव्यात्मक गद्य में पिरोया है। सालिम अली केवल एक वैज्ञानिक नहीं थे, बल्कि वे प्रकृति के रहस्यमय संसार को अपनी आँखों में समेटने वाले एक यायावर (घुमक्कड़) साधक थे। उनका पूरा जीवन दूरबीन के पीछे बीता, जहाँ उन्होंने न जाने कितने दुर्लभ पक्षियों की खोज की और उनके संरक्षण की आवाज उठाई। इस विस्तृत अध्ययन सामग्री में JAC बोर्ड कक्षा 9 के विद्यार्थियों के लिए निम्नलिखित आयाम समाहित हैं: लेखक एवं विधा परिचय: जाबिर हुसैन की डायरी-संस्मरण शैली, काव्यात्मक भाषा और भावप्रवणता। सालिम अली का जीवन-संघर्ष एवं बर्ड वॉचर बनने की घटना: बचपन में एयरगन से नीलकंठ वाली गौरैया के घायल होने की ऐतिहासिक घटना जिसने उनके जीवन की दिशा बदल दी। पर्यावरण चेतना एवं साइलेंट वैली की रक्षा: तत्कालीन प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह से भेंट कर केरल के साइलेंट वैली को रेगिस्तानी हवाओं से बचाने की मार्मिक अपील। डी.एच. लॉरेंस से तुलना: अंग्रेजी उपन्यासकार डी.एच. लॉरेंस और उनकी पत्नी फ्रीडा का प्रसंग—"मेरी छत पर बैठने वाली गौरैया लॉरेंस के बारे में मुझसे ज्यादा जानती है।" JAC बोर्ड परीक्षापयोगी प्रश्न-उत्तर: पाठ्यपुस्तक के सभी अभ्यास प्रश्न, आश्य-स्पष्टीकरण और मूल्यपरक प्रश्न।

गले में दूरबीन और आँखों में परिंदों का संसार: एक अद्भुत पक्षी साधक की दास्तान

क्या कोई इंसान पक्षियों की बोली समझने के लिए अपनी पूरी जिंदगी घने जंगलों, बर्फीले पहाड़ों और तपते रेगिस्तानों में बिता सकता है?

एक 90 वर्ष का बूढ़ा इंसान, जिसकी देह दुर्बल हो चुकी है, पर जिसकी आँखों पर टंगी दूरबीन कभी नहीं उतरती! वह दूर क्षितिज में उड़ती हुई एक नन्ही चिड़िया के पंखों की फड़फड़ाहट में जीवन का सबसे बड़ा रहस्य खोज लेता है! यह दास्तान है भारत के 'बर्ड मैन' सालिम अली की, जिनकी मौत पर जाबिर हुसैन ने लिखा था: "सालिम अली प्रकृति की दुनिया में एक टापू बनने के बजाय अथाह सागर बनकर उभरे थे!" आइए, इस अद्भुत पक्षी प्रेमी के साँवले सपनों में उतरें!

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

  1. पर्यावरण एवं जैव-विविधता के प्रति गहरी संवेदना: आज जब प्रदूषण और जंगलों की कटाई से अनगिनत पक्षी प्रजातियाँ विलुप्त हो रही हैं, सालिम अली का जीवन हमें पक्षी संरक्षण की अनिवार्य सीख देता है।
  2. डायरी-संस्मरण विधा का बेजोड़ उदाहरण: जाबिर हुसैन की भाषा में कविता जैसा प्रवाह और उपन्यास जैसी रोचकता है, जो विद्यार्थियों की अभिव्यक्ति क्षमता को समृद्ध करती है।
  3. निस्वार्थ जीवन का प्रेरणादायी संदेश: प्रसिद्धि और धन से दूर रहकर प्रकृति और बेजुबान पक्षियों की सेवा में जीवन समर्पित करने का दुर्लभ आदर्श।
  4. JAC बोर्ड परीक्षा में उच्च प्राप्तांक: संस्मरण खंड से सालिम अली के चरित्र, साइलेंट वैली प्रसंग और लॉरेंस की गौरैया से संबंधित 5 से 8 अंक के प्रश्न हर वर्ष पूछे जाते हैं।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • संस्मरण और डायरी विधा की बुनियादी समझ (व्यक्तिगत अनुभूतियों का काव्यात्मक चित्रण)।
  • पर्यावरण संरक्षण, पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) और पक्षी विज्ञान (Ornithology) की बुनियादी अवधारणा।
  • सालिम अली की प्रसिद्ध आत्मकथा 'फॉल ऑफ अ स्पैरो' (Fall of a Sparrow) का ऐतिहासिक संदर्भ।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • सालिम अली के व्यक्तित्व और उनके प्रकृति-प्रेम के विभिन्न पक्षों को रेखांकित कर पाना।
  • बचपन की एयरगन वाली घटना से उनके जीवन में आए युगांतकारी परिवर्तन की व्याख्या करना।
  • साइलेंट वैली प्रसंग के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के प्रति सालिम अली की चिंता और चौधरी चरण सिंह के संवेदनशील व्यक्तित्व को समझना।
  • डी.एच. लॉरेंस और सालिम अली के प्रकृति-दर्शन की समानता का विश्लेषण करना।
  • JAC बोर्ड परीक्षा के सभी विश्लेषणात्मक और व्याख्यात्मक प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर लिखना।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. संस्मरण की पृष्ठभूमि एवं जाबिर ह...
2 2. सालिम अली का बर्ड वॉचर बनना: एक...
3 3. साइलेंट वैली और पूर्व प्रधानमंत्...
4 4. डी.एच. लॉरेंस से तुलना: प्रकृति...
5 5. सालिम अली का अमर व्यक्तित्व: टाप...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. संस्मरण की पृष्ठभूमि एवं जाबिर हुसैन की काव्यात्मक गद्य शैली

जाबिर हुसैन का परिचय एवं रचना का संदर्भ:

जाबिर हुसैन का जन्म सन् 1945 में बिहार के नालंदा जिले के नौनही राजगीर में हुआ था। वे अंग्रेजी साहित्य के प्राध्यापक रहे और बाद में बिहार विधानसभा के सदस्य एवं विधान परिषद के सभापति भी रहे। वे हिंदी, उर्दू और अंग्रेजी तीनों भाषाओं पर समान अधिकार रखते हैं।

'साँवले सपनों की याद' की पृष्ठभूमि:

जून 1987 में प्रसिद्ध पक्षी विज्ञानी सालिम अली का 91 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन से उत्पन्न दुःख और अवसाद को लेखक ने इस संस्मरण में व्यक्त किया।

  • 'साँवले सपने': वे सपने जो मन में एक मीठी कसक और याद बनकर बस जाते हैं। सालिम अली की मृत्यु के साथ ही पक्षियों की खोज का एक स्वर्णिम युग समाप्त हो गया।
  • काव्यात्मक भाषा: इस पाठ की भाषा गद्य होते हुए भी कविता जैसी है। लेखक ने प्रतीकों, रूपकों और बिंबों (Images) का अत्यंत सजीव प्रयोग किया है:

    "सुनहरे परिंदों के खूबसूरत पंखों पर सवार साँवले सपनों का एक हुजूम मौत की खामोश वादी की तरफ अग्रसर है। कोई रोक सके, कहाँ संभव है?"

2. सालिम अली का बर्ड वॉचर बनना: एक घायल गौरैया का चमत्कार

बचपन की वह ऐतिहासिक घटना:

सालिम अली कोई जन्मजात वैज्ञानिक नहीं थे। उनके जीवन की दिशा बचपन की एक अनायास घटी घटना ने पूरी तरह बदल दी:

  • बचपन में सालिम अली अपने मामा की दी हुई एयरगन से खेल रहे थे।
  • अचानक उनकी एयरगन से एक छर्रा छूटा और एक नीले कंठ वाली नन्ही गौरैया (Yellow-throated Sparrow) घायल होकर जमीन पर गिर पड़ी।
  • तड़पती हुई उस नन्ही चिड़िया को देखकर बालक सालिम का हृदय करुणा और पश्चाताप से भर गया। वे उसे उठाकर घर लाए, उसकी तीमारदारी की और दाना-पानी दिया।
  • जब वह गौरैया स्वस्थ होकर उड़ गई, तो सालिम के मन में पक्षियों के प्रति एक गहरा कौतूहल और प्रेम जाग उठा। वे मुंबई नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (BNHS) गए और पक्षियों के बारे में जानकारी जुटाने लगे।
  • उस घायल गौरैया ने उन्हें जीवन के नए-नए रास्तों की ओर धकेल दिया। वे पक्षियों की खोज में प्रकृति की अंतहीन गहराइयों में खो गए और भारत के सबसे महान 'बर्ड मैन' बन गए। उनकी प्रसिद्ध आत्मकथा का नाम भी इसी घटना पर आधारित है—'फॉल ऑफ अ स्पैरो' (Fall of a Sparrow)।

3. साइलेंट वैली और पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह से भेंट

साइलेंट वैली (Silent Valley) का संकट:

केरल का 'साइलेंट वैली' राष्ट्रीय उद्यान भारत के सर्वाधिक समृद्ध और संवेदनशील वर्षा-वनों में से एक है। 1970 के दशक में वहाँ एक जल-विद्युत परियोजना के कारण जंगल के नष्ट होने और रेगिस्तानी गर्म हवाओं के झोंकों से पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के तबाह होने का खतरा पैदा हो गया था।

सालिम अली और चौधरी चरण सिंह का संवाद:

सालिम अली तत्कालीन प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह से मिलने पहुँचे:

  • चौधरी चरण सिंह मिट्टी से जुड़े किसान नेता थे, जो गाँव की मिट्टी पर पानी की पहली बूँद पड़ने पर उठने वाली सोंधी सुगंध का दर्द समझते थे।
  • सालिम अली ने पर्यावरण के संभावित खतरों का ऐसा सजीव और मार्मिक चित्र खींचा कि धरतीपुत्र चौधरी चरण सिंह की आँखें नम हो गईं!
  • सालिम अली ने प्रश्न उठाया था: "अब हिमालय और लद्दाख की बर्फीली जमीनों पर जीने वाले पक्षियों की वकालत कौन करेगा? कौन बचाएगा इस सुनहरी धरती को?"
  • परिणामस्वरूप, प्रधानमंत्री ने उस परियोजना पर पुनर्विचार किया और साइलेंट वैली को राष्ट्रीय उद्यान घोषित कर संरक्षित किया गया।

4. डी.एच. लॉरेंस से तुलना: प्रकृति के साथ एकाकार जीवन

डी.एच. लॉरेंस (D.H. Lawrence) का प्रसंग:

लेखक ने सालिम अली की तुलना 20वीं सदी के महान अंग्रेजी उपन्यासकार और कवि डी.एच. लॉरेंस से की है:

  • लॉरेंस भी प्रकृति के सच्चे प्रेमी थे। उनका मानना था कि आधुनिक मनुष्य ने बौद्धिक होकर प्रकृति से अपना जीवंत संबंध तोड़ लिया है। हमें पुनः आदिम मानव की तरह प्रकृति की गोद में लौटना चाहिए।
  • लॉरेंस की मृत्यु के बाद जब पत्रकारों ने उनकी पत्नी फ्रीडा लॉरेंस से अपने पति के बारे में कुछ लिखने का अनुरोध किया, तो फ्रीडा ने कहा:

    "मेरी छत पर बैठने वाली गौरैया लॉरेंस के बारे में मुझसे कहीं ज्यादा जानती है! लॉरेंस मेरी रगों में, मेरी हड्डियों में समाए हैं। वे इतने खुले, सीधे और प्रकृति-प्रेमी इंसान थे कि उनके बारे में शब्द कम पड़ जाते हैं।"

सालिम अली और लॉरेंस का साम्य:

सालिम अली भी लॉरेंस की तरह नैसर्गिक (प्राकृतिक) जिंदगी का प्रतिरूप बन गए थे। वे प्रकृति को इंसान की दृष्टि से नहीं, बल्कि प्रकृति की दृष्टि से देखते थे। उनका मानना था कि जो लोग पक्षियों को केवल मनुष्य के मनोरंजन या स्वार्थ का साधन मानते हैं, वे उनके संगीत और सौंदर्य को कभी नहीं समझ सकते।

5. सालिम अली का अमर व्यक्तित्व: टापू नहीं, अथाह सागर

टापू बनाम अथाह सागर का रूपक:

लेखक जाबिर हुसैन ने सालिम अली के व्यक्तित्व को स्पष्ट करने के लिए एक अत्यंत सुंदर उपमा दी है:

  • टापू (Island): टापू जमीन का एक छोटा-सा टुकड़ा होता है जिसकी सीमाएं बंधी होती हैं और जो चारों ओर से पानी से घिरा सीमित होता है।
  • अथाह सागर (Ocean): सागर असीम, गहरा और अनंत होता है जिसकी कोई सीमा नहीं होती।
  • सालिम अली किसी दायरे या बंदिशों में बंधने वाले व्यक्ति नहीं थे। उनका घुमक्कड़ जीवन और प्रकृति-साधना असीम सागर की तरह फैली हुई थी।

अंतिम विदाई का काव्यात्मक दर्द:

90 वर्ष से अधिक की उम्र में भी उनके गले में दूरबीन टंगी रही। कैंसर जैसी असाध्य बीमारी भी उनके पक्षी-प्रेम को नहीं छीन सकी। मौत के अंतिम क्षणों में भी उनकी आँखें पक्षियों की हिफाजत के लिए चिंतित थीं। लेखक भावुक होकर पूछते हैं: "क्या सालिम अली फिर लौटेंगे?" जब तक वे नहीं लौटते, क्या हम उन्हें साँवले सपनों की यादों में ही जीवित रखेंगे?

महत्वपूर्ण काव्य-सिद्धांत, भावार्थ एवं व्याकरण सूत्र

सालिम अली का परिचय
विश्वविख्यात भारतीय पक्षी विज्ञानी (Ornithologist), 'बर्ड मैन ऑफ इंडिया', आत्मकथा: 'फॉल ऑफ अ स्पैरो'।
जीवन बदलने वाली घटना
बचपन में एयरगन से नीलकंठ वाली गौरैया का घायल होना जिसने उन्हें पक्षी-साधक बना दिया।
प्रमुख ऐतिहासिक प्रसंग
  1. केरल के साइलेंट वैली को बचाने हेतु पीएम चौधरी चरण सिंह से वार्ता। 2. डी.एच. लॉरेंस और फ्रीडा की गौरैया का प्रसंग।
केंद्रीय दार्शनिक रूपक
सालिम अली प्रकृति की दुनिया में एक 'टापू' बनने के बजाय 'अथाह सागर' बनकर उभरे थे।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
किस घटना ने सालिम अली के जीवन की दिशा को बदल दिया और उन्हें पक्षी प्रेमी बना दिया? (NCERT अभ्यास प्रश्न)
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: बचपन की एक साधारण किंतु मर्मस्पर्शी घटना ने सालिम अली के जीवन की दिशा को सदा के लिए बदल दिया:

  1. एयरगन का प्रहार: बचपन में सालिम अली अपनी एयरगन से खेल रहे थे। अचानक उनके हाथों से चली गोली से एक नीले कंठ वाली गौरैया घायल होकर जमीन पर गिर पड़ी।
  2. करुणा और पश्चाताप: तड़पती हुई उस निरीह चिड़िया को देखकर बालक सालिम का कोमल हृदय दया और पश्चाताप से द्रवित हो उठा। उन्होंने उसे उठाया, पानी पिलाया और उसके घावों की सेवा की।
  3. जिज्ञासा का जन्म: गौरैया के स्वस्थ होने के बाद सालिम के मन में पक्षियों के संसार के प्रति अगाध जिज्ञासा जाग उठी। उन्होंने विभिन्न पक्षियों के घोंसलों, भोजन और आदतों का अध्ययन करना शुरू किया। इस प्रकार एक घायल गौरैया ने उन्हें शिकार के रास्ते से हटाकर प्रकृति और पक्षियों के सबसे बड़े संरक्षक और विश्वविख्यात 'बर्ड वॉचर' के रूप में स्थापित कर दिया।
उदाहरण 2
सालिम अली ने पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के सामने पर्यावरण से संबंधित किन संभावित खतरों का चित्र खींचा होगा कि जिससे उनकी आँखें नम हो गई थीं?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: सालिम अली ने तत्कालीन प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के सामने केरल के 'साइलेंट वैली' पर मंडरा रहे निम्नलिखित विनाशकारी खतरों का सजीव चित्र प्रस्तुत किया था:

  1. पारिस्थितिक संतुलन का विनाश: वहाँ प्रस्तावित जल-विद्युत परियोजना के कारण घने सदाबहार वर्षा-वन जलमग्न हो जाएँगे और अनगिनत दुर्लभ वन्यजीव तथा पक्षी प्रजातियाँ सदा के लिए विलुप्त हो जाएँगी।
  2. रेगिस्तानी गर्म हवाओं का प्रकोप: पेड़ों के कटने से रेगिस्तान की धूल भरी गर्म हवाएँ उस शांत और शीतल घाटी को झुलसा देंगी, जिससे वर्षा चक्र बिगड़ जाएगा।
  3. मिट्टी के सपूत का दर्द: चौधरी चरण सिंह स्वयं गाँव की मिट्टी से जुड़े किसान नेता थे। जब सालिम अली ने पक्षियों और पेड़ों के उजड़ने का हृदयविदारक दृश्य खींचा, तो धरती की सोंधी खुशबू को प्यार करने वाले प्रधानमंत्री का हृदय पिघल गया और उनकी आँखें नम हो गईं।
उदाहरण 3
आशय स्पष्ट कीजिए: 'सालिम अली प्रकृति की दुनिया में एक टापू बनने की बजाए अथाह सागर बनकर उभरे थे।' (JAC Board High-Yield Question)
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: इस काव्यात्मक कथन के माध्यम से लेखक जाबिर हुसैन ने सालिम अली के व्यक्तित्व के असीम विस्तार और गहनता को व्यक्त किया है:

  1. टापू की सीमितता: टापू समुद्र के बीच में स्थित जमीन का एक छोटा, संकुचित और घिरा हुआ टुकड़ा होता है। टापू बनने का अर्थ है अपने आपको किसी एक पद, शहर या निश्चित सीमाओं तक सीमित कर लेना।
  2. सागर की असीमता: सागर की न कोई सीमा होती है, न कोई किनारा। वह गहरा, विशाल और अनंत होता है।
  3. सालिम अली का साधना-क्षेत्र: सालिम अली किसी कार्यालय या प्रयोगशाला की चारदीवारी में बंधकर नहीं रहे। उनका अनुसंधान-क्षेत्र संपूर्ण भारत के जंगल, पहाड़, रेगिस्तान और नदियाँ थीं। 90 वर्ष की आयु में भी वे निरंतर यायावरी (घुमक्कड़ी) करते रहे। उनका प्रकृति-प्रेम सागर की भाँति गहरा, विशुद्ध और अनंत था।
उदाहरण 4
फ्रीडा ने ऐसा क्यों कहा होगा कि 'मेरी छत पर बैठने वाली गौरैया लॉरेंस के बारे में मुझसे ज्यादा जानती है'?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: डी.एच. लॉरेंस की पत्नी फ्रीडा ने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि:

  1. लॉरेंस का प्रकृति से गहरा एकाकार: लॉरेंस का स्वभाव अत्यंत सीधा, सरल और बनावट-मुक्त था। वे इंसानों से ज्यादा समय प्रकृति, खुले आकाश और छत पर चहकने वाले पक्षियों के साथ बिताते थे।
  2. मूक आत्मिक संवाद: लॉरेंस और उस गौरैया के बीच शब्दों के बिना एक गहरा भावात्मक और नैसर्गिक रिश्ता बन चुका था। गौरैया उनके साथ बिना किसी डर के खेलती थी।
  3. अहंकार-रहित स्वीकृति: फ्रीडा यह स्वीकार करने में संकोच नहीं करतीं कि लॉरेंस का आंतरिक व्यक्तित्व इतना विशाल और प्रकृति-तुल्य था कि उसे कोई इंसान अपनी सीमित बुद्धि से पूरी तरह नहीं समझ सकता था; उसे केवल प्रकृति और पक्षी ही अपनी सहज संवेदना से जान सकते थे।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

सालिम अली को केवल एक साधारण चिड़िया पकड़ने वाला शिकारी समझना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

सालिम अली भारत के सर्वोच्च पक्षी विज्ञानी (Ornithologist) और पद्म विभूषण से सम्मानित अंतरराष्ट्रीय स्तर के वैज्ञानिक व पर्यावरणविद् थे।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

साइलेंट वैली को उत्तर भारत की कोई घाटी समझ लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

साइलेंट वैली केरल के पलक्कड़ जिले में स्थित पश्चिमी घाट का एक अत्यंत प्रसिद्ध सदाबहार उष्णकटिबंधीय वर्षा-वन राष्ट्रीय उद्यान है।

साँवले सपनों की याद: सालिम अली का जीवन-वृत्त एवं पर्यावरण चेतना

घायल गौरैया का कायाकल्प • बचपन में एयरगन का प्रहार • नीलकंठ वाली गौरैया का गिरना • पश्चाताप, करुणा और सेवा • शिकार छोड़कर बने पक्षी-साधक • प्रसिद्ध आत्मकथा: 'फॉल ऑफ अ स्पैरो' करुणा से विज्ञान की यात्रा साइलेंट वैली & पर्यावरण 1. केरल के वर्षा वनों पर संकट: • रेगिस्तानी गर्म हवाओं का खतरा। 2. पीएम चौधरी चरण सिंह से संवाद: • मिट्टी के सपूत की आँखें नम हुईं। • प्रकृति की रक्षा हेतु परियोजना रद्द। 3. पक्षियों के सच्चे वकील: • लद्दाख व हिमालय के वन्यजीव रक्षक। राष्ट्रीय स्तर पर पर्यावरण संरक्षण टापू नहीं, अथाह सागर • 91 वर्ष की अनवरत साधना • गले में दूरबीन और आँखों में क्षितिज • डी.एच. लॉरेंस से साम्य • प्रकृति को प्रकृति की दृष्टि से देखना • साँवले सपनों की अमर विरासत प्रकृति के अमर यायावर साधक

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
जाबिर हुसैन ने जून 1987 में प्रसिद्ध पक्षी विज्ञानी सालिम अली की मृत्यु के तुरंत बाद यह भावुक संस्मरण डायरी शैली में लिखा।
मुख्य बिंदु 2
सालिम अली को भारत का 'बर्ड मैन' कहा जाता है, जिनका संपूर्ण जीवन पक्षियों और प्रकृति के रहस्यों को खोजने में बीता।
मुख्य बिंदु 3
बचपन में अपनी एयरगन से एक नीलकंठ वाली गौरैया के घायल होने की घटना ने सालिम अली को पक्षी प्रेमी बना दिया।
मुख्य बिंदु 4
उन्होंने अपनी प्रसिद्ध आत्मकथा का नाम 'फॉल ऑफ अ स्पैरो' (Fall of a Sparrow) रखा।
मुख्य बिंदु 5
सालिम अली ने तत्कालीन प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह से मिलकर केरल के 'साइलेंट वैली' को रेगिस्तानी हवाओं से बचाने की मार्मिक अपील की थी।
मुख्य बिंदु 6
चौधरी चरण सिंह किसान नेता थे और पर्यावरण के संभावित खतरों को सुनकर उनकी आँखें नम हो गई थीं।
मुख्य बिंदु 7
लेखक ने सालिम अली की तुलना अंग्रेजी के महान प्रकृति-प्रेमी उपन्यासकार डी.एच. लॉरेंस से की है।
मुख्य बिंदु 8
लॉरेंस की पत्नी फ्रीडा ने कहा था कि उनकी छत पर बैठने वाली गौरैया लॉरेंस के बारे में उनसे भी ज्यादा जानती है।
मुख्य बिंदु 9
सालिम अली किसी सीमित दायरे (टापू) में बंधने वाले व्यक्ति नहीं थे, बल्कि वे प्रकृति की दुनिया में एक 'अथाह सागर' बनकर उभरे थे।
मुख्य बिंदु 10
90 वर्ष से अधिक की आयु में भी उनकी आँखों पर दूरबीन चढ़ी रही और वे अंतिम सांस तक पक्षियों की सुरक्षा के लिए समर्पित रहे।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
साँवले सपनों की याद पाठ के लेखक कौन हैं और यह किस विधा में लिखा गया है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर:

इस पाठ के लेखक जाबिर हुसैन हैं और यह डायरी शैली में लिखा गया संस्मरण है।


2
सालिम अली की आत्मकथा का क्या नाम है?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर:

सालिम अली की आत्मकथा का नाम 'फॉल ऑफ अ स्पैरो' (Fall of a Sparrow) है।


3
सालिम अली केरल की किस घाटी को बचाने के लिए प्रधानमंत्री से मिले थे?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर:

सालिम अली केरल के 'साइलेंट वैली' (Silent Valley) राष्ट्रीय उद्यान को रेगिस्तानी हवाओं के झोंकों से बचाने हेतु मिले थे।


4
लेखक ने सालिम अली के व्यक्तित्व को किसके समान बताया है—टापू या सागर?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर:

लेखक ने बताया है कि सालिम अली प्रकृति की दुनिया में किसी सीमित 'टापू' की बजाय एक 'अथाह सागर' बनकर उभरे थे।


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