सन् 1857 का स्वतंत्रता संग्राम:
सन् 1857 में कानपुर में नाना साहब धुंधूंपंत के नेतृत्व में भारतीय क्रांतिकारियों ने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के विरुद्ध भीषण विद्रोह किया। कानपुर में अंग्रेजों की पराजय के बाद जब ब्रिटिश सेना ने भारी कुमुक के साथ पुनः आक्रमण किया, तो भीषण कत्लेआम हुआ। नाना साहब पराजित होकर नेपाल के जंगलों की ओर अज्ञातवास में चले गए।
बिठूर के राजमहल का प्रसंग:
नाना साहब जल्दबाजी में अपनी नन्हीं पुत्री 'मैना' को साथ नहीं ले जा सके और वह बिठूर के राजमहल में ही रह गई।
- कानपुर में भीषण रक्तपात करने के बाद अंग्रेजों की सेना प्रतिशोध की ज्वाला में जलती हुई बिठूर पहुँची।
- अंग्रेजों का एकमात्र उद्देश्य था: नाना साहब का वंश और उनकी संपत्ति का नामोनिशान मिटा देना!
- अंग्रेज सैनिकों ने राजमहल को लूट लिया, किंतु जब वे तोपों से महल को उड़ाने की तैयारी करने लगे, तभी महल के बरामदे में एक अत्यंत सुंदर और सुकुमार बालिका आकर खड़ी हो गई।