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झारखण्ड बोर्ड (JAC) • कक्षा 9 • Hindi • अध्याय 15
अनुमानित समय: 45 Mins
प्रगति: अध्ययनरत

Mere Sang Ki Auraten

'मेरे संग की औरतें' समकालीन हिंदी कथा साहित्य की मूर्धन्य लेखिका मृदुला गर्ग द्वारा रचित एक अत्यंत रोचक, आत्मीय और विचारोत्तेजक संस्मरणात्मक गद्य रचना है। इसमें लेखिका ने अपने परिवार की चार पीढ़ियों की उन स्वतंत्रचेता महिलाओं—अपनी नानी, माँ, परदादी, चार बहनों और स्वयं—का सजीव चित्रण किया है जिन्होंने समाज की परंपरागत रूढ़ियों को तोड़ते हुए अपनी निजी स्वतंत्रता और स्वाभिमान को कभी नहीं छोड़ा। इस पाठ की सबसे बड़ी खूबी यह है कि ये औरतें किसी मंच पर भाषण देने वाली या क्रांति का नारा लगाने वाली फेमिनिस्ट नहीं थीं, बल्कि इन्होंने अपने घरेलू जीवन में ही पारंपरिक सीमाओं को बिना किसी टकराव या ढोंग के शांतिपूर्वक तोड़ा। वे 'लीक पर चलने' के बजाय अपनी शर्तों पर जिएं और अपनी आने वाली पीढ़ियों को भी आत्मनिर्भरता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अमूल्य संस्कार दिया। इस विस्तृत अध्ययन सामग्री में JAC बोर्ड कक्षा 9 के विद्यार्थियों के लिए निम्नलिखित आयाम समाहित हैं: संस्मरण विधा एवं लेखिका परिचय: मृदुला गर्ग का साहित्यिक योगदान और संस्मरणात्मक शिल्प। नानी का चरित्र: अनपढ़ और पर्दानशीं होकर भी स्वतंत्रता सेनानी प्यारेलाल शर्मा को बुलाकर अपनी बेटी की शादी का क्रांतिकारी फैसला लेना। माँ का अनूठा व्यक्तित्व: नाजुक, खादी की साड़ी पहनने वाली, घर का काम न करने वाली, कभी झूठ न बोलने वाली और किताबों व संगीत में लीन रहने वाली माँ। परदादी का असाधारण कदम: कुल की परंपरा को तोड़ते हुए भगवान से पहली संतान के रूप में 'लड़की' माँगना और घर में घुसे चोर का हृदय-परिवर्तन कर उसे खेती में लगाना। पाँचों बहनों और भाई का जीवन: मंजुल भगत, मृदुला गर्ग, चित्रा, अचला, रेणु—सभी का लीक से हटकर चलना और साहित्य-सृजन में उल्लेखनीय पहचान बनाना। कर्नाटक के बागलकोट में स्कूल खोलना: लेखिका द्वारा शिक्षा के प्रसार के लिए समाज और कैथोलिक बिशप की संकीर्णता से जूझना और बच्चों के लिए स्कूल की स्थापना करना।

जब परदादी ने भगवान से माँगी 'लड़की' और चोर को बना लिया अपना 'बेटा'!

जिस समाज में लोग हमेशा पहला बच्चा 'बेटा' होने की मन्नतें माँगते थे, उस रूढ़िवादी जमाने में एक परदादी ने खुलेआम मंदिर जाकर भगवान से प्रार्थना की—"हे भगवान! मेरी बहू के गर्भ से जो पहली संतान हो, वह लड़की ही होनी चाहिए!" और जब एक रात उनके कमरे में एक चोर घुस आया, तो दादी ने न शोर मचाया, न पुलिस बुलाई; बल्कि चोर से लोटा मँगवाकर आधा पानी खुद पिया और आधा चोर को पिलाकर कहा—"अब हम दोनों माँ-बेटे हुए, अब चाहे तू चोरी कर या खेती!" चोर ने उसी रात से चोरी छोड़ दी और ईमानदार किसान बन गया। मृदुला गर्ग का ननिहाल और ससुराल ऐसे ही अद्भुत, विद्रोही और स्वाभिमानी किरदारों से भरा था जो दुनिया की परवाह किए बिना अपनी मर्जी से जीते थे!

यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है

  1. स्त्री-सशक्तिकरण का स्वाभाविक और व्यावहारिक रूप: बिना किसी प्रदर्शन या हिंसक विरोध के घर की चारदीवारी में भी अपनी स्वतंत्रता और स्वाभिमान को अक्षुण्ण रखने का आदर्श।
  2. पारिवारिक संस्कारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का महत्व: लेखिका का परिवार दिखाता है कि बच्चों को बिना किसी दबाव के अपनी प्रतिभा और रुचि के अनुसार जीने की छूट देने से वे कितने सशक्त बनते हैं।
  3. संस्मरण विधा की उत्कृष्ट बानगी: रोचक किस्सागोई, व्यंग्य, आत्मीयता और यथार्थपरक चित्रण का अद्भुत समन्वय।
  4. JAC बोर्ड परीक्षा में सर्वाधिक अंकदायी पाठ: नानी के देशभक्तिपूर्ण निर्णय, माँ की चारित्रिक विशेषताओं, दादी के चोर प्रसंग और बागलकोट के स्कूल पर 5 से 8 अंक के प्रश्न हर वर्ष पूछे जाते हैं।

अध्ययन से पूर्व (आवश्यक ज्ञान)

  • संस्मरण (Memoir) विधा की समझ (स्मृतियों पर आधारित वास्तविक घटनाओं और व्यक्तियों का आत्मीय अंकन)।
  • पारंपरिक भारतीय संयुक्त परिवार की संरचना और तत्कालीन सामाजिक मान्यताओं (लड़का-लड़की भेद, पर्दा-प्रथा) का ज्ञान।
  • मृदुला गर्ग की सहज, व्यंग्यपूर्ण और प्रवाहपूर्ण गद्य शैली से परिचय।

इस अध्याय के लक्ष्य

  • लेखिका की नानी के व्यक्तित्व और उनकी आजादी के प्रति गहरी निष्ठा का सटीक मूल्यांकन कर पाना।
  • लेखिका की माँ की उन विशेषताओं को स्पष्ट करना जिनके कारण वे सामान्य गृहिणियों से सर्वथा भिन्न थीं।
  • परदादी द्वारा लड़की माँगने और चोर के हृदय परिवर्तन वाले प्रसंग के मनोवैज्ञानिक आधार को समझाना।
  • पाँचों बहनों के स्वतंत्र और विद्रोही स्वभाव का उदाहरण सहित विश्लेषण करना।
  • JAC बोर्ड परीक्षा में पूछे जाने वाले सभी दीर्घ-उत्तरीय और चरित्र-चित्रण संबंधी प्रश्नों के आदर्श उत्तर लिखना।

अध्याय रूपरेखा एवं प्रगति

1 1. लेखिका परिचय एवं संस्मरण विधा
2 2. नानी की आजादी की दीवानगी और ऐतिह...
3 3. माँ का अनुपम व्यक्तित्व: नाजुक,...
4 4. परदादी की मन्नत और चोर का हृदय-प...
5 5. पाँचों बहनें, भाई और बागलकोट में...

सम्पूर्ण सैद्धांतिक एवं वैचारिक अध्ययन

1. लेखिका परिचय एवं संस्मरण विधा

मृदुला गर्ग (जन्म: 1938):

समकालीन हिंदी साहित्य की सशक्त कथाकार मृदुला गर्ग का जन्म कोलकाता (पश्चिम बंगाल) में हुआ था।

  • उन्होंने अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर (M.A.) किया और अध्यापन कार्य किया, किंतु बाद में स्वतंत्र लेखन को ही अपना जीवन-लक्ष्य बनाया।
  • उनके प्रमुख उपन्यासों में 'उसके हिस्से की धूप', 'चित्तकोबरा', 'अनित्य', 'कठगुलाब' और 'मिलजुल मन' (जिस पर 2013 में प्रतिष्ठित साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला) अत्यंत लोकप्रिय हैं।
  • कहानी-संग्रहों में 'कितनी कैदें', 'टुकड़ा-टुकड़ा एक आदमी', 'ग्लेशियर से' आदि प्रसिद्ध हैं।

संस्मरण विधा:

संस्मरण का अर्थ है सम्यक् स्मृति। जब कोई लेखक अपने जीवन में आए विशिष्ट व्यक्तियों, पारिवारिक प्रसंगों और प्रेरक अनुभवों को पूरी ईमानदारी, आत्मीयता और कलात्मकता के साथ लिपिबद्ध करता है, तो उसे 'संस्मरण' कहते हैं। 'मेरे संग की औरतें' में लेखिका ने अपनी नानी, माँ और बहनों के जीवन की सच्चाई को बिना किसी लाग-लपेट के प्रस्तुत किया है।

2. नानी की आजादी की दीवानगी और ऐतिहासिक निर्णय

नानी का पारंपरिक स्वरूप:

लेखिका ने अपनी नानी को कभी देखा नहीं था, क्योंकि लेखिका की माँ के विवाह से पहले ही नानी की मृत्यु हो गई थी।

  • नानी अनपढ़, पारंपरिक और पर्दानशीं (घूँघट में रहने वाली) महिला थीं।
  • उनके पति (लेखिका के नाना) कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से विलायती बैरिस्टरी पढ़कर आए थे और पूरी तरह अंग्रेजी रंग-ढंग, विलायती खान-पान और रहन-सहन में रंगे हुए थे।
  • नानी ने कभी अपने पति के अंग्रेजियत वाले जीवन में न तो दखल दिया और न ही अपनी सादगी और भारतीय संस्कारों को छोड़ा। वे अपने कमरे में अपनी पारंपरिक जीवन-शैली में जीती रहीं।

नानी का क्रांतिकारी निर्णय:

जब नानी को अपनी मृत्यु सन्निकट (निकट) दिखाई दी, तो वे अपनी पंद्रह वर्षीया एकमात्र बेटी (लेखिका की माँ) के विवाह को लेकर अत्यंत चिंतित हो उठीं।

  1. पर्दा त्यागकर प्यारेलाल शर्मा से भेंट: नानी ने जीवन भर जिस पति से खुलकर बात नहीं की थी, मृत्यु-शय्या पर उन्होंने पति के घनिष्ठ मित्र स्वतंत्रता सेनानी पं. प्यारेलाल शर्मा से मिलने की जिद की।
  2. वचन माँगना: जब प्यारेलाल शर्मा कमरे में आए, तो नानी ने पर्दा हटाकर कहा—"मेरी बेटी के लिए वर आप तय करेंगे। मेरे पति तो अंग्रेजों के भक्त हैं, वे किसी साहब के बेटे से शादी करा देंगे। लेकिन मैं चाहती हूँ कि मेरी बेटी की शादी किसी सच्चे स्वतंत्रता सेनानी (देशभक्त) से हो!"
  3. व्यक्तित्व का प्रभाव: नानी का यह कदम दिखाता है कि वे भले ही घर की चारदीवारी में बंद रहीं, पर उनके अंतर्मन में देश की आजादी और स्वाभिमान की लौ धधक रही थी। इसी निर्णय के कारण लेखिका की माँ का विवाह एक आई.सी.एस. अफसर के बजाय एक देशभक्त, ईमानदार और खादीधारी युवक से हुआ।

3. माँ का अनुपम व्यक्तित्व: नाजुक, सत्यनिष्ठ और साहित्य-प्रेमी

एक गैर-पारंपरिक गृहिणी:

लेखिका की माँ सामान्य भारतीय माताओं की तरह नहीं थीं:

  1. घर के काम और खाना पकाने से दूर: वे शारीरिक रूप से बहुत नाजुक थीं। खादी की भारी साड़ी भी उनसे संभलती नहीं थी; कमर चटक जाती थी। इसलिए ससुराल वालों ने उनसे कभी झाड़ू-पोछा या रसोई बनाने की अपेक्षा नहीं की।
  2. किताबों, संगीत और साहित्य में लीन: वे अपना अधिकांश समय किताबें पढ़ने, संगीत सुनने और साहित्य-चर्चा करने में बिताती थीं। वे घर में रहकर भी एक बौद्धिक जीवन जीती थीं।

माँ के प्रति परिवार का अपार आदर:

घर में कोई काम न करने के बावजूद ससुराल और मायके में उनका अत्यधिक आदर था, जिसके दो प्रमुख कारण थे:

  • वे कभी झूठ नहीं बोलती थीं: उनका सत्य इतना अटूट था कि हर कोई उनके शब्दों पर आँख मूँदकर विश्वास करता था। घर के महत्वपूर्ण मामलों में उनसे राय ली जाती थी और उनकी राय को पत्थर की लकीर माना जाता था।
  • वे किसी की गोपनीय बात दूसरे पर प्रकट नहीं करती थीं: अगर कोई अपना दुख या रहस्य उन्हें बताता, तो वह बात उनके दिल में ही दफन रहती थी। इसी कारण घर वाले उनका आदर करते थे और बाहर वाले उन्हें अपना सच्चा मित्र मानते थे।
  • उन्होंने कभी अपने बच्चों पर मातृत्व का रौब नहीं जमाया; उन्हें पूरी तरह आत्मनिर्भर और स्वतंत्र रहने दिया।

4. परदादी की मन्नत और चोर का हृदय-परिवर्तन

लीक से हटकर पहली संतान 'लड़की' माँगना:

लेखिका की परदादी भी परंपरावादी लीक से कोसों दूर थीं:

  • जब लेखिका की माँ पहली बार गर्भवती हुईं, तो परदादी ने मंदिर जाकर खुलेआम भगवान से यह मन्नत माँगी कि उनकी पतोहू (बहू) की पहली संतान 'कन्या' (लड़की) ही हो!
  • जब लोगों ने आश्चर्य से पूछा, तो उन्होंने कहा कि मुझे कुल की रवायतों से कोई लेना-देना नहीं। भगवान ने उनकी प्रार्थना ऐसी सुनी कि एक के बाद एक घर में पाँच कन्याएं पैदा हुईं।

चोर और दादी का हास्य-रोमांचक प्रसंग:

एक बार घर के सभी पुरुष किसी विवाह के सिलसिले में बारात में गए हुए थे और औरतें 'रतजगा' (रात भर जागकर नाच-गाना) कर रही थीं।

  1. शोर-शराबे से बचने के लिए दादी दूसरे कमरे में सो रही थीं। तभी दीवार में सेंध लगाकर एक चोर कमरे में घुस आया।
  2. खटपट सुनकर दादी की आँख खुल गई। उन्होंने पूछा—"कौन?" चोर घबराकर बोला—"जी, मैं!" दादी ने कहा—"मुझे प्यास लगी है, लोटा कुएँ से पानी भर ला।"
  3. चोर जब पानी लेकर आया तो दादी ने आधा लोटा पानी पी लिया और बाकी आधा लोटा चोर के मुँह से लगाते हुए कहा—"लो, अब हम दोनों माँ-बेटे हो गए! अब चाहे तू चोरी कर या खेती कर!"
  4. बूढ़ी दादी के इस अप्रत्याशित वात्सल्य, विश्वास और आत्मीयता ने चोर की अंतरात्मा को झकझोर दिया। उसने चोरी का धंधा हमेशा के लिए छोड़ दिया और खेत में हल चलाने लगा।

5. पाँचों बहनें, भाई और बागलकोट में स्कूल की स्थापना

पाँचों बहनों का स्वतंत्र स्वभाव:

लेखिका के परिवार में पाँच बहनें और एक भाई थे, और सभी ने परंपराओं की लीक को तोड़ा:

  1. मंजुल भगत (बड़ी बहन): घर का नाम रानी; हिंदी की सुप्रसिद्ध लेखिका बनीं।
  2. मृदुला गर्ग (स्वयं लेखिका): घर का नाम उमा; प्रसिद्ध उपन्यासकार और कहानीकार।
  3. चित्रा (तीसरी बहन): उसने तय किया कि वह जिससे शादी करेगी, उसी से करेगी और उसने अपनी पसंद के युवक से ही विवाह किया।
  4. रेणु (चौथी बहन): सबसे अधिक जिद्दी और स्वाभिमानी। बी.ए. केवल पिता का मन रखने के लिए किया। बारिश में गाड़ी होने पर भी पैदल स्कूल जाती थी।
  5. अचला (पाँचवीं बहन): पहले पत्रकारिता की और फिर अंग्रेजी व हिंदी दोनों में सफल लेखन किया।
  6. भाई राजीव: उन्होंने भी हिंदी साहित्य में लेखन किया।

कर्नाटक के बागलकोट में स्कूल की स्थापना:

शादी के बाद जब लेखिका बिहार के डालमिया नगर से कर्नाटक के एक छोटे कस्बे 'बागलकोट' पहुँचीं, तो वहाँ उनके दो बच्चों के पढ़ने के लिए कोई अच्छा स्कूल नहीं था।

  • लेखिका ने पास के कैथोलिक मिशन के बिशप से प्रार्थना की कि वे वहाँ एक प्राथमिक स्कूल खोल दें।
  • बिशप ने यह कहकर मना कर दिया कि वहाँ क्रिश्चियन आबादी कम है, इसलिए वे गैर-क्रिश्चियनों के लिए स्कूल नहीं खोल सकते।
  • लेखिका ने हार नहीं मानी। उन्होंने स्थानीय नागरिकों, व्यापारियों और अधिकारियों को संगठित किया और स्वयं एक गैर-धार्मिक प्राथमिक स्कूल शुरू किया!
  • उन्होंने उस स्कूल को कर्नाटक सरकार से विधिवत मान्यता भी दिलाई। यह प्रसंग सिद्ध करता है कि दृढ़ इच्छाशक्ति वाली महिला अकेले ही समाज में क्रांति ला सकती है।

महत्वपूर्ण काव्य-सिद्धांत, भावार्थ एवं व्याकरण सूत्र

पाठ की विधा एवं लेखिका
विधा: संस्मरण (Memoir); लेखिका: मृदुला गर्ग (साहित्य अकादमी पुरस्कृत उपन्यासकार 'मिलजुल मन')।
प्रमुख महिला चरित्र एवं विशेषताएँ
नानी: पर्दानशीं परंतु स्वाधीनता की समर्थक; माँ: सत्यनिष्ठ, निष्पक्ष, साहित्य-प्रेमी; परदादी: लीक से परे (कन्या मन्नत व चोर-सुधारक); बहनें: स्वाभिमानी, जिद्दी व लेखिकाएं।
पाठ का केंद्रीय संदेश
नारी स्वतंत्रता मंच के भाषणों से नहीं, बल्कि अपनी शर्तों पर स्वाभिमानपूर्वक जीने और रूढ़ियों को शांतिपूर्वक तोड़ने से सिद्ध होती है।

अवधारणात्मक हल उदाहरण एवं अनुप्रयोग (Solved Examples)

उदाहरण 1
लेखिका ने अपनी नानी को कभी देखा भी नहीं, फिर भी वह उनके व्यक्तित्व से क्यों प्रभावित थीं? (JAC Board High-Yield Question)
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: लेखिका ने अपनी नानी को कभी नहीं देखा था क्योंकि उनकी माँ के विवाह से पहले ही नानी का देहांत हो गया था। इसके बावजूद लेखिका उनके व्यक्तित्व से निम्नलिखित कारणों से अत्यंत प्रभावित थीं:

  1. आजादी के प्रति अगाध प्रेम: नानी भले ही अनपढ़ और घूँघट में रहने वाली महिला थीं, किंतु उनके मन में देश की स्वाधीनता के प्रति अटूट निष्ठा थी।
  2. साहसी और क्रांतिकारी निर्णय: जब उनके पति विलायती जीवन शैली के प्रभाव में थे, तब नानी ने अपनी मृत्यु से पहले पर्दा त्यागकर स्वतंत्रता सेनानी पं. प्यारेलाल शर्मा को बुलाया और उनसे अपनी बेटी की शादी किसी देशभक्त से कराने का वचन लिया।
  3. बिना दिखावे का स्वाभिमान: नानी ने कभी अपने पति के विलायती तौर-तरीकों में दखल नहीं दिया, किंतु अपने जीवन और संस्कारों से भी कभी समझौता नहीं किया। उनका यह मूक, दृढ़ और स्वाभिमानी व्यक्तित्व लेखिका को गहराई से प्रेरित करता था।
उदाहरण 2
लेखिका की माँ परंपरा का निर्वाह न करते हुए भी सबके दिलों पर राज करती थीं। उनके व्यक्तित्व की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिए। (NCERT अभ्यास प्रश्न)
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: लेखिका की माँ सामान्य भारतीय गृहिणियों की तरह न तो खाना पकाती थीं और न ही घर-गृहस्थी के रोजमर्रा के कामों में रुचि लेती थीं। फिर भी परिवार और समाज में उनका गहरा सम्मान था, जिसके प्रमुख कारण निम्नलिखित थे:

  1. सत्यनिष्ठा (सदा सच बोलना): वे कभी झूठ नहीं बोलती थीं। उनका सत्य इतना पारदर्शी था कि परिवार का हर सदस्य उनके वचनों पर पूर्ण विश्वास करता था और महत्वपूर्ण निर्णयों में उनकी राय अंतिम मानी जाती थी।
  2. गोपनीयता की रक्षा: वे किसी की कही हुई निजी या गुप्त बात को कभी किसी तीसरे व्यक्ति पर प्रकट नहीं करती थीं। इस निष्पक्षता के कारण बाहर के लोग उन्हें अपना सच्चा और विश्वसनीय मित्र मानते थे।
  3. बौद्धिक एवं साहित्यिक अभिरुचि: वे अपना अधिकांश समय अध्ययन, पुस्तकें पढ़ने, शास्त्रीय संगीत सुनने और साहित्यिक चर्चाओं में बिताती थीं।
  4. बच्चों को स्वतंत्रता देना: उन्होंने कभी अपने बच्चों पर अधिकार जताने या उनके निर्णयों में बाधा डालने की कोशिश नहीं की, जिससे बच्चों में आत्मनिर्भरता का विकास हुआ।
उदाहरण 3
परदादी ने अपने परिवार के लिए भगवान से क्या अनूठी मन्नत माँगी और इसका क्या परिणाम हुआ?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: परदादी समाज की परंपरागत सोच से बिल्कुल अलग थीं:

  1. लड़की की मन्नत: जिस युग में हर कोई वंश चलाने के लिए पहले पुत्र की कामना करता था, उस समय परदादी ने मंदिर जाकर खुलेआम भगवान से यह प्रार्थना की कि उनकी पतोहू (बहू) की पहली संतान 'कन्या' (लड़की) के रूप में जन्म ले।
  2. मन्नत का परिणाम: भगवान ने परदादी की इस प्रार्थना को इतनी गहराई से स्वीकार किया कि लेखिका की माँ के गर्भ से एक के बाद एक पाँच पुत्रियों (मंजुल, मृदुला, चित्रा, रेणु, अचला) का जन्म हुआ।
  3. रूढ़ि पर प्रहार: परदादी की इस मन्नत ने न केवल परिवार बल्कि पूरे समाज को यह कड़ा संदेश दिया कि बेटियाँ बेटों से किसी भी रूप में कम नहीं होतीं और परिवार में उनका स्वागत गर्व के साथ किया जाना चाहिए।
उदाहरण 4
दादी और चोर के प्रसंग का वर्णन कीजिए। दादी ने चोर का हृदय-परिवर्तन किस प्रकार किया?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: दादी और चोर का प्रसंग अत्यंत मनोवैज्ञानिक और प्रेरक है:

  1. कमरे में चोर का प्रवेश: विवाह के रतजगे की रात जब सभी लोग उत्सव में व्यस्त थे, एक चोर दीवार में सेंध लगाकर उस कमरे में घुस आया जहाँ दादी अकेली सो रही थीं।
  2. दादी की शांत प्रतिक्रिया: आहट सुनकर दादी घबराई नहीं। उन्होंने चोर को डांटने या शोर मचाने के बजाय शांत भाव से कहा कि मुझे बहुत तेज प्यास लगी है, कुएँ से लोटा भरकर पानी लाओ।
  3. आत्मीयता का स्पर्श: चोर जब कांपते हाथों से पानी लाया, तो दादी ने आधा पानी खुद पिया और बाकी आधा पानी चोर को पिला दिया।
  4. माँ-बेटे का रिश्ता और हृदय-परिवर्तन: पानी पिलाकर दादी ने कहा—"अब हम दोनों माँ-बेटे हो गए; अब चाहे तू चोरी कर या खेती कर!" दादी के इस असीम विश्वास, मातृत्व और सम्मान ने चोर की आत्मा को झकझोर दिया। उसने उसी क्षण चोरी का रास्ता हमेशा के लिए छोड़ दिया और जीवन भर ईमानदारी से खेती करने लगा।
उदाहरण 5
कर्नाटक के बागलकोट में स्कूल खोलने के लिए लेखिका को किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा और उन्होंने सफलता कैसे पाई?
विस्तृत समाधान / उत्तर:

उत्तर: विवाह के बाद जब लेखिका कर्नाटक के छोटे कस्बे बागलकोट पहुँचीं, तो वहाँ उनके बच्चों के लिए कोई अच्छा स्कूल नहीं था:

  1. बिशप की संकीर्णता: लेखिका ने कैथोलिक मिशन के बिशप से स्कूल खोलने की प्रार्थना की। किंतु बिशप ने यह कहकर साफ मना कर दिया कि वहाँ ईसाई आबादी कम है, इसलिए वे गैर-ईसाइयों के लिए स्कूल नहीं चला सकते।
  2. लेखिका का दृढ़ संकल्प: लेखिका इस संकीर्णता से निराश नहीं हुईं। उन्होंने तय किया कि वे अपने बच्चों और अन्य स्थानीय बच्चों को अशिक्षित नहीं रहने देंगी।
  3. जन-सहयोग और स्कूल की स्थापना: लेखिका ने स्थानीय नागरिकों, व्यापारियों और अधिकारियों को एकजुट किया और अपने दम पर एक गैर-धार्मिक (secular) प्राथमिक स्कूल की नींव रखी।
  4. सरकारी मान्यता: उन्होंने निरंतर प्रयास करके उस स्कूल को कर्नाटक सरकार से विधिवत मान्यता भी दिलाई। बाद में उस स्कूल से पढ़कर अनेक बच्चे उच्च शिक्षा में सफल हुए। यह प्रसंग लेखिका की कर्मठता और समाज-सेवा के जज्बे को प्रमाणित करता है।

सामान्य गलतियाँ एवं परीक्षक के जाल (Examiner Traps)

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

नानी को आधुनिक और अंग्रेजी रहन-सहन वाली महिला समझ लेना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

नानी पूरी तरह अनपढ़, पारंपरिक और पर्दानशीं थीं; विलायती रहन-सहन उनके पति (नानाजी) का था। नानी की विशेषता उनका आंतरिक स्वाभिमान और देशभक्ति थी।

सामान्य भ्रम / गलत उत्तर

माँ द्वारा घर का काम न करने को उनका आलस्य या अहंकार समझना।

सही वैज्ञानिक तथ्य

माँ शारीरिक रूप से अत्यधिक नाजुक थीं और उनका रुझान बौद्धिक, साहित्यिक व संगीत साधना में था; उनका सम्मान उनकी सत्यनिष्ठा और निष्पक्षता के कारण था।

मेरे संग की औरतें: चार पीढ़ियों की नारी-चेतना एवं स्वाभिमान

नानी: आजादी की दीवानी • अनपढ़ व पर्दानशीं जीवन • पति: विलायती बैरिस्टर • मृत्यु-शय्या पर क्रांतिकारी कदम • प्यारेलाल शर्मा से बेटी का रिश्ता • देशभक्त दामाद की माँग स्वाभिमान व मौन देशभक्ति माँ: सत्य व निष्पक्षता की मूर्ति • नाजुक देह, खादी की साड़ी • रसोई व घरेलू काम से मुक्ति • सदैव सत्य बोलना (अटूट विश्वास) • किसी का गुप्त भेद न खोलना • संगीत, पुस्तकें व साहित्य-चर्चा घरेलू सीमाओं से परे आदर परदादी व पाँचों बहनें • भगवान से 'कन्या' की मन्नत • चोर को 'बेटा' बना खेती में लगाया • पाँचों बहनें: साहित्य व स्वावलंबन • बागलकोट में स्वयं स्कूल खोलना • अपनी शर्तों पर जीने का संकल्प रूढ़ि-भंजन व सामाजिक क्रांति

अध्याय का सार संक्षेप एवं 10 मुख्य निष्कर्ष

मुख्य बिंदु 1
यह पाठ सुप्रसिद्ध कथाकार मृदुला गर्ग द्वारा अपने परिवार की विशिष्ट स्त्रियों पर लिखा गया रोचक संस्मरण है।
मुख्य बिंदु 2
लेखिका की नानी अनपढ़ और पर्दानशीं थीं, किंतु उनके मन में देश की आजादी के प्रति गहरा आदर था।
मुख्य बिंदु 3
मृत्यु से पूर्व नानी ने पर्दा त्यागकर स्वतंत्रता सेनानी प्यारेलाल शर्मा को बुलाया और अपनी बेटी की शादी किसी देशभक्त से कराने का वचन लिया।
मुख्य बिंदु 4
लेखिका की माँ घर के रोजमर्रा के काम नहीं करती थीं; वे अध्ययन, संगीत और साहित्य में लीन रहती थीं।
मुख्य बिंदु 5
माँ कभी झूठ नहीं बोलती थीं और किसी की गोपनीय बात किसी दूसरे पर प्रकट नहीं करती थीं, जिससे सबका आदर पाती थीं।
मुख्य बिंदु 6
परदादी ने रूढ़िवादी परंपरा को तोड़ते हुए भगवान से अपनी बहू की पहली संतान के रूप में 'लड़की' माँगने की मन्नत माँगी थी।
मुख्य बिंदु 7
दादी ने रात में कमरे में घुसे चोर से पानी मँगवाकर पिया और उसे 'बेटा' मानकर खेती करने की प्रेरणा दी, जिससे चोर सुधर गया।
मुख्य बिंदु 8
पाँचों बहनें (मंजुल भगत, मृदुला गर्ग, चित्रा, रेणु, अचला) और भाई राजीव सभी लीक से हटकर चले और साहित्य-सृजन किया।
मुख्य बिंदु 9
चौथी बहन रेणु अत्यंत जिद्दी और स्वाभिमानी थी, जिसने बारिश में गाड़ी छोड़कर पैदल स्कूल जाकर अपनी धुन पूरी की।
मुख्य बिंदु 10
लेखिका ने कर्नाटक के बागलकोट में बिशप द्वारा मना करने पर स्थानीय सहयोग से स्वयं गैर-धार्मिक स्कूल खोला और मान्यता दिलाई।

स्व-मूल्यांकन अभ्यास (Check Your Understanding)

मूल वैचारिक स्पष्टता की जांच के लिए नैदानिक प्रश्न। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर देखें।

1
लेखिका की नानी ने अपनी मृत्यु से पूर्व स्वतंत्रता सेनानी प्यारेलाल शर्मा से क्या वचन माँगा था?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: B
2
लेखिका की माँ के प्रति परिवार और समाज में अत्यधिक सम्मान होने का मुख्य कारण क्या था?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: C
3
परदादी ने अपनी बहू के गर्भवती होने पर भगवान से क्या मन्नत माँगी थी?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: B
4
कर्नाटक के बागलकोट में स्कूल खोलने के लिए लेखिका ने किसका सहारा लिया?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: C
अध्याय का अध्ययन पूर्ण हुआ?
अभ्यास के लिए तैयार?

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