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झारखण्ड बोर्ड (JAC) • कक्षा 9 • Hindi • अध्याय 5
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

Nana Saheb Ki Putri Devi Maina Ko Bhasm Kar Diya Gaya

'नाना साहब की पुत्री देवी मैना को भस्म कर दिया गया' विदुषी लेखिका चपला देवी द्वारा रचित सन् 1857 के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम (गदर) की एक अत्यंत मार्मिक, ऐतिहासिक और रोंगटे खड़े कर देने वाली रिपोर्ताज शैली की रचना है। सन् 1857 के विप्लव में जब कानपुर के प्रमुख क्रांतिकारी नेता धुंधूंपंत नाना साहब अंग्रेजों के भीषण दमन के बाद बिठूर से गुप्त रूप से निकल गए, तो उनकी नन्हीं, अत्यंत रूपवती और साहसी पुत्री 'मैना' बिठूर के राजमहल में अकेली छूट गई। क्रूर अंग्रेज जनरल आउटरम और सेनापति हे ने तोपों से पूरे राजमहल को जमींदोज कर दिया और अंत में उस अबोध, देशभक्त बालिका मैना को लोहे के पिंजरे में कैद कर आग की धधकती लपटों में जीवित भस्म कर दिया! इस विस्तृत अध्ययन सामग्री में JAC बोर्ड कक्षा 9 के विद्यार्थियों के लिए निम्नलिखित प्रमुख बिंदु समाहित हैं: रचनाकार एवं विधा परिचय: चपला देवी की रिपोर्ताज-शैली, ऐतिहासिक दस्तावेज और देशभक्तिपूर्ण यथार्थवाद। ऐतिहासिक संदर्भ: सन् 1857 का कानपुर-बिठूर विद्रोह, नाना साहब की भूमिका और अंग्रेजों का अमानवीय प्रतिशोध। देवी मैना का अदम्य साहस एवं तार्किकता: अंग्रेज सेनापति सर टॉमस हे के समक्ष राजमहल की निरपराधता और जड़ पदार्थों पर दया करने की अद्भुत दलीलें। सर टॉमस हे की पुत्री 'मेरी' और मैना की मित्रता: मैना द्वारा प्रेम-पत्र दिखाना और सेनापति हे के हृदय में वात्सल्य भाव का उदय। अंग्रेज सरकार की क्रूरता और अंतिम बलिदान: लॉर्ड कैनिंग का क्रूर फरमान, जनरल आउटरम द्वारा मैना की गिरफ्तारी और जलती चिता में भस्म होने का अमर बलिदान। JAC बोर्ड परीक्षा के सभी महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर एवं ऐतिहासिक टिप्पणियाँ।

आग की लपटों में मुस्कुराती नन्हीं वीरांगना: 1857 के स्वतंत्रता संग्राम का अमर बलिदान

क्या कोई साम्राज्य इतना निर्दयी और कायर हो सकता है कि वह अपनी तोपों का मुंह एक निहत्थी, मासूम 12-13 वर्ष की बालिका की ओर मोड़ दे?

सन् 1857 में ब्रिटिश हुकूमत की क्रूरता ने सारी मानवीय सीमाएं लांघ दी थीं। बिठूर के विशाल राजमहल के मलबे पर जब तोपें गरज रही थीं, तो एक नन्हीं बालिका मैना सीना तानकर अंग्रेज सेनापति के सामने खड़ी हो गई और बोली—"इस निर्जीव पत्थर के महल ने आपका क्या बिगाड़ा है? इसे क्यों तोप से उड़ा रहे हो?" और जब क्रूर आउटरम ने उसे आग की धधकती भट्टी में झोंक दिया, तो उसने चीखने के बजाय शांत भाव से मातृभूमि के लिए प्राण न्यौछावर कर दिए! आइए, नन्हीं देवी मैना के अमर शौर्य को नमन करें!

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

  1. 1857 के स्वतंत्रता संग्राम का प्रामाणिक ऐतिहासिक दस्तावेज: यह पाठ विद्यार्थियों को आजादी के मूल्य और भारतीय वीरांगनाओं के असीम त्याग से परिचित कराता है।
  2. अंग्रेजी औपनिवेशिक शासन की अमानवीय क्रूरता का पर्दाफाश: इतिहास के उन पन्नों को उजागर करना जिन्हें अक्सर दबाने का प्रयास किया गया।
  3. बाल-मनोविज्ञान और अदम्य तार्किक साहस: मैना का चरित्र यह सिखाता है कि सत्य, न्याय और देशप्रेम की कोई आयु नहीं होती; एक बालिका भी विदेशी जनरलों को निरुत्तर कर सकती है।
  4. JAC बोर्ड परीक्षा में उच्च भारांक: इस पाठ से मैना और सेनापति हे के संवाद, लॉर्ड कैनिंग के आदेश और मैना के बलिदान पर आधारित 5 से 8 अंक के प्रश्न प्रतिवर्ष पूछे जाते हैं।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • सन् 1857 के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम (सिपाही विद्रोह) की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि।
  • नाना साहब (धुंधूंपंत), तात्या टोपे, बिठूर और कानपुर के संघर्ष का ज्ञान।
  • रिपोर्ताज (Reportage) विधा—तथ्यों पर आधारित जीवंत और संवेदनशील ऐतिहासिक विवरण।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • देवी मैना के अदम्य साहस, वाकपटुता और निर्भीक देशभक्ति का विश्लेषण कर पाना।
  • अंग्रेज सेनापति सर टॉमस हे के मानवीय दृष्टिकोण और जनरल आउटरम की क्रूरता में अंतर स्पष्ट करना।
  • अंग्रेज सरकार द्वारा नाना साहब की हर निशानी को मिटाने के पीछे छिपे भय और प्रतिशोध को समझना।
  • तत्कालीन समाचार पत्रों (जैसे लंदन का 'टाइम्स') के औपनिवेशिक और पक्षपाती दृष्टिकोण की समीक्षा करना।
  • JAC बोर्ड परीक्षा के सभी संभावित प्रश्नों के सटीक और प्रभावशाली उत्तर तैयार करना।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: 1857 का गदर...
2 2. मैना और सेनापति सर टॉमस हे का ऐत...
3 3. जनरल आउटरम का प्रवेश और राजमहल क...
4 4. लंदन के 'टाइम्स' अखबार का क्रूर...
5 5. मैना की गिरफ्तारी एवं जीवित भस्म...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: 1857 का गदर एवं बिठूर का विध्वंस

सन् 1857 का स्वतंत्रता संग्राम:

सन् 1857 में कानपुर में नाना साहब धुंधूंपंत के नेतृत्व में भारतीय क्रांतिकारियों ने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के विरुद्ध भीषण विद्रोह किया। कानपुर में अंग्रेजों की पराजय के बाद जब ब्रिटिश सेना ने भारी कुमुक के साथ पुनः आक्रमण किया, तो भीषण कत्लेआम हुआ। नाना साहब पराजित होकर नेपाल के जंगलों की ओर अज्ञातवास में चले गए।

बिठूर के राजमहल का प्रसंग:

नाना साहब जल्दबाजी में अपनी नन्हीं पुत्री 'मैना' को साथ नहीं ले जा सके और वह बिठूर के राजमहल में ही रह गई।

  • कानपुर में भीषण रक्तपात करने के बाद अंग्रेजों की सेना प्रतिशोध की ज्वाला में जलती हुई बिठूर पहुँची।
  • अंग्रेजों का एकमात्र उद्देश्य था: नाना साहब का वंश और उनकी संपत्ति का नामोनिशान मिटा देना!
  • अंग्रेज सैनिकों ने राजमहल को लूट लिया, किंतु जब वे तोपों से महल को उड़ाने की तैयारी करने लगे, तभी महल के बरामदे में एक अत्यंत सुंदर और सुकुमार बालिका आकर खड़ी हो गई।

2. मैना और सेनापति सर टॉमस हे का ऐतिहासिक संवाद

बालिका मैना का तार्किक साहस:

जब अंग्रेज सेनापति सर टॉमस हे ने तोप दागने का हुक्म दिया, तो मैना ने अत्यंत शांत, मीठी और स्पष्ट आवाज में प्रार्थना की:

"कृपा करके इस सुंदर राजमहल को मत तोड़िए। आपके विरुद्ध जिन्होंने शस्त्र उठाए थे, वे दोषी हैं; परंतु इस जड़ (निर्जीव) पत्थर-चूने के महल ने आपका क्या बिगाड़ा है? यह तो बिल्कुल निरपराध है!"

सेनापति हे का विस्मय और मैना का रहस्योद्घाटन:

सेनापति हे बालिका के अद्भुत रूप, निर्भीकता और तार्किक वाकपटुता को देखकर स्तब्ध रह गए। उन्होंने कहा कि उनके पास सरकार का सख्त आदेश है कि नाना साहब की हर निशानी को मिटा दिया जाए। तब मैना ने सेनापति हे को उनके नाम से पुकारते हुए कहा:

  • "जनरल हे! क्या आपने मुझे नहीं पहचाना? मैं आपकी स्वर्गीय पुत्री 'मेरी' (Mary) की घनिष्ठ सहेली मैना हूँ!"
  • "जब मेरी जीवित थी, तब आप हमारे यहाँ आते थे और मुझे अपनी पुत्री की तरह गोद में बिठाते थे। मेरी मुझे बहुत प्यार करती थी और मरने से पहले उसने मुझे एक चिट्ठी लिखी थी, जो आज भी मेरे पास सुरक्षित है!"

यह सुनकर सेनापति हे का हृदय वात्सल्य और पश्चाताप से काँप उठा। उन्होंने मैना को आश्वासन दिया कि वे व्यक्तिगत रूप से उसकी रक्षा का हर संभव प्रयास करेंगे, किंतु सरकारी आदेश के आगे वे भी विवश हैं।

3. जनरल आउटरम का प्रवेश और राजमहल का विध्वंस

क्रूर जनरल आउटरम का आगमन:

तभी वहाँ अंग्रेज सेना का प्रधान सेनापति जनरल आउटरम दल-बल के साथ आ धमका। आउटरम स्वभाव से अत्यंत क्रूर, अहंकारी और प्रतिशोधी था।

  • आउटरम ने सेनापति हे से पूछा कि अभी तक महल को तोपों से क्यों नहीं उड़ाया गया?
  • हे ने महल और बालिका को छोड़ने की वकालत की, जिसे आउटरम ने यह कहकर खारिज कर दिया कि गवर्नर-जनरल लॉर्ड कैनिंग का स्पष्ट आदेश है कि नाना साहब की स्मृति तक को नष्ट कर दिया जाए।
  • सेनापति हे भारी मन से वहाँ से चले गए।

तोपों का भीषण प्रहार:

आउटरम के आदेश पर अंग्रेजों की तोपों ने बिठूर के उस भव्य और कलात्मक राजमहल पर गोलों की बरसात कर दी। कुछ ही घंटों में नाना साहब का वह ऐतिहासिक महल मिट्टी के ढेर में तब्दील हो गया! किंतु बालिका मैना उस मलबे में कहीं विलीन हो गई और अंग्रेज उसे पकड़ नहीं सके।

4. लंदन के 'टाइम्स' अखबार का क्रूर पक्षपाती दृष्टिकोण

'टाइम्स' (लंदन) की 3 सितंबर की रिपोर्ट:

लेखिका ने तत्कालीन लंदन के प्रसिद्ध समाचार पत्र 'टाइम्स' का उल्लेख किया है, जिसने अंग्रेजों की प्रतिशोध की अंधी मानसिकता को उजागर किया:

  • 'टाइम्स' ने लिखा था कि कानपुर में अंग्रेजों के नरसंहार के बदले नाना साहब के सगे-संबंधियों और मित्रों में से किसी को भी जीवित नहीं छोड़ा जाना चाहिए।
  • अखबार ने सर टॉमस हे की आलोचना की कि वे एक विद्रोही की लड़की पर दया दिखाकर सेनापति के कर्तव्य से विमुख हो रहे हैं।
  • अंग्रेज संसद और जनता में विद्रोहियों के प्रति इतनी नफरत थी कि वे एक मासूम अबोध बच्ची को भी मौत की सजा देने की वकालत कर रहे थे।

5. मैना की गिरफ्तारी एवं जीवित भस्म होने का अमर बलिदान

मलबे पर रोती मैना की गिरफ्तारी:

सितंबर की एक पूर्णिमा की रात, जब चारों ओर सन्नाटा था, मैना अपने ध्वस्त राजमहल के मलबे पर बैठकर फूट-फूटकर रो रही थी।

  • आउटरम के सैनिकों ने उसे चारों ओर से घेर लिया।
  • आउटरम ने उससे नाना साहब और उनके खजाने के बारे में कठोरता से पूछताछ की, किंतु स्वाभिमानी मैना ने अपना मुँह नहीं खोला। उसने केवल एक ही प्रार्थना की: "मुझे आज की रात इस मलबे पर जी भरकर रो लेने दीजिए।"
  • पत्थर दिल आउटरम ने उसकी प्रार्थना ठुकरा दी और उसे हथकड़ियों में जकड़कर कानपुर के किले में बंद कर दिया।

आग की लपटों में जीवित भस्म:

गवर्नर-जनरल लॉर्ड कैनिंग के निर्देश पर मैना को मृत्युदंड दिया गया।

  • कानपुर के किले में धधकती आग की भट्टी तैयार की गई।
  • उस नन्हीं बालिका को लोहे के शिकंजे में बांधकर आग की विकराल लपटों में झोंक दिया गया!
  • वहाँ उपस्थित प्रत्यक्षदर्शियों ने देखा कि वह नन्हीं बालिका आग की लपटों में जलते हुए भी एक बार भी नहीं चीखी, बल्कि उसने शांत और देवी-तुल्य मुखमुद्रा से मातृभूमि पर अपने प्राण न्यौछावर कर दिए!
  • इसीलिए लेखिका ने लिखा: "उस दिन कानपुर के किले में एक अबोध बालिका नहीं, बल्कि भारत के स्वाभिमान की साक्षात देवी मैना भस्म होकर अमर हो गई!"

महत्वपूर्ण काव्य-सिद्धांत, भावार्थ एवं व्याकरण सूत्र

कहानी के मुख्य पात्र
देवी मैना (नाना साहब की 12 वर्षीय साहसी पुत्री), नाना साहब धुंधूंपंत (1857 के नेता), सर टॉमस हे (दयालु अंग्रेज सेनापति), मेरी (हे की पुत्री व मैना की सहेली), जनरल आउटरम (निर्दयी अंग्रेज कमांडर), लॉर्ड कैनिंग (गवर्नर-जनरल)।
मैना की 3 अकाट्य दलीलें
  1. महल जड़ व निरपराध है, उसने अंग्रेजों का कोई अहित नहीं किया। 2. दोषी शस्त्र उठाने वाले हैं, निर्जीव पत्थर नहीं। 3. वह सेनापति हे की पुत्री मेरी की सहेली है और हे उसके धर्म-पिता समान हैं।
ऐतिहासिक स्थल
बिठूर (कानपुर के निकट गंगा तट पर नाना साहब का मुख्यालय व महल)।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
बालिका मैना ने सेनापति हे को कौन-कौन से तर्क देकर महल की रक्षा के लिए प्रेरित किया? (NCERT अभ्यास प्रश्न)
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: बालिका मैना ने सेनापति सर टॉमस हे को निम्नलिखित अत्यंत तार्किक और भावुक तर्क दिए:

  1. जड़ पदार्थ की निरपराधता का तर्क: मैना ने कहा कि अंग्रेजों के विरुद्ध जिन लोगों ने हथियार उठाए थे, वे दोषी हो सकते हैं; परंतु इस निर्जीव, अचेतन पत्थर-ईंट के महल ने अंग्रेजों का क्या अपराध किया है? इसे तोप से उड़ाना सर्वथा अनुचित है।
  2. आश्रयहीनता की करुण पुकार: यह स्थान उसका पैतृक घर है जहाँ उसका बचपन बीता है, अतः उसे इस घर से बहुत प्यार है।
  3. पारिवारिक मित्रता का स्मरण: मैना ने याद दिलाया कि सेनापति हे की स्वर्गीय पुत्री 'मेरी' उसकी घनिष्ठ सहेली थी। हे स्वयं पूर्व में नाना साहब के महल में आते थे और मैना को अपनी बेटी की तरह स्नेह देते थे। मैना के पास मेरी की अंतिम चिट्ठी आज भी धरोहर के रूप में सुरक्षित है।
उदाहरण 2
मैना जड़ प्रतिपदार्थ (महल) को बचाना चाहती थी पर अंग्रेज उसे नष्ट करना चाहते थे, क्यों? (JAC Board High-Yield Question)
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: मैना द्वारा महल को बचाने का कारण: महल मैना का जन्मस्थान और उसकी बाल-स्मृतियों का घर था। वह एक जड़ और निर्दोष वस्तु थी जिसने किसी का कोई अहित नहीं किया था।

अंग्रेजों द्वारा महल को नष्ट करने का कारण:

  1. प्रतिशोध और भय की भावना: नाना साहब 1857 के गदर के प्रमुख महानायक थे जिनसे अंग्रेज थर-थर काँपते थे। अंग्रेज नाना साहब से जुड़े हर प्रतीक, निशानी और स्मृति को समूल नष्ट कर देना चाहते थे ताकि भविष्य में कोई भारतीय पुनः विद्रोह का साहस न कर सके।
  2. ब्रिटिश सत्ता का दंभ: लॉर्ड कैनिंग और अंग्रेज संसद भारतीयों के मन में ब्रिटिश शक्ति का ऐसा खौफ पैदा करना चाहते थे कि विद्रोही नेताओं के घर-बार को राख का ढेर बना दिया जाए।
उदाहरण 3
सर टॉमस हे के व्यक्तित्व पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: सर टॉमस हे एक अंग्रेज सेनापति होने के बावजूद एक संवेदनशील, दयालु और सहृदय पिता थे:

  1. कर्तव्य और मानवीयता का द्वंद्व: यद्यपि वे ब्रिटिश सेना के अधिकारी थे, किंतु जब मैना ने उनकी पुत्री मेरी का प्रसंग याद दिलाया, तो उनका कठोर फौजी हृदय वात्सल्य और ममता से भर गया।
  2. न्यायप्रिय दृष्टिकोण: उन्होंने आउटरम के समक्ष स्पष्ट कहा कि एक अबोध बालिका और निर्दोष महल पर तोप दागना कायरता है।
  3. सहानुभूतिपूर्ण विवशता: उन्होंने मैना को जीवन-दान दिलाने का हर संभव प्रयास किया, किंतु गवर्नर-जनरल के सख्त आदेशों के आगे वे विवश थे। उनका चरित्र यह सिद्ध करता है कि शत्रु सेना में भी मानवीयता जीवित हो सकती है।
उदाहरण 4
टाइम्स पत्र ने 3 सितंबर के अंक में क्या लिखा था और उससे अंग्रेजों की कौन-सी मानसिकता उजागर होती है?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: लंदन के 'टाइम्स' अखबार ने लिखा था कि कानपुर के हत्याकांड के बदले नाना साहब के किसी भी संबंधी या मित्र पर दया नहीं दिखाई जानी चाहिए। अखबार ने सेनापति हे की आलोचना की थी कि वे एक विद्रोही की लड़की पर व्यर्थ दया दिखा रहे हैं। उजागर होने वाली मानसिकता: इससे अंग्रेजों की अमानवीय, बर्बर, प्रतिशोधी और फासीवादी मानसिकता उजागर होती है, जहाँ वे न्याय और मानवता को भूलकर एक नन्हीं मासूम बच्ची के खून के प्यासे हो गए थे।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

सेनापति हे और जनरल आउटरम को एक ही व्यक्ति समझ लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

सेनापति हे दयालु और संवेदनशील थे जो मैना को बचाना चाहते थे, जबकि जनरल आउटरम अत्यंत निर्दयी और क्रूर था जिसने महल तोड़ा और मैना को जलाया।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

यह समझना कि मैना युद्ध के मैदान में तलवार लेकर लड़ रही थी।

सही वैज्ञानिक तथ्य

मैना ने तलवार से नहीं, बल्कि अपनी वाकपटुता, तार्किकता, निर्भीकता और आत्म-बलिदान से अंग्रेजों के नैतिक अहंकार को चकनाचूर किया।

देवी मैना का अमर बलिदान: बिठूर विध्वंस एवं तार्किक शौर्य

देवी मैना का तार्किक शौर्य • 12 वर्षीय अबोध वीरांगना • बिठूर महल में अकेली डटी रही • तोपों के आगे सीना तानकर अकाट्य दलीलें देना: • "निर्जीव पत्थर ने क्या बिगाड़ा?" • सेनापति हे को निरुत्तर करना स्वाभिमान और न्याय की मूर्ति दो विरोधी दृष्टिकोण 1. सर टॉमस हे (संवेदनशील): • पुत्री 'मेरी' की सहेली के प्रति वात्सल्य। • महल व बालिका की रक्षा का प्रयास। 2. जनरल आउटरम (क्रूर व प्रतिशोधी): • तोपों से बिठूर राजमहल का विध्वंस। • मैना को बेड़ियों में जकड़ना। कर्तव्य बनाम अमानवीय क्रूरता अग्नि में अमर बलिदान • मलबे पर रात में विलाप • आउटरम द्वारा क्रूर गिरफ्तारी • कानपुर किले में धधकती भट्टी • शांत भाव से अग्नि में प्रवेश • स्वतंत्रता संग्राम की अमर देवी 1857 की अमर शहीदांगना

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
सन् 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में कानपुर के विद्रोही नेता नाना साहब पराजित होकर नेपाल चले गए और उनकी पुत्री मैना बिठूर में रह गई।
मुख्य बिंदु 2
अंग्रेज सेना ने बिठूर पहुँचकर नाना साहब के विशाल राजमहल को तोपों से उड़ाने की तैयारी की।
मुख्य बिंदु 3
नाना साहब की 12 वर्षीय रूपवती पुत्री मैना ने सेनापति सर टॉमस हे के सामने आकर महल को न तोड़ने की अकाट्य तार्किक दलीलें दीं।
मुख्य बिंदु 4
मैना ने तर्क दिया कि दोषी हथियार उठाने वाले हैं, यह निर्जीव और निरपराध पत्थर का महल नहीं।
मुख्य बिंदु 5
मैना ने सेनापति हे को उनकी स्वर्गीय पुत्री 'मेरी' की मित्रता और अपनी पुरानी आत्मीयता का स्मरण कराया।
मुख्य बिंदु 6
सेनापति हे का हृदय पिघल गया और उन्होंने मैना तथा महल की रक्षा का प्रयास किया।
मुख्य बिंदु 7
क्रूर जनरल आउटरम ने लॉर्ड कैनिंग के आदेश पर तोपों से बिठूर के पूरे राजमहल को मलबे के ढेर में बदल दिया।
मुख्य बिंदु 8
लंदन के 'टाइम्स' अखबार ने अंग्रेजों की प्रतिशोध की अंधी मानसिकता को दर्शाते हुए विद्रोहियों के संपूर्ण संहार की वकालत की।
मुख्य बिंदु 9
पूर्णिमा की रात ध्वस्त महल के मलबे पर रोते हुए मैना को आउटरम ने गिरफ्तार कर लिया।
मुख्य बिंदु 10
कानपुर के किले में धधकती आग में मैना को जीवित भस्म कर दिया गया, जहाँ उसने शांत भाव से मातृभूमि के लिए प्राण न्यौछावर कर दिए।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
देवी मैना किसकी पुत्री थीं?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर:

देवी मैना 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख नेता नाना साहब (धुंधूंपंत) की पुत्री थीं।


2
नाना साहब का राजमहल कहाँ स्थित था?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर:

नाना साहब का राजमहल कानपुर के निकट बिठूर में गंगा नदी के तट पर स्थित था।


3
सेनापति हे की स्वर्गीय पुत्री का क्या नाम था?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर:

सेनापति हे की स्वर्गीय पुत्री का नाम मेरी (Mary) था, जो मैना की अभिन्न सहेली थी।


4
अंग्रेजों ने मैना को किस प्रकार का दंड दिया?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर:

अंग्रेजों ने कानपुर के किले में मैना को धधकती आग की भट्टी में जीवित भस्म कर दिया।


अध्याय का अध्ययन पूर्ण हुआ?
अभ्यास के लिए तैयार?

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